बिना प्रार्थना पत्र ड्यूटी से नदारद कर्मचारियों का स्पष्टीकरण लेने के दिए निर्देश

क्षेत्रीय विधायक व मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने राजकीय चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल परिसर में पड़ी गंदगी देख मंत्री डा. अग्रवाल ने अस्पताल के अधिकारियों को फटकार लगाई। डा. अग्रवाल ने बिना प्रार्थना पत्र दिए ड्यूटी से नदारद चिकित्सकों व कर्मचारियों का स्पष्टीकरण लेने के लिए भी सीएमएस डा. प्रदीप कुमार चंदोला को निर्देशित किया। इस दौरान डा. अग्रवाल ने मरीजों का हाल भी जाना। साथ ही चिकित्सकों को दवाई अस्पताल से ही लिखने के लिए निर्देशित किया।

मंत्री डा. अग्रवाल ने अचानक राजकीय चिकित्सालय पहुंचे। यहां उन्होंने सर्वप्रथम साफ सफाई का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल परिसर पर पड़े कूड़े-करकट को देख मंत्री डा. अग्रवाल ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने नियमित सुबह व रात्रिकाल में सफाई करने के निर्देश दिए।

डा. अग्रवाल ने इसके बाद चिकित्सकों व कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका जांची। इसपर चिकित्सक व कर्मचारी ड्यूटी पर बिना प्रार्थना पत्र दिए नदारद दिखे। इस पर मंत्री डा. अग्रवाल ने सीएमएस को स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए।

डा. अग्रवाल ने सीएमएस को कहा कि चारधाम यात्रा सिर पर है, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए जाएं। उन्होंने कहा कि साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाएं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी।

डा. अग्रवाल ने कहा कि रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में रोगियों को दवा अस्पताल से ही दी जाएं। बाहर से दवा लिखने की शिकायत पर कार्यवाही की जाएगी।

इस मौके पर सीएमएस डा. प्रदीप कुमार चंदोला, मंडल अध्यक्ष सुमित पंवार, मंडल प्रभारी राजकुमार राज, पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र मोंगा, जिला उपाध्यक्ष प्रतीक कालिया, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बृजेश शर्मा, जिलाध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा सतीश सिंह, मंडल अध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा मनोज जैन, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष जगावर सिंह आदि उपस्थित रहे।
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पांच जनपदों के 38 स्वास्थ्य केन्द्रों पर संचालित की जा रही है शहरी स्वास्थ्य मिशन योजना

राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों में आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में जुटी है। इसी क्रम में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत प्रदेश के पांच जनपदों के 38 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर शहरी गरीब आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। योजना के अंतर्गत पिछले वित्तीय वर्ष में चार लाख से अधिक मरीजों को निःशुल्क उपचार दिया गया जबकि ई-संजीवनी के माध्यम से 1 लाख 16 हजार से अधिक लोगों को टेलीकांसल्टेंसी सुविधा दी गई।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि राज्य में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से प्रदेश के शहरी क्षेत्रों की गरीब आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये दृढ संकल्पित है। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। डॉ. रावत ने बताया कि प्रदेश के पांच जनपदों देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल एवं ऊधमसिंह नगर की शहरी आबादी के लिये राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य सेवाएं संचालित की जा रही है। योजना के तहत 38 शहरी प्राथमिक केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं, जिसमें देहरादून, हरिद्वार, रूड़की एवं हल्द्वानी में लोक निजी सहभागिता (एनजीओ) के माध्यम से प्राथमिक केन्द्र स्थापित किये गये हैं जबकि 11 प्राथमिक केन्द्र राजकीय सहभागिता से संचालित किये जा रहे हैं। इन शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर अप्रैल 2022 से जनवरी 2023 तक चार लाख 19 हजार 714 मरीजों का इलाज किया गया। इसके साथ ही ए.एन.सी. के लिये 23 हजार 456 गर्भवतियों का पंजीकरण कराया गया, जबकि एक लाख 72 हजार 654 विभिन्न पैथालोजी जांच की जा चुकी है। विभागीय मंत्री ने बताया कि शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में भी काम कर रही हैं, जिसमें स्वास्थ्य गतिविधियों के साथ-साथ योग सत्र भी शुरू कर दिये गये हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य केन्द्रों पर ई-संजीवनी रेफरल संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत अबतक 1 लाख 16 हजार 555 टेलीकांसल्टेंसी प्रदान की जा चुकी है। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 1114 महिला आरोग्य समितियां कार्यरत हैं जो शहर की मलिन बस्तियों में महिला स्वास्थ्य जागरूकता, सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन आदि विभिन्न गतिविधियों के संचालन में सहयोग करेंगी। विभागीय मंत्री ने बताया कि प्रदेश में शहरी स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत बेहतर कार्य करने के लिये सेलमपुर, रूड़की के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को वर्ष-2022 के लिये कायाकल्प गुणवत्ता पुरस्कार भी मिल चुका है। इसी योजना के अंतर्गत भूपतवाला, जनपद हरिद्वार तथा मेहूंवाला जनपद देहरादून में 30-30 बेड के शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापित की जा रही है जिसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत यूपीएचसी में निःशुल्क डायग्नोस्टिक सेवाएं भी शुरू कर दी गई है, जिसके तहत 53 जांचों का अतिरिक्त लाभ शहरी गरीब आबादी को मिल सकेगा।

शहरी स्वास्थ्य मिशन के उद्देश्य
सूबे में संचालित शहरी स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत शहरी आबादी में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों की देखभाल, टीकाकरण, ए.एन.सी., पी.एन.सी की सेवाएं देना तथा परिवार कल्याण की स्थाई एवं अस्थाई विधियों हेतु पात्र दम्पतियों संदर्भित करना है। इसके अलावा अपने-अपने क्षेत्रों राष्ट्रीय कार्यक्रमों को संचालित कराना, सभी शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर के रूप में भी संचालित करना है।

कोविड गाइडलाइन की सही जानकारी न होने पर खबर प्रसारित न करेंः राजेश कुमार

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा सोशल मीडिया में यह प्रचारित किया जा रहा है कि उत्तराखंड में पर्यटकों का आरटीपीसीआर टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। जबकि ऐसी कोई गाइडलाइंस जारी नहीं की गई है। राज्य में आने वाले यात्रियों के लिए वर्तमान मे कोविड-19 जांच की कोई बाध्यता नहीं है हालांकि किसी भी प्रकार के लक्षण होने पर नजदीकी स्वास्थ्य सेवा केंद्र में संपर्क किया जाना आवश्यक है। यदि किसी भी व्यक्ति को लक्षण होते हैं तो वह अपनी कोविड-19 जांच करवाएं।
पर्यटकों को किसी प्रकार के घबराने व डरने की जरूरत नहीं है। राज्य में स्थितियां पूरी तरह नियंत्रण में हैं। पर्यटक बिना रोक टोक के राज्य में यात्रा कर सकते हैं।

’भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर मास्क जागरूकता को चलाया जा रहा है अभियान’

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग व स्थानीय प्रसाशन की टीमें आम जनता को जागरूक करने के लिए अभियान चला रही हैं। हम सभी को मास्क पहनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। आम जनमानस को मास्क पहनने वह कोविड-19 एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन किए जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने तथा सतर्कता बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

’एयरपोर्ट व राज्य की सीमाओं पर अभी नहीं होगी सेम्पलिंग’

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा प्रदेश के एयरपोर्ट व सीमाओं पर अभी किसी भी प्रकार की सेम्पलिंग के आदेश नहीं दिए गए हैं। सभी पूर्व की भांति चलता रहेगा। यात्री किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान नहीं दें।

’राज्य में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में’

राज्य में बूस्टर डोज को लेकर अभियान शुरू कर दिया गया है।
यदि किसी व्यक्ति को कोविड-19 की प्रिकॉशनरी डोज नहीं लगी है तो वह शीघ्र अति शीघ्र यह डोज प्राप्त करें। राज्य में कोविड को लेकर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। हमारे पास दवाइयों से लेकर सभी संसाधन पूरे हैं। हम भारत सरकार की गाइडलाइंस को देखकर आगे बढ़ रहे हैं।

कृमि संक्रमण रोकने के लिये जरूरी है दवा का सेवनः रावत

स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज श्री गुरू नानक पब्लिक गर्ल्स इंटर कॉलेज प्रेमनगर देहरादून में बच्चों को कृमिनाशक दवा खिला कर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की पहल पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेशभर में 43.55 लाख बच्चों को कृमि मुक्ति की दवा खिलाई जायेगी। जिसमें स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों की बड़ी भूमिका होगी। इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिये सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को शिक्षा विभाग सहित अन्य रेखीय विभागों से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दे दिये गये हैं।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर आज स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने श्री गुरू नानक पब्लिक गर्ल्स इंटर कॉलेज प्रेमनगर में छात्राओं को कृमि मुक्ति की दवा खिलाई। डॉ0 रावत ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं, बच्चे स्वस्थ रहेंगे तो देश का भविष्य उज्ज्वल होगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश भर के सभी निजी एवं सरकारी स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 01 से लेकर 19 आयु वर्ग के 43.55 लाख बच्चों को प्रशिक्षित शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा कृमिनाशक दवा अल्बेंडाजॉल खिलाई जायेगी। इसके लिये सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को शिक्षा विभाग, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग एवं पंचायतीराज विभाग से समन्वय स्थापित करने को कहा गया है। विभागीय मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के सफल संचालन के लिये 56453 कार्मिकों को तैनात किया गया है। जिसके अंतर्गत 11888 आशाएं, 22815 अध्यापक, 20067 आंगनबाडी कार्यकत्रियां, 2673 एएनएम शामिल है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर दवा खाने से छूट गये बच्चों को 17 अक्टूबर को मॉप-अप दिवस पर कृमिनाशक दवा खिलाई जायेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एल्बेंडाजोल दवा बच्चों को दी जानी अनिवार्य है, ताकि पेट में होने वाले कीड़े या कृमि को खत्म कर बच्चों को स्वस्थ रखा जा सके।

कार्यक्रम में प्रभारी महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ0 विनीता शाह, निदेशक प्राथमिक शिक्षा वंदना गर्ब्याल, निदेशक एनएचएम डॉ0 सरोज नैथानी, सीएमओ देहरादून डॉ0 मनोज उप्रेती सहित विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षक एवं छात्राएं उपस्थित रहे।

स्कूली बच्चों को दी मानसिक रोग से बचाव की शिक्षा

ऋषिकेश गंगा आरती ट्रस्ट ने मानसिक रोग से बचाव को जागरूकता अभियान चलाया। विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को मानसिक रोग से बचाव को जागरूक किया।

ऋषिकेश गंगा आरती ट्रस्ट द्वारा सरस्वती विद्या निकेतन जूनियर हाई स्कूल वीरभद्र में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. ग्रेस सिंह ने विश्व मानसिक रोग दिवस की अवधारणा, स्थापना, मानसिक रोगों के लक्षण, मानसिक रोगों के प्रकार, उनके कारक व उनसे उबरने व बचावों के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि जागरूकता व समय से उचित इलाज ही इस रोग से छुटकारा दिला सकता है। उन्होंने विभिन्न चार्ट व पोस्टरों, प्रश्नोत्तरी, खेल व रोल प्ले द्वारा मानसिक रोगों पर विस्तृत चर्चा की एवं मानसिक रोगों पर विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर बहुत ही सरल भाषा में दिए। प्रिंसिपल विमला रावत ने मानसिक रोगों की जागरूकता को बहुत ही आवश्यक कदम बताया। कहा कि अब समय आ गया ही कि मानसिक रोगों को छुपाने की बजाए उचित उपचार किया जाए। मौके पर ट्रस्ट सचिव सैमुएल हर्बर्ट, अनिता पयाल, पूनम, सावित्री थापा, गिडियन सिंह, रमा घपोला आदि उपस्थित रहे।

चिकित्सा के क्षेत्र में एम्स के ट्रामा रथ की पहल कारगर साबित होगीः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास से एम्स के ट्रामा रथ का फ्लैग ऑफ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एम्स ऋषिकेश द्वारा ट्रामा रथ के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों और अन्य विद्यालयों में जाकर आम लोगों को इस चिकित्सा पद्धति के बारे में जागरूक करने एवं प्रशिक्षित करने का अभियान छेड़ा है, यह सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला राज्य है। चिकित्सा के क्षेत्र में इस तरह की पहल कारगर साबित होंगी।

एसोसिएट प्रो. एम्स ऋषिकेश डॉ. मधुर उनियाल ने कहा कि 11 से 17 अक्टूबर तक ट्रामा सप्ताह के तहत एम्स ऋषिकेश का ट्रामा रथ राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और अन्य विद्यालयों में जाकर छात्र-छात्राओं तथा आम जनमानस को चिकित्सा के प्रति तात्कालिक सहायता और आवश्यक इलाज की जानकारी देगा एवं उन्हें प्रशिक्षित करेगा। यह ट्रामा रथ उत्तराखंड के आम जनमानस में ट्रॉमा चिकित्सा के प्रति जन जागरूकता लाकर उन्हें दुर्घटना के दौरान किस प्रकार से फर्स्ट ऐड दिया जाता है और घायल व्यक्ति की जान कैसे बचाई जा सकती है, इसका प्रशिक्षण देगा। सप्ताह भर तक चलने वाले इस कार्यक्रम के तहत ट्रॉमा रथ अलग अलग दिनों में अलग अलग स्थानों पर एम्स के ट्रॉमा विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करेगा।

इस अवसर पर विधायक सुरेश गड़िया, डॉ. अजय कुमार, डॉ. कमलेश बैरवा, डॉ. पी. सी. मीणा, डॉ. दिनेश पंचाल उपस्थित थे।

यूएचएसडीपी से एनएबीएच एक्रिडिएशन को जुटाये जायेंगे संसाधन

केन्द्र पोषित उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम्स डेवलपमेंट परियोजना के जरिये जिला अस्पतालों की सूरत बदली जायेगी। परियोजना के प्रथम चरण में सूबे के पांच जिला चिकित्सालयों का चयन कर सुधारीकरण का कार्य गतिमान है। जिसके तहत अस्पतालों की गुणवत्ता संवर्द्धन के लिये एनएबीएच स्तरीय मानकों के अनुरूप संसाधन जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं। ताकि आने वाले समय में जिला अस्पतालों को आसानी से एनएबीएच मान्यता मिल सके।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य महानिदेशालय देहरादून में एनएचएम के अंतर्गत केन्द्र पोषित उत्तराखंड हेल्थ सिस्टम्स डेवलपमेंट परियोजना की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के अंतर्गत चयनित पांच जिला चिकित्सालयों अल्मोड़ा, बागेश्वर, रूद्रप्रयाग, चमोली तथा जिला महिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़करण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत चयनित चिकित्सालयों में एनएबीएच स्तरीय मानक पूर्ण करने के लिये गैप एसेसमेंट के आधार पर शासन द्वारा पूर्व में ही डीपीआर अनुमोदित कर लगभग रूपये 74 करोड़ की धनराशि जारी की जा चुकी है। जिसके तहत चयनित जिला चिकित्सालयों में 10 विशेषज्ञ चिकित्सक, 10 स्टॉफ नर्स, 2 लैब टेक्निशियन, एक एक्स-रे टेक्नीशियन तथा एक मैट्रन तैनात किये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा परियोजना के अंतर्गत अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। इस कार्य हेतु रूपये 20 करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर दी गई है जबकि शीर्ष प्रशिक्षण संस्थान आईआईएचएमआर जयपुर एवं एएससीआई हैदराबाद के माध्यम से सीएमओ, सीएमएस व एसीएमओ को कौशल संबर्द्धन हेतु प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी प्रकार चयनित चिकित्सालयों में लोक निजी सहभागिता के अंतर्गत कम्युनिकेशन कार्य योजना एवं डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान भी अपडेट किया जा रहा है। विभागीय मंत्री ने उम्मीद जताई है कि वर्ष 2023 तक परियोजना के पूर्ण क्रियान्वयन पर चयनित जिला चिकित्सालयों में अमूलचूल परिर्वतन देखने को मिलेगा, जिससे चिकित्सालयों को एनएबीएच एक्रिडिएशन कराने में खासी मदद मिलेगी।
समीक्षा बैठक में प्रभारी अधिकारी डॉ0 अमित शुक्ला ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत 50 पदों के सापेक्ष 28 पदों पर तैनाती दे दी गई है। इसी प्रकार स्टॉफ नर्स के स्वीकृत 50 पदों, एक्स-रे टेक्नीशियन तथा मैट्रन के 05 पदों एवं लैब टेक्नीशियन के 10 पदों के सापेक्ष पूर्ण तैनाती कर दी गई है। जबकि अधिकारियों के प्रशिक्षण का कार्य गतिमान है।

बैठक में प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ0 आर0 राजेश, निदेशक एनएचएम डॉ0 सरोज नैथानी, एपीडी यूएचएसडीपी डॉ0 प्रेम लाल, संयुक्त निदेशक पीपीपी डॉ0 अमित शुक्ला, वित्त नियंत्रक बिरेन्द्र कुमार, डॉ0 विपुल विश्वास, डॉ0 राजन अरोड़ा सहित विभगाय अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने दून अस्पताल का किया औचक निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों का हालचाल जाना और फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने मरीजों को दिये जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को परखने के लिए खुद वह भोजन खाया। उन्होंने कहा कि मरीजों की सेवा भगवान की सेवा है। मरीजों के साथ मधुरता से व्यवहार किया जाए तो आधी बीमारी तो वैसे ही दूर हो जाती है। सेवा भाव का होना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिये। स्वच्छ माहौल से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कि इलाज के लिए आने वालों को अधिक इंतजार न करना पड़े। मरीजों के साथ साथ आने वाले उनके तीमारदारों को भी परेशानी न हो। अस्पताल में सभी आवश्यक दवाईयों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने दून अस्पताल में इमरजेंसी वार्डों, आईसीयू एवं डेंगू वार्ड का निरीक्षण किया।

इस अवसर पर सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

स्वास्थ्य विभाग से खबर, राज्य में 6 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक चलेगा जन जागरूकता अभियान

आम लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आगामी 6 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक प्रदेशभर में स्वास्थ्य जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। जिसके तहत कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्से गांव-गांव जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। इसके अलावा टीबी एवं मोतिया बिंद मरीजों का चिन्हिकरण, आयुष्मान योजना की जानकारी देने के साथ ही तम्बाकू मुक्त अभियान के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्रदेश के सभी तेरह जनपदों में विभिन्न श्रेणी के 1071 रिक्त पदों को शीघ्र भरा जायेगा।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने आज स्वास्थ्य महानिदेशालय देहरादून में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने एनएचएम के अंतर्गत विभिन्न श्रेणी के 1071 पदों को न भरे जाने पर हैरानी जताई। उन्होंने एनएचएम के अधिकारियों एवं मुख्य चिकित्साधिकारियों को एक माह के भीतर सभी रिक्त पदों को आउट सोर्स के माध्यम से भरने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में टेक्नीशियन एवं पैरा मेडिकल स्टॉफ की कमी को दूर करने के लिये एनएचएम के तहत स्वीकृत पदों को शीघ्र भरा जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आम लोगों को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आगामी 6 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक प्रदेशभर में स्वास्थ्य जन जागरूकता अभियान चलाया जायेगा। अभियान के तहत प्रदेशभर में तैनात एक हजार से अधिक कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (सीएचओएस) प्रत्येक माह 10-10 गांव में जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे, साथ ही टीबी एवं मोतिया बिंद के मरीजों का चिन्हिकरण भी करेंगे। इसके अलावा आम लोगों को आयुष्मान योजना, तम्बाकू मुक्त एवं टीबी मुक्त उत्तराखंड अभियान की भी जानकारी देंगे।

बैठक में विभागीय मंत्री ने कुमाऊं मण्डल के मुख्य चिकित्साधिकारियों एवं जिला परियोजना प्रबंधक एनएचएम के साथ विभिन्न योजनाओं की जनपदवार समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने सभी सीएमओ को निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो कार्यदायी संस्थाएं डीपीआर के अनुरूप समय पर कार्य नहीं कर पा रही है उनको बदलने की कार्यवाही अमल में लाई जाय। उन्होंने निर्माण कार्यों की यूसी प्रत्येक माह महानिदेशालय एवं शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश भी मुख्य चिकित्साधिकारियों को दिये।

बैठक में महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ0 शैलजा भट्ट, अपर सचिव अमनदीप कौर, निदेशक डॉ0 विनीता शाह, निदेशक कुमाऊं मंडल डॉ0 तारा आर्या, निदेशक एनएचएम डॉ0 सरोज नैथानी, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ0 आशुतोष सयाना, वित्त नियंत्रक खजान चंद पाण्डेय, कुमाऊं मंडल के सीएमओ एवं डीपीएम सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

एक सप्ताह में तैनात करने होंगे प्रभारी एसीएमओ
स्वास्थ्य मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य महानिदेशक को विभिन्न जनपदों में एसीएमओ के रिक्त पदों पर एक सप्ताह के भीतर प्रभारी एसीएमओ तैनात करने के निर्देश दिये है। उन्होंने कहा कि जनपद स्तर पर कार्यां की अधिकता एवं केन्द्र पोषित योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के लिये एसीएमओ की तैनाती की जानी अति आवश्यक है। उन्होंने महानिदेशक को विभाग में लम्बे समय से रिक्त पदोन्नति के पदों को भी शीघ्र डीपीसी करा कर भरने के निर्देश दिये।

एनएचएम के अंतर्गत विभिन्न जनपदों में रिक्त हैं ये पद
देहरादूनः राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्रदेश के 13 जनपदों में विभिन्न श्रेणी के 1071 रिक्त पदों को आउट सोर्स के माध्यम से भरा जायेगा। जिनमें सर्विस डिलीवरी के तहत एएनएम, स्टॉफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, मेडिकल ऑफिसर, विशेषज्ञ चिकित्सक, सीएचओ, आयुष चिकित्सक, कॉउंसलर एवं अन्य सेवाओं के 960 तथा प्रोग्राम मैनेजमेंट के अंतर्गत एसपीएमयू, एसएचएसआरसी, डीपीएमयू तथा बीपीएमयू के 111 पद रिक्त हैं। निदेशक एनएचएम डॉ0 सरोज नैथानी ने बताया कि सभी रिक्त पदों को एनएचएम की आउट सोर्स एजेंसी टी एंड एम के माध्यम से जनपदवार भरा जायेगा। इसके लिये अभ्यर्थियों को संबंधित एजेंसी की अधिकृत बेवसाइट www.tnmhr.com पर आवेदन करना होगा। इसके उपरांत जनपद स्तरीय कमेटी द्वारा अर्हता पूर्ण करने वाले अभ्यर्थियों का चयन किया जायेगा।

एम्स ऋषिकेश की कार्यप्रणाली से अवगत हुए मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एम्स, ऋषिकेश में आयोजित बैठक में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री को ऋषिकेश एम्स द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्य, जन सेवा कार्यों, एम्स में मौजूद डॉक्टर, फैकल्टी, छात्रों एवं एडमिट मरीजों की संख्या, विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में अवगत करवाया गया।

एम्स कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि ऐम्स ऋषिकेश में आधुनिक तकनीकी के माध्यम से मरीजों का इलाज किया जा रहा है, उन्होंने कहा एम्स ऋषिकेश में हेली सर्विस के माध्यम से दूरदराज पहाड़ों से गंभीर मरीजों को इलाज हेतु लाया जाता है उत्तराखंड राज्य के साथ ही अन्य राज्य से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज हेतु एम्स ऋषिकेश आते हैं। प्रो. मीनू सिंह ने कहा की आने वाले समय में एम्स ऋषिकेश ड्रोन के माध्यम से दूरदराज पहाड़ी इलाकों में आवश्यक दवाइयों को पहुंचाने का कार्य भी करेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एम्स ऋषिकेश को आपदा प्रबंधन विभाग के साथ समन्वय बनाने की बात कही, उन्होंने कहा आपदाओं के दौरान एम्स ऋषिकेश अपनी अहम भूमिका निभाता आया है, आपदा पीड़ित लोगों को जल्दी इलाज मिल सके इसके लिए राज्य सरकार एवं एम्स ऋषिकेश में आपसी समन्वय होना जरूरी है। उन्होंने कहा उत्तराखंड राज्य के विभिन्न जगहों पर डॉक्टरों द्वारा कैंप लगाए जाएं, जिससे गांव में ही मरीजों के इलाज मिल सके । मुख्यमंत्री ने एम्स ऋषिकेश के विस्तार हेतु राज्य सरकार द्वारा हर संभव मदद किए जाने की बात कही।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट संजीव मित्तल, प्रो. जया चतुर्वेदी, प्रो. मनोज गुप्ता एवं अन्य लोग मौजूद रहे।