कोरोना केसों में बड़ा उछाल, आज मिले 282 नए मरीज

उत्तराखंड में कोरोना के 282 नए मरीज मिले और 223 ठीक हुए। इसके बाद एक्टिव मरीजों की संख्या 1180 हो गई है। राज्य में कोरोना संक्रमण की दर 13.08 प्रतिशत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के अनुसार मंगलवार को देहरादून में 137, नैनीताल में 35, अल्मोड़ा में 18, बागेश्वर में एक, हरिद्वार में 22, पौड़ी में तीन, रुद्रप्रयाग में दो, टिहरी में 19, यूएस नगर में 32 और उत्तरकाशी जिले में 13 मरीजों में कोरोना वायरस की पुष्ठि हुई है। राज्य के विभिन्न अस्पतालों से 2699 सैंपल जांच के लिए भेजे गए जबकि 1874 सैंपल की जांच रिपोर्ट आई है। राज्य में संक्रमण की दर 13 प्रतिशत से अधिक हो गई है जबकि मरीजों के ठीक होने की दर 94 प्रतिशत रह गई है। कोरोना के बढ़ते केसों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन करें।

आधुनिक टेक्नोलॉजी से युक्त एंबुलेंस को सीएम ने दिखाई हरी झंडी

मुख्यमंत्री आवास में स्धित कैंप कार्यालय में आज सुबह सीएसआर के तहत डिक्सन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड द्वारा उत्तराखंड सरकार को आधुनिक टेक्नोलॉजी से युक्त दो ट्रैवलर एंबुलेंस प्रदान की गईं।

एंबुलेंस की सेवाओं को आम जनता तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत और डिक्सन टेक्नोलॉजीज के सीईओ राजीव लोनियाल भी मौजूद थे।

भारत सरकार ने राज्य के दो प्रमुख अस्पतालों की सेवाओं को किया प्रमाणीकृत

भारत सरकार द्वारा उत्तराखण्ड के दो प्रमुख अस्पतालों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रमाणीकृत (Cetrification) किया गया है। स्वास्थ्य सचिव डा० पंकज कुमार पाण्डेय ने बताया कि एस०पी०एस चिकित्सालय ऋषिकेश तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रायपुर में प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का भारत सरकार की टीम द्वारा आंकलन पश्चात इन दोनो अस्पतालों की विशिष्ट सेवाओं को प्रमाणीकृत किया गया है।

ज्ञातव्य है कि सरकारी अस्पतालों में खराब स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत Quality Assurance कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकारी अस्पतालों की सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि समान्य जनमानस का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर विश्वास हो सके और उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए अस्पताल प्रतियोगिता की भावना के साथ कार्य कर सकें।

Quality Assurance कार्यक्रम के माध्यम से अस्पताल द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न सुविधाओं का मूल्यांकन स्वय अस्पताल के स्टॉफ, जनपद एवं राज्य की टीम द्वारा किया जाता है। मूल्यकान उपरान्त सुविधाओं की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की कमी के होने पर उसमे तुरन्त सुधार कर सुविधाओं में गुणात्मक सुधार लाने की पहल की जाती है।

स्वास्थ्य सचिव उत्तराखण्ड को भारत सरकार द्वारा प्रेषित पत्र में उल्लेख किया गया है कि एस0पी0एस0 चिकित्सालय ऋषिकेश में संचालित 6 विभागों द्वारा गुणवत्ता के सभी मानकों को पूर्ण किया गया है जिसके क्रम में इन विभागों को 90% स्कोर के साथ NQAS Certification (National Quality Assurance Standards) किया गया है।

इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रायुपर तथा एस०पी०एस० चिकित्सालय ऋषिकेश के लेबर रूम की सुविधाओं को LaQshya Certification प्रदान किया गया है। LaQshya Certification के तहत एस०पी०एस० चिकित्सालय ऋषिकेश में संचालित प्रसूति विभाग की ओ0टी0 (Maternity OT) को भी गुणवत्ता के लगभग सभी मानक पूर्ण करने पर LaQshya Certification निर्धारित शर्तों के अन्तर्गत दिया गया है।

राज्य की दो प्रमुख चिकित्सा ईकाईयों को भारत सरकार द्वारा NQAS & LaQshya Certification दिए जाने के लिए स्वास्थ्य सचिव डा० पंकज कुमार पाण्डेय ने संबंधित अस्पतालों के चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टॉफ तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की स्टेट टीम को बधाई दी है।

मिशन स्माईल अभियान के तहत एम्स ऋषिकेश में 60 बच्चों के निशुल्क होंगे कटे होंठ व तालू के ऑपरेशन

एम्स ऋषिकेश में मिशन स्माइल अभियान के तहत कटे होंठ और तालू के निशुल्क आपरेशन किए जाएंगे। संस्थान में बुधवार से चार दिनों तक लगातार ऑपरेशन होंगे। जिनमें मिशन के तहत्र पंजीकृत 60 बच्चों और युवाओं की सर्जरी की जाएगी।

एम्स ऋषिकेश के प्लास्टिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल मागो व चिकित्सक डॉ. देवरति चटोपाध्याय ने बताया कि एम्स संस्थान में 2016 से अब तक 320 मरीजों की सफल सर्जरी की जा चुकी है। यह सभी मरीज बेहतर तरीके से अपनी निजी जिन्दगी जी रहे हैं। बताया कि मिशन स्माइल एक 80 जी- और एफसीआरए पंजीकृत मेडिकल चौरिटेबल ट्रस्ट है, जो कि कटे होंठ, कटे तालू और चेहरे की अन्य विकृतियों के साथ पैदा हुए बच्चों के जीवन को खुशहाल बनाने के लिए निशुल्क सर्जरी की सेवा प्रदान करता है। संस्था इस मुहिम को लेकर समर्पित होकर कार्य कर रही है। संस्था 2002 से मिशन स्माइल के तहत अब तक 61,000 से अधिक कटे होंठ व कटे तालू ग्रस्त रोगियों को मुफ्त चिकित्सा प्रदान कर चुकी है। इस संस्था से एम्स ऋषिकेश वर्ष 2016 से जुड़कर इस तरह के ग्रसित मरीजों की सेवा में जुटा हुआ है। मिशन स्माइल ने इस मिशन के अंतर्गत भारत में अब तक 110 से अधिक चिकित्सा मिशन संचालित किए हैं। एम्स ऋषिकेश में 6 अप्रैल से 9 अप्रैल-2022 तक भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड की सीएसआर पहल के तहत मिशन स्माइल के तहत पंजीकृत 60 बच्चों, युवाओं व अन्य लोगों के कटे होंठ, कटे तालू की मुफ्त सर्जरी की जाएगी। इनमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश आदि प्रांतों के मरीज शामिल हैं। इस चिकित्सा मिशन में प्लास्टिक चिकित्सा विभाग, एनेस्थिसियोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, डेंटिस्ट्री, स्पीच थैरपी और नर्सिंग स्टाफ मिलकर एम्स ऋषिकेश में एक टीम की तरह कार्य करेगी।

देहरादून में सर्वाधिक आज आए कोरोना केस, प्रदेश में आज कुल 218

उतराखंड देहरादून
18-02-2022
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी हेल्थ बुलेटिन उत्तराखंड में कोरोना मरीजों का आंकड़ा पहुंचा 89749
वहीं उत्तराखंड मे 84579 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुये
अभी भी उत्तराखंड में 2076 केस एक्टिव
आज उत्तराखंड में कोरोना के (218) मामले सामने आये।
देहरादून 95
हरिद्वार 27
पौड़ी 08
उतरकाशी 05
टिहरी 04
बागेश्वर 01
नैनीताल 15
अल्मोड़ा 11
पिथौरागढ़ 15
उधमसिंह नगर 12
रुद्रप्रयाग 00
चंपावत 09
चमोली 16
आज कोरोना से मरने वालों की संख्या है 02

हर महीने 2 दिन आयोजित होगा पत्रकारों के लिए निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर

राजधानी देहरादून में विचार एक नई सोच संस्था द्वारा पत्रकारों व उनके परिजनों के लिए निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। उत्तराखंड के जाने-माने फिजीशियन व कॉर्डियोलाजिस्ट डॉ एसडी जोशी देहरादून ने पत्रकारों व उनके परिजनों की स्वास्थ्य जांच कर आवश्यक परामर्श दिया। डॉ एसडी जोशी की मेडिकल टीम द्वारा ईसीजी व शुगर की जांच निशुल्क की गई। जबकि लाइफ केयर पैथोलॉजी सेंटर द्वारा ब्लड की बिभिन्न जांचों पर 60 प्रतिशत छूट प्रदान की गई।
जानकारी के मुताबिक देहरादून के रिस्पना पुल आईएसबीटी रोड़ स्थित प्रसार भारती दूरदर्शन केन्द्र के सामने विचार एक नई सोच संस्था द्वारा पत्रकारों व उनके परिजनों के लिए निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का शुभांरभ समाजसेवी विनोद रावत व डॉ एसडी जोशी ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पत्रकार व उनके परिजन स्वास्थ्य जांच को पहुंचे। स्वास्थ्य शिविर में लगभग 100 के करीब पत्रकारों व उनके परिजनों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इस दौरान 50 के करीब लोगों की ईसीजी जांच, 70 के करीब लोगों की शुगर जांच व 45 करीब पत्रकारों की ब्लड की बिभिन्न जांचे की गई।

हर महीने 2 दिन पत्रकारों के लिए निशुल्क स्वास्थ्य जांच
स्वास्थ्य शिविर के दौरान डॉ एसडी जोशी ने सभी पत्रकारों व उनके परिजनों को कोरोना के साथ ही बिभिन्न सीजनल बीमारियों को लेकर जागरूक किया गया। डॉ एसडी जोशी ने कहा पत्रकारों की दिनर्चया काफी तनावपूर्ण होती है साथ ही बड़ी संख्या में पत्रकार आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं इस लिए समय-समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच नहीं करा पाते हैं। इसलिए उन्होंने पत्रकारों के बेहत्तर स्वास्थ्य को लेकर अभियान शुरू किया है। अब हर माह के पहले व आखिरी शनिवार को पत्रकार के लिए निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करेंगे। इसमें जांचे निशुल्क रहेंगी।

पत्रकारों के स्वास्थ्य को लेकर पॉलिसी बनाए सरकार
निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में बतौर मुख्यअतिथि मौजूद समाजसेवी विनोद रावत ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने सभी पत्रकारों व उनके परिजनों को मास्क वितरित किए। विनोद रावत ने कहा पत्रकार समाज का दर्पण होते हैं वह अपने स्वास्थ्य की परवाह न कर समाजहित में लगातार कार्य करते रहते हैं। कुछ पत्रकारों को छोड़कर बड़ी संख्या में पत्रकार आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। ऐसे में वह अपने व अपने परिवार के स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर नहीं करा पाते हैं। इसलिए सरकार को चाहिए की उसे समय-समय पर पत्रकारों के स्वास्थ्य जांच के लिए कैंप का आयोजन करते रहना चाहिए। सरकारी अस्पताल में व्यवस्था न होने पर यदि कोई पत्रकार अपना या अपने परिजनों का प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाता है तो उसका भुगतान सरकार को करना चाहिए। राज्य सरकार को चाहिए की समाज के चौथे स्तंभ पत्रकारों के स्वास्थ्य को लेकर भी वह एक पॉलिसी लेकर आये। जिससे पत्रकारों के हितों की रक्षा हो सके।

हर जनपद में लगाएंगे स्वास्थ्य शिविर
विचार एक नई सोच संस्था के संचालक राकेश बिजल्वाण ने बताया कि देहरादून से निशुल्क स्वास्थ्य शिविर अभियान की शुरूआत हो गई है। अब उनकी संस्था हर जनपद में पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करेगी। आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में आशीष सकलानी, घनश्याम चन्द्र जोशी, आलोक शर्मा, अमित अमोली, आशीष नेगी, अरूण पांडेय, कपिल थापा, दीपक जुगराण, एसपी सती, विकास कपरवाण, ज्ञान प्रकाश पांडेय, अन्नु, व रूद्रा कैमिस्ट ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

आपको बता दें कि डॉ एसडी जोशी उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवा में एक जाना माना नाम है। सरकारी नौकरी में रहते हुए अधिकतम समय पहाड़ों में सेवा देने वाले डॉ जोशी सेवानिवृत्त होने के बाद लगातार हर माह दुर्गम पर्वतीय इलाकों में निशुल्क हैल्थ लगा रहे हैं। डॉ जोशी ने पत्रकार साथियों से बात करते हुए कहा कि उनका सपना है उत्तराखंड का हर व्यक्ति, परिवार स्वस्थ्य रहे। इसको लेकर वह लगातार प्रयासरत हैं। विचार एक नई सोच संस्था भी उनके इस भगीरथ प्रयास में सहयोगी की भूमिका निभा रहा है।

इंडियन रेड क्रास सोसाइटी ने आपदा प्रभावितों को राहत सामान भेजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में इंडियन रेड क्रास सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने भेंट की। उन्होंने हाल ही में प्रदेश में आयी देवी आपदा से पीड़ितो की मदद के लिये विशेषकर नैनीताल एवं ऊधम सिंह नगर जनपद के आपदा प्रभावितों को बड़ी संख्या में कम्बल, किचन सेट, मच्छर दानी, टेन्ट तथा आवश्यक दवाइया आदि प्रदान की।
रेडक्रास द्वारा प्रदान की गई सामग्री सम्बन्धित जनपदों को रवाना करते हुए मुख्यमंत्री ने रेडक्रास सोसाइटी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पीड़ितो की मदद करना सबसे बड़ी मानव सेवा है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक तथा रेड क्रास सोसाइटी के पदाधिकारी उपस्थित थे।

टीकाकरण अभियान-एम्स ऋषिकेश में 50 हजार डोज लगाई गई

अखिल भारतीय आयुविज्ञान संस्थान, ऋषिकेश के टीकाकरण केंद्र के तत्वावधान में अब तक लोगों को कोविड-19 वैक्सीन की 50,000 डोज लगाई जा चुकी है। शुक्रवार को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण की उपस्थिति में 50,000 वीं डोज लगाई गई। शुक्रवार को एम्स,ऋषिकेश कोविड-19 वैक्सीनेशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 50,000 वीं को​विड 19 वैक्सीन की डोज ऋषिकेश निवासी खुशीराम को लगाई गई। इस अवसर पर विशेषरूप से मौजूद भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने एम्स ऋषिकेश की इस उपलब्धि पर बधाई दी एवं हैल्थ केअर स्टाफ के कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर यमकेश्वर विधायक ऋतु खंडूड़ी भी उपस्थित रहीं। इस उपलब्ध के लिए विधायक ऋतु खंडूड़ी के साथ ही एम्स निदेशक प्रोफेसर अरविंद राजवंशी ने भी एम्स संस्थान के हेल्थकेयर स्टाफ को बधाई दी।
आयोजित कार्यक्रम के दौरान संस्थान के डीन एकेडेमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता, मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. अश्वनी कुमार दलाल, वैक्सीनेशन नोडल ऑफिसर तथा कम्युनिटी एवं फैमिली मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सैना के अलावा अन्य चिकित्सकों व एम्स प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में केक काटा गया। इस अवसर पर कोविड-19 वैक्सीनेशन सेंटर, एम्स ऋषिकेश के प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने बताया कि इस केंद्र पर भारत सरकार की गाइडलाइन के तहत 16 जनवरी-2021 को कोविड-19 वैक्सीनेशन प्रारंभ हुआ। जिसके तहत अब तक 50,000 डोज लगाई जा चुकी हैं। इसमें 27,616 प्रथम डोज व 22,384 द्वितीय डोज लगाई गई हैं। इनमें से 10,846 डोज हेल्थ केयर स्टाफ, फ्रंटलाइन वर्कर्स तथा 39,154 डोज सामान्य जनता को लगाई गई है।
केंद्र प्रभारी ने बताया कि अब तक इस सेंटर पर 223 वैक्सीनेशन सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। पिछले 9 महीने से यह केंद्र निरंतर टीकाकरण का कार्य कर रहा है। यहां पर कोविशील्ड तथा को-वैक्सीन दोनों ही कोविड-19 वैक्सीन की डोज सभी आयुवर्ग (18 वर्ष एवं उससे अधिक) के लिए उपलब्ध है। संस्थान के कम्युनिटी एवं फैमिली मेडिसिन विभाग द्वारा संचालित इस केंद्र पर संकायगण, जूनियर डॉक्टर, इन्टर्नस, नर्सिग स्टाफ एवं पैरामेडिकल की टीम चिकित्सा विभाग, उत्तराखंड सरकार के सहयोग से कोविड-19 वैक्सीनेशन के शतप्रतिशत लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए सततरूप से कार्यरत है। इस अवसर पर प्रो. कमर आजम, डॉ. अजीत भदौरिया, डॉ. योगेश बहुरूपी, डा. मधुर उनियाल, जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल, रजिस्ट्रार राजीव चौधरी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शशिकांत, प्रशासनिक अधिकारी संतोष, पुस्तकालयाध्यक्ष संदीप सिंह, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट घेवर चंद,नर्सिंग इंचार्ज जिमिमा, एएनएस जितेंद्र आदि मौजूद रहे।

एम्स ने कोडिंग करने की जानकारी दी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में आयोजित कार्यशाला में तृतीयक देखभाल वाले अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में आईसीडी-10 की उपयोगिता और इसको बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। बताया गया कि मेडिकल और स्वास्थ्य से संबंधी अनुसंधान के क्षेत्र में हेल्थ रिकॉर्ड का विशेष महत्व होता है।
एम्स ऋषिकेश में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग लखनऊ के क्षेत्रीय कार्यालय के तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। ’प्रमोट टू यूज ऑफ आईसीडी-10 इन टेरटियरी केयर हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज’ विषय पर आधारित इस कार्यशाला में मेडिकल स्टूडेट्स और कार्यरत मेडिकल स्टाफ को विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई, कि किस प्रकार इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिसीज में मेडिकल हेल्थ रिकॉर्ड की उपयोगिता महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीन एकेडेमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्मित रोग और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकी वर्गीकरण का दसवां संस्करण ’आईसीडी-10’ चिकित्सीय वर्गीकरण की सूचियों का समूह है।
डीन रिसर्च प्रोफेसर वर्तिका सक्सैना ने बताया कि अभी तक भारत के कुछ बड़े अस्पतालों में ही आईसीडी-10 की ऑनलाइन कोडिंग व्यवस्था है। मरीजों के हित के लिए अब उत्तराखंड में भी इसे शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। इसी प्रक्रिया के तहत इस कार्यशाला का आयोजन किया गया।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर अश्वनी कुमार दलाल ने कहा कि आईसीडी-10 मेडिकल हेल्थ रिकॉर्ड पर आधारित ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली है, जिससे चिकित्सकों को मरीज की पूरी हिस्ट्री देखने के लिए अलग-अलग कई रिपोर्ट नहीं पढ़नी पड़ेगी। इस सुविधा से सिर्फ आईसीडी-10 कोड की मदद से मरीज की पूरी जानकारी आसानी से प्राप्त हो जाएगी।
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ के उप निदेशक डॉ. सचिन कुमार यादव ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बीमारियों के उपचार के लिए संबंधित रिसर्च, प्रोग्रेस रिपोर्ट अथवा दवा निर्माण आदि में मेडिकल हेल्थ रिकॉर्ड का विशेष महत्व होता है। बताया कि मेडिकल क्षेत्र में जितना बेहतर सूचनाओं का डाटा होगा, उतना ही हमें रिसर्च में मदद मिलेगी। उन्होंने निकट भविष्य में राज्य में आईसीडी-10 के क्रियान्वयन के लिए एम्स ऋषिकेश के सहयोग की आवश्यकता बताई। उन्होंने बताया कि आईसीडी-10 व्यवस्था में रोग और संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकी वर्गीकरण किया गया है, जिसमें रोगों, उनके लक्षणों, समस्याओं, तथा सामाजिक परिस्थितियों आदि की कोडिंग की गई है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्मित है। इस दौरान कार्यशाला में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के डॉ. वीपी श्रीवास्तव ने आईसीडी-10 के क्रियान्वयन का प्रतिभागियों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया। उन्होंने मरीज से संबंधित सभी प्रकार की जानकारियों को कोडिंग करने की बारिकी से जानकारी दी।
इस बाबत जानकारी देते हुए कार्यशाला के समन्वयक एवं सीएफएम विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. योगेश बहुरूपी ने बताया कि निकट भविष्य में इस कार्यशाला का एम्स ऋषिकेश को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस सिस्टम को राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में सुचारू रूप से लागू करने के लिए एम्स ऋषिकेश पूर्ण सहयोग देगा। कार्यशाला में अस्पताल प्रशासन के प्रोफेसर यूबी मिश्रा, जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. मीनाक्षी धर, फिजियोलॉजी विभाग की डॉ. सुनीता मित्तल, सीएफएम विभाग के डॉ.महेन्द्र सिंह, डॉ. प्रदीप अग्रवाल, डॉ. मीनाक्षी खापरे सहित 100 से अधिक मेडिकल स्टाफ मेंबर्स मौजूद रहे।

एम्स के ओबीजी डिपार्टमेंट की रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गाइनेकॉलोजी डिवीजन में हुआ युवती का सफल ऑपरेशन 

एम्स ऋषिकेश में 2019 में स्थापित स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की रिकंस्ट्रक्टिव एंड कॉस्मेटिक गाइलेकोलॉजी डिवीजन में नर्व स्पेयरिंग रिडक्शन क्लिटोरोप्लास्टीस नामक दुर्लभ एवं अति जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक हुई है, रिकंस्ट्रक्टिव एंड कॉस्मेटिक गाइनेकोलॉजी विंग ने पूर्व में भी कुछ नर्व स्पेयरिंग रिडक्शन क्लिटोरोप्लास्टीस एवं कई तरह की और भी दुर्लभ एवं जटिल शल्य चिकित्सा की हैं। गोरखपुर एम्स से रेफर होकर आई एक 20 साल की अविवाहित युवती को शनिवार को ऑपरेशन थियेटर में नया जीवनदान मिला। सर्जरी को रिकंस्ट्रक्टिव एंड कॉस्मेटिक गाइनेकोलॉजी डिवीजन के डॉक्टर नवनीत मागों और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। एम्स का स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग का यह डिवीजन दुनिया के मेडिकल संस्थानों में अपनी तरह का पहला डिवीजन है।                                                                                 गत वर्ष एक ऐसे ही मरीज की सर्जरी करके एम्स ऋषिकेश के रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक गाइनेकोलॉजी डिवीजन ने देश के मेडिकल साइंस एवं शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की थी। 

डा. नवनीत के अनुसार इस युवती का जन्म से ही कंजेनिटल एड्रिनल हाइपरप्लेशिया और क्लिटोरिस का आकार बढ़ा हुआ था I बेटी के दांपत्य जीवन को लेकर चिंतित पिता ने देश के विभिन्न मेडिकल संस्थानों में उसका परीक्षण कराया, लेकिन कहीं भी इसका समुचित उपचार नहीं मिल पाया, एम्स गोरखपुर से मरीज को उपचार के लिए ऋषिकेश एम्स रेफर कर दिया गया। जहां डा. नवनीत मग्गों ने युवती का स्वास्थ्य परीक्षण कराया, जिसके बाद उसकी क्लिटोरोमेगली अर्थात  क्लिटोरल हाइपरट्राफी का पता चल सका                 

 चिकित्सक ने बताया कि यह एक दुर्लभ किस्म का मामला था, क्योंकि महिला का क्लोटोरिस पुरुष के लिंग की तरह बड़ा था एवं बाकी का जननांग विकृत था। संस्थान के स्त्री रोग विभाग की पुनर्निर्माण और कॉस्मेटिक स्त्री रोग इकाई के डॉ. नवनीत मग्गों और उनकी टीम ने नर्व स्पेयरिंग रिडक्शन क्लिटोरोप्लासटी तकनीक के माध्यम से इसका सफल उपचार किया एवं साथ में ही इस महिला के लेबिया माइनोरा (लघु भगोष्ठ) का भी पुनर्निर्माण किया। लगभग दो घंटे चली इस सर्जरी में चिकित्सकीय दल उसे एक सामान्य स्त्री रूप और अंजाम देने में सफल रही।                                                                                             उन्होंने बताया कि संस्थान में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की पुनर्निर्माण और कॉस्मेटिक स्त्री रोग डिवीजन की स्थापना के बाद से इस डिवीजन में पूरे देश से लगातार कई अन्य तरह के मामले पूर्व में भी रेफर होकर आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि इसकी वजह यह है कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की इस इकाई की स्थापना देश ही नहीं, विश्व के किसी भी मेडिकल संस्थान में नहीं है, एम्स ऋषिकेश में यह अपनी तरह की पहली डिवीजन खुली हैI                                                                                                                   उन्होंने बताया कि इस सर्जरी युवती को एक नया जीवन मिला है, लिहाजा अब वह एक सामान्य यौन जीवन जी सकती हैं और वैवाहिक जीवन के लिए पूरी तरह फिट है।                                                                                                                    रिकंस्ट्रक्टिव एंड कॉस्मेटिक गाइनेकोलॉजी डिवीजन ने विश्व में पहली बार एम. सी. एच.कॉस्मेटिक गाइनेकोलॉजी शुरू की है।  एम्स ऋषिकेश में स्थापित स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की इस डिवीजन की प्रशंसा भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी की हैI जल्द ही एम्स की इस इकाई की ओर से पूरे विश्व से मेडिकल टूरिज्म के माध्यम से विदेशी मरीजों का भी इलाज शुरू किया जाएगा। जिससे एम्स ऋषिकेश उत्तराखंड और पूरे देश का नाम विश्व में रोशन करेगा। इससे उत्तराखंड के नागरिकों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, जिससे प्रदेश को आर्थिक लाभ होगा और देश को विदेशी मुद्रा में आय मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि यही हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी स्वप्न है कि हमारे देश का नाम पूरे विश्व में हो।