उत्तराखंड में भूमि उल्लंघन के मामलों में हो रही कार्यवाहीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में भू अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्रदान की गई भूमि क्रय की अनुमति के सापेक्ष भू उपयोग उल्लंघन के मामलों में तेजी से कार्यवाही गतिमान है। राज्य में उत्तराखंड भूमि अधिनियम की धारा 154 (4) (3) क के अंतर्गत कुल 532 प्रकरणों पर भूमि क्रय की अनुमति प्रदान की गयी है जिसके सापेक्ष भू उपयोग उल्लंघन के 88 मामले सामने आए हैं ऐसे उल्लंघन के 42 प्रकरणों पर धारा 166-167 के तहत वाद दायर किए गये हैं। जबकि अधिनियम की धारा 154 (4) (3) ख के तहत दी गई 963 भूमि क्रय की अनुमति के सापेक्ष 172 प्रकरणों में भू उपयोग का उल्लंघन किया जाना पाया गया है। जिसके विरूद्ध 112 मामलों में वाद दायर किए गये हैं। जबकि अधिनियम की धारा 154 (4) (1) क के अंतर्गत प्रदेश में भूमि क्रय के सापेक्ष भू उपयोग उल्लंघन के कुल 147 प्रकरणों पर कार्यवाही गतिमान है। जिसमें देहरादून के 77 में से 50 प्रकरणों पर, हरिद्वार में 20, पौड़ी में 17, टिहरी में 29 तथा उत्तरकाशी में 1 मामले में कार्यवाही गतिमान है। जबकि अल्मोड़ा के तीन मामलों में एक प्रकरण की भूमि राज्य सरकार में निहित की गई है।

प्रदेश में भूमि क्रय की अनुमति के सापेक्ष भू उपयोग के उल्लंघन की दिशा में कुल 3.006 है0 भूमि की गई राज्य सरकार में निहित

प्रदेश में भूमि क्रय की अनुमति के सापेक्ष भू उपयोग के उल्लंघन की दिशा में कुल 3.006 है0 भूमि राज्य सरकार में निहित की गई है। जिसमें कपकोट, बागेश्वर में मै0 त्रिलोक ग्रामोद्योग सेवा समिति को मौन पालन हेतु क्रय की गई 0.040 है0, रुद्रपुर, उधमसिंहनगर में एम0एस0 स्टैण्डर्ड स्प्लिन्ट्स लि0 द्वारा डी0 सेवत्था पांडे पुत्र दूरई राजन को 1.6530 है0, सिलटोना श्री कैंची धाम, नैनीताल में श्रीमती भावनी सिंह पत्नी श्री कुवर रघुराज प्रताप सिंह, सिंह निवास 5, बद्रीहाउस शाहजनफरोड़, लखनऊ को कृषि हेतु 0.555 है0, दिगोटी द्वाराहाट, अल्मोड़ा में कृषि हेतु 0.020 है0, कटारमल चौखुटिया, अल्मोड़ा में रैनाबाड़ी हैल्थ रिजार्ट को रिसोर्टस हेतु 0.713 है0, कोट्यूड़ा, अल्मोड़ा में प्रणव सिंह पुत्र महेन्द्र प्रताप सिंह, निवासी-प0 बंगाल को आवासीय प्रयोजन हेतु 0.025 है0 भूमि शामिल है।
————————————
भूमि प्रबंधन तथा भू व्यवस्था एवं सुधार के लिए प्रदेश में सशक्त भू कानून लागू हो गया है। इसी के साथ जनभावना के अनुरूप उत्तराखंड में कृषि और उद्यान भूमि की अनियंत्रित बिक्री पर पूरी तरह रोक लग गई है। भू अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले लोगों के विरुद्ध भी लगातार कार्यवाही की जा रही है। इस संबंध में व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, और इस तरह की जमीनों को राज्य सरकार में निहित किया जा रहा है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड।

सैनिक पुत्र सीएम धामी ने किया पूर्व सैनिकों का अभिनंदन

सीएम धामी ने कहा कि जबरन धर्मान्तरण व डेमोग्राफ़िक चेंज पर हमारी सरकार के प्रयासों के साथ जन सहयोग एवं कानूनी रूप से शिकायत हेतु जन जागरूकता भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने सख्त दंगा विरोधी कानून लागू करने के साथ, भूमि अतिक्रमण के खिलाफ कड़ी कार्यवाही व यूसीसी जैसा साहसिक कदम उठाये लेकिन सरकार के इन साहसिक प्रयासों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु व्यापक जनसहयोग की अपेक्षा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़ी कैंट, देहरादून में आयोजित विकसित भारत /2047 सामूहिक संवाद- पूर्व सैनिकों के साथ“ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के सम्रग विकास के लिए उपस्थित भूतपूर्व सैनिकों से बातचीत की एवं उनके सुझाव लिये।

राष्ट्र-प्रहरी के साथ पर्यावरण प्रहरी भी बने भूतपूर्व सैनिक- मुख्यमंत्री’

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग को हर डिवीज़न मे 1000 पेड़ लगाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ समय पूर्व, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में ‘’एक पेड़ अपनी मां के नाम’’ अभियान की शुरुआत की है। आज के इस अवसर पर मैं, आप सभी से इस अभियान में भागेदारी निभाने का आह्वान करता हूं क्योंकि आप सभी राष्ट्र-प्रहरी होने के साथ – साथ हमारे पर्यावरण के भी रक्षक हैं। आप जहां भी पेड़ लगाएंगे उसके फलने फूलने की गारंटी भी सदा रहेगी, क्योंकि आप एक सैनिक होने के नाते हमेशा उसका ख्याल भी रखेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में गत दो माह में आने वाले पर्यटकों की संख्या 38 लाख से अधिक हो गई हैं। प्रधानमंत्री के प्रयासों व सहयोग से राज्य में शीतकालीन यात्रा एवं आदि कैलाश यात्रा को नई गति मिली है। राज्य में बेरोजगारी दर 4.2 से कम हो गई है जो राष्ट्रीय औसत से कम है। मानसरोवर यात्रा का समय 7 दिन कम हो चुका है।

सैनिको एवं उनके परिजनों के हित हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में उपस्थित समस्त पूर्व सैनिकों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि सैनिको ने वीरता, शौर्य और समर्पण के साथ देश की रक्षा करते हुए अपने जीवन का महत्वपूर्ण कालखंड बिताया है। सैनिको ने कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और कच्छ से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक हर मोर्चे पर तिरंगे के गौरव और मान को बढ़ाने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रदेश देवभूमि के साथ साथ वीरभूमि भी है, क्योंकि हमारे प्रदेश का लगभग हर परिवार सेना से जुड़ा हुआ है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि हमारे वीर सपूतों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी।

सैनिक परिवार से होने के कारण पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवार की समस्याओं और चुनौतियों को नजदीक से देखा – सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मैं, स्वयं भी एक फौजी का बेटा हूं ,मैंने पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवार की समस्याओं और चुनौतियों को नजदीक से देखा और समझा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके हृदय में हमेशा शहीदों और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदनशीलता और समर्पण का भाव रहता है। इसलिए हमने ये प्रयास किया है कि यही भाव हमारी सरकार के काम में भी दिखे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, ले ज (से नि) एके सिंह, मेज (सेनि) के एस राणा, क. बीरेंद्र सिंह राणा, ब्रि. नितेश बिष्ट व बड़ी संख्या में भूतपूर्व सैनिक मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने नरेन्द्र कुमार मित्तल, रणजीत सिंह जुयाल सहित 10 लोकतंत्र सेनानियों को किया सम्मानित

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव का उत्तराखंड आगमन पर स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य के वन सम्बंधित मामलों का तत्परता से निस्तारण हो रहा है। उत्तराखण्ड को केंद्र सरकार का हर संभव सहयोग एवं मदद प्राथमिकता पर मिल रही है।

लोकतंत्र सेनानी हमारे महानायकः मुख्यमंत्री

लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज हमें लोकतंत्र की रक्षा करने वाले महानायकों को सम्मानित करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में आपातकाल का कालखंड हमेशा एक काले अध्याय के रूप में अंकित रहेगा। यह फैसला हमेशा की तरह देश को अपनी जागीर समझने वाले एक परिवार की हठधर्मिता और तानाशाही रवैए का परिणाम था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल में भारतीय संसद को बंधक बना लिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर सेंसरशिप थोप दी गई और न्यायपालिका की गरिमा तार-तार कर करोड़ों देशवासियों के मौलिक अधिकारों को रौंद दिया गया। आपातकाल के उन काले दिनों में सत्ता के नशे में चूर तत्कालीन सरकार ने सभी विपक्षी नेताओं, सैंकड़ों पत्रकारों सहित हर उस आवाज का निर्ममता से दमन किया जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए उठ रही थी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल कर पूरे देश को एक खुली जेल बना दिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नमन है लोकतंत्र के रक्षकों को, जिन्होंने जेल की कालकोठरियों को अपनी तपस्या की तपोभूमि बना लिया और लोकतंत्र के दीप को बुझने नहीं दिया। उस समय लोकनायक जयप्रकाश नारायण, श्रद्धेय नानाजी देशमुख, श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी, आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडीज और चंद्रशेखर जी जैसे असंख्य लोकतंत्र सेनानियों ने आपातकाल लगाने के तानाशाही सरकार के उस निर्णय के विरुद्ध हुए आंदोलन को दिशा देने का काम किया। जेल की चारदीवारी में बंद रहते हुए भी इन नेताओं ने युवाओं के भीतर लोकतंत्र के प्रति चेतना जाग्रत करने का कार्य किया। उस समय आदरणीय अटल जी ने कई कविताओं के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने का कार्य किया। तानाशाही सरकार के दमन के खिलाफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और जनसंघ सहित अनेकों सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने भी अपनी पूरी शक्ति से लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए आंदोलन चलाया। इस आंदोलन को देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं का भी भरपूर समर्थन प्राप्त हुआ और धीरे-धीरे ये आंदोलन एक राष्ट्रव्यापी जनक्रांति में बदल गया।

उत्तराखंड के सपूतो ने भी लोकतंत्र बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पुण्य भूमि पर भी ऐसे अनेक सपूतों ने जन्म लिया, जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अदम्य साहस का परिचय देते हुए उस जनक्रांति में अग्रणी भूमिका निभाई थी। बागेश्वर के चंद्र सिंह राठौर ने शिक्षक रहते हुए छात्रों में लोकतंत्र के प्रति आस्था जाग्रत करने का कार्य किया जिसके लिए उन्हें कई यातनाएं झेलनी पड़ी, यहां तक कि अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा, जिसे 32 वर्ष के संघर्ष के बाद वे दुबारा प्राप्त कर सके। पौड़ी के गोविंद राम ढींगरा को भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से संबंध रखने के लिए जबरन जेल में डाल दिया गया था। उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में ऐसे सैंकड़ों उदाहरण हैं जिन्होंने लोकतंत्र को पुनर्स्थापित करने हेतु अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

लोकतंत्र का महत्व समझने के लिए आज के युवाओं को आपातकाल का इतिहास जानना होगा- सीएम धामी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं आपातकाल के समय भूमिगत रहकर लोकतंत्र की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभा रहे थे। यही कारण है कि उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के योगदान और आपातकाल के काले अध्याय से आने वाली पीढ़ियों को अवगत कराने हेतु 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाने की शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने आपातकाल की घटनाओं का उल्लेख करते हुए 1978 में “संघर्षमां गुजरात” नामक एक किताब भी लिखी थी। कल ही गृहमंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री के आपातकाल के दौरान के संघर्ष पर लिखी एक नई पुस्तक “द इमरजेंसी डायरीज” का भी विमोचन किया। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस पुस्तक और संविधान हत्या दिवस के माध्यम से भारत की नई पीढ़ी भी ये जान सकेगी कि किस तरह आपातकाल के दौरान संविधान को रौंदा गया और लोकतंत्र की आत्मा को निर्ममता से कुचला गया।

लोकतंत्र सेनानियों का हित और कल्याण हमारी प्राथमिकता- सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान हेतु पूर्ण रूप से संकल्पित होकर कार्य कर रही है। प्रदेश भर में आपातकाल के विरुद्ध हुए इस महान आंदोलन के बारे में हमारी युवा पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रदर्शनियों का आयोजन भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लोकतंत्र की शक्ति और नागरिकों की लोकतंत्र के प्रति आस्था को और अधिक मजबूत किया जा सके। हमारी सरकार आपकी प्रत्येक समस्या के समाधान हेतु पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। हम राष्ट्र के प्रति आपके अतुलनीय योगदान को जन-जन तक पहुंचाने हेतु प्रतिवर्ष इसी प्रकार लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान कार्यक्रम आयोजित करते रहेंगे। इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल हमारे प्रदेश के युवाओं को लोकतंत्र का महत्त्व समझाने में सहायक सिद्ध होंगे बल्कि उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति और अधिक सजग बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के हमारे “विकल्प रहित संकल्प” को पूर्ण करने हेतु हमें एक नई शक्ति और ऊर्जा प्रदान करेंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्य सभा सांसद महेंद्र भट्ट एवं बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

मानसून सत्र में आएगा लोकतंत्र सेनानियों के कल्याण व हित में अधिनियमः सीएम

सीएम धामी ने लोकतंत्र सेनानियों की मुद्दों के तत्परता से निस्तारण के लिए शासन स्तर पर नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि लोकतंत्र सेनानियों के कल्याण व हित में मानसून सत्र में अधिनियम लाने की तैयारी की जाए। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि की प्रक्रिया सरल बनाने के निर्देश दिए है। उन्होंने अधिकारियों को लोकतंत्र सेनानियों की समस्याओं के शीघ्र निस्तारण के लिए कहा। सीएम ने संबंधित सचिव को लोकतंत्र सेनानियों को तत्काल प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है।

सीएम धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों को प्रतिमाह मिलने वाली सम्मान निधि को बढ़ाने का फैसला लिया था, जिसे आने वाले समय में और बढ़ाया जाएगा। हमारी सरकार लोकतंत्र सेनानियों की प्रत्येक समस्या के समाधान हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है। हम राष्ट्र के प्रति आपके अतुलनीय योगदान को जन-जन तक पहुंचाने हेतु प्रतिवर्ष लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान कार्यक्रम आयोजित करते रहेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपातकाल लगाए जाने के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित संविधान हत्या दिवस 2025 पर मुख्यमंत्री आवास में लोकतंत्र सेनानियों व उनके परिवारजनों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री धामी ने आपातकाल में मीसा एवं डीआईआर बंदियों के साथ संवाद किया।

समस्त लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जिन्होंने आपातकाल के अंधकारमय कालखण्ड में भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया, उन्हें सम्मानित करना अत्यंत गौरव का अवसर है। लोकतंत्र सेनानियों ने जेलों की काल कोठरियों में रहकर भी लोकतंत्र के दीप को बुझने नहीं दिया। यह लोकतंत्र प्रहरियों के तप, त्याग और अटूट संकल्प का ही परिणाम है, जिसके कारण भारत के प्रत्येक नागरिक के मन में लोकतंत्र के प्रति एकनिष्ठ आस्था विद्यमान है।

आपातकाल संविधान की आत्मा को कुचलने का प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 का दिन हमेशा एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। 50 वर्ष पूर्व इसी दिन देश पर आपातकाल थोपा गया था और संविधान की आत्मा को कुचलने का प्रयास किया गया था। और यह सब एक व्यक्ति की हठधर्मिता और तानाशाही रवैए का परिणाम था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी को चुनावी भ्रष्टाचार का दोषी ठहराते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता को निरस्त कर दिया गया था। सत्ता छिन जाने के भय से 25 जून की रात को भारत जैसे महान लोकतांत्रिक देश में आपातकाल की घोषणा करवा दी गई। भारतीय संसद का गला घोंट दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता को बंधक बना लिया गया और न्यायपालिका की गरिमा तार-तार कर लाखों देशवासियों के मौलिक अधिकारों को रौंद दिया गया। आपातकाल के उन काले दिनों में सत्ता के नशे में चूर तत्कालीन सरकार ने सभी विपक्षी नेताओं, सैंकड़ों पत्रकारों सहित हर उस आवाज का निर्ममता से दमन किया जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए उठ रही थी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल कर पूरे देश को एक खुली जेल बना दिया गया था। मीसा और डीआईआर जैसे काले कानून को थोपकर हज़ारों लोकतंत्र समर्थकों को जेलों में ठूंस दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकनायक जयप्रकाश नारायण, श्रद्धेय नानाजी देशमुख और श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान नेताओं ने जेलों में रहते हुए भी लोकतंत्र के प्रति युवाओं में चेतना जाग्रत करने का कार्य किया। सत्ता के दमन का प्रतिकार करते हुए देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने तानाशाही के विरुद्ध सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र के पक्ष में जनजागरण प्रारंभ कर दिया। दिल्ली, बनारस, इलाहाबाद, पटना, जयपुर, पुणे, बेंगलुरु जैसे कई शहरों के अनेकों शैक्षणिक संस्थानों से शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे राष्ट्रव्यापी जनक्रांति में बदल गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सहित अनेकों सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने भी अपनी पूरी शक्ति से लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए आंदोलन चलाया। हजारों युवाओं ने जेल जाना स्वीकार किया, यातनाएँ सही, लेकिन अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाया।
आपातकाल के काले अध्याय से आने वाली पीढ़ियों को अवगत कराना जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1977 के उस आम चुनाव में देश की जनता ने पहली बार किसी गैर कांग्रेसी सरकार को चुनकर लोकतंत्र की नई सुबह का सूत्रपात किया। भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई के बाद वो दूसरी सबसे बड़ी जनक्रांति थी जिसने भारत को सत्ता के एकाधिकार से मुक्ति दिलाने का कार्य किया था। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं आपातकाल के समय भूमिगत रहकर लोकतंत्र की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभा रहे थे। यही कारण है कि उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के योगदान और आपातकाल के काले अध्याय से आने वाली पीढ़ियों को अवगत कराने हेतु 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाने की शुरुआत की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सत्ता को सेवा का माध्यम मानकर प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण हेतु योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान हेतु पूर्ण रूप से संकल्पित होकर कार्य कर रही है। इसी क्रम में आज हमने आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, आज प्रदेश भर में आपातकाल के विरुद्ध हुए इस महान आंदोलन के बारे में हमारी युवा पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रदर्शनियों को आयोजित किया जा रहा है।

उत्तराखंड जैसे छोटे से राज्य में लिए जा रहे निर्णय देशभर के लिए आदर्श बन रहे

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे छोटे से राज्य में लिए जा रहे निर्णय देशभर के लिए आदर्श बन रहे। हम हर क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लाया गया है। एसडीजी रैंकिंग में हम प्रथम स्थान पर रहे है।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोशियारी, सचिव शैलेश बगौली, लोकतंत्र सेनानी कृष्ण कुमार अग्रवाल, प्रेम बड़ाकोटी, लोकतंत्र सेनानी स्व. बल्लभ भाई पांडेय की धर्मपत्नी शशी पांडेय तथा बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानी और उनके परिजन मौजूद रहे।

जिस ब्रिटेन ने दो सौ सालों तक राज किया, उसे पीएम मोदी ने देश की आज़ादी के 75 सालों में पछाड़ दियाः अग्रवाल

क्षेत्रीय विधायक व पूर्व मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने प्रधानमंत्री मोदी के 11 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मोदी सरकार के 11 सालों को स्वर्णिम बताते हुए उनके कार्यों को जनता के सामने रखा।

रायवाला में आयोजित कार्यक्रम में डॉ अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के ये 11 साल आत्मनिर्भर और विकसित भारत की नींव के स्वर्णिम युग के रूप में जाने जाएंगे। पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत किया है और भारत को एक पहचान दी है।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस के 65 साल के शासन और अस्थिर सरकारों में आम लोगों का विश्वास उठ गया था और वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचा था, पीएम मोदी ने पिछले 11 वर्षों में इसे बहाल किया है। कहा कि जिस ब्रिटेन ने भारत पर दो सौ सालों तक राज किया, उस ब्रिटेन को मोदी जी ने देश की आज़ादी के 75 साल के अमृत महोत्सव पर पछाड़ दिया।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि भारत का निर्यात कई गुना बढ़ा है। साल 2027 में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। देश में 3 लाख 80 हज़ार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण 11 सालों में हुआ है। आज हम हर दिन कई किलोमीटर के हाईवे का निर्माण कर रहे हैं।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि नमो भारत, अमृत भारत, वंदे भारत से लेकर मेट्रो तक का बड़ा काम हुआ। किसानों के लिए सरकार ने बीज, खाद, सिंचाई, बीमा से लेकर हर मुद्दे पर काम किया है, उनकी आमदनी को कई गुना बढ़ाने का काम हुआ है।

इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र बिष्ट, कमल कुमार, सतपाल सैनी, सागर गिरी, दिव्या बेलवाल, बीना बंगवाल, बबीता कमल कुमार, गणेश रावत, शिवानी भट्ट, शकुंतला कुकरेती, कमलेश भंडारी, माया डबराल, अनीता भट्ट आदि उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति मूर्मु दून में राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में हुई शामिल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि किसी देश या समाज की प्रगति का असली पैमाना यह है कि वहां दिव्यांगजनों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। भारत का इतिहास संवेदनशीलता और समावेशिता के प्रेरक प्रसंगों से भरा पड़ा है। हमारी संस्कृति में करुणा और प्रेम के भाव सदैव से शामिल रहे हैं। राष्ट्रपति देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुईं।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के सामने कई बाधाएं रही हैं, जिन्हें दूर करने के लिए समावेशी दृष्टिकोण और निरंतर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि ‘सुगम्य भारत अभियान’ के माध्यम से सरकार दिव्यांगजनों के लिए सुलभ वातावरण, परिवहन और सूचना तंत्र विकसित कर रही है, ताकि वे समान भागीदारी कर सकें। उन्होंने कहा कि आज का युग विज्ञान और तकनीक का है। उन्नत तकनीक की सहायता से दिव्यांगजन भी देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर देकर दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना बेहद जरूरी है। राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं ताकि वे भी समान अवसरों के साथ आगे बढ़ सकें। इस दौरान राष्ट्रपति ने संस्थान परिसर में माडल स्कूल की विज्ञान प्रयोगशाला और कंप्यूटर प्रयोगशाला का निरीक्षण किया। इसके साथ ही दिव्यांगजनों की प्रतिभा को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी भी देखी।

राष्ट्रपति ने छात्रों से संवाद कर उनकी पढ़ाई-लिखाई और प्रशिक्षण के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन परिसर में दिव्यांगजनों द्वारा संचालित कैफे इसका उदाहरण है कि अवसर मिलने पर दिव्यांगजन किसी से पीछे नहीं हैं। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने श्पर्पल फेस्टश् का भी जिक्र किया, जिसमें दिव्यांगजनों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि समाज को चाहिए कि वह जीवन के हर क्षेत्र में दिव्यांगजनों को समान अवसर दे, ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़े और वे देश के विकास में सहभागी बन सकें। राष्ट्रपति ने कहा कि दिव्यांगजन अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे देश का गौरव बन सकते हैं।

राष्ट्रपति ने बच्चों के बीच जन्मदिन मना कर दिया संदेश रू केंद्रीय मंत्री केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दृष्टिबाधित बच्चों के बीच अपना जन्मदिन मना कर समाज को प्रेरणादायी संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि वंचित बच्चों के बीच जाकर अपना जन्मदिन मनाएं तो बच्चों में ऊर्जा का संचार होता है और वे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं। मंत्री ने बताया कि संस्थान में अब दृष्टिबाधित बच्चे विज्ञान और गणित की पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले वर्ष दो और इस वर्ष पांच छात्रों ने विज्ञान वर्ग में दाखिला लिया है।

यह संस्थान देशभर में एक आदर्श माडल बन रहा है और आगे मंत्रालय के सभी नौ संस्थानों में भी इसे शुरू किया जाएगा। दृष्टिबाधित बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध रू मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ‘विकलांग’ के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द देकर समाज में सकारात्मक सोच विकसित की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हम दृष्टिबाधित बच्चों की आंखों की रोशनी तो नहीं लौटा सकते, लेकिन उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। समर्थता दृष्टि में नहीं, संकल्प में होती है रू राज्यपाल राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने दृष्टिबाधित बच्चों की प्रतिभा और आत्मविश्वास की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन बच्चों ने यह साबित कर दिया है कि समर्थता दृष्ट में नहीं, बल्कि संकल्प में होती है।

बच्चों ने जिस आत्मविश्वास, सृजनशीलता के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वह राष्ट्र की नई चेतना व आत्मनिर्भर भारत के भाव को व्यक्त करता है। कहा कि इन बच्चों में वही ऊर्जा, वहीं क्षमता और वही जुनून है, जो एक सशक्त व विकसित भारत का निर्माण कर सकते हैं। आज का भारत एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। आप सभी से अनुरोध है कि आप राष्ट्र सर्वाेपरी के मंत्र को आत्मसात करें।

बार बार दिन ये आए, गीत को जन्मदिन पर सुनकर भावुक हुईं राष्ट्रपति मूर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने उत्तराखंड प्रवास के दौरान शुक्रवार को उस वक्त भावुक हो गईं, जब दृष्टिबाधित बच्चों ने उन्हें गीत गाकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। बच्चों ने जैसे ही बार बार दिन ये आए, बार बार दिल ये गाए, तू जिए हजारों साल… गीत गाना शुरू किया तो पूरा माहौल भावनाओं में डूब गया।

गीत खत्म होते-होते राष्ट्रपति की आंखों से अश्रुधारा छलक उठी। मंच पर मौजूद सभी लोग इस दृश्य को देखकर गहरे भावनात्मक क्षण में डूब गए। कार्यक्रम देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टिहीन दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान (एनआइईपीवीडी) में आयोजित किया गया था।

बच्चों की मधुर आवाज में गीत सुनकर राष्ट्रपति खुद को रोक नहीं सकीं और उनकी आंखें भर आई। वह आंखें पोंछने लगीं तो एडीसी ने तुरंत उन्हें रुमाल दिया। इन भावुक क्षणों के बीच जब बच्चों ने राष्ट्रपति को जन्मदिन की बधाई दी तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।

राष्ट्रपति के साथ मंच पर मौजूद केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार और राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) की आंखें भी नम हो गईं। राष्ट्रपति ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब मैं इन बच्चों को गाते हुए देख रही थी तो मेरी आंखें आंसुओं से भर आईं। यह बच्चे गले से नहीं, दिल से गा रहे थे। लगता है मां सरस्वती इनके कंठ में विराजमान हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान जब किसी से कुछ लेता है तो बदले में उसे ऐसी विशेष प्रतिभा देता है, जो उसे बाकी लोगों से अलग बनाती है। मैं अपने जन्मदिन पर यहां आकर बेहद खुश हूं। कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने दिव्यांग बच्चों के आत्मविश्वास और प्रतिभा की सराहना की।

मुख्य सचिव हर माह और मण्डलायुक्त प्रत्येक सप्ताह करेंगे यात्रा की तैयारियों की समीक्षाः सीएम

उत्तराखण्ड में 2026 में होने वाली नंदा देवी राजजात यात्रा की सभी तैयारियों में तेजी लाई जाए। भव्य नंदा राजजात यात्रा के आयोजन के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। यात्रा की बेहतर व्यवस्थाओं के लिए जनप्रतिनिधियों, नंदा राजजात यात्रा समिति के सदस्यों और हितधारकों के सुझाव लिये जाएं। ये निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल बैठक के दौरान अधिकारियों को दिये।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिये कि नंदा राजजात यात्रा के सफल संचालन के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए। पिछली यात्राओं के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। यात्रा से संबंधित सभी पैदल मार्गों की अच्छी व्यवस्थाओं के साथ स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए। यात्रा के पड़ाव पर श्रद्धालुओं को ठहरने की बेहतर व्यवस्थाओं के साथ ही भोजन और स्नान घरों की व्यवस्था के भी उन्होंने निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। यात्रा के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में विभिन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाए। यात्रा मार्ग पर दूरसंचार की व्यवस्थाओं के साथ डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिगत यात्रा के दौरान हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए। यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। मेडिकल कैंप और चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। यात्रा के दौरान हेली एम्बुलेंस की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नंदा राजजात यात्रा बरसात के समय होती है, इसके दृष्टिगत संक्रामक रोगों से बचाव के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किये जाएं। यात्रा के अधिकतम पड़ाव वन क्षेत्र में होने के कारण वन और पर्यावरण की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाए। श्रद्धालुओं के लिए टेंट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नंदा राजजात से संबंधित लोक गीत और लोक कथाओं का अभिलेखीकरण भी किया जाए। पर्यटन विभाग द्वारा यात्रा के पड़ावों का व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार भी किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नदां राजजात यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन और यातायात सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाए। पार्किंग स्थलों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। यात्रा मार्गों पर पेयजल, शौचालय अवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिये कि वे प्रतिमाह नंदा राजजात यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करें। गढ़वाल और कुमांऊ आयुक्त भी प्रत्येक सप्ताह यात्रा से संबंधित तैयारियों की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़वाल और कुमांऊ के जिन क्षेत्रों से श्रद्धालु और डोलियां आती हैं, उन सभी क्षेत्रों में भी सड़क, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए।

उत्तराखण्ड में अगले साल होने वाली 280 किमी की ऐतिहासिक नंदा देवी राजजात यात्रा के भव्य आयोजन और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही है। 2027 में हरिद्वार में होने वाले कुंभ के लिए भी सभी तैयारियां की जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में नंदा देवी राजजात और हरिद्वार कुंभ का भव्य और दिव्य आयोजन किया जायेगा- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड।

बैठक में राज्यसभा सांसद महेन्द्र भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, अनिल नौटियाल, भूपाल राम टम्टा, सुरेश गड़िया, पार्वती दास, डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डीजीपी दीपम सेठ, सचिव शैलेश बगोली, सचिन कुर्वे, गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा एवं संबंधित जिलाधिकारी उपस्थित थे।

पीएम ने हेलीकॉप्टर दुर्घटना में दिवंगतों को दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ने साइप्रस से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर केदारनाथ हेलीकॉप्टर दुर्घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। प्रधानमंत्री ने इस दुखद घटना में दिवंगत हुए लोगों के प्रति गहरी संवेदना और शोक व्यक्त किया। मृतकों के परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति हेतु प्रार्थना की। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि घटना के बाद तत्काल उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई है। दुर्घटना के कारणों की गहन जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई के लिए कमांड एंड कॉर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी।

सीएम धामी ने किया आगामी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में बढ़ चढ़कर प्रतिभाग करने का आग्रह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एम.के.पी कॉलेज, देहरादून में आयोजित ’रन फॉर योगा’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने युवाओं, बुजुर्गों महिलाओं को भी योग के प्रति जागरूक करने के लिए गांधी पार्क से एम.के.पी कॉलेज तक पैदल मार्च भी किया।

मुख्यमंत्री ने सभी से आगामी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में बढ़ चढ़कर प्रतिभाग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा हमें मिलकर प्राचीन योग सभ्यता को जन जन तक पहुंचाना है। ऋषि मुनियों ने योग के माध्यम से शरीर, आत्मा और मन को एकीकृत करने की अद्भुत विद्या विकसित की है। योग संपूर्ण विश्व के लिए एक संजीवनी का कार्य करता है। योग से जीवन स्वस्थ और अनुशासित बनता है। आज दुनिया योग के प्रति आकर्षित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा योग को दैनिक जीवन में अपनाकर शरीर और मन को स्वस्थ रखने के साथ ही समाज में भी सकारात्मकता लाई जा सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा था, जिसे पूरे विश्व ने अपनाया था। उन्होंने कहा उत्तराखंड योग, आयुष और अध्यात्म की भूमि है। राज्य सरकार, उत्तराखंड को योग और वेलनेस टूरिज्म का वैश्विक हब बनाने पर कार्य कर रही है । राज्य सरकार ने हाल ही में नई योग नीति को मंजूरी दी है। जिसके अंतर्गत राज्य में योग और ध्यान केंद्र विकसित करने पर अधिकतम 20 लाख तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहले से संचालित हो रहे योग केंद्रों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख तक का भी अनुदान दिया जा रहा है। राज्य में योग और वेलनेस की अपार संभवानाएं हैं, जिस पर राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने सभी से अनुशासित और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने की अपील की।

इस अवसर पर विधायक खजान दास, भरत चौधरी, उपाध्यक्ष राज्य स्तरीय खेल परिषद हेमराज बिष्ट, सचिव आयुष दीपेंद्र चौधरी, अपर सचिव विजय कुमार जोगदंडे, प्रदीप जैन, जितेंद्र नेगी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।