दून डीएम का मानवीय निर्णय, 64 हजार का ऋण कराया जमा, रोजगार को रायफल क्लब फंड से दिए 25 हजार

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने एक बार फिर संवेदनशील एवं मानवीय प्रशासन का परिचय देते हुए ईस्ट पटेल नगर निवासी शत-प्रतिशत दिव्यांग संजीव कुमार को बड़ी राहत प्रदान की है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने आर्थिक तंगी और सामाजिक संकट से जूझ रहे दिव्यांग की फरियाद सुनते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए 64 हजार 915 रुपये की बकाया ऋण राशि सीएसआर फंड से जमा कराने के निर्देश दिए। 03 नौनिहाल बालिकाओं के 100 दिव्यांग पिता व 65 प्रतिशत् दिव्यांग माता के उपर से 64 हजार का बोझिल ऋण से जीविका उपार्जन के अति कठिन साधन व लाचारी में जिला प्रशासन देहरादून द्वारा मदद का हाथ बढाते हुए ऋण माफी के साथ ही रोजगार हेतु रायफल क्लब फंड से 25 हजार आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
संजीव कुमार ने वर्ष 2018 में उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम, देहरादून से मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोलने हेतु 50 हजार रुपये का ऋण लिया था। प्रारम्भिक अवधि में उन्होंने लगभग 15 से 20 किश्तों का भुगतान भी किया, किन्तु वर्ष 2020 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण उनका व्यवसाय पूरी तरह बंद हो गया। आर्थिक संकट गहराने पर वे शेष किश्तें जमा नहीं कर सके।
ऋण अदायगी न होने पर निगम द्वारा 64,915 रुपये की आरसी तहसील देहरादून भेज दी गई। दिव्यांग दंपति केवल 3000 रुपये की पेंशन पर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी थी कि बेटियों की शिक्षा तक प्रभावित होने लगी थी। प्रार्थी ने जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर अवगत कराया कि अमीन द्वारा तहसील जेल भेजने की धमकी दी जा रही है, जिससे पूरा परिवार भय और मानसिक तनाव में जी रहा था।
मामले की गंभीरता और मानवीय पक्ष को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लिया तथा प्रभारी अधिकारी शस्त्र को निर्देशित किया कि दिव्यांग संजीव कुमार की बकाया ऋण राशि राइफल क्लब फंड से जमा कराई जाए, ताकि परिवार को राहत मिल सके और आरसी की कार्रवाई समाप्त हो सके।
जिलाधिकारी ने केवल आर्थिक राहत तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में भी पहल की। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास को निर्देशित किया कि संजीव कुमार की 3 बेटियों को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के अंतर्गत शिक्षा सहायता प्रदान करने हेतु प्रकरण की जांच कर शीघ्र आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, जिससे उनकी शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रह सके। जिला प्रशासन की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से एक जरूरतमंद परिवार को नया संबल मिला है।  जिला प्रशासन केवल प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई में प्राप्त होने वाले ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सहायता से वंचित न रहे।

डीएम दून सविन बंसल ने कुख्यात बिल्डर पुनीत अग्रवाल को किया 6 माह के लिए जिला बदर

जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था एवं आमजन की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए एटीएस कॉलोनी में आतंक और भय का वातावरण पैदा करने वाले बिल्डर पुनीत अग्रवाल के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने उत्तर प्रदेश/उत्तराखण्ड गुण्डा नियंत्रण अधिनियम-1970 की धारा 3(3) के अंतर्गत पुनीत अग्रवाल को “गुण्डा” घोषित करते हुए 06 माह के लिए जनपद देहरादून की सीमा से बाहर रहने के आदेश जारी किए हैं।

प्रकरण की शुरुआत एटीएस कॉलोनी निवासी एवं डीआरडीओ वैज्ञानिक हेम शिखा सहित अन्य निवासियों द्वारा 25 अप्रैल 2026 को जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत शिकायती प्रार्थना पत्र से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पुनीत अग्रवाल द्वारा 13 अप्रैल 2026 को डीआरडीओ में कार्यरत वैज्ञानिक के परिवार पर आक्रामक एवं जानलेवा हमला किया गया। मारपीट में पीड़ित का कान का पर्दा फट गया तथा महिलाओं एवं बुजुर्गों के साथ अभद्रता और गाली-गलौच की गई। शिकायतकर्ताओं ने आरोपी को महिलाओं, बच्चों एवं वरिष्ठ नागरिकों को डराने-धमकाने वाला असामाजिक तत्व बताते हुए गुण्डा एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट ने उप जिलाधिकारी मसूरी से गोपनीय जांच कराई गई। जांच में क्षेत्रवासियों ने बताया कि पुनीत अग्रवाल का व्यवहार लगातार भय और असुरक्षा का वातावरण उत्पन्न कर रहा था तथा उसके विरुद्ध पहले से कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। थाना रायपुर में दर्ज एफआईआर, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो क्लिप्स तथा स्थानीय निवासियों की सामूहिक शिकायतों को न्यायालय ने गंभीरता से लिया। प्रकरण में डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं निदेशक मनोज कुमार ढाका द्वारा भी शिकायत प्रस्तुत कर कार्रवाई की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी का व्यवहार समाज में भय और असुरक्षा का कारण बन चुका है तथा यदि उस पर रोक नहीं लगाई गई तो कभी भी गंभीर अप्रिय घटना हो सकती है।

वहीं विपक्षी पक्ष द्वारा इसे आपसी रंजिश एवं सिविल विवाद बताया गया, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों, दर्ज मुकदमों, वायरल वीडियो, शिकायतों तथा गोपनीय जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी न्यायालय ने पाया कि पुनीत अग्रवाल अभ्यस्त आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है, जो लोगों को डराने-धमकाने और क्षेत्र में अशांति फैलाने का आदी है।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पुनीत अग्रवाल अगले 06 माह तक देहरादून जनपद की सीमा में बिना अनुमति प्रवेश नहीं कर सकेगा। यदि वह आदेश का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध कठोर कारावास एवं जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। थाना रायपुर पुलिस को आदेश की तत्काल तामील कराते हुए आरोपी को 24 घंटे के भीतर जनपद से बाहर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

शहर के सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस कालोनी में बिल्डर की गूंडागर्दी पर जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने स्वतरू संज्ञान लेते हुए गुंडा एक्ट में मामला दर्ज किया था। इससे पूर्व भी विवादित बिल्डर पर दीपावली में नाबालिग बच्चों पर पिस्टल लहराने तथा लाईसेंसी शस्त्र को प्रदर्शित करने पर डीएम ने शस्त्र लाईसेंसधारक पुनीत अग्रवाल की लापरवाही मानते हुए उनका शस्त्र जब्त करते हुए शस्त्र लाईसेंस निलम्बित कर दिया था। आरोपी बिल्डर पर डीआरडीओं वैज्ञानिक के साथ मारपीट एवं उत्पीड़न, नशे में धुत होकर एटीएस आरडब्ल्यूए अध्यक्ष के साथ मारपीट, बच्चों से गाली गलौच, दीपावली पर पिस्टल तानने, बच्चों से गाली गलौच एवं गाड़ी से टक्कर मारने का प्रयास, जनरल बाडी मीटिंग में धमकाने अभद्र भाषा का प्रयोग, आरोपी द्वारा निवासियों एवं आरडब्ल्यूए के सदस्यों को जानबूझकर झूठे मुकदमों एवं निराधार आरोपों में फंसाकर उत्पीड़न करने का प्रयास, विधवा महिला की भूमि को कूट रचित रजिस्ट्री एवं अनाधिकृत कब्जा मामलों विभिन्न धाराओं में 05 एफआईआर दर्ज हैं।

जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने जनमानस महिला, बुजुर्ग बच्चे, असहायों की सुरक्षा के दृष्टिगत समय-समय पर कड़े एक्शन लिए है। साथ ही अधिकारियों को सख्त निर्देश हैं कि कानून हाथ में लेकर ऐसा कृत्य करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नही जाएगा। बिल्डर के विरूद्ध बीएनएस की धारा 115 (2), 351(2), 352, 74,126(2), 324(4), 447 में पांच मुकदमें दर्ज हैं। तथा बिल्डर द्वारा आए दिन कोई न कोई विवाद किए जा रहे हैं, जनमानस की सुरक्षा के दृष्टिगत जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए बिल्डर के विरूद्ध गुंडाएक्ट में बुक कर दिया था।

शहर के सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी में बिल्डर की कथित दबंगई का मामला सामने आने जिला प्रशासन ने यह एक्शन लिया है । बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर नगर निगम/एमडीडीए की जमीन पर अवैध निर्माण के विरोध में 01 डीआरडीओ मे तैनात वैज्ञानिक के साथ मारपीट का आरोप लगा है। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बिल्डर द्वारा कथित रूप से नगर निगम /एमडीडीए की जमीन पर दीवार निर्माण कराया जा रहा था, जिसका मलबा उनके घर की ओर गिर रहा था। इसका विरोध करने पर बिल्डर ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा विवाद बढ़ने पर बिल्डर ने कथित रूप से डीआरडीओ के सांईटिस्ट से मारपीट की। मारपीट में घायल डीआरडीओ के सांइटिस्ट अनिरुद्ध शर्मा को चोटें आई थी मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों के थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। एटीएस कॉलोनी के निवासियों ने आरोप लगाए थे कि बिल्डर के खिलाफ कई शिकायतों के बावजूद सख्त/ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती थी। जिला प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से अपराधी प्रवृत्ति के लोगों में कानून का भय बढ़ा है तथा आमजन में सुरक्षा और विश्वास का संदेश गया है।

पुत्र की मृत्यु उपरान्त 2023 से न्याय को भटकती मां को मिला डीएम का सहारा, नियोक्ता फर्म पर मुकदमा व लेबर कोर्ट में वाद दर्ज

जिलाधिकारी सविन बसंल की अध्यक्षता में ऋषिपर्णा सभागार में जनता दर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जनता दर्शन में आज 212 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई। जिलाधिकारी ने अपनी कोर टीम संग जनमानस की समस्याओं को सुनते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को जनता दर्शन में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश दिए।
छबीलबाग कांवली रोड निवासी 82 वर्षीय दिव्यांग बुजुर्ग ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई की उनका पुत्र 12-13 वर्षों से लापता है तथा 02 पोतों की जिम्मेदारी उनपर है घर के पानी का बिल 31657 बिल आया है उन्होंने जिलाधिकारी से बिल माफी की गुहार लगाई जिस पर जिलाधिकारी ने जल संस्थान को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जल संस्थान द्वारा ब्याज की धनराशि रू0 11487, वन टाइम सेटलमेंट कराते हुए शेष धनराशि 20170 रू0 रायफल फंड से जिला प्रशासन जल संस्थान के खाते में जमा कराई जा रही है।
विकासनगर निवासी मीना बंसल ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि उनके पुत्र वर्ष 2023 में डिक्शन होटल में दुर्घटना में गंभीर घायल होने पर उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी कम्पनी द्वारा कोई मुआवजा नही दिया गया है, जिस पर जिलाधिकारी ने एएलसी को एफआईआर दर्ज कराने तथा लेबरकोर्ट में मामला दर्ज करते हुए 02 माह के भीतर प्रकरण निस्तारित करने के निर्देश दिए।
ऋषिकेश निवासी बुजुर्ग दम्पति नीलम अरोड़ा व उनके पति ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि उनकी पुत्रवधु द्वारा उनके घर में रहते हुये प्रार्थिनी एवं उसके पति के साथ अनावश्यक मारपीट करने, प्रताडित करने, गाली गलौज करने एवं जान से मारने की धमकी देते हैं जिस पर जिलाधिकारी ने एसडीएम कोर्ट ऋषिकेश में वाद भरणपोषण एक्ट में वाद दर्ज करने के निर्देश दिए।
धर्मपुर निवासी रोशनी रावत ने जिलाधिकारी ने गुहार लगाई कि उनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति उनकी 02 पुत्रियां है जिनकी शिक्षा-दीक्षा एवं लानपोषण में समस्या आ रही है जिस पर जिलाधिकारी ने रोशनी की दोनों पुत्रियों की शिक्षा प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा से कराने हेतु जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास विभाग को कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
हर्रावाला निवासी बाबूराम मौर्य ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि उनकी भूमि से लगती हुई लघु सिंचाई विभाग की सरकारी नहर कुछ व्यक्तियों द्वारा बंद कर दी गई है जिससे भूमिधरों की गेंहू की फसल में पानी नही लग पाने से फसल खराब हो रही है, नहर को जेसीबी लगाकर पूर्णतः क्षतिग्रस्त कर दिया है। जिस पर जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी, एसडीएम डोईवाला, अधि.अभि लघु सिंचाई को तत्काल कार्यवाही कराते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
जनता दर्शन में अपर जिलाधिकारी वित एवं राजस्व के.के मिश्रा, संयुक्त मजिस्टेªट राहुल आनंद, पुलिस अधीक्षक यातायात लोकजित सिंह, उप नगर आयुक्त नगर निगम संतोष पाण्डेय, उप जिलाधिकारी मुख्यालय कुमकुम जोशी, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण विक्रम सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास विभाग जितेन्द्र कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल सहित समस्त विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

आईआईएफएल बैंक की मनमानी, डीएम के एक्शन पर सम्पति नीलाम; शाखा पर तालबन्दी तय

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन महिला, बुजुर्ग बच्चों, असहायों के शोषण पर निरंतर कड़ा एक्शन ले रहा है। जिलाधिकारी सविन बसंल के समक्ष बैंक से बीमित ऋण धनराशि उपरान्त महिला को बैंक द्वारा वसूली लिए प्रताड़ित करने का मामला सामने आया जिस पर जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी ने सम्बन्धित बैंक से वसूली कर शेष ऋण धनराशि का भुगतान करते हुए पीड़ित का न्याय दिलाया।
नवाबगढ़ निवासी विधवा ज्योति ने जिलाधिकारी के समक्ष गुहार लगाई कि कि उनके पति दान सिंह ने वर्ष 2021 में आईआईएफएल बैंक से होम लोन लिया गया था, जिसका बीमा भी कराया गया था। अगस्त 2023 में उनके पति की हृदय गति रुकने से आकस्मिक मृत्यु हो गई। पति द्वारा जीवित रहते हुए ऋण की किस्तों के रूप में धनराशि रू0 2,71,278 जमा कराए गए थे तथा पति की मृत्यु के उपरांत विधवा ज्योति द्वारा धनराशि 39,470 की अतिरिक्त किस्त भी जमा की गई।
शिकायत के अनुसार, पति की मृत्यु के बाद बीमा कंपनी बजाज फाइनेंस द्वारा बैंक को बीमित ऋण की धनराशि रू0 14,61,375 का भुगतान किए जाने के बावजूद बैंक द्वारा भूमि के मूल अभिलेख वापस नहीं किए गए। इतना ही नहीं, बैंक के वसूली एजेंटों द्वारा विधवा ज्योति एवं उनकी दो मासूम पुत्रियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है तथा वसूली हेतु दबाव और दुर्व्यवहार किया गया, जिससे परिवार भय एवं तनाव की स्थिति में आ गया।
जिलाधिकारी ने प्रकरण की गंभीरता पर उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी को तत्काल जांच कर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। जांच में पाया गया कि बीमित ऋण की राशि प्राप्त होने के बावजूद बैंक द्वारा शेष धनराशि के नाम पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था।
जिलाधिकारी के निर्देश पर शेष धनराशि रू0 2 लाख की वसूली राजस्व वसूली की भांति कराते हुए जिला प्रशासन की टीम ने बैंक से संबंधित देयता का निस्तारण कराया। साथ ही बैंक को तत्काल नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने एवं भूमि के मूल अभिलेख ज्योति को सुपुर्द करने के कड़े निर्देश दिए गए। निर्देशों का अनुपालन न करने की दशा में संबंधित शाखा पर तालाबंदी, संपत्ति कुर्की एवं अन्य कठोर विधिक कार्यवाही की चेतावनी भी दी गई है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद में किसी भी बैंक, वित्तीय संस्था या वसूली एजेंट द्वारा आमजन, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं असहाय परिवारों के साथ किसी प्रकार की अभद्रता, दबाव या उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में जिला प्रशासन कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। जिला प्रशासन का यह एक्शन न केवल जनमानस के प्रति जिला प्रशासन की संवेदनशीलता एवं जवाबदेही को दर्शाता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि जनपद में किसी भी प्रकार के आर्थिक शोषण, अन्याय या मनमानी के विरुद्ध प्रशासन दृढ़तापूर्वक खड़ा है।

सीएम के संकल्पानुसार राज्य आंदोलनकारी चयन हमारी प्राथमिकता: डीएम

जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आज ऋषिपर्णा सभागार कलेक्ट्रेट में राज्य आंदोलनकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण सहित विभिन्न लंबित विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक के दौरान राज्य आंदोलनकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव एवं मांगें प्रस्तुत कीं। विशेष रूप से शपथ-पत्र के आधार पर राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाए जाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। इस पर जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि संगठनों द्वारा प्रस्तुत शपथ-पत्रों एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर प्रकरण को प्रबल संस्तुति के साथ शासन को प्रेषित किया जाएगा, ताकि उचित स्तर पर निर्णय लिया जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि आप हमारे राज्य के निर्मातागण आपकी समस्याओं का निस्तारण करना शासन-प्रशासन का परम दायित्व है। जिलाधिकारी ने समिति के गठन के संबंध में कहा कि सभी संगठन आपसी समन्वय एवं सर्वसम्मति से समिति सदस्यों के नाम प्रस्तावित कर प्रेषित करें। प्राप्त नामों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं एवं योगदान का सम्मान करता है तथा विषय के समाधान हेतु संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ कार्य करेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के संकल्पानुसार राज्य आंदोलनकारी चयन हमारी प्राथमिकता है। प्राप्त सुझाव, मानको में संशोधन चयन कमेटी निर्धारण आपके सौजन्य व विमर्श से ही किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि संवाद एवं समन्वय के माध्यम से ही समस्याओं का सकारात्मक समाधान संभव है तथा प्रशासन इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेगा।

6 वर्षों से 300 छात्रों से पूर्ण शुल्क वसूलने के बावजूद संरचना विहीन संस्थान में रखना पड़ा भारी, जिला प्रशासन ने की कार्यवाही

जिले के बड़े बकायेदारों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जिला प्रशासन ने सुभारती समूह पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशों के अनुपालन में लंबित बकाया वसूली के तहत रू 87.50 करोड़ की कुर्की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

जिलाधिकारी ने सुभारती समूह से बकाया राजस्व वसूली सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी किसी बड़े या छोटे बकायेदार को बकाया राशि न जमा करने पर कानूनी कार्रवाई से नहीं बख्शा जाएगा। जनपद में राजस्व वसूली को गति देने तथा सरकारी धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कार्यवाही कर कड़ा संदेश दिया है। जिलाधिकारी ने द्वारा जारी कुर्की वारंट से स्पष्ट किया गया है कि बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद भुगतान न होने पर यह कठोर कदम उठाया गया है।

जिलाधिकारी ने कहा कि ‘जनता के धन की लूट करने वालों को किसी भी स्थिति में छोड़ा नहीं जाएगा।” उन्होंने निर्देशित किया है कि समस्त उप जिलाधिकारी अपने-अपने तहसील क्षेत्रों में ऐसे सभी छोटे एवं बड़े बकायेदारों की सूची तैयार करें, जिन्होंने लंबे समय से देय राशि जमा नहीं की है या जानबूझकर भुगतान से बच रहे हैं। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि इनके विरुद्ध विशेष वसूली अभियान चलाकर तत्परता से वसूली सुनिश्चित की जाए।

संस्थान को 6 वर्षों से 300 छात्रों से पूर्ण शुल्क वसूलने के बावजूद संरचना विहीन संस्थान में रखना भारी पड़ गया है, जिला प्रशासन ने वसूली वारंट जारी कर दिया है, अगले कुछ ही दिवसों में संस्थान का बैंक खाता सीज संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की जा सकती है।चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने डीएम से की सिफारिशचिकित्सा शिक्षा निदेशक ने संस्थान से पूर्ण वसूली के जाने के सिफारिश जिलाधिकारी को की थी।

शैक्षिणक सत्र 2017-18 में प्रवेश पाये द्वितीय बैच के कुल 74 छात्रों द्वारा मा० उच्चतम न्यायालय में एंव रिट याचिका (सिविल) योजित की गई थी, जिसमें में छात्रों की ओर से संस्थान में संरचना उपलब्ध नहीं है, से लगतार शिक्षा प्राप्त नही कर सकते है। याचिका में एम०सी०आई० द्वारा अपने तथ्य रखे गये थे और याचिका में यह प्रश्न था कि छात्रों को अन्य संस्थान में प्रवेश देकर अन्तरित किया जायें। वर्ष 2019 में मा0 उच्चतम न्यायालय ने यह निर्देश दिया गया था कि 300 छात्राओं को राज्य के तीन राजकीय मेडिकल कॉलेजों में अन्तरित किया जाये। मा० उच्चतम न्यायालय ने यह भी आदेश दिया गया था कि यह छात्र केवल राजकीय मेडिकल कॉलेज में लागू फीस का ही भुगतान करेगे। मा० उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश को 12 अप्रैल 2019 के आदेश में पुनः पुष्ट किया गया था। श्रीदेव सूमन सुभारती मेडिकल कॉलेज में इन सभी 300 छात्राओं को राजकीय मेडिकल कॉलेजों में समयोजित किये जाने हेतु लगभग एक नये मेडिकल कॉलेज को खोलने के अनुरूप अपेक्षित संरचना स्थापित करने की आवश्यकता थी, जिसमें राज्य सरकार पर अनापेक्षित वित्तीय भार आ गया था, जबकि उक्त संस्था द्वारा इन छात्रों से शुल्क बिना किसी काम के संग्रहित किया गया था।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि राजस्व की हानि किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं है। बकायेदारों द्वारा देरी या भुगतान से बचने की प्रवृत्ति पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि बकायेदारों की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल तैयार करें, प्राथमिकता के आधार पर बड़े बकायेदारों पर कार्रवाई करें, लगातार फॉलोअप करते हुए वसूली की दैनिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें, आवश्यक होने पर कुर्की, नोटिस, बैंक खाता कुर्की या अन्य विधिक कार्रवाई भी अमल में लाई जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि सरकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों के लिए जनता की कमाई से जुटाया गया धन अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही या लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देशित किया कि अभियान को पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ चलाया जाए ताकि जनपद में राजस्व वसूली की स्थिति मजबूत हो सके।

बुजुर्ग पिता की आकस्मिक मृत्यु पश्चात ऋण बीमा होते हुए भी अदायगी लिए किया जा रहा था प्रताड़ित, डीएम ने दिलाया न्याय

जनपद देहरादून में बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा एक बुजुर्ग विधवा कमलेश तथा उनकी नामिनी असहाय पुत्री प्रीति को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित करने तथा बीमित ऋण पर क्लेम प्राप्त होने के बावजूद अतिरिक्त धनराशि जमा कराने के मामले में जिलाधिकारी सविन बंसल के हस्तक्षेप से पीड़िता को न्याय मिला है। जिला प्रशासन द्वारा त्वरित संज्ञान लेते हुए बैंक की 3.30 लाख की आरसी काटी गई, जिसके उपरांत बैंक ने 24 घंटे के भीतर 3.30 लाख रुपये का चेक नामिनी पुत्री प्रीति के नाम जारी कर दिया।

विगत दिवस जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में प्रीति सिंह ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनके पिता स्व0 राजेन्द्र पाल ने वर्ष 2023 में बैंक ऑफ बड़ौदा से  रू0 13 लाख का ऋण लिया था। बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कहने पर ऋण को सुरक्षित करने के लिए इसका बीमा कराया गया। वर्ष 2023 से अप्रैल 2025 तक उनके पिता द्वारा रू0 22,295 प्रतिमाह की नियमित किस्तें जमा की गईं। अप्रैल 2025 में उनके पिता का निधन हो गया, जिसकी सूचना तत्काल बैंक और बीमा कंपनी को दे दी गई। जून 2025 में बीमा कंपनी द्वारा ऋण क्लेम की राशि बैंक में जमा कर दी गई। इसके बावजूद बैंक द्वारा न तो नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा था, बल्कि प्रीति सिंह पर रू0 3,30,980 अतिरिक्त जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा था, तथा सम्पति को जबरन जब्त करने की धमकी दी जा रही थी।

जिलाधिकारी का हस्तक्षेप पीड़िता की शिकायत सुनने के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी को तत्काल जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला प्रशासन द्वारा जांच में पाया गया कि बीमा क्लेम राशि प्राप्त होने के बाद भी बैंक द्वारा अनुचित रूप से धनराशि की मांग की जा रही थी। इस पर बैंक की रू0 3,30,980 की आरसी काटी गई। आरसी कटते ही बैंक ने 24 घंटे के भीतर नामिनी प्रीति सिंह के नाम 3.30 लाख रुपये का चेक जारी कर दिया, जिसे आज जिलाधिकारी द्वारा प्रीति सिंह को सौंप दिया गया।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि किसी भी नागरिक के साथ वित्तीय संस्थान द्वारा की जाने वाली मनमानी और अनुचित व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनपद प्रशासन हर पीड़ित व्यक्ति की शिकायत का त्वरित समाधान सुनिश्चित करता रहेगा।” तथा भविष्य में भी इस प्रकार के मामलो पर कठौर एक्शन लिया जाएगा।

विगत दिवस जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में प्रीति सिंह ने अपनी व्यस्था सुनाते हुए जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि उनके पिता द्वारा वर्ष 2023 में बैंक ऑफ बड़ोदा से 13 लाख ऋण लिया था तथा बैंक के अधिकारियों कर्मचारियों के कहने पर ऋण सिक्योर करने हेतु ऋण का बीमा कराया था। उनके पिता द्वारा वर्ष 2023 से अपै्रल 2025 तक 22295 प्रतिमाह किस्त भरी थी किन्तु अपै्रल 2025 में पिता की मृत्यु हो जाने पर बैंक जिसकी सूचना उनके द्वारा बैंक व इंश्योरेंश कम्पनी को दी गई तथा इंश्योरेंश कम्पनी द्वारा जून में ऋण के क्लेम की धनराशि बैंक में जमा करा दी किन्तु बैंक द्वारा उनको न तो नो ड्यूज दे रहा है तथा 330980 धनराशि जमा कराने का दबाव बनाते हुए समपति जब्त करने की धमकी दे रहे हैं। जिला पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी को कार्यवाही के निर्देश दिए। जहां जिला प्रशासन द्वारा बैंक की धनराशि रू0 330980 की आरसी काट दी। बैंक की आरसी कटते ही बैंक 24 घंटे के भीतर प्रीति के नाम 3.30 धराशि का चैक काट दिया, जिसे आज जिलाधिकारी ने प्रीति सिंह को उपलब्ध करा दिया।

कूटरचित दस्तावेज से बुजुर्ग की सम्पति कराई पत्नी के नाम, डीएम ने दर्ज कराया मुकदमा, गिफ्ट डीड भी की रद्द

जिलाधिकारी सविन बंसल को 88 वर्षीय बीमार बुजुर्ग राजेन्द्र स्वरूप अग्रवाल द्वारा एक गंभीर शिकायत प्रस्तुत की गई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बड़े पुत्र ने उनके नाम पर बनाई गई पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग करते हुए उनकी नेहरू कालोनी स्थिति 2 संपत्तियों को गलत तरीके से अपनी पत्नी पूजा अग्रवाल के नाम गिफ्ट डीड के माध्यम से हस्तांतरित कर दिया।

नेहरू कालोनी स्थित 2 सम्पतियों को कूटरचित दस्तावेजों एवं धोखे से पावर ऑफ अटार्नी करवाकर बुजुर्ग की सम्पत्ति हड़पने का मामला डीएम के सम्मुख आया, जिस पर जिला प्रशासन ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए डीड रद्द करने की कार्यवाही की जा रही है। पिता के अधिकारों को अतिक्रमित करते हुए बेटे ने सम्पति को अपनी पत्नी के नाम करा दिया। सम्पति से प्राप्त किराये से पिता का उपचार चलता था। गिड़गिड़ाते हुए बजुर्ग पिता ने उपहार डीड रद्द करने की जिलाधिकारी से गुहार लगाई थी।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने मामले को गंभीरता से संज्ञान लेते हुए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) तथा उप निबंधक कार्यालय को प्रकरण की जांच कर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि वृद्धजनों के साथ किसी प्रकार का धोखाधड़ी, दबाव या कूटरचना कर संपत्ति हड़पने का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रकरण की पूरी जांच कर दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से गुहार लगाते हुए बताया कि वे उपचार हेतु अपनी बेटी के पास गाजियाबाद गए हुए थे, इसी दौरान बड़े पुत्र ने कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग कर नेहरू कॉलोनी स्थित उनकी दो संपत्तियों को अपने पक्ष में कर लिया। बुजुर्ग ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि उक्त गिफ्ट डीड को निरस्त कराया जाए तथा दोषियों पर कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी के निर्देश पर रजिस्ट्रार कार्यालय ने सम्बन्धित के विरूद्ध थाना नेहरू कालोनी में दर्ज कराया वाद। जिला प्रशासन द्वारा तथ्यों की पड़ताल करते हुए उपहार डीड रद्द कर दिया गया है।

दून डीएम दरबार में विधवा को बीमा कंपनी के प्रताड़ित करने का मामला, बैकफुट पर आया एचडीएफसी आरगो जीआईसी लि, जमा कराए 8.92 लाख रुपए

एचडीएफसी आर्गो इंश्योरेंस लिमिटेड जिला प्रशासन के नाम 8,92000 का चेक जमा कराया गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के सख्त रुख से जहां उपभोक्ताओं से ऋण बीमा धोखाधड़ी करने वाली कंपनियां बैक फुट पर है। वहीं जिला प्रशासन के कड़े और निडर फैसलों से असहाय प्रताड़ित महिला, बुजुर्ग, बच्चों को न्यायमिल रहा मिल रहा है। जिला प्रशासन ने नव वर्षीय बालिका की विधवा मां सुप्रिया को प्रताड़ित करने वाली बीमा कंपनी एचडीएफसी आरगो का इलाज कर दिया, बीमा कंपनी के सिर पर कुर्की की तलवार लटक रही है।

विगत दिवस फरियादी सुप्रिया नौटियाल पत्नी स्व० प्रदीप रतूड़ी द्वारा एक जिलाधिकारी सविन बसंल के समक्ष 15 नवम्बर 2025 गुहार लगाई कि उनके पति प्रदीप रतूड़ी द्वारा वाहन कय किये जाने हेतु प्रबन्धक, एचडीएफसी आरगो जीआईसी लि० से मु० 8,11,709/- का ऋण लिया गया था। सम्बंधित बैंक के द्वारा बताया गया कि लोन के पश्चात् बीमा एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जो आईआरडीए के दिशा निर्देशों के अनुसार किसी भी ऋण को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक है तथा एचडीएफसी अरगो जीआईसी लि० से पॉलिसी संख्या सीआई 24-14680 और सर्व सुरक्षा प्लस क्लेम नं० आरआर-सीआई 24-14680891 के माध्यम से बीमा कराया गया था। बीमा सम्बंधी दस्तावेज कभी भी डाक या कुरियर के माध्यम से भौतिक रूप से उपलब्ध नहीं कराये गये थे। उनके पति की मृत्यु के पश्चात् सुप्रियाय द्वारा बैंक से अपने पति द्वारा लिए गये लोन मु0 8,11,709/- को चुकाने हेतु दबाव बनाया जा रहा है तथा लोन न चुकाने की स्थिति में वाहन को उठा लेने की धमकी दी जा रही है, जिसके लिए सुप्रिया द्वारा सम्बंधित इंश्योरेंस कम्पनी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का अनुरोध जिलाधिकारी से किया गया।

बीमित ऋण होने के बाद भी 09 वर्षीय मासूम बेटी की विधवा मॉ सुप्रिया को किया प्रताड़ित करने पर वाले एचडीएफसी आरगो जीआईसी लि० की डीएम ने 8.11 लाख की आरसी काटते हुए फरमान सुनाया है कि 05 दिन में ऋण माफी करें नही तो सम्पति कुर्क कर निलाम की जाएगी। जिलाधिकारी की चेतावनी और सख्त रूप से एचडीएफसी आरगो जीआईसी लि० ने 892000 का चेक तहसील सदर के नाम जमा कर दिया है।

इस प्रकार उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी करने वाले अन्य बैंक एवं इंश्योरेंस कंपनियां भी डीएम के रडार पर हैं जिनके द्वारा बीमित ऋण होने के उपरान्त भी जनमानस को प्रताड़ित किया जा रहा है। ऋण बीमा धोखाधड़ी मामला डीएम तक पंहुच रहे हैं जिनका अंजाम सर्वव्यापी, सम्पति कुर्क; नीलामी; शाखा पर लगेगा ताला ऐसे की प्रकरणों पर कई मामालों में बैंक इंश्योरंश कम्पनियों की कुर्की हो चुकी है।

देहरादून में खुला उत्तराखंड का पहला आधुनिक दिव्यांग पुनर्वास केंद्र

देहरादून के गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय में राज्य का प्रथम जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) का बुधवार को विधिवत शुभारंभ हो गया है। इसमें दिव्यांगजनों को फिजियोथेरेपी, मनोवैज्ञानिक सलाह, दिव्यांग प्रमाण पत्र और कृत्रिम अंग प्राप्त करने जैसी सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो गई है।

गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय में आज रायपुर विधायक खजानदास की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महापौर सौरभ थपलियाल, विशिष्ट अतिथि देहरादून पार्षद सुनीता मंजखोला, जिलाधिकारी सविन बंसल और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र का विधिवत उद्घाटन किया।

मुख्य अतिथि महापौर सौरभ थपलियाल ने जिला प्रशासन के अभिनव प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सशक्त समाज के निर्माण में देहरादून में स्थापित उत्तराखंड का पहला आधुनिक जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र एक मील का पत्थर साबित होगा। जहां दिव्यांगजनों को सभी जरूरी सेवाएं एक साथ मिलेगी और उनका जीवन आसान और समृद्ध होगा और सशक्त दिव्यांग सशक्त समाज की अवधारणा पूरी होगी। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को उचित उपचार मिलने से उनकी दिव्यांगता भी दूर हो रही है। इस दौरान मुख्य अतिथि ने डीडीआरसी के हेल्पलाइन नंबर 8077386815 का अनावरण किया। दिव्यांग अनिल कुमार ढौंडियाल और नीरज बिष्ट को कान की मशीन प्रदान की। वहीं विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में दिव्यांगजनों की आर्ट प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिव्यांग छात्रों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष विधायक खजानदास ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री ने शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को दिव्यांग नाम देकर दिव्यांगजनों को समाज में एक गरिमा प्रदान की है। वहीं देहरादून जिला प्रशासन ने दिव्यांगों के जीवन को आसान, सरल और आत्म गौरवपूर्ण बनाने के लिए राज्य का प्रथम जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र को स्थापित कर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के संकल्प को आगे बढ़ाने में इस प्रशंसनीय कार्य को अंजाम दिया है। उन्होंने जिला नेत्र चिकित्सालय के खाली पडे इस भवन का सदुपयोग करने के लिए भी सराहना की। कहा कि आने वाले समय में इस केंद्र में दिव्यांगजनों को सभी आधुनिक सुविधाएं मुहैया होंगी।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने समाज में करीब 20 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में दिव्यांगता से प्रभावित है, जो कि एक बडी संख्या है। ऐसे में दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाना, उन्हें सभी सुविधाएं मुहैया करना हमारा दायित्व है। दिव्यांगजनों को एक प्लेटफार्म पर एकीकृत रूप में सारी सुविधाएं मिले, इस दिशा में दिव्यांगजनों के लिए डेडिकेटेड सेंटर जिला चिकित्सालय में खोला गया ळें यहां पर दिव्यांगजनों को प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, आधार कार्ड, फिजियोथेरेपी, मनोवैज्ञानिक सलाह, इलाज और कृत्रिम उपकरण के साथ ही   रोजगार प्रशिक्षण जैसी तमाम सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेगी। जिलाधिकारी ने कहा कि दिव्यांगजनों को केंद्र तक आने जाने के लिए स्पेशल डेडिकेटेड वाहन भी तैनात किया गया है।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया कि पुनर्वास केंद्र को और बेहतर बनाने के लिए जो भी सुझाव मिलेगे उन पर प्रभावी तरीके से अमल किया जाएगा। 
 
कार्यक्रम के उपरांत मुख्य अतिथि महापौर सौरथ थपलियाल, विधायक खजानदास एवं विशिष्ट अतिथि पार्षद सुनीता मंजखोला ने जिला प्रशासन के साथ जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र में वाक चिकित्सा कक्ष, स्पीच थेरेपी, अर्ली इंटरवेंशन रूम, फिजियोथेरेपी कक्ष सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया।  

उद्घाटन समारोह के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज कुमार शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर ढौंडियाल आदि सहित दिव्यांग एवं उनके परिजन मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन नोडल एजेंसी डीडीआरसी देहरादून मुनीशाभा सेवा सदन एवं पुनर्वास संस्थान के सचिव अनंत मेहरा द्वारा किया।  

एकीकृत सेवाएं एक छत के नीचे
गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय में संचालित डीडीआरसी केंद्र दिव्यांगजनों को न सिर्फ प्रमाणन, बल्कि कृत्रिम अंग, श्रवण यंत्र, उपकरण वितरण, फिजियोथेरेपी, मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक परामर्श जैसी सभी सेवाएं एक ही छत के नीचे देगा। समाज कल्याण विभाग निगरानी में नोडल एजेंसी डीडीआरसी देहरादून मुनीशाभा सेवा सदन एवं पुनर्वास संस्थान द्वारा इसका संचालन किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की समावेशी और सुलभ सेवा नीति को धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। केंद्र का संचालन भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा किया जाता है। संचालन हेतु 14 पद स्वीकृत हैं, जिनका वेतन समाज कल्याण विभाग द्वारा वहन किया जाता है।

डीडीआरसी के प्रमुख कार्य और सेवाएं
जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र का उद्देश्य दिव्यांगजनों को समुचित पुनर्वास सेवाएं प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मिलित करना है। केंद्र में पंजीकरण के बाद दिव्यांगजनों को चिकित्सकीय, सामाजिक, शैक्षिक एवं मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर उचित परामर्श और सेवाएं प्रदान की जाती हैं। आवश्यकता अनुसार उन्हें सहायक उपकरण जैसे व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, श्रवण यंत्र आदि भी वितरित किए जाते हैं। इसके साथ ही कौशल विकास प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाता है और स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ा जाता है। केंद्र विशेष शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराता है ताकि दिव्यांगजन शिक्षा या रोजगार के अवसरों से वंचित न रहें। समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रचार-प्रसार गतिविधियां चलाई जाती हैं, जिससे दिव्यांगजनों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो सके। इसके अतिरिक्त, उन्हें सरकारी योजनाओं जैसे यूडीआईडी कार्ड, पेंशन, छात्रवृत्ति आदि से भी जोड़ा जाता है। केंद्र की विशेषता इसकी बहु-विषयी (मल्टी-डिसिप्लिनरी) टीम होती है जिसमें फिजियोथेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट और काउंसलर जैसे विशेषज्ञ सम्मिलित होते हैं, जो दिव्यांगजनों के लिए समग्र पुनर्वास सुनिश्चित करते हैं।