हेमकुंट साहिब की यात्रा सुरक्षित, श्रद्धालुओं ने कहा कुछ लोग उड़ा रहे अफवाह

हेमकुंट साहिब की यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों ने पुलिस – प्रशासन के सहयोग की प्रशंसा करते हुए कहा है कि यात्रा सकुशल चल रही है। कुछ लोग सिर्फ सोशल मीडिया व्यूज के लिए अफवाह फैलाकर माहौल बिगाड़ रहे हैं।

पंबाज से अपने परिवार के साथ हेमकुंट साहिब दर्शन के लिए आई श्रद्धालु सुखबीर कौर ने बताया कि वो 19 जून को यात्रा पर निकली थी। इस दौरान उन्हें कई लोगों ने यात्रा को लेकर सतर्क किया। मंगलवार को वापसी में गोविंदघाट पहुंची सुखवीर कौर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें पूरी यात्रा में कहीं कोई दिक्कत नहीं आई। स्थानीय प्रशासन से लेकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पूरी क्षमता से यात्रा संचालित कर रही है। चिकित्सा सुविधा से लेकर, रहने खाने तक की पर्याप्त सुविधा है। उन्होंने बताया कि यात्रा में स्थानीय लोग भी भरपूर सहयोग कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि कुछ लोग सिर्फ सोशल मीडिया व्यूज के लिए यात्रा को लेकर अफवाह फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि अन्य श्रद्धालुओं से भी यात्रा कर दर्शन लाभ करने की अपील की है।

यात्रा सम्पन्न कर चुके अन्य तीर्थयात्रियों ने भी वीडियो बयान में कहा है कि यात्रा सकुशल चल रही है, भारी भीड़ के बावजूद सभी सुविधाएं मिल रही है। इसमें पुलिस प्रशासन पूरा सहयोग कर रहा है। तीर्थयात्रियों ने कहा कि यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ाई जा रही है, जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि यात्रा पहले की तरह शांतिपूर्वतक ढंग से चल रही है। जिसमेँ स्थानीय लोग भी पूरा सहयोग कर रहे हैं।

सीएम आवास में मुख्यमंत्री धामी की मौजूदगी में हुआ शहद निष्कासन कार्य

मुख्यमंत्री आवास परिसर में शहद निष्कासन कार्य किया गया। पहले चरण में 60 किलोग्राम शहद निकाला किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि मुख्यमंत्री आवास परिसर एवं आस-पास के क्षेत्र में 3-बी गार्डन (बी- फ्रेंडली गार्डन, बटर – फ्लाई फ्रेंडली गार्डन एवं बर्ड फ्रेंडली गार्डन) विकसित करने की दिशा में कार्य किये जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में मौन पालन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रचुर मात्रा में फूलों की प्रजातियां हैं, जो उच्च गुणवत्ता वाले जैविक शहद उत्पादन में सहायक हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में औषधीय गुणों वाला शहद तैयार करने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाए।

इस अवसर पर उद्यान प्रभारी दीपक पुरोहित और चेयरमैन देवभूमि पर्वतीय ग्रामोद्योग विकास संस्थान हरबर्टपुर अजय कुमार सैनी मौजूद थे।

सीएम की अध्यक्षता में हुआ ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर भारतीय सेना का अभिनंदन प्रस्ताव पारित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में ऑपरेशन सिंदूर की अभूतपूर्व सफलता पर भारतीय सेना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं रक्षा मंत्रालय का सर्वसम्मति से अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया गया।

मंत्रिपरिषद के प्रस्ताव में कहा गया कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना के अदम्य साहस, अपार पराक्रम और उत्कृष्ट रणनीतिक कौशल की सफलता को दर्शाता है। यह अभियान भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और आत्मबल का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है।

मंत्रिपरिषद ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक सैन्य अभियान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और भारतीय सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में सदैव अंकित रहेगा। इस प्रस्ताव को भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय को भेजा जाएगा ताकि उत्तराखण्ड की जनता की भावनाओं से उन्हें अवगत कराया जा सके।

उत्तराखण्ड वीर भूमि है, जहां से देश की सेना में सेवा देने वाले हजारों जवान देश की रक्षा में सदैव अग्रणी रहते हैं। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। यह अभियान भारतीय सेना की श्रेष्ठता को दर्शाता है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व और रक्षा मंत्रालय की दूरदर्शिता का भी परिचायक है।
– पुष्कर सिंह धामी,
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

आईटीबीपी को भेड़, बकरी, मुर्गी और ट्राउट फिश की सप्लाई करते हैं किसान, किया ढाई करोड का कारोबार

उत्तराखंड के सीमांत जिलों में स्थित आईटीबीपी की बटालियनें अक्तूबर, 2024 तक मटन, चिकन, फिश सप्लाई के लिए बड़े शहरों पर निर्भर थीं। लेकिन अब उत्तराखंड पशुपालन विभाग ने आईटीबीपी का अनुबंध सीधे स्थानीय पशु पालकों से करा दिया है। इसके बाद शुरुआती पांच महीने में ही, चार सीमांत जिलों के 253 किसान आईटीबीपी के साथ 2.6 करोड़ का कारोबार कर चुके हैं।
पशुपालन विभाग ने गत 30 अक्तूबर को इस योजना को लेकर आईटीबीपी के साथ विधिवित अनुबंध किया। इसके तहत पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी और चम्पावत जनपद के 10 सहकारी समितियों और एफपीओ से जुड़े 253 किसान आईटीबीपी की नजदीकी बटालियन को जिंदा मटन, चिकन, फिश की आपूर्ति कर रहे हैं। योजना के शुरुआती पांच महीने में ही ये किसान, आईटीबीपी को कुल मिलाकर 79,530 किलो (42,748 किलो जिंदा भेड़- बकरी, 29,407 किलो चिकन और 7,374 किलो ट्राउट फिश) की सप्लाई कर चुके हैं। इस तरह उन्होंने आईटीबीपी के साथ कुल 2.6 करोड़ रुपए का कारोबार कर लिया है।

’सालाना 20 करोड़ रुपए कारोबार की उम्मीद’
पशुपालन विभाग के सचिव डॉ बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि योजना के तहत किसानों को सप्लाई के 24 घंटे के भीतर, डीबीटी के जरिए भुगतान किया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने पांच करोड़ रुपए के रिवाल्विंग फंड की व्यवस्था की हुई है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत आईटीबीपी को सालाना 800 मीट्रिक टन मटन, चिकन, फिश सप्लाई की उम्मीद है, इससे किसानों का कुल करीब 20 करोड़ का कारोबार होगा। जो सीमांत किसानों की आजीविका में बड़ा बदलाव लाएगा।

इस योजना के बेहद सकारात्मक परिणाम आए हैं, सीमांत के किसानों की आय बढ़ने से गांवों में पलायन भी कम होगा। साथ ही वो आईटीबीपी के साथ मिलकर, देश की रक्षा पंक्ति को मजबूत करने का काम करेंगे। आईटीबीपी को भी ताजा खाद्य सामग्री की आपूर्ति होगी।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

’सफल किसानों की कहानी’
पिथौरागढ़ जिले में मूनाकोट ब्लॉक के बड़ालू गांव के निवासी नरेंद्र प्रसाद भी जनवरी से आईटीबीपी को चिकन सप्लाई कर रहे हैं। 40 वर्षीय नरेंद्र प्रसाद बताते हैं कि उन्होंने 2022-23 में पशुपालन की कुक्कुट पालन योजना के तहत मुर्गी पालन का काम शुरू किया, अब वो प्रति माह करीब 16 कुंतल चिकन की सप्लाई करते हैं, जिससे आईटीबीपी को भी तीन कुंतल सप्लाई होती है। इसी तरह मूनाकोट ब्लॉक में ही देवदार गांव के निवासी प्रकाश कोहली भी जनवरी 2025 से आईटीबीपी को 11 कुंतल बकरी सप्लाई कर चुके हैं। जिससे उन्हें 50 हजार का फायदा हुआ है। योजना का फायदा देखते हुए अब वो गोट वैली में भी आवेदन कर रहे हैं।

नजरियाः राज्य भर में 270 केंद्रों के जरिए हुई मंडुआ की खरीद

कुछ समय पहले तक उपेक्षित रहने वाला मंडुआ अब हाथों हाथ बिक रहा है। राज्य सरकार ने ही इस साल विभिन्न सहकारी और किसान संघों के जरिए उत्तराखंड के किसानों से 3100 मीट्रिक टन से अधिक मंडुआ खरीदा है। सरकार ने इस साल किसानों को मंडुआ पर 4200 प्रति कुंतल का समर्थन मूल्य भी दिया है।

उत्तराखंड के सीढ़ीदार खेतों में परंपरागत रूप से मंडुआ की खेती होती रही है। लेकिन कुछ साल पहले तक मंडुआ फसल उपेक्षा का शिकार रहती थी, जिस कारण किसानों का भी मंडुआ उत्पादन के प्रति मोह भंग होने लगा था। लेकिन केंद्र और उत्तराखंड सरकार द्वारा अब मिलेट्स फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिस कारण उत्तराखंड में मंडुआ उत्पादक क्षेत्र के साथ ही उत्पादन भी बढ़ रहा है। मौजूदा सरकार ने मंडुआ उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए सबसे पहले 2022 इसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत के तहत, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदना शुरू किया। साथ ही उपभोक्ताओं तक मिलेट्स उत्पाद पहुंचाने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली से लेकर मिड डे मील और आंगनबाड़ी केंद्रों के पोषण कार्यक्रम में इसे शामिल किया गया। इसी तरह सरकार ने स्टेट मिलेट मिशन शुरू करते हुए, उत्पादन बढ़ाने के साथ ही, मिलेट्स उत्पादों को अपनाने के लिए व्यापक प्रचार प्रसार, किसानों से खरीद से लेकर भंडारण तक की मजबूत व्यवस्था तैयार की। वहीं किसानों को बीज, खाद पर अस्सी प्रतिशत तक सब्सिडी दी गई।

270 केद्रों के जरिए खरीद
सरकार ने दूर दराज के किसानों से मंडुआ खरीदने के लिए बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों के सहयोग से जगह – जगह संग्रह केंद्र स्थापित किए। इस प्रयोग की सफलता की कहानी यूं कही जा सकती है कि 2020-21 में जहां इन केंद्रों की कुल संख्या 23 थी जो 2024-25 में बढ़कर 270 हो गई है। इन केद्रों के जरिए इस साल उत्तराखंड के किसानों से 3100.17 मीट्रिक टन, मंडुआ की खरीद की गई, इसके लिए किसानों को 42.46 प्रति किलो की दर से समर्थन मूल्य दिया गया। सरकार ने मंडुआ खरीद में सहयोग देने के लिए किसान संघों को 150 रुपए प्रति कुंतल और बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को प्रति केंद्र 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। साथ ही सुनिश्चित किया गया कि केंद्रों का भुगतान 72 घंटे में कर दिया जाए।

समर्थन मूल्य में 68 प्रतिशत का उछाल
प्रदेश में 2021-22 में मंडुआ समर्थन मूल्य कुल 2500 प्रति कुंतल था, जो 2024-25 में 4200 प्रति कुंतल हो गया है। इस तरह दो साल के अंतराल में ही समर्थन मूल्य 68 प्रतिशत बढ़ गया है। किसानों तक इसका लाभ पहुंचने से मंडुआ उत्पादन क्षेत्र भी बढ़ रहा है। इसके साथ ही सरकार ओपर मार्केट और हाउस ऑफ हिमालय के जरिए भी मंडुआ उत्पादों को प्रोत्साहन दे रही है।

उत्तराखंड में मंडुआ परंपरागत तौर पर उगाया जाता है। यह पौष्टिक होने के साथ ही ऑर्गेनिक भी होता है। इधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मिलेट्स उत्पादों को बढ़ावा दिए जाने के बाद भी मंडुआ की मांग बढ़ी है। इसलिए राज्य सरकार सीधे किसानों से मंडुआ खरीद करते हुए, उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड।

11 करोड़ रूपये का लाभांश सरकार को पिटकुल ने दिया

पिटकुल द्वारा उत्तराखण्ड शासन को लाभांश के रूप में 11 करोड़ की धनराशि का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में 11 करोड़ का लांभांश का चेक प्रबंध निदेशक पिटकुल ने सौंपा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड को ऊर्जा प्रदेश बनाने के लिए विद्युत निगमों को पूरी सक्रियता से सहयोगी बनना होगा। राज्य स्थापना की मूल संकल्पना में उत्तराखण्ड को ऊर्जा प्रदेश बनाना था। उन्होंने कहा कि ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा लगातार कार्य किये जा रहे हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि आगामी पांच सालों में उत्तराखण्ड में राज्य की मांग के हिसाब से ऊर्जा का उत्पादन हो। ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तेजी से कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने पिटकुल के अधिकारियों को निर्देश दिये कि सितम्बर 2024 में पिटकुल के जिन 05 नये उपकेन्द्रों का शिलान्यास किया गया उनके कार्यों में तेजी लाई जाए।

प्रबंध निदेशक पिटकुल पी.सी.ध्यानी ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में पिटकुल ने गत वर्ष 2022-2023 में रू0 26.99 करोड़ की तुलना में वित्तीय वर्ष 2023-24 में रू0 141.67 करोड़ का लाभ अर्जित किया। विगत 03 वर्षों से उत्तराखण्ड शासन को प्रत्येक वर्ष रू० 5 करोड़ का लाभांश दिया गया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में पिटकुल में विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य किये जा रहे हैं। वर्तमान में पिटकुल की ट्रॉसमिशन उपलब्धता भी 99.70 प्रतिशत है जिसके निर्धारित राष्ट्रीय मानकों 98 प्रतिशत से अधिक होने के फलस्वरूप पिटकुल को प्राप्त होने वाली प्रोत्साहन धनराशि के एक तिहाई भाग को विद्युत टैरिफ में छूट के रूप में सीधे दिये जाने से विद्युत उपभोक्ताओं को लाभ प्राप्त हो रहा है।

इस अवसर पर अपर सचिव मनमोहन मैनाली, निदेशक पिटकुल जी.एस. बदियाल, पिटकुल से अरूण सबरवाल, मनोज कुमार, शालू जैन, पंकज कुमार उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से लाभांवित हो रहे हैं प्रदेश के 8.88 लाख किसान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार, खेती किसानी की तरक्की के लिए प्रयासरत है। इसके लिए कृषि विभाग कई कल्याणकारी योजनाएं चला रहा है। साथ ही केंद्र सरकार की अहम योजनाओं के लाभ भी प्रदेश के किसानों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
कृषि विभाग किसानों को प्रमाणित बीज वितरण, कृषि उपकरणों की उपलब्धता, सिंचाई सुविधा, उर्वरक, कीट नियंत्रण, फसल बीमा की सुविधा देने के साथ ही केंद्र सरकार के सहयोग से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ दे रहा है। सरकार किसानों को अपने खेत की मिट्टी के पोषक तत्वों की जांच करते हुए, उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, इसके लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत भारत सरकार द्वारा इस वित्तीय वर्ष में 508.89 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है।
इसी तरह परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत कलस्टर के आधार पर चयनित गांवों जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में यह योजना 3900 क्लस्टर में संचालित की जा रही है, इसके लिए भारत सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में 13127.40 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है।

सम्मान निधि से लाभांवित हो रहे हैं 8.88 लाख किसान
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रदेश में 8.88 लाख पंजीकृत किसानों को प्रतिवर्ष छह हजार रुपए की धनराशि डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में दी जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 178.04 करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। योजना के तहत अब तक प्रदेश में कुल 2757.20 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी की है। इसी तरह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत एक अप्रैल से सभी जनपदों में चावल और मंडुआ फसल को योजना के तहत कवर किया जा रहा है।

एससी-एसटी बहुल गांवों के लिए विशेष योजना
सरकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छोटी जोत वाले किसानों के लिए विशेष कृषि विकास कार्यक्रम चला रही है। इसके तहत वर्तमान वित्तीय वर्ष में चयनित गांवों के लिए 700 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। हमारी प्राथमिकता आधुनिक तकनीक और नवाचारों को किसानों तक पहुंचाना है, जिससे खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सके। उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए जैविक खेती, फल उत्पादन और औषधीय पौधों की खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

प्रमुख विभागों को कार्यवृत अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री को प्रेषित करने के निर्देश

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने पेयजल, आपदा प्रबन्धन, सिंचाई, विद्यालयी शिक्षा एवं शहरी विकास विभाग को सचिव स्तर पर प्रत्येक माह समीक्षा बैठक करने के साथ ही कार्यवृत अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री को प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं। सचिवालय में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री की घोषणाओं के क्रियान्वयन की अद्यतन आख्या घोषणा पोर्टल पर अपलोड नही किये जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए एसीएस राधा रतूड़ी ने विभिन्न विभागों में घोषणा नोडल अधिकारियों को घोषणा पोर्टल पर नियमित रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विभागों को विलोपित अथवा हस्तान्तरित की जाने वाली घोषणाओं को अपने स्तर पर लम्बित न रख करके उनके सम्बन्ध में औचित्यपूर्ण प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय को जल्द से जल्द प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं। एसीएस ने ऐसी घोषणाएं जो एक से अधिक विभागों से सम्बन्धित है, उनकों विभाग परस्पर समन्वय से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए है। उन्होंने निर्देश दिए कि घोषणाओं के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय संसाधनों तथा उनकी फिजबिलटी आंकलन भी विभागों द्वारा अपने स्तर पर ही किया जाएगा।
एसीएस ने पेयजल विभाग को वर्तमान में हैण्डपम्प लगाने की योजनाओं के औचित्य के आधार पर पुनः समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने पेयजल की लंबित योजनाओं की स्थिति को दो सप्ताह की टाइमलाइन के भीतर अद्यतन करने के निर्देश दिए हैं। एसीएस ने शहरी विकास विभाग को प्रधानमंत्री आवास शहरी योजना पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी विभागों को मुख्यमंत्री की घोषणाओं के क्रियान्वयन को शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए मिशन मोड पर कार्य करने निर्देश दिए।
बैठक में सचिव डा. सुरेन्द्र नारायण पाण्डेय, अरविन्द सिंह हयांकी, अपर सचिव सविन बंसल, रंजना राजगुरू, नितिन भदौरिया, उप सचिव हीरा सिंह बसेड़ा तथा सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

भू-कानून को लेकर कैबिनेट में लाई जाएगी रिपोर्टः सीएम

राज्य में सशक्त भू-कानून को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि राज्य में भू-कानून लागू करने को सरकार पूरी तरह से तैयार और प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जल्द ही कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार के लिए जन-भावनाओं का सम्मान सर्वाेपरि है।
मीडियाकर्मियों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भू-कानून के लिए गठित समिति की रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस रिपोर्ट को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता की भावना के अनुरूप सशक्त भू-कानून राज्य में लागू करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है।

सही पैरवी ना करने वाले विधि अधिकारियों पर गिरी गाज

उत्तराखण्ड शासन द्वारा उच्च न्यायालय, नैनीताल उत्तराखण्ड के समक्ष राज्य की ओर से पैरवी/बहस करने के लिए उत्तराखण्ड राज्य की ओर से विभिन्न पदों पर आबद्ध विधि अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा एवं सम्यक् विचारोपरांत पद से हटाया गया है। हटाए गए विधि अधिकारियों में अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता अनिल कुमार बिष्ट, अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता अंजली भार्गव, स्थायी अधिवक्ता एन.पी.शाह, ब्रीफ होल्डर इंदु शर्मा, दीपक चुफाल, पंकज नेगी एवं हर्षित लखेड़ा शामिल है।