प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चारधाम यात्रा के संचालन को शुभकामना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चारधाम यात्रा शुरु होने पर देशवासियों को शुभकामना संदेश देते हुए, उत्तराखंड आने वाले तीर्थयात्रियों से पांच संकल्पों का पालन करने का आग्रह किया है।
केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर प्रेषित अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि – देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि बाबा केदार के दर्शन सहित चारों धामों की यह पावन यात्रा भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का एक भव्य उत्सव है। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्राओं से भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा दी थी। जगद्गुरु रामानुजाचार्य और जगद्गुरु माध्वाचार्य ने भी अपने धर्मविचारों को समृद्ध करने के लिए बद्रीनाथ की यात्रा की थी।
आज भी हिमालय की गोद में विराजमान ये चारों धाम हमारी शाश्वत आस्था और विश्वास के दिव्य केंद्र हैं। हर वर्ष विविध भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग यहां पहुंचते हुए एक भारत, श्रेष्ठ भारत के भाव को और अधिक सशक्त करते हैं। इस वर्ष की यात्रा भी इसी परंपरा का विस्तार है।

विकसित भारत में विकसित उत्तराखंड की भूमिका
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले, उन्होंने बाबा केदार के द्वार पर खुद ये कहा था कि ये दशक उत्तराखंड का दशक होगा। आज उत्तराखंड की प्रगति इस विश्वास को साकार कर रही है। उत्तराखंड आज पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक प्रगति, तीनों क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड में विकास का जो महायज्ञ चल रहा है, उसने चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बनाया है। जिससे श्रद्धालुओं, संतजनों और पर्यटकों को सुविधा हो रही है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड आने वाले अतिथियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास रखते हुए, उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को जीने का प्रयास भी करें। इससे उन्हें एक अलग संतुष्टि भी मिलेगी।

पांच संकल्प

पहला संकल्प – स्वच्छता सर्वाेपरि
धाम और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखें। नदियों को साफ रखने के लिए अपना योगदान दें। सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त यात्रा का संकल्प लें और इस पावन धरा की गरिमा को बनाए रखें।

दूसरा संकल्प – प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता
हिमालय की इस दिव्य धरा के प्रति संवेदनशील रहे। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए, एक पेड़ मां के नामश् जैसे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।

तीसरा संकल्प – सेवा, सहयोग और एकता पर बल
पुरातन काल से तीर्थ यात्राएं सर्वजन की सेवा और सामाजिक समरसता को स्थापित करने का माध्यम रही हैं। आज भी लोग इसी सेवा भाव से तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं। इसीलिए तीर्थयात्री अपनी यात्रा के प्रत्येक दिन, किसी ना किसी रूप में, लोगों की सेवा का एक काम अवश्य करें।
सहयात्रियों की सहायता करें और देश की विभिन्न जगहों से आए लोगों से जुड़े। उनकी परंपराओं का सहभागी बनकर ष्एक भारत, श्रेष्ठ भारतश् की भावना को इस यात्रा के माध्यम से सशक्त करें।

चौथा संकल्प – वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा
अपने मूल स्थान से चलकर घर लौटने तक अपने कुल खर्च का पांच प्रतिशत हिस्सा लोकल उत्पादों को खरीदने पर जरूर खर्च करें। अगर किसी स्थानीय चीज की जरूरत इस मौसम में नहीं भी है, तो भी उसे भविष्य के इस्तेमाल के भाव से ही खरीदने का प्रयास करें।

पांचवां संकल्प – अनुशासन, सुरक्षा और मर्यादा का पालन
यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करें। एक जिम्मेदार और सजग नागरिक के रूप में इस तीर्थ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाएं। हम ये प्रयास करें कि हमारी यात्रा से, इस यात्रा के आयोजन और प्रबंधन में जितने भी लोग लगे हुए हैं, उन्हें कोई असुविधा ना हो। प्रधानमंत्री ने क्रिएटर्स, इंफ्लूएंसर्स से भी उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और यहां की छोटी-छोटी परंपराओं को भी जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है।

हर हर महादेव के उद्घोष के साथ खुले बाबा केदारनाथ धाम के कपाट, सीएम बने साक्षी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बने कपाट खुलने के दिव्य क्षणों के साक्षी हर हर महादेव, जय श्री केदार के उदघोष से प्रफुल्लित हुई बाबा केदार की नगरी

श्रद्धा, आस्था और दिव्यता की अद्भुत त्रिवेणी, ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज बुधवार को विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। प्रातः 8 बजे शुभ मुहूर्त में कपाट खुलते ही पूरा धाम “हर-हर महादेव” और “जय श्री केदार” के उद्घोष से गूंज उठा। धाम में पहली पूजा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नाम से की गई।

इस पावन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे और उन्होंने बाबा केदारनाथ के दर्शन कर प्रदेश एवं देश की सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। सिख रेजीमेंट के बैंड की भक्तिमय धुनों के बीच कपाट उद्घाटन का यह दिव्य क्षण और भी अलौकिक बन गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि केदारनाथ धाम न केवल सनातन धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि यह भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा हर वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है और इस वर्ष भी बाबा केदार के आशीर्वाद से यात्रा ऐतिहासिक होगी।

मुख्यमंत्री ने की अपील
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सुगम बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने सभी उत्तराखंडवासियों से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के प्रति सेवा और आतिथ्य भाव बनाए रखने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को बाबा केदारनाथ का अनन्य भक्त बताते हुए कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद उनके मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम का भव्य एवं दिव्य पुनर्निर्माण हुआ है, जो आज विश्वभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है।

फूलों से सजा बाबा केदार का धाम
भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ से गुप्तकाशी, फाटा और गौरीकुंड होते हुए कल शाम ही धाम पहुंच चुकी थी। इसी क्रम में कपाट खुलने की प्रक्रिया आज प्रातः 5 बजे से प्रारंभ हुई। इसके बाद प्रातः 8 बजे रावल भीमाशंकर लिंग, पुजारी टी गंगाधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, तीर्थ पुरोहित उमेश चंद्र पोस्ती सहित धर्माचार्यों एवं वेदपाठियों ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर विधिवत पूजा-अर्चना की। देव आवाहन एवं लोककल्याण के संकल्प के साथ ठीक 8 बजे कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट उद्घाटन के अवसर पर श्री केदारनाथ मंदिर को 51 क्विंटल से अधिक फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। कपाट खुलते ही हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

ये रहे मौजूद
कपाट खुलने के अवसर पर गीता धामी, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत, ब्लॉक प्रमुख ऊखीमठ पंकज शुक्ला, जिला पंचायत सदस्य अमित मैखंडी, पूर्व जिलाध्यक्ष महावीर पंवार, तीर्थ पुरोहित उमेश चंद्र पोस्ती, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग/मुख्य कार्याधिकारी बीकेटीसी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर, सहित बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहितगण, हकहकूकधारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

संवाद ही विश्वास की नींव, राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस पर देहरादून में विचार गोष्ठी हुई आयोजित

राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर पब्लिक रिलेशंस सोसायटी ऑफ इंडिया देहरादून चौप्टर द्वारा राजपुर रोड स्थित हुडको सभागार में “लोकतंत्र में जनसंपर्क का महत्व” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई।

कार्यक्रम में चौप्टर के अध्यक्ष एवं उपनिदेशक रवि बिजारनिया ने कहा कि लोकतंत्र में जनसंपर्क सरकार और जनता के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करता है। प्रभावी जनसंपर्क के माध्यम से संवाद स्थापित होता है और इसी संवाद से विश्वास का निर्माण होता है, जो समाज में आशाओं को साकार करता है।

हुडको के क्षेत्रीय प्रमुख संजय भार्गव ने कहा कि जनसंपर्क केवल शासन-प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के स्तर पर भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने वर्तमान समय में संचार के बढ़ते माध्यमों के बीच जिम्मेदार संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

चौप्टर के सचिव अनिल सती ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए की गतिविधियों और उद्देश्यों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में सदस्य मनीता हरि ने फेक न्यूज़ और डीप फेक जैसी चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता बताई।

वक्ताओं ने जनसंपर्क के सकारात्मक, प्रामाणिक और प्रभावी स्वरूप पर बल देते हुए इसे संस्थागत के साथ-साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी राष्ट्र और समाज सेवा का सशक्त माध्यम बताया।

गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ पत्रकार संजीव कंडवाल ने किया।

इस अवसर पर राकेश डोभाल, प्रियांक वशिष्ठ, सुशील कुमार, मनोज सती, रितिक, वैभव गोयल, विमल डबराल, दिनेश कुमार, दीपक शर्मा, संजय पांडेय, पुष्कर नेगी सहित अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

एक लाख करोड़ रूपए की राष्ट्रीय योजना, उत्तराखंड को विशेष लाभः राजेश कुमार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड के शहरी क्षेत्रों के समग्र विकास, आधुनिक आधारभूत ढांचे के निर्माण और नगर निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अर्बन चौलेंज फंड राज्य के लिए बड़ी सौगात साबित होने जा रही है। राज्य सचिवालय में आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें अपर सचिव आवास विनोद गिरी सहित आवास व शहरी विकास के उच्चाधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। इस महत्वपूर्ण बैठक में शहरी विकास निदेशालय, उत्तराखंड शासन द्वारा योजना को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके तहत राज्य के नगर निकाय प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर परियोजनाएं तैयार कर केंद्र सरकार को भेजेंगे।

भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित इस योजना के तहत देशभर में ₹1 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह योजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर तीन वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। योजना का उद्देश्य शहरों में बड़े निवेश को आकर्षित कर उन्हें विकास के नए केंद्रों के रूप में स्थापित करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उत्तराखंड के नगर निकाय इस योजना का अधिकतम लाभ उठाएं और समयबद्ध तरीके से उच्च गुणवत्ता वाले प्रस्ताव तैयार करें, ताकि राज्य के शहरों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा सके।

पर्वतीय राज्य होने के कारण उत्तराखंड को मिलेगा अतिरिक्त फायदा

उत्तराखंड को इस योजना में विशेष लाभ इसलिए मिलेगा क्योंकि पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां के सभी 108 नगर निकाय क्रेडिट रीपेमेंट गारंटी योजना के दायरे में आएंगे। इससे छोटे नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतें भी बैंक ऋण लेकर बड़े विकास कार्य शुरू कर सकेंगी। जिन निकायों की वित्तीय क्षमता सीमित है, वे भी अब विकास योजनाओं को गति दे सकेंगे।

तीन क्षेत्रों में भेजे जाएंगे विकास प्रस्ताव

योजना के अंतर्गत नगर निकायों से तीन प्रमुख क्षेत्रों में परियोजनाएं मांगी गई हैं। पहला, जल एवं स्वच्छता, जिसमें पेयजल आपूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट, वर्षा जल निकासी और कूड़ा निस्तारण शामिल हैं। दूसरा, रचनात्मक पुनर्विकास, जिसके तहत पुराने शहर क्षेत्रों, बाजारों, विरासत स्थलों और सार्वजनिक स्थानों का कायाकल्प किया जाएगा। तीसरा, सिटीज़ ऐज़ ग्रोथ हब्स, जिसमें शहरों को पर्यटन, शिक्षा, उद्योग और व्यापार के केंद्र के रूप में विकसित करने वाली योजनाओं को प्राथमिकता मिलेगी।

राज्य के कई शहरों को मिलेगा लाभ

राज्य सरकार द्वारा संभावित परियोजनाओं के उदाहरण भी तय किए गए हैं। ऋषिकेश, देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, काशीपुर, रुड़की, श्रीनगर, रामनगर और रुद्रपुर जैसे शहरों में औद्योगिक, तीर्थाटन पर्यटन और शैक्षिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रस्ताव तैयार किए जा सकते हैं।

50 प्रतिशत मार्केट फाइनेंस अनिवार्य

योजना की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि कुल परियोजना लागत का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मार्केट फाइनेंस यानी बैंक ऋण, बॉन्ड या पीपीपी मॉडल से जुटाना होगा। केंद्र सरकार 25 प्रतिशत और शेष 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार अथवा नगर निकाय वहन करेंगे। इससे नगर निकायों में वित्तीय अनुशासन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
प्रदर्शन आधारित होगी फंडिंग
फंड जारी करने की प्रक्रिया भी चरणबद्ध और प्रदर्शन आधारित रखी गई है। स्वीकृति के बाद केंद्रीय सहायता तीन किस्तों में मिलेगीकृपहली किस्त 30 प्रतिशत, दूसरी 50 प्रतिशत और अंतिम 20 प्रतिशत। आगे की किस्तों के लिए परियोजना की भौतिक प्रगति, जियो टैगिंग और स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक होगा।

सुधारों की शर्तें भी लागू योजना के साथ कई

सुधारात्मक शर्तें भी जोड़ी गई हैं। नगर निकायों को संपत्ति कर सुधार, ऑडिटेड वित्तीय लेखे, डिजिटल नागरिक सेवाएं, जीआईएस आधारित सर्वे, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, जलापूर्ति सुधार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जलवायु अनुकूल शहरी नियोजन जैसे कदम उठाने होंगे।

मुख्यमंत्री ने दिए तेजी से कार्यवाही के निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी नगर निकाय शीघ्रता से अपने क्षेत्रों की प्राथमिक परियोजनाएं चिन्हित करें, कॉसेप्ट नोट तैयार करें और डीपीआर बनाकर समय पर केंद्र सरकार को भेजें। उन्होंने कहा कि राज्य के शहरों को स्वच्छ, सुगम, आधुनिक और निवेश अनुकूल बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

उत्तराखंड के शहरी भविष्य का रोडमैप
अर्बन चौलेंज फंड उत्तराखंड के शहरों के लिए केवल एक योजना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के शहरी विकास का रोडमैप साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह योजना राज्य के शहरों की तस्वीर बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया परिवर्तनकारी योजना

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि अर्बन चौलेंज फंड उत्तराखंड के शहरी विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी योजना साबित होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सभी नगर निकायों को इस योजना का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय स्वरूप को देखते हुए यहां के नगर निकायों को विशेष लाभ मिलेगा, जिससे छोटे शहरों और नगर पंचायतों में भी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार संभव हो सकेगा। डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार नगर निकायों से गुणवत्तापूर्ण और व्यवहारिक परियोजनाएं तैयार कराने पर विशेष जोर दे रही है। जलापूर्ति, सीवरेज, स्वच्छता, ट्रैफिक प्रबंधन, पर्यटन सुविधाएं, पुराने शहर क्षेत्रों का पुनर्विकास और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह योजना शहरों को आत्मनिर्भर, आधुनिक, स्वच्छ और निवेश अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सभी नगर निकायों को समयबद्ध रूप से प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

बारिश से क्षतिग्रस्त हुए पुल की कार्य प्रगति की जानकारी लेकर सीएम ने दिए जल्द निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी रोड स्थित शिव मंदिर के निर्माणाधीन पुल का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बारिश से क्षतिग्रस्त हुए पुल की कार्य प्रगति की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुल निर्माण का कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि आमजन को आवागमन में सुविधा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुल देहरादून और मसूरी को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों का आवागमन होता है। उन्होंने कहा कि यातायात को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से दोनों ओर से आवागमन के लिए वैली ब्रिज का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है, जो दूसरी ओर से भी शीघ्र ही पूर्ण होकर संचालित हो जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थान पर स्थायी पुल का निर्माण कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है, जिसे आगामी 2 से 3 माह के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सड़कों एवं पुलों के सुदृढ़ीकरण हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में सड़क एवं पुल निर्माण से संबंधित अनेक परियोजनाएं तेजी से क्रियान्वित की जा रही हैं, जिससे प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी चारधाम यात्रा एवं आदि कैलास यात्रा को ध्यान में रखते हुए सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यक अवसंरचनात्मक कार्यों को समय पर पूर्ण किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा कार्यों की प्रगति की निरंतर समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।

सीएस बर्द्धन ने अखरोट विकास कार्यक्रम के तहत् लगाए गयी अखरोट की पौध की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन समिति की उच्चाधिकार समिति की बैठक संपन्न हुयी। बैठक के दौरान उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन समिति के विभिन्न कार्यकलापों की जानकारी समिति के समक्ष रखी गयी एवं विभिन्न प्रस्तावों को संस्तुति प्रदान की गयी।

मुख्य सचिव ने अखरोट विकास कार्यक्रम के तहत् लगाए गयी अखरोट की पौध की अद्यतन स्थिति की जानकारी मांगी। उन्होंने सम्बन्धित प्रभाग के डीएफओ से इसका मूल्यांकन कर अवगत कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने योजना के अंतर्गत किसानों द्वारा इससे होने वाले फलोत्पादन की भी अद्यतन स्थिति की जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के मूल्यांकन से आगे की कार्ययोजना बनायी जा सकेगी।

मुख्य सचिव ने योजना के अंतर्गत जापान के तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन से मृदा अपरदन नियंत्रण और अवसाद आपदा शमन (Erosion Control & Sediment Disaster Mitigation) के अंतर्गत कराए जा रहे कार्यों को आपदा प्रबन्धन विभाग के साथ जापानी तकनीक के महत्त्वपूर्ण पहलुओं को साझा किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखण्ड में लैंड स्लाईड मिटिगेशन में सहायता मिल सकती है।

मुख्य सचिव ने योजना के अंतर्गत आजीविका से जुड़े विभिन्न स्वयं सहायता समूहों, क्लस्टर्स और राज्य स्तरीय फेडरेशन की क्षमता विकास, बाजार की उपलब्धता के साथ ही हैंड होल्डिंग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पिरूल की तर्ज पर लैंटाना पर भी कार्य किए जाने की जरूरत है।

इस अवसर पर पीसीसीएफ कपिल लाल, सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी पुरूषोत्तम एवं धीराज गर्ब्याल, सी. रविशंकर, एपीसीसीएफ नरेश कुमार, अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

डीएम दरबारः निर्धन गंगा राम की पुत्री के विवाह के लिए 50 हजार मौके पर ही स्वीकृत

जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जन दर्शन/जनता दरबार का आयोजन कर जनसमस्याओं का निस्तारण किया गया। जनता दरबार में उपस्थित फरियादियों ने भूमि विवाद, निजी भूमि का सीमांकन, अवैध कब्जा, फीस माफी, आर्थिक सहायता, बिजली-पानी बिल माफी, राशन कार्ड, मुआवजा से संबंधित कुल 239 शिकायतें एवं समस्याएँ जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कीं। इसमें सबसे अधिक स्कूल फीस माफी को लेकर सामने आई। जिलाधिकारी ने सभी शिकायतों एवं समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

बुजुर्ग नीलम ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि उनके पति की मृत्यु वर्ष 2020 में हो गई है तभी से उनकी आर्थिक स्थिति खराब है तथा मंदिर व भंडारों में भोजन कर अपना गुजर बसर कर रही है, उनका पानी का बिल रू0 18335 आया है जिसने माफ करने की गुहार लगाई। जिलाधिकारी ने प्रभारी अधिकारी कलेक्ट्रेट को निर्देश दिए कि रू0 5579 धनराशि सेटलमेंट करते हुए शेष धन राशि 12776 का भुगतान जिला प्रशासन द्वारा जल संस्थान को कर दिया जाएगा।

समाज कल्याण से संबंधित मामलों में देहरादून निवासी गंगा राम को पुत्री विवाह हेतु 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने के निर्देश समाज कल्याण अधिकारी को दिए गए। मालदेवता निवासी संध्या रमोला के पति के उपचार हेतु मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सहायता दिलाने के लिए प्रकरण अग्रसारित करने को कहा गया।

अजबपुर कलाम निवासी जरीना बानो के प्रकरण में, जिन्हें उनके पुत्र द्वारा घर से बेदखल कर दिया गया है, जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए भरण-पोषण अधिनियम के तहत वाद दायर करने के निर्देश दिए।

आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं एवं विधवाओं के प्रकरणों में जिलाधिकारी ने विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के अंतर्गत सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। टर्नर रोड निवासी विधवा हसीना, प्रेम नगर निवासी कविता एवं रजनी कश्यप, राजपुर निवासी पायल गोयल तथा चंदरनगर निवासी नसीन द्वारा पुत्रियों की स्कूल फीस माफी की मांग पर जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) को आवश्यक पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

इसी क्रम में बीएससी नर्सिंग की एक छात्रा, जिसके पिता 50 प्रतिशत दिव्यांग हैं, को भी प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के अंतर्गत सहायता दिलाने हेतु जिला कार्यक्रम अधिकारी को जांच के उपरांत आवेदन प्रस्तुत कराने के निर्देश दिए गए। ऋषिकेश निवासी धीरज सिंह रावत, जो विगत दो वर्षों से कैंसर से पीड़ित हैं, की पुत्री की स्कूल फीस भी उक्त योजना के माध्यम से वहन करने के निर्देश दिए गए।

प्रेमनगर निवासी रजनी कश्यप, जिनके पति दुर्घटना के कारण दिव्यांग हो गए हैं, की पुत्री की फीस माफी हेतु भी प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के अंतर्गत कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए।

आतिशा खत्री, विधवा संतोषी नेगी तथा चंदरनगर निवासी सरिता की पुत्री की स्कूल फीस प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के अंतर्गत वहन किए जाने के आवेदन पर जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास विभाग को समिति के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं कांवली रोड निवासी विधवा किरण धीमान की पुत्री की शिक्षा प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के अंतर्गत कराने तथा उनके पुत्र की स्कूल फीस माफी के लिए संबंधित विद्यालय (श्री गुरु राम राय स्कूल) प्रबंधन को जिला प्रशासन की ओर से अनुरोध पत्र प्रेषित करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, सरिता के रोजगार संबंधी प्रकरण में जिला प्रोबेशन अधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।

डांडीपुर निवासी विधवा मंजू देवी द्वारा सफेद राशन कार्ड बनाए जाने की मांग पर जिला पूर्ति अधिकारी को जांच कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। खुडबुड़ा निवासी अनु के राशन कार्ड ब्लॉक होने की समस्या पर उसे अनब्लॉक कराने के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।

शिवलोक कॉलोनी कावली रोड निवासी कनिष्का ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि उनके पति का निधन हो चुका है। अब तक उनके पिता ही उनका भरण-पोषण कर रहे थे, किंतु हाल ही में उनके पिता का भी दुर्घटना में घायल होने के कारण उपचार चल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। उन्होंने गृहकर (हाउस टैक्स) माफ करने की प्रार्थना पर जिलाधिकारी ने प्रभारी अधिकारी शस्त्र को राइफल क्लब फंड से कनिष्का का गृहकर जमा कराने के निर्देश दिए।

अन्य प्रकरणों में वरिष्ठ नागरिक सूरज नाथ गौतम की एफआईआर दर्ज न किए जाने की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। धर्मपुर निवासी अंजू रानी की भूमि धोखाधड़ी के मामले में तहसीलदार को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।

लखवाड़ बांध प्रभावितों-चतर सिंह, लुदर सिंह, महिपाल सिंह एवं रोशनकृद्वारा मुआवजा न मिलने की शिकायत पर संबंधित अधिकारी को तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

जनता दरबार में पहुंची फ्रीडम फाइटर समिति की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष आशा लाल ने जिलाधिकारी सविन बंसल के संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से जिले में बुजुर्गों, पीड़ित नागरिकों तथा महिलाओं को त्वरित एवं न्यायसंगत समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे सतत् और प्रभावी कार्यों को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने जिलाधिकारी को संविधान के अनुच्छेद-21 पर आधारित एक पुस्तक भेंट कर उनके प्रयासों के प्रति सम्मान एवं आभार व्यक्त किया।

जनता दरबार में अपर जिलाधिकारी(वि.रा) केके मिश्रा, संयुक्त मजिस्ट्रे राहुल आनंद, एसडीएम अपूर्वा सिंह, एसडीएम कुमकुम जोशी, एसडीएम विनोद कुमार, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार सहित सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

हाई एल्टीट्यूड मैराथन में सभी प्रतिभागियों ने अपने साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प का उत्कृष्ट परिचय दियाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाल विश्वविद्यालय, चौरास परिसर, टिहरी में भारतीय सेना और उत्तराखंड पर्यटन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सूर्य देवभूमि चैलेंज के समापन समारोह में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सूर्य देवभूमि चौलेंज में भारतीय सेना के 100 जांबाज़ जवानों के साथ देशभर से आए लगभग 200 साहसिक ट्रैकर्स ने प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा हाई एल्टीट्यूड मैराथन में भाग लेने वाले लोगों ने केदार-बद्री ट्रेल में हेलंग से कलगोट, कलगोट से मंडल होते हुए उखीमठ तक 113 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण यात्रा में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा सभी प्रतिभागियों ने अपने साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प का उत्कृष्ट परिचय दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभागियों ने साहसिक प्रतियोगिता के साथ बद्रीनाथ, केदारनाथ धाम सहित पंच केदार को जोड़ने वाले ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मार्ग की भी यात्रा की है। उन्होंने कहा सेना, देश की सीमाओं की रक्षा के साथ समाज और युवाओं को प्रेरित करने वाले ऐसे आयोजनों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस प्रकार के आयोजन युवाओं के भीतर अनुशासन, साहस, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत बनाने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा उन्हें पूर्ण विश्वास है कि ये आयोजन समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में सहायक सिद्ध होने के साथ सीमांत क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत का युवा आत्मविश्वास से परिपूर्ण है, सीमांत क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और साहसिक खेलों तथा पर्यटन के क्षेत्र में हमारा देश वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राज्य में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत हमारे सीमावर्ती गांवों के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में भी अभूतपर्व कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष अपने हर्षिल-मुखबा में शीतकालीन प्रवास के दौरान कई साहसिक खेलों को बढ़ावा दिया था। राज्य सरकार, राज्य में साहसिक खेलों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य में एंगलिंग, राफ्टिंग, कयाकिंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग, साइक्लिंग और माउंटेनियरिंग जैसी गतिविधियों को योजनाबद्ध तरीके से बढ़ावा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा औली की बर्फीली ढलानों से लेकर ऋषिकेश में तेज गति से बहने वाली गंगा नदी की धारा तक, मुनस्यारी की ऊँचाइयों से लेकर टिहरी झील के विशाल विस्तार तक उत्तराखण्ड का प्रत्येक क्षेत्र साहसिक पर्यटन का एक सशक्त और जीवंत केंद्र बनकर उभर रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सीमावर्ती क्षेत्र में सड़कों का व्यापक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिससे न केवल सीमांत क्षेत्रों में आवागमन सुगम हुआ है, बल्कि पर्यटन, व्यापार और सामरिक विकास को भी नई मजबूती मिली है ।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री ने माणा जैसे दूरस्थ और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र का दौरा कर सीमान्त क्षेत्रों के महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का भी कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों और विजेताओं का आभार व्यक्त किया कर, सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर मेजर पुष्पेंद्र सिंह गढ़वाल स्काउट ने बताया कि यह प्रतियोगिता सीमांत ग्रामीण क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना व पारम्परिक यात्रा मार्गाे को पर्यटन से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया। जिसके तहत 113 किलोमीटर लंबी इस कठिन प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 300 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को दुर्गम पहाड़ी मार्गों से गुजरते हुए विभिन्न चरणों में अपनी शारीरिक क्षमता, धैर्य और कौशल का प्रदर्शन करना पड़ा। कार्यक्रम की शुरुआत 16 अप्रैल को बद्रीनाथ में आयोजित एक्सपो के साथ हुई। इसके बाद 17 अप्रैल को हेलंग से कलगोट, 18 अप्रैल को कलगोट से मंडल और 19 अप्रैल को मंडल से उखीमठ तक मैराथन चरण आयोजित किए गए।

इस अवसर पर विधायक विनोद कण्डारी, मध्यकमान के जीओसी – इन – सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, ओलम्पिक पदक विजेता मुक्केबाज विजेंद्र सिंह बेनिवाल, स्थानीय , भाजपा जिलाध्यक्ष उदय रावत, ब्लाक प्रमुख देवप्रयाग विनोद बिष्ट, कीर्तिनगर अंचला खण्डेवाल, जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल, एसएसपी श्वेता चौबे, कुलपति प्रकाश सिंह एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

महिलाओं के अधिकारों में बाधा पहुंचाने वालों को करारा जवाब देगी मातृशक्तियां

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज भाजपा प्रदेश कार्यालय, देहरादून में आयोजित एक विस्तृत एवं महत्वपूर्ण प्रेस कांफ्रेंस के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम से संबंधित विषय पर विपक्ष के महिला विरोधी रवैये के संबंध में अपने विचार और तथ्य विस्तारपूर्वक रखे। उन्होंने इस विषय को केवल एक विधायी पहल नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों, सम्मान और सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ ऐतिहासिक अवसर बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को निर्णय-निर्माण में समान भागीदारी देने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता था। यह अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल थी, जिससे लोकतंत्र और अधिक समावेशी और संतुलित बनता। लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (ज्डब्) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (क्डज्ञ) जैसे विपक्षी दलों ने एक बार फिर राजनीतिक स्वार्थ के चलते इसे सफल नहीं होने दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष का यह रवैया न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों और उनकी आकांक्षाओं के प्रति उनकी वास्तविक सोच को भी उजागर करता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब भी देश में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कोई ठोस और निर्णायक कदम उठाया जाता है, तब-तब विपक्षी दलों द्वारा किसी न किसी बहाने से उसे रोकने या कमजोर करने का प्रयास किया जाता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के अधिकारों को टालने और दबाने का रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब महिलाओं को शीघ्र 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने की दिशा में ठोस पहल की गई, तब विपक्ष ने बहानों, भ्रामक तर्कों और राजनीतिक गणित के जरिए इस प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया। यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं था, बल्कि यह महिलाओं की प्रगति को रोकने का प्रयास था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष द्वारा लगातार यह भ्रम फैलाया गया कि परिसीमन की प्रक्रिया के कारण कुछ राज्यों या क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जबकि यह पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यहीन है। इस विषय पर केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने भी संसद में स्पष्ट किया था कि परिसीमन की इस प्रक्रिया से देश के किसी भी राज्य या क्षेत्र के प्रतिनिधित्व पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि संतुलित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। इसके बावजूद विपक्ष ने जनता को गुमराह करने का कार्य किया।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज देश की मातृशक्ति जागरूक है, सक्षम है और अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग है। उन्होंने कहा कि आज की महिला केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का लोहा मनवा रही हैकृचाहे वह राजनीति हो, प्रशासन हो, शिक्षा, विज्ञान, खेल या उद्यमिता का क्षेत्र। ऐसे में महिलाओं को निर्णय-निर्माण की मुख्यधारा से दूर रखना न तो न्यायसंगत है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में देश की मातृशक्ति उन दलों को करारा जवाब देगी, जो उनके अधिकारों में बाधा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल दर्शक नहीं हैं, बल्कि वे देश की नीति और दिशा तय करने में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र और राज्य सरकारें महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों को प्रभावी रूप से लागू कर रही हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ करना और समाज में उनकी भागीदारी को बढ़ाना है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं और भविष्य में भी ऐसे सभी प्रयास किए जाते रहेंगे, जो देश की मातृशक्ति को सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानित बनाने में सहायक सिद्ध हों। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे प्रयासों से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा महिलाओं को उनका उचित स्थान और सम्मान अवश्य प्राप्त होगा।

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विधायक सविता कपूर, पार्टी की वरिष्ठ महिला पदाधिकारीगण, विभिन्न प्रकोष्ठों एवं मोर्चों की प्रतिनिधि, बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता, युवा कार्यकर्ता, तथा पार्टी के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्तागण उपस्थित रहे।

उत्तराखंडः गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर वैदिक मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इसके साथ ही उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा 2026 का भी शुभारंभ हो गया है। दोनों धामों में प्रधानमंत्री के नाम से पहली पूजा की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री धाम में कपाटोद्घाटन समारोह में संकल्प लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से पहली पूजा की और चारधाम यात्रा के सफल आयोजन तथा देश-प्रदेश की सुख समृद्धि एवं खुशहाली की मंगल कामना की है।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार मां गंगा की उत्सव डोली भैरव घाटी स्थित भैरव मंदिर से चलकर गंगोत्री धाम पहुंची। गंगोत्री धाम में विशेष पूजा-अभिषेक के साथ 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गये। मां यमुना की डोली शनिदेव महाराज की अगुवाई में शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली से चलकर यमुनोत्री धाम पहुंची। धार्मिक विधि- विधान के साथ 12 बजकर 35 मिनट पर यमुनात्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए।

गंगोत्री धाम के कपाटोद्घाटन समारोह में प्रतिभाग करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मॉं गंगा के मंदिर में शीश नवाया और विशेष पूजा-अर्चना की और देव डोली से आशीष भी प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पावन अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो चुका है। उत्तराखण्ड के चारधाम देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था के प्रमुख केन्द्र हैं, और इन दिव्य धामों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करने की इच्छा हर श्रद्धालु के हृदय में रहती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम चारधाम यात्रा के लिए राज्य सरकार द्वारा व्यापक और सुदृढ़ व्यवस्थाएँ की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वाेपरि रखते हुए सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए हैं। साथ ही, यात्रा मार्गों पर सुचारु यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि देवभूमि उत्तराखण्ड में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को दिव्य धामों का आशीर्वाद प्राप्त होने के साथ-साथ यात्रा का एक सुखद, सुरक्षित और अविस्मरणीय अनुभव मिले। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से ग्रीन और क्लीन चारधाम यात्रा के सफल आयोजन हेतु सहयोग की अपील करते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहने का आग्रह भी किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, विधायक सुरेश चौहान, पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण, दायित्वधारी प्रताप पंवार, जिलाधिकारी उत्तरकाशी प्रशान्त आर्य, एसपी कमलेश उपाध्याय, एडीएम मुक्ता मिश्रा, मुख्यमंत्री के गढ़वाल कोर्डिनेटर किशोर भट्ट, मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मांनंद सेमवाल, सचिव सुरेश सेमवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि,अधिकारी एवं मंदिर समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।