वर्तमान की आवश्यकताओं से आगे बढ़कर भविष्य के भारत की मजबूत व टिकाऊ आधारशिला है बजट: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो दिवसीय नैनीताल भ्रमण के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में केन्द्रीय बजट 2026-27 को विकसित भारत-2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल वर्तमान की आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों के लिए देश की आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक नींव को मजबूत करता है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बजट में पूंजीगत व्यय में की गई उल्लेखनीय वृद्धि से दीर्घकालिक विकास की मजबूत आधारशिला रखी गई है। उन्होंने कहा कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के साथ-साथ देश की रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता को भी सुदृढ़ करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की सरकार के लिए विकास केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव का माध्यम है। यह बजट मध्यम वर्ग, करदाताओं और श्रमिकों के लिए राहत और सम्मान का प्रतीक है। नवाचार, विनिर्माण और रोजगार को केंद्र में रखकर तैयार किया गया यह बजट देश की उत्पादकता क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्थायी रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा, जो दीर्घकालीन आर्थिक मजबूती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत व्यय यह दर्शाता है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की शक्ति मानती है। सात नए आर्थिक कॉरिडोर, आधुनिक परिवहन नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स ढांचे का विस्तार निवेश, उद्योग और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती देगा। वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग, दिल्ली-वाराणसी एवं वाराणसी-सिलीगुड़ी उच्च-गति रेल कॉरिडोर न केवल कनेक्टिविटी परियोजनाएं हैं, बल्कि ये व्यापार, पर्यटन, रोजगार और राष्ट्रीय एकता के नए द्वार खोलने वाले कदम हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट से उत्तराखंड के समावेशी विकास को सीधा लाभ मिलेगा। पर्वतीय, सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों के साथ-साथ गांवों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के लिए केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा ₹17,414.57 करोड़ निर्धारित किया गया है, जिससे प्रदेश को इस वर्ष ₹1,841.16 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ‘स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट’ के विस्तार का जो अनुरोध किया गया था, उसे इस बजट में न केवल स्वीकार किया गया है, बल्कि इसके प्रावधान भी बढ़ाए गए हैं। यह राशि संशोधित अनुमान ₹1,44,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,85,000 करोड़ कर दी गई है, जो ₹41,000 करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना की सफलता को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को क्रेडिट-लिंक्ड आजीविका से उद्यमिता की ओर प्रेरित करने की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। रेलवे क्षेत्र में उत्तराखंड को ₹4,769 करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन मिला है, जो 2009-2014 की तुलना में 26 गुना अधिक है। राज्य में ₹39,491 करोड़ की रेल परियोजनाएं प्रगति पर हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। 11 रेलवे स्टेशन अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकसित किए जा रहे हैं, 100 प्रतिशत रेल विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है, 54 कवच सिस्टम और 106 फ्लाईओवर/अंडरपास के साथ-साथ 3 वंदे भारत और एक अमृत भारत एक्सप्रेस से राज्य की कनेक्टिविटी सुदृढ़ हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र को बजट में विशेष प्रोत्साहन मिला है, जिससे राज्य में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। ग्रीन एनर्जी और सतत विकास के लिए हरित ऊर्जा और ग्रीन इकोनॉमी पर विशेष बल दिया गया है, जिससे उत्तराखंड को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा। आयुष, फार्मा, खादी, हथकरघा तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक ढांचे को मजबूती देने की दिशा में बजट अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक जनपद में महिला छात्रावासों की व्यवस्था से महिला सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘विश्वास आधारित शासन’ से निवेश, रोजगार और जनभागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय बजट 2026-27 किसानों को सशक्त करता है, युवाओं को अवसर देता है, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाता है, पर्वतीय राज्यों को नई पहचान देता है और देश को आत्मनिर्भरता से विकसित राष्ट्र की ओर मजबूती से आगे ले जाता है। बजट के तीन प्रमुख स्तंभ—संतुलित एवं समावेशी विकास, वंचित वर्गों का क्षमता निर्माण और सबका साथ-सबका विकास—सीमांत क्षेत्रों, गांवों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों के समग्र उत्थान का स्पष्ट मार्ग प्रशस्त करते हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास से उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप राज्य के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है तथा राज्य सरकार द्वारा केंद्र को दिए गए प्रस्तावों को बजट में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित किया गया है, जो सहकारी संघवाद का सशक्त उदाहरण है।

अंत में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि केन्द्रीय बजट 2026-27 उत्तराखंड को रोजगार, निवेश, निर्यात, कौशल विकास और शहरी अवसंरचना के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला सिद्ध होगा और राज्य के समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास में मील का पत्थर बनेगा।

सीएम ने जमरानी परियोजना को निर्धारित समय सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जनपद भ्रमण के दौरान गोला नदी पर सिंचाई एवं पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से निर्माणाधीन जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने परियोजना स्थल पर उपस्थित अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों से निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने परियोजना की समयबद्धता, गुणवत्ता एवं प्रगति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि समस्त निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर, उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण किए जाएं। उन्होंने परियोजना के अंतर्गत चल रहे अन्य निर्माण कार्यों की भी विस्तार से जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से पर्यावरणीय एवं तकनीकी बाधाओं का समाधान किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने क्षेत्रवासियों की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए जमरानी बांध परियोजना को स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग देने वाले स्थानीय निवासियों एवं जनप्रतिनिधियों का भी धन्यवाद ज्ञापित किया।

मुख्यमंत्री ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार योजनाओं को कागजों तक सीमित न रखते हुए धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार शब्दों में नहीं, कार्यों में विश्वास करती है। जनहित से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की अड़चन या धनराशि की कमी को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। राज्य में कोई भी जनकल्याणकारी योजना अधूरी नहीं रहेगी, सभी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जमरानी बांध परियोजना राज्य की समृद्धि का प्रतीक है। यह परियोजना उत्तराखण्ड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी सिद्ध होगी। बांध के निर्माण से जहां एक ओर सिंचाई एवं पेयजल की सुविधा सुदृढ़ होगी, वहीं स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की मांग के अनुरूप परियोजना से विद्युत उत्पादन की संभावनाओं पर केन्द्र सरकार से वार्ता की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से कुमाऊं के तराई क्षेत्र के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के किसानों एवं क्षेत्रवासियों को भी प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर जमरानी बांध परियोजना के महाप्रबंधक महेश खरे ने जानकारी दी कि परियोजना के अंतर्गत निर्मित की जा रही दो टनलों का कार्य लगभग 88 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। नदी के जल प्रवाह के डायवर्जन हेतु कॉफर डैम का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि जून 2026 तक टनल निर्माण एवं कृत्रिम डैम का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा, जिसके पश्चात आगामी मानसून के दौरान नदी का जल टनलों के माध्यम से डायवर्ट किया जाएगा। इसके उपरांत स्थायी बांध के निर्माण कार्य को तीव्र गति से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने अवगत कराया कि परियोजना का संपूर्ण निर्माण कार्य जून 2029 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस अवसर पर विधायक कालाढुंगी बंशीधर भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दर्मवाल, दर्जा राज्यमंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, दिनेश आर्य, नवीन वर्मा, दीपक मेहरा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजेन्द्र बिष्ट, ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट, के.डी. रूबाली, मण्डलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, क्षेत्रीय नागरिक एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम के दिशा-निर्देशों में दून पीआरटी और मसूरी–नैनीताल रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी पर मंथन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी (पॉड टैक्सी) परियोजना तथा मसूरी एवं नैनीताल में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन को लेकर मंगलवार को सचिवालय में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव, आवास, उत्तराखण्ड शासन डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। बैठक में उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूएमआरसी) सहित संबंधित विभागों एवं परामर्शदात्री संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत में प्रबंध निदेशक, उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी परियोजना तथा मसूरी एवं नैनीताल शहर में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन की अद्यतन स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। प्रस्तुतीकरण के दौरान परियोजनाओं के तकनीकी, सामाजिक, पर्यावरणीय एवं वित्तीय पहलुओं की जानकारी दी गई।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि देहरादून शहर में प्रस्तावित पीआरटी (पॉड टैक्सी) परियोजना को ईबीआरटीएस के फीडर सिस्टम के रूप में विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इस परियोजना के अंतर्गत तीन प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, जिनमें क्लेमेंटाउन से बल्लूपुर चौक, पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तथा गांधी पार्क से आईटी पार्क तक के मार्ग शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह परियोजना शहर में यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को भी सुदृढ़ करेगी। बैठक में निगम द्वारा तैयार की गई डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) पर विस्तार से चर्चा की गई। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुरूप परियोजना की उपयोगिता को और अधिक स्पष्ट करने पर बल देते हुए निर्देश दिए कि डीपीआर में परियोजना की आवश्यकता, पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (ईआईए), सामाजिक प्रभाव तथा वित्तीय व्यवहार्यता को ठोस रूप में प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने आगामी समीक्षा बैठक में संशोधित डीपीआर के साथ पुनः प्रस्तुतीकरण करने के निर्देश दिए।

आवास सचिव ने देहरादून में प्रस्तावित पीआरटी कॉरिडोर के संरेखण का स्थलीय निरीक्षण किए जाने की भी इच्छा जताई, ताकि जमीनी स्तर पर परियोजना की व्यवहारिकता का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके। इसके अतिरिक्त बैठक में मसूरी एवं नैनीताल शहरों में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की फिजिबिलिटी अध्ययन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। प्रबंध निदेशक द्वारा अवगत कराया गया कि रोपवे परियोजनाएं पर्वतीय शहरों में यातायात जाम, पार्किंग समस्या एवं प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस पर आवास सचिव ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में रोपवे परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाली समस्त भूमि का विस्तृत विवरण, स्वामित्व की स्थिति सहित तैयार करने तथा संबंधित विभागों से पत्राचार कर शीघ्र अग्रतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि संबंधी पहलुओं का समयबद्ध समाधान परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है। बैठक में संयुक्त सचिव आवास धीरेंद्र कुमार सिंह, निदेशक (वित्त) संजीव मेहता, महाप्रबंधक (सिविल) संजय पाठक सहित उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अभियंता, मै. मैकेन्जी एवं मै. सिस्ट्रा के सलाहकार अधिकारी उपस्थित रहे।

आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार शहरी परिवहन व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विकसित कर रही है। देहरादून में प्रस्तावित पीआरटी परियोजना तथा मसूरी और नैनीताल में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। इन परियोजनाओं से यातायात दबाव कम होगा, पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं को पारदर्शी, व्यावहारिक और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

हर्रावाला में नवनिर्मित कैंसर चिकित्सालय भवन का निरीक्षण कर सीएस ने ली जानकारी

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने देहरादून के हर्रावाला में नवनिर्मित शकुंतला रानी सरदारी लाल ओबेरॉय राजकीय मैटरनिटी एवं कैंसर चिकित्सालय का निरीक्षण किया। मुख्य सचिव ने नवनिर्मित भवन के विषय में विस्तार से जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि इस अस्पताल को राष्ट्रीय स्तर के सुपर स्पेशलिटी कैंसर अस्पताल के रूप में स्थापित किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही इसे बेहतर तरीके से संचालित किए जाने के हर संभव प्रयास किए जाएँगे। उन्होंने भवन में सभी प्रकार के परीक्षण और मेडिकल सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराये जाने की भी बात भी कही।

मुख्य सचिव ने इस अस्पताल के आसपास डॉक्टर्स और स्टाफ के आवासीय भवनों के लिए भूमि तलाशने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने महानिदेशक स्वास्थ्य से मशीनों और उपकरणों की शीघ्र उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभाग की योजना साझा किए जाने की भी बात कही।

इस अवसर पर महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार बना उत्तराखंड में सुशासन का मजबूत मॉडल, लाखों शिकायतों का त्वरित समाधान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व एवं सशक्त प्रशासनिक इच्छाशक्ति का परिणाम है कि उत्तराखंड में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम आज गुड गवर्नेंस का सशक्त और भरोसेमंद मॉडल बनकर उभरा है। इस अभिनव पहल के माध्यम से सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुँच रही है और समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील समाधान सुनिश्चित कर रही है।

दिनांक 03 फरवरी 2026 तक राज्य के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 555 कैंपों का आयोजन किया गया, जिनमें से 548 कैंप पूर्व में तथा 7 कैंप आज आयोजित हुए। इन कैंपों के माध्यम से कुल 4,36,391 नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की, जिनमें 4,33,681 व्यक्ति पूर्व में तथा 2,810 व्यक्ति आज शामिल हुए।

*लाखों शिकायतों का समाधान, सुशासन की मिसाल*

इन जनसुनवाई कैंपों में नागरिकों द्वारा कुल 43,032 शिकायतें एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 42,604 पूर्व में तथा 428 आज प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की स्पष्ट नीति और प्रशासन की तत्परता के चलते इनमें से 29,042 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है, जिसमें 28,721 पूर्व में तथा 321 शिकायतें आज ही निस्तारित की गईं।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य सरकार केवल सुनवाई तक सीमित नहीं, बल्कि समाधान की जिम्मेदारी भी पूरी गंभीरता से निभा रही है।

*प्रमाण पत्र, योजनाएं और त्वरित सेवाएं – सरकार आपके द्वार*

कैंपों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाएं भी तत्काल उपलब्ध कराई गईं। अब तक 61,460 से अधिक प्रमाण पत्र/सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें 61,064 पूर्व में तथा 408 सेवाएं आज दी गईं। इसके अतिरिक्त विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से कुल 2,39,766 नागरिकों को लाभान्वित किया गया, जिनमें 2,37,050 पूर्व में तथा 1,816 लोग आज लाभान्वित हुए।

*महिलाओं को विशेष लाभ, पहाड़ की महिलाओं तक पहुँची सरकार*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गुड गवर्नेंस की सोच का सबसे सशक्त प्रभाव महिला सशक्तिकरण के रूप में सामने आया है। दूरस्थ, दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए ये कैंप आशा की नई किरण बने हैं। महिलाओं को प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन कार्ड, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने में इन कैंपों ने अहम भूमिका निभाई।

पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाएं, जिन्हें पहले जिला या तहसील मुख्यालय तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, अब अपने ही गांव में सेवाएं प्राप्त कर रही हैं। महिला लाभार्थियों की शिकायतों का संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ निस्तारण किया जा रहा है, जिससे उनमें प्रशासन के प्रति विश्वास और सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।

*हर जनपद में प्रभावी क्रियान्वयन*

अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी—राज्य के सभी जनपदों में इस कार्यक्रम का संतुलित और प्रभावी क्रियान्वयन हुआ है।
हर क्षेत्र की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशासन ने समाधान उपलब्ध कराए हैं, जो मुख्यमंत्री की “समस्या-केंद्रित शासन प्रणाली” को दर्शाता है।

*गुड गवर्नेंस का मजबूत मॉडल*

‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम यह सिद्ध करता है कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में: सरकार जवाबदेह है,
प्रशासन जनता के साथ खड़ा है, नीतियां कागजों से निकलकर जमीन पर उतर रही हैं |

यह कार्यक्रम न केवल समस्याओं के समाधान का माध्यम है, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता, पारदर्शिता और संवेदनशील शासन व्यवस्था का सशक्त उदाहरण भी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह पहल उत्तराखंड को गुड गवर्नेंस के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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“ *उत्तराखंड में हमारी सरकार का संकल्प है कि शासन केवल सचिवालय तक सीमित न रहे, बल्कि अंतिम व्यक्ति के द्वार तक पहुँचे। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम इसी सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण है।*

*इन कैंपों के माध्यम से लाखों नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान हुआ है और विशेष रूप से दूरस्थ व पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को सीधी प्रशासनिक सहायता मिली है।*

*महिलाओं को प्रमाण पत्र, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, स्वास्थ्य एवं कल्याणकारी सेवाएं उनके गांव में ही उपलब्ध कराना हमारी गुड गवर्नेंस की प्राथमिकता है।*

*हमारी सरकार संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के माध्यम से उत्तराखंड को सुशासन का आदर्श राज्य बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।”*

*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी*

रोड कटिंग में मनमानी पड़ी भारी, अनुमति निरस्त, मुकदमा दर्ज मशीनरी जब्त

रोड कटिंग कार्य में अनुमति की शर्तों के उल्लंघन पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (पिटकुल) की रोड कटिंग अनुमति निरस्त करते हुए कार्य को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है। पिटकुल की अनुमति पर बैन लगा दिया है। तथा एक्शियन एवं ठेकेदार पर मुकदमा तर्ज किया गया।
एलआईसी बिल्डिंग के पास विद्युत केबल अंडरग्राउंड कार्य में आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। जिसका संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधितों के विरुद्ध एक्शन लेने के निर्देश दिए है। जिसके परिपेक्ष में अनुमति निरस्त करते हुए। एक्शियन ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी के नेतृत्व में क्यूआरटी टीम के निरीक्षण में पाया गया कि निर्धारित समय व शर्तों के विपरीत रोड कटिंग की जा रही थी, जिससे यातायात बाधित हुआ और आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ी। जिला प्रशासन ने पिटकुल को निर्देश दिए हैं कि सभी प्रभावित स्थलों पर तत्काल भरान कर सड़क को पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए। निर्देशों की अवहेलना की स्थिति में संबंधित अधिशासी अभियंता, ठेकेदार व अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
अधीक्षण अभियंता (परियोजना क्रियान्वयन), पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (पिटकुल) द्वारा 135 के.वी. आराघर सब-स्टेशन से निर्माणाधीन 132 के.वी. माजरा-लालतप्पड़ एलआईएलओ लाइन को भूमिगत केबिल के माध्यम से बिछाने (कुल लंबाई 1996 मीटर, 5 रोड क्रॉसिंग सहित) हेतु रोड कटिंग की अनुमति का अनुरोध पर परियोजना समन्वय समिति, जनपद देहरादून ने 19.12.2025 को आयोजित बैठक में लिए गए निर्णय के क्रम में अधीक्षण अभियंता, नवम वृत्त, लोक निर्माण विभाग, यमुना कॉलोनी, देहरादून / सदस्य सचिव, परियोजना समन्वय समिति द्वारा पत्र 01.01.2026 के माध्यम से निर्धारित शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन 16.01.2026 से 15.02.2026 तक, रात्रि 10 बजे से प्रातः 5 बजे तक रोड कटिंग की सशर्त अनुमति प्रदान की गई थी।
जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी के नेतृत्व में जिला प्रशासन की क्यूआरटी टीम द्वारा आईएसबीटी क्रॉसिंग एवं सहारनपुर रोड माजरा क्षेत्र में रोड कटिंग स्थलों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान क्यूआरटी टीम द्वारा पाया कि संबंधित एजेंसी द्वारा अनुमति आदेश में उल्लिखित शर्तों एवं प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए रोड कटिंग कार्य किया जा रहा है, जिससे आम जनमानस को भारी असुविधा, यातायात बाधा एवं सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन द्वारा अग्रिम आदेशों तक संबंधित स्थलों पर रोड कटिंग कार्य पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है तथा अनुमति निरस्त कर दी गई है। साथ ही अधीक्षण अभियंता (परियोजना क्रियान्वयन), पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड को निर्देशित किया गया है कि समस्त प्रभावित स्थलों पर सड़क का भरान कर यथास्थिति में रिस्टोरेशन कार्य सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शहर की सड़कों, यातायात व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा, नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

पुलिस का वर्क कल्चर सुधरे, आम आदमी को न सताया जाए: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुलिस और प्रशासन का प्रत्येक विभाग आम जनमानस के प्रति संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ कार्य करे।

आज सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटन प्रबंधन, राजस्व, नशा मुक्ति, अभियोजन, कारागार सुधार एवं जनशिकायत निवारण से जुड़े विषयों पर गहन समीक्षा की।

बैठक में मुख्य सचिव सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद राज्य में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। इसे देखते हुए पर्यटकों के लिए होटल, आवास, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान, यातायात प्रबंधन एवं सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित सभी आवश्यक तैयारियाँ समयबद्ध रूप से पूरी की जाएँ। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कैंची धाम बाईपास जून माह तक पूर्ण कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी।

पुलिस व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि थाना चौकिया सहित धरातल पर वर्क कल्चर में तत्काल सुधार किया जाए। आम आदमी के साथ मानवीयता, संवेदनशीलता और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। निर्दोष नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान करने की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने लैंड फ्रॉड के मामलों पर कठोर कानून बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़े अपराधों में संलिप्त लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

अपराध नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक आत्ममंथन भी आवश्यक है। पुलिस और प्रशासन के सभी विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाए।

राजस्व व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राजस्व के वैकल्पिक स्रोत बढ़ाए जाएँ, सब्सिडी योजनाओं के आउटकम का मूल्यांकन किया जाए और राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था को लेकर स्पष्ट किया कि राज्य में शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। सुरक्षा से संबंधित शिकायतों पर त्वरित और गंभीर संज्ञान लिया जाए। कानून व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।

जनशिकायत निवारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री घोषणाओं का 100 प्रतिशत क्रियान्वयन जिलों में सुनिश्चित किया जाए। योजनाएँ केवल फाइलों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देनी चाहिए। योजनाओं का नियमित भौतिक सत्यापन हो तथा गुणवत्ता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिए कि आपराधिक मामलों की विवेचना अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए। रात्रि गश्त को और अधिक सघन किया जाए तथा निरंतर पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए।

नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन के रूप में संचालित करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनपद से मासिक नशा मुक्ति रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाए, जिसकी नियमित समीक्षा गृह सचिव एवं पुलिस महानिदेशक द्वारा की जाएगी।

अभियोजन व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अभियोजन कमजोर नहीं होना चाहिए। अभियोजन अधिकारियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया जाए।

कारागार विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने बंदियों के लिए स्किल डेवलपमेंट, पुनर्वास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं मानवाधिकारों के सख्त पालन के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी-नालों एवं सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध निर्माणों के लिए संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, लेखपाल, पटवारी की जवाबदेही तय की जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों और ऐसे अतिक्रमण को संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

भूमि विवादों के निस्तारण के लिए तहसील स्तर पर गठित समितियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने 1905 हेल्पलाइन की नियमित समीक्षा कर जीरो पेंडेंसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले 6 माह में विशेष अभियान चलाकर प्रत्येक जनपद के गांवों को 100 प्रतिशत योजनाओं से संतृप्त किया जाए।

डिजिटल गवर्नेंस को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे केवल औपचारिकता न समझा जाए, बल्कि पूरी गंभीरता के साथ धरातल पर लागू किया जाए।

चारधाम यात्रा की तैयारियों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने संबंधित जनपदों में संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।

लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए कि सड़कों के डामरीकरण का कार्य 15 फरवरी तक प्रारंभ किया जाए और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।

हाउस आफ हिमालयाज बिक्री का आंकड़ा 3.7 करोड़ के पार पहुंचा

पहाड़ की महिलाओं की मेहनत तैयार विशुद्ध उत्तराखंडी उत्पादों का ब्रांड ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’, लांचिंग के दो साल के भीतर साढ़े तीन करोड़ रुपए से अधिक की बिक्री करने में कामयाब रहा है। जल्द ही हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पाद विदेशों में भी बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे।
ग्राम्य विकास विभाग के अधीन, हाउस ऑफ हिमालयाज, उत्तराखंड के महिला स्वयं सहायता समूहों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और ग्रामीण उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों का कॉमन ब्रांड है। इसका उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों, दिसंबर 2023 के दौरान देहरादून में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर समिट के दौरान हुआ था। प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन के बाद हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पादों की एकाएक मांग बढ़ी है। बीते दो साल में कुल बिक्री का आंकड़ा 3.7 करोड़ के पार पहुंच गया है। अब हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के उत्पाद ऑफलाइन के साथ ही ई कामर्स साइट जियो मार्ट, अमेजन, ब्लिंकिट, बिग बास्केट और ब्रांड की खुद की अपनी वेबासइट https://houseofhimalayas.com/ पर भी मिल रहे हैं।
*50 विशिष्ट उत्पाद शामिल*
वर्तमान में इस ब्रांड में कुल 50 उत्पादों को शामिल किया गया है। इसमें मिलेट्स बिस्किट, मुन्स्यारी, चकराता, हर्षिल की राजमा, चौलाई, तोर दाल, पहाड़ का परंपरागत लाल चावल, झंगोरा, गहथ, काले भट्ट, चाय, तेल, पर्सनल केयर, हैंडीक्राफ्ट के उत्पाद शामिल हैं। इसके उत्पादों की गुणवत्ता की जांच तीन स्तरों पर की जा रही है। सरकार स्थानीय मेलों, त्यौहार के मौकों पर हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पादों को खरीदने पर जोर दे रही है। साथ ही सरकारी कार्यक्रमों और कार्यालयों के जरिए भी बिक्री बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है। दिवाली जैसे त्यौहार के लिए हाउस ऑफ हिमालयाज की ओर से खास गिफ्ट पैक उपलब्ध कराए गए थे, जिन्हें खूब पसंद किया गया।
*तीन हजार से महिलाओं को रोजगार*
हाउस ऑफ हिमालयाज में अब तक कुल 22 ट्रेडमार्क पंजीकृत किए जा चुके हैं। इस उत्पाद श्रंखला से राज्य की 3,300 से अधिक ग्रामीण महिलाएं प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ी हुई हैं। जबकि व्यापक क्रय नेटवर्क के माध्यम से 28,000 से अधिक महिलाओं को इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिला है। ये उत्पाद प्रमुख शहरों में 26 आउटलेट्स के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इसमें जौलीग्रांट एयरपोर्ट का एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट शामिल है। इसके साथ ही प्रतिष्ठित होटल श्रृंखलाओं एवं यात्रा केंद्रों में भी हाउस ऑफ हिमालयाज की प्रीमियम कार्ट्स स्थापित किए गए हैं। साथ ही चार धाम मार्ग पर 10 फ्लोर स्टैंडिंग यूनिट्स तैनात की गई हैं। कंपनी Reliance Freshpik, Flipkart एवं Zepto के साथ अनुबंध का प्रयास कर रही है। हाउस ऑफ हिमालयाज़ के उत्पाद को विदेशी बाजार में उपलब्ध कराने के लिए Amazon Global, Walmart के साथ साझेदारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

*माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल टू ग्लोबल विजन के अनुसार हाउस ऑफ हिमालयाज का उद्देश्य उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग को सुदृढ़ बनाकर, प्रामाणिक हिमालयी उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाज़ारों में स्थापित करना है। इससे प्रदेश के किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों की आर्थिकी मजबूत हुई है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों कठोर कार्यवाही किये जाने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में गृह विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग को प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों कठोर कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण मामलों को जनपद एवं पुलिस हेडक्वार्टर स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग कर शीघ्र मामलों के निस्तारण की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में अभियोजन और फॉरेंसिक जांचों के लिए अपने सिस्टम को और मजबूत किए जाने पर बल दिया, ताकि इसकी प्रगति और मॉनिटरिंग अच्छे प्रकार से हो सके। उन्होंने कहा कि ई-समन व्यवस्था को बढ़ाये जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि आमजन की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन 1905 पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण के लिए जिलाधिकारी एवं एसएसपी स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि गृह/पुलिस विभाग के अंतर्गत वादों के निस्तारण के लिए थाना और तहसील दिवस आयोजन भी शुरू किया जाना चाहिए। सर्वप्रथम इसके लिए इसकी एसओपी तैयार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इस एसओपी के लिए सचिव गृह, सचिव राजस्व, मंडलायुक्त एवं पुलिस विभाग मिलकर एक एसओपी तैयार करे। उन्होंने मामलों के निस्तारण के लिए प्रत्येक माह 2 से 3 कैम्प आयोजित किए जा सकते हैं।

मुख्य सचिव ने थानों में जमा जब्त वाहनों की नीलामी कर खाली कराया जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में लम्बित मामलों से संबंधित वाहनों के डिस्पोजल के लिए और क्या किया जा सकता है, इसे एक्स्प्लोर कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पॉक्सो के मामलों पर तत्काल कार्यवाही करते हुए कठोर से कठोर कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम लगातार अपने पैर पसार रहा है इसे रोकने के लिए ठोस कार्यवाही और सिस्टम को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

मुख्य सचिव ने वन स्टॉप सेंटर्स को और अधिक मजबूत किए जाने की बात कही। साथ ही ड्रग्स के ख़िलाफ़ लगातार कार्यवाही करते हुए एनकॉर्ड की मासिक बैठकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आयोजन अनिवार्य रूप से किया जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विभाग तत्काल वांछित रिपोर्ट भेजें एवं मामलों के निस्तारण के लिए विभागों द्वारा विवेचनाओं को तत्काल भेजा जाना चाहिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि मानस नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन प्लेटफार्म को अधिक से अधिक जनसंचार किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को नशे की लत से बचाने के लिए शिक्षकों एवं अभिभावकों को अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों में भी इसका अधिक से अधिक प्रचार प्रसार किए जाने की बात कही ताकि लोगों के बीच जागरूकता बढ़े। मुख्य सचिव ने कहा कि नशामुक्ति केंद्रों द्वारा ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं इसकी भी निगरानी की जाए। बड़े सरकारी अस्पतालों में नशामुक्ति के लिए कुछ बेड रिज़र्व किए जाने की संभावनाओं का परीक्षण कराया जा सकता है।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव एल फ़ैनाई, आर. मीनाक्षी सुंदरम एवं सचिव शैलेश बगौली सहित पुलिस विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और जनपदों से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

जलमभूमि फिल्म के पोस्टर का सीएम धामी ने किया विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में फिल्म “जलमभूमि” के पोस्टर का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक के राम नेगी एवं पूरी फिल्म टीम को शुभकामनाएँ एवं बधाई दीं।

उल्लेखनीय है कि यह फिल्म 6 फरवरी को रिलीज होने जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “जलमभूमि” जैसी फिल्में समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती हैं और सिनेमा के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को मजबूती मिलती है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए एक आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में फिल्म नीति को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत फिल्म निर्माताओं को सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से त्वरित अनुमति प्रदान की जा रही है। शूटिंग की अनुमति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे फिल्म निर्माताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा फिल्म शूटिंग पर सब्सिडी, स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं को रोजगार के अवसर, तथा स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के माध्यम से राज्य को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म नीति का उद्देश्य केवल फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तराखंड में वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म और फीचर फिल्मों के निर्माण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने फिल्म की सफलता की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी सिनेमा और रचनात्मक उद्योगों को हरसंभव सहयोग देती रहेगी।

कार्यक्रम में विधायक दुर्गेश लाल भी उपस्थित रहे।