मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व सीएम हरीश रावत से की शिष्टाचार भेंट, कुशलक्षेम जाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता हरीश रावत से उनके डिफेंस कॉलोनी देहरादून स्थित आवास पर भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हरीश रावत का कुशलक्षेम जाना।

भेंट के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरीश रावत के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने अपनी ओर से एक आत्मीय प्रतीक के रूप में अपने खेत में उत्पादित चावल हरीश रावत को भेंट किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भेंट उत्तराखंड की कृषि परंपरा, किसानों की मेहनत और स्थानीय उत्पादों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस स्नेहिल व्यवहार एवं आत्मीय भेंट के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी की यह भेंट राजनीतिक परंपराओं में आपसी सम्मान, सद्भाव और शिष्टाचार का एक सुन्दर उदाहरण है।

पद्म भूषण सम्मान के लिए चयनित होने पर सीएम धामी ने भगत दा को आवास पर जाकर दी बधाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से उनके डिफेंस कॉलोनी, देहरादून स्थित आवास पर शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने भगत सिंह कोश्यारी को देश के प्रतिष्ठित पद्म भूषण सम्मान हेतु चयनित किए जाने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान कोश्यारी के सार्वजनिक जीवन में किए गए दीर्घकालिक, समर्पित एवं राष्ट्रसेवा से परिपूर्ण योगदान का उचित सम्मान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगत सिंह कोश्यारी ने उत्तराखंड आंदोलन से लेकर राज्य के गठन, प्रशासनिक नेतृत्व और संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन तक प्रत्येक भूमिका में प्रदेश और देश को सुदृढ़ दिशा देने का कार्य किया है। उनका जीवन जनसेवा, सादगी और राष्ट्रनिष्ठा का प्रेरणास्रोत रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पद्म भूषण सम्मान से न केवल उत्तराखंड, बल्कि संपूर्ण देश गौरवान्वित हुआ है। उन्होंने ईश्वर से कोश्यारी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

आधुनिक कार्यालय भवन निर्माण को मिली रफ्तार, औचक निरीक्षण में आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने दिए सख्त निर्देश

आवास विभाग, राज्य सम्पत्ति विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार विभागीय कार्यों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को ज़मीन पर उतारने और सरकारी कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से डॉ. राजेश कुमार ने आज सचिवालय परिसर स्थित निर्माणाधीन आधुनिक कार्यालय भवन के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उनके साथ एसएस रावत संयुक्त सचिव, राज्य संपत्ति, नीरज कुमार त्रिपाठी, अधिशाषी अभियंता लोकनिर्माण विभाग, संदीप वर्मा, अपर सहायक अभिंयता सिविल, गाविंद सिंह, सहायक अभियंता विधुत सहित ठेकेदार शिव कुमार अग्रवाल मौजूद रहे।

राज्य सम्पत्ति विभाग एवं निर्माण से जुड़े संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। सचिव ने निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तार से जानकारी ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य पूर्ण गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

*निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा*
राज्य सम्पत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन सचिवालय परिसर, देहरादून में विश्वकर्मा भवन के समीप 6 मंजिला (जी5 एवं एक बेसमेंट सहित) आधुनिक कार्यालय भवन का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह भवन राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लिए आधुनिक, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक कार्यालय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है। इस परियोजना को शासनादेश दिनांक 26 मार्च 2025 के अंतर्गत स्वीकृति प्रदान की गई है। भवन निर्माण की कुल लागत ₹5934.71 लाख है, जिसमें सिविल कार्य एवं विद्युतीकरण कार्य शामिल हैं। अब तक इस परियोजना पर लगभग ₹1400 लाख की धनराशि का आंवटन किया जा चुका है।

*निर्माण एजेंसी और समय-सीमा*
भवन के सिविल निर्माण कार्य का अनुबंध मैसर्स शिव कुमार अग्रवाल को दिया गया है। निर्माण कार्य को डेढ़ वर्ष की अवधि में पूर्ण किया जाना है, जिसकी अंतिम तिथि 24 जनवरी 2027 निर्धारित की गई है।

*भवन की प्रमुख विशेषताएं*
यह भवन 34×74 मीटर के प्लॉट पर निर्मित किया जा रहा है, जिसका कुल क्षेत्रफल 2516 वर्ग मीटर है। सभी मंजिलों को मिलाकर भवन का कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 1,04,480 वर्ग फीट होगा। भवन के बेसमेंट में 25 कार पार्किंग और 100 दोपहिया वाहन पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे सचिवालय परिसर में पार्किंग की समस्या से राहत मिलेगी। ग्राउंड फ्लोर पर एसबीआई बैंक, पोस्ट ऑफिस, प्रवेश लॉबी और वेटिंग एरिया का प्रावधान किया गया है। ऊपरी मंजिलों पर सचिव, अपर सचिव, उप सचिव, संयुक्त सचिव, अनुसचिव, स्तर के कार्यालय व उनके स्टाफ कक्ष, वेटिंग लॉबी और मीटिंग हॉल बनाए जा रहे हैं।

*निर्माण की वर्तमान स्थिति*
निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति के अनुसार भवन का फाउंडेशन कार्य पूर्ण हो चुका है। बेसमेंट का सिविल कार्य पूरा कर लिया गया है तथा ग्राउंड फ्लोर का कार्य प्रगति पर है, जिसे 10 फरवरी 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति लगभग 15 प्रतिशत है। राज्य सम्पत्ति विभाग द्वारा निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि यह भवन सचिवालय की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाएगा।

*गुणवत्ता से समझौता नहीं- डॉ आर राजेश कुमार*
सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा सचिवालय परिसर में निर्माणाधीन यह आधुनिक कार्यालय भवन राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप हम सभी निर्माण कार्यों को समयबद्ध, पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियमित निरीक्षण और सतत निगरानी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार आगे बढ़े। यह भवन भविष्य में बेहतर कार्यसंस्कृति और सुगम प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

धामी सरकार की पारदर्शी नीतियों से खनन को लेकर बदली अवधारणा

खनन गतिविधियों को लेकर सामान्य तौर लोगों में नकारात्मक अवधारणा रहती है। लेकिन उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खनन आवंटन और खनन परिवहन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के साथ ही अवैध खनन पर सख्ती दिखाई, इसी का नतीजा है कि डेढ़ साल से कम समय में सालाना खनन राजस्व 300 करोड़ से 1200 करोड़ के पार पहुंच गया है।
प्रदेश सरकार ने सितंबर 2024 को नई खनन नीति लागू की थी। नई खनन नीति में ई निलामी के जरिए खनन लॉट आवंटन, खनन गतिविधियों की सेटेलाइट निगरानी जैसे कई नए प्रयोग किए गए। साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस- प्रशासन को भी अवैध खनन पर सख्ती दिखाने के निर्देश दिए। जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। सितंबर 2024 से पहले राज्य को खनन से सिर्फ 300 करोड़ रुपए तक ही सालाना राजस्व प्राप्त हो पाता था, लेकिन अब यह राजस्व 1200 करोड़ के पार चला गया है। यही नहीं उत्तराखंड को खनन सुधार लागू करने के लिए देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त हो चुका है, जिसके फलस्वरूप केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए “पूंजी निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना (SASCI)” के अंतर्गत उत्तराखंड के लिए ₹200 करोड़ की विशेष सहायता स्वीकृत की है।

*इन सुधारों से बदली तस्वीर*

ई निलामी के जरिए खनन लॉट आवंटन
अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाई गई
खनन परिवहन के लिए माइनिंग सर्विलांस सिस्टम
खनन गतिविधियों की डिजिटल ट्रैकिंग और निरीक्षण

*आम लोगों को आवासीय या अन्य निर्माण के लिए खनन सामग्री की आवश्यकता होती है, साथ ही विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए भी खनन की आवश्यकता है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि खनन पर्यावरण के मानकों के अनुसार हो, साथ ही इसके लिए पारदर्शी तंत्र विकसित किया गया। जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इससे राजस्व में भी शानदार वृद्धि हुई है, जिससे जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन हो रहा है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

सीएम धामी ने की रिवर प्रोटक्शन कार्य एवं डीसिल्टिंग की प्रगति की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सिंचाई परियोजनाओं के अन्तर्गत रिवर प्रोटक्शन कार्य एवं डीसिल्टिंग की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून सीजन में बाढ़ की आशंकाओं को देखते हुए सभी कार्य समय से कर दिए जाएं।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि लघु सिचांई विभाग द्वारा जल संरक्षण, संवर्द्धन एवं संभरण योजनाओं के तहत चेक डैम निर्माण, रिचार्ज शॉफ्ट निर्माण एवं तालाब निर्माण किये जा रहे हैं। विभाग द्वारा राज्य में 708 चेक डैम बनाये गये हैं। विभाग द्वारा ऊधम सिंह नगर, नैनीताल एवं हरिद्वार में कुल 419 रिचार्ज शॉफ्ट की स्थापना की गयी है। जिससे वार्षिक लगभग 108.94 करोड़ लीटर ग्राउंड वाटर रीचार्ज हो सकेगा। अधिकारियों ने बताया कि 09 वन प्रभागों में पेयजल विभाग व सारा के माध्यम से 14 जल स्रोतों के उपचार के लिए जल संरक्षण के कार्य किये जा रहे हैं। कैम्पा योजना के अन्तर्गत विभिन्न वन प्रभागों में 247 जल धाराओं का उपचार किया जा रहा है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वन विभाग को वनाग्नि की रोकथाम के लिए अभी से पूरी तैयारी करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि वनाग्नि रोकथाम के लिए मानव संसाधन के साथ ही आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन पंचायतों और वन क्षेत्र के आस-पास के लोगों से विभाग का नियमित समन्वय बनाये रखें। वन संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वालों को प्रोत्साहित भी किया जाए, फायर लाइन की समय रहते सफाई की जाए। साथ ही वनभूमि पर होने वाले अतिक्रमण को भी प्राथमिकता पर हटाया जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, युगल किशोर पंत एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड में सख्त नकल विरोधी कानून पर आधारित शॉर्ट फिल्म ‘आखिरी कोशिश’ रिलीज

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड में लागू किए गए देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानून पर आधारित शॉर्ट फिल्म “आखिरी कोशिश” का विमोचन किया गया। यह शॉर्ट फिल्म युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने वाले राज्य सरकार के ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत करती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू इस कठोर कानून ने प्रदेश में वर्षों से सक्रिय नकल माफिया की कमर तोड़ दी। कानून के सख्त क्रियान्वयन का सीधा परिणाम यह रहा कि 28,000 से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्राप्त हुई।

शॉर्ट फिल्म “आखिरी कोशिश” ईमानदारी, मेहनत और न्याय आधारित व्यवस्था का संदेश देती है तथा यह दर्शाती है कि कैसे नकल और भ्रष्टाचार मुक्त परीक्षा प्रणाली युवाओं के सपनों को साकार करने का मार्ग प्रशस्त करती है। यह फिल्म न केवल युवाओं बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो। नकल विरोधी कानून उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन प्रणाली की मजबूत नींव है।

यह शॉर्ट फिल्म युवाओं से आग्रह करती है कि वे इसे अवश्य देखें और ईमानदारी व आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें। “आखिरी कोशिश” उत्तराखंड की उस नई पहचान को दर्शाती है, जहां मेहनत की जीत और नकल की हार सुनिश्चित की गई है।

Wings India 2026 में उत्तराखंड को Best State for Promotion of Aviation Ecosystem सम्मान

अंतरराष्ट्रीय विमानन सम्मेलन एवं प्रदर्शनी Wings India 2026 में उत्तराखंड को “Best State for Promotion of Aviation Ecosystem” के प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान नागरिक उड्डयन क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रभावी प्रयासों, नीति समर्थन और विमानन पारिस्थितिकी तंत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रदान किया गया।

यह पुरस्कार बेगमपेट एयरपोर्ट, हैदराबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के सचिव श्री समीर कुमार सिन्हा द्वारा प्रदान किया गया।

इस अवसर पर उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के सचिव सचिन कुर्वे, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. आशीष चौहान, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय सिंह टोलिया तथा हेड ऑफ ऑपरेशंस कैप्टन अमित शर्मा उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि Wings India 2026 देश का प्रमुख विमानन मंच है, जिसमें देश-विदेश के नीति निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ, निवेशक और विमानन क्षेत्र से जुड़े हितधारक भाग लेते हैं। इस मंच पर उत्तराखंड को मिला यह सम्मान राज्य के लिए गौरव का विषय है और भविष्य में निवेश व विकास के नए अवसर खोलेगा।

*“यह पुरस्कार उत्तराखंड की समग्र विमानन नीति, बेहतर प्रशासनिक समन्वय और प्रदेश में हवाई संपर्क को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों को हवाई सेवाओं से जोड़ना हमारी प्राथमिकता रही है, जिससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिला है बल्कि आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से ली सेवाओं के विस्तार, उड़ान योजना के सफल क्रियान्वयन और आधुनिक विमानन अवसंरचना के विकास से उत्तराखंड तेजी से एक उभरते विमानन हब के रूप में स्थापित हो रहा है।*

*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

सीएम धामी ने युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में कृषि, पशुपालन, पर्यटन एवं उद्योग क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में विशेष ध्यान दिया जाए। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से लोगों को इन योजनाओं की संपूर्ण जानकारी प्रदान की जाए, ताकि वे इनका लाभ उठा सकें।

मुख्यमंत्री ने युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने तथा उन्हें स्वरोजगार के लिए अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को योजनाओं का समय पर एवं पूरा लाभ मिले, इस पर सभी विभाग विशेष ध्यान दें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि आवंटित बजट का पूर्ण आउटकम प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उच्च स्तरीय बैठकों के कार्यवृत्त उन्नति पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएं। उन्होंने सेब की अतिसघन बागवानी योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना को प्रभावी ढंग से संचालित कर निर्धारित लक्ष्यों को समय से प्राप्त किया जाए तथा किसानों को अधिकाधिक प्रोत्साहन प्रदान किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसानों से संबंधित देयकों का भुगतान समय पर हो। किसानों को उनके उत्पादन का बेहतर मूल्य मिले, इसके लिए राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहद उत्पादन के क्षेत्र में उत्तराखंड में व्यापक संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए ‘हनी मिशन’ के अंतर्गत शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए और अधिक प्रभावी प्रयास किए जाएं। राज्य में शहद का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि बागवानी एवं मौन पालन के क्षेत्र में जिन राज्यों में अच्छा कार्य हुआ है, उनके अध्ययन हेतु अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की टीमें उन राज्यों में भेजी जाएं।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 29 उत्पादों को जी.आई. टैग प्राप्त हुआ है, जिनमें से 18 कृषि एवं कृषि कल्याण से संबंधित हैं। इस वर्ष 25 अन्य उत्पादों को जी.आई. टैग के लिए चिन्हित किया जाएगा। राज्य में 134 करोड़ रुपये की लागत से लागू स्टेट मिलेट पॉलिसी के अंतर्गत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी एवं चीना को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 24 विकासखंडों तथा द्वितीय चरण में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 44 विकासखंडों का चयन किया गया है। प्रथम चरण में 5 हजार से अधिक गांवों को आच्छादित कर लगभग डेढ़ लाख कृषकों को लाभान्वित किया गया है। मिलेट फसलों की क्रय-विक्रय हेतु 216 क्रय केंद्र खोले गए हैं तथा सहकारिता विभाग के अंतर्गत 20 करोड़ रुपये का रिवाल्विंग फंड बनाया गया है। इस वित्तीय वर्ष में 5 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 5,386 मीट्रिक टन मिलेट फसलों का क्रय किया जा चुका है।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के अंतर्गत चार वर्षों में 32 हजार के लक्ष्य के सापेक्ष 33,620 लाभार्थियों को 202.72 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। आगामी वर्ष में 9 हजार लोगों को लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पर्यटन विभाग के अंतर्गत दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत चार वर्षों में 780 होम स्टे स्थापित किए गए हैं, जिसके लिए 188.58 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया गया है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के अंतर्गत चार वर्षों में एक हजार से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया है, जिसमें कुल 105 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का वित्त पोषण किया गया है। राज्य में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मत्स्य पालन क्षेत्र में 17,450 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश झा, दिलीप जावलकर, विनय शंकर पाण्डेय, एस.एन. पाण्डेय, वी. षणमुगम, धीराज गर्ब्याल सहित संबंधित विभागों के उच्च अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम आवास से रवाना हुआ इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड, सीएम धामी ने किया फ्लैग ऑफ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से छात्र कौशल संवर्धन हेतु लैब ऑन व्हील्स (इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड) का फ्लैग ऑफ किया। यह लैब ऑन व्हील्स छात्रों को ए.आई, कोडिंग, आई.ओ.टी एवं अन्य इमर्जिंग टेक क्षेत्रों में कौशल संवर्धन के लिए हैण्ड्स ऑन सुविधा उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही विज्ञान विषय के विभिन्न प्रयोगों को वर्चुअल मोड से सीखने में सहायता प्रदान करेगा।

लैब ऑन व्हील्स छात्रों को लर्निंग बाई डूइंग के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा। इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड लैब ऑन व्हील्स आगामी 05 वर्ष तक पूरे राज्य संस्थाओं में जाकर छात्रों को जागरूक करते हुए उनको हैण्स ऑन प्रशिक्षण प्रदान करेगा और उनको वैश्विक संभावनाओं से जोड़ेगा।

लैब ऑन व्हील्स राज्य में छात्रों के लिए हैण्स ऑन प्रशिक्षण की अनुपलब्धता को न्यून करेगा। लैब ऑन व्हील्स में उपलब्ध हैण्ड्स ऑन एवं प्रैक्टिकल्स उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं विद्यालयी शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों हेतु उपयोगी है।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, प्रमोद नैनवाल,उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, उच्च शिक्षा, तकनीकि शिक्षा के अधिकारी एवं इंफोसिस प्रतिनिधि उपस्थित थे।

इन आठ अहम प्रस्तावों पर धामी कैबिनेट की लगी मोहर…

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हो गई है। बैठक में कुल 8 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सरकार की मुहर लगी है।

कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड को शिक्षा-ऊर्जा और सामरिक रूप से मजबूत करने की पहल के तहत निजी विश्वविद्यालय, ग्रीन हाइड्रोजन नीति और हवाई पट्टियों पर भी निर्णय लिया गया है।

कैबिनेट के महत्वपूर्ण निर्णय-

1- चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड के ऐसे स्वास्थ्य कार्यकर्ता / स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, जिन्होंने अपने मूल संवर्ग में न्यूनतम 05 वर्ष की सन्तोषजनक सेवा पूर्ण कर ली हो, को सम्पूर्ण सेवाकाल में एक बार म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग के आधार पर जनपद परिवर्तन करने की अनुमति प्रदान की जाएगी। जिसपर कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

2 – उत्तराखण्ड राज्य में आपसी समझौते के आधार पर भू-स्वामियों से लघु/मध्यम/ वृहद् परियोजनाओं हेतु भूमि की प्राप्ति किये जाने हेतु प्रक्रिया का निर्धारण” के सम्बन्ध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।

भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013″ की सुसंगत धाराओं की प्रक्रियान्तर्गत भूमि अर्जन हेतु लगने वाले अत्याधिक समय एवं सीधे भूमि कय करने की व्यवस्था को प्रोत्साहित किये के उद्देश्य से राज्य परियोजनाओं के लिए भू-स्वामियों से लघु/मध्यम/ वृहद् परियोजनाओं हेतु भूमि की प्राप्ति किये जाने हेतु प्रक्रिया प्रस्तावित की है। इस प्रक्रिया के अन्तर्गत आपसी समझौते के आधार पर भू-स्वामियों से भूमि प्राप्त किये जाने की दशा में मुकदमेबाजी जैसे मामलों में कमी आयेगी तथा लोक जनहित की परियोजनाओं की लागत भी कम होगी।

3- जनपद उधमसिंहनगर स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान विकसित किये जाने हेतु सिडकुल (औद्योगिक विकास विभाग) को हस्तान्तरित किये जाने के सम्बन्ध में निर्गत शासनादेश संख्याः-670/ दिनांकः 25 मार्च, 2025 में संशोधन करने के सम्बन्ध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।

जनपद उधमसिंहनगर स्थित प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान विकसित किये जाने हेतु सिडकुल (औद्योगिक विकास विभाग) को हस्तान्तरित की गयी है, शासनादेश की शर्त संख्या-च में “प्रश्नगत भूमि को किसी व्यक्ति एवं संस्थान या संगठन को बेचने/ पट्टे पर देने अथवा किसी अन्य प्रकार से हस्तान्तरित करने का अधिकार प‌ट्टेदार को नहीं होगा। भूमि का उपयोग आवंटन के दिनांक से 03 वर्ष की अवधि में पूर्ण कर लेना अनिवार्य होगा अन्यथा आवंटन स्वतः निरस्त समझा जायेगा।

परन्तु औद्योगिक विकास विभाग के माध्यम से राजस्व विभाग की सहमति से पट्टे पर आवंटित भूमि को समान प्रयोजन हेतु उप पट्टा (Sub-lease) करने का अधिकार पट्टेदार को होगा। पर कैबिनेट ने अपनी मंजूरी प्रदान की है।

4 – जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं का संचालन किये जाने के उद्देश्य से अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जनपद क्रमशः देहरादून, चमोली, ऊधमसिंहनगर एवं पिथौरागढ़ में विभागीय योजनाओं के संचालन / प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पदों की आवश्यकता के दृष्टिगत विभागीय ढांचें को पुर्नगठित करते हुए उक्त जनपदों में 4 जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पद शासनादेश सख्या-120, दिनांक 28.02.2025 के माध्यम से सृजित किये गये है। ढांचे में स्वीकृत पदों का प्राविधान सेवा नियमावली में किये जाने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2025 प्रख्यापित किये जाने के संबंध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।

5 – उत्तराखंड राज्य में गैर कृषिकारी (कृषि एवं कृषि संबंधित कार्यों तथा राजकीय पेयजल व्यवस्था को छोड़कर) उपयोग हेतु भू-जल के निकास पर जल मूल्य/प्रभार की दरें (जो तत्काल से लागू होगी) लागू किये जाने के सम्बन्ध में कैबिनेट ने लिया निर्णय।

राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने, भू- जल विकास एवं प्रबन्धन को विनियमित किये जाने तथा भू-जल के अनियन्त्रित दोहन को सीमित करने के उद्देश्य से औद्योगिक इकाईयों एवं अन्य व्यवसायिक उपयोग यथा रेजीडेंशियल अपार्टमेंट / ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी, होटल, वॉटर एमयूजमेंट पार्क, वाहन धुलाई सैन्टर, स्वीमिंग पूल इत्यादि हेतु सुरक्षित क्षेत्र, अर्ध गम्भीर क्षेत्र, गम्भीर क्षेत्र एवं अतिदोहित क्षेत्र की जल मूल्य/प्रभार की दरों लागू किए जाने के सम्बन्ध में कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है। वाणिज्यक, औद्यौगिक, अवसंरचनात्मक और रेजीडेंशियल अपार्टमेन्ट्स/ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी हेतु पंजीकरण शुल्क ₹ 5000/- देय होगा।

6 – राज्य को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी क्षेत्रों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य सरकार द्वारा यह विनिश्चय किया गया है कि जनपद देहरादून में “जी.आर.डी. उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय” नाम से निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की स्वीकृति कैबिनेट ने प्रदान की है।
उक्त विश्वविद्यालय का लक्ष्य शिक्षा का अभिनवीकरण, अध्यापन और ज्ञानोपार्जन की नवीन पद्धति के लिए और व्यक्तित्व के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करना, सामाजिक व आर्थिक रूप से वंचित वर्ग को शिक्षा प्रदान करना, राज्य विषयक शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना तथा रोजगार के संसाधन उपलब्ध कराना है।

7- उत्तराखण्ड राज्य के जनपद उत्तरकाशी स्थित चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी एवं चमोली स्थित गौचर हवाई पट्टी को भारतीय वायु सेना, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार व उत्तराखण्ड सरकार के मध्य उच्च स्तरीय बैठकों में सहमति के आधार पर सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हवाई पट्टियों को संयुक्त रूप से नागरिक व सैन्य संचालन के उद्देश्य से एडवांस लैंडिंग ग्राउण्ड (ए०एल०जी०) लीज के आधार पर रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को हस्तान्तरित किये जाने पर कैबिनेट ने प्रदान की सहमति।

8 – राज्य में हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए “उत्तराखण्ड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026” के प्रख्यापन को कैबिनेट ने दी मंजूरी।

भारत सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन नीति, 2022 एवं राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2023, आगामी दशक में भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का वैश्विक केंद्र बनाने के दृष्टिकोण से अत्यंत उपयोगी होने के परिप्रेक्ष्य में उत्तराखण्ड सरकार भी ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन के दृष्टिगत प्रदेश में स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादन स्रोतों को प्रोत्साहित करने हेतु संकल्पित है। ग्रीन हाइड्रोजन एक स्वच्छ ऊर्जा एवं औद्योगिक ईंधन होने के कारण नेट जीरों के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।

उत्तराखण्ड राज्य में जल विद्युत जैसे प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए किया जा सकता है। इससे राज्य में विकास एवं रोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन रहित एवं जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों के सापेक्ष राज्य के योगदान को पूर्ण करने के साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन, बाजार निर्माण और मांग एकत्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड सरकार द्वारा “उत्तराखण्ड हरित हाइड्रोजन नीति, 2026” को लागू किये जाने पर कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान की है।