हाउस आफ हिमालयाज बिक्री का आंकड़ा 3.7 करोड़ के पार पहुंचा

पहाड़ की महिलाओं की मेहनत तैयार विशुद्ध उत्तराखंडी उत्पादों का ब्रांड ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’, लांचिंग के दो साल के भीतर साढ़े तीन करोड़ रुपए से अधिक की बिक्री करने में कामयाब रहा है। जल्द ही हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पाद विदेशों में भी बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे।
ग्राम्य विकास विभाग के अधीन, हाउस ऑफ हिमालयाज, उत्तराखंड के महिला स्वयं सहायता समूहों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और ग्रामीण उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों का कॉमन ब्रांड है। इसका उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों, दिसंबर 2023 के दौरान देहरादून में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर समिट के दौरान हुआ था। प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन के बाद हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पादों की एकाएक मांग बढ़ी है। बीते दो साल में कुल बिक्री का आंकड़ा 3.7 करोड़ के पार पहुंच गया है। अब हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के उत्पाद ऑफलाइन के साथ ही ई कामर्स साइट जियो मार्ट, अमेजन, ब्लिंकिट, बिग बास्केट और ब्रांड की खुद की अपनी वेबासइट https://houseofhimalayas.com/ पर भी मिल रहे हैं।
*50 विशिष्ट उत्पाद शामिल*
वर्तमान में इस ब्रांड में कुल 50 उत्पादों को शामिल किया गया है। इसमें मिलेट्स बिस्किट, मुन्स्यारी, चकराता, हर्षिल की राजमा, चौलाई, तोर दाल, पहाड़ का परंपरागत लाल चावल, झंगोरा, गहथ, काले भट्ट, चाय, तेल, पर्सनल केयर, हैंडीक्राफ्ट के उत्पाद शामिल हैं। इसके उत्पादों की गुणवत्ता की जांच तीन स्तरों पर की जा रही है। सरकार स्थानीय मेलों, त्यौहार के मौकों पर हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पादों को खरीदने पर जोर दे रही है। साथ ही सरकारी कार्यक्रमों और कार्यालयों के जरिए भी बिक्री बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है। दिवाली जैसे त्यौहार के लिए हाउस ऑफ हिमालयाज की ओर से खास गिफ्ट पैक उपलब्ध कराए गए थे, जिन्हें खूब पसंद किया गया।
*तीन हजार से महिलाओं को रोजगार*
हाउस ऑफ हिमालयाज में अब तक कुल 22 ट्रेडमार्क पंजीकृत किए जा चुके हैं। इस उत्पाद श्रंखला से राज्य की 3,300 से अधिक ग्रामीण महिलाएं प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ी हुई हैं। जबकि व्यापक क्रय नेटवर्क के माध्यम से 28,000 से अधिक महिलाओं को इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिला है। ये उत्पाद प्रमुख शहरों में 26 आउटलेट्स के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इसमें जौलीग्रांट एयरपोर्ट का एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट शामिल है। इसके साथ ही प्रतिष्ठित होटल श्रृंखलाओं एवं यात्रा केंद्रों में भी हाउस ऑफ हिमालयाज की प्रीमियम कार्ट्स स्थापित किए गए हैं। साथ ही चार धाम मार्ग पर 10 फ्लोर स्टैंडिंग यूनिट्स तैनात की गई हैं। कंपनी Reliance Freshpik, Flipkart एवं Zepto के साथ अनुबंध का प्रयास कर रही है। हाउस ऑफ हिमालयाज़ के उत्पाद को विदेशी बाजार में उपलब्ध कराने के लिए Amazon Global, Walmart के साथ साझेदारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

*माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल टू ग्लोबल विजन के अनुसार हाउस ऑफ हिमालयाज का उद्देश्य उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग को सुदृढ़ बनाकर, प्रामाणिक हिमालयी उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाज़ारों में स्थापित करना है। इससे प्रदेश के किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों की आर्थिकी मजबूत हुई है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों कठोर कार्यवाही किये जाने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में गृह विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग को प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों कठोर कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण मामलों को जनपद एवं पुलिस हेडक्वार्टर स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग कर शीघ्र मामलों के निस्तारण की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में अभियोजन और फॉरेंसिक जांचों के लिए अपने सिस्टम को और मजबूत किए जाने पर बल दिया, ताकि इसकी प्रगति और मॉनिटरिंग अच्छे प्रकार से हो सके। उन्होंने कहा कि ई-समन व्यवस्था को बढ़ाये जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि आमजन की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन 1905 पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण के लिए जिलाधिकारी एवं एसएसपी स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि गृह/पुलिस विभाग के अंतर्गत वादों के निस्तारण के लिए थाना और तहसील दिवस आयोजन भी शुरू किया जाना चाहिए। सर्वप्रथम इसके लिए इसकी एसओपी तैयार किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इस एसओपी के लिए सचिव गृह, सचिव राजस्व, मंडलायुक्त एवं पुलिस विभाग मिलकर एक एसओपी तैयार करे। उन्होंने मामलों के निस्तारण के लिए प्रत्येक माह 2 से 3 कैम्प आयोजित किए जा सकते हैं।

मुख्य सचिव ने थानों में जमा जब्त वाहनों की नीलामी कर खाली कराया जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में लम्बित मामलों से संबंधित वाहनों के डिस्पोजल के लिए और क्या किया जा सकता है, इसे एक्स्प्लोर कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पॉक्सो के मामलों पर तत्काल कार्यवाही करते हुए कठोर से कठोर कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम लगातार अपने पैर पसार रहा है इसे रोकने के लिए ठोस कार्यवाही और सिस्टम को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

मुख्य सचिव ने वन स्टॉप सेंटर्स को और अधिक मजबूत किए जाने की बात कही। साथ ही ड्रग्स के ख़िलाफ़ लगातार कार्यवाही करते हुए एनकॉर्ड की मासिक बैठकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आयोजन अनिवार्य रूप से किया जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विभाग तत्काल वांछित रिपोर्ट भेजें एवं मामलों के निस्तारण के लिए विभागों द्वारा विवेचनाओं को तत्काल भेजा जाना चाहिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि मानस नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन प्लेटफार्म को अधिक से अधिक जनसंचार किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को नशे की लत से बचाने के लिए शिक्षकों एवं अभिभावकों को अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कॉलेज एवं विश्वविद्यालयों में भी इसका अधिक से अधिक प्रचार प्रसार किए जाने की बात कही ताकि लोगों के बीच जागरूकता बढ़े। मुख्य सचिव ने कहा कि नशामुक्ति केंद्रों द्वारा ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं इसकी भी निगरानी की जाए। बड़े सरकारी अस्पतालों में नशामुक्ति के लिए कुछ बेड रिज़र्व किए जाने की संभावनाओं का परीक्षण कराया जा सकता है।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव एल फ़ैनाई, आर. मीनाक्षी सुंदरम एवं सचिव शैलेश बगौली सहित पुलिस विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और जनपदों से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

जलमभूमि फिल्म के पोस्टर का सीएम धामी ने किया विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में फिल्म “जलमभूमि” के पोस्टर का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक के राम नेगी एवं पूरी फिल्म टीम को शुभकामनाएँ एवं बधाई दीं।

उल्लेखनीय है कि यह फिल्म 6 फरवरी को रिलीज होने जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “जलमभूमि” जैसी फिल्में समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती हैं और सिनेमा के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को मजबूती मिलती है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए एक आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में फिल्म नीति को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत फिल्म निर्माताओं को सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से त्वरित अनुमति प्रदान की जा रही है। शूटिंग की अनुमति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे फिल्म निर्माताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा फिल्म शूटिंग पर सब्सिडी, स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं को रोजगार के अवसर, तथा स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के माध्यम से राज्य को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म नीति का उद्देश्य केवल फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तराखंड में वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म और फीचर फिल्मों के निर्माण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने फिल्म की सफलता की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी सिनेमा और रचनात्मक उद्योगों को हरसंभव सहयोग देती रहेगी।

कार्यक्रम में विधायक दुर्गेश लाल भी उपस्थित रहे।

डीएम सविन बंसल प्रमुख जनगणना अधिकारी नामित

भारत सरकार, गृह मंत्रालय द्वारा जनगणना प्रक्रिया के अग्रिम चरण में प्रवेश करने के दृष्टिगत जिलाधिकारी को प्रमुख जनगणना अधिकारी नामित किया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा अपेक्षा की जा रही है कि जनगणना चार्ज अधिकारियों की नियुक्ति, उनके साथ नियमित बैठकें आयोजित कर क्षेत्र निर्धारण, अन्तर्विभागीय समन्वय, कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करना तथा अधीनस्थ कर्मचारियों की नियुक्ति की कार्यवाही समयबद्ध रूप से पूर्ण कर त्वरित रूप से मंत्रालय को अवगत कराया जाए।
इसी क्रम में निदेशक जनगणना (गृह मंत्रालय, भारत सरकार) एवं जिला प्रशासन देहरादून की संयुक्त बैठक 28 जनवरी 2026 को आहूत की गई। बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कैन्ट बोर्ड गढ़ी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, छावनी परिषद क्लेमनटाउन को विधिवत लिखित सूचना एवं दूरभाष के माध्यम से अवगत कराए जाने के बावजूद उनके द्वारा बैठक में प्रतिभाग नहीं किया गया। इस पर निदेशक जनगणना द्वारा कड़ा रोष व्यक्त किया गया।

इसके पश्चात 31 जनवरी 2026 को पुनः बैठक आयोजित की गई, जिसकी सूचना 28 जनवरी 2026 को ही प्रेषित कर दी गई थी। साथ ही अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा बैठक के महत्व को स्पष्ट करते हुए दोनों छावनी परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से दूरभाष पर संपर्क कर बैठक में प्रतिभाग करने का अनुरोध भी किया गया। इसके बावजूद दोनों अधिकारी पुनः बैठक में अनुपस्थित रहे।
अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण संबंधित छावनी क्षेत्रों का क्षेत्र निर्धारण नहीं हो सका तथा जनगणना से संबंधित प्रारम्भिक कार्यवाही भी प्रारम्भ नहीं हो पाई। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए निदेशक जनगणना (गृह मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा जिला प्रशासन देहरादून को संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध Census Act, 1948 के अंतर्गत कार्यवाही की संस्तुति की गई है।
जिला प्रशासन देहरादून एवं निदेशक जनगणना द्वारा संयुक्त रूप से Census Act, 1948 की धारा 6, 7 एवं 11 (जिसमें एक माह तक के कारावास का प्रावधान है) के अंतर्गत अग्रिम विधिक कार्यवाही अमल में लाई जा रही है।

नगर निगम एवं जल संस्थान द्वारा क्षेत्र की 02 नालियों की गई टेपिंग, डीएम ने पूर्व में दिए थे निर्देश

जिला प्रशासन देहरादून द्वारा बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना सीवर संयोजन के सीधे गंगा जी में जा रहे 14 घरों का ग्रे वॉटर बंद कर दिया है तथा 2 नालियों की टैपिंग कर दी गई है । विगत दिवस जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा चंदेश्वर नाला ऋषिकेश का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ढालवाला नाले में अपशिष्ट जल (ग्रे-वाटर) प्रवाहित होने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए नगर निगम, ऋषिकेश एवं जल संस्थान (गंगा), ऋषिकेश के अधिकारियों को नाले में छोड़े जा रहे अपशिष्ट जल के सभी पाइप तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में जल संस्थान (गंगा), ऋषिकेश एवं नगर निगम, ऋषिकेश के अधिकारियों द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि ढालवाला नाले के आसपास कुल 21 भवन स्थित हैं। इनमें से 14 भवनों का ग्रे-वाटर सीधे नाले में जा रहा था, जबकि शेष 07 भवनों का ग्रे-वाटर विधिवत सीवर लाइन से संयोजित पाया गया।
संयुक्त निरीक्षण के उपरांत जल संस्थान ऋषिकेश द्वारा नाले में ग्रे-वाटर प्रवाहित कर रहे 14 भवनों के स्वामियों को नोटिस जारी किए गए तथा मौके पर ही उनके भवनों से नाले में जाने वाली अपशिष्ट जल निकासी को बंद कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में नगर निगम एवं जल संस्थान द्वारा क्षेत्र की 02 नालियों की भी टेपिंग कर दी गई है।
इस प्रकार अब ढालवाला नाला, चन्द्रेश्वर नगर में 14 भवनों एवं 02 नालियों से किसी भी प्रकार का ग्रे-वाटर खुले नाले में प्रवाहित नहीं हो रहा है। जिला प्रशासन द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता बनाए रखने के उद्देश्य से इस प्रकार की कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

सीएम धामी ने पीएम मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण को शानदार बजट के लिए बधाई दी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय बजट 2026-27 की सराहना करते हुए कहा कि यह बजट देश और राज्यों के विकास को नई दिशा देने के साथ ही सभी वर्गों के लिए अवसरों को बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि बजट में आर्थिक विकास तेज करने, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और सबका साथ सबका विकास सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को विकासोन्मुखी और समावेशी बजट के लिए बधाई देते हुए कहा कि किसानों, महिलाओं, वंचितों, युवाओं, छोटे उद्यमियों और पिछड़े वर्ग पर विशेष ध्यान दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, उद्योग और अवसंरचना के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। ये पूरे देश के साथ उत्तराखंड के लिए भी लाभकारी साबित होंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाएंगे।
बजट में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के लिए पर्यावरण-अनुकूल माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने की योजना है। उत्तराखंड के परिपेक्ष में बजट ने पर्यटन और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया है, जो विकास के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों, पशुपालन, उच्च मूल्य कृषि, पर्यटन और एमएसएमई के लिए किए गए बजट प्रावधान राज्य की ग्रामीण और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और बायोफार्मा क्षेत्र में किए गए निवेश से राज्य और देश दोनों का दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित होगा।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह बजट सबका साथ, सबका विकास और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार बजट में घोषित योजनाओं और प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए केंद्र सरकार के साथ पूरी तरह सहयोग करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट न केवल देश की आर्थिक ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को भी समान रूप से विकास के अवसर देगा।

असहाय, जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा की उड़ान को पंख लगाता जिला प्रशासन का प्रोजेक्ट ‘‘नंदा-सुनंदा’’

प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के 12 वें संस्करण में आज जिलाधिकारी सविन बसंल ने 26 बालिकाओं को स्कूल फीस राशि चैक वितरित किए। जिला प्रशासन ने 26 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की गई, जिनके स्कूल कालेज में बालिकाओं की फीस 6.93 लाख सीधे स्कूल खाते में हस्तांरित किये गए है। आज लाभान्वित हुई बालिकओं में 10 प्राईमरी स्तर, 8 माध्यमिक तथा 8 बालिकाओं की उच्च शिक्षा पुनर्जीवित की गई। जिला प्रशासन की इस महत्वाकांक्षी एवं जनसंवेदी प्रोजेक्ट नंदा सुनंदा योजना अंतर्गत अभी तक लगभग 1 करोड़ की धनराशि से 120 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की गई।
कु0 जिया जिनके पिता की मृत्यु उपरान्त उनकी बीफार्मा की शिक्षा बाधित हो गई थी की 39500 फीस, अनुष्का प्रजापति एमए प्रथम वर्ष पिता की मृत्यु उपरान्त शिक्षा बाधित हो गई थी, जिला प्रशासन ने 871450 फीस स्कूल प्रबन्धन के खाते में जमा कराई। कु समीक्षा कक्षा 05 हिमिका त्यागी कक्षा 2, आदिका कक्षा4, कनक कक्षा9, वैश्नवी नौटियाल कक्षा 11ं, फलकअली कक्षा 12, प्रभुगन कौर कक्षा 7, किरत कौर कक्षा 8, शदप कक्षा 10 के पिता की मृत्यु उपरान्त पारिवारिक खराब आर्थिकी के चलते शिक्षा बाधित हो गई थी। जिला प्रशासन की नंदा-सुनंदा योजना से बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित हो गई। वैष्णवी कक्षा 12 पिता की मृत्यु उपरान्त शिक्षा बाधित हो गई थी, इशिका सिंह बीकॉम, मदीहा बेग बीसीए प्रथम सेमेस्टर पिता की मृत्यु उपरान्त शिक्षा बाधित 67600 फीस जिला प्रशासन ने स्कूल प्रबन्धन के खाते में हस्तातंरित कर शिक्षा पुनर्जीवित की। दिया बडोनी कक्षा 9 पिता की मृत्यु उपरान्त बाधित शिक्षा प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा से पुनर्जीवित।
कु0 सृष्टि के पिता लम्ब समय से कैंसर पीड़ित हैं जिनका उपचार चल रहा है खराब आर्थिक स्थिति के चलते उनकी बीसीए 5वें सेमस्टर की शिक्षा बाधित हो गई थी जिला प्रशासन ने 64043 फीस स्कूल में जमा कराते हुए शिक्षा पुनर्जीवित की। कु0 पलक घेयल जिनके पिता कैंसर पीड़ित है तथा माता नर्सिंग होम में काम कर परिवार चलाती है की एमएससी की शिक्षा पारिवारिक आर्थिक तंगी के कारण बाधित हो रही थी, जिला प्रशासन का सहारा मिलते ही शिक्षा पुनर्जीवित हुई। मानसी साहू जिनकी पारिवारिक स्थिति बहुत खराब है आर्थिक तंगी के कारण जियोलॉजी पीएचडी चतुर्थ सेमेस्टर की शिक्षा बाधित हो रही थी की 50 हजार फीस जिला प्रशासन द्वारा स्कूल प्रबन्धन के खाते में दी गई।
कु0 अवनतिका राय, कक्षा 3, प्राची सिंह एसीए प्रथम सेमेस्टर, मायरा कक्षा 7, खुशी कौर कक्षा 4, शायना सिंघानिया कक्षा 10 के परिवार की खराब आर्थिकी की चलते शिक्षा बाधित हो गई थी जिला प्रशासन ने नंदा-सुनंदा से फीस स्कूल प्रबन्धन के खाते में जमा कराकर शिक्षा पुनर्जीवित कर दी है।
सभी बालिकाओं ने अपनी स्थिति जिलाधिकारी को बंया करते हुए मा0 मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड सरकार एवं जिला प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया और अधिक मेहनत कर सफल होकर असहायों की सेवा का संकल्प लिया।
जिलाधिकारी ने बालिकाओं का हौसला बढाते हुए कहा कि सरकार एवं जिला प्रशासन सदैव आपके साथ है आप मेहनत का जज्बा कायम रखे। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही एक ऐसा टूल है जिससे सशक्तीकरण एंव सफलता के रास्ते निकलतें है। यदि आप मेहनत करते हैं तो आपसे छोटे भाई बहन आसपास के लोग आपसे प्रभावित होकर शिक्षा का रास्ता पकड़ते हैं। उन्होंने कहा सरकार से अनुरोध करेंगे कि इस प्रोजेक्ट को नीति में शामिल किया जाए ताकि प्रदेशभर नंदा-सुनंदा रूपी जरूरतमंद बालिकाएं जिनकी शिक्षा किसी न किसी कारण से छूट गई है को पुनर्जीवित किया जा सके।
इस अवसर पर निदेशक जनगणना ईवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि जिला प्रशासन देहरादून के कार्य वर्तमान में लिजेन्ड्री स्तर पर है। उन्होंने बालिकाओं का हौसला बढाते हुए कहा कि जिला प्रशासन देहरादून से जो सहायता मिल रही है उसका लाभ उठायें तथा सफल होने पर हेल्पिंग हेंड रखते हुए अन्य जरूरतमदों के जीवन के उत्थान के लिए कार्य करने का संकल्प लेते हुए मेहनत जारी रखें।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि जिला प्रशासन असहाय बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित करने के लिए निंरतर प्रयासरत है, जिन बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित की गई उनका फालोअप लिया जाता है। उन्होंने बालिकाओं से शिक्षा पर फोकस रखने को कहा हौसला बढाया राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन सदैव आपके साथ है।
इस अवसर पर निदेशक जनगणना ईवा आशीष श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेन्द्र कुमार सहित सीडीपीओ बाल विकास एवं बालिकाओं की माता एवं परिजन उपस्थित रहे।

पहाड़ पर शीतकाल में वीरानी नहीं, बल्कि यात्रियों के उत्साह के हो रहे दर्शन

शीतकाल में पहाड़ पर इस बार भी वीरानी नहीं है, जो कि चार धामों के कपाट बंद हो जाने के बाद अक्सर दिखाई देती थी। पिछले वर्ष से शुरू हुई शीतकालीन यात्रा के बाद पहाड़ में तस्वीर बदली हुई है। यात्रियों की चहल-पहल सुखद अनुभूति करा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल भर पहले उत्तराखंड आकर जिस शीतकालीन यात्रा का प्रमोशन किया था, वह अब तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार के भगीरथ प्रयासों से उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा एक नया अध्याय लिख रही है।
चारों धामों से संबंधित पांडुकेश्वर, ऊखीमठ, मुखवा और खरसाली जैसे शीतकालीन प्रवास स्थलों तक देश-दुनिया के यात्री अच्छी-खासी संख्या में पहुंच रहे हैं। इस बार चार धाम यात्रा के कपाट बंद होने के बाद से अभी तक 34,140 यात्री इन स्थानों पर पहुंच चुके हैं। अभी करीब ढाई महीने शीतकालीन यात्रा अभी और चलनी है। यह लगातार दूसरा वर्ष है, जबकि राज्य सरकार के स्तर पर सफलतापूर्वक शीतकालीन यात्रा का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में जब पहली बार यह यात्रा शुरू की गई, तो तब 73,381 यात्री शीतकालीन यात्रा पर उत्तराखंड आए थे।

*शीतकालीन यात्रा में ऊखीमठ सबसे आगे*
-शीतकालीन यात्रा में अभी तक सबसे ज्यादा यात्री बाबा केदारनाथ के गद्दीस्थल ऊखीमठ पहुंचे हैं। चार धाम यात्रा प्रबंधन एवं नियंत्रण संगठन के विशेष कार्याधिकारी डॉ . प्रजापति नौटियाल के अनुसार-अभी तक सबसे ज्यादा 20,338 यात्रियों ने ऊखीमठ में दर्शन किए हैं। इसके बाद, ज्योर्तिमठ में यात्री पहुंचे हैं। खरसाली और मुखवा में भी लगातार यात्री दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। डॉ .नौटियाल के अनुसार-एक से डेढ़ हजार यात्री प्रतिदिन उत्तराखंड पहुंचकर शीतकालीन प्रवास स्थलों पर दर्शन कर रहा है।

*शीतकाल में पर्यटक स्थलों पर भी चहल-पहल*
-शीतकालीन यात्रा के प्रमोशन के बाद तमाम पर्यटक स्थलों पर भी काफी यात्री पहुंच रहे हैं। राज्य सरकार की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक शीतकाल में उत्तराखंड पहुंचे। इस क्रम में स्नो लैपर्ड टूर, टूर एंड ट्रैवल्स कॉन्कलेव जैसे आयोजनों पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है।

कोट—

*शीतकालीन यात्रा लगातार दूसरे वर्ष भी सफलतापूर्वक ढंग से चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने पिछली बार मुखवा व हर्षिल आकर जिस तरह से उत्तराखंड की इस यात्रा का देश-दुनिया में प्रमोशन किया, उसके सार्थक नतीजे निकल रहे हैं। देश-दुनिया के लोग शीतकाल में भी उत्तराखंड आकर पवित्र स्थलों के दर्शन कर रहे हैं। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को देख रहे हैं। बारहमासी यात्रा की सफलता से स्थानीय लोगों का रोजगार भी फल-फूल रहा है। राज्य सरकार शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री*

कोटद्वार में सीएम की बड़ी सौगात, 326 करोड़ से अधिक की 61 योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटद्वार में आयोजित बर्ड फेस्टिवल में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने जनपद के विभिन्न विकासखंडों के लिए करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं की सौगात दी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटद्वार पहुंचकर सबसे पहले दिव्यांग बालक-बालिकाओं से मिलकर उनसे संवाद किया तथा उनकी शिक्षा के बारे में जाना। उसके बाद उन्होंने सिद्धबली मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात उन्होंने सनेह क्षेत्र में आयोजित दो दिवसीय बर्ड वाचिंग फेस्टिवल का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा अन्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। साथ ही राजकीय कन्या इंटर कॉलेज कोटद्वार की छात्राओं ने लोकभाषा गढ़वाली में स्वागत गान गाकर अतिथियों का अभिनंदन किया। हेरिटेज स्कूल के नन्हे मुन्ने बच्चों की पक्षी एवं प्रकृति संरक्षण पर शानदार प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा कुल 61 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया। इनमें 21 योजनाओं का शिलान्यास शामिल रहा, जिनकी कुल अनुमानित लागत 8,172.78 लाख रुपये रही। वहीं 40 योजनाओं का लोकार्पण किया गया, जिनकी कुल लागत 24,439.55 लाख रुपये रही। इस प्रकार कुल 32,612.33 लाख रुपये की विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास संपन्न हुआ।

मुख्यमंत्री ने फेस्टिवल परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया, जिनमें पक्षियों की फोटो प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पक्षी पहचान एवं संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉल अत्यंत सराहनीय हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 21वां दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा और इसमें महिलाओं का योगदान सर्वाधिक रहेगा। महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद गुणवत्ता में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों से भी बेहतर हैं।

मुख्यमंत्री ने कोटद्वार क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि बस टर्मिनल, आयुष चिकित्सालय, खोह नदी को प्रदूषण मुक्त करने हेतु एसटीपी की स्थापना, मालन नदी पर 26 करोड़ रुपये से अधिक लागत से पुल निर्माण तथा कोटद्वार-नजीबाबाद फोर लेन का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए घोषणाएँ करते हुए कहा कि हल्दूखाता में नगरीय पेयजल योजना की खनन प्रभावित जीर्ण शीर्ण पाइपलाइन का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। राजकीय इंटर कॉलेज कोटद्वार में दो कक्षा-कक्ष, पुस्तकालय, विज्ञान कक्ष, कंप्यूटर कक्ष तथा चहारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा। कोटद्वार में खोह नदी के दायें तट पर स्थित जीतपुर गांव में बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जाएंगे। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र झंडीचौड़ में 108 एम्बुलेंस सेवा की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। साथ ही राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में चहारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक पक्षी प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं, जिनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बर्ड फेस्टिवल कोटद्वार क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैव विविधता की दृष्टि से देश के समृद्ध राज्यों में शामिल है, जहाँ लगभग 71 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। राज्य पर्यावरण संरक्षण में देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यहां प्रतिवर्ष लाखों प्रवासी पक्षी आते हैं तथा देश में पाई जाने वाली लगभग 1300 पक्षी प्रजातियों में से 400 से अधिक दुर्लभ एवं सुंदर प्रजातियाँ उत्तराखण्ड में पाई जाती हैं।

मुख्यमंत्री ने सुरख़ाब पक्षी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सुनहरे पंखों वाला दुर्लभ पक्षी सर्दियों के मौसम में उत्तराखण्ड आता है, जिस पर प्रचलित कहावत है कि “सुरख़ाब के पंख लगे हैं क्या”। उन्होंने कहा कि पक्षी पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ बीज प्रसार एवं पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत सरकार के सहयोग से राज्य में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है तथा इस उद्देश्य से वन विभाग को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है। सरकार ड्रोन पायलट, इको-टूरिज्म एवं वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी को प्रोत्साहित कर रही है तथा विद्यार्थियों को शैक्षिक यात्राओं में सहयोग प्रदान कर रही है। घायल पशु-पक्षियों के उपचार हेतु कालागढ़ में विशेष व्यवस्था की गई है।

विधानसभा अध्यक्षा एवं स्थानीय विधायक ऋतु खण्डूरी भूषण ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखण्ड में पायी जाने वाली लगभग 700 पक्षी प्रजातियों में से करीब 400 प्रजातियाँ कोटद्वार क्षेत्र में पायी जाती हैं, जो यहां की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है। उन्होंने बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल को इको-टूरिज़्म एवं बर्ड-टूरिज़्म को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल बताया।

उन्होंने सुझाव दिया कि इस आयोजन को प्रदेश सरकार के वार्षिक कैलेंडर में शामिल कर प्रत्येक वर्ष 31 जनवरी को ‘बर्ड फेस्टिवल दिवस’ के रूप में मनाया जाए, जिससे देश-विदेश के पक्षी एवं प्रकृति प्रेमी कोटद्वार की ओर आकर्षित हों।

विधानसभा अध्यक्षा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से कोटद्वार को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ेगी तथा स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में क्षेत्र को मिली करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे जनपद के समग्र विकास को नयी गति मिलेगी।

जिलाधिकारी ने उपस्थित जनसमूह का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जैव विविधता, प्रकृति और जीवन के प्रति संवेदनशीलता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि बर्ड फेस्टिवल अपने आप में एक अनूठी पहल है, जो न केवल पक्षियों के संरक्षण का संदेश देता है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार भी खोलता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से कोटद्वार क्षेत्र को पर्यटन के नए आयाम मिलेंगे और यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों की पहचान बनेगा। जिलाधिकारी ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि जब भी हम किसी पक्षी को खुले आकाश में उड़ते हुए देखते हैं, तब हमें स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ समझ में आता है। स्वतंत्रता केवल मनुष्य का अधिकार नहीं है, बल्कि पशु-पक्षियों और सम्पूर्ण प्रकृति का भी उतना ही मौलिक अधिकार है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह फेस्टिवल आने वाले समय में प्रकृति संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता का सशक्त माध्यम बनेगा और जिले की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नयी दिशा देगा।

दो दिवसीय बर्ड वाॅचिंग फेस्टिवल के पहले दिन लगभग 2500 से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया। इसमें 300 छात्र-छात्राएं, 800 युवा, 400 महिलाएं, 100 बर्ड वाॅचर तथा 900 से अधिक अन्य लोग शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित मैराथन दौड़, पेंटिंग, क्विज एवं निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले छात्र-छात्राओं को फेस्टिवल के अंतिम दिन उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

मंच संचालन डाॅ. पद्मेश बुड़ाकोटी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विधायक लैंसडाउन महंत दिलीप सिंह रावत, उत्तराखण्ड गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष पं. राजेद्र अणथ्वाल, उपाध्यक्ष सिंचाई समिति ऋषि कंडवाल, जिला पंचायत अध्यक्षा रचना बुटोला, मेयर नगर निगम कोटद्वार शैलेंद्र सिंह रावत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, डीएफओ लैंसडाउन जीवन मोहन दगाड़े, मण्डी समिति के अध्यक्ष सुमन कोटनाला, नगर आयुक्त कोटद्वार पीएल शाह, उपजिलाधिकारी कोटद्वार चतर सिंह चौहान, जिला पर्यटन विकास अधिकारी खुशाल सिंह नेगी, जिला अध्यक्ष भाजपा राज गौरव नौटियाल, पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बर्ड वॉचर तथा आम नागरिक उपस्थित रहे।

प्रवासी उत्तराखण्डियों से संवाद का सशक्त मंच बना ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी–02’

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली के रोहिणी में ‘हम सबका उत्तराखण्ड’ संस्था द्वारा आयोजित ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी सीजन–02’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डी, लोक कलाकार, युवा एवं महिलाएं उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और उत्तराखण्ड की संस्कृति, परंपराओं एवं लोक विरासत को समर्पित इस आयोजन की सराहना की।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा ‘उत्तराखण्ड के सितारे’ सम्मान से सुप्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सौरभ जोशी, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मनोज गोरखेला तथा लोक गायिका कल्पना चौहान को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन लोक कलाकारों को मंच और सम्मान देने के साथ-साथ समाज को सेवा और संस्कारों की भावना से भी जोड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति आज भी अपने गीतों, वेशभूषा और परंपराओं के माध्यम से जीवंत है तथा देश-विदेश में रहने वाले उत्तराखण्डी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह उल्लेख किया कि पारंपरिक गीत-संगीत और वेशभूषा के माध्यम से राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान स्पष्ट रूप से सामने आती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि इससे बच्चों और युवाओं में अपनी बोली, संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व की भावना विकसित होती है। लोकनृत्य और लोकगीत राज्य की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड को आस्था, तप, त्याग और साधना की भूमि बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगा-यमुना एवं आदि कैलाश जैसे पवित्र स्थलों के कारण विश्वभर में विशेष पहचान रखता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि स्वयं पहाड़ से जुड़े होने के कारण लोकसंस्कृति उनकी जीवनशैली और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा रही है, इसी सोच के साथ राज्य सरकार संस्कृति को विकास से जोड़ते हुए आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों का पुनर्विकास इसी दृष्टिकोण से किया जा रहा है। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों से न केवल आस्था को मजबूती मिली है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी नया आयाम मिला है। मंदिर माला मिशनों के माध्यम से धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड आज वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। विंटर टूरिज्म, ‘वेड इन उत्तराखण्ड’ और होम-स्टे जैसी पहलों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। कृषि, दुग्ध उत्पादन, मधु उत्पादन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर ग्रामीण आजीविका को सशक्त किया जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं। ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ योजना और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड से राज्य के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की गुणवत्ता की उन्होंने विशेष सराहना की।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड ने सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, बजट, बिजली उत्पादन और स्वास्थ्य सुविधाओं में निरंतर सुधार हुआ है। पलायन रोकने, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने में राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

उन्होंने यह भी कहा कि सख्त कानूनों, पारदर्शी शासन और समान नागरिक संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में सुशासन स्थापित हुआ है। प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए “उत्तराखण्ड का दशक” को साकार करने के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में संस्था पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कलाकार एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।