07 विभागों के वरिष्ठतम प्रतिष्ठान हो या आवासीय भवन, गंदा पानी गंगा में बहाया तो नहीं बख्शे जाएंगे: डीएम

ऋषिकेश स्थित चन्द्रेश्वर नाले से बिना उपचारित गंदे पानी एवं ठोस कचरे के गंगा नदी में प्रवाहित होने संबंधी प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित विभागों को नाले के समुचित उपचार हेतु विस्तृत रिपोर्ट एवं कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग तथा महाप्रबंधक, निर्माण वृत्त (गंगा), उत्तराखंड पेयजल निगम ने नाले का संपूर्ण नक्शा एवं प्रस्तावित एक्शन प्लान से अवगत कराया।

जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन का यह सुनिश्चित प्रयास रहेगा कि किसी भी स्थिति में दूषित जल गंगा नदी में प्रवाहित न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा में मिलने वाले सभी नालों का जल स्वच्छ एवं उपचारित होना अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने कहा कि 07 विभागों के वरिष्ठतम प्रतिष्ठान हो या आवासीय भवन, गंदा पानी गंगा में बहाया तो नहीं कोई भी नही बख्सा जाएगा। इस दौरान डीएम ने नाले में वेस्ट वाटर प्रवाह करते 25 घरों के पाइप-ड्रेन्स को आज ही सीज करने के निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी ने इस समस्या को अत्यंत गंभीर मानते हुए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता वृद्धि हेतु शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए तथा बिना उपचारित गंदे पानी की रोकथाम के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्य करने को कहा। उन्होंने कहा कि गंगा की स्वच्छता एवं पवित्रता बनाए रखने हेतु एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को प्रेषित की जाएगी, जिससे प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंगा को स्वच्छ रखा जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि नगर क्षेत्र में सीवरेज नेटवर्क अधिकांश क्षेत्रों को आच्छादित करता है, किंतु जहां सीवरेज कार्य प्रगति पर है अथवा प्रतिष्ठानों एवं आवासीय भवनों के कनेक्शन अभी सीवर लाइन से नहीं जुड़े हैं, वहां दूषित जल के उपचार हेतु प्राथमिकता से कार्य किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरसेप्शन एवं ड्रेनेज प्लान के अंतर्गत एसटीपी विस्तार की योजना तैयार की जा रही है तथा जिन प्रतिष्ठानों अथवा आवासीय भवनों द्वारा बिना उपचारित जल सीधे प्रवाहित किया जा रहा है, उनके विरुद्ध सख्त प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान जिलाधिकारी ने चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र के वार्ड-3 में गली मुहल्ले में पैदल चलकर आवासीय भवनों एवं प्रतिष्ठानों के सीवरेज और गलियों में बह रहे नालियों निरीक्षण करते हुए नालियों को सीवरेज से कनेक्ट कराने के निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी ने नगर निगम के मुख्य नगर आयुक्त, उपजिलाधिकारी, सीवरेज अनुरक्षण इकाई, पेयजल निगम, जल संस्थान एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आपसी समन्वय से इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत इसे आम जनता के साथ भी साझा किया जाएगा।

सीवरेज अनुरक्षण इकाई के अधिकारियों ने अवगत कराया कि ऋषिकेश में 7.50 एमएलडी क्षमता का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत आई एंड डी एवं एसटीपी, ढालवाला-मुनिकीरेती योजना के तहत निर्मित किया गया है। सीमित भूमि उपलब्धता के कारण यह एसटीपी बहुमंजिला स्वरूप में निर्मित किया गया है, जो देश का अपनी तरह का प्रथम एसटीपी है। यह एसटीपी अक्टूबर 2020 से अनुरक्षणाधीन है।

यह 7.50 एमएलडी एसटीपी तीन नालों के शोधन हेतु निर्मित है, जिनमें श्मशान घाट नाला एवं चन्द्रेश्वर नगर नाला प्रमुख हैं, जबकि ढालवाला नाले में सीवेज के साथ-साथ प्राकृतिक स्रोतों का जल भी अधिक मात्रा में आता है। वर्षा ऋतु के दौरान ढालवाला नाले में प्रवाह एसटीपी की क्षमता से अधिक हो जाता है। ऐसी स्थिति में श्मशान घाट एवं चंद्रेश्वर नगर नाले का संपूर्ण सीवेज एसटीपी में उपच ारित किया जाता है, जबकि ढालवाला नाले के प्रवाह को क्षमता की सीमा तक ही एसटीपी में लिया जाता है।

मानसून काल एवं उसके पश्चात लगभग चार माह तक ढालवाला नाले में भूमिगत जल की मात्रा अधिक रहने के कारण जल की गुणवत्ता परीक्षण में प्रदूषण की मात्रा अत्यंत न्यून पाई जाती है। ढालवाला नाले के दोनों ओर ड्रोन सर्वे एवं परिवारों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। प्रारंभिक रूप से 502 परिवार चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 38 परिवारों का सीवर सीधे नाले में तथा 84 परिवारों का ग्रे-वाटर नाले में प्रवाहित हो रहा है। सर्वेक्षण की प्रक्रिया जारी है तथा सभी आंकड़ों का सत्यापन किया जा रहा है। सीधे प्रवाहित हो रहे जल के नमूनों की जांच एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला से कराई जा रही है।

इस दौरान उप जिलाधिकारी ऋषिेकेश योगेश मेहरा, नगर आयुक्त राम कुमार बिनवाल, सीओ पुलिस पूर्णिमा गर्ग सहित अनुरक्षण इकाई, जल निगम, जल संस्थान, सिंचाई के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार ने की राज्य स्तर पर योजनाओं की सघन समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में उत्तराखण्ड में आवास एवं शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से लागू करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में सचिव–आवास, राज्य संपत्ति तथा आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण के आयुक्त एवं मुख्य प्रशासक डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (UHUDA) से संबंधित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक सचिव आवास के कॉन्फ्रेंस कक्ष में सम्पन्न हुई।

*UHUDA की संरचना और कार्यों का प्रस्तुतीकरण*
बैठक के प्रारम्भ में कार्यक्रम प्रबंधक, UHUDA द्वारा प्राधिकरण की स्थापना, संगठनात्मक संरचना, विधिक प्रावधानों के अंतर्गत परिभाषित कार्यों, विशेष नीतियों, नियम-विनियम एवं संशोधनों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें UHUDA एवं जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के गठन, वर्ष 1973 के अधिनियम के अंतर्गत कार्यों तथा प्राधिकरण द्वारा किए जा रहे अवस्थापना विकास कार्यों की जानकारी साझा की गई।

*प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति पर फोकस*
प्रस्तुतीकरण में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 एवं 2.0 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सचिव आवास ने योजना के तहत चल रहे निर्माण, स्वीकृति और आवंटन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं, ताकि शहरी क्षेत्रों में जरूरतमंदों को समय पर आवास उपलब्ध कराया जा सके।

*नई आवास नीति तैयार करने के निर्देश*
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य के लिए एक नई आवास नीति तैयार किया जाना समय की आवश्यकता है, क्योंकि वर्ष 2017 में जारी उत्तराखण्ड आवास नीति की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है। उन्होंने निर्देश दिए कि नई नीति में शहरीकरण की वर्तमान चुनौतियों, किफायती आवास, पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और सतत विकास को विशेष रूप से शामिल किया जाए।

*MDDA और HRDA परियोजनाओं की समीक्षा*
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 की समीक्षा के दौरान सचिव आवास ने देहरादून-मसूरी विकास प्राधिकरण (MDDA) की परियोजनाओं में लॉटिंग एवं आवंटन की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही HRDA द्वारा लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने पर जोर दिया गया, ताकि योजनाओं का लाभ आमजन तक समय पर पहुँच सके।

*PMAY 1.0 के कार्य तय समय में पूरे करने के निर्देश*
बैठक में एनपीएमसी के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 से संबंधित सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा (सितम्बर 2026) के अनुसार पूरा करने के निर्देश दिए गए। सचिव आवास ने अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर आवंटन सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण करने के लिए औपचारिक पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए।

*कैरिंग कैपेसिटी अध्ययन पर विशेष जोर*
बैठक में कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी के लिए तैयार ड्राफ्ट RFP पर भी चर्चा की गई। सचिव आवास ने इसे राज्य के प्रमुख नगरों, तीर्थस्थलों, विशेषकर चारधाम क्षेत्रों एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में इस अध्ययन को प्राथमिकता के आधार पर शामिल करने के निर्देश दिए, जिससे विकास कार्यों को पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़ाया जा सके।

*आगामी बैठकों के लिए रोडमैप तय*
सचिव आवास ने निर्देश दिए कि आगामी बैठक में पीएमयू टीम का परिचय, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 एवं 2.0 की प्रगति, शासन को प्रस्तुत विभिन्न ड्राफ्ट नीतियों एवं ड्राफ्ट RFPs की विस्तृत समीक्षा की जाए। साथ ही UHUDA से संबंधित सभी नियम, विनियम, उपविधियाँ एवं नीतियों की एक-एक प्रति संदर्भ हेतु उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए।

*वरिष्ठ अधिकारियों की व्यापक सहभागिता*
बैठक में संयुक्त मुख्य प्रशासक UHUDA, ग्रामीण मंत्रालय UHUDA, पीएमयू टीम, विशेष सचिव आवास एवं शहरी विकास, निदेशक/उप सचिव आवास रजनीश जैन, अपर सचिव राहुल सुन्द्रीयाल, संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह, कार्यक्रम प्रबंधक कैलाश चन्द्र पांडेय, हाउसिंग विशेषज्ञ रोहित रंजन, संस्थागत सुधार विशेषज्ञ कामना करण एंव आईटी व एमआईएस विशेषज्ञ सचिन नौटियाल शामिल थे। सभी अधिकारियों ने विभागीय कार्यों की प्रगति और चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की।

*सचिव–आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान*
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि राज्य में आवास एवं शहरी विकास से जुड़ी सभी योजनाओं को पारदर्शी, समयबद्ध और जनहितैषी तरीके से लागू किया जाए। उत्तराखण्ड आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण के माध्यम से आवासीय योजनाओं, अवस्थापना विकास कार्यों और नीतिगत सुधारों को नई दिशा दी जा रही है। वर्ष 2017 की आवास नीति की अवधि समाप्त हो चुकी है, इसलिए राज्य की वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक नई आवास नीति तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत चल रहे कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है और सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए गए हैं कि आवंटन, लॉटिंग एवं निर्माण से जुड़े लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों, प्रमुख नगरों और तीर्थस्थलों में विकास कार्यों को पर्यावरणीय संतुलन के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि राज्य में सतत और संतुलित विकास को मजबूती मिल सके।”

डीएम का सब रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश में औचक निरीक्षण, विलेखों का निबंधन करते लिपिक पकड़ा गया

जिलाधिकारी सविन बंसल ने आज सब रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं एवं गंभीर अनियमितताओं पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। जिलाधिकारी ने पूछा कि आपके सम्पति मूल्य आंकलन 47-ए का कोई ज्ञान नही तो स्टाम्प शुल्क कैसे किया तय, किसने तुम्हे निबंधक के बदले अधिकार दिए इस पर अपराधिक कार्यवाही की जाएगी।
डीएम का औचक निरीक्षण, सब रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई जिस पर कड़ा एक्शन तय है। सब रजिस्ट्रार के बगैर ही अवैधानिक रूप से लिपिक द्वारा विलेखों का निबंधन किया जाना पाया गया। औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय दरों पर भूखंड के छोटे टुकड़े कर कई रजिस्ट्रीय बरामद हुई जिससे करोड़ो की स्टाम्प चोरी भी संभावना है जिस पर विस्तृत आख्या शीघ्र मांगी गई। कई महीनों से लम्बित मूल अभिलेख आवेदकों को वापिस नहीं किया गया, मूल विलेख पत्र अलमारी में धूल खा रहे थे। वापिस करने की अधिकतम तीन दिन है सीमा, परंतु सैकड़ों मूल विलेख अमलमारी में धूल खाते मिले। लम्बित मूल अभिलेख, कूटरचित विलेख पर डीएम ने कम्प्यूटर जब्त करवया तहसील प्रशासन के सुपुर्द किया। मूल अभिलेख लौटाने रजिस्ट्री की नकल देने को हजारो आमजन परेशान हो रहे थे। रजिस्ट्री नकल अनुमन्य 24 घंटे के सापेक्ष महीनों/वर्षों से लम्बित मिली। निरीक्षण दौरान कार्यालय में मिला घोस्ट कार्मिक, जिसका न कोई नियुक्ति पत्र न उपस्थिति पंजिका में नाम था इस जिपर जिलाधिकारी ने कार्मिकों का रिकार्ड तलब कर दिया है। वहीं उपस्थित फरियादियों ने अपनी आपबीती प्रशासन को सुनाई जिस पर उप जिलाधिकारी ऋषिकेश को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी नेे निरीक्षण में पाया कि कार्यालय में 6 माह से अधिक अवधि के विलेख पत्र लंबित थे। औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित खसरा नंबर एवं सूची की जानकारी पूछे जाने पर उपस्थित कार्मिक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। विलेखों की प्रतिलिपि समय पर संबंधित क्रेताओं को उपलब्ध न कराए जाने तथा इस संबंध में मुख्यालय को सूचना प्रेषित किए जाने का कोई रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
उप निबंधक कार्यालय में घोस्ट कार्मिक पाए जाने पर जिलाधिकारी ने समस्त कार्मिकों का विवरण तत्काल तलब किया। कार्यालय में पुराना डेटाबेस संचालित पाया गया, जिस पर संबंधित कार्मिक कोई ठोस व तार्किक कारण नहीं बता सके। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि सब रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में रजिस्ट्री की जा रही थी। बताया गया कि सब रजिस्ट्रार देहरादून मीटिंग में हैं, जबकि रजिस्ट्री केवल निबंधन लिपिक की उपस्थिति में की जा रही थी, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। जिलाधिकारी द्वारा पुराने विलेख पत्र जप्त किए गए तथा कार्मिक उपस्थिति रजिस्टर भी तलब किया गया।
कार्यालय में रजिस्ट्री की नकल उपलब्ध कराने में अनावश्यक विलंब किया जा रहा था। इसके अतिरिक्त, रजिस्ट्री शुल्क लेने के लिए पृथक व्यवस्था नहीं पाई गई तथा समस्त भुगतान एक ही काउंटर पर लिए जा रहे थे, जो प्रक्रियात्मक त्रुटि को दर्शाता है। निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कार्यालय के प्रातः 9ः30 बजे खुलने के बावजूद पहली रजिस्ट्री प्रातः 11ः15 बजे की गई। इस विलंब के संबंध में पूछे जाने पर भी उपस्थित कार्मिक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
जिलाधिकारी ने सभी अनियमितताओं को अत्यंत गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करने, रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराने तथा दोषी कार्मिकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता अथवा नियमों की अनदेखी कदापि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहर, तहसीलदार चमन सिंह आदि उपस्थित रहे।

सीएम के हाथों 1035 सहायक अध्यापकों को मिले नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, पटेलनगर, देहरादून में 1035 सहायक अध्यापक (प्राथमिक शिक्षा) को नियुक्ति पत्र प्रदान किए, जिनमें 17 विशेष शिक्षक भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि सभी युवा शिक्षक राज्य में शिक्षा का स्तर बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि आज से आपके कंधों पर उत्तराखंड के भविष्य को संवारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आ गई है। जब किसी बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा मिलती है, तो वह केवल अपना जीवन ही नहीं संवारता, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी अमूल्य योगदान देता है। शिक्षक देश के उज्ज्वल भविष्य के शिल्पकार हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा देने के साथ-साथ उनमें समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना भी विकसित करें, जिससे वे शिक्षा के साथ संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक भी बनें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने से लेकर डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और कौशल विकास तक हर स्तर पर व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पिछले साढ़े चार वर्षों में 28 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हमारे युवाओं के आत्मसम्मान की जीत है। इन साढ़े चार वर्षों में जितनी नौकरियां युवाओं को मिली हैं, वह राज्य गठन के बाद और पूर्ववर्ती सरकारों के समय से दो गुना से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य से किसी को खिलवाड़ नहीं करने देगी।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि पिछले साढ़े चार साल में शिक्षा विभाग में 11 हजार 500 से अधिक नियुक्तियां प्रदान की गई हैं। 3 हजार 500 से अधिक विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया गतिमान है। राज्य में शिक्षा में नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस अवसर पर शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती, निदेशक प्राथमिक शिक्षा अजय नौडियाल, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण वंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक कंचन देवराड़ी उपस्थित थे।

उत्तराखंड में जनकल्याण अभियानों की बड़ी सफलता, एक ही दिन में 14 कैंप और 6,368 प्रतिभागी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व एवं जनकल्याणकारी दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप राज्य में चलाए जा रहे विभिन्न सेवा एवं जागरूकता अभियानों को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। सरकार की सक्रिय नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के चलते प्रदेशभर में आयोजित किए जा रहे कैंपों के माध्यम से बड़ी संख्या में नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं।

आज प्रदेश में 14 कैंपों का आयोजन किया गया, जिनमें 6,368 नागरिकों ने सहभागिता कर सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त किया। यह आंकड़े सरकार की जनहितकारी योजनाओं की स्वीकार्यता और प्रशासन की कार्यक्षमता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

यदि अद्यावधि (अब तक) की बात की जाए तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में कुल 474 कैंपों का सफल आयोजन किया जा चुका है। इन कैंपों के माध्यम से अब तक 3,77,358 नागरिकों ने विभिन्न योजनाओं, सेवाओं एवं सुविधाओं का लाभ उठाया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं को पहुँचाना है। कैंपों के माध्यम से न केवल सेवाओं का त्वरित निस्तारण हो रहा है, बल्कि आम जनता को सरकार से सीधे जुड़ने का अवसर भी मिल रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे अभियानों को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाया जाए, ताकि हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित रूप से पहुँच सके।

यह उपलब्धि स्पष्ट करती है कि उत्तराखंड सरकार जनसेवा, पारदर्शिता और सुशासन के संकल्प पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

यूसीसी की घोषणा से लेकर प्रभावी क्रियान्वयन तक गौरव की अनुभूति: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में आयोजित प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस” को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने समान नागरिक संहिता को तैयार करने वाले कमेटी के सदस्यों, कुशल क्रियान्वयन करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण में योगदान देने वाले वीएलसी को भी सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यूसीसी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा, इसी दिन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू हुई है, जिससे समाज में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना सुनिश्चित हो सकी। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और परंपरा सदैव समरसता और समानता की संवाहक रही है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी गीता में “समोहम सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योस्ति न प्रियः” का उपदेश दिया है, जिसका अर्थ है कि मैं सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता हूँ, न किसी का शत्रु हूँ और न ही किसी के प्रति पक्षपात करता हूँ। सनातन संस्कृति की यही महानता है, जिसने सदियों से दुनिया को समानता, न्याय और मानवता का मार्ग दिखाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं ने ‘‘समान नागरिक संहिता’’ को संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में सम्मिलित किया था। उनका मत था कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उन्होंने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व, अपने दृष्टिपत्र में राज्य में “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का संकल्प लिया। देवभूमि की जनता ने भी इस “देवकार्य” के लिए भाजपा को अपार समर्थन और आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उन्होंने दुबारा सत्ता संभालते ही पहले दिन से ही उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने के लिए कार्य प्रारंभ किया। इसी क्रम में 7 फरवरी 2024 को समान नागरिक संहिता विधेयक को राज्य विधानसभा में पारित कर राष्ट्रपति महोदया को भेजा गया। जिसे 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। इसके बाद सभी आवश्यक नियमावली एवं प्रक्रियाओं को पूर्ण करते हुए, राज्य सरकार ने 27 जनवरी, 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को विधिवत रूप से लागू कर दिया।

*महिला सशक्तिकरण के नए युग की शुरुआत*
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि समाज में कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई थी। यूसीसी लागू होने से न केवल राज्य से सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं बल्कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत भी हुई है। अब उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया। यही कारण है कि मुस्लिम महिलाओं ने इस कानून का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात कई दशकों तक वोट बैंक की राजनीति के कारण, यूसीसी को लागू करने का साहस नहीं दिखाया गया। जबकि दुनिया के सभी विकसित और सभ्य देशों सहित प्रमुख मुस्लिम राष्ट्रों में समान नागरिक संहिता पहले से ही लागू है।

*समानता से समरसता का प्रयास*
मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है बल्कि ये तो समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर सभी नागरिकों में “समानता से समरसता’’ स्थापित करने का एक कानूनी प्रयास है। इस कानून के माध्यम से किसी भी धर्म की मूल मान्यताओं और प्रथाओं को नहीं बदला गया है, केवल कुप्रथाओं को दूर किया गया है। यूसीसी में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, विवाह-विच्छेद एवं उत्तराधिकार आदि से संबंधित नियमों को एक समान किया गया है। साथ ही संपत्ति के बंटवारे और बाल अधिकारों के विषय में भी स्पष्ट कानून बनाए गए हैं। संपत्ति के अधिकार में बच्चों में किसी भी प्रकार का भेद नहीं किया गया है, किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने के पश्चात उसकी संपत्ति को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच किसी प्रकार के मतभेद की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए मृतक की सम्पत्ति पर उसकी पत्नी, बच्चों एवं माता पिता को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय को देखते हुए युवक-युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित के उद्देश्य से इस कानून में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार उनके माता-पिता या अभिभावक को देगा, ये जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जा रही है। लिव-इन के दौरान जन्में बच्चों को उस युगल का बच्चा ही मानते हुए, उसे जैविक संतान के समान समस्त अधिकार प्रदान किए गए हैं।

*सिर्फ घोषणा नहीं सफल क्रियान्वयन भी किया*
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये उनके लिए निजी तौर पर अत्यंत गर्व का विषय है कि उन्होंने समान नागरिक संहिता को घोषणा से लेकर धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित करके दिखाया है। उन्होंने कहा कि बीते एक वर्ष में राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता के माध्यम से नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं की पहुँच को और अधिक सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाया है। जहां यूसीसी लागू होने से पहले हमारे राज्य में औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण हुआ करते थे वो संख्या आज बढ़कर प्रतिदिन 1400 से अधिक हो गई है। राज्य की 30 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत विवाहित दंपतियों का पंजीकरण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। बीते एक वर्ष में यूसीसी के अंतर्गत लगभग 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का निस्तारण भी किया जा चुका है। राज्य में ऑनलाइन पोर्टल व्यवस्था तथा 7,500 से अधिक सक्रिय कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से शासन को वास्तव में सीधे जनता के द्वार तक पहुँचा दिया है।

*विवाह में धोखाधड़ी करने पर सख्ती का प्रावधान*
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में राज्य सरकार ने यूसीसी में आवश्यक संशोधनों से संबंधित विधेयक पारित किया था, जिसे एक दिन पहले ही राज्यपाल महोदय की स्वीकृति प्राप्त हुई है। जिसके अंतर्गत विवाह के समय यदि अपनी पहचान छिपाने या गलत तथ्य बताने पर ऐसे विवाहों को निरस्त करने का प्रावधान है। इसके साथ ही, विवाह एवं लिव-इन संबंधों में किसी भी प्रकार के बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।

*देश को जोड़ते हैं मजबूत फैसले*
मुख्यमंत्री ने कहा कि डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने जनसंघ की स्थापना के समय से ही कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति और समान नागरिक संहिता को लागू करने का संकल्प लिया था, अब ये संकल्प सिद्धि बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह साबित हुआ है कि मजबूत फैसले देश को तोड़ते नहीं, बल्कि जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर समान नागरिक संहिता को लेकर भ्रांतियाँ फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर कभी इसे मूल निवासी तो कभी लिव-इन पंजीकरण को लेकर भ्रम फैलाया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति राज्य का ‘मूल निवासी’ नहीं बन सकता। इसी तरह लिव-इन संबंध पंजीकरण का प्रावधान बहनों-बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार से मां गंगा देवभूमि उत्तराखंड से निकलकर पूरे भारत को अभिसिंचित करती है, उसी प्रकार उत्तराखंड से निकलने वाली ये “समान नागरिक संहिता’’ की धारा भी देश के दूसरे राज्यों को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए अवश्य प्रेरित करेगी।

*बहु विवाह पर होगी सख्ती*
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कुछ मामले बहु विवाह और विवाह विच्छेद से भी संबंधित सामने आए हैं, ऐसे मामलों में अलग से प्रावधान करते हुए, सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी अमेरिका के एक एनजीओ ने उन्हें हेट स्पीच का जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन यदि धर्मांतरण, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ बोलना हेट स्पीच है तो फिर वो फिर अच्छा ही है।

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सविता कपूर, सुरेश गड़िया, बृज भूषण गैरोला, सचिव गृह श्री शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, यूसीसी समिति के सदस्य पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह, दून विवि की वीसी प्रो सुरेखा डंगवाल, मनु गौड़, अजय मिश्रा, विशेष सचिव गृह निवेदिता कुकरेती एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

संविधान केवल कानून नहीं, भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर देहरादून स्थित गांधी पार्क में भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित सामूहिक वंदे मातरम् गायन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर इस गरिमामयी सामूहिक वंदे मातरम् गायन कार्यक्रम में सहभागिता करना उनके लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर इसलिए भी विशेष है क्योंकि राष्ट्रगीत वंदे मातरम् अपनी रचना के 150 गौरवशाली वर्ष पूर्ण कर चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की लेखनी से निकला वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन का नारा रहा है, जिसने देशवासियों को एक साझा भावनात्मक और सांस्कृतिक पहचान प्रदान की तथा पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम के सूत्र में बाँधने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि जब गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया, तब यह केवल नारा नहीं रहा, बल्कि एकता, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण का सजीव प्रतीक बन गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् कोई सामान्य कविता नहीं है, बल्कि यह माँ भारती के प्रति आस्था, समर्पण और कर्तव्यबोध की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रगीत हजारों कंठों से एक साथ गूंजता है, तो केवल स्वर नहीं मिलते, बल्कि हृदय, विचार और संकल्प भी एक हो जाते हैं। इसी भाव को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री ने भारत विकास परिषद के सभी कार्यकर्ताओं की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस का यह दिन राष्ट्र के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1950 में स्वतंत्र भारत ने अपना संविधान लागू कर एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपनी यात्रा आरंभ की। उन्होंने संविधान सभा के सभी सदस्यों, स्वतंत्रता सेनानियों, क्रांतिकारियों, सत्याग्रहियों और माँ भारती के अमर सपूतों को नमन करते हुए उनके संघर्ष और बलिदान को स्मरण किया। साथ ही उन्होंने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सेना और पुलिस के वीर जवानों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राचीन सभ्यता, लोकतांत्रिक मूल्यों और हजारों वर्षों की सांस्कृतिक चेतना का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि जिस भारत के बारे में यह कहा जाता था कि इतनी विविधताओं वाला देश लोकतांत्रिक नहीं रह पाएगा, वही भारत आज विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में भारत विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आधुनिक बुनियादी ढांचे, स्मार्ट सिटी, राष्ट्रीय राजमार्गों और हवाई कनेक्टिविटी के माध्यम से विकास को नई गति मिली है। डिजिटल इंडिया, यूपीआई और तकनीकी नवाचारों ने प्रत्येक नागरिक को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीब कल्याण के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व कार्य हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों ने देश की आर्थिक नींव को मजबूत किया है तथा उत्पादन और नवाचार के क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि सेनाओं के निरंतर आधुनिकीकरण, उन्नत हथियारों और रक्षा प्रौद्योगिकी के माध्यम से सीमा सुरक्षा को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। साथ ही भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नए आत्मविश्वास के साथ स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल घोषणाएं नहीं कीं, बल्कि ठोस निर्णय लेकर उन्हें धरातल पर उतारा है। देवभूमि की सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगा विरोधी कानून लागू किए गए हैं। ऑपरेशन कालनेमी के माध्यम से सनातन धर्म को बदनाम करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई है तथा मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सख्त भू-कानून लागू कर देवभूमि को अवैध कब्जों और माफियागिरी से सुरक्षित किया जा रहा है। समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना है। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके तहत अब तक 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेजा जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में 27 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने बताया कि राज्य गठन के समय की तुलना में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 26 गुना बढ़ चुका है तथा प्रति व्यक्ति आय में लगभग 17 गुना की वृद्धि हुई है। बिजली उत्पादन में कई गुना वृद्धि और सड़कों के नेटवर्क के दोगुना होने से प्रदेश के विकास को नई गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन निवारण आयोग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 44 प्रतिशत रिवर्स पलायन दर्ज किया गया है, जो यह दर्शाता है कि लोग अब रोजगार, सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्य इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ देवभूमि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है और उन्हें विश्वास है कि प्रदेशवासी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए उत्तराखंड सहित पूरे देश को और अधिक सशक्त बनाने में योगदान देंगे।

कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सविता कपूर तथा अन्य जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री आवास में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने सभी को संविधान की उद्देशिका की शपथ भी दिलाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सशक्त, समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लिए हम सभी को अपने दायित्वों का निर्वहन करना है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा राज्य के समग्र विकास के लिए हर क्षेत्र में तेजी से कार्य किए जा रहे हैं।

गंगा तट पर संस्कृति और संगीत का अनुपम संगम, बसंतोत्सव बना आध्यात्मिक चेतना का उत्सव: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज भरत मंदिर, ऋषिकेश में आयोजित वसंतोत्सव 2026 – मैथिली ठाकुर नाइट में सम्मिलित हुए। गंगा के पावन तट पर आयोजित इस भव्य एवं भक्तिमय कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संतों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों तथा देश-प्रदेश के विभिन्न कोनों से आए श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पतित-पावनी मां गंगा के श्रीचरणों में नमन करते हुए कहा कि मधुबनी की शान, भजनों एवं लोकगीतों की स्वर साधिका तथा देश की सबसे युवा विधायक मैथिली ठाकुर जैसी प्रतिभा का योगनगरी ऋषिकेश की पावन धरा पर आगमन सभी के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने पूज्य संतगणों एवं देश-प्रदेश से पधारे श्रद्धालुओ का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री ने इस विशिष्ट कार्यक्रम के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गंगा के पवित्र तट पर आयोजित यह बसंतोत्सव भजन संध्या संस्कृति और संगीत के अनुपम संगम के माध्यम से लोक संस्कृति और सनातन परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने ऋषिकेश बसंतोत्सव समिति को इस भव्य और भक्तिमय आयोजन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश आधुनिक योग और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ सनातन संस्कृति की प्राचीन पुण्य भूमि भी है। सतयुग में इस धरा पर महर्षि रैभ्य को भगवान विष्णु के दर्शन हुए, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने रावण वध के पश्चात यहीं तपस्या की तथा भरत जी ने भगवान नारायण की स्थापना कर पूजन किया। कालांतर में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा भी इस भूमि पर विशेष पूजन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैथिली ठाकुर ने अपनी साधना, प्रतिभा और संकल्प से यह सिद्ध किया है कि समर्पण, परिश्रम, भक्ति और सेवा भाव से समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैथिली ठाकुर की जीवन यात्रा यह दर्शाती है कि कला और संस्कृति केवल मंच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा भी बनती है। जब आज अनेक युवा पश्चिमी संगीत की ओर आकर्षित हो रहे हैं, तब मधुबनी से निकली इस युवा प्रतिभा ने अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए मैथिली और भोजपुरी लोक संगीत को जन-जन तक पहुंचाया है। उन्होंने वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें ‘कल्चरल एंबेसडर ऑफ द ईयर’ के नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड से सम्मानित किए जाने का उल्लेख भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे शास्त्रों में गीत और संगीत के माध्यम से की गई उपासना को ईश्वर से सीधे संवाद का मार्ग बताया गया है। सच्चे मन से की गई स्वर साधना कलाकार को समाज का पथ-प्रदर्शक बना देती है। उन्होंने कहा कि मैथिली ठाकुर जैसी विभूतियां यह स्मरण कराती हैं कि भारत की आत्मा आज भी गांवों की चौपालों, मंदिरों की घंटियों, लोकगीतों की धुनों और मां गंगा की लहरों में जीवित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज सनातन संस्कृति की धर्मध्वजा विश्व में गर्व के साथ फहरा रही है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, बद्रीनाथ-केदारनाथ धामों का पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे कार्यों से भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिली है। इसी प्रेरणा से उत्तराखंड सरकार भी केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर, यमुना तीर्थ पुनरुद्धार जैसी परियोजनाओं पर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दून विश्वविद्यालय में “सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज” की स्थापना कर संस्कृति और दर्शन के अध्ययन को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन की स्थापना की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक संतुलन और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। यह प्रतिबद्धता कठोर निर्णयों और साहसिक कदमों के रूप में दिखाई देती है। सख्त धर्मांतरण कानून, दंगा रोधी कानून, नकल विरोधी कानून, भू-कानून, यूसीसी लागू करने सहित भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनसमर्थन और सहयोग से सरकार देवभूमि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” को अवश्य पूर्ण करेगी।

पूर्व राज्यपाल कोश्यारी को पद्म भूषण मिलने पर सीएम धामी ने जताया हर्ष

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जी को पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किए जाने की घोषणा पर हर्ष व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान प्रदान किए जाने की घोषणा समस्त उत्तराखंडवासियों के लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। यह सम्मान उनके संपूर्ण सार्वजनिक जीवन, राष्ट्रसेवा और समाजहित के प्रति समर्पण का यथोचित सम्मान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोश्यारी का संपूर्ण सार्वजनिक जीवन सादगी, सिद्धांतनिष्ठा, अनुशासन और राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा है। अपने दीर्घ राजनीतिक जीवन में उन्होंने सदैव जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और उत्तराखंड सहित देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगत सिंह कोश्यारी जी का जीवन संघर्ष, मूल्यों की राजनीति और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी उदाहरण है। पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, सामाजिक समरसता के सुदृढ़ीकरण और सांस्कृतिक चेतना के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए गए उनके प्रयास हम सभी के लिए प्रेरणास्तंभ हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कोश्यारी ने अपने कार्यों और विचारों से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश को दिशा देने का कार्य किया है। उनका अनुभव, दूरदृष्टि और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री ने समस्त प्रदेशवासियों की ओर से भगत सिंह कोश्यारी जी को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं दीं तथा उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।