मुख्य सचिव बर्द्धन ने जमरानी व सौंग बांध परियोजनाओं की समीक्षा की

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में सिंचाई विभाग द्वारा निर्माणाधीन जमरानी एवं सौंग बांध परियोजनाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने दोनों महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर विस्तार से चर्चा की एवं दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोनों प्रोजेक्ट्स को समय पर पूर्ण किया जाना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने जमरानी बांध बहुद्देेश्यीय परियोजना सौंग बांध पेयजल परियोजना पर विस्तार से चर्चा करते हुए सिंचाई विभाग को परियोजना निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध सभी निविदा एवं आवश्यक अन्य प्रक्रियाएं समय पर पूर्ण कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण परियोजना का फ्लो चार्ट तैयार कर प्रत्येक चरण को निर्धारित समय पर पूर्ण कराया जाए। मुख्य सचिव ने निर्माण कार्यों में तेजी लाए जाने हेतु आवश्यक सामग्री की उपलब्धता को बढ़ाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता पर जोर देते हुए आवश्यक फर्स्ट पार्टी, सेकंड पार्टी एवं थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल एवं मूल्यांकन भी नियमित तौर पर कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजनाओं से प्रभावितों के पुनर्वास कार्य पर समयबद्धता एवं तत्परता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने प्रभावितों को मुआवजा, पुनर्वास और आबंटन का कार्य आपसी तालमेल और विश्वास में लेकर किया जाए इसके लिए लगातार संवाद जारी रखे जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव सिंचाई युगल किशोर पंत ने बताया कि जमरानी बांध बहुद्देशीय परियोजना की कुल लागत ₹ 3678.23 करोड़ है। इस परियोजना को जून 2029 तक पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सौंग बांध परियोजना 130.60 मीटर ऊंचा, 150 एमएलडी की गुरुत्व आधारित पेयजल परियोजना है, जिसकी लागत ₹ 2524.42 करोड़ है। इसके निर्माण कार्य नवम्बर 2029 तक पूर्ण कर लिया जाएगा।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष सिंचाई सुभाष चंद्र सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गीता भवन में कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का किया विमोचन

ऋषिकेश, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज दो दिनी उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे हुए हैं। उन्होंने आज स्वर्गाश्रम के गीताभवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध कल्याण पत्रिका के शताब्दी महोत्सव में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन भी किया।

गीताभवन में गीताप्रेस गोरखपुर की प्रसिद्ध कल्याण पत्रिका के शताब्दी महोत्सव में पहुंचे। हेलीपैड पर उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद शाह गीताभवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कल्याण पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन किया। अब तक कल्याण पत्रिका की 17 करोड़ पचास लाख प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने आरोग्य अंक का भी विमोचन किया गया। आरोग्य अंक की दो लाख 22 हजार प्रतियां छप चुकी हो चुकी हैं। गीता भवन में करीब दो घंटे रहने के बाद गृह मंत्री हरिद्वार में प्रस्तावित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हो गए थे। गृह मंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए शहर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है। रूट भी डायवर्ट किया गया है।

गीता भवन में आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह के अलावा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी भाग लिया। सीएम धामी ने कहा कि गीता प्रेस पिछले सौ वर्षों से हमारी सनातन संस्कृति, धर्मग्रंथों और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में अतुलनीय योगदान देती आ रही है। कहा कि प्राचीन भारत में जब विदेशी शक्तियां वैचारिक भ्रम उत्पन्न कर रही थी, समाज को दिग्भ्रमित करने का काम कर रही थी, तब गीता प्रेस परिवार ने श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस, उपनिषदों, पुराणों आदि का हमारे महान सनातनी ग्रंथों का जो सूक्ष्म मूल्य में शुद्ध और प्रमाणिक प्रकाशन कर भारतीय जनमानस को जागृत करने का ऐतिहासिक काम है।

नजरिया: सीएम धामी के नेतृत्व में एक ही दिन में 7,876 नागरिकों तक पहुंची सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल, संवेदनशील और परिणामोन्मुख नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, त्वरित सेवा-प्रदान और जनसमस्याओं के समाधान का प्रभावी मॉडल बनकर सामने आया है। यह कार्यक्रम सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर शासन को वास्तव में जन-केन्द्रित बना रहा है।

आज 20 जनवरी 2026 तक राज्य के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 408 जनसेवा शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। केवल आज के दिन 13 नए शिविरों का आयोजन कर सरकार ने अपनी सक्रियता और प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया। इन शिविरों में अब तक 3,30,461 नागरिकों ने प्रतिभाग किया है, जिनमें आज 7,876 नागरिकों की सीधी भागीदारी रही। यह आंकड़ा दर्शाता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल को जनता का व्यापक विश्वास और समर्थन प्राप्त हो रहा है।

शिविरों के माध्यम से अब तक 33,529 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 22,675 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। केवल आज के दिन ही 783 नए प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए और 502 मामलों का समाधान मौके पर अथवा संबंधित विभागों के माध्यम से सुनिश्चित किया गया। यह त्वरित निस्तारण सरकार की प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही का प्रमाण है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रकार के प्रमाण-पत्रों एवं अन्य शासकीय सेवाओं के लिए कुल 43,975 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें आज 659 नए आवेदन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अब तक 1,79,169 नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया जा चुका है, जिनमें आज 3,911 नए लाभार्थी जुड़े। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि योजनाएं कागजों तक सीमित न रहकर वास्तव में जनता के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं।

जनपदवार आंकड़े बताते हैं कि देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल सहित सभी पर्वतीय और मैदानी जिलों में इस अभियान को समान उत्साह के साथ अपनाया गया है। शिविरों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों की उपस्थिति इस बात को सिद्ध करती है कि सरकार की यह पहल जनता की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही और संवेदनशीलता का प्रतीक है। उनका मानना है कि जब सरकार स्वयं जनता के पास जाकर उनकी समस्याएं सुनती है और समाधान करती है, तो शासन के प्रति विश्वास स्वतः मजबूत होता है।

उत्तराखंड सरकार का यह अभियान राज्य में सुशासन की नई कार्यसंस्कृति को स्थापित कर रहा है, जहां संवाद, समाधान और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम आने वाले समय में भी और अधिक व्यापक रूप में जारी रहेगा तथा उत्तराखंड को जनकल्याण और सुशासन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

सिंचाई को मिला 15 प्रतिशत सिंचित क्षेत्र को बढ़ाकर 30 प्रतिशत किए जाने का टारगेट

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में पूंजीगत व्यय, सीएसएस योजनाएं, ईएपी योजनाएं, नाबार्ड योजनाएं, एसएएससीआई, एसएनए स्पर्श एवं विभागों की व्यय योजनाओं के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने पूंजीगत व्यय, सीएसएस, ईएपी एवं नाबार्ड पोषित योजनाओं के प्रस्तावों को समय पर भेजे जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रीइंबर्शमेंट दावा भी समय पर किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अच्छा कार्य कर रहे विभागों को और फंड्स उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

मुख्य सचिव ने सभी परियोजनाओं को समय से पूर्ण किए जाने हेतु टाईमलाईन निर्धारित करते हुए मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने वित्त एवं नियोजन विभाग को कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने हेतु इंडिपेंडेंट थर्ड पार्टी इवैल्यूएशन के लिए मजबूत मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी तय करते हुए, जिम्मेदार के ऊपर एक्शन लिए जाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन प्रोजेक्ट्स में थर्ड पार्टी मूल्यांकन का प्राविधान नहीं है, उनमें तत्काल प्रावधान किया जाए। साथ ही, नियोजन विभाग द्वारा एम्पैनल्ड एजेंसियों को भी विभाग थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल के लिए तत्काल शुरू कर सकते हैं।

मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को प्रदेश की कुल 15 प्रतिशत सिंचित भूमि को अगले 5 साल में दोगुना करते हुए 30 प्रतिशत किए जाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने सिंचाई विभाग को अच्छे और गुणवत्तापूर्ण प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नए बैराज, नहरें आदि पर काम किया जा सकता है। उन्होंने सिंचाई के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाए गए स्प्रिंकलर सिस्टम को प्रदेशभर में शुरू किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि जहां जहां सिंचाई तंत्र ध्वस्त हो गया है या बंद पड़ा है, उसे दुरूस्त कर शुरू किया जाए। उन्होंने लघु सिंचाई को भी अच्छे एवं गुणवत्तापूर्ण प्रस्ताव तैयार किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने पेयजल विभाग को उनके द्वारा संचालित योजनाओं में जीरो कार्बन उर्त्सजन पर फोकस किए जाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने जल संस्थान और जल निगम को अपनी पेयजल योजनाओं को भी जीरो कार्बन उत्सर्जन की ओर ले जाने की दिशा में कार्य करते हुए सोलर को बैटरी से जोड़े जाने पर जोर दिया। उन्होंने क्लाईमेट चेंज फंड को भी इसके लिए प्रयोग किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को किस प्रकार से अपने प्रोजेक्ट्स में ऊर्जा स्रोत के रूप में प्रयोग करें इस दिशा में प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने पेयजल विभाग को उनके सभी एसटीपी प्लांट्स की 24×7 रियल टाईम मॉनिटरिंग का मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए।

*जल संस्थान को देहरादून के सभी सरकारी आवास में 31 मार्च तक वाटर मीटर लगाने का टारगेट*

मुख्य सचिव ने जल संस्थान को 31 मार्च तक देहरादून की सभी सरकारी कॉलोनियों को वाटर मीटर से 100 प्रतिशत संतृप्त किए जाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने प्रदेश में सभी नगर निगमों को वाटर मीटर से संतृप्त किए जाने की बात भी कही। कहा कि इससे पानी की बर्बादी पर रोक लगेगी। उन्होंने जल संस्थान को पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अपने सिस्टम को मजबूत किए जाने के भी निर्देश दिए। कहा कि दूषित पानी की शिकायत पर सम्बन्धित अधिकारी पर कार्रवाही किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सौंग बांध परियोजना के अन्तर्गत पेयजल घटक के अन्तर्गत डीपीआर एक सप्ताह में शासन को उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने एसटीपी से निकले ट्रीटेड वाटर को नॉन-ड्रिंकिंग उद्देश्यों के लिए प्रयोग किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जल संस्थान अपने एसटीपी का ट्रीटेड वाटर सिंचाई विभाग के साथ समन्वय बनाकर सिंचाई एवं अन्य नॉन ड्रिंकिंग कार्यों हेतु उपयोग करने हेतु भी प्रस्ताव तैयार करे।

*टिहरी को इंटरनेशनल डेस्टिनेशन बनाने के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार की जाए*

मुख्य सचिव ने शहरी विकास विभाग को देहरादून सहित प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में बड़े पार्क तैयार करे। उन्होंने कहा कि टिहरी को इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के रूप मे विकसित करने के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने टिहरी झील रिंग रोड परियोजना को भी शीघ्र शुरू किए जाने की बात कही। साथ ही, पर्यटन विभाग टिहरी, ऋषिकेश एवं चम्पावत में पर्यटन क्षेत्र विकसित करने के प्रस्ताव तैयार करे।

मुख्य सचिव ने वन विभाग को सिटी ग्रीनिंग और एक्सप्रेस-वे के प्रस्ताव एवं के साथ ही बायोफेंसिंग का मॉडल प्रोजेक्ट तैयार किए जाने की बात कही। कहा कि उन्होंने आईटी विभाग को साइंस सिटी एंड विज्ञान केंद्रों की स्थापना के साथ ही इनके संचालन और मेंटरिंग की व्यवस्था हेतु मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, पीसीसीएफ कपिल लाल, सचिव नितेश कुमार झा, सचिन कुर्वे, दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. वी. षणमुगम, डॉ. आर. राजेश कुमार, युगल किशोर पंत, रणवीर सिंह चौहान, अपर सचित हिमांशु खुराना, अपूर्वा पाण्डेय एवं मनमोहन मैनाली सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

अपनी मां से मांगो माफी, वरना होगा जिला बदरः डीएम

देहरादून। बेटों द्वारा प्रताड़ित विधवा ने जिन बेटों को जन्म दिया, वही मां जब अपने बेटों के हाथों पिटने लगे और हर रात जान का डर सताने लगे तब जिला प्रशासन उसके लिए ढाल बनकर खड़ा हुआ। बंजारावाला क्षेत्र की एक लाचार विधवा मां विजय लक्ष्मी पंवार ने हिम्मत जुटाकर प्रशासन से गुहार लगाई कि उसके ही बेटे नशे में उसे पीटतें है, पैसे मांगते है और जान से मारने की धमकी देते है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने गोपनीय जांच कराई। पड़ोसियों और जनप्रतिनिधियों की बातों ने उस मां के दर्द की पुष्टि की। प्रशासन ने गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की तो बेटों को पहली बार अपनी मॉ के प्रति जिम्मेदारी एवं कर्तव्यों का एहसास हुआ।

न्यायालय में दोनों बेटों ने मां से माफी मांगी, नशा छोड़ने और हिंसा न करने का शपथ पत्र दिया। कानून का डर और मां की चुप पीड़ा दोनों ने मिलकर बेटे को झकझोर दिया। विधवा मां के साथ मारपीट व जान से मारने की धमकी के मामले में जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई से दोंनो पुत्रों को अपने कर्तव्यों का बोध हुआ। गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत वाद दर्ज होने के बाद दोनों बेटों ने न्यायालय में शपथ पत्र देकर नशा छोड़ने और मां के साथ दुर्व्यवहार न करने का वचन दिया। जिला प्रशासन की चेतावनी और कानूनी शिकंजे के बाद दोंनो बेटों के व्यवहार में सुधार को देखते हुए न्यायालय ने आगे की कार्रवाई समाप्त की।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि महिलाओं, विधवाओं व निर्बल वर्ग के उत्पीड़न पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू है और भविष्य में पुनरावृत्ति होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यूसीसी का एक साल: ऑनलाइन प्रक्रिया से आसान हुआ विवाह पंजीकरण

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू हुए, आगामी 27 जनवरी को एक साल पूरा होने जा रहा है। महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकारों की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों में समता कायम करने के साथ ही यूसीसी का एक महत्वपूर्ण योगदान प्रक्रियाओं के सरलीकरण के रूप में रहा है। यही कारण है कि यूसीसी लागू होने के एक साल से कम समय में 4,74,447 शादियों का पंजीकरण हो चुका है। अब पति – पत्नी कहीं से भी ऑनलाइन तरीके से विवाह पंजीकरण करवा रहे हैं। पहले उन्हें दो गवाहों के साथ तय तिथि पर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था।
समान नागरिक संहिता लागू होने से पहले, ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत, विवाह पंजीकृत किए जाते थे। यह पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी, इसलिए पति- पत्नी को दो गवाहों के साथ विवाह पंजीकरण के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था। लेकिन यूसीसी के लगभग शत प्रतिशत विवाह पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से हो रहे हैं। जिसमें दंपत्ति या गवाह कहीं से भी, अपने रिकॉर्ड और वीडियो बयान दर्ज करा, पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। यही कारण है कि यूसीसी लागू होने के बाद एक साल से कम समय में सोमवार, 19 जनवरी 2026 की दोपहर तक 4,74,447 विवाह पंजीकरण सम्पन्न हो चुके हैं। इस तरह प्रतिदिन औसत पंजीकरण की संख्या 1400 के करीब पहुंच रही है, जबकि पिछले अधिनियम में विवाह पंजीकरण का औसत प्रतिदिन 67 का आता था। यही नहीं इस दौरान, 316 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से ही विवाह विच्छेद करने और 68 ने लिवइन रिलेशनशिप में जाने जबकि 02 ने लिवइन रिलेशनशिप समाप्त करने का प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया है।
औसत पांच दिन पंजीकरण
यूसीसी तहत यूं तो आवेदन के बाद विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 15 दिन की समय सीमा तय है, लेकिन आवेदन करने के बाद औसत पांच दिन के भीतर ही पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हो रहा है। जबकि पुराने अधिनियम में एक तो आवेदकों को भौतिक तौर पर पंजीकरण कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था, उस पर विवाह पंजीकरण के लिए समय सीमा भी तय नहीं थी।

*उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू करते हुए, अन्य राज्यों को दिशा दिखाई है। बीते एक साल में जितनी पारदर्शी और सरलता से यूसीसी के प्रावधानों को लागू किया गया है, उससे लोगों में पूरी प्रक्रिया के प्रति विश्वास बढ़ा है। यही कारण है कि अब बड़ी संख्या में लोग यूसीसी के तहत पंजीकरण करवा रहे हैँ। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता हर तरह से एक मॉडल कानून साबित हुआ है।*

*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड*

मुख्य सचिव ने की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से छात्र-छात्राओं से बातचीत

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने ननूरखेड़ा स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय पहुंचकर ‘शिक्षा की बात’ कार्यक्रम के तहत् प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की।

*हर बच्चा खास होता है, अपने बच्चों की प्रतिभा को पहचानते हुए आगे बढ़ाने का प्रयास करें*

कार्यक्रम के दौरान सभी छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि हर बच्चा खास होता है। उसमें कोई न कोई विशेषता अवश्य होती है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी प्रतिभा पहचानने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी शिक्षकों एवं परिजनों से भी अनुरोध किया कि वे अपने बच्चों की प्रतिभा को पहचानते हुए आगे बढ़ाने का प्रयास करें।

*उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों, प्रोफेसर आदि के साथ लगातार करायी जाए बातचीत*

मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि वे ‘शिक्षा की बात‘ कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए इसमें उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों, प्रोफेसर और विभिन्न क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहे व्यक्तियों से बातचीत कराते हुए बच्चों का मार्गदर्शन करने का अवसर दें। उन्होंने शिक्षा की बात कार्यक्रम को अन्य सभी विद्यालयों में भी शुरू किए जाने की बात कही। कहा कि क्लस्टर विद्यालयों से इसकी शुरूआत करते हुए सभी क्लस्टर विद्यालयों को इससे जोड़ा जाए।

*मोबाईल और तकनीक पर हम कंट्रोल करें, न कि मोबाईल और तकनीक हम पर*

बच्चों से चर्चा के दौरान मुख्य सचिव ने महत्त्वपूर्ण सीख देते हुए कहा कि आज मोबाईल और तकनीक का युग है, मगर मोबाईल और तकनीक पर हमारा कंट्रोल हो, न कि वो हमें कंट्रोल करें। उन्होंने कहा कि किताबें, खेल और रचनात्मक सोच आपको मजबूत बनाते हैं। हमें इन सभी पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

*मेहनत और अनुशासन हमें बेहतर बनाते हैं।*

मुख्य सचिव ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्ट-कट नहीं है। इसके लिए एक लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करनी होती है। मेहनत और अनुशासन हमें बेहतर बनाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अच्छा मनुष्य, अच्छा नागरिक बनकर देश और समाज के प्रति जिम्मेदारियां निभानी है। इसके लिए सभी शिक्षकों और अभिभावकों को भी अपने बच्चों को देश का जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी होगी।

मुख्य सचिव ने इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों से आए बच्चों द्वारा तैयार साइंस प्रोजेक्ट्स का भी अवलोकन किया एवं उनसे बातचीत की। छात्रों के प्रोजेक्ट्स की प्रशंसा करते हुए उन्होंने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए बच्चों को देहरादून भ्रमण कराये जाने की भी बात कही। कहा कि कौशल विकास विभाग के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का भी भ्रमण कराया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों के भ्रमण कार्यक्रम भी लगातार आयोजित किए जाने चाहिए। इससे उनको किताबी ज्ञान के अलावा अन्य बहुत सा व्यावहारिक ज्ञान और जानकारियां मिलेंगी।

इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन एवं निदेशक माध्यमिक शिक्षा मुकुल सती सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी के नेतृत्व में 3.22 लाख से अधिक नागरिकों को मिला सीधा लाभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसेवा का प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के सभी 13 जनपदों में लगातार जनसेवा शिविरों का आयोजन कर आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान उनके द्वार पर सुनिश्चित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के तहत आज 19 जनवरी 2026 तक प्रदेशभर में कुल 395 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 3 लाख 22 हजार 585 से अधिक नागरिकों ने प्रतिभाग किया। इन शिविरों के माध्यम से कुल 32 हजार 746 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 22 हजार 173 मामलों का त्वरित निस्तारण किया जा चुका है। यह आंकड़े राज्य सरकार की संवेदनशीलता, प्रशासनिक तत्परता और जनसमस्याओं के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

शिविरों के दौरान विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों तथा अन्य शासकीय सेवाओं के लिए कुल 43 हजार 418 आवेदन प्राप्त हुए, वहीं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 1 लाख 75 हजार 258 नागरिकों को सीधे लाभान्वित किया गया। यह उपलब्धि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उस सोच को साकार करती है, जिसमें शासन को जनता के निकट लाकर अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य है।

जनपदवार आंकड़ों पर दृष्टि डालें तो अल्मोड़ा, देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल और पिथौरागढ़ जैसे जनपदों में बड़ी संख्या में नागरिकों की भागीदारी दर्ज की गई। अकेले देहरादून जनपद में 41,889 नागरिकों ने शिविरों में सहभागिता की, जबकि हरिद्वार में 64,686 लोगों ने इस पहल का लाभ उठाया। उधम सिंह नगर में 24,421 तथा अल्मोड़ा में 24,771 नागरिकों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के साथ सरकार के विश्वास का सेतु है। इस पहल ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचती है, तो न केवल समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि शासन के प्रति जनविश्वास भी सुदृढ़ होता है।

राज्य सरकार का यह अभियान उत्तराखंड में सुशासन की एक नई कार्यसंस्कृति को स्थापित कर रहा है, जिसमें संवाद, समाधान और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम आगे भी निरंतर जारी रहेगा और उत्तराखंड को जनकल्याण के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

सीएम के मार्गदर्शन में घनघोर अंधकार से शिक्षा उजाले की ओर, डीएम दून की सार्थक पहल

जिले में संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर (ICC), जहां भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए बच्चों का माइंड रिफॉर्मेशन कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, अब शैक्षणिक शोध एवं सामाजिक अध्ययन का केंद्र भी बनता जा रहा है। देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों के छात्र-छात्राएं यहां भ्रमण कर न केवल शोध कार्य कर रहे हैं, बल्कि बच्चों की हौसला अफजाई करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।

इसी क्रम में IMS यूनिसन यूनिवर्सिटी के 12 छात्र-छात्राओं ने डॉ. सुरेन्द्र यादव (सहायक प्रोफेसर) के नेतृत्व में इंटेंसिव केयर सेंटर का भ्रमण किया और बच्चों के साथ संवाद स्थापित किया।
इस अवसर पर ICC के बच्चों ने अतिथियों का स्वयं के हाथों से बनाए गए स्वागत कार्ड एवं सुंदर स्वागत नृत्य के माध्यम से आत्मीय स्वागत किया। इस सहभागिता से बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, प्रस्तुति कौशल एवं टीमवर्क के सकारात्मक विकास की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
यह पहल न केवल बच्चों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि समाज और शैक्षणिक संस्थानों के बीच संवेदनशील साझेदारी का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून जिला प्रशासन द्वारा संचालित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर सामाजिक पुनर्वास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। भिक्षावृत्ति, बालश्रम एवं कूड़ा बीनने जैसी परिस्थितियों से रेस्क्यू किए गए बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, योग, खेलकूद एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

परिस्थितियों की मार झेल रहे, सड़कों पर बिखरे बचपन से भिक्षा का कटोरा छीनकर शिक्षा की कलम सौंपने का यह मानवीय प्रयास अब ठोस परिणाम दे रहा है। जिला प्रशासन का यह इंटेंसिव केयर सेंटर आज आशा की किरण बन चुका है।

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून जिला प्रशासन द्वारा भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए 27 बच्चों को इंटेंसिव केयर सेंटर से विभिन्न विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया।

अब तक भिक्षावृत्ति, बालश्रम एवं कूड़ा बीनने में संलिप्त कुल 267 बच्चों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनमें से 154 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।

दिसंबर 2024 से संचालित इस अभियान के अंतर्गत साधुराम इंटर कॉलेज में स्थापित आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर में बच्चों को रखा गया। इनमें 83 बच्चे भिक्षावृत्ति, 117 बच्चे कूड़ा बीनने तथा 67 बच्चे बालश्रम से रेस्क्यू किए गए।

बच्चों को शिक्षा से जोड़ने हेतु इंटेंसिव केयर सेंटर में सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए उन्हें मानसिक रूप से सशक्त बनाया गया। जिलाधिकारी के प्रयासों से यहां पढ़ाई की समुचित व्यवस्था के साथ-साथ कंप्यूटर शिक्षा, संगीत, खेल, व्यायाम, मनोरंजन एवं काउंसलिंग की सुविधाएं प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त बच्चों के आवागमन के लिए विशेष कैब सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।

इस संपूर्ण कार्यक्रम की जिलाधिकारी द्वारा नियमित एवं व्यक्तिगत मॉनिटरिंग की गई। मानसिक रूप से सशक्त किए जाने के उपरांत 154 बच्चों का चरणबद्ध तरीके से विभिन्न सरकारी विद्यालयों में दाखिला कराया गया है।
जिलाधिकारी ने अभिभावकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि
“शिक्षा ही सबसे शक्तिशाली हथियार है। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, बच्चों की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “भिक्षावृत्ति निवारण अभियान पूर्ण सेचुरेशन तक निरंतर जारी रहेगा। रुकना कोई विकल्प नहीं है।

विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण के माध्यम से ही संभव हुआ: शेखावत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘ध्वज वंदन समारोह’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह शताब्दी समारोह वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन, निःस्वार्थ सेवा और अखंड साधना के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का साक्षात भावात्मक अभिव्यक्ति है। माताजी का संपूर्ण जीवन त्याग, बलिदान और साधना की वह ज्योति है, जिसने असंख्य जीवनों को सही दिशा और नई दृष्टि दी। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार को किसी एक संगठन की सीमाओं में नहीं बाँधा जा सकता, यह उस युग चेतना का वह प्रवाह है, जो व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र के उत्थान की ओर अग्रसर करता है।

मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखण्ड की आध्यात्मिक चेतना का स्मरण करते हुए कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और आदि कैलाश जैसे तीर्थस्थल भारत की आत्मा की धड़कन हैं। ऐसे पावन परिवेश में आयोजित यह शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति, संस्कार और साधना परंपरा के नवजागरण का संदेश देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बचाए रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा राज्य में समान नागरिक संहिता लागू किया गया है। सख्त दंगारोधी कानून एवं धर्मांतरण कानून भी लाया गया है मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 10 हजार एकड़ से अधिक अवैध अतिक्रमण को हटाया गया है।

केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ल गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सेवा, साधना और संस्कार के त्रिवेणी संगम यह शताब्दी समारोह नवयुग का निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण के माध्यम से ही संभव हुआ है। जब समाज के व्यक्ति नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को अपने जीवन का आधार बनाते हैं, तभी सशक्त संस्कृति और स्थायी सभ्यता का निर्माण होता है। जनशताब्दी समारोह इसी सामूहिक चेतना को जाग्रत करने का महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह समारोह किसी वैराग्यपूर्ण एकांत तपोभूमि का आयोजन नहीं है, बल्कि यह युगऋषि पूज्य आचार्यश्री का “खोया-पाया विभाग” है, जहाँ व्यक्ति स्वयं को और अपने दायित्व को पुनः खोजता है। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य किसी के द्वार पर खड़ा होकर प्रतीक्षा नहीं कर रहा, वरन् यह आयोजन स्वयं आपके सौभाग्य का द्वार खोलने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने समाज परिवर्तन का संदेश देते हुए कहा कि “गंगा की कसम, यमुना की कसम, यह ताना-बाना बदलेगा। कुछ हम बदलें, कुछ तुम बदलो, तभी यह ज़माना बदलेगा।” उन्होंने जनसमूह से आत्मपरिवर्तन को ही सामाजिक परिवर्तन की प्रथम शर्त बताते हुए कहा कि जब व्यक्ति स्वयं बदलने का साहस करता है, तभी राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण की नींव सशक्त होती है। शताब्दी समारोह का उद्देश्य भी इसी चेतना को जाग्रत करना है, ताकि विचार, आचरण और कर्म के स्तर पर सकारात्मक बदलाव संभव हो सके।

शताब्दी समारोह के अवसर पर पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज, राज्य मंत्री विनय रुहेला, सुदर्शन न्यूज के प्रबंध निदेशक सुरेश चव्हाण, ईडी के पूर्व निदेशक राजेश्वर सिंह सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने विशिष्ट अतिथियों सहित न्यायाधीश परविन्दर सिंह, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, स्वामी सम्पूर्णानंद जी, स्वामी वेलु बापू जी,के नारायण राव,रमेश भट्ट,दिनेश काण्डपाल, आचार्य डॉ दयाशंकर विद्यालंकार, आदि को शांतिकुंज का प्रतीक चिह्न, गंगाजली, रुद्राक्ष की माला तथा युग साहित्य आदि भेंट कर सम्मानित किया गया।

राजा दक्ष की नगरी कनखल के वैरागी द्वीप की भूमि पर जब शताब्दी ध्वज लहराया, तो मानो एक युग ने अपने गौरवशाली अतीत को नमन करते हुए नवसंकल्प लिया। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज के तत्वावधान में आयोजित गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी व अखण्ड दीपक के शताब्दी समारोह का शुभारंभ ध्वज वंदन के साथ श्रद्धामय वातावरण में हुआ। यह आयोजन 23 जनवरी तक चलेगा।

इस कार्यक्रम में विधायक हरिद्वार मदन कौशिक, दायित्वधारी श्यामवीर सैनी, देशराज कर्णवाल, शोभाराम प्रजापति, जिला अध्यक्ष भाजपा आशुतोष शर्मा, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।