टिहरी झील को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने को लेकर मुख्य सचिव ने ली बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में पर्यटन विभाग के साथ बैठक के दौरान टिहरी झील को ‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने के लिए समग्र मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि टिहरी लेक क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए पूरे क्षेत्र की दीर्घकालिक और सुनियोजित प्लानिंग की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी झील के आसपास के लगभग 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सम्मिलित करते हुए समग्र मास्टर एवं जोनल प्लान तैयार किया जाए। इसमें सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार की भूमि को शामिल किया जाए। उन्होंने बेतरतीब विकास को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार करने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के लिए आवश्यकतानुसार जोन निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान तैयार करते समय सभी सम्बन्धित स्टेकहोल्डर्स से विचार-विमर्श किया जाए, ताकि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना तैयार की जा सके। मास्टर प्लानिंग के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), नई दिल्ली एवं एसपीए, भोपाल से तकनीकी सहयोग लेने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी झील क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने के लिए पूरे लेक एरिया में विभिन्न पर्यटन गतिविधियों को समाहित करते हुए आकर्षण के प्रमुख केंद्र (मैगनेट एरिया) विकसित किए जाएं। इसके लिए फेजवाइज योजना तैयार की जाए, ताकि प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न परियोजनाओं को विकसित किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि टिहरी लेक में ऐसी पर्यटन गतिविधियों की विस्तृत योजना तैयार की जाए, जिससे पर्यटक क्षेत्र में कम से कम एक-दो दिन या उससे अधिक समय तक क्षेत्र में ठहर सकें। वाटर स्पोर्ट्स के साथ ही एडवेंचर, ट्रैकिंग, नेचर, कल्चर, विलेज टूरिज्म सहित विभिन्न गतिविधियों को एकीकृत रूप से विकसित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अप्रैल, मई और जून में जलस्तर कम रहने के दौरान भी पर्यटकों के लिए पर्याप्त गतिविधियां उपलब्ध रहें, इसके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। वर्षभर पर्यटन गतिविधियों का संचालन सुनिश्चित करने के लिए मौसम एवं जलस्तर के अनुसार गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया जाए। उन्होंने टिहरी झील क्षेत्र में नए ट्रैकिंग रूट्स एवं ट्रेल्स विकसित करने तथा आसपास के गांवों को पर्यटन से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए विलेज एवं कल्चरल विजिट की व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जिससे उन्हें स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और ग्रामीण जीवन से परिचित होने का अवसर मिले और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि टिहरी लेक को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की समग्र कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार की जाए, जिसे प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। मुख्य सचिव ने अगली बैठक में टीएचडीसी के अधिकारियों को भी आमंत्रित करने के निर्देश दिए, ताकि झील क्षेत्र के विकास से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर समन्वित रूप से चर्चा की जा सके।

इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ डॉ. विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना, अभिषेक रोहिला एवं जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल उपस्थित थीं।

आवास विभाग की 63 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण

देहरादून। प्रदेश में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की साल दर साल बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रदेश सरकार आधारभूत सुविधाओं के विस्तार में जुट गई है। ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने और चारधाम यात्रा को और सुगम बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम हो रहा है। आवास विभाग उत्तराखण्ड पार्किंग सुविधाओं के विकास में जुटा है। चार वर्षों में आवास विभाग ने 63 पार्किंग परियोजनाओं के तहत 4202 वाहनों की क्षमता की पार्किंग का निर्माण कराया है। धामी सरकार के इस कदम से जहां पर्वतीय जिलों में आम लोगों और पर्यटकों को जाम से राहत मिली है, वहीं स्थानीय लोगों की राह भी आसान हुई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड में पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पार्किंग सुविधाओं के विकास पर विशेष फोकस किया गया है। मुख्यमंत्री के दिशानिर्देश पर उत्तराखण्ड का आवास विभाग पर्वतीय जनपदों के प्रमुख शहरों, तीर्थ स्थलों और पर्यटन केंद्रों में पार्किंग नेटवर्क के विस्तार में जुटा है। स्थान की उपलब्धता के अनुसार सरफेस पार्किग, बहुमंजिला (मल्टीलेवल) पार्किंग और ऑटोमेटेड पार्किंग का निर्माण किया गया है।

आवास विभाग की विकसित पार्किंग एक नजर में

जनपद वाहन क्षमता
अल्मोड़ा 1087
नैनीताल 679
चंपावत 600
उत्तरकाशी 477
पिथौरागढ़ 309
रुद्रप्रयाग 304
पौड़ी 256
चमोली 201
टिहरी 163
बागेश्वर 126

हल होगी नैनीताल की पार्किंग समस्या
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर अब सरोवर नगरी नैनीताल में पार्किंग की समस्या हल हो सकेगी। प्रदेश सरकार मेट्रोपोल होटल परिसर क्षेत्र में पार्किंग का निर्माण कर रही है। इस पार्किंग के तैयार होने पर लगभग 700 वाहन यहां पार्क किए जा सकेंगे।

कैंची धाम में बहुमंजिला पार्किंग
सुप्रसिद्ध कैंची धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बहुमंजिला (मल्टी लेवल) पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है। इस पार्किंग में एक बार में पांच सौ से अधिक वाहन पार्क किए जा सकेंगे।

हल हुई पार्किंग की समस्या : डॉ राजेश
उत्तराखण्ड सरकार के के सचिव, आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ आर राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के दिशानिर्देशों के क्रम में प्रदेश में पार्किंग सुविधाओं के विकास पर जोर दिया गया है। पर्वतीय जनपदों में 63 पार्किंग परियोजनाओं का कार्य पूर्ण होने के बाद पार्किंग की समस्या काफी हद तक हल हो गई है। इससे पर्यटकों और श्रद्धालुओं के साथ ही स्थानीय नागरिकों को भी राहत मिली है।

कोट———

उत्तराखण्ड देश-दुनिया के पर्यटकों और श्रद्धालुओं का पसंदीदा गंतव्य बन गया है। पिछले वर्ष ही छह करोड़ से अधिक लोग यहां पहुंचे हैं। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार लगातार यात्री सुविधाओं का विस्तार कर रही है। जाम की समस्या से निपटने के लिए सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों और चार धाम यात्रा मार्गों पर पार्किंग सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। आवास विभाग और अन्य एजेंसियां इस काम में जुटी हैं।

-पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

सीएम धामी ने युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में कृषि, पशुपालन, पर्यटन एवं उद्योग क्षेत्रों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में विशेष ध्यान दिया जाए। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से लोगों को इन योजनाओं की संपूर्ण जानकारी प्रदान की जाए, ताकि वे इनका लाभ उठा सकें।

मुख्यमंत्री ने युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने तथा उन्हें स्वरोजगार के लिए अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को योजनाओं का समय पर एवं पूरा लाभ मिले, इस पर सभी विभाग विशेष ध्यान दें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि आवंटित बजट का पूर्ण आउटकम प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उच्च स्तरीय बैठकों के कार्यवृत्त उन्नति पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएं। उन्होंने सेब की अतिसघन बागवानी योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना को प्रभावी ढंग से संचालित कर निर्धारित लक्ष्यों को समय से प्राप्त किया जाए तथा किसानों को अधिकाधिक प्रोत्साहन प्रदान किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसानों से संबंधित देयकों का भुगतान समय पर हो। किसानों को उनके उत्पादन का बेहतर मूल्य मिले, इसके लिए राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहद उत्पादन के क्षेत्र में उत्तराखंड में व्यापक संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए ‘हनी मिशन’ के अंतर्गत शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए और अधिक प्रभावी प्रयास किए जाएं। राज्य में शहद का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि बागवानी एवं मौन पालन के क्षेत्र में जिन राज्यों में अच्छा कार्य हुआ है, उनके अध्ययन हेतु अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की टीमें उन राज्यों में भेजी जाएं।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 29 उत्पादों को जी.आई. टैग प्राप्त हुआ है, जिनमें से 18 कृषि एवं कृषि कल्याण से संबंधित हैं। इस वर्ष 25 अन्य उत्पादों को जी.आई. टैग के लिए चिन्हित किया जाएगा। राज्य में 134 करोड़ रुपये की लागत से लागू स्टेट मिलेट पॉलिसी के अंतर्गत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी एवं चीना को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 24 विकासखंडों तथा द्वितीय चरण में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 44 विकासखंडों का चयन किया गया है। प्रथम चरण में 5 हजार से अधिक गांवों को आच्छादित कर लगभग डेढ़ लाख कृषकों को लाभान्वित किया गया है। मिलेट फसलों की क्रय-विक्रय हेतु 216 क्रय केंद्र खोले गए हैं तथा सहकारिता विभाग के अंतर्गत 20 करोड़ रुपये का रिवाल्विंग फंड बनाया गया है। इस वित्तीय वर्ष में 5 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 5,386 मीट्रिक टन मिलेट फसलों का क्रय किया जा चुका है।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के अंतर्गत चार वर्षों में 32 हजार के लक्ष्य के सापेक्ष 33,620 लाभार्थियों को 202.72 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। आगामी वर्ष में 9 हजार लोगों को लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पर्यटन विभाग के अंतर्गत दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत चार वर्षों में 780 होम स्टे स्थापित किए गए हैं, जिसके लिए 188.58 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया गया है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के अंतर्गत चार वर्षों में एक हजार से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया है, जिसमें कुल 105 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का वित्त पोषण किया गया है। राज्य में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मत्स्य पालन क्षेत्र में 17,450 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश झा, दिलीप जावलकर, विनय शंकर पाण्डेय, एस.एन. पाण्डेय, वी. षणमुगम, धीराज गर्ब्याल सहित संबंधित विभागों के उच्च अधिकारी उपस्थित रहे।

ऐसे स्पॉट चिन्हित कर विकसित करें, जो इको टूरिज्म के लिए इको सिस्टम तैयार करें: वर्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में वन विभाग के अंतर्गत इको टूरिज्म के संबंध में उच्च अधिकार प्राप्त समिति की बैठक संपन्न हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश का अधिकतर भूभाग वनाच्छादित होने से प्रदेश में इको टूरिज्म की अत्यधिक सम्भावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इको टूरिज्म की सम्भावनाओं को तलाशते हुए ऐसे स्पॉट चिन्हित कर विकसित किए जाएं जो इको टूरिज्म के लिए इको सिस्टम तैयार करें।

मुख्य सचिव ने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग के लिए पॉलिसी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग की एक इंटीग्रेटेड पॉलिसी 15 जनवरी तक फाइनल करते हुए शासन को प्रस्तुत किए जाने की बात कही। कहा कि पॉलिसी तैयार किए जाने से पूर्व प्राईवेट स्टैक होल्डर्स से भी संवाद कर लिया जाए, ताकि पॉलिसी बनने के बाद आने वाली व्यवहारिक समस्याओं से बचा जा सके। मुख्य सचिव ने ट्रैकिंग के लिए नई चोटियां खोले जाने की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्यावरण ऑडिट सहित अन्य सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने शीघ्र ही इसकी एसओपी भी जारी किए जाने की बात भी कही है।

मुख्य सचिव ने चौरासी कुटिया के जीर्णोद्धार का कार्य शीघ्र पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कार्यदायी संस्था को समय से कार्य पूर्ण करने हेतु सभी कार्यों की टाइम लाइन निर्धारित किए जाने की बात कही। कहा कि कार्य समय से पूर्ण हो सके इसके लिए कार्यदायी संस्था को लक्ष्य दिए जाएं। मुख्य सचिव ने इको टूरिज्म के लिए जबरखेत मॉडल को अन्य चिन्हित इको टूरिज्म स्थलों पर भी लागू किए जाने की बात कही। कहा कि इनको और ससमय पूर्ण किए जाने के लिए संभागीय वन अधिकारियों (डीएफओ) को टास्क प्रदान किए जाएं कि वे किस प्रकार से अपने क्षेत्र में इको टूरिज्म को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने 10 चिन्हित साइट्स का प्लान एक माह में तैयार करके शासन को भेजे जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने वन क्षेत्र के अंतर्गत पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए मैकेनिज्म तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इनके संचालन की जिम्मेदारी इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड को दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसका गठन ही इसी उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने इसके लिए इको टूरिज्म डेवेलपमेंट बोर्ड को मजबूत करने, मैन पावर बढ़ाने एवं बजट में प्रावधान किए जाने की बात भी कही। उन्होंने अपर सचिव वन को ईटीडीबी के लिए नया हैड खोले जाने के निर्देश भी दिए, ताकि यूटीडीबी की भांति ईटीडीबी को भी ग्रांट दी जा सके। इको टूरिज्म साइट्स के इको टूरिज्म डेवेलपमेंट बोर्ड के माध्यम से संचालन हेतु शीघ्र ही एमओयू भी किया जाए।

मुख्य सचिव ने ईको टूरिज्म से सम्बन्धित हाईपावर समिति की बैठक प्रत्येक माह आयोजित कराए जाने की बात भी कही। उन्होंने प्रदेशभर में पर्यटन के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि सर्टिफिकेशन को एक ही जगह एंकर किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशिक्षण प्रमाणीकरण के लिए पर्यटन विभाग को जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही। कहा कि उच्च शिक्षा विभाग से भी इसके लिए सुझाव लिए जाएं।

इस अवसर पर सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी, पीसीसीएफ रंजन कुमार मिश्रा, सीसीएफ ईको टूरिज्म पी.के. पात्रो एवं अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

नजरियाः पीएम मोदी ने मन की बात में की उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन की ब्रॉडिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उत्तराखंड के प्रति अपने विशेष स्नेह को प्रकट करते हुए राज्य में विंटर टूरिज्म, साहसिक खेलों, वेडिंग डेस्टिनेशन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए, देशवासियों से सर्दियों के सीजन में हिमालय की वादियों का अनुभव लेने की अपील की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री उत्तराखंड टूरिज्म के सबसे बड़े ब्रांड एम्बेस्डर हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात” कार्यक्रम में करीब ढाई मिनट उत्तराखंड को समर्पित किए। उन्होंने कहा कि इन दिनों उत्तराखंड का विंटर टूरिज्म लोगों को खूब लुभा रहा है। सर्दियों के मौसम में औली, मुनस्यारी, दयारा, चोपता जैसी जगहें लोकप्रिय हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ सप्ताह पहले ही पिथौरागढ़ में साढ़े 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई ऑल्टीट्यूट अल्ट्रा रन मैराथन आयोजित की गई, जिसमें देशभर के 18 राज्यों से 750 से अधिक एथिलीट ने भाग लिया। 60 किमी लंबी आदि कैलाश परिक्रमा रन का प्रारंभ कड़कड़ाती ठंड में सुबह पांच बजे हुआ, इतनी ठंड के बावजूद प्रतिभागियों का उत्साद देखते ही बनता था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तीन साल पहले तक आदि कैलाश की यात्रा पर प्रतिवर्ष मात्र दो हजार लोग ही आते थे, अब यह संख्या 30 हजार तक पहुंच गई है।

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन की प्रशंसा करते हुए कहा कि कुछ ही हफ्तों में उत्तराखंड विंटर गेम्स का भी आयोजन करने जा रहा है, जिसमें प्रतिभाग करने के लिए देशभर के खिलाड़ी, एडवेंचर प्रेमी और खेलों से जुड़े लोग उत्साहित हैं। उन्होंने उत्तराखंड में बढ़ती पर्यटन आधारभूत सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने विंटर टूरिज्म को बढावा देने के लिए कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष तौर पर फोकस किया है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने होम स्टे के लिए नई पॉलिसी भी बना दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड में डेस्टिनेशन वेडिंग की ब्रांडिंग करते हुए कहा कि सर्दियों की सुनहरी धूप और पहाड़ों से उतरते कोहरे के बीच, उत्तराखंड वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी लोकप्रिय हो रहा है। खासकर गंगा जी के किनारे अब खूब डेस्टिनेशन वेडिंग हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि वो, सर्दियों में कहीं जाने का विचार कर रहे हैं तो हिमालय की वादियों को अपने विकल्प के रूप में जरूर शामिल करें, हिमालय की वादियां आपको जीवनभर साथ चलने वाली अनुभूतियों से भर देंगी।

पीएम के दौरे से बढ़ा पर्यटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड आगमन हर बार, यहां के पर्यटन को नई गति प्रदान कर जाता है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले श्री केदारनाथ, श्री बद्रीनाथ, आदि कैलाश और जागेश्वर धाम की यात्रा पर आ चुके हैं, जिसके बाद इन तीर्थ स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। इसी तरह प्रधानमंत्री गत वर्ष उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन का शुभारंभ करने उत्तरकाशी के मुखबा गांव में पहुंचे, इसके बाद से पूरी हर्षिल घाटी में पर्यटन गतिविधियों में तेजी नजर आ रही है। जिससे स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर विकसित हो रहे हैं।

धामी सरकार के कार्यों पर पीएम की मुहर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य में विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में गत वर्ष से सरकार शीतकालीन यात्रा भी संचालित कर रही है। सरकार राज्य में वेडिंग डेस्टिनेशन को भी बढ़ावा दे रही है, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार के प्रयासों की तारीफ करते हुए, एक तरह से धामी सरकार के कार्यों पर अपनी सकारात्मक मुहर लगा दी है।

देवभूमि उत्तराखंड के सतत विकास और संभावनाओं को विश्व पटल पर रेखांकित करने के लिए समस्त प्रदेशवासी प्रधानमंत्री के आभारी हैं। प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के संकल्प के अनुसार उत्तराखंड को प्राकृतिक, आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन के मानचित्र पर उभारने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

उपलब्धिः पिछले तीन साल में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे उत्तराखंड

पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए जारी पुष्कर सिंह धामी सरकार के प्रयास रंग लाने लगे हैं, बीते तीन साल उत्तराखंड में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं। इससे होम स्टे, होटल, ढाबा संचालकों, महिला स्वयं सहायता समूहों से लेकर परिवहन कारोबारियों तक की आजीविका को सहारा मिला है।

प्रदेश सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड में पर्यटन- तीर्थाटन लगातार बढ़ रहा है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड में बीते तीन साल में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं। खास बात यह है कि उत्तराखंड का पर्यटन अब बहुआयामी हो चला है, पर्यटक बड़े शहरों और चुनिंदा हिल स्टेशन तक ही सीमित नहीं बल्कि दूर दराज के छोटे छोटे पर्यटक स्थलों तक भी पहुंच रहे हैं। इसी के साथ राफ्टिंग, ट्रैकिंग, बंजी जम्पिंग, पर्वतारोहण जैसी साहसिक गतिविधियों में भी देश ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों की भी भागीदारी बढ़ी है। इससे पर्यटन का लाभ प्रदेश के लाखों लोगों तक प्रत्यक्ष तौर पर पहुंच रहा है, इसमें होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे संचालक, परिवहन कारोबारी, महिला स्वयं सहायता समूह शामिल है। प्रदेश में इस समय छह हजार अधिक होम स्टे संचालक सीधे तौर पर बढी हुई पर्यटन गतिविधियों के सीधे लाभार्थी बनकर उभरे हैं।

तीर्थाटन भी बूम पर
प्रदेश में तीर्थाटन गतिविधियां भी काफी बढ़ गई है। इस वर्ष अब तक चारधाम यात्रा में ही तीर्थयात्रियों की संख्या 50 लाख को छू रही है। केदारनाथ, यमुनोत्री पैदल मार्ग पर इस साल 4300 से अधिक घोड़े दृ खच्चर संचालकों ने अपनी सेवाएं दी। प्रदेश सरकार अब शीतकालीन यात्रा को भी बढ़ावा दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा से भी पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र में तीर्थाटन, पर्यटन तेजी से बढ़ा है।

पर्यटन उत्तराखंड की आर्थिकी आधार है। पर्यटन- तीर्थाटन का लाभ सीधे तौर पर स्थानीय लोगों को मिलता है। इसलिए सरकार वर्षभर पर्यटन दृ तीर्थाटन गतिविधियों को जारी रखने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरों से उत्तराखंड में तीर्थाटन- पर्यटन को बल मिला है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

सीएम ने लिया जंगल सफारी का लुत्फ, एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत किया पौधारोपण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज कार्बेट नेशनल पार्क में जंगल सफारी के दौरान वन्यजीवन की अद्भुत और रोमांचकारी झलक का अनुभव किया। उन्होंने कहा कि यह अनुभव केवल प्रकृति की सुंदरता को देखने का नहीं, बल्कि जैव विविधता और प्रकृति की अनमोल विरासत से जुड़ने का अवसर भी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप जंगल सफारी पर्यटन को आज एक नई पहचान मिली है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक उत्तराखण्ड आ रहे हैं, जिससे राज्य की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार और आजीविका के नए द्वार भी खुले हैं।

इस अवसर पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत वन विभाग, स्थानीय समुदाय और पर्यावरण प्रेमियों के सहयोग से 1000 से अधिक पौधों का सामूहिक रोपण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महज एक पौधा रोपण नहीं, बल्कि मातृत्व और प्रकृति के प्रति सम्मान का भावपूर्ण प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने वन विभाग की टीम से भी भेंट की और उनके द्वारा वनों व वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने विभाग की प्रतिबद्धता और समर्पण को राज्य की हरियाली और जैव विविधता के संरक्षण हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

प्रधानमंत्री ने शीतकालीन पर्यटन के साथ शीतकालीन साहसिक खेलों को दिया बढ़ावा, अपील भी की

राज्य में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने एवं गंगोत्री धाम के शीतकालीन गद़्दी स्थल उत्तरकाशी के मुखवा गांव में मां गंगा के दर्शन करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को हर्षिल, उत्तरकाशी में शीतकालीन पर्यटन कार्यक्रम के तहत 2 मोटर बाइक रैली एवं 2 ट्रैक रूट दलों को हरी झंड़ी दिखाकर रवाना किया। प्रधानमंत्री ने धार्मिक पर्यटन के साथ शीतकाल के समय उत्तराखंड में होने वाले साहसिक खेलों को भी बढ़ावा दिया। जिसके तहत उन्होंने नेलांग, जादुंग, सोनम एवं पीडीए घाटी के अद्भुत और अनछुए पर्यटन गंतव्यों के लिए साहसिक पर्यटन अभियानों का फ्लैग ऑफ किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर्षिल से पी.डी.ए मोटर बाईक-।ज्ट-त्ज्ट रैली के 21 सदस्यों (भारतीय सेना) के दल एवं हर्षिल-जादुंग मोटर बाइक रैली के 18 सदस्यों ( उत्तराखंड पर्यटन) के दल को फ्लैग ऑफ किया। साथ ही उन्होंने नीला पानी-मुलिंग ला पास ट्रैक के 15 सदस्यों (आई.टी.बी.पी) के दल एवं जादुंग-जनकताल ट्रैक पर जा रहे 22 सदस्यों ( एन.आई.एम ) के दल का भी फ्लैग ऑफ किया।

मोटर बाईक-।ज्ट-त्ज्ट रैली (हर्षिल – पी.डी.ए), मोटर बाइक रैली (हर्षिल-जादुंग) मोटर बाइक रैली नेलांग, जादुंग, सोनम एवं पी.डी.ए वैली में आयोजित की जा रही है। इन घाटियों की भौगोलिक स्थिति लद्दाख की भांति है। जिसका उद्देश्य लद्दाख वैली की तर्ज पर उत्तराखंड के हर्षिल क्षेत्र को देश का बड़ा मोटर बाईक डेस्टिनेशन बनाया जाना है।

नीलापानी-मुलिंग ला पास ट्रैक एवं जादुंग-जनकताल ट्रैक रूट गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में स्थित है तथा भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना बाईब्रेन्ट विलेज प्रोग्राम के अन्तर्गत सम्मिलित है। जो ईनर लाईन क्षेत्र में पड़ते है, जहाँ पर आवागमन हेतु ईनर लाईन परमिट की आवश्यकता होती है। उक्त क्षेत्र को पुनः बसायत किये जाने हेतु पर्यटन विभाग द्वारा जादंग में होमस्टे बनाये जा रहे हैं। जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय निवासियों के रोजगार एवं आजीविका के विकास का सृजन किया जाना है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड में कोई ष्ऑफ-सीजनष् नहीं होना चाहिए और पर्यटन को हर मौसम में फलना-फूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में, पहाड़ों में पर्यटन मौसमी है, जिसमें मार्च, अप्रैल, मई और जून के दौरान पर्यटकों की अच्छी-खासी आमद होती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसके बाद पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आती है, जिससे सर्दियों के दौरान अधिकांश होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे खाली हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस असंतुलन के कारण उत्तराखंड में साल के एक बड़े हिस्से में आर्थिक ठहराव बना रहता है और पर्यावरण के लिए भी चुनौतियां पैदा होती हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा सर्दियों के दौरान उत्तराखंड की यात्रा करने से देवभूमि की दिव्य आभा की सच्ची झलक मिलती है। उन्होंने कहा विंटर टूरिज्म में यहां, लोगों को ट्रैकिंग, स्कीइंग जैसी एक्टिविटीज का रोमांच, सचमुच में रोमांचित कर देगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में धार्मिक यात्राओं के लिए सर्दियां विशेष महत्व रखती हैं, क्योंकि इस दौरान कई पवित्र स्थलों पर अनोखे अनुष्ठान किए जाते हैं। उन्होंने मुखवा गांव में होने वाले धार्मिक समारोहों को क्षेत्र की प्राचीन और महत्वपूर्ण परंपराओं का अभिन्न अंग बताया।

शीतकालीन चारधाम यात्राः पीएम का मिला साथ, दौड़ेगी यात्रा, बनेगी बात

मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखवा और खूबसूरत हर्षिल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक-एक संदेश के गहरे मायने हैं। देश-दुनिया तक इन शब्दों की अनुगूूंज पहुंचना तय है। उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा को प्रधानमंत्री का जैसा साथ मिला, वह खास है। उन्होंने जिस अंदाज में उत्तराखंड की यात्रा का प्रमोशन किया है, वह अभूतपूर्व है। इसके बाद, उत्तराखंड के शीतकालीन पर्यटन के सरपट दौड़ने की पूरी उम्मीद की जा रही है।

प्रधानमंत्री का यह प्रवास उस वक्त हुआ है, जबकि करीब दो महीने की शीतकालीन यात्रा शेष है। इसके बाद 30 अप्रैल से चार धाम यात्रा का श्रीगणेश होना है। ऐसे में प्रधानमंत्री के एक प्रवास ने उत्तराखंड की दोनों यात्राओं के लिए बेहतर आधार तैयार कर दिया है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड का हर तरह से प्रमोशन किया। प्रमोशन के लिए घाम तापो पर्यटन की बात हो, धर्माचार्यों और योगाचार्यों से शीतकाल में योग शिविर आयोजित करने की बात हो, कॉरपोरेट को सेमिनार का सुझाव हो, फिल्म निर्माताओं को फिल्मों की शूटिंग के लिए आह्वान हो या फिर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से अपील हो, सबने अपना अलग प्रभाव छोड़ा है।

रजत जयंती वर्ष में सबसे गंभीर प्रयास

उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शीतकालीन यात्रा का सबसे बड़ा प्रमोशन कर दिया है। इस यात्रा के प्रमोशन के लिए इससे पहले कभी इतने गंभीर प्रयास नहीं हुए। उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा के साथ प्रधानमंत्री के जुड़ाव के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जो प्रयास किए थे, उसका सार्थक परिणाम सामने आया है। बहुत कम समय में उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा और पर्यटन देश-दुनिया की नजरों में आ गए हैं।

फिर साबित हुए सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर

प्रधानमंत्री एक बार फिर उत्तराखंड के लिए सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर साबित हुए हैं। केदारनाथ धाम का उदाहरण सामने हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रियता से श्रद्धालुओं के पहुंचने के नए रिकॉर्ड बने हैं। शीतकालीन यात्रा का हिस्सा बनने की इच्छा प्रधानमंत्री ने 28 जनवरी को राष्ट्रीय खेलों के शुभारंभ के मौके पर ही जाहिर कर दी थी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से भावनात्मक लगाव ही है, वह कार्यक्रम में बदलाव के बावजूद मुखवा-हर्षिल पहुंच गए।

मुखवा हर्षिल निहाल, पीएम-सीएम का आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखवा आगमन से पूरा क्षेत्र निहाल है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है, जबकि कोई प्रधानमंत्री मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल पर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचा हो। गंगोत्री मंदिर के सचिव सुरेश सेमवाल का कहना है-यह अवसर गौरवान्वित करने वाला है। तीर्थ पुरोहित व लोक कलाकार रजनीकांत सेमवाल कहते हैं-मुखवा का चयन करने के लिए पीएम व सीएम के प्रति हम आभारी हैं।

अब होगा सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन का विस्तार, उत्तराखण्ड सरकार और गृह मंत्रालय के बीच हुआ एमओयू

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की उपस्थिति में सचिवालय में उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड एवं मुख्यालय उत्तरी सीमांत, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के मध्य उत्तराखण्ड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किया गया है।

मुख्य सचिव ने जानकारी दी कि भारत सरकार के फ्लैगशिप प्रोजेक्ट वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती क्षेत्र के गाँवो के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दी गई है तथा ग्रामीणों की आजीविका हेतु संसाधन उपलब्ध कराना भी मुख्य उद्देश्य है। उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा सीमांत क्षेत्र में पर्यटन को बढावा देने हेतु सीमांत क्षेत्र में हैली सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्र में प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल जैसे कि आदि कैलाश, ओम पर्वत, टिम्मरसैंण महादेव इत्यादि स्थित हैं जहाँ दुर्गम रास्तों के कारण पर्यटकों को पहुँचने में असुविधा होती है। इन सभी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड सरकार द्वारा पर्यटकों को हैली सुविधा उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया है। जिसमें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के कार्यक्षेत्र में उपलब्ध हेलीपैडों का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त वाईब्रेंट विलेज में रहने वाले ग्रामीणों को आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता पड़ने पर दवाईयाँ उपलब्ध करवाने एवं हैली द्वारा हायर सेंटर ले जाने हेतु भी इन हेलीपैड का उपयोग किया जाएगा। उत्तराखण्ड में तीन सीमांत जनपदों (उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़) में भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल की अग्रिम चौकियों में तैनाती है।

इस अवसर पर सचिव सचिन कुर्वे, संजय गुंज्याल महानिरीक्षक, उत्तरी सीमांत, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल, एवं उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड एवं आईटीबीपी के अधिकारी उपस्थित रहे।