ऋषिकेश के द्वितीय महंत अशोक प्रपन्नाचार्य का निधन, शोक की लहर

(एनएन सर्विस)
आज प्रात: 7:30 बजे श्री भरत मन्दिर के महन्त अशोक प्रपन्नाचार्य महाराज ने अतिंम सांस ली। उनके देहावसान की खबर से पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गयी। शहर के साथ ही देहरादून और अन्य स्थानों से लोगो ने उनके आवास पहुचकर परिवार को सान्त्वना दी। शहर के कई व्यापारियों ने अपने अपने प्रतिष्ठानों को बंद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
आपको बता दे कि श्री महन्त का जन्म 10 फ़रवरी 1942 को तत्कालीन महंत परशुराम जी के घर उनके बेटे ज्योति प्रसाद शर्मा के यहा हुआ। अशोक प्रपन्नाचार्य परिवार में बड़े पुत्र थे उनसे बड़ी एक बहन व छोटी बहन व छोटे भाई श्री हर्षवर्धन शर्मा हैं। उनके दादा श्री भरत मन्दिर के गद्दी नसीन मंहन्त परशुराम जी महाराज जोकि नगर पालिका परिषद ऋषिकेश के प्रथम अध्यक्ष भी रहे। उनके पश्चात अशोक प्रपन्नाचार्य श्री भरत मन्दिर ऋषिकेश की गद्दी वर्ष 1956 में शुषोभित हुए। इसके साथ ही श्री भरत मन्दिर द्वारा संचालित शिक्षण संस्थाओं श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज, श्री भरत मन्दिर संस्कृत महाविद्यालय, ज्योति विशेष विद्यालय के साथ ही उत्तराखंड एवं अन्य स्थानों की धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के संचालन व संवर्द्धन में सराहनीय भूमिका रही।
अशोक प्रपन्नाचार्य श्री भरत मंदिर एजुकेशन सोसाइटी व शिक्षण संस्थाओं के संचालक मंडल के अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे।
पंडित ललित मोहन शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शान्तिप्रपन्न शर्मा राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश व कई अन्य संस्थाओं को वृहत्तर भूखंड प्रदान कर क्षेत्र के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के प्रवेश द्वार खोले व नगरीय क्षेत्र के साथ गढ़वाल के नागरिकों की स्वास्थ्य सुविधाओं के संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वर्ष 1962 के भारत चीन युद्ध में भारतीय सेनाओं को शिविर कैम्प संचालित करने के लिये महन्त अशोक प्रपन्नाचार्य ने श्री भरत मन्दिर इण्टर कॉलेज के विशाल प्रांगढ को प्रदान करने के साथ ही रायवाला में सेना को छावनी बनाने का सुझाव प्रदान किया था।
स्वाधीनता संग्राम में भी श्री भरत मंदिर परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। महंत अशोक प्रपन्नाचार्य जी के चाचा शान्ति प्रपन्न शर्मा कई वर्षों तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक व उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन, उद्योग व ऊर्जा मंत्री पद पर रहे। ऋषिकेश में आईडीपीएल की स्थापना का सुझाव तत्कालीन केन्द्र सरकार को उनके द्वारा ही प्रदान किया गया था।
स्वर्गीय मंहन्त अशोक प्रपन्न शर्मा के छोटे भाई हर्षवर्धन शर्मा क्षेत्र के सार्वजनिक, सामाजिक सेवा जीवन के साथ शिक्षण संस्थाओं के संचालन में प्रबंधकीय व्यवस्था देखते हैं।
उत्तरकाशी भूकंप,केदारनाथ आपदा व कोरोना महामारी में लॉक डाउन के दौरान स्व० मंहन्त जी व उनके परिवार द्वारा राहत कार्यों में बड़े स्तर सहायता प्रदान की।
स्वर्गीय मंहन्त अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं आपके दो पुत्र वत्सल शर्मा व वरुण शर्मा हैं। वे भी सामाजिक, शिक्षण संस्थाओं व धार्मिक संस्थाओं के संचालन व संवर्धन में सक्रिय हैं। उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि अशोक प्रपन्नाचार्य महाराज विगत कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे, उनका अंतिम संस्कार ऋषिकेश चंद्रेश्वर घाट मुक्ति धाम पर अपराह्न 3 बजे सम्पन्न होगा।

डीजीपी ने यूपी से लगती सीमाओं में सख्ती बरतने के दिए निर्देश

(एनएन सर्विस)
यूपी कानपुर के कुख्यात विकास दुबे और उसके गिरोह के उत्तराखंड पहुंचने की आशंका से हड़ंकप मचा हुआ है। राज्य की पुलिस ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद है। इसके तहत उत्तर प्रदेश से सटी सीमाओं पर पुलिस टीम को सघन चेकिंग करने के निर्देश जारी किये गये है। सूत्रों ने बताया कि आला अधिकारी उत्तर प्रदेश की पुलिस से विकास और उसके गिरोह के सदस्यों के मूवमेंट पर पल-पल का इनपुट ले रहे हैं। इसके साथ ही डीजीपी अनिल के रतूड़ी ने एडीजी इंटेलीजेंस को भी स्थिति पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिये है।
बता दें कि कानपुर में दबिश के दौरान डिप्टी एसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद उत्तराखंड पुलिस ने भी ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए गंभीरता से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। वहीं, सोमवार को डीजीपी अनिल के रतूड़ी और पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने एडीजी इंटेलीजेंस पी. विनय कुमार के साथ उत्तर प्रदेश के इस प्रकरण पर चर्चा की।
डीजीपी अनिल के रतूड़ी ने कहा कि प्रदेश में भी शातिर अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार होनी चाहिए। दबिश के लिए जाने वाली टीम इसके लिए अच्छी तरह प्रशिक्षित हो। साथ ही जिस व्यक्ति को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है, उसकी पूरा विवरण और मूवमेंट की जानकारी हो। पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बताया कि कानपुर घटना के बाद उत्तर प्रदेश से लगती राज्य की सीमाओं पर चैकसी बढ़ा दी गई है। उत्तर प्रदेश और दिल्ली की ओर से जितने भी वाहन और लोग आ रहे हैं, उनकी सघन चेकिंग की जा रही है।

दो अधीक्षण अभियंताओं पर नेपाल सीमा में सड़क निर्माण पर लापरवाही का आरोप, निलंबित

(एनएन सर्विस)
शासन ने अंतरराष्ट्रीय और सामरिक महत्व के टनकपुर-जौलजीवी मोटर मार्ग के निर्माण में लापरवाही पर दो अधीक्षण अभियंताओं को निलंबित किया है। अधीक्षण अभियंता मयन पाल सिंह वर्मा व प्रभारी अधीक्षण अभियंता मनोहर सिंह पर आरोप है कि दोनों ने मार्ग की निविदा प्रक्रिया संपन्न न कर प्रक्रिया को टालने का प्रयास किया।
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बलों के आवागमन और भारतीय सीमा की सुरक्षा के लिए टनकपुर-जौलजीवी मार्ग का निर्माण प्रस्तावित है। इस मार्ग के 30 किमी से 55 किमी का निर्माण ठेकेदार दिलीप सिंह अधिकारी को आवंटित गया। ठेकेदार पर अनुबंध के दौरान फर्जी प्रमाणपत्र लगाने के शिकायत की जांच के बाद यह कार्य अगस्त 2017 में निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद इसके लिए दोबारा टेंडर आमंत्रित किए गए। इस पर ठेकेदार कोर्ट और फिर ट्रिब्यूनल में गया। आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने मामले में यथास्थिति रखने के निर्देश दिए, जिसे विभाग ने कमर्शियल कोर्ट में चुनौती दी।
जुलाई 2019 में ट्रिब्यूनल के यथास्थिति रखने के आदेश को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद पिथौरागढ़ में तैनात तत्कालीन अधीक्षण अभियंता मयन पाल ने अपने स्तर से 12 दिसंबर 2019 को निविदाएं आमंत्रित की। अपरिहार्य कारणों का उल्लेख करते हुए 24 दिसंबर 2019 को निविदाएं फिर से स्थगित कर दी गई। मुख्य अभियंता लोनिवि पिथौरागढ़ के निर्देशानुसार चार जनवरी 2020 को अधीक्षण अभियंता पिथौरागढ़ तृतीय वृत्त को फिर से निविदाएं आमंत्रित करने को पत्र भेजा गया। बावजूद इसके उन्होंने 12 जनवरी 2020 तक अपने कार्यकाल के दौरान इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। 13 जनवरी को यहां मनोहर सिंह को प्रभारी अधीक्षण अभियंता के रूप में भेजा गया। एक माह बाद, यानी 12 फरवरी 2020 को उन्होंने 12 दिसंबर 2019 को आमंत्रित निविदा में शुद्धिपत्र लगाया। इसमें निविदा आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 19 मार्च रखी गई।

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विकास दुबे के मूवमेंट पर उत्तराखंड की पुलिस भी रख रही नजर

इस बीच 18 मार्च को उन्होंने अपरिहार्य कारणों का उल्लेख करते हुए एक शुद्धि पत्र जारी किया और निविदा आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 26 मार्च 2020 रखी। इसी दौरान बीच 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन हो गया। इसका उल्लेख करते हुए प्रभारी अधीक्षण अभियंता ने केवल दो निविदादाताओं की हार्ड कॉपी प्राप्त होने का उल्लेख करते हुए 19 मई 2020 को फिर से निविदाएं निरस्त कर दीं। 28 मई को तीसरी बार निविदाएं आमंत्रित की गई।
इस बीच एक जून को आर्बिटेशन अवार्ड में ठेकेदार दिलीप सिंह अधिकारी के पक्ष में निर्णय पारित हो गया। इस प्रकरण को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया। सचिव लोनिवि आरके सुधांशु ने दोनों अभियंताओं को शासकीय नियमों की अनदेखी करते हुए संबंधित ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के आरोप में निलंबित कर दिया। मयन पाल निलंबन अवधि में प्रभारी मुख्य अभियंता कार्यालय देहरादून तो मनोहर सिंह लोक निर्माण विभाग पौड़ी कार्यालय में संबद्ध रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने दिया, सीमांत क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को सुधारने पर जोर

(एनएन सर्विस)
उत्तराखंड सरकार ने चीन और नेपाल सीमा की सामरिक महत्व की सड़कों को लेकर समीक्षा की। सीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में सड़कों के निर्माण को तय समय में पूरा करने और मानसून में सड़कों पर यातायात को बनाए रखने के लिए हरसंभव कोशिश करना तय किया गया। 
सामरिक महत्व को देखते हुए सीमा सड़क की समीक्षा बैठक को गोपनीय रखा गया। शासन के आला अफसरों से लेकर सूचना विभाग ने तक जानकारी देने से इनकार किया। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में सीमा सड़क संगठन के अधिकारी भी शामिल थे। तय किया गया कि केंद्र के संबंधित मामलों पर केंद्रीय स्तर पर बातचीत की जाएगी। यह भी कहा गया कि मानसून में भूस्खलन से सीमा की सामरिक महत्व की सड़कें अगर बंद होती हैं तो इन सड़कों को जल्द से जल्द खोला जाए।
यह भी बताया गया कि इस तरह के मामलों में चीन सीमा से लगी चमोली जिले की नीति घाटी में मलारी मार्ग के लिए 35 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण होना है। इसमें राजस्व विभाग से कहा गया है कि मुआवजे की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसी तरह नेपाल सीमा से लगी सड़कों के प्रस्ताव पर भी सीएम ने तेजी से काम करने को कहा है। बैठक में सीमांत क्षेत्र विकास योजना के तहत सीमांत क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए अधिक प्रस्ताव बनाने पर जोर दिया गया।
बाद में सचिवालय में मीडिया कर्मियों से बातचीत में सीएम ने कहा कि सामरिक महत्व की सड़कों को मानसून में बंद न होने देने के लिए अधिकारियों को कहा गया है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार के साथ ही राजस्व, लोक निर्माण विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, बीआरओ के अधिकारी शामिल थे। 

बिना मास्क और सोशल डिस्टेसिंग का पालन नही करने पर दो बसे सीज

(एनएन सर्विस)
ऋषिकेश के रायवाला थानाक्षेत्र में अवैध तरीके से 70 और 69 सवारियों को लेकर आ रही यूपी नंबर की दो बसों को सीज किया है। साथ ही दोनों बस के मालिक और चालकों पर मुकदमा भी दर्ज किया है।
थानाध्यक्ष रायवाला हेमंत खंडूरी ने बताया कि सप्त ऋषि बैरियर पर चेकिंग के दौरान मंगलवार को बस संख्या यूपी53ईटी-9901 और यूपी95टी-4135 को रोककर जांचा गया। जांच के दौरान बस के अंदर सामाजिक दूरी का उल्लंघन मिला, अधिकांश यात्री बिना मास्क के बैठे मिले। थानाध्यक्ष ने बताया कि दोनों बसे देहरादून आ रही थी। दोनों ही बसों में 32-32 यात्रियों के बैठने की अनुमति हैं, मगर, बस में 70 और 69 यात्री भरे हुए मिले। बताया कि बस चालक पर सक्षम अधिकारी द्वारा निर्मित पास भी नहीं मिला।
थानाध्यक्ष ने यूपी53ईटी-9901 बस के चालक जयराम पुत्र भगरासन निवासी ग्राम कहला थाना बढ़ोली जिला गोपालगंज बिहार एवं वाहन स्वामी अभिषेक निवासी गोरखपुर उत्तर प्रदेश तथा बस संख्या यूपी95टी-4135 के चालक अजय पाण्डे पुत्र चन्द्रिका पाण्डे निवासी ग्राम तेलियां बसोली थाना बसंतपुर जिला सीवान बिहार एवं वाहन स्वामी केसी जैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही दोनों बसों को सीज किया है।

झांसे में आ गए पंडित जी, गंवाए 15699 रूपये

(एनएन सर्विस)
ऑनलाइन शॉपिंग साइट अमेजन से पंडित महेन्द्र कुमार को भूख की दवा मंगाना भारी पड़ गया। पंडित जी को कस्टमर केयर के नाम से आए फोन में तीन बार ओटीपी मांगा गया। जिसमें करीब 15699 रूपये खाते से उड़ा लिए गए। अब पंडित जी कोतवाली के चक्कर काट रहे है।
दरअसल आवास विकास निवासी महेन्द्र कुमार पुत्र राजेन्द्र प्रसाद पुरोहित कर्मकांड का कार्य करते हैं। बीती दो जुुलाई को उन्होंने एक ऑनलाइन शॉपिंग साइट से भूख बढ़ाने की दवाई मंगवाने के लिए आवेदन किया। तभी उन्हें एक फोन आया, फोन करने वाले ने स्वयं को कस्टमर केयर दिल्ली ब्रांच से बताया और साइट पर अकाउंट बनाने के लिए दस रूपये डालने को कहा। इसके लिए उन्होंने पंडित जी के मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा। इसे पंडित जी ने बता दिया।
इसके बाद उनके खाते से 9999 रूपये कट गए। पंडित जी ने फोन करने वाले को कहा कि आपने मेरे खाते से रूपये क्यों निकाले। तो इस पर फोन करने वाले व्यक्ति ने सॉरी कहकर रूपये वापस करने की बात कही और एक बार फिर ओटीपी भेजा। अबकी बार पुनः पांच हजार रूपये निकाल लिए गए। इसी तरह तीसरी बार 700 रूपये निकाल लिए गए। इसके बाद फोन कट गया। पंडित जी मामले को लेकर एक शिकायत लिखी और कोतवाली पुलिस को सौंपी। वहीं, साइबर सेल मामले की जांच में जुट गया है।

उत्तराखंड के विकास में डेरी योजनाओं को करना होगा शामिलः मुख्यमंत्री

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत समेकित सहकारी विकास परियोजना व गंगा गाय महिला डेरी योजना में दुधारू पशु क्रय कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जहां मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना जैसी योजना प्रारम्भ की गई है। इसमें कोविड-19 से प्रभावित होकर वापिस लौटे प्रवासियों के साथ ही युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उद्योग विभाग के तहत योजना प्रारम्भ करने के साथ ही अन्य विभिन्न विभागों की योजनाओं को भी इसमें समावेशित किया गया है। मुख्यमंत्री ने दूधली में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत समेकित सहकारी विकास परियोजना व गंगा गाय महिला डेरी योजना में दुधारू पशु क्रय कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

स्वरोजगार से ही आत्मनिर्भर भारत सम्भव
मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वरोजगार की राह पर चलना होगा। हमने प्रदेश में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की है। इसमें ऋण व अनुदान की व्यवस्था की गई है। लगभग 150 प्रकार के काम इसमें लिए गए हैं। लाभार्थी अपनी रूचि और अनुभव के आधार पर इनमें से कोई भी काम शुरू कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने 20 लाख करोड़ रूपए का पैकेज दिया है। इसमें देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया है। राज्य में भी इसी क्रम में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का न केवल प्रारूप बनाया गया बल्कि इसका धरातल पर क्रियान्वयन भी शुरू किया जा चुका है। जिला योजना में स्वरोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

बद्री गाय के संरक्षण व दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य राज्य में दूध की उपलब्धता को बढ़ाना भी है। इसीलिए निर्णय लिया गया कि योजना के तहत दुधारू पशु राज्य के बाहर से लाए जाएंगे। साथ ही बद्री गाय के संरक्षण पर काम किया जा रहा है। बद्री गाय के घी की बाजार कीमत काफी अधिक है। कोशिश की जा रही है कि इनकी दुग्ध क्षमता को बढ़ाया जा सके। इसमें कुछ सफलता भी मिली है।

घर लौटे प्रवासियों के लिए रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड़-19 की स्थितियों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में प्रवासी भाईयों को उनके घर पहुंचाया गया है। उनके स्वास्थ्य, भोजन आदि की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही इनमें से जो लोग अब उत्तराखण्ड में रहकर ही काम करना चाहते हैं, उनके लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में व्यवस्था की गई है। मनरेगा में 36 हजार नए रजिस्ट्रेशन करते हुए काम उपलब्ध कराया गया है।

20 हजार दुधारू पशु का लक्ष्य
सहकारिता एवं दुग्ध विकास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है, जहां मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की शुरूआत हुई है। कोरोना की महामारी के बाद उत्तराखण्ड वासियों के लिए मुख्यमंत्री जी ने यह बड़ी सौगात दी है। इस योजना के तहत प्रदेश के लाखों लोगों को रोजगार दिया जायेगा। डेरी विकास विभाग में राष्ट्रीय सहकारी विकास परियोजना के अंतर्गत डेरी क्षेत्र के लिए कुल 444.62 करोड़ रूपए स्वीकृत हैं। इसके तहत राज्य के दुग्ध सहकारी संघों के सुदृढ़ीकरण, कोल्ड चैन की स्थापना के साथ ही तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने और प्रोत्साहन के लिए ऋण एवं अनुदान की व्यवस्था की गई है। योजना के अंतर्गत लगभग 5400 लाभार्थियों को 20 हजार दुधारू पशु राज्य के बाहर से क्रय कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के पहले वर्ष चालू वित वर्ष में लगभग 2800 लाभार्थियों को 10 हजार दुधारू पशु क्रय कराए जाएंगे। योजना के तहत इकाई लागत का 65 प्रतिशत ऋण, 10 प्रतिशत लाभार्थी अंशदान और एनसीडीसी व राज्य अंतर्गत संचालित गंगा गाय महिला डेरी योजना से कुल 25 प्रतिशत अनुदान दिये जाने की व्यवस्था है। दुधारू पशुओं का बीमा पशुधन बीमा योजना में किया जाएगा। पूरे प्रदेश में 500 मिल्क बूध की स्थापना की जा रही है। डेरी के क्षेत्र में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि इस क्षेत्र में प्रदेश के 10 हजार से अधिक लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि अगले दो महिने में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पशु मेले लगाये जायेंगे।

इस अवसर पर उत्तराखण्ड वन पंचायत सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष करन बोहरा, भाजपा के जिलाध्यक्ष शमशेर सिंह पुण्डीर, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रवीन्द्र दत्त, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक डेरी विकास जीवन सिंह नगन्याल, दुग्ध संघ से विजय रमोला, हरेन्द्र पाल सिंह आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता के लिए डीएसओ को दी जिम्मेदारी

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित जिला पूर्ति अधिकारी की जिम्मेवारी तय की जाएगी। योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की गड़बड़ी या कोताही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सचिव खाद्य, अपने स्तर पर इसकी नियमित रूप से समीक्षा करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को नवम्बर माह तक विस्तारित किया गया है। इससे देश के करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। सरकार का संकल्प है कि कोई गरीब भूखा न सोए। पिछले लगभग 4 माह में हर व्यक्ति को राशन उपलब्ध कराया गया है। राज्य में लौटे प्रवासियों के लिए भी राशन की व्यवस्था की गई।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य के 61.94 लाख व्यक्तियों को अप्रैल, मई व जून माह का खाद्यान्न दिया गया है। इसमें प्रति माह प्रति व्यक्ति 5 किलो चावल और प्रति परिवार 1 किलो दाल निशुल्क वितरित की गई है।
अब योजना का विस्तार करने से जुलाई से नवम्बर तक 5 माह और यह लाभ पात्र व्यक्तियों को मिलता रहेगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत नियमित खाद्यान्न भी वितरित किया जाता रहेगा।
बताया गया कि आत्मनिर्भर भारत योजना में लगभग 12 हजार प्रवासियों को मई व जून माह में प्रति माह 5 किलो चावल प्रति व्यक्ति और 1 किलो दाल प्रति परिवार निशुल्क उपलब्ध कराई गई है। वन नेशन वन राशन कार्ड 1 जुलाई से लागू की जा चुकी है। इसके तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के राशनकार्ड धारकों को अन्य राज्यों में और अन्य राज्यों के राशनकार्ड धारकों को राज्य में लाभ मिलेगा।

जल संरक्षण के लिए पौधे लगाना जरुरीः मुख्यमंत्री

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने चन्द्रबनी खालसा, क्लेमेंटाउन में वृक्षारोपण किया। वन विभाग द्वारा वन महोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गये। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सीजन में प्रदेश में 2 करोड़ पौधे लगाये जायेंगे। वृक्षारोपण अभियान की शुरूआत आज से हो चुकी है। हरेला पर्व पर भी प्रदेश में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जायेगा। कोविड-19 के कारण अलग-अलग चरणों में पौधे रोपे जायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में वनों एवं पर्यावरण के प्रति लोगों में सजगता है। जल संरक्षण की दिशा में राज्य सरकार द्वारा अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। पर्यावरण संतुलन के लिए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण जरूरी है। वृक्षारोपण के साथ ही उनके संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि चन्द्रबनी में वन विभाग द्वारा एक पार्क विकसित किया जायेगा।
वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है। प्रकृति के साथ हमें सामंजस्य बनाकर चलना होगा। एक अदृश्य वायरस ने हमें जीवन जीना सिखा दिया है। इस समय का हमें सदुपयोग करना होगा। प्रकृति का दोहन करने पर उसके दुष्परिणाम भी हमें झेलने पड़ते हैं। यह इस वायरस ने दुनिया को सिखा दिया है। राज्य सरकार द्वारा जल एवं वन संवर्द्धन की दिशा में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ कार्य दीर्घकालिक सोच पर आधारित होते हैं, जिसके बाद में सुखद परिणाम देखने को मिलते हैं।
विधायक विनोद चमोली ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण पर इस समय दुनिया का जोर है। कोरोना वायरस ने सबको सोचने पर विवश कर दिया है। यह समय चुनौतियों को अवसर में बदलने का है। मेडिसनल और ऐरोमैटिक प्लांट की दिशा में उत्तराखण्ड में अच्छा कार्य हो रहा है।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख वन संरक्षक जयराज एवं वन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

खुशखबरीः मुख्यमंत्री ने निर्देश, अब एक रुपये में मिलेगा पानी का कनेक्शन

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जल जीवन मिशन को सफल बनाने के लिये कार्य योजना तैयार की गई है। इसके तहत दिये जाने वाला कनेक्शन गरीब परिवारों को मात्र एक रूपये में दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अब जनहित में रूपये 2350 के स्थान पर उन्हें मात्र एक रूपये में जल जीवन मिशन के तहत कनेक्शन उपलब्ध करायेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2024 तक हर घर को नल द्वारा मानकों के अनुसार शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित कराने की योजना का लाभ प्रदेश वासियों को मिल सकेगा। देश में इस प्रकार की पहल करने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य होगा जो आम आदमी के जीवन से जुड़ी इस योजना के लिये मात्र एक रूपये में कनेक्शन उपलब्ध करायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जल जीवन मिशन’ के तहत होने वाले कार्यों को शीर्ष प्राथमिकता में रखा गया है। 2024 से पूर्व हमें ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर में जल पहुंचाना है। इसके लिए प्रत्येक वर्ष का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें पानी की उपलब्धता के साथ ही शुद्धता का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है तथा पानी की गुणवत्ता के साथ सभी क्षेत्रों के लिए इसके तहत पूरा प्लान भी बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में ‘जल जीवन मिशन’ के तहत आगामी 2 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत तक पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस वर्ष 3 लाख 58 हजार 880 घरों को इस मिशन के तहत पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने कहा कि अर्द्ध नगरीय क्षेत्रों के लिए भी घरों में प्रतिदिन 16 घण्टे पेयजल की उपलब्धता के लिए 22 अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में कार्य किये जा रहे हैं। इस योजना के तहत 96797 घरों को लाभान्वित किया जायेगा।