विपक्ष के हंगामे के बीच तीन घंटे छह मिनट चला मानसून सत्र

कोरोना संक्रमण के चलते उत्तराखंड विधानसभा का मानसून सत्र बुधवार को तीन घंटे छह मिनट ही चला। इसमें 19 विधेयक और 10 अध्यादेश पारित किए गए। विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान की मौजूदगी में आयोजित मानसून सत्र में उत्तराखंड राज्य विधानसभा सदस्यों की उपलब्धियां एवं पेंशन संशोधन विधेयक, हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विवि संशोधन विधेयक, उत्तराखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन प्रोत्साहन एवं सुविधा विधेयक, महामारी संशोधन विधेयक, उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक, उत्तराखंड माल एंव सेवाकर संशोधन विधेयक, उत्तराखंड पंचायतीराज द्वितीय संशोधन विधेयक, उत्तराखंड उत्तर प्रदेश राज्य विधान मंडल अधिकारियों के वेतन तथा भत्ते संशोधन विधेयक, बोनस संदाय उत्तराखंड संशोधन विधेयक, व्यवसाय संघ उत्तराखंड संशोधन विधेयक, औद्योगिक विवाद उत्तराखंड संशोधन विधेयक, उत्तराखंड उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 संशोधन विधेयक, कारखाना उत्तराखंड संशोधन विधेयक, उत्तराखंड जौनसार बाबर जमीदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1956 संशोधन विधेयक, उत्तराखंड उत्तर प्रदेश जमीदारी विनाश एंव भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 संशोधन विधेयक, उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक शामिल हैं।

ये अध्यादेश बने कानून
सदन में पारित होने के बाद उत्तराखंड राज्य विधान सभा सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन संशोधन अध्यादेश, उत्तराखंड माल एंव सेवाकर द्वितीय संशोधन अध्यादेश, महामारी रोग संशोधन अध्यादेश, उत्तराखंड पंचायतीराज द्वितीय संशोधन अध्यादेश, उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन संशोधन अध्यादेश, हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विवि संशोधन अध्यादेश।

सीएम ओएसडी गोपाल रावत का निधन, कोरोना का चल रहा था इलाज

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विशेष कार्याधिकारी गोपाल रावत के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि गोपाल रावत का निधन, मेरे लिए बड़ी व्यक्तिगत क्षति है। वे एक कुशल और योग्य अधिकारी थे। परमपिता परमेश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिजनों को धैर्य प्रदान करें। गोपाल रावत के परिजनों के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
बता दें कि तबियत खराब होने पर ओएसडी गोपाल रावत एम्स ऋषिकेश में इलाज कराने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को अपने ओएसडी के निधन पर दुख जताया है।

हरिद्वार की अस्थाई जेल से फरार आठ कैदी, पुलिस ने शुरू की काॅबिंग

देहरादून की अस्थाई जेल से फरार कैदी वाली घटना अब हरिद्वार में दोहराई गई है। हरिद्वार की अस्थाई जेल से खंूखार बदमाश कलीम और नरेंद्र वाल्मीकी गैंग के पांच गुर्गे सहित आठ कैदी फरार हो गए है। यह कैदी अस्थाई जेल की दो मंजिला छत से कूद कर भाग निकले। अब, पुलिस फरार कैदियों की तलाश के लिए काॅबिंग में लग गई है। वहीं, एसएसपी ने सीमाओं पर चैकसी बढ़ा दी है।

बता दें कि रोशनाबाद स्थित भिक्षुक गृह में बनी इस अस्थाई जेल का मंगलवार की सुबह कैदियों ने बैरिक में लगा ताला तोड़ा और दो मंजिला छत से कूदकर अस्थाई जेल से फरार हो गए। इसका पता तब चला जब सुरक्षाकर्मी बैरिक पर पहुंचा। देखा की दो बैरिक खाली है। सूचना के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया।

यह कैदी हुए फरार
फरार कैदियों में नरेंद्र वाल्मीकि गैंग के शूटर सागर चैहान पुत्र अमर राज चैहान निवासी सैनिक कॉलोनी चाऊ मंउी रुड़की, निशांत वर्मा पुत्र धीरज वर्मा निवासी सैनिक कॉलोनी चाऊ मंडी रुड़की के साथ ही कलीम गैंग के गुर्गे रजत सती पुत्र राजेंद्र सती निवासी खड़खड़ी हरिद्वार, नीशु शर्मा उर्फ बिजली पुत्र देवेंद्र शर्मा निवासी मोहल्ला रामगढ़ खड़खड़ी हरिद्वार, शुभम पंवार पुत्र विक्रम पंवार निवासी सेलाकुंई देहरादून के अलावा अन्य तीन कैदी विपुल उर्फ छोटा पुत्र मांगेराम निवासी ब्रह्मपुर मंगलौर, बिट्टू पुत्र मोहर सिंह उर्फ कल्लू निवासी देवबंद सहारनपुर, वाजिद पुत्र नाजिर निवासी गढ़मीरपुर रानीपुर।

राज्यमंत्री ने एसएसपी को पत्र लिखकर आईएएस अधिकारी के अपहरण की आशंका जताई

राज्यमंत्री रेखा आर्य ने देहरादून एसएसपी अरूण मोहन जोशी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने आईएएस अधिकारी वी षणमुगम के अपहरण होने की आशंका जताई हे। राज्यमंत्री ने पत्र में जिक्र किया है कि कई बार फोन करने के बाद भी संपर्क नहंी हो पा रहा है, मगर दो दिन बीत गए हैं उनका पता नहीं चल पा रहा है। उनकी जांच होनी चाहिए।

निगम से एनओसी लेने के बाद जनप्रतिनिधि करा सकते है सड़क का निर्माण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने निर्देश दिये हैं कि शहर के आबादी वाले क्षेत्रों में मुख्य मार्गों के निर्माण में ब्लैक टाप इन्टर लाकिंग सीसी टाइल्स अथवा ब्रिक आन एज तथा पक्की नाली निर्माण का प्राविधान अवश्य रखा जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि इस सम्बन्ध में पूर्व में कैबिनेट द्वारा लिये गये निर्णय के क्रम में नये मोटर मार्गों के सामान्य अनुरक्षण कार्य हेतु तीन वर्ष तक के लिये निर्माण के अनुबंध में ही प्राविधान कर दिया जाए तथा तीन वर्षों हेतु निर्माण लागत तीन प्रतिशत की दर से प्राविधानित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिये कि इन मार्गों के लिये सामान्य अनुरक्षण मद से कोई धनराशि नहीं दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि अब नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत मार्गों के रख रखाव व नव निर्माण कार्यों को जन प्रतिनिधि भी अपने क्षेत्रों में क्षेत्र की आवश्यकता के अनुरूप जहां जरूरत महसूस हो सड़क निर्माण आदि का कार्य करा सकेंगे किन्तु इसके लिये उन्हें नगर निगम से एनओसी लेनी होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये हैं कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में नये आन्तरिक मार्गों का निर्माण, नवीनीकरण का कार्य सम्बन्धित विकास प्राधिकरणों के द्वारा किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न नगर निगमों के क्षेत्रान्तर्गत मार्गों के निर्माण एवं रख रखाव का कार्य करने वाले लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, विकास प्राधिकरण अथवा अन्य विभाग इस सम्बन्ध में आपसी समन्वय से कार्य करें ताकि पूर्व निर्मित मार्गों के स्वामित्व यूटिलिटी सम्बन्धी कार्यों एवं रख रखाव आदि में आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों का निराकरण हो सके।

स्पीकर अग्रवाल और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा के बिना होगा मानसून सत्र

इस वर्ष विधानसभा उत्तराखंड का मानसून सत्र एक ही दिन का रहेगा। कोरोना के चलते यह निर्णय लिया गया है। साथ ही इस सत्र में स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश गैर मौजूद रहने वाले है। यह दोनों की कोरोना की चपेट में है।

विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी उपसभापति रघुनाथ सिंह चैहान निभाएंगे। वहीं नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी उप नेता प्रतिपक्ष करण माहरा निभाएंगे। अब सिर्फ एक दिन का ही विधानसभा सत्र होगा। ऐसे में राज्य सरकार के पास एक ही दिन का समय है, जिसमें अध्यादेश और विधेयक लेकर आएगी और उसी दिन उन्हें पास भी कराएगी। इस सत्र में प्रशनकाल नहीं होगा।

विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने बताया कि विधानसभा का मानसून सत्र एक दिवसीय होगा। 23 सितंबर को होने वाले सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा। विपक्ष की ओर से चार विषयों पर कार्यस्थगन लाया जाएगा। शून्यकाल में नियम 300 की सूचनाएं ली जाएंगी। उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान भोजनावकाश से पहले करीब 20 अध्यादेश विधेयक के रूप में पेश किए जाएंगे। भोजनावकाश के बाद इन पर चर्चा के साथ ही इन्हें पारित कराया जाएगा।

रूद्रप्रयाग की तान्या पुरोहित करेंगी आईपीएल 2020 में एंकरिंग

आईपीएल-2020 में उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले की तान्या पुरोहित एंकरिंग करती दिखाई देंगी। तान्या को यह जिम्मेदारी मिलने पर उत्तराखंड वासियों में खुशी की लहर है। वह मैच के दौरान खिलाड़ी, कोच, दर्शकों आदि का साक्षात्कार करती दिखाई देंगी।

रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लॉक की क्वीली गांव की मूल निवासी तान्या के पिता डा. डीआर पुरोहित गढ़वाल विवि के रिटायर्ड अंग्रेजी प्रोफेसर हैं और संस्कृति विशेषज्ञ हैं। तान्या के पति दीपक डोभाल जी-बिजनेस में एंकर हैं, वह राज्य सभा टीवी में एंकरिंग कर चुके हैं। तान्या ने गढ़वाल विवि से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। तान्या के चयन पर उत्तराखंड के लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। तान्या ने सीपीएल (कैरेबियन प्रीमियर लीग) में भी एंकरिंग की हुई हैं।

हरिद्वार गंगा में युगल ने लगाई छलांग, पुलिस तलाश में जुटी

हरिद्वार में चंडी घाट पुल पर लोगों के साथ एक युगल ने गंगा में छलांग लगा दी। मौके पर जमा भीड़ के अनुसार छलांग युवक और युवती ने लगाई। मौके से पुलिस को पुल के ऊपर एक बैग भी मिला है। इसमें एक युवती की आईडी पुलिस को मिली है। हालांकि अभी यह कहना कि यह उसकी युवती की आईडी है। पुलिस ने गंगा में रेस्क्यू अभियान चलाया। मगर, अभी तक उनका कुछ पता नहीं चल सका।

जानकारी के मुताबिक, गंगा में छलांग लगाते वक्त लोगों ने उन्हें देखा है। लोगों की ही सूचना पर नगर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। नगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक अमरजीत सिंह ने बताया कि एक युवक और युवती ने चंडी पुल से छलांग लगाई है।

जनता से किए 85 फीसदी वायदे पूरे किए, स्वरोजगार पर फोकसः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीवों से फसलों की सुरक्षा के लिए व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है। इसमें 4 वानर रेस्क्यू स्ेंटरों की स्थापना, 125 किमी जंगली सूअर रोधी दीवार, 50 किमी सोलर फेंसिंग, 13 किमी हाथी रोधी दीवार, 250 किमी हाथी रोधी खाईयों का निर्माण शामिल है। महिला पौधालयों की स्थापना पर भी काम किया जा रहा है जिसमें कि लगभग 20 हजार महिलाओं को रोजगार सम्भावित है। एक वैश्विक स्तर का साईंस कॉलेज और प्रदेश के 5 हजार स्कूलों में हिमालय इको क्लबों की स्थापना की कार्ययोजना भी बनाई गई है।

रोजगार
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल पर वर्चुअल प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि अपै्रल 2017 से सितम्बर 2020 तक विभिन्न विभागों के अंतर्गत कुल 7 लाख 12 हजार से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान किया गया। इनमें से नियमित रोजगार लगभग 16 हजार, आउटसोर्स-अनुबंधात्मक रोजगार लगभग 1 लाख 15 हजार और स्वयं उद्यमिताध्प्राईवेट निवेश से प्रदानध्निर्माणाधीन परियोजनाओं से रोजगार लगभग 5 लाख 80 हजार है।
उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा की गई भर्तियों की बात की जाए तो इसके माध्यम से वर्ष 2014 से 2017 तक कुल 08 परीक्षाएं आयेजित की गईं जिनमें 801 पदों पर चयन पूर्ण किया गया। जबकि वर्ष 2017 से 2020 तक कुल 59 परीक्षाएं आयोजित की गईं जिनमें 6000 पदों पर चयन पूर्ण किया गया। वर्तमान में उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में 7200 पदों पर अधियाचन-भर्ती प्रक्रिया गतिमान है। मनरेगा में प्रति वर्ष 6 लाख लोगों को रोजगार दिया जाता है। कोविड के दौरान इसमें अतिरिक्त रोजगार दिया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में 84 हजार अतिरिक्त परिवारों (2 लाख अतिरिक्त श्रमिकों) को रोजगार दिया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में 170 करोड़ रूपए अतिरिक्त व्यय किए गए हैं। आगामी तीन माह में कैम्पा के अंतर्गत 40 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की कार्ययोजना है। युवाओं और प्रदेश में लौटे प्रवासियों के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की गई। एमएसएमई के तहत इसमें ऋण और अनुदान की व्यवस्था की गई है। इसमें लगभग 150 प्रकार के काम शामिल किए गए हैं।

गैरसैंण, उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी
गैरसैंण को उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया गया। इसकी विधिवत अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। अब गैरसैण में राजधानी के अनुरूप आवश्यक सुविधाओं के विकास की कार्ययोजना बनाई जा रही है। भविष्य की आवश्यकताओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की दृष्टि से चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन किया गया है। इसमें तीर्थ पुरोहित और पण्डा समाज के लोगों के हक हकूक और हितों को सुरक्षित रखा गया है। अटल आयुष्मान योजना में राज्य के सभी परिवारों को 5 लाख रूपए वार्षिक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने वाला उत्तराखण्ड, देश का पहला राज्य है। अभी 2 लाख 5 हजार मरीजों को योजना में निशुल्क उपचार मिला है। जिस पर 180 करोड़ रूपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। नेशनल पोर्टेबिलिटी की सुविधा देते हुए देशभर के 22 हजार से अधिक अस्पताल इसमें सूचीबद्ध हैं।

कार्यसंस्कृति में सुधार
ई-कैबिनेट, ई-ऑफिस, सीएम डैश बोर्ड उत्कर्ष, सीएम हेल्पलाईन 1905, सेवा का अधिकार और ट्रांसफर एक्ट की पारदर्शी व्यवस्था के चलते कार्यसंस्कृति में गुणात्मक सुधार हुआ है। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस सरकार की प्रमुख नीति है। इन्वेस्टर्स समिट के बाद पहले चरण में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है। अगले डेढ़ वर्ष में इसे 40 हजार करोड़ तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

रिवर्स पलायन पर सुनियोजित प्रयास
पर्वतीय राज्य की अवधारणा से बने उत्तराखण्ड में पहली बार किसी सरकार ने रिवर्स पलायन पर सुनियोजित तरीके से काम शुरू किया है। एमएसएमई के केंद्र में पर्वतीय क्षेत्रों को रखा गया है। सभी न्याय पंचायतों में क्लस्टर आधारित एप्रोच पर ग्रोथ सेंटर बनाए जा रहे हैं। 100 से अधिक ग्रोथ सेंटरों को मंजूरी भी दी जा चुकी है। बहुत से ग्रोथ सेंटर शुरू भी हो चुके हैं। हर गांव में बिजली पहुंचाई गई है। किसानों को तीन लाख रूपए और महिला स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख रूपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के गन्ना किसानों को अवशेष गन्ना मूल्य का शत प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित किया गया है।

नए पर्यटन केद्रो का विकास
13 डिस्ट्रिक्ट-13 न्यू डेस्टीनेशन से नए पर्यटन केंद्रों का विकास हो रहा है। होम स्टे योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। विभिन्न रोपवे प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। जलसंरक्षण और जलसंवर्धन पर काफी काम किया गया है। प्रदेश की नदियों, झीलों, तालाबों और जलस्त्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए व्यापक जनअभियान शुरू किया गया है।

डबल इंजन का असर
डबल इंजन का असर साफ-साफ देखा जा सकता है। केंद्र सरकार द्वारा लगभग एक लाख करोड़ रूपए की विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश के लिए स्वीकृत हुई हैं। बहुत सी योजनाओं पर तेजी से काम भी चल रहा है। इनमें ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम सड़क परियोजनाघ्, केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण, भारतमाला परियोजना, जमरानी बहुद्देशीय परियोजना, नमामि गंगे, भारत नेट फेज -2 परियोजना, एयर कनेक्टीवीटी पर किया जा रहा काम मुख्य है। उत्तराखण्ड पहला राज्य है जहां उड़ान योजना में हेली सेवा प्रारम्भ की गई है। श्री बदरीनाथ धाम का भी मास्टर प्लान बनाया गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
पिछले लगभग साढ़े तीन वर्षों में उत्तराखण्ड ने विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। नीति आयोग द्वारा जारी ‘‘भारत नवाचार सूचकांक 2019’’ में पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों की श्रेणी में उत्तराखण्ड सर्वश्रेष्ठ तीन राज्यों में शामिल है। राज्य को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट घोषित किया गया। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड को सात पुरस्कार मिले हैं। ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ अभियान में ऊधमसिंह नगर जिले को देश के सर्वश्रेष्ठ 10 जिलों में चुना गया। उत्तराखंड को खाद्यान्न उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दूसरी बार कृषि कर्मण प्रशंसा पुरस्कार दिया गया। जैविक इंडिया अवार्ड 2018 के साथ ही मनरेगा में देशभर में सर्वाधिक 16 राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य को मिले। मातृत्व मृत्यु दर में सर्वाधिक कमी के लिए उत्तराखण्ड को भारत सरकार से पुरस्कृत किया गया है।

लोक कल्याणकारी सरकार
आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आंगनबाड़ी सहायिका, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्री के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांगजन पेंशन की राशि को 1000 रूपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 1200 रूपए प्रतिमाह किया गया। ग्राम प्रहरियों का मानदेय रूपए 2000 हजार प्रतिमाह किया गया। दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया गया। उत्तराखण्ड पहला राज्य है जहां अनाथ बच्चों की चिंता करते हुए उनके लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण की व्यवस्था की गई है। दुर्घटना राहत राशि को मृत्यु पर 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख, गम्भीर घायल होने पर 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार और साधारण घायल होने पर 5 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रूपए किया है। शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता अनुसार सरकारी नौकरी दी जा रही है। विशिष्ट सेवा पदक से अलंकृत सैनिकों को अनुमन्य राशि में कई गुना बढ़ोतरी की है।

कोविड-19 से लड़ाई, हेल्थ सिस्टम को मजबूती
उत्तराखण्ड में सभी के सहयोग से कोविड-19 से लड़ाई लड़ी जा रही है। परिस्थितियों के अनुसार निर्णय ले रहे हैं। सर्विलांस, सेम्पलिंग, टेस्टिंग पर फोकस किया जा रहा है। राज्य में हेल्थ सिस्टम को मजबूत किया गया है। पर्याप्त संख्या में कोविड अस्पताल, आइसोलेशन बेड, आईसीयू बेड, आक्सीजन सपोर्ट बेड और वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। अब राज्य के सभी जनपदों में आई0सी0यू0 स्थापित किए जा चुके हैं। मार्च में राज्य में कोरोना संक्रमण की टेस्टिंग सुविधा नहीं थी। वर्तमान में 5 सरकारी और विभिन्न प्राईवेट लेब में कोविड-19 के सेम्पल की जांच की जा रही है। वर्तमान में 481 आईसीयू बेड, 543 वेंटिलेटर, 1846 आक्सीजन सपोर्ट बेड, 30500 आईसोलेशन बेड उपलब्ध हैं। रुद्रपुर, हरिद्वार और पिथौरागढ़ में भी मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं। पिछले लगभग तीन साल में पर्वतीय क्षेत्रों में डाक्टरों की संख्या में पहले से लगभग ढाई गुना वृद्धि की गई है। टेलीमेडिसीन और टेलीरेडियोलोजी भी लाभदायक साबित हो रही हैं।

आपदा प्रभावितों की पुनर्वास की व्यवस्था करेगी राज्य सरकारः त्रिवेंद्र

सीएम त्रिवेन्द्र सिंह पिथौरागढ़ जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्र तहसील बंगापानी के राजकीय इंटर कालेज बरम में आपदा प्रभावितों के लिए बनाए गए राहत शिविर में पहुंचे। यहां उन्होंने निरीक्षण के बाद आपदा प्रभावितों की समस्याएं सुनी। उन्होंने आपदा की घटना में मृतकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि दुःख की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने शिविर में आपदा प्रभावितों को प्रशासन द्वारा दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आपदाग्रस्त परिवारों की परिस्थिति उनके कष्ट वह समझ सकते हैं, जो भी प्रभावित हैं, जांच के उपरांत उनकी सुविधा अनुसार उनके पुनर्वास की व्यवस्था सरकार द्वारा की जाएगी। जिलाधिकारी पिथौरागढ़ द्वारा इस हेतु प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में विस्थापन की नीति नहीं थी अब पुनर्वास हेतु सरकार द्वारा नीति बना दी गई है। इन 2 वर्षों में 350 परिवारों को विस्थापन करने का कार्य भी किया गया। नीति बनने के उपरांत कार्य करने में सुविधा भी मिलेगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित व्यक्ति को रोजगार से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों को मानकों के अनुरूप पूरी मुआवजा राशि दी जाएगी।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास हेतु विभिन्न घोषणाऐं भी की। जिसमें दारमा घाटी में विभिन्न सड़कों का निर्माण, नगर पालिका धारचूला क्षेत्रान्तर्गत तट बंध निर्माण के 2 करोड़ 50 लाख, सीमांत क्षेत्र की तीनों घाटियों व्यास, दारमा व चैदास में 5 मोबाइल टावर जो भी कंपनी स्थापित करेगी उसे राज्य सरकार 40 लाख रुपये वहन करेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान तक क्षेत्र में लगभग 300 सेटेलाइट फोन भी बांटे गए हैं। उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज धारचूला का नाम दानवीर जसुली शोकयानी दताल के नाम रखने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त धारचूला घट काली नदी में सुरक्षा दीवार निर्माण कर बाईपास सड़क का निर्माण, खोतिला के गाँव के लिए स्लाइडिंग एरिया में सुरंग का निर्माण या अन्य विकल्पों से रास्ता निर्माण किया जाएगा।इसके अतिरिक्त धारचूला मिनी स्टेडियम में पर्वतारोहण हेतु दीवार का निर्माण, मुख्यमंत्री सड़क योजना से 28 करोड़ रुपये से सड़कों का निर्माण, नप्लचु से रोंगकांग तक सड़क का निर्माण व सामुदायिक मंच का निर्माण, तवाघाट-लिपुलेख सड़क निर्माण पूर्ण होने के उपरांत गुंजी में टैक्सी स्टैंड का निर्माण किए जाने की घोषणा, ग्राम सभा नाबि के मंदिर का सौंदर्यीकरण, दांतु, गो, फिलम मोटर मार्ग का निर्माण, तिदांग से सीपू तक मोटर मार्ग का निर्माण आदि घोषणाएं की।

भ्रमण के दौरान उत्तराखंड संविदा श्रम सलाहकार बोर्ड के माननीय अध्यक्ष शमशेर सत्याल, जिलाधिकारी डॉ विजय कुमार जोगदण्डे, पुलिस अधीक्षक प्रीति प्रियदर्शिनी आदि उपस्थित रहे।