नंदप्रयाग-घाट मोटर मार्ग को डेढ़ लेन करने की मुख्यमंत्री ने की घोषणा

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने आज सड़क को डेढ़ लेन करने की मांग कर रहे नंदप्रयाग घाट क्षेत्र के ग्रामीणों की मुराद पूरी कर दी है। इस सड़क के चैड़ीकरण के लिए मुख्यमंत्री ने आज घोषणा कर दी है। इसके लिए संबंधित विभाग को निर्देश भी जारी हो गए हैं। पदभार संभालने के बाद मुख्यमंत्री ने यह एक अहम फैसला लिया है, जिसकी मांग के लिए स्थानीय ग्रामीण आंदोलन कर रहे थे।

जनपद चमोली के नंद्रप्रयाग घाट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले करीब 70 गांवों के ग्रामीण अपने विकास खंड की सड़क को डेढ़ लेन करने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। सड़क से हजारों लोगों के हित जुड़े हैं।

क्षेत्र की इस मांग को लेकर क्षेत्रीय विधायक मुन्नी देवी शाह ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बातया कि सिंगल लेन सड़क होने के कारण नंदप्रयाग घाट क्षेत्र के ग्रामीणों को भारी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। उन्होंने बताया कि संकरे मार्ग पर दुर्घटनाओं का खतरा रहता है। कहा कि ग्रामीणों की मांग जायज है।

क्षेत्र की समस्या पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने समस्या का समाधान कर दिया है। उन्होंने थराली विधान सभा के अंतर्गत आने वाले नंदप्रयाग से घाट बाजार तक की सड़क को डेढ लेन करने की घोषणा कर दी है। इसके लिए वित्त व नियोजन से लेकर लोक निर्माण विभाग को भी कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिये जनता सबसे बढ़कर है। जो जनता चाहेगी और जो जनता के हित में होगा वह किया जाएगा। जनहित में हर मुमकिन काम किया जाएगा।

इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख घाट भारती देवी फरस्वाण, जिला पंचायत सदस्य बूरा वार्ड 25 नन्दिता रावत, मण्डल अध्यक्ष घाट खिलाप सिंह नेगी, ज्येष्ठ प्रमुख घाट अब्बल सिंह कठैत, सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन सिंह फरस्वाण, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य राकेश रावत तथा कर्नल हरेन्द्र सिंह भी उपस्थित थे।

यूजेवीएन लिमिटेड की रुद्रप्रयाग में प्रथम लघु जल विद्युत परियोजना का हुआ लोकार्पण

जनपद रुद्रप्रयाग में स्थित यूजेवीएन लिमिटेड की काली गंगा प्रथम लघु जल विद्युत परियोजना का लोकार्पण मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया। काली गंगा प्रथम लघु जल विद्युत परियोजना जिला रुद्रप्रयाग के उखीमठ विकासखंड में काली गंगा नदी पर कालीमठ कोटमा मार्ग पर स्थित है। उक्त परियोजना दिनांक 15-16 जून, 2013 में आई अतिवृष्टि एवं बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो गई थी एवं विद्युत गृह बह जाने के कारण परियोजना से उत्पादन बंद हो चुका था।

सुदूरवर्ती क्षेत्र के लिए परियोजना के महत्व को देखते हुए वर्ष 2016 में परियोजना के पुनर्निर्माण कार्य प्रारंभ किए गए। सुदूरवर्ती एवं दुर्गम क्षेत्र में होने के कारण परियोजना के निर्माण कार्य में कई बाधाओं का सामना भी करना पड़ा। अंततः परियोजना को जुलाई 2020 में सफलतापूर्वक सिंक्रोनाइज कर 33ाअ वितरण लाइन से जोड़ दिया गया था।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा परियोजना स्थल पर परियोजना का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक केदारनाथ मनोज रावत द्वारा की गई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार सुदूरवर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए समर्पित है एवं विद्युत ऊर्जा हर घर तक पहुंचाने हेतु प्रतिबद्ध है।

परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल ने बताया की परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 26.18 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया जाएगा। परियोजना से उत्पादित विद्युत द्वारा आसपास के जालतल्ला, खुन्नु, कोटमा, कबील्ठा, चैमासी सहित लगभग 25 गांव की विद्युत आपूर्ति में सुधार होगा। लोकार्पण कार्यक्रम में यूजीवीएन लिमिटेड के निदेशक वित्त सुधाकर बडोनी, निदेशक परियोजनाएं सुरेश चंद्र बलूनी तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारियों के साथ ही बड़ी संख्या में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय जनता उपस्थित रहे।

जीएमवीएन तिलवाडा में हिलांस के आउटलेट का सीएम ने किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने तिलवाड़ा स्थित गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) परिसर में हिलांस के आउटलेट का लोकार्पण किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि काश्तकारों के स्थानीय उत्पादों को वैल्यू एडेड करके हिलांस उन्हें अच्छा बाजार उपलब्ध करवा रहा है। राज्य सरकार ने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए विकासखंडों में ’ग्रोथ सेंटर्स’ की स्थापना की है। बताते चलें कि उत्तराखंड में किसानों को बाजार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिये राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी एकीकृत आजीविका परियोजना (आईएलएसपी) ने अपनी ’हिलांस’ नाम का ब्रांड बनाया है। ’हिलांस’ को एक किसान हितैषी पहल के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।

यूपी और उत्तराखंड सीएम ने केदारनाथ में किया पुनर्निर्माण के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। शंकराचार्य के समाधि स्थल, आस्था पथ, ध्यान गुफाओं का एवं केदारनाथ में बने ब्रिज का निरीक्षण दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा किया गया।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यो की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केदारनाथ में बहुत तेज गति से निर्माण कार्य किए गए। निर्माण कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर से आधुनिक यंत्र केदारनाथ में लाए गए। निर्माण कार्यों की प्रगति कि देहरादून से नियमित रूप से निगरानी की गई।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने बताया कि शीघ्र ही केदारनाथ नये स्वरूप में देश व दुनिया के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र बनेगा। केदारनाथ आने वाले मार्गों के सुदृढीकरण के साथ ही धाम में अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निरन्तर यहां संचालित कार्यों का अनुश्रवण किया जा रहा है। निर्माण कार्यों में स्थानीय, पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व को संजोये रखने के साथ ही स्थानीय स्थापत्य कला पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुनर्निर्माण कार्यों के साथ निकटवर्ती आध्यात्मिक स्थलों को भी इससे जोड़ा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन्हें 11-12 वर्षों के बाद बाबा केदारनाथ के श्री चरणों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में आयी त्रासदी के बाद प्रधानमंत्री मोदी के वीजन एवं मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र के नेतृत्व में श्री केदारनाथ का पुनरुद्धार का कार्य युद्धस्तर पर संचालित किया जा रहा है। देश-विदेश के श्रद्धालुजनों के विश्वास बहाली में उत्तराखण्ड सरकार ने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केदारनाथ पुनर्निर्माण का बेहतरीन कार्य किया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने देवभूमि उत्तराखण्ड के साथ ही बाबा केदारनाथ को नमन करते हुए कहा कि पौराणिक महत्व के इस श्रद्धा के केन्द्र का सुनियोजित ढंग से किये जा रहे पुनर्निर्माण कार्य निश्चित रूप से श्रद्धालुओं के विश्वास बहाली में मददगार हुआ है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ के प्रति करोड़ों लोंगों की आस्था है, यही आस्था भारत की अस्मिता, भारत के सांस्कृतिक केन्द्र भारत को भारत बनाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि केदारनाथ के प्रति उनकी आस्था रही है। पूजा के समय उन्हें बाबा केदार के दर्शनों की प्रेरणा मिलती रही है। आज मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र के प्रयासों से बाबा केदार के दर्शन करने तथा यहां चल रहे कार्यों के अवलोकन का अवसर मिला। उन्होंने इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के साथ ही उत्तराखण्ड व सभी देश वासियों के सुख चैन, कुशलता व सुरक्षा की कामना की।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 16 नवम्बर को वे भगवान बदरीनाथ के दर्शनार्थ भी जायेंगे, जहां पर उत्तर प्रदेश अतिथि विश्रामालय का शिलान्यास मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के साथ करेंगे। उन्होंने कहा कि दीपावली के अवसर पर केदारनाथ, बदरीनाथ के दर्शन के साथ ही उत्तर प्रदेश विश्रामालय का शिलान्यास करने का इससे अच्छा मुर्हूत नहीं हो सकता। इस अवसर पर दोनों मुख्यमंत्रियों ने श्री केदारनाथ मतें पूजा अर्चना भी की।

इस अवसर पर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी, मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड के औद्योगिक सलाहकार डॉ के.एस. पंवार, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग मनुज गोयल, एसपी रूद्रप्रयाग नवनीत भुल्लर भी उपस्थित थे।

उत्तराखंड के वन मंत्री को अदालत ने सुनाई तीन साल की सजा, वर्ष 2012 के विस चुनाव का है मामला

वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव के दौरान सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के मामले में आज सीजेएम कोर्ट रूद्रप्रयाग ने उत्तराखंड के वन मंत्री हरक सिंह रावत को सजा सुनाई है। सजा के रूप में वन मंत्री हरक सिंह रावत को तीन साल की सजा सुनाई है।

बता दें कि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में डा. हरक सिंह रावत और उनके चार समर्थक वीरेंद्र बुटोला, अंकुर रौथाण, वीर सिंह बुडेरा के साथ ही रघुवीर सिंह के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालना, चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करना और प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारियों के साथ अभद्रता करने का आरोप लगा था। इस मामले में रुद्रप्रयाग सीजेएम कोर्ट में मुकदमा चला।

इसी साल फरवरी में मामले को लेकर हरक सिंह रावत को जमानत मिली थी। हालां, मामले में सुनवाई जारी रही। जमानत के दौरान हरक सिंह रावत को न्यायालय में एक घंटे खड़ा भी रहना पड़ा था। दरअसल, न्यायालय ने मंत्री को कोर्ट में हाजिर होने का समन दिया था, लेकिन मंत्री पूर्व में उपस्थित नहीं हो सके थे। आठ फरवरी को मंत्री सीजेएम कोर्ट में हाजिर हुए, जहां लगभग एक घंटे की प्रक्रिया के बाद उन्हें जमानत मिली।

केदारनाथ स्थित ईशानेश्वर मंदिर के नव निर्माण में मुंबई के दानी मनोज सोलंकी ने जताई इच्छा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड की बैठक हुई। बैठक में बोर्ड के संचालन से सम्बन्धित विषयों के साथ ही बोर्ड द्वारा तैयार किये विभिन्न ड्राफ्ट रूल को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसे शासन को उपलब्ध कराया जायेगा। इसमें पुजारियों, न्यासी, तीर्थ पुरोहितो, पण्डो व हक हकूक धारियों के अधिकारों का विनिश्चय एवं संरक्षण से सम्बन्धित नियमावली भी शामिल है। इस अवसर पर देवस्थानम बोर्ड के लोगो (प्रतीक चिन्ह्) की डिजाइनों पर भी चर्चा हुई। जिनमें कतिपय संशोधन के पश्चात अन्तिम निर्णय लिया जायेगा।
बैठक में श्री बद्रीनाथ धाम में मन्दिर एवं समीपवर्ती स्थलों के विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण के सम्बन्ध में निर्णय लिया गया कि बद्रीनाथ धाम में यात्रियों की संख्या में प्रतिवर्ष हो रही वृद्धि के कारण इस क्षेत्र का विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण आवश्यक है ताकि भविष्य में यात्रियों को दर्शन, यातायात एवं ठहरने की समुचित व्यवस्था हो सके इसके लिए देवस्थानम बोर्ड को इसकी व्यवस्था सौंपे जाने पर विचार किया गया। बोर्ड के स्तर पर इससे सम्बन्धित कार्यवाही सुनिश्चित कर शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर शासन को प्रेषित करने पर सहमति बनी। बोर्ड अपने स्तर पर इसके लिये तकनीकि एवं विषय विशेषज्ञों की व्यवस्था भी कर सकेगा। इसके साथ ही बैठक में तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मन्दिर एवं सभा मण्डप आदि के जीर्णोद्धार पर भी सहमति बनी इसके लिये यू.एस.ए. के दानी पंकज कुमार द्वारा धनराशि व्यय करने की इच्छा जतायी है।
केदारनाथ स्थित ईशानेश्वर मन्दिर के नव निर्माण के लिये भी स्वीकृति प्रदान की गई इस मन्दिर के निर्माण के लिये मुम्बई के दानी मनोज सोलंकी ने इच्छा व्यक्त की है। श्री केदारनाथ मन्दिर के पूरब द्वार की मरम्मत पर भी सहमति बनी जिसके लिये धनराशि दानी हरियाणा के श्री यतिन घई ने दान की सहमति दी है।

बैठक में केदारनाथ मे रावल पुजारी आदि के कक्षों की मरम्मत भविष्य में ऊखीमठ मन्दिर के जीर्णोद्वार, बहुमूल्य पाण्डुलिपियों को डिजिटाइल किये जाने, कार्तिक स्वामी मन्दिर को देवस्थानम बोर्ड के अधीन लाये जाने तथा थैलीसैण्ड स्थित विन्देश्वर मन्दिर के जीर्णोद्वार किये जाने पर सहमति प्रदान की गई।
बैठक में मुख्यमंत्री एवं अध्यक्ष, उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड त्रिवेन्द्र ने यात्रा मार्गो सहित मन्दिर परिसरो में देवस्थानम बोर्ड के साइनेज होर्डिंग आदि लगाये जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ, केदारनाथ मन्दिरों के पुजारियों, पण्डों, पुरोहितों, वाद्य यंत्र वादको आदि का विवरण तैयार किया जाय ताकि जरूरत पड़ने पर इन लोगों को भी आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जा सके। उन्होंने कहा कि ये लोग हमारी संस्कृति के संवाहक हैं।
उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने बताया कि 25 अक्टूबर तक चारधाम में 1.72 लाख यात्री दर्शनार्थ आये हैं तथा 2 लाख द्वारा रजिस्ट्रेशन किया गया है, जबकि बद्रीनाथ मन्दिर को 7.55 करोड़ तथा केदारनाथ मन्दिर को 75 लाख की आय हुई है।
बैठक में कैबिनेट मंत्री एवं उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड सतपाल महाराज, विधायक महेन्द्र भट्ट, गोपाल रावत, सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, सचिव वित्त श्रीमती सौजन्या, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीडी सिंह, देवस्थानम बोर्ड के अनिल ध्यानी, प्रमोद नोटियाल, डॉ0 हरीश गौड आदि उपस्थित थे।

वायुसेना का मालवाहक चिनूक हेलीकाॅप्टर ने की केदारनाथ में लैंडिंग

केदारनाथ में 2018 में क्षतिग्रस्त हुए सेना के हेलीकाॅप्टर एमआइ-17 की बाॅडी को लेने वायुसेना का चिनूक पहुंचा। करीब तीन टन क्षतिग्रस्त हेलीकाॅप्टर की भारी बॉडी को लेकर चिनूक बरेली रवाना हो गया। पुर्न निर्माण कार्य के दौरान भारी सामान ले जाने के दौरान केदारनाथ में वर्ष 2018 में एक एमआइ-17 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हेलीकॉप्टर का इंजन वायुसेना पहले ही ले जा चुकी है।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने कुछ दिनों पूर्व केदारनाथ में हेलीपैड तैयार किया था। पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाने को भारी मशीनें पहुंचाई जानी हैं। वायु सेना की टीम ने इस हेलीपैड का निरीक्षण किया था। केदारनाथ में दूसरे चरण के पुनर्निर्माण कार्य अक्टूबर से प्रस्तावित हैं। इसके लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं।

पिछले दिनों मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने केदारनाथ में व्यवस्थाओं का जायजा लिया था और डीडीएमए को दस दिन के भीतर हेलीपैड तैयार करने के निर्देश दिए थे।

पलायन आयोग ने सीएम को सौंपी रिपोर्ट, रूद्रप्रयाग में पिछले 10 वर्ष में हुआ 22735 लोगों का अस्थाई पलायन

जनपद रूद्रप्रयाग के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को सुदृढ़ बनाने एवं पलायन को कम करने हेतु ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी ने सचिवालय में ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की रिपोर्ट मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को सौंपी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जनपद के प्रमुख पर्यटक एवं धार्मिक स्थलों की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना होगा। जनपद में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना जरूरी है। जनपद में महिलाओं की आबादी अधिक है, महिलाओं को कौशल विकास से संबंधित प्रशिक्षण के साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देना होगा।

ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 वर्षों में रुद्रप्रयाग जनपद से 316 ग्राम पंचायतों से 22735 लोगों द्वारा अस्थाई पलायन किया। यह पलायन जनपद के अन्दर एक स्थान से दूसरे स्थान पर हुआ। जबकि 7835 व्यक्तियों द्वारा पूर्ण रूप से स्थाई पलायन किया गया। जनपद में स्थाई पलायन की तुलना में अस्थाई पलायन अधिक हुआ है। लगभग 40 प्रतिशत पलायन 26 से 35 वर्ष के आयु वर्ग द्वारा किया गया। 2011 की जनगणना के अनुसार जनपद रूद्रप्रयाग की जनसंख्या 02 लाख 42 हजार 285 है। जनपद की 80 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।

ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जनपद रूद्रप्रयाग विकासखण्ड ऊखीमठ की जनसंख्या में 11 प्रतिशत की वृद्धि एवं विकासखण्ड अगस्तमुनी की जनसंख्या में 02 प्रतिशत की कमी आई है। राज्य घरेलू उत्पाद के आधार पर वर्ष 2016-17 (अनन्तिम) अनुमानों में जनपद रूद्रप्रयाग की प्रतिव्यक्ति आय अनुमानित 83521 रूपये है। रूद्रप्रयाग एवं टिहरी जनपद की प्रति व्यक्ति आय अन्य पर्वतीय जिलों की तुलना में कम है। जनपद का मानव विकास सूचकांक अन्य पर्वतीय जिलों से कम है। जनपद रूद्रप्रयाग में कुल 688 ग्रामों में से 653 आबाद एवं 35 गैर आबाद ग्राम हैं। जनपद के तीनों विकासखण्डों में कुल 20 राजस्व ग्राम-तोक हैं।

ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग ने जनपद के आर्थिक, सामाजिक विकास एवं पलायन को रोकने के लिए सुझाव दिये कि विकासखण्ड स्तर पर आर्थिक विकास का एक ढ़ाचा तैयार किया जाय। जनपद में पर्यटन विकास योजना तैयार होनी चाहिए। राज्य सरकार की होम स्टे योजना को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा देना होगा। भूजल पुनर्भरण योजनाओं को प्राथमिकता दी जाय। पानी के पारम्परिक स्रोतों के सूखने से जल की उपलब्धता एक चुनौती के रूप में आई है। सामाजिक-आर्थिक उत्थान और ग्रामीण विकास के लिए एक महिला केंद्रित दृष्टिकोण अपना होगा। सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योगों कृषि आधारित, रेडिमेट वस्त्र, कताई-बुनाई लकड़ी आधारित, होटल एवं अन्य सर्विस ईकाइयों को जनपद के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाकर आजीविका प्रदान करनी होंगी।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिले। उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना जरूरी हैं। जनपद में फल, नर्सरियों की संख्या बढ़ाने एवं फल रोपण सामग्री उत्पादन करने के साथ ही निजी क्षेत्र की नर्सरियों को प्रोत्साहित करना होगा। फसलों को नुकसान से बचाने के लिए मनरेगा के तहत सुअर रोधी दीवार का निर्माण किया जाना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना एवं कौशल विकास से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी हैं। जनपद में कृषि उत्पादन के लिए विशेष क्षेत्र या विकासखण्ड स्तर पर किसान उत्पादक संगठन के गठन पर सिफारिश की गई है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाईन तथा चारधाम सड़क परियोजना से जनपद रूद्रप्रयाग के विकास में तेजी आयेगी तथा इसका लाभ उठाने के लिए जिला प्रशासन विशेष योजना बनाए।

रूद्रप्रयाग की तान्या पुरोहित करेंगी आईपीएल 2020 में एंकरिंग

आईपीएल-2020 में उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले की तान्या पुरोहित एंकरिंग करती दिखाई देंगी। तान्या को यह जिम्मेदारी मिलने पर उत्तराखंड वासियों में खुशी की लहर है। वह मैच के दौरान खिलाड़ी, कोच, दर्शकों आदि का साक्षात्कार करती दिखाई देंगी।

रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लॉक की क्वीली गांव की मूल निवासी तान्या के पिता डा. डीआर पुरोहित गढ़वाल विवि के रिटायर्ड अंग्रेजी प्रोफेसर हैं और संस्कृति विशेषज्ञ हैं। तान्या के पति दीपक डोभाल जी-बिजनेस में एंकर हैं, वह राज्य सभा टीवी में एंकरिंग कर चुके हैं। तान्या ने गढ़वाल विवि से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। तान्या के चयन पर उत्तराखंड के लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। तान्या ने सीपीएल (कैरेबियन प्रीमियर लीग) में भी एंकरिंग की हुई हैं।

केदारनाथ में शंकराचार्य समाधि का कार्य 31 दिसंबर तक हो पूरा

मुख्य सचिव ओमप्रकाश एवं पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने शनिवार को केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने शंकराचार्य समाधि, दिव्यशिला से समाधि तक पैसेज मार्ग, एम आई 26 हेलीपैड, सरस्वती व मन्दाकिनी घाट आदि का भी निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कार्यदायी संस्थाओं को कार्य मे तेजी लाने व गुणवत्ता परक कार्य कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर हाल में तय समय सीमा के भीतर पुनर्निर्माण कार्य पूर्ण किया जाय। शंकराचार्य समाधि में चारदीवारी व मंडल वाल का निर्माण किया जाना है। चारदीवारी 12 मीटर व मंडल वाल 03 मीटर की बनाई जानी है जिसमे से चारदीवारी की वाल 1,2 व 4 पर 1डेढ़ मीटर की दीवार का निर्माण कार्य पूर्ण व वाल 3 पर सरिया व कंक्रीट का कार्य चल रहा है। दिव्यशिला से समाधि तक 48 बाई 3.6 मीटर का पैसेज बनाया जाना है जिस पर राफ्ट का कार्य पूर्ण हो चुका है व कंक्रीट का कार्य प्रगति पर है। इस संबंध में मुख्य सचिव ने जिंदल सोशल वर्क के प्रबंधक विकास राणा को 31 दिसम्बर तक शंकराचार्य समाधि व पैसेज को हर हाल में पूर्ण करने के निर्देश दिए।

सरस्वती नदी पर 504बाई5 मीटर का आस्था पथ का निर्माण कार्य पूर्ण चुका है व घाट के लिए स्टेप भी बन चुके है। घाट को जाने वाले स्टेप पर सौंदर्यीकरण हेतु लाइटनिंग का कार्य किया जाना है। घाट के आस पास 05 व्यू पॉइंट बनाये जाने है जिसमे से 03 व्यू पॉइंट पर कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इस सम्बंध में मुख्य सचिव ने जेएसडब्ब्ल्यू को सितम्बर माह का अंत तक शेष 02 व्यू पॉइंट का निर्माण करने व अक्टूबर तक घाट सौंदर्यीकरण का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

एम आई 26 हेलिपैड पर क्षतिग्रस्त गढ़वाल मंडल विकास निगम के 03 कॉटेज को 10 दिन के भीतर हटाने के निर्देश मुख्य सचिव ने लोनिवि के अधीक्षण अभियंता मुकेश परमार को दिए। एम आई 26 वर्तमान में 50बाई40 आकार का है जिसका विस्तारीकरण चिनूक हेलीकाप्टर हेतु 50बाई100 का किया जाना है। डीडीएमए द्वारा गरुड़चट्टी के लिए पुल का निर्माण कार्य किया जा रहा है जिसमें से केदारपुरी की तरफ के अबटमेंट का कार्य पूर्ण हो चुका है व 1 एक सप्ताह के भीतर दूसरी ओर के अबटमेंट का कार्य पूर्ण हो जाएगा।

सीएस ने अधिशासी अभियंता डीडीएमए प्रवीण कर्णवाल को 31 दिसम्बर तक पुल निर्माण कार्य हर हाल में पूर्ण करने के निर्देश दिए। जिंदल ग्रुप द्वारा तीर्थ पुरोहितों के 05 भवन निर्माण किये जाने थे जिसमें से 02 भवनों को पूर्ण कर जिला प्रशासन को सौप दिए गए है। अवशेष तीन भवनों को क्रमशः 15 सितम्बर, 30 सितम्बर व 15 अक्टूबर तक पूर्ण कर जिला प्रशासन को सौंपने के निर्देश मुख्य सचिव में दिए। साथ ही ध्यान गुफा के लंबित कार्यों को भी तय समय के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस मौके पर जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग वंदना भी उपस्थित रही।