400 करोड़ के केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों का प्रधानमंत्री ने किया लोकार्पण व शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केदारनाथ धाम में गोवर्धन पूजा के अवसर पर को बाबा केदार की पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक किया। उन्होंने लगभग 400 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसमें आदि गुरू शंकराचार्य के पुनर्निर्मित समाधि स्थल और नई प्रतिमा का अनावरण के साथ तीर्थ पुरोहितों के आवास, सरस्वती नदी के तट पर बाढ़ सुरक्षा तथा घाटों का निर्माण, मन्दाकिनी नदी तट पर बाढ़ सुरक्षा हेतु भार वाहक दीवार, गरुड़ चट्टी के लिये मन्दाकिनी नदी पर पुल के निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री द्वारा जिन योजनाओं का शिलान्यास किया गया उनमें श्री केदारनाथ धाम में संगम घाट का पुनर्विकास एवं रेन शैल्टर शेड, प्राथमिक चिकित्सा एवं पर्यटक सुविधा केन्द्र, मन्दाकिनी आस्था पथ पंक्ति प्रबन्धन, मन्दाकिनी वाटर एटीएम एवं मन्दाकिनी प्लाजा, प्रशासनिक कार्यालय एवं अस्पताल भवन, केदारनाथ तीर्थ स्थल में संग्रहालय (म्यूजियम) परिसर, सरस्वती सिविक एमेनिटी भवन का निर्माण कार्य शामिल है। इस अवसर पर राज्यपाल ले.ज.(से.नि) गुरमीत सिंह, कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत, सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, विधायक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु आदि भी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि आपदा के बाद केदारनाथ धाम पूरी आन बान और शान के साथ फिर से खड़ा होगा। केदारनाथ पुनर्निर्माण को उन्होंने ’ईश्वरी कृपा’ बताया और इसमें योगदान देने वाले प्रत्येक व्यक्ति का आभार प्रकट किया।

उन्होंने कहा कि केदारनाथ में भारत की संस्कृति की व्यापकता का अलौकिक दृश्य दिखाई देता है। यहां आकर महसूस होता है कि भारत की ऋषि परंपरा कितनी महान है। मैं यहां जब भी आता हूं कण-कण से जुड़ जाता हूं। उन्होंने कहा कि गरुड़चट्टी से मेरा पुराना नाता है। मेरा सौभाग्य है कि गोवर्धन पूजा के दिन उन्हें केदारनाथ दर्शन का सौभाग्य मिला है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केदारनाथ में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। 2013 की आपदा के दौरान मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था। इस दौरान केदारनाथ आपदा को याद कर प्रधानमंत्री मोदी भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि आपदा में जो नुकसान यहां हुआ, वो अकल्पनीय था। हर कोई सोचता था कि क्या ये हमारा केदारनाम धाम फिर से उठ खड़ा हो पाएगा, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास था कि यह धाम पहले से अधिक आन-बान-शान के साथ खड़ा होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने केदारनाथ के पुनर्निर्माण का जो सपना देखा था वो आज पूरा हो रहा है। इस आदि भूमि पर शाश्वत के साथ आधुनिकता का ये मेल, विकास के ये काम भगवान शंकर की सहज कृपा का ही परिणाम हैं। उन्होंने पुनर्निर्माण कार्यों में तत्परता दिखाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तारीफ की। उन्होंने इन पुनीत प्रयासों के लिए मंदिर के रावल, पुजारियों और इन निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी उठाने वाले सभी लोगों को भी धन्यवाद दिया। खासतौर पर उन्होंने पुनर्निर्माण कार्य करने वाले श्रमिकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि बर्फबारी और कड़कड़ाती ठंड के बीच यहां निर्माण का काम करना बेहद मुश्किल था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने पवित्र मठों की स्थापना की और द्वादश ज्योतिर्लिंगों के पुनर्जागरण का काम किया। बाल्यावस्था में ही उन्होंने सबकुछ त्यागकर देश, समाज और मानवता के लिए जीने वालों के लिए एक सशक्त परंपरा खड़ी की है। आदि गुरु शंकराचार्य को शंकर का अवतार बताते हुए उन्होंने कहा कि ’शं करोति सः शंकरः’ का तात्पर्य है, जो कल्याण करे, वही शंकर है। इस व्याकरण को भी आचार्य शंकर ने प्रत्यक्ष प्रमाणित किया। उन्होंने अपना पूरा जीवन जन-साधारण के कल्याण में खपा दिया। आज हम सभी आदि शंकराचार्य जी की समाधि की पुनः स्थापना के साक्षी बन रहे हैं। एक समय था जब आध्यात्म को, धर्म को केवल रूढ़ियों से जोड़कर देखा जाने लगा था। लेकिन, भारतीय दर्शन तो मानव कल्याण की बात करता है, जीवन को पूर्णता के साथ समग्र तरीके में देखता है। आदि शंकराचार्य ने समाज को इस सत्य से परिचित कराने का काम किया है।

कहा कि हमारे यहां सदियों से चारधाम यात्रा का महत्व रहा है। तीर्थाटन हमारे यहां जीवन काल का हिस्सा माना गया है। अब हमारी सांस्कृतिक विरासतों को, आस्था के केंद्रों को उसी गौरव भाव से देखा जा रहा है, जैसा देखा जाना चाहिए। उन्होंने देशवासियों का आह्वान किया कि वे तीर्थ और धार्मिक स्थलों का भ्रमण जरूर करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर पूरे गौरव के साथ बन रहा है, अयोध्या को उसका गौरव वापस मिल रहा है। अभी दो दिन पहले ही अयोध्या में दीपोत्सव का भव्य आयोजन पूरी दुनिया ने देखा। भारत का प्राचीन सांस्कृतिक स्वरूप कैसा रहा होगा, आज हम इसकी कल्पना कर सकते हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश में काशी का भी कायाकल्प हो रहा है। विश्वनाथ धाम का कार्य बहुत तेज गति से पूर्णता की तरफ आगे बढ़ रहा है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने अयोध्या, काशी और मथुरा का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा देश अब गौरव के साथ अपने लिए बड़े लक्ष्य तय कर रहा है। देश कठिन समय सीमाएं निर्धारित करता है, तो कुछ लोग कहते हैं कि इतने कम समय में ये सब कैसे होगा, होगा भी या नहीं होगा। तब मैं कहता हूं कि समय के दायरे में बंधकर भयभीत होना अब भारत को मंजूर नहीं है।

उत्तराखण्ड के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि चारधाम सड़क परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है, चारों धाम सुरक्षित हाईवे से जुड़ रहे हैं। भविष्य में यहां केदारनाथ तक श्रद्धालु केबल कार के जरिए आ सकें, इससे जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। यहां पास में ही पवित्र हेमकुंड साहिब जी भी हैं। हेमकुंड साहिब जी के दर्शन आसान हों, इसके लिए वहां भी रोप-वे बनाने की तैयारी है। पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड के तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। इसी का नतीजा है कि चारधाम यात्रा आने वाले भक्तों की संख्या लगातार रिकॉर्ड बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले 10 वर्षों में यहां पिछले 100 वर्षों से अधिक श्रद्धालु यात्रा के लिए पहुंचेंगे।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों ने कोरोना संक्रमण में साहस का परिचय दिया। कोरोना टीकाकरण की पहली डोज में शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है। ये उत्तराखंड की ताकत है, सामर्थ्य है। पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी अब उसी के काम आएगी, पलायन रुकेगा। इसके लिए प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री धामी को धन्यवाद भी दिया। कहा कि मुझे पूरा विश्वास है जितनी ऊंचाई पर उत्तराखंड है भविष्य में वह उतनी ही ऊंचाई हासिल करेगा।

उत्तराखण्ड के प्रति प्रधानमंत्री का है विशेष लगाव- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का हिमालय तथा यहां पर स्थित मंदिरों से विशेष लगाव रहा है। चाहे कैलाश मानसरोवर की यात्रा हो अथवा केदारपुरी में तप एवं ध्यान साधना हो, यहां की भूमि से आपने सदैव एक असीम आध्यात्मिक दिव्य ऊर्जा प्राप्त की है, जिसने आपको निरंतर भारत वर्ष के समग्र कल्याण का कार्य करने की शक्ति दी है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म संस्कृति में आदि गुरु शंकराचार्य जी को कौन नहीं जानता। वे भारत की राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक चेतना के सूत्रधार थे। भारत की गौरवशाली संस्कृति, परंपराओं, वेदों एवं उपनिषेदों के असीम ज्ञान के संरक्षण व संवर्धन का श्रेय आदिगुरू शंकराचार्य को ही जाता है। उनकी इसी महान परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य आज हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हो रहा है।

भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के इतिहास का महत्वपूर्ण अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारधाम के पुनर्निर्माण एवं आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि की पुनर्स्थापना के लिए आदि गुरु जैसी ही जिजीविषा, संकल्प और धैर्य की आवश्यकता थी, जो प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में परिलक्षित होती है। आज का दिन भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि मोदी के निर्देशन में केदारपुरी में जहां प्रथम चरण के 225 करोड़ के कार्य पूर्ण हो चुके हैं वहीं 184 करोड़ के कार्य द्वितीय चरण में गतिमान है। इसके साथ ही बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान के लिए जहां 245 करोड़ रूपये से अधिक स्वीकृत हो चुके हैं। वहीं गंगोत्री व यमनोत्री के लिए भी करोड़ों रूपये के कार्य स्वीकृत हो चुके हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि प्रधानमंत्री जो कहते हैं, जो सोचते हैं, वही अन्तोत्गत्वा करते हैं।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सम्पूर्ण विश्व में बढ़ रहा है भारत तथा भारतीय संस्कृति का मान, सम्मान एवं स्वाभिमान

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज भारत एवं भारतीय संस्कृति का मान, सम्मान, स्वाभिमान संपूर्ण विश्व में बढ़ रहा है तथा भारत विश्व गुरू के पद पर पुनः आरूढ़ होने के लिए तैयार हो रहा है। देश में जो कार्य कभी नामुमकिन से प्रतीत होते थे वे आज पूर्णता की ओर बढ़ रहे हैं। चाहे वो राम मंदिर का मुद्दा हो, धारा 370 का मुद्दा हो, तीन तलाक का मुद्दा हो या शक्तिशाली भारत के सम्पूर्ण विकास की बात हो। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धाम ने राज्य में चल रही केन्द्र की परियोजनाओं का जिक्र करते हुए राज्य सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं।


राज्य के विकास में मिल रहा है केन्द्र सरकार का भरपूर सहयोग

मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार के सहयोग से राज्य में ऐसे बहुत से काम हुए हैं, जो पहले नामुमकिन लग रहे थे। पिछले पांच वर्षों में केन्द्र सरकार द्वारा करीब एक लाख करोड़ रूपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाएं प्रदेश के लिये स्वीकृत हुई है। जिनमें से बहुत सी योजनाएं पूर्ण हो चुकी है और अन्य पर कार्य चल रहा है। हम पहाड़ में रेल का सपना देखते थे। मोदी ने इस सपने को साकार किया है। आज ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तथा सामरिक दृष्टि एवं भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है। इसी प्रकार चार धाम ऑल वेदर रोड, भारत माला प्रोजेक्ट पर भी तीव्र गति से काम किया जा रहा है। चार धाम यात्रा उत्तराखण्ड के लिए लाइफ लाईन है और ये परियोजनाएं जहां चारधाम यात्रा को सुगम बनाएंगी, पर्यटन को बढ़ावा देगी वहीं हमारी अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन भी लाएगी।

प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में संचालित हो रहा सबसे बड़ा ’सबको वैक्सीन-मुफ्त वैक्सीन’ अभियान

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों से हम कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं। परन्तु प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हमने जहां एक ओर इस महामारी से डटकर मुकाबला किया है, वहीं विकास की गति को भी आगे बढ़ाया है। यह माननीय प्रधानमंत्री जी का ही नेतृत्व है कि देश में दुनिया का सबसे बड़ा कोविड वैक्सीनेशन अभियान ’सबको वैक्सीन-मुफ्त वैक्सीन’ चल रहा है। पूरी दुनिया में इसकी सराहना की जा रही है। प्रदेश सरकार ने भी सफलतापूर्वक कोविड की प्रथम डोज को लगाने का लक्ष्य समय से पूर्व ही शत प्रतिशत प्राप्त कर लिया है। साथ ही दूसरी डोज भी करीब 50 प्रतिशत लोगों को लगाई जा चुकी है। कोरोना महामारी से प्रभावित पर्यटन, परिवहन, क्षेत्रों के लिये 200 करोड़ का राहत पैकेज, स्वास्थ्य क्षेत्र की मजबूती एवं इससे जुड़े कार्मिकों को प्रोत्साहन हेतु 205 करोड़ तथा महिला सशक्तिकरण एवं रोजगार को बढ़ावा देने के लिये 118 करोड़ का राहत पैकेज प्रदान किया जा रहा है। यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लोगों के खातों में भेजी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, जन-स्वास्थ्य, बिजली, पानी, कनेक्टिविटी, रोजगार, महिला एवं बाल विकास, खेती-किसानी, सिंचाई हर क्षेत्र में उत्तराखंड ने पिछले पांच वर्षों में अभूतपूर्व तरक्की की है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी सरकार उत्तराखंड में जो विकास कार्य कर रही है वे ’’न भूतो न भविष्यति’’ हैं।
हमारी सरकार ने जहां 24 हजार सरकारी पदों को भरने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है, वहीं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना तथा नैनो उद्यम योजना के द्वारा हम लाखों को स्वरोजगार द्वारा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर बढ रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने केदारनाथ के पुनर्निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री केदारनाथ धाम पहुंच कर बाबा केदारनाथ जी के दर्शन किये। उन्होंने केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया। 5 नवंबर को प्रधानमंत्री जी के केदारनाथ आगमन के लिए की जा रही तैयारियों का भी जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने तीर्थ पुरोहितों और पंडा समाज के प्रतिनिधियों से भी वार्ता की। सौहार्दपूर्ण बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार जन भावनाओं का सम्मान करने वाली सरकार है। तीर्थों के पंडा, पुरोहित और पुजारियों के मान सम्मान को कोई ठेस नहीं पहुंचाई जायेगी। हम सकारात्मक, धनात्मक और विकासात्मक दृष्टिकोण से चारधाम, पंडा, पुरोहित और पुजारी समाज के सम्मान तथा धार्मिक आस्था की गरिमा के सम्मान के लिए तत्पर हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बाबा केदार के प्रति विशेष आस्था और श्रद्धा है। उनका उत्तराखण्ड को दुनिया की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर विकसित करने का विजन है। पूरी दुनिया के लोग यहां आध्यात्मिक शांति के लिए आएंगे। आधुनिक इतिहास में पहली बार इतने बङे पैमाने पर केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। पहले चरण के काम हो चुके हैं। दूसरे चरण के काम शुरू हो रहे हैं। आदि गुरु शंकराचार्य जी की समाधि का लोकार्पण करने के साथ ही उनकी प्रतिमा का भी अनावरण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री डॉ हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल भी मौजूद रहे।

भारतीय सेना के जवानों ने रेस्क्यू कर बचाई 313 लोगों की जान

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण मची तबाही के बीच सेना के जवान देवदूत बनकर राहत बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। मंगलवार को सेना के जवानों ने टनकपुर और नैनीताल से 313 लोगों का रेस्क्यू करते हुए सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसमें महिलाओं के अलावा छोटे बच्चे भी शामिल थे। देहरादून स्थित उत्तराखंड सब एरिया मुख्यालय से सेना के विशेष अभियान की जानकारी साझा की गई। प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि भारी बारिश के कारण काली नदी टकनपुर में जल स्तर बढ़ गया। मंगलवार को इस नदी में बाढ़ आ गई। सेना ने तत्काल सुबह साढ़े आठ बजे मुख्यालय उत्तराखंड उप क्षेत्र और उत्तर भारत क्षेत्र के तत्वावधान में पंचशूल ब्रिगेड की जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री से दो बाढ़ राहत कॉलम जुटाए। इसके बाद टनकपुर के शारदा घाट गांव और अंबेडकर नगर गांव में राहत बचाव अभियान चलाया गया। करीब चार घंटे ये अभियान चला। इस दौरान 283 ग्रामीणों को बचाया गया। इसमें 89 पुरुष, 139 महिलाएं और 55 बच्चे शामिल थे। जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के अतिरिक्त बचाव कॉलम किसी भी अप्रत्याशित आकस्मिकता से निपटने और नागरिक प्रशासन को आगे की सहायता के लिए बनबासा सैन्य स्टेशन पर स्टैंडबाय पर रखे गए हैं।
सेना के जवानों ने तल्लीताल नैनीताल में भी रेस्क्यू अभियान चलाया। यहां भी अचानक पानी बढ़ने और तेज बहाव के कारण कई दुकानदार अपनी-अपनी दुकानों में फंस गए। नैनीताल प्रशासन ने सहायता के लिए अनुरोध किया और सेना मौके पर पहुंच गई। पंचशूल ब्रिगेड की निगरानी और लक्ष्य प्राप्ति बैटरी से एक बाढ़ राहत कॉलम पंचशूल ब्रिगेड, मुख्यालय उत्तराखंड उप क्षेत्र और उत्तर भारत क्षेत्र के तत्वावधान में नैनीताल के तल्लीताल में बचाव अभियान चलाया गया। यहां छह घंटों में 30 लोगों को बचाया गया। इसमें दो बच्चे भी शामिल हैं। किसी भी अप्रत्याशित आकस्मिकता से निपटने के लिए नैनीताल मिलिट्री स्टेशन पर जवानों को मुस्तैद रखा गया है।

बाबा के बुलावे पर सीएम केदारनाथ पहुंचे, तीर्थ पुरोहितों ने किया जोरदार स्वागत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज प्रातः 9 बजे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार केदारनाथ धाम पहुंचे। हेली पेड पर देवस्थानम बोर्ड, जिला प्रशासन सहित तीर्थ पुरोहितों ने उनकी अगवानी की तथा स्वागत किया गया।
हेलीपैड से मुख्यमंत्री श्री केदारनाथ मंदिर दर्शन को पहुंचे जहां उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बाबा केदारनाथ भगवान के दर्शन किये। उनकी ओर से मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने रुद्राभिषेक का पाठ किया। देश एवं प्रदेश के खुशहाली की मंगलकामना की। देवस्थानम बोर्ड द्वारा उन्हें श्री केदारनाथ भगवान का प्रसाद एवं रुद्राक्ष माला भेंट की।
मुख्यमंत्री आदि गुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल गये और वहां समाधि स्थल पुनर्निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। आदि गुरु शंकराचार्य जी की मूर्ति को हेलीकॉप्टर से कुछ दिनों पूर्व श्री केदारनाथ धाम पहुंचाया गया है। मुख्यमंत्री ने संपूर्ण केदारनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों का मौके पर अवलोकन भी किया। उन्होंने पुनर्निर्माण में लगे अधिकारियों, इंजीनियरों, मजदूरों के साथ ही श्रद्धालुओं से भी बातचीत की।
इस अवसर पर उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सदस्य एवं वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती, पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर, जिलाधिकारी मनुज गोयल, पुलिस अधीक्षक आयुष अग्रवाल, उपजिलाधिकारी योगेन्द्र सिंह, देवस्थानम बोर्ड के मंदिर प्रशासनिक अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, प्रबंधक अरविंद शुक्ला, प्रदीप सेमवाल भी मौजूद रहे।

दर्शन करने आ रहे यात्रियों की संख्या बढ़ाने का सरकार हाईकोर्ट से करेगी अनुरोध

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के सफल संचालन के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में चार धाम यात्रा से जुड़े सभी विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। समीक्षा बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निर्देश देते हुए कहा कि राज्य के बाहर से आने वाले यात्रियों को स्मार्ट सिटी एवं देवस्थानम् बोर्ड के पोर्टल पर पंजीकरण कराया जा रहा है। पंजीकरण कराये जाने हेतु अभिलेख एवं शर्तें दोनों पोर्टलों में समान हैं। यात्रियों की सुविधा के दृष्टिगत देवस्थानम् बोर्ड के ई-पास होल्डर को स्मार्ट सिटी के पोर्टल पर पंजीकरण की बाध्यता को एसओपी से हटाये जाने पर विचार किया जाय।
देवस्थानम् बोर्ड की वेबसाईट / पोर्टल खालने में उत्पन्न हो रही समस्याओं का तत्काल निराकरण किया जाय। धामों के चैक प्वाइंट पर ई-पास की चैकिंग हेतु क्यूआर कोड की व्यवस्था की जाय। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि देवस्थानम् बोर्ड के पोर्टल पर यात्रियों के पंजीकरण हेतु One Phone number, one booking, one adhar number की व्यवस्था की जाय। चारों धामों में समस्त प्रोटोकॉल का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चत करते हुये मन्दिर खुलने के निर्धारित समय के अन्तर्गत धाम एवं मन्दिर परिसर की वास्तविक क्षमता का आंकलन वीडियोग्राफी सहित शासन को उपलब्ध करायी जाय। माननीय उच्च न्यायालय में अंतरिम एप्लीकेशन दायर करते हुए तत्काल यात्रियों की प्रतिदिन दर्शन की अनुमन्य संख्या को बढ़ाये जाने हेतु अनुरोध किया जाय।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाय कि ई-पास को निर्गत किये जाने एवं ई-पास की चैकिंग व्यवस्था को अत्यन्त सरलीकृत किया जाय, जिससे कि तीर्थ यात्रियों को ई-पास हेतु पंजीकरण कराने में किसी तरह की असुविधा न हो। बैठक में बताया गया कि निर्धारित यात्रियों के सापेक्ष पूर्व से पंजीकृत यात्रियों में से अपेक्षाकृत कम यात्री चार धामों में दर्शन आ रहे हैं, इस स्थिति में सम्बंधित जिलाधिकारियों द्वारा उक्त यात्रियों के स्थान पर अन्य पंजीकृत यात्रियों को दर्शन की अनुमति दे सकते हैं। बैठक में चारधाम देवस्थानम बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रविनाथ रमन ने बताया कि चार धाम यात्रा हेतु पंजीकरण एवं ई-पास देवस्थानम् बोर्ड की वेबसाइट से निर्गत किये जा रहे हैं। वेबसाइट पर तक चार धाम यात्रा हेतु यात्रियों द्वारा पंजीकरण करा लिया गया चारों धाम में पूजा प्रातः 4.00 बजे से सायं 7.00 बजे तक संचालित की जा रही है।
बैठक सचिव पर्यटन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, चार धाम देवस्थानम् बोर्ड / आयुक्त, गढ़वाल मण्डल, सचिव, आपदा, सचिव, संस्कृति एवं धर्मस्व, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, यूकाडा, उपमहानिरीक्षक, पुलिस, गढ़वाल परिक्षेत्र, अपर सचिव, संस्कृति एवं धर्मस्व, जिलाधिकारी चमोली एवं जिलाधिकारी उत्तरकाशी, जिलाधिकारी, रूद्रप्रयाग, पुलिस अधीक्षक, उत्तरकाशी / रूद्रप्रयाग (वीसी के माध्यम से) सम्मिलित थे।

बदरी-केदार धाम में पुनर्निर्माण कार्यों का खुल्बे ने लिया जायजा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सलाहकार भास्कर खुल्बे आज अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रातः 8.45 बजे श्री केदारनाथ धाम दर्शन को पहुंचे। हेलीपैड पर पहुंचने पर केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों, उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड, जिला पुलिस-प्रशासन ने उनकी अगवानी एवं स्वागत किया। उनके साथ प्रधानमंत्री कार्यालय में उप सचिव मंगलेश घिल्डियाल भी श्री केदारनाथ पहुंचे।
हेलीपैड से वह मंदिर हेतु रवाना हुए उनकी ओर से केदारनाथ धाम के पुजारी बागेश लिंग ने भगवान केदारनाथ जी का रूद्राभिषेक पाठ किया तथा देश के खुशहाली की कामना की।
इसके बाद उन्होंने केदारनाथ धाम में निर्माण कार्यों का अवलोकन भी किया तथा पुनर्निर्माण कार्यों हेतु प्रदेश सरकार की सराहना भी की। इस अवसर पर सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग मनुज गोयल, केदार सभा से उमेश‌पोस्ती, देवस्थानम बोर्ड के मंदिर प्रशासनिक अधिकारी यदुवीर पुष्पवान, अरविंद शुक्ला, प्रदीप सेमवाल आदि मौजूद रहे।
इसके पश्चात करीब सवा 11 बजे श्री बदरीनाथ धाम के लिए रवाना हो गये। जोशीमठ से वह सड़क मार्ग से श्री बदरीनाथ धाम पहुंचे। श्री बदरीनाथ धाम पहुंच कर भाष्कर खुल्बे ने जिला प्रशासन एवं यात्रा मजिस्ट्रेट उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी से मास्टर प्लान के कार्यों की समीक्षा की जानकारी ली और देश के सीमांत पर्यटन ग्राम माणा का भी भ्रमण किया। भगवान बदरीविशाल क्षेत्रपाल श्री घंटाकर्ण जी महाराज मंदिर, श्री गणेश गुफा, श्री ब्यास गुफा मंदिर, श्री सरस्वती नदी भीम पुल पहुंचकर दर्शन किये।

वैज्ञानिकों की चेतावनी, लगातार आ रहे भूकंप को नही किया जाना चाहिए नजर अंदाज

उत्तराखंड में मानसून का दौर अभी जारी है। प्रदेश के कई क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में जनजीवन अस्त व्यस्त हो रहा है। तो कई मार्ग अवरुद्ध होने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही है। वहीं, उत्तराखंड में भूकंप को लेकर भी सूचनाएं प्राप्त हो रही है। इसी क्रम में उत्तराखंड में आज फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि भूकंप की तीव्रता कम थी। भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था। ये झटके दोपहर 3 बजकर 31 मिनट पर महसूस हुए। फिलहाल भूकंप से जानमाल के नुकसान की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग अपने अपने घरों से बाहर निकल आए। वहीं लगातार आ रहे इन हल्के झटकों को वैज्ञानिक बड़े खतरे की चेतावनी भी मान रहे है।
आज भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.5 मापी गई है। इससे पहले सोमवार को पिथौरागढ़ में भारत-नेपाल सीमा पर भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। वहीं, रविवार को रुद्रप्रयाग जिले में भी भूकंप का हल्का झटका महसूस किया गया। रविवार दोपहर 12 बजकर 21 मिनट पर पर रुद्रप्रयाग में भूकंप महसूस किया गया था। जिसकी तीव्रता 3.3 रिक्टर बताई गई। इसके साथ ही बीते दिनों बागेश्वर में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।
वैज्ञानिकों की माने तो उत्तराखंड में आ रहे भूकंप के ये हल्के झटके बड़े खतरे का संकेत हैं। उत्तराखंड में भूकंप को लेकर किए गए शोध से इस बात का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि हिमालय में 200 साल की ऊर्जा एकत्रित हो चुकी है जो कभी भी भूकंप के रूप में बाहर आ सकती है। ऐसे में आशंका है कि उत्तराखंड में इस सदी का सबसे भयानक भूकंप आ सकता है।

कर्णप्रयाग और गैरसैंण विकासखंड में सुधरेगी मोबाइल की कनेक्टिविटी

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय मीडिया टीम के सदस्य सतीश लखेड़ा ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा कि चमोली जनपद के कर्णप्रयाग और गैरसैण विकासखंडों की मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या को लेकर आज राज्यसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी के नेतृत्व में केंद्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव से भेंट की। सांसद बलूनी ने मंत्री जी को बताया कि कनेक्टिविटी ना होने से इन दुर्गम क्षेत्रों में जनता को परेशानी तो होती ही है साथ ही बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई बाधित होती है।
भाजपा नेता सतीश लखेड़ा ने कहा कि बलूनी ने दूर संचार मंत्री को कर्णप्रयाग विकासखंड के बगोली, चमोला, मैखुरा, मजखोला, कमेड़ा और सेरागढ़ क्षेत्रों तथा गैरसैंण विकासखंड के देवपुरी, राईकोट, कुनीगाड़ तल्ली, कुणखेत, बुखाली, चोरड़ा, पिंडवाली और कांसुवा क्षेत्रों की मोबाइल समस्या का ध्यान दिलाया।

केंद्रीय मंत्री अनिल वैष्णव ने कहां कि उनका मंत्रालय निरंतर मोबाइल कनेक्टिविटी के सुधार हेतु प्रयासरत है। उन्होंने उपरोक्त सभी 14 स्थानों की कनेक्टिविटी हेतु संबंधित अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा की बीएसएनएल सहित सभी निजी ऑपरेटर कंपनियां इन स्थानों का निरीक्षण कर संचार सुविधा बहाल करें।
सतीश लखेड़ा ने केंद्रीय मंत्री सहित सांसद अनिल बलूनी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि इन दुर्गम क्षेत्रों में संचार सुविधा बहाल होने से आम नागरिकों को व विद्यार्थियों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि गत दिनों अपने क्षेत्र भ्रमण के दौरान आम जनता द्वारा मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या की ओर ध्यान दिलाया गया और स्वयं भी कनेक्टिविटी ना होने की परेशानियों का सामना करना पड़ा।

चारधाम यात्रा शुरु, तीर्थयात्रियों के साथ ही कारेाबारियों के खिले चेहरे

केदारनाथ, बदरीनाथ सहित चार धाम में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रदेश में यात्रा का श्रीगणेश हो गया। पहले दिन बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री धाम में 700 से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन किया। यात्रा शुरू होने से श्रद्धालुओं में उत्साह है तो दूसरी ओर, चारधाम रूट के पर्यटन और परिवहन कारोबारी भी बेहद खुश नजर आ रहे हैं। केदारनाथ धाम के दर्शन के लिए दोपहर 12 बजे तक 352 तीर्थयात्री प्रस्थान कर चुके थे। केदारधाम में प्रतिदिन 800 लोगों को ही जाने की अनुमति दी गई है।
देवस्थानम बोर्ड के अनुसार, केदारनाथ में गर्भ गृह में भी व्यवस्थाएं बहाल कर दी गई हैं। गर्भ गृह में किसी को प्रवेश की अनुमति नही हैं। सभी यात्रियों को सभा मंडप से ही दर्शन की अनुमति दी गई है। बदरीनाथ में ब्रह़्म मुर्हुत में भगवान बदरी विशाल का पूजन अभिषेक शुरू हुआ। मुख्य रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी ने नियमानुसार भगवान का स्नान, श्रृंगार, अभिषेक किया। धर्माधिकारी भुवन उनियाल अपर धर्माधिकारियों ने वेद ऋचाओं का वाचन किया। कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं ने जय बदरीविशाल के जयघोष के साथ मंदिर परिसर में प्रवेश किया। दोपहर तक 250 श्रद्धालु भगवान बदरीनाथ के दर्शन कर चुके थे। अभी सिलसिला जारी है। उधर, उत्तरकाशी में दोपहर तक गंगोत्री धाम में 73 श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। यमुनोत्री में भी श्रद्धालुओं ने मां यमुना की पूजा अर्चना की। दोनों धामों में शाम तक 302 श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पूजा अर्चना की।

कोविड जांच के लिए सख्त इंतजाम
भगवान बदरीनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य जांच के लिये जिले के प्रवेश द्वार गौचर, मोहन खाल, मेहलचौरी से ही बैरियर पर कोविड जांच की व्यवस्था की गई है। पांडुकेश्वर में भी कोविड जांच यात्रियों की जांच हो रही है । हेमकुंड जाने वाले यात्रियों की भी कोविड जांच की जा रही है। बदरीनाथ आने वाले यात्रियों कोविड प्रपत्रों की जांच देवदर्शनी में भी हो रही है। उधर,केदारनाथ के दर्शन के लिए जाने वाले महाराष्ट्र, केरल और आंध्रप्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए सोनप्रयाग में आरटीपीसीआर कोविड टेस्ट की अलग से व्यवस्था की है।

कार्यों की गुणवत्ता से ना किया जाए समझौता-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ एस.एस. सन्धु ने शुक्रवार को भगवान केदारनाथ के दर्शन कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण भी किया। उन्होंने कार्यों में बेहतर गुणवत्ता के साथ ही तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कार्यों में गति लाने के लिए आवश्यक मैन पावर, मशीनरी एवं मटीरियल की पर्याप्तता सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यों में गति लाने के लिए वीकली टारगेट निर्धारित कर अचीवमेंट की समीक्षा नियमित रूप से की जाए।
मुख्य सचिव ने केदार पुरी के दोनों तरफ की पहाड़ियों पर वन विभाग को आकर्षक प्लांटेशन करने के निर्देश दिए। उन्होंने वहां काम कर रही लेबर से भी बात की, मुख्य सचिव ने अधिकारियों को श्रमिकों के लिए उचित व्यवस्था किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने चोराबाड़ी ट्रेक रूट को विकसित किए जाने के साथ ही गरुड़ चट्टी से रामबाड़ा तक पुराने मार्ग को सुचारू करने हेतु फॉरेस्ट क्लीयरेंस पर तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने निर्माणाधीन शंकराचार्य समाधि स्थल का निरीक्षण भी किया। उन्होंने मंदाकिनी एवं सरस्वती नदी के संगम पर निर्मित हो रहे स्नान घाटों केदारनाथ गरुड़ चट्टी को जोड़ने वाले निर्माणाधीन पुल व पहाड़ी शैली में निर्मित हो रहे भवनों का जायजा भी लिया। मुख्य सचिव ने वहां मौजूद अधिकारियों से निर्माण कार्यों में गति एवं समय से पूरा करने के साथ ही कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सुव्यवस्थित और सुरक्षित चारधाम यात्रा हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर एवं जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग भी उपस्थित थे।