विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ देवभूमि को आगे बढ़ा रही सरकारः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल में आयोजित माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री धामी ने माँ नंदा-सुनंदा के श्रीचरणों में नमन कर प्रदेशवासियों की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने महोत्सव में उपस्थित माताओं-बहनों, वरिष्ठजनों, युवाओं एवं बच्चों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

नंदा देवी महोत्सव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपराओं का उत्सवरू मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव केवल एक मेला नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का उत्सव है। माँ नंदा-सुनंदा के स्वागत की परंपरा, लोकगीत, झोड़ा-चांचरी, ढोल-दमाऊं सहित लोक संस्कृति की विविध परंपराएं इस महोत्सव के माध्यम से जीवंत होती हैं। जिस समाज को अपनी जड़ों और संस्कृति पर गर्व होता है, वही समाज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि नैनीताल अपनी खूबसूरत झील, पहाड़ों और हरी-भरी वादियों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन यह केवल पर्यटन नगरी ही नहीं, बल्कि आस्था और अध्यात्म की भी भूमि है। यहां माँ नैना देवी का पावन धाम, हनुमानगढ़ी तथा कैंची धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। मुक्तेश्वर में देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। प्रकृति और अध्यात्म का यह संगम नैनीताल को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।

“ विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देश में प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संवारने का कार्य किया जा रहा है। अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक तथा केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में हुए विकास कार्यों से आस्था के प्रमुख केंद्रों को नई पहचान मिली है। इसी भावना के साथ उत्तराखंड सरकार भी “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ देवभूमि को आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने कहा कि केदारखंड की तर्ज पर कुमाऊं क्षेत्र में भी मानसखंड मंदिर माला मिशन के माध्यम से प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक स्थलों को विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही हमारी प्राचीन विरासत के मूल स्वरूप को संरक्षित रखना है। माँ नैना देवी, कैंची धाम और मुक्तेश्वर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।

धार्मिक पर्यटन से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, मातृशक्ति को स्वरोजगार के लिए बेहतर अवसर प्राप्त होंगे और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिलेगा। इससे उत्तराखंड की संस्कृति एवं परंपराएं देश-दुनिया तक पहुंचेंगी।

उन्होंने कहा कि नैनीताल जनपद के समग्र विकास के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पर्यटन और कनेक्टिविटी सहित आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि पहाड़ में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े और विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचे।

देवभूमि की भूमि, संस्कृति और पहचान की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध सरकार

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विकास के साथ देवभूमि की जमीन, संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य में भूमि संबंधी कानूनों को मजबूत किया गया है। वर्ष 2025 में किए गए संशोधन के तहत 11 पर्वतीय जिलों में बाहरी राज्यों के लोगों द्वारा कृषि एवं उद्यान श्रेणी की भूमि खरीद पर रोक का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार देवभूमि की संस्कृति, पहचान और संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा लैंड जिहाद और लव जिहाद जैसी गतिविधियों के विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।

समान नागरिक संहिता से महिलाओं के अधिकार हुए मजबूत

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की गई है। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता 27 जनवरी 2025 से प्रभावी है।

35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में मिला अवसर

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिससे मेहनत करने वाले युवाओं के हित सुरक्षित रहें।

उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में रोजगार का अवसर मिला है। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने उपस्थित जनसमूह से संवाद करते हुए पूछा कि पिछले पांच वर्षों में कितने युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं, जिस पर जनसमूह ने “35 हजार” का उत्तर दिया।

मातृशक्ति के उत्पादों को मिलेगा बेहतर बाजार
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की माताओं और बहनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। स्वयं सहायता समूहों, एकल महिला स्वरोजगार तथा अन्य माध्यमों से स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं को उनके उत्पादों की बिक्री के लिए उचित स्थान और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को ऐसे केंद्र उपलब्ध कराए जाएंगे, जहां वे अपने उत्पादों को उचित मूल्य पर बेच सकें। इससे मातृशक्ति को अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को उचित बाजार और उचित मूल्य मिलने से महिलाओं की आय बढ़ेगी तथा वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

माँ नंदा-सुनंदा की आरती में शामिल हुए मुख्यमंत्री
महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी माँ नंदा-सुनंदा की आरती में भी शामिल हुए। उन्होंने विधिवत आरती कर माँ नंदा-सुनंदा का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा प्रदेशवासियों की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिलें, मातृशक्ति सशक्त बने, हमारी संस्कृति एवं विरासत सुरक्षित रहे और उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों को छुए।

उन्होंने माँ नंदा-सुनंदा से प्रदेशवासियों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि माँ की कृपा उत्तराखंड पर सदैव बनी रहे और देवभूमि निरंतर खुशहाल एवं समृद्ध बने। उन्होंने महोत्सव के भव्य आयोजन के लिए सभी आयोजकों एवं इससे जुड़े लोगों को बधाई देते हुए प्रदेशवासियों को माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव की शुभकामनाएं दीं।

विभाग अपने अच्छे प्रयासों और उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी साझा करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर विभिन्न विभागों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने ई-ऑफिस की क्षेत्र में विभागों की प्रगति, उत्तराखंड गवर्नमेंट एसेट्स मॉनिटरिंग सिस्टम, सिंगल यूज प्लास्टिक एवं सभी विभागों से संबंधित पेंशन एवं अन्य प्रकरणों की समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने सर्वप्रथम ई-ऑफिस का राज्य एवं जनपद स्तरीय क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागीय सचिवों को ई-ऑफिस शतप्रतिशत लागू किये जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन विभागों में प्रगति अपेक्षाकृत कम है अथवा फाइल मूवमेंट की स्थिति संतोषजनक नहीं है, वहां नियमित समीक्षा करते हुए सुधार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विभागों द्वारा समय-समय पर किए जा रहे अच्छे कार्यों और नवाचारों को सचिव समिति की बैठकों में साझा किया जाए, ताकि ऐसे प्रयासों को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सके। विभाग अपने अच्छे प्रयासों और उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी मुख्य सचिव कार्यालय के साथ भी साझा की जाए।

दो माह में सभी सरकारी परिसंपत्तियों की पोर्टल पर मैपिंग के दिए निर्देश

मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड गवर्नमेंट एसेट्स मॉनिटरिंग सिस्टम के अंतर्गत सभी सरकारी परिसंपत्तियों की अनिवार्य रूप से मैपिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगले दो माह में सभी सरकारी परिसंपत्तियों को पोर्टल पर अपलोड किया जाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सरकारी परिसंपत्ति को पोर्टल पर मैपिंग और जियोफेंसिंग किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सम्बन्धित विभागों के सचिव, विभागाध्यक्ष, जिलाधिकारी तथा जनपद स्तरीय विभागों को सिस्टम पर ऑनबोर्ड करने एवं परिसंपत्तियों से सम्बन्धित आवश्यक अलर्ट जनरेट होने की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर प्रत्येक अतिक्रमण की स्थिति में समय पर अलर्ट जनरेट होना चाहिए, ताकि सम्बन्धित विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। सभी विभागीय सचिव साप्ताहिक आधार पर इसकी समीक्षा और मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित समयावधि में परिसंपत्तियों की मैपिंग एवं अपलोडिंग पूर्ण कराएं।

सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को हतोत्साहित करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को हतोत्साहित करने के लिए गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए नामित अधिकारी नियमित रूप से कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जाए। उन्होंने सम्बन्धित विभाग को सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रभावी नियंत्रण के लिए ड्राफ्ट पॉलिसी शीघ्र तैयार कर लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल अभियान तक सीमित न रहते हुए नियमित रूप से कार्रवाई और मॉनिटरिंग की जाए।

सेवानिवृत्त शिक्षकों को समय पर पेंशन एवं ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित करें

मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग सहित सभी छोटे – बड़े विभागों में सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों की पेंशन एवं ग्रेच्युटी से सम्बन्धित प्रकरणों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रभावी मैकेनिज्म तैयार किया जाए, जिससे सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद पेंशन शुरू होने के साथ ही ससमय ग्रेच्युटी का भुगतान भी सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बड़े विभागों में पेंशन सम्बन्धी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी ग्रीवेंस रिड्रेसल मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के लंबित पेंशन प्रकरणों के समाधान के लिए विशेष कैंप आयोजित करने को कहा।

मुख्य सचिव ने सेवानिवृत्त कार्मिकों के मेडिकल रीइंबर्समेंट से सम्बन्धित प्रक्रिया को भी सरल बनाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्मिक जिस जनपद से सेवानिवृत्त होता है, उसी जनपद के डीडीओ के माध्यम से सेवानिवृत्त कार्मिक के मेडिकल बिलों के अनुमोदन की वर्तमान में प्रक्रिया है, उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कि सेवानिवृत्त होने के उपरांत कार्मिक जिस जनपद में वर्तमान में निवास कर रहा है, वहां के डीडीओ के माध्यम से मेडिकल बिलों के अनुमोदन किया जा सके।

राहत राशि के भुगतान में न हो देरी, प्रभावित परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा एवं पुनर्वास से भी जोड़ेंः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की बैठक केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित न रहे। यह सुनिश्चित किया जाए कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और उसका अधिकार मिले। इसके लिए मामलों की नियमित समीक्षा के साथ पूरी व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और प्रभावी बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 से अब तक अधिनियम के अंतर्गत दर्ज जिन मामलों में विवेचना लंबित है, उनके लंबित रहने के कारणों की समीक्षा करते हुए प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। लंबे समय से लंबित एवं गंभीर प्रकृति के मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से प्रभावी कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की भी नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए आवश्यकता के अनुसार विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में राहत देने में विलंब हुआ है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की सहायता केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार उन्हें चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य पात्र सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए। गंभीर एवं संवेदनशील मामलों में पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी घटना के कारण प्रभावित परिवार के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो तथा पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति एवं अन्य शैक्षिक सहायता योजनाओं से जोड़ा जाए। प्रभावित परिवारों की काउंसलिंग, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा तथा सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास की व्यवस्थाओं पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में अधिनियम से संबंधित मामलों की नियमित निगरानी के लिए वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों, संवेदनशील मामलों की विवेचना और पीड़ितों के साथ व्यवहार के संबंध में नियमित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। समाज कल्याण, पुलिस एवं अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से समय-समय पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित करें। मुख्यमंत्री ने मामलों की विवेचना, न्यायालयीन स्थिति, राहत राशि और अन्य सहायता की शासन स्तर से प्रभावी निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मामलों के निस्तारण, विवेचना अथवा राहत वितरण में अपेक्षित प्रगति नहीं है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। अच्छा कार्य करने वाले जिलों की प्रभावी व्यवस्थाओं को अन्य जिलों के साथ साझा किया जाए।

मुख्यमंत्री ने ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अधिनियम के प्रावधानों, कानूनी अधिकारों और पीड़ितों को मिलने वाली सहायता के संबंध में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा। यदि किसी जिले या विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन, प्रशिक्षण अथवा बजट की आवश्यकता है तो उसका प्रस्ताव शासन को शीघ्र उपलब्ध कराया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय केवल कार्यवृत्त तक सीमित न रहें। प्रत्येक निर्णय के लिए जिम्मेदारी और समय-सीमा निर्धारित करते हुए उनकी नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित को न्याय और सहायता के लिए भटकना न पड़े तथा शासन-प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ उसके साथ खड़ा दिखाई दे, यह सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में अधिनियम के तहत 189 और वर्ष 2025 में 157 अभियोग पंजीकृत हुए। वर्ष 2026 में 15 सितम्बर तक 116 अभियोग पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 25 प्रकरण विवेचनाधीन हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, वर्ष 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितम्बर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। मुख्य सचिव और जनपद स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बैठकों का नियमित आयोजन किया गया।

बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विधायक ममता राकेश, सचिव गृह शैलेश बगौली, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अद्दांकी, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरू, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी.अशुमन, आईजी बरिंदरजीत सिंह, निदेशक समाज कल्याण संजय कुमार, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी का सख्त एक्शन जारी, जन स्वास्थ्य की अनदेखी पर नपे छह इंजीनियर

देहरादून। उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के संकल्प को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का एक्शन जारी है। आज जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले अफसरों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया गया है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति और अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने पर उत्तराखण्ड जल संस्थान और पेयजल निगम के छह वरिष्ठ और कनिष्ठ इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। राज्य में जन स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी मामले में पहली बार इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया है। एक दिन पूर्व ही सीएम धामी ने छम्म्ज् न्ळ 2026 की राज्य केंद्रीयकृत काउंसिलिंग के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लेने के मामले में सख्त एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब तक इस मामले में शामिल आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं और उनकी प्रवेश प्रक्रिया भी रद्द कर दी गई है।

जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड होने की शिकायत मिली तो मुख्यमंत्री ने शीर्ष अधिकारियों को पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषी अफसरों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई अमल में लाने का आदेश दिया। इसी क्रम में जिला प्रशासन नैनीताल की रिपोर्ट के आधार पर अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने पर छह अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है। इनमें
जल संस्थान हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के सहायक अभियंता, अपर सहायक अभियंता तथा पेयजल निगम भीमताल के अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता तथा कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं। नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को भविष्य में कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

कोट —
जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। हमारी सरकार के लिए जनहित सर्वाेपरि है और जो भी अधिकारी या कर्मचारी जनता के हितों की अनदेखी करेगा, उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। सभी विभागाध्यक्षों और शीर्ष अधिकारियों को इस संबंध में बार-बार निर्देशित भी किया गया है।
पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

मुख्यमंत्री ने मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष सड़क, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, पेंशन, रोजगार, आर्थिक सहायता तथा विभिन्न क्षेत्रीय एवं व्यक्तिगत समस्याओं से संबंधित प्रकरण रखे।

मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को उनका त्वरित, प्रभावी एवं समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का समाधान जिला अथवा विभागीय स्तर पर हो सकता है, उनका अनावश्यक रूप से शासन स्तर पर लंबित रहना उचित नहीं है। अधिकारी अपने स्तर पर जनसमस्याओं का प्राथमिकता से निस्तारण सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसमस्याओं का समाधान राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में है। शासन-प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि लोगों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और नियमानुसार उनका यथाशीघ्र समाधान किया जाए। आमजन को अपने कार्यों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि जन शिकायतों के समाधान के लिए राज्य सरकार द्वारा सीएम हेल्पलाइन-1905, जनसुनवाई और ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी बनाया जा रहा है। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ के माध्यम से शासन-प्रशासन स्वयं जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं के समाधान के साथ ही पात्र लोगों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं से जोड़ रहा है। पूर्व में आयोजित शिविरों में भी विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों के निस्तारण के साथ लोगों को योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 सितम्बर से प्रारंभ सेवा संकल्प अभियान प्रदेश में 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत सेवा, जनभागीदारी, संवाद और नवाचार से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ‘सेवा सेतु अभियान’ के तहत ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ के शिविरों के साथ स्वास्थ्य एवं बहुउद्देशीय शिविरों का भी आयोजन किया जाएगा, जिनके माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं और सेवाओं को आमजन तक पहुंचाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक प्रकरण पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए। शिकायतों के निस्तारण की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि समाधान केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित व्यक्ति को वास्तविक रूप से राहत मिले। उन्होंने कहा कि शासन, जिला प्रशासन और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से जनसमस्याओं का समाधान और अधिक प्रभावी बनाया जाए। जनहित से जुड़े प्रकरणों में संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए लोगों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।

इस दौरान मुख्यमंत्री से ‘9वीं हीरोज अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चौंपियनशिप-2026’ में पदक जीतने वाले उत्तराखण्ड के खिलाड़ियों ने भी भेंट की। यह प्रतियोगिता 31 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक पटाया, चोनबुरी, थाईलैंड में आयोजित हुई थी। प्रतियोगिता में उत्तराखण्ड के मन्नू सोनकर, शिवानी दाबसा, मोहम्मद जकी और मुकुल ने स्वर्ण पदक, जबकि मेघा शर्मा और धनंजय धारीवाल ने कांस्य पदक प्राप्त किया। मुख्यमंत्री ने सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप, अपर सचिव जे.सी. कांडपाल, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान, एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोभाल एवं मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी उपस्थित थे।

मजबूत एम-पैक्स से गांव मजबूत होंगे और मजबूत गांवों से समृद्ध उत्तराखण्ड बनेगाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में सहकार भारती उत्तराखण्ड द्वारा आयोजित श्री लक्ष्मणराव इनामदार द्वितीय सहकारिता नेतृत्व प्रशिक्षण वर्ग के शुभारंभ सत्र को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने सहकार भारती के संस्थापक लक्ष्मणराव इनामदार की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि सहकारिता को सशक्त बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व से एम-पैक्स मजबूत होंगे, मजबूत एम-पैक्स से गांव मजबूत होंगे और मजबूत गांवों से उत्तराखण्ड समृद्ध बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंतनगर की ज्ञानभूमि से सहकारिता को नई दिशा देने वाली अनेक महत्वपूर्ण पहल प्रारंभ की गई हैं। सहकार ग्रंथ के लोकार्पण, देवभूमि सारथी राज्य सहकारी संघ की पहल, सहकारिता के क्षेत्र में नए पाठ्यक्रम की शुरुआत, युवाओं को सहकारिता से जोड़ने के लिए सोशल मीडिया रील्स अभियान तथा एम-पैक्स नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ से सहकारिता के क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने इन पहलों के लिए सहकारिता विभाग, पंतनगर विश्वविद्यालय और सहकार भारती को शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य देवभूमि उत्तराखण्ड को ‘सहकार से समृद्धि’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाना है। पर्वतीय राज्य उत्तराखण्ड में सहकारिता अनेक चुनौतियों के समाधान का प्रभावी माध्यम बन सकती है। पलायन को रोकने, पर्वतीय कृषि को मजबूत करने, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि पैक्स राज्य की सहकारिता व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप इन्हें एम-पैक्स के रूप में और अधिक सक्षम एवं प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य सरकार एम-पैक्स के माध्यम से किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने और ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एम-पैक्स को प्रभावी बनाने के लिए कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व आवश्यक है। इसी उद्देश्य से नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। प्रशिक्षण केवल जानकारी बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि नेतृत्व को नई सोच, कार्यदृष्टि और दिशा प्रदान करने का भी सशक्त माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान, युवा और मातृशक्ति सभी को सहकारिता से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार सहकारिता को केवल समितियों तक सीमित रखने के बजाय इसे जनभागीदारी और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रयास है कि सहकारिता का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और प्रत्येक व्यक्ति विकास की प्रक्रिया में सहभागी बने।

मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रहे प्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में सहकारिता की भावना को और अधिक मजबूत करने तथा अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहकारिता को जन-जन की शक्ति बनाकर गांवों को सशक्त करने, युवाओं को अवसर प्रदान करने और किसानों की आर्थिक शक्ति बढ़ाने की दिशा में सभी को मिलकर कार्य करना होगा।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, कुलपति गोविन्द बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर शिवेन्द्र कुमार कश्यप, सहकार भारती संघ से राष्ट्रीय महासचिव दीपक चौरसिया, प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार गौड़, संगठन मंत्री मणिराम नौटियाल, प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर कुमार जोशी सहित डॉ. बृजेश, डॉ. दिनेश कुमार सिंह वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।

धामी सरकार की दूरगामी सोच, 51 रोपवे के साथ 160 किमी लंबा नेटवर्क की तैयारी

देहरादून। उत्तराखण्ड को देश का रोपवे हब बनाने की बड़ी तैयारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रोपवे परियोजनाओं को धरातल पर उतारने का काम तेज कर दिया गया है। राज्य और केंद्र सरकार की साझेदारी में प्रदेश में लगभग 160 किमी लंबाई के 51 रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं।

सुगम, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन कनेक्टिविटी का विकास मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संकल्प है। इस संकल्प को साकार करने के लिए प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई सेवाओ के साथ ही अब रोपवे कनेक्टिविटी को रफ्तार दी जा रही है। प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे बेहतर वैकल्पिक परिवहन साधन है। इससे जहां धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहुंच आसान होगी, वहीं तीर्थाटन, पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्थाओं को आगामी 09 नवंबर तक रोपवे परियोजनाओं के कार्य धरातल पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सीएम के कड़े रुख को देखते हुए अब परियोजनाओं का काम रफ्तार पकड़ रहा है।

क्यों जरूरी हैं रोपवे परियोजनाएं
उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते वर्ष 2025 में 06 करोड़ 03 लाख से अधिक पर्यटक/तीर्थयात्री यहां पहुंचे हैं। इसको देखते हुए सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था जरूरी है। जिस प्रकार से सड़कों पर यातायात के दबाव के साथ वाहन प्रदूषण बढ़ रहा है, उसका बेहतर विकल्प रोपवे व्यवस्था बन सकती है। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, जहां सड़क का निर्माण नहीं किया जा सका है, उन क्षेत्रों की मुश्किलें भी रोपवे बनने से कम होंगी।

इन एजेंसियों के जिम्मे हैं रोपवे परियोजनाएं
राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल), उत्तराखण्ड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन, शहरी स्थापना एवं भवन निर्माण निगम व पर्यटन विभाग।

प्राथमिकता में छह परियोजनाएं
-सोनप्रयाग-केदारनाथ (रुद्रप्रयाग)
-गोविंदघाट- हेमकुंड साहिब (चमोली)
-रानीबाग-हनुमानगढ़ी-कैची धाम (नैनीताल)
-कनकचौरी-कार्तिक स्वामी (रुद्रप्रयाग)
-जोशीमठ-औली-गोरसों (चमोली)
-रैथल-दयारा बुग्याल (उत्तरकाशी)

मसूरी रोपवे का काम प्रगति पर
देहरादून जिले में पुरुकुल गांव से लाइब्रेरी मसूरी तक लगभग 5.2 किमी लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस रोपवे के बनने से देहरादून से मसूरी तक का एक से डेढ़ घंटे का सफर 15 से 20 मिनट में पूरा हो सकेगा।

जानकी चट्टी (खरसाली)-यमुनोत्री रोपवे
इस रोपवे के बनने से श्रद्धालुओं को जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक की करीब पांच किलोमीटर की खड़ी पैदल चढ़ाई से राहत मिल जाएगी।

ठुलीगाड़-पूर्णागिरि रोपवे
उत्तर भारत का प्रमुख सिद्धपीठ है चंपावत जिले में स्थित पूर्णागिरि धाम। यहां भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष 01 अप्रैल से 19 सितंबर तक 24 लाख 62 हजार 319 श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। यह यात्रा भी कठिन पहाड़ी मार्ग से गुजरती है। रोपवे बनने से यात्रियों को राहत मिलेगी।

फिजिबिलिटी स्टडी के लिए उत्तराखण्ड मैट्रो को हस्तांतरित रोपवे परियोजनाएं

जनपद अल्मोड़ा
रानीखेत-चौबटिया (4 किमी)।
कसारदेवी-अल्मोड़ा (2.76 किमी)।
अल्मोड़ा-द्वाराहाट दूनागिरी मोटर मार्ग 14 किमी (हनुमान मंदिर)-दूनागिरी मंदिर (.63 किमी)।
द्वाराहाट-कुकुछीना-पाण्डुखोली (1.9 किमी)।
चौखुटिया-तरगताल-कुकुछीना (1.9 किमी)।
चौघानपाटा-बेस अस्पताल (1.5 किमी)
बेस अस्पताल से नवीन कलक्ट्रेट (1.35 किमी)।

जनपद नैनीताल
नवगढ़ क्लब तल्लीताल बाजार से गंगनाथ मंदिर के नीचे (01 किमी)।

जनपद देहरादून
ई एस आई डिस्पेंसरी, कैमल बैक रोड से लाल टिब्बा मसूरी (2.5 किमी)।

-ई एस आई डिस्पेंसरी, कैमल बैक रोड से जॉर्ज एवरेस्ट मसूरी (4.1 किमी)।

-भनोट एस्टेट, कैमल बैक रोड से कैम्पटी फॉल, मसूरी (4.4 किमी)।

-मल्टी लेवल पार्किंग से चिक चॉकलेट मसूरी, (0.23 किमी)।

-जॉर्ज एवरेस्ट हाउस से भद्राज मंदिर, मसूरी (7.4 किमी)।

-टपकेश्वर महादेव मंदिर से गुच्चूपानी रॉबर्स केव (4.5 किमी)।

-गुच्चूपानी से पैसिफिक मॉल (1.5 किमी)।

-पैसिफिक मॉल से पैसिफिक गोल्फ (3.7किमी)।

-पैसिफिक मॉल से पुरुकुल (4.4 किमी)।
-पैसिफिक गोल्फ से सहस्त्रधारा (1.5 किमी)

-रायपुर से मालदेवता (4.6 किमी)।

-मालदेवता से धनोल्टी (15 किमी)।

नीलकंठ और हरिद्वार रोपवे पर फोकस रू डॉ राजेश
सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार के मुताबिक सबसे पहले ऋषिकेश त्रिवेणी घाट से पौड़ी जनपद में स्थित नीलकंठ मंदिर और हरिद्वार के इंटीग्रेटेड रोपवे पर फोकस किया जा रहा है। नीलकंठ रोपवे की लंबाई छह किमी होगी। पहले चरण में 4.1 किलोमीटर लंबा रोपवे त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक बनाया जा रहा है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर ऋषिकेश में यातायात का दबाव काफी कम हो सकेगा। चंडी देवी-मंसादेवी रोपवे परियोजना के तहत मौजूदा अलाइनमेंट के अतिरिक्त दो समानांतर नए अलाइनमेंट विकसित किए जा रहे हैं।

उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे कनेक्टिविटी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल धार्मिक और पर्यटन स्थलों की पहुँच आसान होगी बल्कि सड़कों पर यातायात का दबाव कम होने के साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा भी हो सकेगी। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

भारतीय सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग एवं समन्वय को मजबूत करता देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 संपन्न

श्री बदरीनाथ धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में भारतीय सेना एवं जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित दो दिवसीय ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ का समापन हुआ। ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थीम पर आयोजित महोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेता एवं उपविजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने इससे पहले बामणी गांव पहुंचकर नंदा अष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित उत्सव में ग्रामीणों के साथ प्रतिभाग किया। उन्होंने ग्रामीणों को नंदा अष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए देवभूमि की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने महोत्सव परिसर में लगाए गए स्थानीय उत्पादों, महिला स्वयं सहायता समूहों, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजनों एवं अन्य प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों एवं पहाड़ी व्यंजनों की जानकारी ली और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने से सीमांत क्षेत्रों में आजीविका और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने भारतीय सेना द्वारा लगाई गई सैन्य प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया तथा अत्याधुनिक हथियारों एवं सैन्य उपकरणों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी युवाओं को भारतीय सेना की कार्यप्रणाली से परिचित कराने के साथ ही उनमें राष्ट्र सेवा और देशभक्ति की भावना को और मजबूत करने का माध्यम है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समारोह को संबोधित करते हुए भगवान बदरीविशाल की पावन धरा पर आयोजित इस सांस्कृतिक महोत्सव में सेना के वीर जवानों, अधिकारियों, स्थानीय नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों, कलाकारों एवं श्रद्धालुओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की आत्मा उसकी लोक संस्कृति में बसती है। हमारे लोक नृत्य, लोक गीत, परंपराएं एवं रीति-रिवाज हमारी विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने के साथ ही सीमांत क्षेत्रों के युवाओं को भारतीय सेना में सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूल मंत्र के साथ राज्य सरकार संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण के साथ विकास कार्यों को गति दे रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में श्री बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान के तहत तेजी से कार्य किया जा रहा है। कठिन भौगोलिक एवं मौसमी परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विकास कार्यों को समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन एवं आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। माणा, नीति और जादुंग जैसे सीमांत क्षेत्रों को पर्यटन एवं आजीविका से जोड़ते हुए स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीमांत क्षेत्रों से पलायन रोकना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, होम स्टे, कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, सुगंधित पौधों एवं स्थानीय मसालों की खेती के साथ-साथ शीतकालीन पर्यटन, साहसिक पर्यटन और ‘वेडिंग इन उत्तराखण्ड’ जैसी पहलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 3.10 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों, पहाड़ी व्यंजनों एवं हस्तशिल्प के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना एवं स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग, समन्वय और आपसी जुड़ाव को मजबूत करने में इस प्रकार के आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने महोत्सव में माणा गांव के ग्रामीणों द्वारा दी गई पारंपरिक प्रस्तुति की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पर्यटन, आयुष, वेलनेस, आईटी एवं सौर ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया की रैंकिंग में उत्तराखण्ड को ‘लीडर्स’ श्रेणी प्राप्त हुई है तथा नीति आयोग के ैक्ळ इंडेक्स में उत्तराखण्ड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि विकास की यात्रा में अपनी संस्कृति और जड़ों को साथ लेकर आगे बढ़ना आवश्यक है। लोक भाषाओं, लोक गीतों, लोक नृत्यों, पारंपरिक वेशभूषा, मेलों एवं पर्वों का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 के सफल आयोजन के लिए भारतीय सेना, जिला प्रशासन चमोली एवं सभी आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने भगवान बदरीविशाल से सभी के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।

इस अवसर पर जीओसी-इन-सी सेंट्रल कमान लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जीओसी उत्तर भारत एरिया लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा, दर्जा मंत्री हरक सिंह, ब्रिगेडियर गौरव बत्रा, माधव प्रसाद सेमवाल सहित भारतीय सेना के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक, युवा, विद्यार्थी एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथि उपस्थित रहे।

भगवान बदरीविशाल से प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने बदरीनाथ मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने आस्था पथ सहित अन्य निर्माणाधीन कार्यों का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों से कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ ही धाम की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पारंपरिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में श्री बदरीनाथ धाम को उसके धार्मिक एवं पौराणिक महत्व के अनुरूप भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। मास्टर प्लान के अंतर्गत विकसित की जा रही सुविधाओं से धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में धाम की पारंपरिक पहचान, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक स्वरूप के संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्री स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट संस्थान के तत्वावधान में आयोजित ‘बदरीनाथ धाम कथा महोत्सव’ में प्रतिभाग किया। महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 150 से अधिक संत-साध्वी तथा 1200 से अधिक हरिभक्त शामिल हुए। इस अवसर पर श्री स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट संस्थान के पूज्यपाद महंत स्वामी श्री देवप्रसाददास स्वामी, पूज्यपाद सद्गुरुवर्य धर्मवल्लभदास स्वामी सहित बड़ी संख्या में संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम आना अपने आप में एक विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभूति है। भगवान बदरीविशाल की कृपा और आशीर्वाद से इस पावन धाम में संतों एवं श्रद्धालुओं के बीच आयोजित कथा महोत्सव में सहभागी होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि श्री बदरीनाथ धाम भारत की सनातन चेतना और आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र है। भारतीय शास्त्रों में भी इस पवित्र धाम की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है। यह भूमि सदियों से तप, साधना और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्राचीन विरासत, सनातन संस्कृति और आस्था के केंद्रों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड के प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार के साथ ही उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाबा केदार की भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का दशक बताया था। राज्य सरकार इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उत्तराखण्ड को प्रकृति ने अनुपम सौंदर्य के साथ ही अद्वितीय आध्यात्मिक संपदा भी प्रदान की है। चारधाम, पवित्र गंगा-यमुना, हिमालय और हेमकुंड साहिब सहित अनेक धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल देवभूमि की विशिष्ट पहचान हैं। सरकार का प्रयास है कि इन तीर्थस्थलों का विकास श्रद्धालुओं की सुविधा के अनुरूप सुव्यवस्थित तरीके से हो और उनकी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा भी अक्षुण्ण रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन समाज और राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरणादायी रहा है। इस प्रकार के आध्यात्मिक आयोजनों से हमारी सनातन परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित संतों एवं श्रद्धालुओं का आभार भी व्यक्त किया।

इस अवसर पर राज्य मंत्री हरक सिंह, माधव प्रसाद सेमवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह बर्त्वाल, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह रावत, भाजपा जिला महामंत्री विनोद कनवासी, अरुण मैठाणी, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

उत्तराखंडः फर्जी प्रमाणपत्र मामले में सीएम पुष्कर सिंह धामी का सख्त एक्शन

नीट यू०जी० 2026 की उत्तराखण्ड राज्य केन्द्रीयकृत काउन्सिलिंग के दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लिए जाने की शिकायत पर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस तरह के प्रकरण में शामिल सभी 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं। साथ ही, मुख्यमंत्री ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए, सभी तरह की आरक्षित श्रेणी का लाभ लेने वाले प्रमाणपत्रों की जांच करने का निर्णय लिया है। इन प्रमाण पत्रों की जाँच/सत्यापन के बाद फर्जी प्रमाण पत्र पाये जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं।

नीट यू०जी० 2026 की उत्तराखण्ड राज्य केन्द्रीयकृत काउन्सिलिंग में फर्जी प्रमाणपत्र की शुरुआती शिकायत के बाद से ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को इस मामले में दूध का दूध, पानी का पानी करने के निर्देश दिए थे।ताकि फर्जी तथ्यों के आधार पर यही यदि किसी ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर अनुचित लाभ लिया है तो उनके खिलाफ और इसको जारी करने की प्रक्रिया में शामिल सर्जरी कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा सके।इसी क्रम में जिला प्रशासन के स्तर से हुई जांच के बाद अब तक कुल 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त करते हुए, उनकी प्रवेश प्रक्रिया भी निरस्त की जा चुकी है। इस बीच कुछ और छात्रों द्वारा अलग -अलग आरक्षित श्रेणियों में कूटरचित प्रमाणपत्रों का प्रयोग किए जाने की आशंका को देखते हुए, इसकी जिला प्रशासन के स्तर पर जांच चल रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो टूक कहा है कि यदि किसी अभ्यर्थी का प्रमाणपत्र कूटरचित पाया जाता है तो, ना सिर्फ प्रमाणपत्र को निरस्त किया जाएगा, साथ ही दोषियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

नकल पर रोक के बाद नकली प्रमाणपत्रों पर सख्ती
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इससे पहले सख्त नकल विरोधी कानून के जरिए भर्ती परीक्षाओं में नकल के चोर दरवाजों को हमेशा के लिए बंद कर चुकी है। इसके बाद प्रदेश में भर्ती परीक्षा पारदर्शी तरीके से सम्पन्न हो रही हैं, इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने अब फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश का लाभ लेने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी स्तर पर योग्य अभ्यर्थियों का अहित नहीं होने देगी।

फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए प्रवेश का अपराध भी नकल जितना ही संगीन है। इसलिए प्रकरण संज्ञान में आते ही हमने अधिकारियों को इस मामले में पारदर्शी जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद अब तक जांच में फर्जी प्रमाणित हो चुके प्रमाणपत्रों का निरस्त किया जा चुका है, जांच का दायरा बढ़ाते हुए, अब सभी श्रेणी के प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड