लगभग समूचे देश के सरकारी स्कूलों में लगातार गिरते जा रहे शिक्षा के स्तर और खराब परिणामों के कारण इनमें बच्चों के दाखिलों का आंकड़ा लगातार गिरता जा रहा है और अभिभावक अपने बच्चों को शिक्षा दिलवाने के लिए सरकारी स्कूलों से मुंह मोड़ कर महंगी फीस के बावजूद प्राइवेट स्कूलों को ही प्राथमिकता देने लगे हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर किस कदर गिर चुका है यह कुछ राज्यों के ताजा घोषित नतीजों से स्पष्ट है।
09 मई को घोषित हिमाचल का 10वीं का नतीजा 67.57 प्रतिशत रहा। 20 मई को घोषित हरियाणा का 10वीं का परिणाम 55 प्रतिशत रहा। 22 मई को घोषित पंजाब का 10वीं का परिणाम 57.50 प्रतिशत रहा। 30 मई को घोषित झारखंड का 10वीं का परिणाम 57.91 प्रतिशत रहा जो वहां 10वीं का अब तक का सबसे खराब नतीजा है। झारखंड का 12वीं का नतीजा 52.36 प्रतिशत रहा। 30 मई को ही घोषित बिहार स्कूल शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कक्षा की परीक्षा का परिणाम तो उक्त सभी परिणामों की तुलना में घोर निराशाजनक रहा। इस परीक्षा की सभी श्रेणियों में 65 प्रतिशत छात्र-छात्राएं फेल हो गए तथा सिर्फ 35 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को ही सफलता मिल पाई। ये सभी परिणाम देश के 2 दक्षिणी राज्यों केरल के 98.5 प्रतिशत व तमिलनाडु के 94.8 प्रतिशत के पिछले वर्ष के परिणाम के सामने कहीं ठहरते ही नहीं।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 12वीं कक्षा की बिहार स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा ली जाने वाली परीक्षा में ‘नकल का महाघोटाला’ हुआ था तथा 67.66 प्रतिशत छात्र पास घोषित किए गए थे तब सिरे से नालायक छात्रों को परीक्षा में टॉपर घोषित कर दिया गया था। इस घोटाले का पर्दाफाश उस समय हुआ था जब टॉपर घोषित छात्रा रूबी राय टी.वी. इंटरव्यूज में साधारण से प्रश्रों के भी सही उत्तर न दे पाई।
जिसके चलते कोहराम मचने के बाद शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ललकेश्वर प्रसाद सिंह सहित अनेक उच्चाधिकारियों के विरुद्ध पुलिस में रपट दर्ज करवाई गई। ललकेश्वर सहित अनेक उच्चाधिकारियों और कुछ छात्रों की गिरफ्तारी भी हुई और टॉपर छात्रों के परिणाम रद्द किए गए। इस समय रूबी राय जमानत पर रिहा है तथा बिहार स्कूल शिक्षा बोर्ड के अनेक अधिकारी जेल में हैं ।
बोर्ड के नए अध्यक्ष आनंद प्रकाश के अनुसार पिछली परीक्षा में पक्षपात तथा अनियमितताओं के बोर्ड अधिकारियों पर लगे गम्भीर आरोपों के चलते इस बार उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में कठोरता बरतने तथा उत्तर पुस्तिकाओं की ‘बारकोड’ करने सेे हेराफेरी की गुंजाइश न रहने के कारण ‘मॉडरेशन’ के बावजूद पास प्रतिशत पिछली बार से 32 प्रतिशत कम रहा। बिहार के शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी के अनुसार, ‘‘खराब नतीजा बोर्ड द्वारा अतीत में होती रही अनियमितताओं का नतीजा है परंतु कुछ समय में शिक्षा ढांचे में सुधार के बाद शिक्षा के स्तर व परिणामों में भी सुधार दिखाई देगा।’’
सभी राज्यों में देश के अलग-अलग तीन मुख्य राजनीतिक दलों-कांग्रेस, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की सरकारें हैं जो स्पष्ट प्रमाण है कि बेशक इन तीनों दलों का राजनीतिक एजेंडा अलग-अलग है परंतु शिक्षा के प्रति उदासीनता के मामले में तीनों राज्यों की सरकारें लगभग एक जैसी हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए लम्बी छुट्टी लेकर विदेशों में बैठे अध्यापकों की सेवाएं तत्काल समाप्त करने तथा अध्यापकों द्वारा अपने स्थान पर रखे ‘प्रॉक्सी टीचरों’ को निकाल कर उनके स्थान पर नई भर्ती करने और दोषियों विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।
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केंद्र ने कहा- विमान हादसे में हुई थी नेताजी की मौत, परिवार ने कहा- मांगें माफी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत को लेकर तस्वीर अब साफ होती दिख रही है। एक आरटीआई आवेदन का जवाब देते हुए भारत सरकार ने बताया है कि नेताजी की मौत विमान हादसे में हुई थी। RTI में दिए गए जवाब से नेताजी का परिवार खुश नहीं है। नेताजी के पोते चंद्र कुमार बोस ने कहा कि यह काफी गैर जिम्मेदाराना है, केंद्र सरकार इस तरह का जवाब कैसे दे सकती है, जबकि मामला अभी भी सुलझा नहीं है।
यह आरटीआई सायक सेन नामक व्यक्ति ने दायर की थी, जिसके जवाब में गृह मंत्रालय ने अपना जवाब भेजा है। RTI के जवाब में साफ तौर पर कहा गया है कि नेताजी की मौत 18 अगस्त 1945 को हुई थी। जवाब में कहा गया है कि भारत सरकार की और से नेताजी की मौत से जुड़ी 37 फाइलें जारी की थी, जिसमें पेज नंबर 114-122 पर इसकी जानकारी दी गई है। इस जवाब में शाहनवाज कमेटी, जस्टिस जी.डी. खोसला कमीशन, और जस्टिस मुखर्जी कमीशन की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है।
माफी मांगे गृह मंत्रालय
चंद्र कुमार बोस ने कहा कि गृह मंत्रालय को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए, हम चाहते हैं कि इस मामले में SIT का गठन किया जाए, जो कि जारी की गई फाइलों का अध्ययन कर सके, इसके साथ ही हम चाहते हैं कि ताइवान में मिली अस्थियों का केंद्र सरकार DNA टेस्ट करवाए। मैं पहले बोस परिवार का सदस्य हूं और बाद में बीजेपी का नेता… मेरा पहला लक्ष्य उनकी मौत की गुत्थी को सुलझाना है।
आपको बता दें कि इससे पहले भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रहस्यमय तरीके से गायब होने की गुत्थी नहीं सुलझने से नाराज उनके परिजनों ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नेताजी के भाई के पोते एवं बीजेपी नेता चंद्र बोस ने बताया कि इस बाबत परिवार ने फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ इस सप्ताह आंदोलन शुरू किया जाएगा।
मोदी ने नेताजी से जुड़ी फाइलें की थी सार्वजनिक
पिछले एक साल में मोदी सरकार ने हर महीने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी 100 फाइलें जारी की। इसकी शुरुआत पिछले साल 23 जनवरी से हुई थी। अब ये सभी फाइलें सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं। 2015 में नेताजी के परिजनों से मिलने के बाद पीएम मोदी ने यह भी घोषणा की थी कि वह रूस सरकार से भी नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग करेंगे।
केन्द्र सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करेंः हाईकोर्ट
पशुओं की खरीद-फरोख्त के बारे में केन्द्र सरकार के नए नोटिफिकेशन पर मद्रास हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई चार सप्ताह की रोक के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। राजस्थान हाईकोर्ट के जज महेश चन्द्र शर्मा ने बुधवार को अपनी सेवानिवृति से पूर्व प्रदेश की बहुचर्चित हिंगोनिया गौशाला मामले में सुनवाई की।
जज शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि केन्द्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने में राज्य सरकार प्रयास करे। इसके साथ ही गोकशी करने वालों को आजीवन कारावास का प्रावधान कानून में शामिल कराया जाए। वहीं हिंगोनिया गौशाला में भ्रष्टाचार की जांच राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से कराई जाए। उन्होंने ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को प्रत्येक तीन माह में गौशाला को लेकर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश देने के साथ ही प्रदेश के स्वास्थ्य शासन सचिव एवं जयपुर नगर निगम आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को माह में एक बार गौशाला का दौरा करने के लिए भी कहा। जज शर्मा ने कहा कि राज्य के मुख्य सचिव और महाधिवक्ता को इस काम के लिए नियुक्त किया जाए कि वे केन्द्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराने के पक्ष में दलील रखें। हाईकोर्ट ने इस मामले में एक कमेटी गठित करने के भी निर्देश दिए।
उल्लेखनीय है कि जयपुर स्थित नगर निगम की हिंगोनिया गौशाला में चारे की खरीद सहित अन्य मामलों में अनियमितताओं को लेकर हाईकोर्ट में लम्बे समय से मामला चल रहा था। जस्टिस शर्मा इस मामले की सुनवाई कर रहे थे और बुधवार को सेवानिवृत होने से पूर्व इस मामले में फैसला भी सुनाया। हिंगोनिया गौशाला में करीब माह पूर्व करीब 100 गायों की मौत को लेकर भी विवाद हुआ था। ये गायें देखभाल के अभाव,भूख,प्यास और मिट्टी के साथ कीचड़ में फंसने से मरी थी।
350 करोड़ की घोषणाओं ने अयोध्या में दिए चुनाव के संकेत!
आस्था की नगरी अयोध्या में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ पहली बार गए तो उनके जाने के सियासी निहितार्थ निकाले जाने लगे हैं।
दरअसल, विवादित ढांचा विध्वंस के बाद अयोध्या जाकर रामलला का दर्शन करने वाले योगी दूसरे मुख्यमंत्री हैं। 15 वर्ष पहले 2002 में राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री रहते हुए रामलला के दर्शन किए थे। यह भी संयोग है कि जाने से एक दिन पहले योगी ने ढांचा विध्वंस के मामले में सीबीआई कोर्ट में पेश होने आए पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी समेत कई प्रमुख लोगों की लखनऊ में अगवानी की। मिशन 2019 में फिर प्रचंड बहुमत से मोदी की सरकार बनाने में जुटी भाजपा और राज्य सरकार के लिए अयोध्या भी एक माध्यम है। सरकार सिर्फ मंदिर मुद्दे पर ही नहीं बल्कि वहां के विकास को लेकर भी सक्रिय है।
योगी ने कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन के साथ ही राम की नगरी अयोध्या को भी नगर निगम का दर्जा देकर अयोध्या के विकास का संकेत दिया है। काशी के साथ ही पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से अयोध्या को जोड़ने का एलान भी इसकी एक कड़ी है। बुधवार को मुख्यमंत्री ने वहां न केवल कानून-व्यवस्था की समीक्षा की बल्कि विकास से जुड़ी करीब 350 करोड़ रुपये की योजनाओं की घोषणा भी अयोध्या के लिए की। जाहिर है कि सरकार, अयोध्या एजेंडे पर गंभीर है और इसे लेकर आगे भी बढ़ रही है।
गंगा की तर्ज पर सरयू आरती भी
योगी ने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र काशी की गंगा आरती की तर्ज पर सरयू आरती शुरू करने की बात करके पर्यटकों को आकर्षित किया है। योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अयोध्या जाने की पहली पृष्ठभूमि 21 अप्रैल को बनी थी। उस दिन मनिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास के जन्म महोत्सव में आमंत्रित करने के लिए उनके शिष्य कमल नयन दास यहां आए थे। आठ जून तक चलने वाले इस महोत्सव में जाने के लिए योगी ने उसी दिन हामी भर दी थी लेकिन, तब भी उन्होंने प्रतिनिधि मंडल से अयोध्या के विकास पर चर्चा की थी। योगी वहां गए तो विकास परक योजनाओं का प्रस्ताव भी उनके साथ था।
कहीं अयोध्या न बने चुनाव क्षेत्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शपथ लिए करीब ढाई माह बीतने को हैं। शपथ से छह माह में उन्हें विधान मंडल के किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। गोरखपुर से 1998 से ही जनता के बीच से चुने जाने वाले योगी के लिए यूं तो कई विधायक भी अपनी सीट खाली करने को तैयार हैं लेकिन, भगवान शंकर की नगरी काशी से प्रधानमंत्री की तरह ही राम की नगरी अयोध्या से मुख्यमंत्री के प्रतिनिधित्व की भूमिका भाजपा तैयार कर सकती है। योगी पहले से भी अयोध्या के संतों के बीच आते-जाते रहे हैं।
अच्छे रैंक की राह ने बनाया नंदिनी को टॉपर
देश के सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षा, यूपीएससी के नतीजे आ गए हैं। यूपीएससी की परीक्षा में इस बार कर्नाटक की नंदिनी के आर ने टॉप किया है। उनका इस बार ये चौथा प्रयास था, उन्होंने अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने मां-बाप को दिया हैं। बेंगलूरू में नंदिनी के माता-पिता भी इस खुशी से फूले नहीं समा रहे। जबसे पता चला है कि उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में टॉप किया है तबसे उनके घर में पड़ोसियों और रिश्तेदारों का मजमा लगा हुआ है। उनके पिता सरकारी हाई स्कूल में टीचर हैं और मां हाउसवाइफ हैं। नंदिनी का कहना है कि वे आज जो कुछ भी हैं अपने माता पिता की बदौलत हैं।
खराब रैंक के बावजूद पलता रहा आईएएस बनने का ख्वाब
नंदिनी का पूरा नाम नंदिनी कोलार राजेश है। उन्होंने इस बार देश के सबसे कठिन माने जानेवाली परीक्षा यानि की सिविल सर्विसेज के एग्जाम में टॉप किया है। जब से रिजल्ट आया है तब से उन्हें मिलने वाली बधाइयों का सिलसिला नहीं रुक रहा है। ओबीसी पृष्टभूमि से आनेवाली 26 साल की नंदिनी कर्नाटक की रहने वाली हैं। उन्होने पिछले साल भी परीक्षा पास की थी लेकिन पिछले साल उनकी रैंक 849वीं थी और वे इससे खुश नहीं थीं। वैसे तो उन्होंने दिल्ली से सटे फरीदाबाद में इंडियन रेवेन्यू सर्विस के लिए ट्रेनिंग तो शुरु कर दी थी लेकिन फिर भी उन्होंने आईएएस बनने का ख्वाब नहीं छोड़ा था।
नंदिनी ने 10वीं तक की पढ़ाई कर्नाटक के कोलार में की, इसके बाद उन्होंने मैंगलोर से 12वीं की पढ़ाई की, 12वीं के बाद उन्होंने बेंगलूरू से एमएस रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। पढ़ाई के बाद वे दो सालों तक कर्नाटक में पीडब्ल्यूडी इंजीनियर भी रहीं। यूपीएससी परीक्षा में उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट कन्नड़ लिटरेचर था। उनका कहना है कि कन्नड़ साहित्य पढ़ना उनके लिए पढ़ाई से ज्यादा एक हॉबी थी।
1099 छात्रों ने पास की है ये परीक्षा
यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा से देश में आईएएस, आईएफएस और आईपीएस अफसर चुने जाते हैं। इस बार 1099 छात्रों ने ये परीक्षा पास की है। जिसमें से 180 छात्र आईएस बनेंगे. 45 छात्र आईएफएस यानि भारतीय विदेश सेवा का हिस्सा होंगे, वहीं 150 छात्र आईपीएस बनाए जाएंगे और इनके अलावा 834 छात्रों को सेंट्रल ग्रुप के ए और बी सर्विस का हिस्सा बनाया जाएगा।
प्रोफेशनल छात्र कर रहे किडनी रैकेट का संचालन, पुलिस ने किया गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच ने दिल्ली में एक किडनी रैकेट का भंडाफोड़ कर गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में संगम विहार के पास स्थित बत्रा अस्पताल का एक कर्मचारी भी शामिल है। हैदराबाद के एक शख्स को किडनी दिलाने के लिए आरोपियों ने उसके परिजनों से 40 लाख रुपये लिए और जयपुर के एमबीए छात्र को चार लाख रुपये में किडनी डोनेट करने के लिए डील तय की थी।
किडनी देने व लेने की सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बृहस्पतिवार को बत्रा अस्पताल ने डोनर को अस्पताल बुलाया और ट्रांस प्लांट के लिए बनाई गई डॉक्टरों की कमेटी ने भी इसे हरी झंडी दे दी। इस बीच, पूरे मामले पर नजर रख रही क्राइम ब्रांच की टीम ने एक के बाद एक चारों आरोपियों को दिल्ली के अलग-अलग स्थानों से दबोच लिया।
संयुक्त आयुक्त क्राइम ब्रांच प्रवीर रंजन के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों के नाम जयंत साहू उर्फ राहुल, सुलेखा पांडा, अनोज पात्रा व बिरजू पासवान हैं। इनमें बिरजू पासवान बत्रा अस्पताल का कर्मचारी है। वह पहले दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में काम करता था, लेकिन कुछ वर्षों से अब बत्रा अस्पताल में काम कर रहा था।
जयपुर से एमबीए की पढ़ाई कर रहे जयदीप शर्मा व उसके एमबीए छात्र दोस्त राजेश को पिछले साल सितंबर में इंटरनेट पर कुछ सर्च करने के दौरान एक साइट पर किडनी डोनेट करने पर मोटी रकम मिलने की जानकारी मिली थी। दोनो गरीब परिवार से हैं, उन्हें पैसों की जरूरत थी। लिहाजा राजेश इस गिरोह से संपर्क कर दिल्ली आया था। उसके बाद से राजेश का कोई अता-पता नहीं है।
जयदीप ने अपने दोस्त को ढूंढने के लिए गिरोह से बातचीत शुरू कर इसकी सूचना न्यूज चैनल को दे दी। इसके बाद क्राइम ब्रांच की 20 सदस्यीय टीम इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए 40 दिनों तक डोनर जयदीप शर्मा व एक न्यूज चैनल के संवाददाता के साथ स्टिंग ऑपरेशन में जुटी रही।
इस किडनी रैकेट से जुड़ी तमाम प्रक्रिया को लेकर क्राइम ब्रांच ने करीब 200 घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग की। उसके बाद रैकेट का भंडाफोड़ कर आरोपियों को दबोच लिया गया। प्रवीर रंजन का कहना है कि इस मामले में बत्रा अस्पताल के कुछ डॉक्टरों से शुक्रवार को क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल मे पूछताछ की गई।
ये हैं आरोपी
1. जयंत साहू : ओडिशा-सभी तरह के जरूरी दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार करता था।
2. सुलेखा पांडा : ओडिशा- हौजरानी में एक फ्लैट में ठहराए गए विभिन्न राज्यो सें आए डोनरों व उनके परिजनों के रहने, खाने व काउंसिलिंग करने का काम करती थी।
3. अनोज पात्रा : ओडिशा-यह भी सुलेखा की तरह देखभाल करता था।
4. बिरजू पासवान : अस्पताल प्रशासन, किडनी के डॉक्टरो व ट्रांसप्लांट के लिए हरी झंडी देने वाले कमेटी के डॉक्टरो से तालमेल करने का काम करता था।
अस्पताल की नहीं है संलिप्तता: बत्रा प्रबंधन
बत्रा अस्पताल में सभी किडनी प्रत्यारोपण नियमों का पालन करते हुए कड़ी निगरानी में किए जाते हैं। ऐसे सभी प्रत्यारोपण के मामलों का एक कमेटी निरीक्षण करती है और प्रत्यारोपण से संबंधित सभी दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है। सभी दस्तावेजों की जांच की जाती है और कमेटी द्वारा की जाने वाली पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड भी किया जाता है। अस्पताल की किसी गलत कार्य मे कोई संलिप्तता नहीं है। मामले की जांच में अस्पताल पुलिस का पूरा सहयोग कर रहा है और आगे भी करेगा, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।
दिल्ली विश्वविद्यालय की दीवारों में आईएसआईएस के समर्थन में लिखे नारे
दिल्ली विश्वविद्यालय का माहौल एक बार फिर गरमा सकता है। विश्वद्यालय कैंपस की दीवारों पर दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकी संगठन आईएसआईएस के समर्थन में नारे लिखे गए हैं। इस बात को लेकर अखिल भारती विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सचिव अंकित सिंह सांगवान ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। डीसीपी (नॉर्थ) जतिन नरवाल ने कहा है कि इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
छात्रों का दावा है कि उन्होंने कैंपस की दीवारों पर कुछ ऐसे नारे लिखे देखे हैं जो आतंकी संगठन आईएस के समर्थन में लिखे गए हैं। 27 मई को अंकित सिंह सांगवान ने थाने में शिकायत देकर पुलिस से मुकदमा दर्ज करने की मांग की। छात्र संघ अध्यक्ष अंकित ने दावा किया है कि दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ने वाले छात्रों ने उनको बताया कि कॉमर्स डिपार्टमेंट की दीवार पर कुछ आपत्तिजनक नारा लिखा हुआ है। इस पर वह फौरन वहां गए, जहां उनको दीवार पर I SYN ISIS लिखा मिला।
एबीवीपी ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत देने के बाद इन नारों को पेंट कर छिपाने का आरोप भी लगाया गया है। उन्होंने राष्ट्र विरोधी कार्य करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस अधिकारियों ने इस मामले की जांच करने की बात कह रही है।
आंतकी सब्जार के मारे जाने पर कश्मीर में फिर भड़की हिंसा, कर्फ्यू जारी
आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के टॉप कमांडर सब्जार अहमद भट के मारे जाने के बाद कश्मीर में 50 से ज्यादा जगहों पर हिंसा भड़क गई है। इसमें 1 सिविलयन की मौत हो गई और 60 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। एहतियात के तौर पर श्रीनगर के 7 थाना एरिया में कर्फ्यू लगा दिया गया है। गांदेरबल जिल में भी धारा 144 लगा दी गई है। स्कूल-कॉलेज सोमवार तक के लिए बंद कर दिए गए हैं। ट्रेन और इंटरनेट सर्विसेज भी सस्पेंड कर दी गई हैं। बता दें कि सिक्युरिटी फोर्सेस ने शनिवार को सब्जार को एक एनकाउंटर में मार गिराया था। इसकी खबर फैलते ही लोगों ने आर्मी पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए।
– न्यूज एजेंसी के मुताबिक श्रीनगर के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट फारूख लोन ने बताया कि रविवार को शहर के 7 थाना एरिया में कर्फ्यू लगाया गया है। जिन जगहों पर कर्फ्यू लागू है, उनमें खानयार, करालखुद, महाराज गंज, मैसुमा, नौहट्टा, रेनवाड़ी और सफाकदल शामिल हैं।
– गांदेरबल के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट तारिक हुसैन गनी ने कहा, “लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए कर्फ्यू लगाया गया है, जो अगले आदेश तक लागू रहेगा ताकि कोई पब्लिक और प्राइवेट प्रॉपर्टीज को नुकसान न पहुंचा सके।”
– जम्मू-कश्मीर में शनिवार को सिक्युरिटी फोर्सेज ने 2 एनकाउंटर ऑपरेशन्स को अंजाम दिया। एक ऑपरेशन रामपुर सेक्टर तो दूसरा त्राल में चलाया गया। इस दौरान आर्मी ने 10 आतंकी मारे, इनमें सब्जार भी शामिल है।
बुरहान के मारे जाने के बाद 90 दिनों तक हुई थी हिंसा
– आतंकी सब्जार को पुलवामा जिले के त्राल में ढेर किया गया। वह बुरहान वानी का उत्तराधिकारी था। बुरहान को सिक्युरिटी फोर्सेस ने पिछले साल 8 जुलाई को मार गिराया था।
– बुरहान के मारे जाने के बाद भी घाटी 90 दिनों तक लगातार हिंसा की चपेट में रही थी। उस दौरान 90 सिविलियंस की मौत हुई थी, 15 हजार से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। हिंसा में 2 सिक्युरिटी पर्सनल भी शहीद हुए थे और 4000 से ज्यादा घायल हुए थे।
ट्रेनों की आवाजाही रद्द
– कश्मीर में हिंसा को देखते हुए ट्रेन सर्विस सस्पेंड कर दी गई है। रेलवे के एक ऑफिशियल ने बताया, “नॉर्थ कश्मीर में श्रीनगर-बडगाम और बारामुला के बीच ट्रेनों की आवाजाही फिलहाल रोक दी गई है। इसी तरह बडगाम-श्रीनगर-अनंतनाग-काजीगुंड से बनिहाल तक जाने वाली ट्रेनें भी रद्द कर दी गई हैं। सुरक्षा वजहों से ये कदम उठाया गया है।”
– हालांकि शनिवार सुबह तक घाटी में ट्रेन रूट नॉर्मल था। बता दें कि पिछले साल बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भी हिंसा के चलते घाटी में ट्रेन सर्विस करीब 6 महीने लगातार सस्पेंड करनी पड़ी थी।
मोबाइल इंटरनेट सर्विस पर रोक
– सब्जार के मारे जाने के बाद एहतियात के तौर पर पूरे कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट सर्विसेज पर भी रोक लगा दी गई है। एक ऑफिशियल ने बताया कि हालांकि BSNL की ब्रॉडबैंड सर्विस नॉर्मल तरीके से चालू है। किसी तरह की अफवाहें न फैलें, इसलिए ये कदम उठाया गया है।
– बता दें कि इससे पहले राज्य सरकार ने घाटी में 22 सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर बैन लगा दिया था, जो करीब एक महीने तक जारी रहा था। हालांकि हाल ही में बैन हटा दिया गया था।
घाटी में स्कूल-कॉलेज भी बंद
– कश्मीर में ज्यादातर कॉलेज और स्कूलों को बंद कर दिया गया है। इनमें प्राइवेट इंस्टीट्यूशन भी शामिल हैं। एक ऑफिशियल ने बताया कि सब्जार के मारे जाने के बाद भड़की हिंसा में स्टूडेंट्स भी शामिल न हो जाएं, इसलिए ये फैसला लिया गया।
सीबीएसई का रिजल्ट जारी, जानिए कैसे देखना है रिजल्ट!
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) आज (28 मई को) 12वीं का परीक्षा परिणाम जारी हो गया है। यह रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbseresults.nic पर है। अब अलग-अलग यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के लिए रिजल्ट आने का इंतजार कर रहे छात्रों को भी राहत मिलेगी।
मॉडरेशन पॉलिसी का लाभ देते हुए सीबीएसई ने 12वीं का परिणाम जारी किया है। सीबीएसई की प्रवक्ता रमा शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को मानते हुए सीबीएसई मॉडरेशन पॉलिसी के तहत परिणाम घोषित करेगा। अब छात्रों को अतिरिक्त अंकों का लाभ मिलेगा। बता दें कि इस साल सीबीएसई बोर्ड से बारहवीं के 11 लाख छात्रों ने परीक्षा दी है। ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले के लिए परिणाम आने का इंतजार कर रहे छात्रों को भी राहत मिलेगी।
कैसे जानें अपना रिजल्ट
रिजल्ट घोषित होने पर इस लिंक पर क्लिक कर अपना परीक्षा परिणाम जान सकते हैं। इसके लिए आपको अपना मोबाइल नंबर और रोल नंबर इसमें डालना होगा। स्टूडेंट्स बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर भी रिजल्ट चेक कर सकते हैं।
मॉडरेशन पॉलिसी के कारण लटका रिजल्ट
मॉडरेशन नीति के तहत परीक्षार्थियों को मुश्किल सवालों के लिए ग्रेस नंबर दिए जाते हैं। मॉडरेशन नीति के अनुसार परीक्षार्थियों को किसी विषय में कठिन सवालों को लेकर 15% अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, CBSE ने अधिक नंबर हासिल करने वाले उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर यह फैसला लिया है। CBSE के मॉडरेशन पॉलिसी को खत्म करने के आदेश के विपरीत हाईकोर्ट ने फैसला दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर इस साल इस पॉलिसी को बहाल करने के निर्देश दिए। इसी कारण इस बार रिजल्ट आने में देरी हुई।
इस साल 12वीं की परीक्षाएं 9 मार्च 2017 से 29 अप्रैल 2017 के बीच आयोजित की गई थीं, जिसमें 10,98,981 छात्रों ने हिस्सा लिया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.82 फीसदी ज्यादा थी। देश भर में 10,678 केंद्रों पर 12वीं कक्षा की परीक्षाओं का आयोजन किया गया था।
कई बोर्डों ने अभी घोषित नहीं किए परिणाम
अन्य बोर्डों ने भी नंबर बढ़ाकर देने की पॉलिसी पर कोई स्पष्टता आने तक अपने परिणाम को टाल दिया है। पता चला है कि उत्तर प्रदेश बोर्ड जून के पहले सप्ताह तक इंतजार करेगा कि सीबीएसई का मॉडरेशन पॉलिसी पर क्या रुख है। पिछले दो सालों से उत्तर प्रदेश राज्य बोर्ड मई के तीसरे सप्ताह में अपने परिणाम की घोषणा करता रहा है।
सीआईएससीई का परिणाम भी देर से
काउंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन के 12वीं कक्षा के परिणाम में भी देरी की संभावना है। सीबीएसई के रिजल्ट्स आने के बाद ही सीआईएससीई अपने परिणाम की घोषणा करेगा। सीआईएससीई के सीईओ गेरी अराथून ने कहा कि हम परिणाम की तैयारी करके तारीख की घोषणा कर देंगे। हम अभी डाटा जुटाने की प्रक्रिया में हैं इसलिए थोड़ी देरी हो रही है।
रिजल्ट की घोषणा के बाद परीक्षार्थी अपना परीक्षा परिणाम बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbse.nic.in पर देख सकते हैं. इसके अलावा results.nic.in और cbseresults.nic.in पर भी परिणाम देखा जा सकता है।
मार्च में हुआ था 10वीं और 12वीं की परीक्षा का आयोजन
उत्तरप्रदेश समेत पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के कारण इस साल सीबीएसई की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं लेट से शुरू हुई थीं। 10वीं क्लास की परीक्षाएं 9 मार्च 2017 से शुरू होकर 10 अप्रैल तक चली थीं, वहीं 12वीं की परीक्षाएं 9 मार्च 2017 से 29 अप्रैल 2017 के बीच आयोजित की गई थीं।
10वीं की परीक्षा में कुल 16,67,573 छात्र
इस साल सीबीएसई की दसवीं क्लास की बोर्ड परीक्षा में 8,86,506 छात्रों ने हिस्सा लिया था, जो पिछले साल की तुलना में 15.73 प्रतिशत अधिक थी। वहीं, 12वीं कक्षा की परीक्षा में 10,98,981 छात्रों ने हिस्सा लिया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.82 फीसदी ज्यादा थी। देश भर में 16,363 केंद्रों पर कक्षा दस और 10,678 केंद्रों पर 12वीं कक्षा की परीक्षाओं का आयोजन किया गया था। देशभर में 12वीं की परीक्षा के लिए 10678 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।
सबसे पहले बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbse.nic.in , cbseresults.nic.in या results.nic.in पर पहुंचे।
– उसके बाद CBSE 12th Result 2017 लिंक पर क्लिक करें।
– आवश्यक जानकारी दर्ज करें।
– सब्मिट लिंक पर क्लिक करें, इसके बाद आपका रिजल्ट आपके सामने होगा।
चारधाम यात्रा प्रतीक्षालय में अव्यवस्थायें हावी
ऋषिकेश।
रविवार को भी यात्री प्रतीक्षालय में तीर्थ यात्रियों को परेशानी का समाना करना पड़ा। कारण कि प्रतीक्षालय में बिजली उपकरण टूटे पड़े है। बिजली की तारें टूटने से पंखे व लाईट नही चल रहे है। मई माह में चारधाम यात्रा अपने पूरे सबाब पर है। देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। ऐसे में यात्रा बस कम्पाउंड में अव्यवस्थायें हावी होने से यात्रियों को परेशानी हो रही है।
इन दिनों एकाएक गर्मी अधिक होने से भी तीर्थयात्री प्रतीक्षालयों का रुख कर रहे है। प्रशासन चारधाम यात्रा में व्यवस्थायें दुरस्त करने का दावा कर रहा है। लेकिन हकीकत दावे कुछ ओर ही है। कुछ दिन पूर्व गढ़वाल कमिश्नर विनोद शर्मा ने चारधाम बस कम्पाउंड का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं पर नाखुशी भी जाहिर की थी। लेकिन दो दिन बाद भी जिम्मेदार प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नही दिया है।
