आंतकी हमले में सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद, आतंकी आदिल अहमल भी मरा

सीआरपीएफ के जवानों की एक बस को आतंकवादियों ने विस्फोट कर उड़ा दिया। यह घटना जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवंतीपोर के पास गोरीपोरा में बृहस्पतिवार को घटित हुई। इस विस्फोट में 44 जवान मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि 44 ही जवान घायल हो गए। सभी को सेना के बेस अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती किया गया है। इस विस्फोट के पींछे आतंकी अहमद उर्फ वकास का हाथ बताया गया है।

अपरान्ह करीब सवा तीन बजे जब यह काफिला दक्षिण कश्मीर में जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर गोरीपोरा (अवंतीपोर) के पास पहुंचा तो अचानक एक कार तेजी से काफिले में घुसी। आत्मघाती कार चालक ने सीआरपीएफ जवानों की एक बस के सथ टक्कर मार दी। इसके बाद वहां जोरदार धमाके की आवाज आई और कार धू-धू कर सड़क पर जलने लगी। बस के एक हिस्से में भी आग की लपटें निकलने लगी।

काफिले में शामिल अन्य वाहन तुरंत रुक गए और उनमें सवार जवान जब बाहर निकल रहे थे, तो इस दौरान उन पर गोलियां भी दागी गई। जवानों ने भी जवाबी फायर किया। जवाबी फायर पर आतंकी वहां से भाग निकले। आतंकी हमले का निशाना बनी बस सीआरपीएफ की 54वीं वाहिनी की है।

विभागीय अधिकारियों ने दी जानकारी के अनुसार 12 जवान मौके पर ही शहीद हो गए थे, जबकि चार अन्य ने अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में दम तोड़ा। 11 अन्य जवानों की अस्पताल में शहादत पाई। विस्फोट की सूचना मिलते ही राज्य पुलिस, सेना और सीआरपीएफ के आलाधिकारी भी अपने दल बल समेत मौके पर पहुंच गए।

10वीं पास था आतंकी आदिल अहमद
कश्मीर में अब तक के सबसे बड़े आत्मघाती हमले को अंजाम देने वाला आत्मघाती आतंकी आदिल अहमद उर्फ कमांडो उर्फ वकास दक्षिण कश्मीर के गुंडीबाग, काकपोरा, पुलवामा का रहने वाला था। वह बीते साल अप्रैल माह के दौरान ही आतंकी संगठन में सक्रिय हुआ था। 21 वर्षीय आदिल 10वीं पास था और सुरक्षाबलों ने उसे सी-श्रेणी के आतंकियों में सूचीबद्ध कर रखा था। उसके ऊपर तीन लाख का इनाम था। बताया जा रहा है कि विस्फोट के दौरान उसकी भी मौत हो गई है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी घटना की कड़ी निंदा की है, उन्होंने शहीद जवानों की आत्मशांति की कामना की। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य की कामना भी की। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में शहीद परिवारों के साथ सरकार खड़ी है।

खुशखबरी : आर्थिक रिपोर्ट में उत्तराखंड हुआ समृद्ध

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड वर्ष 2018-19 के आर्थिक सर्वेक्षण को राज्य के विकास का मजबूत आधार बताया है। उन्होंने कहा है कि यह सर्वेक्षण स्पष्ट तौर पर एक समृद्ध और विकास की ओर गतिमान उत्तराखण्ड की तस्वीर पेश करता है। राज्य में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और पारदर्शिता के साथ कार्य होने से कार्यप्रणाली में सुधार आया है। उड़ान योजना से कुॅमाऊ-गढ़वाल के मध्य हवाई सेवा शुरू हुई है जिससे कम समय में और सस्ती दरों में हवाई सफर किया जा सकता है, साथ ही सौभाग्य योजना के तहत राज्य के विद्युतविहीन लगभग 2 लाख से ज्यादा परिवारों को विद्युतीकरण की सुविधा प्रदान की जा चुकी है। रोड, रेल एवं रोपवे में तेजी से हो रहे कार्य के चलते विकास दर में गुणवत्ता देखी जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश के उद्देश्य से किये गये डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड के प्रभावी नतीजे आने शुरू हो गये हैं। जहां पिछले 17 वर्षों में 40 हजार करोड़ के आसपास कुल निवेश उत्तराखण्ड में आया है, वहीं पिछले 6-7 महिनों में 10 हजार करोड़ से ज्यादा निवेश पर कार्य शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि इससे राज्य के 20 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार प्राप्त होगा। पर्यटन के क्षेत्र में लिये गये फैसलों ने भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। टिहरी वाटर स्पोर्टस का हब बन गया है, जबकि ऋषिकेश एडवेंचर टूरिज्म के क्षेत्र में दुनिया भर में उभरता गंतव्य बन रहा है। उन्हें विश्वास है कि 13 डिस्ट्रिक्ट-13 डेस्टीनेशन के तहत पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने से उत्तराखण्ड के विकास में यह फैसला एक क्रान्तिकारी फैसले के रूप में जाना जायेगा। हमारे प्रयासों के चलते गत वर्षों की तुलना में पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना- अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना गेम चैंजर साबित हो रही है, जिससे आज गुणवत्ता युक्त इलाज निःशुल्क दिया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों के लिये टेली मेडिसीन व टेली रेडियोलाॅजी प्रारम्भ की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के उत्तराखण्ड के प्रति विशेष स्नेह का लाभ भी इस राज्य को प्राप्त हो रहा है। आॅल वैदर रोड एवं चारधाम रेल परियोजना से उत्तराखण्ड विकास के नये स्तर पर पहुंच रहा है। सेतु भारतम योजना के तहत काशीपुर में दो आरओबी का निर्माण हो रहा है। अटल सेतु एवं इं विश्वेश्वरैय्या से देहरादून आगमन आसान हुआ है एवं अजबपुर फ्लाईओवर के निर्माण के बाद और भी आसान हो जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में एनसीआरटी की पुस्तकों को लागू करना अभिभावकों को राहत प्रदान करने वाला फैसला रहा है। व्यवस्थागत सुधारों के चलते निवेश हेतु बेहतर माॅहोल बनाने से दुनिया भर के उद्योगपतियों ने उत्तराखण्ड का रूख किया है। समाजिक प्रगति सूचकांक में उत्तराखण्ड 64.23 अंक के साथ केरल, हिमाचल प्रदेश तथा तमिलनाडु के बाद शीर्ष चैथे स्थान पर है एवं इसका स्कोर अखिल भारतीय औसत से ऊपर है। किसान पेंशन योजना के अन्तर्गत वर्ष 2018-19 में माह दिसम्बर 2018 तक 528.47 लाख की धनराशि व्यय कर 15,374 किसानों को लाभान्वित किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश द्वारा भारत सरकार के सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में 11वां स्थान प्राप्त किया है। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत 31 दिसम्बर, 2018 तक 2.66 लाख गरीब परिवारो को निशुल्क गैस कनेक्शन दिये गये हैं, जबकि जिन परिवारों को इस योजना का लाभ प्राप्त नही हो पा रहा था तथा ऐसे परिवारों को राज्य सरकार अपने स्तर से निशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध करा रही है। दिसम्बर तक इस योजना में 7267 परिवारों को निशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराये जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण को राज्य के विकास का आइना बताते हुए कहा कि राज्य की विकास दर में वर्ष 2017-18 में 6.82 प्रतिशत की वृद्धि आंकी गई जबकि वर्ष 2018-19 में इसमें 7.03 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। वर्ष 2017-18 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद रूपए 2,14,933 करोड़ आकलित था, जिसकी तुलना में वर्ष 2018-19 में यह 2,37,147 करोड़ रहने का अनुमान है। यही नहीं वर्ष 2017-18 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय रू0 1,74,622 आंकी गई थी जबकि वर्ष 2018-19 में यह 1,90,284 अनुमानित है।
वर्ष 2018-19 के बजट अनुमानों में राज्य सरकार की कुल राजस्व प्राप्तियां 35,660 करोड़ रूपए है जो कि वर्ष 2017-18 के पुनरीक्षित अनुमान के अनुसार रू0 29,783 करोड़ हो गयी है जो 19.73 प्रतिशत अधिक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अन्तर्गत चालू वित्त वर्ष 2018-19 में सितम्बर, 2018 तक राज्य में बैंकों द्वारा 55,759 नए सूक्ष्म उद्यमियों को रू0 906.07 करोड़ का नया ऋण स्वीकृत किया गया है।

देहरादून में स्थापित होगी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी

युवाओं खासतौर पर उन छात्र-छात्राओं के लिए के लिए खुशखबरी है जो कि विधि के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखण्ड में नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी खोली जाएगी। प्रदेश को क्वालिटी एजुकेशन हब बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री जी का उत्तराखण्ड से विशेष स्नेह है। इससे पूर्व डोईवाला में सीपैट की न केवल स्थापना की जा चुकी है बल्कि उसमें कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। किच्छा व लालढांग में दो नए माॅडल डिग्री काॅलेज व पौड़ी के पैठानी में व्यावसायिक काॅलेज के लिए तो भूमि चयन के साथ बजट भी स्वीकृत किया जा चुका है। हाल ही में प्रधानमंत्री जी ने रूसा के तहत इनका रिमोट के माध्यम से शिलान्यास भी किया था।
इस समय देश में 21 नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी हैं जिनमें क्लेट के माध्यम से प्रवेश होते हैं। इनमें स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। उत्तराखण्ड में नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी, क्वालिटी व रोजगारपरक शिक्षा में मील का पत्थर साबित होगा। देहरादून के रानीपोखरी में लगभग 10 एकड़ भूमि में इसकी स्थापना की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि राज्य में नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी की स्थापना से प्रदेश के साथ ही देश भर के प्रतिभावान छात्र-छात्राएं यहां आएंगे। इससे यूनिवर्सिटी के निकटवर्ती क्षेत्रों की आर्थिकी को भी फायदा होगा। प्रदेश सरकार उत्तराखण्ड को एजुकेशन व टूरिज्म हब बनाना चाहती है। इसमें केंद्र सरकार का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में डबल इंजन की डबल रफ्तार देखी जा सकती है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केदारपुरी की गरिमा के अनुरूप पुनर्निर्माण किया गया है। चार धाम आॅल वेदर रोड़ पर तेजी से काम चल रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाईन पर भी समयबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उत्तराखण्ड में हवाई सेवाओं का काफी विस्तार हुआ है।

कुमाऊं में तीसरी बार रैली को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

14 फरवरी को रूद्रपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनसभा व अन्य कार्यक्रमो के सफल आयोजन हेतु प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा मंगलवार को प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल पर विधिवत भूमि पूजन किया गया। मुख्यमंत्री ने रैली व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण कर सम्बन्धित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये। उन्होने कहा कि जनपद उधमसिंह नगर में प्रधानमंत्री मोदी की यह तीसरी रैली ऐतिहासिक व अभूतपूर्व होगी। प्रधानमंत्री के उत्तराखण्ड आगमन को देखते हुये पूरे प्रदेश मेे जोश है। रैली में कुमांऊ मण्डल के साथ-साथ गढवाल मण्डल के लोग भी बड़ी संख्या में भाग लेगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार से उत्तराखण्ड को अनेक प्रकार के सौगात मिली है। नैनीताल के लिये पेयजल हेतु नई डीपीआर बनायी जा रही है साथ ही मंसूरी में भी पेयजल योजना हेतु शीघ्र स्वीकृृति मिल जायेगी। जौलीग्राण्ट से गुहाटी के लिये विमान सेवा शुरू कर दी गयी है। बहुप्रतिक्षित जमरानी बांध परियोजना को केन्द्रीय जलायोग की तकनीकी सलाहकार समिति ने मंजूरी दे दी है। यह बहुद्देशीय परियोजना है, हमें उम्मीद है कि इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जायेगा। उन्होने कहा जमरानी बांध के बन जाने से उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड को सिचांई व पेयजल का लाभ मिलने के साथ ही बिजली भी मिलेगी।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, जिला अध्यक्ष शिव अरोरा, क्षेत्रीय विधायक द्वारा भी अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय, उच्च शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री डा0 धनसिंह रावत, किच्छा विधायक राजेश शुक्ला, खटीमा विधायक पुष्कर सिंह धामी, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद गंगवार, मेयर रामपाल सिंह, पूर्व सांसद बलराज पासी, गजराज बिष्ट, राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष दानसिंह रावत, आयुक्त कुमांऊ राजीव रौतेला, डीआइजी अशोक कुमार, जिलाधिकारी डा0 नीरज खैरवाल, एसएसपी वरिन्दरजीत सिंह, एडीएम जगदीश चन्द्र काण्डपाल आदि उपस्थित थे।

गंगा की निर्मलता और स्वच्छता बनाए रखने के सभी कार्य गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में नमामि गंगे, अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन व देहरादून स्मार्ट सिटी लि. की विस्तार से समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने सचिवों व विभागाध्यक्षों को निर्देश दिये कि सभी कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया जाए। जिससे कार्यों की गुणवत्ता व प्रगति की पूरी जानकारी मिले। उन्होंने कहा कि कि जो भी कार्य किये जा रहे हैं, उनकी वीडियो रिकाॅर्डिंग भी की जाए। केन्द्र सरकार द्वारा सहायतित योजनाओं की समय-समय पर प्रगति की जानकारी केन्द्र सरकार को भी दी जाए। सभी कार्य निर्धारित समयावधि में पूर्ण कर लिए जांए। इसके लिए रिसोर्स बढ़ाने की जरूरत हो तो बढ़ाएं लेकिन यह सुनिश्चित किया जाए कि कार्य निर्धारित समय में पूर्ण हो जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि गंगा की स्वच्छता व निर्मलता के लिए जो भी कार्य किये जा रहे हैं उनका होर्डिंग व अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार प्रसार भी किया जाए। जो कार्य प्रगति पर हैं उनकी जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि गंगा आस्था का प्रतीक होने के साथ ही हमारी अमूल्य धरोहर भी है। नमामि गंगे के तहत हो रहे महत्वपूर्ण कार्यों की रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट एवं प्रमुख स्थानों पर भी होर्डिंग, बैनर व फ्लैक्स के माध्यम से प्रचारित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नमामि गंगे के तहत जो वृक्षारोपण किये जा रहे हैं, उनमें फलदार वृक्ष और मेडिसनल प्लांट अधिक लगाये जाएं। स्वच्छता अभियान में अच्छा कार्य करने वाली पालिकाओं को सम्मानित भी किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून स्मार्ट सिटी के तहत ऐसी कार्य योजना बनाई जाए जिससे देहरादून को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त शहर बनाया जा सके। इसके अलावा जनसुविधाओं के दृष्टिगत अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई जाए।
नमामि गंगे में 66 कार्यों में से 41 कार्य पूर्ण व 24 पर कार्य गतिमान
बैठक में बताया गया कि उत्तराखण्ड पेयजल निगम की सभी 13 सीवरेज योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है। नमामि गंगे के तहत 66 कार्यों में जिसमें स्नान एवं शमशान घाटों का निर्माण, घाटों की सफाई, नदी तट की सफाई शामिल है, में से 41 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 24 पर कार्य प्रगति पर है जबकि एक की निविदा प्रक्रिया चल रही है। नमामि गंगे के तहत 135 नालों में से 91 नाले टेप किये जा चुके हैं, शेष पर कार्य गतिमान है। सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना के तहत स्वीकृत 19 परियोजनाओं में से 05 परियोजनाएं पूर्ण कर ली गई हैं, 13 परियोजनाओं पर कार्य गतिमान है व एक परियोजना पर मूल्यांकन चल रहा है। गंगा नदी के किनारे सभी 15 नगरों व देहरादून में रिस्पना व बिन्दाल पर एस.टी.पी. इन 19 परियोजनाओं में शामिल हैं। हरिद्वार के सराय में 14 एमएलडी एसटीपी का कार्य मार्च 2019 तक व जगजीतपुर में 68 एमएलडी एसटीपी का कार्य जून तक पूर्ण कर लिया जायेगा। नमामि गंगे के तहत वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण, चैक डेम, गंगा वाटिका व वृक्षारोपण हेतु वर्कशाॅप भी कराये जा रहे हैं। वृक्षारोपण के तहत 40 प्रतिशत फलदार वृक्ष व 20 प्रतिशत मेडिसनल प्लांट लगाये जा रहे हैं।
शहरों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए अमृत मिशन के तहत शौचालय निर्माण शत प्रतिशत जलापूर्ति का लक्ष्य जल्द किया जायेगा पूरा
प्रदेश के सात शहरों देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, रूड़की, रूद्रपुर, काशीपुर व नैनीताल को अमृत मिशन के अन्तर्गत शामिल किया गया है। इसका उद्ेश्य इन शहरों में बुनियादी सुविधाएं जैसे जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, हरित क्षेत्र व शहरी परिवहन की सुविधा मुहैया कराना है। अमृत मिशन का प्राथमिक उद्देश्य सभी परिवारों को जलापूर्ति कनेक्शन उपलब्ध कराना है। इस मिशन के प्रारम्भ होने से पूर्व 57 प्रतिशत जलापूर्ति कनेक्शन थे, जो अब बढ़कर 88 प्रतिशत हो गये हैं। शौचालय निर्माण शत प्रतिशत किया जा चुका है। इस मिशन के तहत अभी तक लगभग 445 करोड़ रूपये के 101 स्वीकृत कार्यों में से 16 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 72 पर कार्य प्रगति पर है, शेष पर निविदा प्रक्रिया गतिमान है।
वार्डों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का डोर टू डोर एकत्रीकरण का वेरिफिकेशन किया जाए
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत खुले में शौच की प्रवृत्ति के उन्मूलन, आधुनिक और वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता हेतु जागरूकता व नगर निकायों की क्षमता वृद्धि से संबंधित कार्य किये जा रहे हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि सभी 100 निकायों को खुले में शौच से मुक्त किया जा चुका है। ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन के लिए 1162 वार्डों में से 914 वार्डों में डोर टू डोर एकत्रीकरण किया किया जा रहा है। 278 वार्डों में सोर्स सेग्रिगेशन का कार्य शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भी सुनिश्चित किया जाए कि जो भी वृक्षारोपण हो रहा है, उन वृक्षों की सुरक्षा भी हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि वार्डों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का जो डोर टू डोर कूड़ा एकत्रीकरण किया जा रहा है, इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए वेरिफिकेशन किया जाए।
देहरादून स्मार्ट सिटी प्रोजक्ट के लिए ठोस कार्य योजना बनाई जाए
मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून स्मार्ट सिटी प्रोजक्ट के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि अवस्थापना विकास, स्वच्छ वतावरण व बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर से देहरादून स्मार्ट सिटी बनाई जायेगी। स्मार्ट सिटी के लिए कुल 1407.5 करोड़ रूपये के फण्डिंग की योजना है, जिसमें से 500 करोड़ केन्द्र सरकार, 500 करोड़ राज्य सरकार व 407.50 करोड़ पीपीपी मोड व अन्य से किये जाने की योजना है। इसके तहत 7 वाटर एटीएम, 7 स्मार्ट टाॅयलेट, 3 स्मार्ट स्कूल जीजीआईसी राजपुर रोड, जीआईसी खुड़बुड़ा, राजकीय जूनियर बालिका हाई स्कूल खुडबुड़ा बनाये जाने की योजना है। इसके अलावा दून इंटीग्रेटेड कमाण्ड एण्ड कन्ट्रोल सेंटर, शहर के प्रमुख मार्गों पर स्मार्ट रोड, जलापूर्ति व निकासी की योजना, परेड ग्राउण्ड का पुनरोद्धार, डीबीएस व डीएबी काॅलेज क्षेत्रों का पुनरोद्धार, सिटी ट्रासंपोर्ट के लिए इलेक्ट्रिक बस की सुविधा, स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट व कलक्ट्रेट कैम्पस ग्रीन बिल्डिंग से सबंधित कार्य स्मार्ट सिटी के तहत किये जायेंगे।
बैठक में वित्त व पेयजल मंत्री प्रकाश पंत, सचिव राधिका झा, अरविंद सिंह ह्ंयाकी, शैलेस बगोली, अपर सचिव एच.सी. सेमवाल व संबधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने अलकनंदा पावर प्रोजेक्ट की समीक्षा की

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में अलकनंदा जल विद्युत परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान जीवीके पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर को निर्देश दिए कि क्षेत्र के लोगों को जलापूर्ति हेतु परियोजना का शेष कार्य शीघ्र पूरा किया जाए।
मुख्यमंत्री ने परियोजना के निर्माण में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निदेशक जीवीके को निर्देश दिए कि परियोजना को फरवरी माह के अंत तक पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि अलकनंदा नदी के आसपास के क्षेत्र के लोगों का एकमात्र जल स्रोत अलकनंदा नदी है। इसके लिए जल संस्थान, पेयजल निगम, जीवीके पावर आदि सम्बंधित विभाग आपसी सामंजस्य स्थापित कर न्यूनतम जलापूर्ति सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के आसपास के क्षेत्रों में रोशनी सहित अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि परियोजना से प्रभावितों के बकाया भुगतान में शीघ्रता की जाए।
इस अवसर पर राज्य मंत्री धन सिंह रावत, विधायक विनोद कंडारी, सचिव पेयजल अरविन्द ह्यांकी, सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा, निदेशक जीवीके पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर पीवी प्रसन्ना रेड्डी एवं महाप्रबंधक पेयजल निगम भजन सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

आर्थिक आरक्षण पर केंद्र के फैसले को चुनौती नहीं

उच्चतम न्यायालय ने सवर्ण जाति के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के केन्द्र के निर्णय को चुनौती देने वाली एक नई याचिका पर केन्द्र से शुक्रवार को जवाब मांगा। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने यह स्पष्ट किया कि सवर्ण जाति के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को नौकरियों और दाखिले में आरक्षण देने के केन्द्र के फैसले पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी। उच्चतम न्यायालय इससे पहले इसी प्रकार की याचिकाओं पर केन्द्र को नोटिस जारी कर चुका है। उसने तहसीन पूनावाला की ओर से दाखिल नयी याचिका को लंबित याचिकाओं में जोड़ने का शुक्रवार को आदेश दिया।
केन्द्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं ‘जनहित अभियान’ और एनजीओ ‘यूथ फॉर इक्वेलिटी’ सहित अनेक पक्षकारों ने दाखिल की हैं। यूथ फॉर इक्वेलिटी ने अपनी याचिका में विधेयक को रद्द करने की मांग की है। एनजीओ के अध्यक्ष कौशल कांत मिश्रा की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि आरक्षण के लिए केवल आर्थिक कसौटी ही आधार नहीं हो सकता और यह विधेयक संविधान के बुनियादी नियमों का उल्लंघन करता है।
क्योंकि आर्थिक आधार पर आरक्षण को सामान्य वर्ग तक ही सीमित नहीं किया जा सकता और कुल 50 प्रतिशत की सीमा को भी पार नहीं किया जा सकता। वहीं व्यावसायी पूनावाला की ओर से दाखिल नयी याचिका में विधेयक को रद्द करने की मांग करते हुए कहा गया है कि आरक्षण के लिए पिछड़ेपन को केवल ‘‘आर्थिक स्थिति से’’ परिभाषित नहीं किया जा सकता।

हमारा लक्ष्य उत्तराखंड में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय, डांडा लखौंड, देहरादून में राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला एवं राज्य औषधि नियंत्रक भवन कार्यालय का शिलान्यास, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखण्ड के नवीन कार्यालय भवन का लोकार्पण, चिकित्सा अधिकारियों के लिए 17 ट्रांजिट हाँस्टल का शिलान्यास व राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का राज्य स्तरीय शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक व्यापक एवं सुविधाजनक बनाने के लिए संगठित एवं समन्वित प्रयासों की जरूरत है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के बाद उत्तराखण्ड दूसरा राज्य है जहां एन.एच.एम का अपना कार्यालय स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि मेरा सामाजिक दायित्व के तहत विशेषज्ञ डाॅक्टर महिने में 2-3 दिन दुर्गम क्षेत्रों में जाकर अपने सेवाएं दें, तो बड़े अस्पतालों के वर्क लोड में भी कमी आयेगी व स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आयेगा। उन्होंने कहा कि चमोली के पीपलकोटी व रूद्रप्रयाग के गुप्तकाशी में विशेषज्ञ डाॅक्टरों द्वारा इस तरह की सेवाएं दी जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐलोपैथिक व आयुर्वेदिक दवाओं के लिए लाइसेंस के लिए सिंगल विंडों सिस्टम बनाने का प्रयास किया जायेगा। देश के 20 प्रतिशत आयुर्वेदिक दवाओं का निर्यात उत्तराखण्ड करता है। उन्होंने कहा कि फार्मा इंडस्ट्रियों के प्रतिनिधियों से पिछले साल मसूरी में बैठक के बाद उनकी अनेक समस्याओं का समाधान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के बाद राज्य में तेजी से औद्योगीकरण हुआ। वर्तमान में प्रदेश में 300 औषधि निर्माता फर्म व 150 काॅस्मेटिक आईटम निर्माता फर्म हैं, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिले हैं। आम जन के स्वास्थ्य के हित में औषधियों का परीक्षण किये जाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा राज्य औषधि संगठन हेतु कार्यालय भवन एवं राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित किये जाने के लिए 14 करोड़ रूपये की स्वीकृति केन्द्र सरकार से प्राप्त की गई है जिसमें से 5 करोड़ रूपये की पहली किश्त प्राप्त हो चुकी है।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महानिदेशालय, उत्तराखण्ड के भवन के तृतीय तल पर 644.33 लाख रूपये की लागत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय का निर्माण किया गया है। एन.एच.एम के अन्तर्गत हर चिकित्सालय में चिकित्सा अधिकारियों हेतु चिकित्सालयों में ट्रांजिट हाॅस्टल का निर्माण किया जा रहा है। बागेश्वर, चम्पावत, चमोली व उप चिकित्सालय में एक-एक एवं 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में ट्रांजिट हाॅस्टल का निर्माण 4538 लाख रूपये की लागत से पेयजल निगम द्वारा किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने 15 बच्चों को एलबेंडाजोल की गोलिया खिलाकर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का राज्य स्तरीय शुभारम्भ किया। 8 फरवरी 2019 को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति के छठें चरण में प्रदेश के सभी जनपदों में 1 से 19 वर्ष के 42 लाख बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाई जायेगी।
इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, उपाध्यक्ष, ग्रामीण स्वास्थ्य सलाहकार परिषद् ज्ञान सिंह नेगी, सचिव स्वास्थ्य नितेश कुमार झा, मिशन निदेशक एनएचएम युगल किशोर पंत, महानिदेशक स्वास्थ्य डाॅ. टी.सी.पंत, चेयरमैन औषधि नियंत्रण निर्माण इकाई संदीप जैन आदि उपस्थित थे।

अब उत्तराखंड में भी सवर्णों को मिलेगा आरक्षण

अपर मुख्य सचिव,कार्मिक एवं सतर्कता, राधा रतूड़ी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा संविधान संशोधन के उपरान्त आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसी क्रम में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा भी 5 फरवरी, 2019 को ‘‘उत्तराखण्ड लोक सेवा (आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिये आरक्षण) अध्यादेश 2019’’ लागू कर दिया गया है।
इस प्रकार केन्द्र सरकार तथा गुजरात सरकार के बाद उत्तराखण्ड देश में दूसरा राज्य है, जहां उक्त आरक्षण लागू किया गया है। प्रदेश के बेरोजगार शिक्षित युवाओं के लिये यह अच्छी खबर है, जिसके अन्तर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग भी आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह अध्यादेश समस्त विभागों, उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग तथा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को प्रेषित किया गया है, ताकि इस पर तत्काल अधियाचन एवं विज्ञप्ति जारी की जाये तथा अधिक से अधिक बेरोजगार नौजवानों को शीघ्र रोजगार प्राप्त हो सके।
इसके तहत लोक सेवाओं और पदों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के पक्ष में उत्तराखण्ड राज्य के उन स्थायी निवासियों को आरक्षण प्राप्त होगा, जो अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण की मौजूदा योजना के अन्तर्गत सम्मिलित नहीं है।
ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के व्यक्ति जिनके परिवारों की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय रु 8 लाख से कम हो आरक्षण के इस प्रयोजन के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो में चिन्हित हैं। परिवार, की आय में सभी स्रोतों से अर्थात् वेतन, कृषि, व्यवसाय, पेशा आदि से प्राप्त आय सम्मिलित होगी। उक्त आय लाभार्थी द्वारा आवेदन के वर्ष से पूर्व वित्तीय वर्ष के लिए आय होगी।

देहरादून सिटी टॉप-10 में शामिल

अगर आप उत्तराखंड में रहते हैं और खासतौर पर देहरादून में निवास करते हैं, तो आपके लिए खुशी का पल है। हाल ही में जागरन डॉट कॉम, KMPG और फेसबुक पर एक सर्वे किया गया है। इसमें लोगों से पूछा गया था कि सुरक्षा के लिए लिहाज से देश का सबसे सुरक्षित शहर कौन है? कौन सा ऐसा शहर है, जहां लोग खुद को महफूज महसूस करते हैं ? आपको जानकर खुश होगी कि देहरादून इस लिस्ट में पहले नंबर पर है।
सबसे खास बात ये है कि इस लिस्ट में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू जैसे महानगर टॉप-10 में जगह भी नहीं बना पाए। सुरक्षा के लिहाज से ये ब़ड़े शहर देहरादून के आगे बिल्कुल भी नहीं टिकते। एक वेबसाइट में बताया गया है कि ये सर्वे कुल मिलाकर 14 हजार लोगों पर किया गया है। हालांकि इस लिस्ट में इंदौर पहले नंबर पर है लेकिन वो सिर्फ रहने के लिहाज से पहले नंबर पर है।

जहां तक सुरक्षा की बात करें, तो देहरादून पहले नंबर पर बना हुआ है। देशभर में रहने के लिहाज से देहरादून तीसरे नंबर पर है, जबकि सुरक्षा के लिहाज से पहले नंबर पर है। ये हैं देश के 10 टॉप टेन शहर।
1- इंदौर
2- लखनऊ
3- देहरादून
4- वाराणसी
5- रायपुर
6-रांची
7- मेरठ
8-लुधियाना
9- पटना
10- कानपुर
सुरक्षा के लिहाज से देहरादून देशभर में पहले नंबर पर बना हुआ है। इसलिए अगर आप देहरादून से हैं, तो आपके लिए इससे गर्व का मौका कोई हो नहीं सकता। इससे पहले NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का एक सर्वे आया था, जिसमें कहा गया था कि उत्तराखंड में अपराध सबसे कम हैं और ये राज्य देश का सबसे सुरक्षित राज्य है।