उत्तराखंड को केंद्र से मिलेगी 264.50 करोड़ रुपये की विशेष सहायता

केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड राज्य को शहरी भूमि एवं नियोजन सुधारों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (SASCI) 2025–26 के अंतर्गत भाग–XA (Urban Land and Planning Reforms) के तहत उत्तराखंड को 264.50 करोड़ रुपये की विशेष सहायता (ऋण) स्वीकृत की गई है।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की अनुशंसा के आधार पर यह राशि राज्य सरकार को प्रदान की गई है। उत्तराखंड सरकार ने इस प्रोत्साहन राशि के लिए PFMS पोर्टल के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसे स्वीकार करते हुए सक्षम प्राधिकारी ने राज्य को यह सहायता उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी है। यह राशि राज्य में प्रस्तावित विभिन्न पूंजीगत परियोजनाओं के लिए प्रदान की गई है, जिससे शहरी विकास, भूमि प्रबंधन और नियोजन सुधारों को गति मिलेगी। केंद्र सरकार द्वारा यह पूरी राशि एकमुश्त किस्त में राज्य को जारी कर दी गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में राज्यों के बुनियादी ढांचे के विकास को निरंतर प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह वित्तीय सहायता उत्तराखंड में योजनाबद्ध शहरी विकास, आधुनिक भूमि प्रबंधन प्रणाली और मजबूत आधारभूत ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में बेहतर नियोजन, सुव्यवस्थित विकास और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस सहायता से प्रदेश के शहरों में संतुलित और टिकाऊ विकास को गति मिलेगी तथा आम नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

उत्तराखंड में देवभूमि परिवार आईडी में मुखिया के तौर पर परिवार की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम होगा

कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से सहायता पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने मंगलवार को “देवभूमि परिवार विधेयक- 2026” को सदन पटल पर रख दिया है। इस विधेयक के कानून बन जाने पर प्रदेश में
एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस “देवभूमि परिवार” की स्थापना हो सकेगी। विधेयक का उद्देश्य विभिन्न विभागों में बिखरे लाभार्थी डेटा को एक मंच पर लाकर योजनाओं के संचालन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समन्वित बनाना है। देवभूमि परिवार आईडी में मुखिया के तौर पर परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम दर्ज होगा।

वर्तमान में राज्य के अलग-अलग विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के लिए अलग लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग करते हैं। इसके कारण कई बार लाभार्थी आंकड़ों का दोहराव, पुनः सत्यापन की जटिल प्रक्रियाएँ और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। इससे न केवल प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ता है, बल्कि योजनाओं के आकलन और प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।
अब इस विधेयक के माध्यम से राज्य में एक एकीकृत परिवार-स्तरीय डेटा भंडार स्थापित किया जाएगा, जो विभिन्न विभागों और एजेंसियों के लिए लाभार्थी संबंधी सूचनाओं का एक विश्वसनीय स्रोत (Single Source of Truth) के रूप में कार्य करेगा। इससे योजनाओं का बेहतर लक्ष्योन्मुखी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगी।
इसके साथ ही, इस डेटा प्रणाली के प्रभावी प्रबंधन, संरक्षण और संरचनात्मक सुधारों के लिए एक उपयुक्त संस्थागत तंत्र का भी गठन किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत विभागों के बीच सुरक्षित और विनियमित डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी, जिससे योजनाओं के बेहतर लक्षित वितरण और समन्वय को मजबूती मिलेगी।
यह पूरी व्यवस्था डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 (DPDP Act 2023) के प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जाएगी, ताकि नागरिकों के डेटा का उपयोग सहमति, पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ सुनिश्चित किया जा सके।

*देवभूमि परिवार विधेयक- 2026” सुशासन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और उत्तराखंड के नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सकेगा।*
*पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री*

*ये विधेयक भी प्रस्तुत किए गए*
उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक – 2026
उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा शर्त) (संशोधन) विधेयक – 2026
उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश लोक सेवा (शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1993) (संशोधन) विधेयक 2026
उत्तराखंड जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2026
उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026
उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम, विधेयक, 2026
उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2026
उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026
उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) विधेयक, 2026

वर्दीधारी पदों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भराड़ीसैंण में अग्निवीर सैनिकों के रूप में भर्ती होने वाले कैडेट्स के साथ संवाद किया। संवाद के दौरान कैडेट्स ने मुख्यमंत्री से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका मुख्यमंत्री ने सहजता से उत्तर दिया।

संवाद के दौरान शंकर सिंह राणा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि सैनिक पुत्र होने के कारण आपने सैनिकों के जीवन और गतिविधियों को नजदीक से देखा है, क्या आपका मन सेना में जाने का नहीं हुआ? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना में जाना अन्य सेवाओं की अपेक्षा अत्यंत सम्माननीय माना जाता है। उन्होंने कहा कि वे अपने जीवन को भी एक सैनिक के जीवन की तरह अनुशासित और समर्पित मानकर कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने पिताजी के साथ रहते हुए उन्होंने सेना के अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को करीब से देखा है। जिस प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ हमारे सैनिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, उसी भावना से वे प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में उत्तराखण्ड की देवतुल्य जनता की सेवा करने का प्रयास करते हैं।

हिमांशु रौतेला ने प्रश्न किया कि प्रदेश के मुखिया होने के नाते आप अपने परिवार को कैसे समय दे पाते हैं? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई व्यक्ति राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय होता है तो उसकी जिम्मेदारियां बहुत बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में प्रदेश के सभी लोग उनका परिवार हैं और सभी गांव उनके अपने गांव हैं।

ओ.पी. कण्डारी ने पूछा कि जब हम अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा पूरी कर वापस आएंगे, उसके बाद सरकार हमारे रोजगार के लिए क्या व्यवस्था कर रही है? मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्दीधारी पदों पर अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार द्वारा भी अनेक क्षेत्रों में अग्निवीरों को अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर अग्निवीर के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

रितेश पंवार ने मुख्यमंत्री से पूछा कि आपकी पहचान “धाकड़ धामी” के रूप में क्यों बनी? मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का व्यवहार जनता के साथ सदैव सौम्य होना चाहिए। हालांकि राज्यहित और जनहित में कई बार कठोर और साहसिक निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है तथा दंगा रोधी कानून भी लागू किया गया है। पिछले चार वर्षों में राज्य सरकार ने जन अपेक्षाओं और प्रदेशहित में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।

अमन सेमवाल ने पूछा कि आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कान का क्या राज है? मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें कार्य करने की ऊर्जा और प्रेरणा प्रदेश की जनता के आशीर्वाद से मिलती है। उन्होंने कहा कि सरकार जन अपेक्षाओं के अनुरूप प्रदेश के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और आज अनेक क्षेत्रों में उत्तराखण्ड देश में अग्रणी स्थान पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनभावनाओं के अनुरूप राज्य के विकास को नई गति देने के लिए पूरे संकल्प और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

इस अवसर पर अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सैनिक सीमांत और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा करते हैं। देवभूमि उत्तराखण्ड की विशेषता है कि यहां लगभग हर परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना या अर्द्धसैन्य बलों में सेवाएं दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना तेजी से आत्मनिर्भर बन रही है। रक्षा क्षेत्र में भारत का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है और भारतीय सेना वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और सक्षम सेना के रूप में स्थापित हुई है। सेना में निरंतर आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। देहरादून में भव्य सैन्यधाम का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें राज्य के वीर बलिदानियों की गौरवगाथाएं और स्मृतियां संजोई जाएंगी। उन्होंने कहा कि वे पूर्व सैनिकों को अपने अभिभावक के रूप में देखते हैं।

इस अवसर पर यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.), पूर्व सैनिकगण तथा अग्निवीर उपस्थित थे।

प्रदेश में सात हजार किमी से अधिक सड़कें हुईं गड्डा मुक्त

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूसरे कार्यकाल के बीते चार साल में प्रदेश में 819 पंचायत भवनों का निर्माण पुननिर्माण किया गया है।
प्रदेश में पंचायत भवनों की संख्या 5867 है। इसमें से 1134 पंचायत भवन लंबे समय से जीर्णशीर्ण चल रहे थे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायतीराज विभाग को अभियान चलाकर जीर्ण- शीर्ण भवनों का पुनर्निमाण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गत चार वर्ष में विभाग ने 819 पंचायत भवनों का निर्माण- पुननिर्माण कर लिया है। शेष भवनों पर भी कार्य किया जा रहा है। मंगलवार को विभागीय मंत्री सतपाल महाराज ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी सदन के सामने रखी।

*7 हजार किमी से अधिक सड़कें गड्डा मुक्त*
प्रदेश में लोकनिर्माण विभाग नवंबर के प्रथम सप्ताह तक सात हजार से अधिक किमी सडकों को गड्डा मुक्त कर चुका है। सदन में विभाग की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार प्रदेश की सड़कों को गड्डा मुक्त करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के क्रम में विभाग ने वर्ष 2025-26 में मानसून काल से पूर्व 3134 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। जबकि मानसून के बाद 10 नवंबर 2025 तक 4149.17 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। इस दौरान अकेले हरिद्वार जनपद में 313 किमी से अधिक लंबी सड़कों को गड्डामुक्त किया गया।

*रोपवे परियोजनाओं पर काम तेज*

प्रदेश में विभिन्न तीर्थ स्थलों को रोपवे से जोड़ने की प्रक्रिया गतिमान है। पर्यटन मंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि विभाग ने कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर के लिए पीपीपी मोड़ में रोपवे का संचालन शुरु कर दिया है। इसके अलावा जनपद चम्पावत में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी रोपवे भी पीपीपी मोड में निर्माणाधीन है। साथ ही जनपद उत्तरकाशी में जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक के लिए भी रोपवे पीपीपी मोड में विकसित किया जा रहा है। साथ ही साथ गौरीकुंड से केदारनाथ धाम, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए भी रोपवे निर्माण की प्रक्रिया गतिमान है।

असहाय सरिता को रायफल फंड से डीएम ने दी आर्थिक सहायता

जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जनता दर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए फरियादियों ने अपनी समस्याएं जिलाधिकारी के समक्ष रखीं। आज आयोजित जनता दर्शन में कुल 170 शिकायतें प्राप्त हुईं।
जिलाधिकारी ने उपस्थित सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता दर्शन में आने वाले व्यथित, असहाय, बुजुर्ग, महिलाओं तथा जरूरतमंद लोगों की शिकायतों का समयबद्ध और संवेदनशीलता के साथ निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रकरण में की गई कार्रवाई की जानकारी जिलाधिकारी कार्यालय के साथ-साथ संबंधित शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध कराई जाए, जिससे समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित हो सके।
जनता दर्शन में बंजारावाला निवासी कल्पना ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि उनकी पुत्री विदुषी, जो फाईलफोर्ट पब्लिक स्कूल में कक्षा 6 की छात्रा है, आर्थिक तंगी के कारण स्कूल की फीस जमा नहीं कर पाई है, जिसके चलते विद्यालय प्रबंधन उसे परीक्षा में बैठने से रोक रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को विद्यालय प्रबंधन से समन्वय स्थापित कर छात्रा को परीक्षा में सम्मिलित कराने तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा योजना के अंतर्गत उसकी स्कूल फीस जमा कराने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
जवाहर कॉलोनी, बल्लूपुर निवासी शमशाद ने बताया कि वर्ष 2023 में एक दुर्घटना में उनका पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था और उनका उपचार चल रहा है। आय का कोई साधन न होने के कारण उन्होंने आर्थिक सहायता की मांग की। जिलाधिकारी ने समाज कल्याण अधिकारी को वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत करने तथा प्रभारी अधिकारी शस्त्र को रायफल फंड से आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।
तहसील चकराता के ग्राम कांडोई निवासी अनिल कुमार ने अवगत कराया कि वर्ष 2017 में पीएमजीएसवाई कालसी द्वारा लाखामण्डल से नाडा मोटर मार्ग का निर्माण किया गया था, जिससे उनकी कृषि भूमि और नहर को नुकसान पहुंचा। उन्होंने बताया कि नहर निर्माण हेतु शेष रू0 5.04 लाख रुपये की धनराशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। इस पर जिलाधिकारी ने मौके पर ही पीएमजीएसवाई के अधिकारियों से प्रकरण का संज्ञान लेते हुए समाधान प्रस्तुत करने को कहा। अधिकारियों द्वारा 12 मार्च तक समस्या के निस्तारण का लिखित आश्वासन जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
खुड़बुड़ा निवासी सरिता गोयल ने भी अपनी आर्थिक स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि उनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। उनका पुत्र दिव्यांग है, जिसका उपचार कराने में वे असमर्थ हैं तथा उनके पति भी बीमार हैं। इस पर जिलाधिकारी ने प्रभारी अधिकारी शस्त्र को रायफल फंड से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी को सरिता के दिव्यांग पुत्र को स्पॉन्सरशिप योजना के अंतर्गत रू0 4000 प्रतिमाह की सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि परिवार को आर्थिक संबल मिल सके और बच्चे का उपचार सुचारू रूप से हो सके।
जनता दर्शन में गढ़ीकैंट डाकरा निवासी 67 वर्षीय बुजुर्ग ने भी अपनी समस्या रखते हुए बताया कि वे हृदय रोग से पीड़ित हैं और हाल ही में उनका ऑपरेशन हुआ है। उन्होंने शिकायत की कि उनका पुत्र नशे की लत के कारण आए दिन घर में हुड़दंग करता है और उन्हें परेशान करता है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित प्रकरण में गुंडा एक्ट के अंतर्गत वाद दर्ज कर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसी प्रकार धर्मपुर निवासी एक बुजुर्ग दंपति ने अपनी बहू द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत दर्ज कराई। मामले में उनके भरण-पोषण के लिए वाद दर्ज किया गया है, जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाना है तथा जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता दर्शन में प्राप्त शिकायतों का निष्पक्ष, संवेदनशील और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
राजीव नगर निवासी व्यथित विधवा अरूणा ने जिलाधिकारी ने गुहार लगाई कि उनके पति की वर्ष 2008 में मृत्यु हो गई तथा मजदूरी करके अपने परिवार का जीवन यापन करती है। उनका पेयजल का बिल रू0 34395 प्राप्त हुआ है जिसका भुगतान करने में असमर्थ है, जिस पर जिलाधिकारी ने जल संस्थान को बिल सटलमेंट करने के निर्देश दिए तथा सटलमेंट धनराशि का भुगतान जिला प्रशासन के रायफल फंड से करने के निर्देश दिए।
जनता दर्शन में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, नगर मजिस्टेट प्रत्युष सिंह, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी स्मृता परमार, उप जिलाधिकारी मुख्यालय अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में तीन ‘ग्रोथ डाइवर्स’ करेंगे तीन बड़े लक्ष्यों की पूर्ति

आत्मनिर्भर उत्तराखंड की जिस यात्रा पर राज्य सरकार आगे बढ़ रही है, उसमें तीन क्षेत्रों से उसे सर्वाधिक आस है। यह क्षेत्र हैं-कृषि, उद्योग और पर्यटन। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन तीन क्षेत्रों को आत्मनिर्भरता की यात्रा के ‘डाइवर्स’ की संज्ञा दे दी है। मुख्यमंत्री ने बजट में इसी अनुरूप इन क्षेत्रों का विशेष ध्यान रखा है। सरकार की मंशा ये ही है कि इन तीनों क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाते हुए ऐसा परिवेश बनाए, जो एक साथ तीन उद्देश्यों की पूर्ति कर सके। ये उद्देश्य हैं-उत्पादकता बढे़, निवेश आकर्षित हो और सम्मानजनक आजीविका के अवसर मिले।

*तीन क्षेत्रों को बजट की डोज*

01-कृषि व संबंधित क्षेत्र
उद्यान बीमा योजना-40 करोड़
मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना-20 करोड़
कीवि, ड्रेटेन फ्रूट प्रोत्साहन-30 .70 करोड़
मिशन एप्पल-42 करोड़
फसलों की सुरक्षा, घेर बाड़-20 करोड़
चाय विकास योजना-25 .93 करोड़
संगंध पौधा विकास व अन्य-24 .75 लाख
महक क्रांति हेतु-10 करोड़

02-उद्योग
सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यमों को सहायता योजना-75 करोड़
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना-60 करोड़
मेगा इंडस्ट्रियल एवं मेगा टेक्सटाइल नीति अनुदान-25 करोड़
प्रमोशन ऑफ इंवेस्टमेंट, स्टार्टअप, एंटरप्रीनियोरशिप-30 करोड़
स्टार्ट अप वेंचर फंड-25 करोड़

03-पर्यटन
पर्यटन विभाग के अंतर्गत राजस्व मद में बजट-210 .59 करोड़
पर्यटन विभाग के अंतर्गत पूंजीगत मद में बजट-296 .45 करोड़
वैश्विक पर्यटक स्थलों का विकास-दस करोड़
इको टूरिज्म गतिविधियों के लिए-18 .50 करोड़
योग दिवस आयोजन-दो करोड़

1.11 लाख करोड़ रुपए का संतुलित बजट, विकसित उत्तराखंड की दिशा में मजबूत कदम: सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को उत्तराखंड के भविष्य का रोडमैप बताते हुए कहा कि यह केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि राज्य के समग्र विकास की दिशा तय करने वाला बजट है। उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये का यह बजट विकास, विरासत, संस्कृति और आधुनिकता के संतुलन को दर्शाता है और “विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखंड” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य गठन के समय उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 14,500 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 3.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी राज्य की आर्थिकी में 26 गुना से अधिक वृद्धि हुई है। इसी प्रकार प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2000-01 में 15,285 रुपये थी, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,73,921 रुपये होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में राज्य की वास्तविक विकास दर 7.23 प्रतिशत अनुमानित है, जो राष्ट्रीय औसत के आसपास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने FRBM अधिनियम के सभी मानकों का पालन करते हुए बेहतर वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। सरकार ने राजस्व अधिशेष बनाए रखा है और राजकोषीय घाटे को जीएसडीपी के 3 प्रतिशत के भीतर रखा है। उन्होंने कहा कि यह राज्य के कुशल वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है।

बजट में कुल 1,11,703 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित है, जिसमें 64,989 करोड़ रुपये राजस्व व्यय और 18,153 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय शामिल हैं। वहीं कुल प्राप्तियां 1,10,143 करोड़ रुपये अनुमानित हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार से मिलने वाले करों में राज्य के हिस्से के रूप में लगभग 17,415 करोड़ रुपये तथा विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत लगभग 18,491 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट गरीब, किसान, युवा और मातृशक्ति को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए 1,327 करोड़ रुपये, अन्नपूर्ति योजना के लिए 1,300 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए 298 करोड़ रुपये तथा शहरी आवास योजना के लिए 56 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

युवाओं के लिए शिक्षा और खेल के क्षेत्र में 11,871 करोड़ रुपये तथा कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए 586 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषि और बागवानी क्षेत्र में 1,113 करोड़ रुपये, जबकि पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र के लिए 815 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए इस वर्ष 19,692 करोड़ रुपये का जेंडर बजट रखा गया है। इसके अंतर्गत सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0, ईजा-बोई शगुन योजना, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट और नन्दा गौरा योजना जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राज्य में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए लोक निर्माण विभाग के लिए 2,501 करोड़ रुपये, ऊर्जा क्षेत्र के लिए 1,609 करोड़ रुपये तथा लघु सिंचाई के लिए 1,642 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में कई नई योजनाओं की शुरुआत भी की जा रही है। इनमें कुंभ मेला तैयारियों के लिए लगभग 1,027 करोड़ रुपये, साइबर सुरक्षा के लिए 15 करोड़ रुपये, इको-टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 18.5 करोड़ रुपये, स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन के विकास के लिए 10 करोड़ रुपये और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व उभरती तकनीकों के लिए 13 करोड़ रुपये शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार नवाचार को भी बढ़ावा दे रही है। इसके तहत कीवी और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन, ट्राउट मछली पालन, सेब नर्सरी विकास, मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना और महक क्रांति जैसी योजनाएं शुरू की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट का मूल मंत्र SANTULAN है, जिसका अर्थ है – समावेशी, आत्मनिर्भर, नई सोच, तीव्र विकास, उन्नत गांव और शहर, लोक सहभागिता, आर्थिक शक्ति और न्यायपूर्ण व्यवस्था। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास और पर्यावरण के संतुलन के साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि यह बजट वास्तव में “विकल्प रहित संकल्प से विकसित उत्तराखंड तक की यात्रा का दस्तावेज” है।

मातृशक्ति की बेहतरी को संजीदा दिखी सरकार, बजट में रखा ध्यान

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के एक दिन बाद और बजट सत्र के पहले ही दिन राज्य सरकार ने मातृ शक्ति को भरोसा दिला दिया की उनकी बेहतरी के लिए वह संजीदा है। महिला समानता के लिहाज से महत्वपूर्ण जेंडर बजट का आकार बढ़ाने की बात हो या फिर विभिन्न ऐसी योजनाएं, जो महिलाओं से सीधे जुड़ी हैं, उनके लिए बजट का प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार ने पिछले वर्ष सोलह हजार नौ सौ इकसठ करोड़ बत्तीस लाख रूपये का जेंडर बजट प्र्रस्तुत किया था। मुख्यमत्री पुष्कर सिंह धामी ने बजट पेश करते हुए बताया है कि इस बार जेंडर बजटिंग में उन्नीस हजार छह सौ बयानवे करोड़ दो लाख के बजट का प्रावधान किया जा रहा है। यानी यह साफ है कि महिलाओं के कल्याण से किए जा रहे प्रयास इस बजट के बाद और तेजी पकडे़ंगे।

राज्य सरकार ने प्रसूता को सीधे एड्रेस करने वाली ईजा-बोई शगुन योजना हो या बेटियों को सुरक्षा देने वाला निर्भया फंड, सभी के लिए बजट प्रावधान कर यह भरोसा दिलाया है कि नारी शक्ति का हित उसकी प्राथमिकता में है। मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना, वात्सल्य योजना, मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना, निराक्षित विधवाओं की पुत्रियों के विवाह हेतु अनुदान से जुड़ी जैसी योजनाओं की एक लंबी फेहरिस्त है, जिसमें बजट का प्रावधान कर सरकार ने महिलाओं की बेहतरी के लिए अपने संजीदा प्रयासों की झलक पेश की है।

*योजनाएं और उसमें बजट प्रावधान*

निर्भया फंड-112 . 02 करोड़
मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना-30 करोड़
मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना-25 करोड़
वात्सल्य योजना-15 करोड़
मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना-13.44 करोड़
ईजा-बोई शगुन योजना-14 .13 करोड़
निराक्षित विधवाओं की पुत्रियों के विवाह हेतु अनुदान-पांच करोड़
मुख्यमंत्री बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि-आठ करोड़
आपदा सखी-दो करोड़

*मां-बच्चे के पोषण के प्रति भी गंभीरता*
-सक्षम आंगनबाड़ी एंड पोषण 2 .0 योजना के अंतर्गत राज्य सरकार ने 598.33 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। इस योजना के तहत छह माह से लेकर छह वर्ष तक के लगभग सात लाख तैंतीस हजार लाभार्थियों को अनुपूरक पोषाहार आंगनबाड़ी केंद्रों से दिया जा रहा है। बच्चे के साथ ही मां के पोषण का ख्याल रखते हुए चलाई जा रही प्रधानमंत्री पोषण मिशन हेतु समग्र रूप से लगभग 149.45 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।

भराड़ीसैंण में सीएम पुष्कर धामी ने किया उत्तराखंड का बजट

उत्तराखंड में वित्तीय अनुशासन और विकास के संतुलन को मजबूत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2026–27 का बजट प्रस्तुत किया। लगभग ₹1,11,703.21 करोड़ के इस बजट में जहां विकास की गति को बढ़ाने पर जोर है, वहीं मजबूत राजकोषीय प्रबंधन की झलक भी स्पष्ट दिखाई देती है। वर्ष 2025-26 के सापेक्ष 10.41 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

राज्य सरकार ने बजट में वित्तीय जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखते हुए FRBM अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया है। बजट के अनुसार राज्य में राजस्व आधिक्य (Revenue Surplus) की स्थिति बनी हुई है, जो दर्शाता है कि सरकार की आय उसके राजस्व व्यय से अधिक है। यह स्थिति किसी भी राज्य की मजबूत वित्तीय सेहत का संकेत मानी जाती है। बजट में 2536.33 करोड़ का राजस्व सरप्लस दिखाया गया है।

राजकोषीय अनुशासन के तहत राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर रखा गया है। इसी प्रकार लोक ऋण भी जीएसडीपी के 32.50 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के अंदर बनाए रखा गया है। यह दर्शाता है कि सरकार विकास कार्यों पर खर्च करते हुए भी ऋण प्रबंधन और वित्तीय संतुलन पर पूरा ध्यान दे रही है। राजस्व आधिक्य, सीमित राजकोषीय घाटा और नियंत्रित सार्वजनिक ऋण जैसे संकेतक बताते हैं कि राज्य सरकार ने वित्तीय प्रबंधन में सावधानी और दूरदर्शिता अपनाई है। इससे भविष्य में विकास परियोजनाओं को स्थिर वित्तीय आधार मिलने की संभावना और मजबूत होगी।

कुल मिलाकर यह बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

महिला दिवस पर वरिष्ठ महिलाओं को सम्मानित कर सीएम बोल,“पहाड़ की असली ताकत उसकी मातृशक्ति”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन, देहरादून में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वरिष्ठ मातृशक्ति का सम्मान “नारी तू नारायणी” कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षा, समाज सेवा, उद्यमिता, पर्यावरण संरक्षण, कृषि, संस्कृति, जल संरक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाली राज्यभर से 38 वरिष्ठ महिलाओं को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने सभी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आज उन महिलाओं का सम्मान हो रहा है, जिनके त्याग, संघर्ष, स्नेह और संस्कारों ने परिवार, समाज और राष्ट्र की नींव को मजबूत किया है। उन्होंने कहा महिलाओं के स्नेह, त्याग और आशीर्वाद से पीढ़ियाँ आगे बढ़ती हैं और समाज निरंतर प्रगति करता है। महिलाएं, मां के रूप में अपने जीवन के प्रत्येक सुख को त्यागकर अपने बच्चों को आगे बढ़ाती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा वरिष्ठ महिलाएं, परिवारों के साथ संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों की रक्षक भी हैं।उन्होंने कहा उत्तराखंड की मातृशक्ति का योगदान और भी अधिक प्रेरणादायी और गौरवपूर्ण है। हमारे प्रदेश की महिलाएं परिवार को संभालने के साथ खेत-खलिहानों को संवारती हैं। राज्य की महिलाएं कठिन परिस्थिति में भी मजबूती से आगे बढ़ती हैं। उत्तराखंड की माताओं ने अपने त्याग, परिश्रम और अदम्य साहस से इस राज्य को आगे बढ़ाया है। पहाड़ की असली ताकत उसकी मातृशक्ति है।

मुख्यमंत्री ने कहा वरिष्ठ नागरिकों, वृद्ध माताओं की सेवा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्य सरकार, महिलाओं-विशेषकर वरिष्ठ महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेकों कल्याणकारी योजनाएँ चला रही है। राज्य सरकार, वृद्धावस्था पेंशन योजना, विधवा पेंशन योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। बुजुर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के साथ राज्य के विभिन्न जिलों में वृद्धाश्रमों की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क धार्मिक यात्राओं की सुविधा दे रही है। उन्होंने कहा सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड की हर वृद्ध माता को सम्मान, सुरक्षा और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का पूरा अवसर मिल सके।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाली महिलाएं समाज के लिए भी प्रेरणादाई होती हैं। उन्होंने कहा जो व्यक्ति सक्रिय रहेगा वही जीवंत भी रहेगा। सक्रियता जीवन को संपन्न बनती है। उन्होंने कहा महिला सशक्तिकरण की शुरूआत स्वयं अपने घर से शुरू होकर समाज और देश में जाएगी। महिलाएं हमेशा अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करती है। महिला शक्ति ही वह शक्ति है जो परिवार के साथ समाज और देश का भी निर्माण करती हैं।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि आज जिन वरिष्ठ महिलाओं को सम्मानित किया जा रहा है, उनका जीवन संघर्ष, धैर्य और समाज के प्रति समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका अनुभव और मार्गदर्शन समाज की अमूल्य धरोहर है।

सचिव चंद्रेश कुमार यादव ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम की मुख्य थीम “Give to Gain निर्धारित की गई है। इस थीम के अनुरूप ऐसे वरिष्ठ महिलाओं को सम्मानित किया जा रहा है, जो 60 वर्ष से अधिक आयु होने के बावजूद भी सक्रिय, आत्मनिर्भर और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। वरिष्ठ महिलाओं के चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिनिधिक बनाने के लिए प्रत्येक जनपद से निम्न आय वर्ग, मध्यम आय वर्ग एवं उच्च आय वर्ग से एक-एक महिला का चयन किया गया है। इसके लिए जनपद स्तर पर समिति का गठन करते हुए पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से चयन सुनिश्चित किया गया है, ताकि समाज के विभिन्न वर्गों की प्रेरणादायी महिलाओं को सम्मानित किया जा सके।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपद देहरादून से पार्वती देवी नेगी, मीना रवि, डा० ज्योति मरवाह, जनपद नैनीताल से धनुली नेगी, मीनू जोशी, लता हर्बोला, जनपद रुद्रप्रयाग से भादी देवी, गीता नौटीयाल, रामेश्वरी भट्ट जनपद चंपावत से उर्मिला चन्द, जनपद पौड़ी गढ़वाल से डॉ कु० उर्मिला राणा, कमला नेगी, पार्वती देवी, जनपद अल्मोडा से मनोरमा जोशी, हेमलता वर्मा, कामिनी कश्यप, जनपद उत्तरकाशी से सरतमा देवी, विशाला भण्डारी, शन्ति ठाकुर।

जनपद चमोली से सुशीला सेमवाल, चद्रकला बिष्ट, कलावती देवी, मुन्नी देवी, जनपद बागेश्वर से नीमा दफौटी, नारायणी देवी, गंगा राम, जनपद टिहरी गढ़वाल से सोबती देवी, लता देवी, प्रभा रतूड़ी, जनपद ऊधम सिंह नगर से मीना शर्मा, आशा मुन्जाल, इन्द्रा मिश्रा, हरिद्वार से सैयदा खातुन, बाला देवी उर्फ ब्रज किशोरी, कान्ति एवं पिथौरागढ़ दुर्गा खड़ावत, शकुलन्ता दयाल, देवकी जोशी को सम्मानित किया।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद गीता राम गौड़, निदेशक बीएल राणा, विक्रम सिंह, एस के त्रिपाठी, मोहित चौधरी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।