आधार के बिना अब नही बनेगा डेथ सर्टिफिकेट

अब आधार कार्ड भी हमारे जीवन के साथ-साथ जीवन के बाद भी जरुरी होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि एक अक्टूबर से डेथ सर्टिफिकेट के लिए आधार नंबर दर्ज करना होगा, तभी डेथ सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। शुक्रवार को गृह मंत्रालय ने यह फैसला लिया। सरकार का दावा है कि इससे कदम से फर्जीवाड़े पर अंकुश लग सकेगा। गृह मंत्रालय का यह नया फरमान पहली अक्टूबर से पूरे देश में लागू होगा। जम्मू-कश्मीर, असम और मेघालय को इससे फिलहाल दूर रखा गया है। डेथ सर्टिफिकेट हासिल करने वाले को मृतक का आधार नंबर या फिर आधार का पंजीकरण दर्ज कराना होगा। जिसके पास आधार नंबर नहीं है उस पर गृह मंत्रालय का कहना है कि ऐसे में डेथ सर्टिफिकेट में यह दर्ज रहेगा कि मृतक का आधार कार्ड नहीं है। इसके अलावा सरकार ने यह भी कहा है कि इस बारे में कोई भी गलत जानकारी देना एक अपराध माना जाएगा। मृतक के आधार के साथ-साथ उसके करीब सदस्य जैसे, पति-पत्नी, माता-पिता या फिर बेटा-बेटी का भी आधार नबंर डेथ सर्टिफिकेट के लिए दर्ज कराना होगा।
गृह मंत्रालय के तहत कार्य करने वाले रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय ने कहा कि आधार का उपयोग रिश्तेदारों या आश्रितों या मृतकों की परिचितों के परिजनों द्वारा दिए गए विवरण की सटीकता सुनिश्चित करने में होगा। यह पहचान धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक प्रभावी तरीका प्रदान करेगा। यह मृत व्यक्ति की पहचान दर्ज करने में भी मदद करेगा। इसके अलावा, यह मृत व्यक्ति की पहचान को साबित करने के लिए कई दस्तावेज तैयार करने की आवश्यकता को खत्म कर देगा।

टमाटर के बाद अब प्याज की कीमतें भी रुलायेंगी

टमाटर की कीमतों के बाद प्याज की कीमतें भी आम आदमी को परेशान कर सकती है। पिछले एक महीने में प्याज की कीमतों में तीन गुना वृद्धि हुई है और आने वाले दिनों में ये कीमतें और भी बढ़ने का अनुमान जताया जा रहा है। इसके पीछे नासिक में प्याज की थोक मंडियों में प्याज की कीमतों में लगभग 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है। नासिक के लासलगांव मे प्याज के प्रति कुंतल दाम 1,240 रू से बढ़कर 2,340 रू प्रति कुंतल तक पहुंच गए हैं।
एशिया की सबसे बड़ी थोक सब्जी मंडी आजादपुर मंडी में पिछले एक महीने में प्याज की कीमतें तिगुनी हो चुकी हैं। व्यापारियों का कहना है कि सबसे अधिक प्याज नासिक से आता है। लेकिन इस बार ये प्याज बाढ़ग्रस्त इलाको में और दक्षिण भारतीय राज्यों में चला गया है। जिस वजह से वहां पर भी दाम बढ़ गए हैं और आने वाले वक्त में आम आदमी को प्याज की दोगुनी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

फसल का सीधा भुगतान अब खातों में आयेगा

उत्तराखंड में देहरादून सहित प्रदेशभर की 10 मंडियों में फसलों के दाम अब ऑनलाइन ही तय होंगे। क्योकि अब ये मंडियां राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) से जुड़ जाएंगी। देश की मंडियों को जोड़ने के लिए 14 अप्रैल, 2016 को ई-नाम की शुरुआत की गई थी। पहले चरण में राज्य की 5 मंडियों को आपस में जोड़ा गया था।
दूसरे चरण में देहरादून के अलावा रुड़की, विकासनगर, रामनगर, हल्द्वानी, खटीमा, जसपुर, टनकपुर, बाजपुर और मंगलौर मंडियों को ई-नाम से जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार ने इस संबंध में एक प्रस्ताव बनाकर केंद्रीय कृषि मंत्रालय को भेज दिया है।
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून की निरंजनपुर सब्जी मंडी से 4,000 से ज्यादा व्यापारी और 10,000 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। मंडी के साथ ये लोग अब ई-नाम से भी जुड़ जाएंगे। ई-नाम के जरिए किसानों को उनके उत्पादों से संबंधित जानकारियां मोबाइल मैसेज के जरिए मिला करेंगी। इसके अलावा मंडी में आने वाले उत्पादों की जांच मंडी लैब में ही होगी और किसानों को फसल का सीधा भुगतान उनके खातों में आएगा।
दून मंडी समिति ने ई-नाम के लिए मंडी में सर्वर रूम भी तैयार कर लिया है। केंद्र से बजट मिलते ही निरंजनपुर मंडी ई-नाम से जुड़कर काम करना शुरू कर देगी। जिसका सीधा फायदा किसानों और व्यापारियों को मिलेगा।

लाल चौक पर तिरंगा फहराने में इसबार मिलेगी कामयाबी!

गुजरात मे अहमदाबाद की 14 साल की मुस्लिम बच्ची ने ऐलान किया है कि इस राखी के दिन वह श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा लहराएंगी। एक समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए तंजीम मेरानी ने कहा कि मैं राखी का त्योहार जवान भाइयों के साथ मनाने वाली हूं और जवानों को राखी भी बांधूंगी।
तंजीम ने बताया, पिछले साल उसे एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया था और जिस पर उसने वहीं पर तिरंगा फहराया था। तंजीम का कहना है कि इस साल वह लाल चौक पर तिरंगा फहराकर ही रहेगी। उसका कहना है कि इस बार मैंने रक्षाबंधन का दिन इसलिए चुना है क्योंकि यह भाई-बहन का त्योहार है। राखी का यह त्योहार मैंने सेना के जवान भाइयों के साथ मनाने का संकल्प लिया है।
तंजीम की इस कोशिश में परिवार का भी पूरा समर्थन है। तंजीम के पिता बताते है कि मुझे भी लगता है कि कश्मीर जाने के लिए यह सही वक्त नहीं है, लेकिन सही वक्त के लिए हम कब तक इंतजार करें? किसी न किसी को तो इस दिशा में पहल करनी ही होगी जैसे इस बार मेरी बेटी ने यह शुरुआत की है। मैं अपनी बेटी की कोशिश के साथ खड़ा हूं। यह एक त्योहार है और इसें हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से नहीं देखना चाहिए।
गौरतलब है कि पिछले साल भी तंजीम श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना चाहती थीं। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के कारण सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी थी। इस वजह से तंजीम को लाल चौक पर तिरंगा लहराने की अनुमति नहीं मिल सकी थी।

टीचर ने बच्चियों के कपड़े उतरवायें, पुलिस ने दर्ज मामला दर्ज किया

रुड़की के एक स्कूल में छठी क्लास में पढ़ने वाली दो लड़कियों को अंग्रेजी में कम अंक आने की बेहद गलत सजा दी है। रुड़की से 8 किलोमीटर दूर लंढौरा में के प्राइवेट सेकंडरी स्कूल में कम नंबर पाने पर टीचर्स ने इन दोनों लड़कियों के कपड़े उतरवा दिए। लड़कियों के माता-पिता के विरोध के बाद पुलिस ने इस मामले में एक महिला टीचर के खिलाफ आईपीसी की धारा 509 के तहत केस दर्ज किया है। इस धारा के तहत एक साल की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
यह वाकया मंगलवार का है। इस मामले की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के स्कूलों को टीचर्स के लिए ट्रेनिंग कोर्स शुरू करने को कहा है ताकि उन्हें छात्रों के साथ व्यवहार के गुर सिखाए जा सकें। इस घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (देहात) मणिकांत मिश्रा ने बताया, दोनों बच्चियों के माता-पिता का आरोप है कि पहले टीचर ने छात्राओं को फटकार भी लगाई और उसके बाद पूरी क्लास के सामने उनकी शर्ट उतार दी।

राज्यसभा चुनाव में दबेगा नोटा, कांग्रेस में मची खलबली

गुजरात राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को अब सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है। गुजरात की 3 सीटों पर 8 अगस्त को होने वाले चुनावों में नोटा प्रयोग पर स्टे लगाने की कांग्रेस की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। इसका मतलब यह है कि राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग नोटा के विकल्प के साथ ही होगी। इससे पहले, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलील दी थी कि अगर नोटा पर स्टे नहीं दिया गया तो विधायकों के वोट दूसरे पक्ष के लोग खरीद लेंगे और उसके कैंडिडेंट्स चुनाव हार जाएंगे।
कांग्रेस ने कहा कि अगर नोटा का ऑप्शन बंद नहीं किया गया तो गुजरात चुनाव में यह भ्रष्टाचार का सबब बन सकता है क्योंकि मुकाबला बेहद कड़ा है। कांग्रेस की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि गुजरात में तीन राज्यसभा सीट पर चार कैंडिडेट्स खड़े हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह विधायकों को नोटा का विकल्प देने के मुद्दे पर 18 सितंबर को विस्तृत सुनवाई करेगा।
कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल से जुड़ा नोटिफिकेशन काफी पहले 2014 में जारी किया था, ऐसे में कांग्रेस को इसकी खामियां इस वक्त क्यों नजर आ रही हैं? सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, यह एक संवैधानिक मुद्दा है, जिसपर बहस की जरूरत है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह कांग्रेस की याचिका पर 2 हफ्ते में जवाब दे।
कोर्ट ने कांग्रेस के वकील से कहा कि जनवरी 2014 में चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के बाद से हुए कई राज्यसभा चुनाव हुए, उस वक्त आप कहाँ थे और अब जबकि ये आपके फेवर में नही है तब इसे क्यों चुनौती दे रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस बात पर सुनवाई के लिए तैयार है कि राज्यसभा चुनाव में नोटा का प्रावधान संवैधानिक है या नहीं, लेकिन सवाल ये है कि केवल इसी चुनाव के लिए ही क्यों ? चुनाव आयोग ने भी कोर्ट में अपना पक्ष रखा। आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नोटा का प्रावधान किया गया है और उसके बाद कई चुनाव हुए जिसमे नोटा का इस्तेमाल भी हुआ।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद एनडीए सरकार ने इस मामले में रणनीतिक चुप्पी साध रखी है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि गुजरात चुनाव में नोटा के इस्तेमाल को लेकर ईसी की ओर से 24 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन से सरकार का कोई संबंध नहीं है। गुजरात की सीटों के लिए होने जा रहे राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प का इस्तेमाल होने जा रहा है। बीजेपी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी और बलवंत सिंह राजपूत को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की तरफ से एकमात्र उम्मीदवार अहमद पटेल हैं। कांग्रेस ने नोटा के इस्तेमाल पर ऐतराज जताया है। कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव आयोग बिना संवैधानिक संशोधन के राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प का इस्तेमाल नहीं कर सकता। कांग्रेस ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 84 का उल्लंघन है।
चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर हुए राजनीतिक विवाद पर करारा जवाब दिया। आयोग ने बुधवार को कहा कि राज्यसभा चुनाव में बैलट पेपर में नोटा के इस्तेमाल करने की पहली घटना नहीं है। आयोग ने आंकड़ों के साथ कहा कि 2014 से लेकर अब तक राज्यसभा के चुनाव 25 बार हुए जिनमें 95 सीटों पर वोटिंग हुई। इन सभी सीटों पर नोटा का इस्तेमाल हुआ था।

11 करोड़ नकदी बरामद, आभूषणों की कीमत का आंकलन करने में जुटी टीम

कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार और उनके सहायकों पर कथित कर चोरी के मामले को लेकर उनके कई ठिकानों पर चल रही आयकर विभाग की तलाशी में अब तक 11 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी बरामद हुई है। गुजरात में राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर विधायकों को भाजपा के पाले में जाने से रोकने के लिए कांग्रेस के 44 विधायकों को बेंगलूरू के रिजॉर्ट में रखा गया और उनकी जिम्मेदारी शिवकुमार को दी गई। गुजरात राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल कड़े मुकाबले का सामना कर रहे हैं।
गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भी कई ठिकानों पर छापेमारी जारी रही। आयकर अधिकारियों ने कई दस्तावेज, अकाउंट बुक्स और वित्तीय कागजात बरामद किए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तक दिल्ली से करीब 8.33 करोड़ रुपये, बेंगलूरू से 2.5 करोड़ रुपये और मैसुर से 60 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। अधिकारी ने कहा, ‘‘विभिन्न ठिकानों से अभी तक करीब 11.43 करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं। कुछ ठिकानों पर तलाशी चल रही है।’’
उन्होंने बताया कि तलाशी के दौरान मिले कुछ आभूषणों की कीमत का आकंलन किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि विभाग कुछ कथित बेनामी संपत्ति समेत रियल एस्टेट में निवेशों से संबंधित दस्तावेजों का विश्लेषण भी कर रहा है। विभाग ने कहा कि वह कथित कर चोरी और रियल एस्टेट, आभूषण और अन्य क्षेत्रों में बड़े गुप्त निवेश के मामले में शिवकुमार की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि विभाग सिंगापुर और अन्य देशों में उनसे जुड़े निवेशों की जांच भी कर रहा है। आयकर विभाग ने कर चोरी के मामले में शिवकुमार के 64 ठिकानों और संपत्तियों पर कल तलाशी ली थी जिससे राजनीतिक तूफान आ गया था। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस शिवकुमार पर छापों के खिलाफ आज शहर में प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस ने केंद्र पर तानाशाही वाला रवैया अपनाने और लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाया है। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले शिवकुमार वोक्कालिंगा समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं और देश के सबसे अमीर मंत्रियों में से एक हैं।
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव के लिए दायर किए गए हलफनामे में उन्होंने अपनी संपत्ति 251 करोड़ रुपये से ज्यादा की बताई थी। कांग्रेस आलाकमान से नजदीकी रखने वाले 55 वर्षीय शिवकुमार को पार्टी को मुश्किल से निकालने वाला माना जाता है। वह छह बार विधायक रहे हैं। उन्हें मुख्यमंत्री बनने की उनकी महत्वाकांक्षा के लिए भी जाना जाता है। रिजॉर्ट पर कल मारे गए छापे को लेकर संसद में भारी हंगामा हुआ तथा कांग्रेस ने इसे एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए अभूतपूर्व रूप से निशाना बनाने वाला बताया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि भाजपा के खिलाफ आवाज को दबाने के लिए यह राजनीति से प्रेरित कार्रवाई है।

गिलानी के बेटे की मांग, आने जाने का खर्च दे एनआईए

टेरर फंडिंग के सिलसिले में दिल्ली बुलाये गये हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नसीम ने भारत सरकार से अजीब मांग की है। अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का छोटा बेटा नसीम गिलानी की मांग है कि जम्मू-कश्मीर सरकार उसे श्रीनगर से दिल्ली और दिल्ली से वापस श्रीनगर जाने का खर्च दे। अंग्रेजी वेबसाइट एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक एनआईए चीफ शरद कुमार तब आश्चर्यचकित रह गये जब उनके डेस्क पर अलगाववादी नेता नसीम गिलानी की ओर से एक पत्र आया। जम्मू कश्मीर के शेर ए कश्मीर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर नसीम गिलानी ने इस पत्र के जरिये कहा है कि एनआईए को सीधे उसे समन भेजने के बजाए यूनिवर्सिटी को भेजना चाहिए, ताकि वो दिल्ली आने जाने का खर्चा विश्वविद्यालय से ले सके। नसीम गिलानी ने कहा कि एनआईए को समन मेरे विश्वविद्यालय को भेजना चाहिए ताकि मैं महंगाई और ट्रेवलिंग एलाउंस ले सकूं। फिलहाल एनआईए ने नसीम की इस अपील को मान लिया है कि लेकिन उन्हें लगता है कि नसीम की इस मांग का मकसद कुछ और है।
बता दें कि टेरर फंडिग के इस केस में एनआईए ने लगभग आधा दर्जन अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया है। इसमें सैयद अली शाह गिलानी का दामाद अल्ताफ अहमद शाह भी शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नसीम गिलानी चाहता है कि यूनिवर्सिटी के जरिये समन मिलने पर वो ऐसी स्थिति पैदा कर दे ताकि एनआईए उसे पूछताछ के लिए अल्ताफ अहमद शाह के आमने-सामने ना ला सके। इस मामले में नसीम गिलानी का बड़ा भाई नईम गिलानी भी एनआईए के रडार पर है, लेकिन समन भेजे जाने के बावजूद बीमारी का बहाना बनाकर वो एनआईए के सामने पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुआ है।
बता दें कि हुर्रियत नेताओं पर आरोप है कि इन लोगों ने प्रतिबंधित आतंकी संगठनों हिज्बुल मुजाहिद्दीन और लश्कर ए तैयबा के साथ मिलकर कश्मीर घाटी में हिंसा और हंगामा करने के लिए पाकिस्तान से फंड लिया। एनआईए ने इसी मामले में हुर्रियत के नेताओं को गिरफ्तार किया है। एनआईए को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान ऐसा सबूत मिलेगा जिससे सैयद अली शाह गिलानी पर भी मुकदमा चलाया जा सके। खबर है कि प्रवर्तन निदेशालय से पूछताछ के दौरान इस मामले में गिरफ्तार शबीर शाह ने गिलानी की ओर इशारा किया है और कहा है कि पाकिस्तान से आने वाले फंड का बड़ा हिस्सा गिलानी के पास जाता था। जांच एजेंसियां अब इस मामले में सबूत इकट्ठा कर रही हैं।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मिल रहा युवाओं को रोजगार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरूवार को न्यू कैंट रोड स्थित जनता दर्शन हॉल में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अन्तर्गत राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज युवा पीढ़ी स्वरोजगार की ओर तेजी से अग्रसर हो रही है। युवा पीढ़ी समझ चुकी है कि रोजगार का सबसे अच्छा साधन स्वरोजगार है। उन्होंने कहा कि विभिन्न लघु, मध्यम एवं सूक्ष्म उद्यमों के विकास से जहां अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा साथ ही इससे स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि आधुनिक तकनीकि युग में मशीनीकरण तेजी से हो रहा है, इसके साथ ही घरेलू उत्पादों की ओर लोगों को रूझान भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में घरेलू उत्पादों के विकास हेतु अपार सम्भावनाए हैं। राज्य में घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग के लिए स्किल डेवलपमेंट की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने युवाओं को विभिन्न उद्यमों के माध्यम से स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया, जिससे अन्य लोग भी इन उद्यमों में कार्य कर सके और उन्हें भी रोजगार के अवसर प्रदान हो सके। किसी भी उद्यम, राज्य या देश के विकास के लिए सभी का समन्वय एवं सहयोग जरूरी है। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों द्वारा लगाये गये विभिन्न स्टालों का भी अवलोकन किया। पी.एम.ई.जी.पी कार्यक्रम के तहत सराहनीय कार्य करने पर उद्योग विभाग एवं बैकों के अधिकारियों को पुरस्कृत भी किया।
प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में 9487 इकाईयां स्थापित की गई है तथा 138.41 करोड़ रूपये की मार्जिन मनी वितरित की गई तथा 63,791 लोगों को रोजगार मिला है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने के लिए 1 जुलाई 2016 से ऑनलाइन डीबीटी सिस्टम को अनिवार्य रुप से लागू किया गया, जिसके अंतर्गत जो भी आवेदन पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत प्राप्त होंगे, उनका निस्तारण मार्जिन मनी समायोजन तक ऑनलाइन किया जाएगा। कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत पिछले वर्ष उत्तराखण्ड को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।

बेटे की शहादत पर बोले पिता, आरपार की लड़ाई हो

कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए उत्तराखंड का एक और लाल शहीद हो गया है। मूल रूप से अल्मोड़ा के कनालीछीना के रहने वाले व हाल निवासी हल्द्वानी के ऊंचा पुल क्षेत्र के हिम्मतपुर मल्ला गांव के मेजर कमलेश पांडे जम्मू कश्मीर के शोफिया क्षेत्र में बुधवार देर रात आतंकियों से लड़ते शहीद हो गए। शहीद मेजर कमलेश पांडे का पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंच गया है और देर रात तक हल्द्वानी उनके ऊंचा पुल स्थित उनके आवास में ससम्मान उनका पार्थिव शरीर पहुंचेगा और कल रानी बाग स्थित चित्रशीला घाट में सैन्य सम्मान के साथ शहीद मेजर कमलेश पांडे की अंत्येष्टि की जाएगी। कमलेश पांडे की शहादत का समाचार जैसे ही उनके परिवार के पास पहुंचा तो पूरा परिवार गमगीन हो गया। मेजर कमलेश पांडे 28 साल के थे और उनकी एक दो साल की बेटी भी है और उनकी पत्नी गाजियाबाद में नौकरी करती है जोकि देर शाम तक हल्द्वानी स्थित अपने आवास पहुंच जाएगी। शहीद मेजर कमलेश पांडे के पिता मोहन चंद्र पांडेय भी आर्मी से रिटायर हैं। मोहन चंद्र पांडे आर्मी में हवलदार थे, शहीद मेजर कमलेश पांडे का छोटा भाई भी आर्मी में तैनात है। शहीद के पिता मोहन चंद्र पांडे का कहना है कि उनको अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। लेकिन वह देश के राजनेताओं से चाहते हैं कि एक बार पाकिस्तान से आर पार की लड़ाई हर हाल में होनी चाहिए तभी इस तरह की शहादत रुकेंगे। अपने बेटे को देश की रक्षा में खो चुके है लेकिन उनका मानना है कि जिस तरह घर में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध हुआ। उसी तरह इस बार भी होना चाहिए क्योंकि पाकिस्तान को तभी सबक मिलेगा। उधर, शहीद कमलेश पांडे के घर पहुंचे आर्मी के अधिकारियों ने परिवार को दिलासा दिलाई और देर शाम तक शहीद मेजर कमलेश पांडे के पार्थिव शरीर को उनके आवास लाए जाने की सूचना दी।