किचन में जाते साथ ही चोटी से हाथ गवां बैठी पत्नी

परिवार के सारे लोग आंगन में बैठे थे। इस बीच महिला कमरे में गई और जोरदार चीख मारकर बेहोश हो गई। चीख सुनकर परिजन जब वहां पहुंचे तो महिला की चोटी कटी मिली। इस घटना से रुड़की में भी भय का माहौल पैदा हो गया है।
उत्तराखंड में सहसपुर के बाद अब रुड़की में भी चोटी काटने का मामला सामने आया। यह ताजा मामला गंगनहर कोतवाली क्षेत्र के तेलीवाला गांव का है। बताया जा रहा है कि जावेद का के घर के सभी लोग रात करीब नौ बजे आंगन में बैठे टेलीविजन देख रहे थे। घर का मेनगेट बंद था। इस बीच जावेद की पत्नी खुशनुमा (21) किसी काम से कमरे में गई। कमरे में जाते ही उसकी चीख सुनाई दी। इस पर परिवार के लोग जब वहां पहुंचे तो खुशनुमा बेहोश मिली। उसकी चोटी कटी हुई थी।
होश में आने के बाद महिला ने परिजनों को बताया कि उसे एक साया नजर आया। इसके बाद क्या हुआ, उसे पता नहीं चला। घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। वहीं पुलिस भी मौके पर गई और मामले की जानकारी ली। वहीं, गांव में एक ओर महिला की चोटी काटे जाने की अफवाह उड़ी। गंगनहर कोतवाली प्रभारी अमर चंद शर्मा ने बताया कि मामले कि जांच की जा रही है। पुलिस घटना को संदिग्ध मान रही है।

प्रदेश में शराब को बंद नही किया जा सकताः खजान दास

भाजपा विधायक खजान दास ने मसूरी में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि प्रदेश के किसान क्यों आत्मा हत्या कर रहे है, इसको लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत द्वारा जांच बैठा दी गई है। वही प्रदेश का किसान स्वाभिमानी है और उनको नही लगता है कि किसान ऋण से परेशान होकर आत्माहत्या कर रहा है। उन्होने कहा कि किसानोे के ऋण को माफ करने कि स्थिति में प्रदेश सरकार नही है क्योकि प्रदेश पर पहले ही 45 हजार करोड का कर्ज है। जिसमें 11 हजार करोड रूपये का ऋण किसानो पर है। वही प्रदेश में आय के सोत्र सीमित है ऐसे में किसानो के ऋण का माफ किया जाना मुश्किल है। उन्होने कहा कि प्रदेश में शराब को बंद नही किया जा सकता क्योकि अबकारी और खनन से राजस्व आता है। परन्तु खनन पर भी हाईकोर्ट के द्वारा रोक लगी हुई है। वही अगर नदीयों से चुगान और शराब के आने वाला राजस्व ही बद हो जायेगा तो प्रदेश को भारी परेशानियों का सामना करना पडेगा। उन्होने बताया कि इन्ही दिक्कतो को समाप्त करने के लिये प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत लगातार प्रयास कर रहे है। जिसको लेकर वह प्रधानमंत्री से सम्पर्क कर प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की मांग कर रहे है।

देहरादून आएं फार्मासिस्ट की स्वाइन फ्लू से मौत!

रामनगर के पीरुमदारा में स्वाइन फ्लू से हुई फार्मासिस्ट की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग मे हडकम्प मचा हुआ है। सीएमओ डा. एचके जोशी ने सोमवार को रामनगर का दौरा किया। उन्होंने मृतक के करीबियों को स्वाइन फ्लू की दवाइयां दी। उन्होंने मृतक की रिपोर्ट देखने के बाद माना कि मौत
स्वाइन फ्लू से ही हुई है। बताया जा रहा है फार्मेसिस्ट अपने निजी काम से देहरादून गया था। जहां भीडभाड वाले इलाके में इस वायरस ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। जिसके बाद दिल्ली में उसकी पुष्टि हुई, और दिल्ली में ही इलाज के दौरान कल उसकी मृत्यु हो गई। सीएमओ ने कहा कि इस क्षेत्र में अभी तक यह वायरस सक्रिय नही है। इसलिए इससे घबराने की कोई जरुरत नही है। यदि सर्दी-जुकाम और बुखार की शिकायत हो तो अस्पताल में अपना इलाज करायें।

लायंस क्लब से जुड़ी महिलाओं ने आईटीबीपी जवानों की राखी बांधी

रक्षाबन्धन भाई-बहिन के प्यार का त्यौहार है जिसमें भाई बहिन की हर परिस्थिति में रक्षा करने का वचन देता है। सीमा पर तैनात जवान पूरे देश की रक्षा करते है लेकिन रक्षाबन्धन समेत तमाम त्यौहारों में अपनी बहिनों से उन्हे दूर रहना पड़ता है। ऐसे में लायंस क्लब ऋषिकेश रॉयल की महिला इकाई द्वारा आईटीबीपी के जवानों के साथ रक्षा बंधन का त्योहार मनाया गया। लायंस क्लब रॉयल की महिलाओ ने राखियॉ लेकर आईटीबीपी कैम्प में फौजी भाइयो को हाथों से बनाई राखी बांधी। लायंस क्लब रॉयल की महिला इकाई की क्लब कॉर्डिनेटर लायन कोमल मखीजा का कहना है कि राखी के त्योहार में बहन अपने भाई को राखी बांधती है। बदले में उनसे यह उम्मीद करती है कि वह उसकी हर बुराई से रक्षा करे और हमारे देश के सैनिक ही सही मायनों में हमारे रक्षक है। जो कि हमारी व भारत माता की रक्षा सीमा पर रह कर कर रहे है। वह अधिकतर त्योहार में अपने घर परिवार से दूर होते है। इस लिए उनके क्लब के द्वारा इस वर्ष रक्षा बंधन का त्योहार उनके साथ मनाया।

देश में बैंकिंग महंगी होने के पीछे नोटबंदी और जीएसटी का असर!

कई दशकों से बैकों के कर्ज और कर्ज माफी से उनकी सेहत खराब हो चुकी है। सरकारी बैंकों का इंफ्रा और पॉवर सेक्टर में निवेश डूबा है जिसके चलते उन्हें 6.1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस नुकसान से बैंकों की कारोबारी तेजी लाने के लिए नया कर्ज देने की क्षमता को भी नुकसान हुआ है। वहीं सबसे ज्यादा डूबा कर्ज स्टील, टेक्सटाइल, पॉवर और इंफ्रा क्षेत्र में रहा है। गौरतलब है कि इन क्षेत्रों को दिए गए कर्ज यदि सही कंपनियों को दिए गए होते तो आज बैंकों को सबसे बड़ा मुनाफा इन्ही कर्ज के ब्याज पर होती और ग्राहकों को अच्छी से अच्छी सुविधा सस्ती दरों पर दी जा सकती थी, लेकिन अब बीमार पड़े बैंकों के पास ग्राहकों से धनउगाही कर अपनी लागत घटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
नोटबंदी और जीएसटी ने देश में बैंकिंग को महंगा कर दिया। नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू होने के बाद बैंकों द्वारा मिलने वाली कई मुफ्त सेवाओं पर चार्ज लगा दिया गया था। फिर जुलाई से लागू जीएसटी ने इन चार्जेस पर टैक्स लगाकर आम आदमी के लिए बैंकिंग सेवा को महंगा कर दिया। देश में बैंकों ने बढ़े हुए बैंकिग चार्जेस को अच्छी सुविधा देने क लिए जरूरी बताया तो रिजर्व बैंक ने कहा कि इससे बैंक को चलाने का खर्च कम किया जा सकेगा।
लेकिन अब बैंक ग्राहकों को केन्द्र सरकार और आरबीआई की दलील रास नहीं आ रही है जिसके चलते अलग-अलग फोरम पर बैंकों द्वारा वसूले जा रहे चार्जेस को मनमाने ढंग के उगाही तक कहा जा रहा है। लगातार बढ़ती शिकायतों के चलते केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक भी अब मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है।

कैसे चार्ज वसूल रहा बैंक
– बैंक ब्रांच और एटीएम से सीमित मुफ्त निकासी के बाद खाताधारकों से ट्रांजैक्शन चार्ज वसूला जा रहा है
– इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर जैसे नेफ्ट, आरटीजीएस और यूपीआई सेवाओं का इस्तेमाल करने के चार्ज में इजाफा
– एक फ्री चेकबुक के बाद नई चेकबुक लेने पर बैंक द्वारा फीस ली जा रही है
– ग्राहकों द्वारा मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करने पर बैंक फीस ले रही है
– इन सभी चार्जेस पर बैंक द्वारा जीएसटी के नाम पर भी ग्राहकों से पैसा वसूला जा रहा है

ये है बैंकों की सफाई
अब बैंक में पैसा रखने पर ग्राहकों को मिलने वाले ब्याज दर में भी कटौती कर बैंकों ने अपनी कमाई बढ़ा ली है। इन सभी कदमों को जायज ठहराने के लिए बैंक की दलील है कि इस कदम से उनके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट में लगातार इजाफा हो रहा है। बैंकों को अपनी सेवाओं का विस्तार करने की लागत और मौजूदा ब्रांचेस को चलाने का खर्च बढ़ रहा है। इसके अलावा बैंकों की दलील है कि पहले के मुकाबले देश में बैंकिंग सुविधा में बड़ा सुधार दर्ज हुआ है। इस सुधारी हुई बैंकिंग की लागत को ग्राहकों को भी वहन करने की जरूरत है। वहीं बैंकों की यह भी दलील है कि ट्रांजैक्शन चार्ज केवल भारत में नहीं लिया जा रहा है। दुनियाभर के बैंकों में ग्राहकों से ऐसे चार्ज वसूले जाते है।

गैरकानूनी ढंग से कब्जाई जमीन से हटाना होगा राजीव गांधी ट्रस्ट को अपना कब्जा

आखिरकार लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अमेठी जिला प्रशाषन ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर चल रहे चौरिटी ट्रस्ट द्वारा गैरकानूनी ढंग के कब्जा की गई जमीन को खाली करने का आदेश जारी कर दिया गया है। राजीव गांधी चौरिटेबल ट्रस्ट ने अमेठी के रोखा गांव में लगभग 1 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा जमा रखा था। यह जमीन स्वयं सेवी ग्रुप के सदस्यों को वोकेश्नल ट्रेनिंग देने के लिए आवंटित किया गया था लेकिन इसपर राजीव गांधी ट्रस्ट ने कब्जा कर लिया था।
गौरतलब है कि राजीव गांधी ट्रस्ट द्वारा जमीन पर कब्जे की बात सबसे पहले केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने उठाया था। ईरानी 2014 लोकसभा चुनावों में अमेठी से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ लड़ी थी लेकिन उन्हें चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। लेकिन केन्द्रीय मंत्री की ट्रस्ट द्वारा जमीन कब्जे के आरोप पर तत्कालीन अखिलेश सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। लेकिन 2017 में राज्य में बीजेपी की योगी सरकार बनने के बाद राज्य सरकार ने स्मृति ईरानी के आरोपों की जांच करते हुए पाया कि गांव की जमीन पर राजीव गांधी ट्रस्ट ने गैरकानूनी कब्जा कर रखा था।
राज्य सरकार द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए राजीव गांधी ट्रस्ट को पहली नोटिस 27 मार्च 2017 को दी गई। इसके बाद अलग-अलग स्तर से 10 अप्रैल और 28 अप्रैल को ट्रस्ट को राज्य सरकार की तरफ से दूसरा और तीसरा नोटिस जारी किया गया। नोटिस के जरिए ट्रस्ट से जमीन पर अधिपत्य के कारण और जमीन के इस्तेमाल पर सवाल किया गया था। राजीव गांधी ट्रस्ट को जमीन पर कब्जे को उचित दिखाने के लिए दस्तावेज जमा करने के लिए भी कहा गया।
राज्य सरकार के मुताबिक इन तीन नोटिस के बाद राजीव गांधी ट्रस्ट की तरफ से दिया गया बयान अधूरा था और जमीन पर उसके मालिकाना हक को साबित नहीं किया जा सका। जिसके बाद राज्य सरकार ने ट्रस्ट को जल्द से जल्द जमीन से अपना कब्जा हटाने का फैसला सुनाया है।

फेसबुक पेज से जनता के बीच जायेगी उत्तराखंड सरकार

सोशल मीडिया में जनता के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने के मकसद से आज फेसबुक के पॉलिसी प्रोग्राम मैनेजर (साउथ एशिया) नितिन सलूजा ने राज्य के सचिव और निदेशक स्तर के अधिकारियों केे साथ सोशल मीडिया पर जनता के साथ सीधा और प्रभावी संवाद स्थापित करने पर चर्चा की। सचिवालय में आयोजित कार्यशाला में सलूजा ने अधिकारियों को बताया कि कैसे सोशल मीडिया के जरिए जनता के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करके उनकी समस्याओं को दूर किया जा सकता है।
सलूजा ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की पहल पर उत्तराखण्ड, देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जिसका हर विभाग फेसबुक के माध्यम से जनता से जुड़ा हो। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देशों के अनुसार सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी अपने अपने विभागों के फेसबुक पेज बनाएंगे और फेसबुक के माध्यम से जनता की समस्याओं को सुनेंगे। अधिकारी विभागों के फेसबुक पेज दिन प्रतिदिन विभागों की उपलब्धियों को अपडेट करेंगे।
कार्यशाला में बताया गया कि अधिकारियों को विभागों की उपलब्धियों और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी फेसबुक पर अपडेट करनी होगी जिससे सोशल मीडिया के जरिए जनता को इनकी जानकारी मिल सके और जनता योजनाओं का लाभ ले सके। विभागों के फेसबुक पेज पर जनता की शिकायकतों को भी सुना जा सकता है और उनका त्वरित निस्तारण भी किया जा सकता है। विभागों को बेहतर क्रियान्वयन के लिए जनता अलग अलग विभागों के फेसबुक पेज पर सीधे अपने सुझाव दे सकती है, जिससे जनता के प्रति विभागों की जवाबदेही पहले से ज्यादा असरदार हो जाएगी। फेसबुक की पहुंच आज दुनिया के कोने कोने तक है इस वजह से फेसबुक पेज का इस्तेमाल करके विभागों की पहुंच हर घर तक, खासतौर से युवा वर्ग तक आसानी से हो सकती है।

हत्या के बाद सीसीटीवी की डीबीआर भी ले उड़े बदमाश

रुड़की कोतवाली सिविल लाइंस इलाके बेलड़ी गांव मे बदमाशों ने एक पाइप फैक्ट्री के गोदाम में दो चौकीदारों की धारदार हथियार से हत्या कर दी। दोनों चाचा-भतीजे थे। गोदाम का सामान सलामत होने का कारण हत्या का कारण उलझ गया। वहीं, हत्यारे सीसीटीवी की डीबीआर साथ ले गए।
रुड़की निवासी रमेश का बेलड़ी गांव में उत्तराखंड पाईप के नाम से गोदाम है। इस गोदाम की सुरक्षा के लिए चौकीदार मेघराज (40) और इंद्र सिंह (70) रात को गोदाम में ही सो रहे थे। मेघराज इंद्र सिंह का भतीजा था। दोनों रुड़की कोतवाली के अंतर्गत शेरपुर गांव के रहने वाले थे। 
बताया जा रहा है कि सुबह एक ट्रक चालक सामान लेकर गोदाम पहुंचा तो मुख्य गेट खुला मिला। इस पर वह भीतर गया तो वहां बिस्तर पर इंद्र सिंह और मेघराज के शव मिले। दोनों के शरीर पर कई स्थानों पर घाव के निशान थे।
इस पर चालक ने गोदाम स्वामी को सूचना दी। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस के मुताबिक गोदाम का सामान सुरक्षित है। हालांकि बदमाश सीसीटीवी की डीबीआर साथ ले गए। ऐसे में हत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। मेघराज दिव्यांग था। दोनों करीब दो साल से गोदाम में चोकीदारी कर रहे थे। 

हिन्दू है जिम्मेदार तो जिन्ना ने पाकिस्तान की क्यों की थी मांग

पाकिस्तान अपने राष्ट्रवादी नजरिए के मुताबिक इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने का काम कर रहा है। इसके लिए इतिहास की किताबों को हथियार बनाते हुए यह बताया जाता है कि जब 70 साल पहले भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान हुए खून-खराबे के लिए हिंदू जिम्मेदार हैं।
पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत के स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली सरकारी मान्यता प्राप्त ग्रेड पांच की इतिहास की किताबों में हिंदुओं को ‘हत्यारा’ बताया गया है, जिन्होंने मुसलमानों का नरसंहार किया, उनकी संपत्ति जब्त कर ली और उन्हें भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के 17 साल के नोमान अफजल ने अपनी इतिहास की किताब में लिखे एक उत्तर का जिक्र करते हुए कहा, वे हमें नीचा समझते थे, इसलिए हमने पाकिस्तान बनाया।
महात्मा गांधी के अध्याय, इस बात का साफ उदाहरण है कि सीमा के दोनों और बंटवारे को कितना अलग-अलग तरीके से पेश किया गया है। पाकिस्तान में आजादी के लिए गांधी के संघर्ष का कुछ खास जिक्र नहीं किया गया है, जबकि भारत में उन्हें ‘वन मैन आर्मी’ के तौर पर पेश किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दी राहत, शराब की दुकानें होंगी बहाल

राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में हाईवे पर शराब के ठेके और बार खुल सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने नौ पहाड़ी जिलों में हाईवे पर 500 और 220 मीटर दूरी की बाध्यता खत्म कर दी है। देहरादून और नैनीताल की सात तहसीलों को भी इस छूट का लाभ दिया गया है।
शुक्रवार को इसके आदेश मिलने के बाद आबकारी विभाग ने इस पर काम शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने सिक्कम में हाईवे पर दुकान खोलने के लिए दूरी में दी जा रही छूट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी। जिसमें कहा गया था कि उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों की परिस्थितियां भी सिक्किम की तरह हैं। ऐसे में यहां भी उसी आधार पर हाईवे में शराब की दुकानें, ठेके और बार खोलने में दूरी की छूट दी जाए।
इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुक्रवार को सरकार के पक्ष में फैसला दिया। जिसमें कहा गया कि सिक्कम के लिए मार्च में दी गई छूट के आधार पर ही उत्तराखंड के नौ पहाड़ी जिलों में दुकानें या बार खोलने के लिए हाईवे से 500 मीटर और 220 मीटर दूरी की बाध्यता नहीं रहेगी। आबकारी आयुक्त युगल किशोर पंत ने इसकी पुष्टि की है।

इन जिलों में मिलेगी छूट
कोर्ट के इस फैसले से चमोली, चंपावत, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग में अब ठेके खोलने के लिए हाईवे से 500 मीटर या 220 मीटर की दूरी नहीं रखनी पड़ेगी। इससे विभाग को राजस्व का भी फायदा होगा।