स्पीकर प्रेमचंद ने जम्मूतवी ट्रेन को योगनगरी रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

ऋषिकेश से जम्मू तक जाने वाली जम्मूतवी ट्रेन अब ऋषिकेश के पुराने रेलवे स्टेशन से नहीं, बल्कि नए योगनगरी रेलवे स्टेशन से संचालित होगी। आज इस ट्रेन को विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दोपहर तीन बजकर 40 मिनट पर योगनगरी रेलवे स्टेशन से जम्मूतवी ट्रेन संचालित हुई। इस मौके पर यात्रियों में अलग ही उत्साह देखने को मिला।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि योग नगरी ऋषिकेश से जम्मू तवी (ट्रेन सं०04605) के लिए रेल यातायात को खोले जाने पर उन्हें अत्यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है।उन्होंने कहा कि योग नगरी ऋषिकेश में विहंगम दृश्य वाली पहाड़ी शैली से बनाया गया स्टेशन यहां आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को आकर्षित करेगा। योग नगरी ऋषिकेश स्टेशन से संचालित सभी ट्रेनें उत्तराखंड की जनता के आवागमन को सुगम एवं सुरक्षित करेगी एवं उत्तराखंड को भारत के पर्यटन मानचित्र में स्थापित करने का भी काम करेगी।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड की रेल परियोजना में प्रकृति के संरक्षण के लिए भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है जिसका सफल उदाहरण वीरभद्र से योग नगरी ऋषिकेश स्टेशन के मार्ग पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में स्थित चारों धामों को रेल मार्ग से जोड़ने का संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में लिया गया था, इसी सपने को साकार करने के उद्देश्य से 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य तीव्र गति से चल रहा है।श्री श्री अग्रवाल ने कहा कि इस महत्वकांक्षी परियोजना के 105 किलोमीटर हिस्से का निर्माण पहाड़ों के भीतर 70 सुरंग एवं नदियों के ऊपर 16 पुलों के निर्माण के रुप में होना है, परियोजना में 14.7 किलोमीटर भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग का भी निर्माण किया जाना है साथ ही शिवपुरी, व्यासी, देवप्रयाग, श्रीनगर, धारी देवी, रुद्रप्रयाग, गौचर, कर्णप्रयाग सहित 12 स्टेशनों का निर्माण होना है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस परियोजना से पर्यटन के अलावा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से राज्य की जनता को रोजगार के नये अवसर भी प्राप्त होंगे। विधानसभा अध्यक्ष ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री पीयूष गोयल का आभार व्यक्त किया है।

इस मौके पर मुरादाबाद मंडल रेल प्रबंधक तरुण प्रकाश, मंडल वाणिज्य प्रबंधक रेखा शर्मा, मैकेनिकल इंजीनियर समर्थ सिंह, स्टेशन प्रबंधक ज्ञानेंद्र सिंह परिहार, मेयर अनिता मंमगाई, ऋषिकेश मंडल अध्यक्ष दिनेश सती, प्रदेश उपाध्यक्ष कुसुम कंडवाल, जिला महामंत्री सुदेश कंडवाल, राजेश जुगलान, पार्षद वीरेंद्र रमोला, पार्षद विपिन पंत, पार्षद बिजेंद्र मोगा, पार्षद ऋषि कांत गुप्ता, पार्षद संजीव पाल, पार्षद राजू नरसिम्हा, पार्षद शिव कुमार गौतम, अरुण बडोनी, सीमा रानी, मनोज शर्मा, गोपाल सती, सुमित पवार, मुकेश ग्रोवर, सुमित सेठी, सचिन अग्रवाल, रविंद्र राणा, ऋषि राजपूत, पार्षद प्रदीप कोहली, रजनी बिष्ट, भूपेंद्र राणा, अरविंद गुप्ता, अनीता तिवाडी, विनोद भट्ट, जयंत शर्मा, मनोज ध्यानी, विनीत रामपाल, विजय बडोनी आदि उपस्थित थे।

नजरियाः अब श्रद्धालु आसानी से जा सकेंगे बदरीनाथ धाम

डोबराचांटी पुल के बाद त्रिवेन्द्र सरकार ने एक और ऐसे प्रोजेक्ट का काम पूरा कर लिया है जो बीते ढाई दशकों (26 वर्ष) से अटका हुआ था। बदरीनाथ धाम की यात्रा में नासूर बने ‘लामबगड़ स्लाइड जोन’ का स्थायी ट्रीटमेंट कर लिया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की इच्छाशक्ति और सख्ती की बदौलत यह प्रोजेक्ट महज दो वर्ष में ही पूरा हो गया। तकरीबन
500 मीटर लम्बे स्लाइड जोन का ट्रीटमेंट 107 करोड़ की लागत से किया गया। अब बदरीनाथधाम की यात्रा निर्बाध हो सकेगी, जिससे तीर्थयात्रियों को परेशानियों से निजात मिलेगी।

सीमांत जनपद चमोली में 26 साल पहले ऋषिकेश-बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर पाण्डुकेश्वर के पास लामबगड़ में पहाड़ के दरकने से स्लाड जोन बन गया। हल्की सी बारिश में ही पहाड़ से भारी मलवा सड़क पर आ जाने से हर साल बदरीनाथधाम की यात्रा अक्सर बाधित होने लगी। लगभग 500 मीटर लम्बा यह जोन यात्रा के लिए नासूर बन गया। पिछले ढाई दशकों में इस स्थान पर खासकर बरसात के दिनों मे कई वाहनों के मलवे में दबने के साथ ही कई लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। करोड़ों खर्च होने पर भी इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था। पूर्व मे जब लामबगड़ में बैराज का निर्माण किया जा रहा था, तब जेपी कंपनी ने इस स्थान सुरंग निर्माण का प्रस्ताव रखा, लेकिन उस वक्त यह सड़क बीआरओ के अधीन थी और बीआरओ ने भी सुरंग बनाने के लिए हामी भर दी थी। दोनों के एस्टीमेट कास्ट मे बड़ा अंतर होने के कारण मामला अधर मे लटक गया था। इसके बाद वर्ष 2013 की भीषण आपदा में लामबगड स्लाइड जोन में हाईवे का नामोनिशां मिट गया। तब सडक परिवहन मंत्रालय ने लामबगड स्लाइड जोन के स्थाई ट्रीटमेंट की जिम्मेदारी एनएच पीडब्लूडी को दी। एनएच से विदेशी कम्पनी मैकाफेरी नामक कंपनी ने यह कार्य लिया। फॉरेस्ट क्लीयरेंस समेत तमाम अड़चनों की वजह से ट्रीटमेंट का यह काम धीमा पड़ता गया।

वर्ष 2017 में त्रिवेन्द्र सरकार के सत्ता में आते ही ये तमाम अड़चनें मिशन मोड में दूर की गईं और दिसम्बर 2018 में प्रोजेक्ट का काम युद्धस्तर पर शुरू हुआ। महज दो वर्ष में अब यह ट्रीटमेंट पूरा हो चुका है। अगले 10 दिन के भीतर इसे जनता के लिए समर्पित कर दिया जाएगा। इसे त्रिवेन्द्र सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

उत्तराखंड हैं वास्तव में ईश्वर का घर

प्राचीन काल का मौलिक वातावरण, हिमालय की बुलंद चोटियां और अनेकानेक प्राणियों एवं वनस्पतियों का पर्यावास उत्तराखंड वास्तव में ईश्वर का घर है। यहां ऐसे कई मनोरम स्थल हैं जहां जाने की आकांक्षा दुनिया भर के लोगों के मन में है। कई जगहों के बारे में तो सैलानी बखूबी जानते हैं लेकिन शहरों की भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति में गोद में छुपे कई ऐसे भी स्थल हैं जिनसे कम ही लोग वाकिफ हैं। हिल स्टेशन खिरसु ऐसी ही जगह है पौड़ी जिले में 1700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल शांति की तलाश कर रहे लोगों के लिए बिल्कुल मुफीद है। इस छुपे नगीने तक पहुंचने के लिए पौड़ी शहर से 11 किलोमीटर उत्तर दिशा में जाना पड़ेगा।

सर्दियां आ चुकी हैं और यहां से बर्फ से भरे हिमालय के शिखरों का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। यहां के अछूते प्राकृतिक दृश्य शांतिमय वातावरण प्रदान करते हैं जहां आगंतुकों को बहुत तसल्ली मिलती है। शहरी जिंदगी की व्यस्तता से क्लांत पर्यटक यहां आध्यात्मिक सुकून और शरीर में नई ऊर्जा पाते हैं।

खिली धूप वाले दिन में आप साफ आकाश और चहचहाते पंछियों का दर्शन कर सकते हैं। चीड़, बांज, देवदार से ढके सुंदर पथ और उनके अगल-बगल हरियाली काई और दिलचस्प वनस्पतियां प्रत्येक इंसान में मौजूद भ्रमण-अनुरागी को चिंताओं से मुक्त कर देते हैं और उसे जीवन के वास्तविक अर्थ की खोज हेतु उन्मुख करते हैं। पहले खो जाने का ऐहसास और फिर अपनी आत्मा से जुड़ने का अनुभव व्यक्ति को छोटी-छोटी चीजों के महत्व के बारे में भी जागृत कर देता है। इस निराले शहर में आने वाला सैलानी प्रकृति के मध्य आनंद का पान करते हुए स्वयं को संपूर्ण अनुभव करता है।

कोविड-19 महामारी के इस दौर में ’वर्केशन’ शब्द भी लोकप्रिय हो रहा है, खासकर उत्तराखंड में। जो लोग प्राकृतिक सुषमा एवं शांति के संगम की तलाश में हैं, जहां पर दफ्तरी कार्य करने की उनकी क्षमता बढ़ जाए, उनके लिए खिरसु सही विकल्प है।

खिरसु की संभावनाओं और उत्तराखंड के अहम पर्यटन स्थल के तौर पर उसके विकास के बारे में उत्तराखंड पर्यटन के सचिव दिलीप जावलकर ने कहा, ’’उत्तराखंड में खिरसु जैसे बहुत से सुंदर स्थल हैं जिन पर अब तक पर्यटकों का अधिक ध्यान नहीं गया है। इस कोरोनाकाल में वर्केशन का ट्रैंड राज्य में फलफूल रहा है। हम इस आपदा को अवसर में बदलने के लिए निरंतर कार्यरत हैं तथा उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के लिए हम ऐसे और कई विकल्प पेश करते रहेंगे।’’

खिरसु में वर्केशन सुविधाओं एवं पर्यटकों के आगमन के बारे में पौड़ी जिले के पर्यटन विकास अधिकारी कुशल सिंह नेगी ने कहा, ’’खिरसु पौड़ी के बाहरी क्षेत्र में स्थित है, यह वास्तव में सैलानियों के लिए एक छुपा हुआ खजाना है। सरकार द्वारा पर्यटन संबंधी प्रतिबंध हटा दिए जाने के बाद से पर्यटकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। किसी भी राज्य का खालिस स्थानीय खानपान भी वह कारक होता है जो विभिन्न इलाकों के सैलानियों को आकर्षित करता है। इसी तथ्य के फलस्वरूप हमारे खिरसु में बासा होमस्टे की स्थापना हुई है जिसे यहां की स्थानीय महिलाओं द्वारा चलाया जाता है। वे अतिथियों को अत्यंत सुस्वादु भोजन परोसती हैं और लोक कथाएं भी सुनाती हैं। ऐसे कुछ अन्य प्रोजेक्ट भी निर्माणाधीन हैं जैसे बासा होमस्टे 2, हंटर हाउस और फिशरी होमस्टे।

सैर-सपाटे के लिए नजदीकी स्थल

ज्वाल्पा देवी मंदिरः यह प्रसिद्ध मंदिर है जो पौड़ी-कोटद्वार मार्ग पर स्थित है, पर्यटकों के बीच यह जगह खूब जानीमानी है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां शुद्ध हृदय से की गई प्रार्थनाएं अवश्य फलीभूत होती हैं। यह मंदिर पूरे साल भर खुला रहता है। हर साल नवरात्रों में यहां एक बड़ा धार्मिक मेला लगता है जिसमें पूरे क्षेत्र भर से लोग आते हैं। यहां बिना खर्च के कई विवाह भी सम्पन्न किए जाते हैं।

घंडीयाल देवता मंदिरः घंडियाल देवता का प्राचीन मंदिर स्थानीय भक्तों के बीच प्रसिद्ध है। इन्हें रक्षक देव भी कहा जाता है और मान्यता है कि ये देवता अभिमन्यु का अवतार हैं जो कि भगवान शिव के उपासक थे। घंडियाल मेला इस मंदिर का बहुत बड़ा आकर्षण है। यह 9 दिन 9 रात तक चलता है। आसपास के इलाकों में रहने वाले श्रद्धालु उच्च धार्मिक जज्बे के साथ इस मेले में भाग लेते हैं और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

खिरसु से आगे पर्यटकों के लिए घूमने वाले स्थल

श्रीनगरः यह शहर राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है। किसी जमाने में यह शहर गढ़वाल के राजाओं की राजधानी हुआ करता था, इस क्षेत्र में राज्य के विस्तार के लिए श्रीनगर की बहुत अहमियत थी। आज यहां गढ़वाल विश्वविद्यालय का केन्द्र है। इस क्षेत्र का यह सबसे बड़ा नगर है।

देवलगढ़ः खिरसु से श्रीनगर की दिशा में यह 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह गढ़वाल साम्राज्य की प्रमुख गढ़ राजधानियों में से एक है। यह साम्राज्य कितना समृद्ध हुआ करता था इसकी बानगी यहां आकर देखने को मिलती है। राज राजेश्वरी मंदिर और गौरी देवी मंदिर इस इलाके के मुख्य आकर्षण हैं।

उल्कागढ़ीः खिरसु (चैबट्टाखाल) से तीन किलोमीटर के फासले पर है उल्कागढ़ी। इसे एक छोटे मंदिर, उल्केशवरी मंदिर के लिए जाना जाता है तथा गढ़वाल साम्राज्य के बहुत से ढांचे भी इस इलाके में देखने को मिल जाएंगे।

पौड़ीः पौड़ी गढ़वाल का जिला मुख्यालय और गढ़वाल मंडल के आयुक्त का मुख्यालय भी यहां स्थित है। खिरसु से यह 20 किलोमीटर और श्रीनगर से 32 किलोमीटर है। पौड़ी के खूबसूरत हिल स्टेशन में औपनिवेशिक वास्तुशिल्प की शैली में कई टूरिस्ट बंगलो बने हुए हैं। यहां ठहरने के लिए आपको कई प्राइवेट होटल मिल जाएंगे। इस शहर में एक बड़ा बाजार भी है जहां से शॉपिंग के शौकीन आसपास के गांवों के निवासियों द्वारा बनाई गई स्थानीय वस्तुएं खरीद सकते हैं।

लैंसडाउनरू देश भर के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सबसे लंबे इतिहास वाला एक हिल स्टेशन है। यह हिल स्टेशन मोटर मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा है। यहां आकर आप शहर की भागमभाग जीवन से आराम मिल सकता है। लैंसडाउन में लंबे सप्ताहांत के ब्रेक के लिए पर्यटक आकर आनंद ले सकते हैं।

वाइल्डलाइफ व नमामि गंगे की टीमों ने किया गंगा अवलोकन केंद्र, गंगा वाटिका व संजय झील का निरीक्षण

विकास के रथ पर सवार नगर निगम के तीन महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों पर विभागीय अधिकारियों ने स्वीकृति की मुहर लगा दी है। आज निगम कार्यालय में वाइल्ड लाइफ व नमामि गंगे के टीम के अधिकारियों के साथ मेयर की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन हुई।

नूतन वर्ष में नगर निगम प्रशासन ने योग नगरी ऋषिकेश को पर्यटन हब के रूप में विकसित कर शहर वासियों को एक नायाब तोहफा देने की तैयारी पूरी कर ली है। संजय झील के जीर्णोद्धार के साथ साथ गंगा तट त्रिवेणी घाट पर गंगा अवलोकन केंद्र एवं आस्था पथ पर गंगा वाटिका के निर्माण के लिए विभागीय कवायद शुरू हो गई है। सब कुछ योजना मुताबिक रहा तो वर्ष 2021 में शहर की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के साथ यह तीनों योजनाएं भी धरातल पर उतरती हुई नजर आयेंगी।सोमवार की दोपहर नमामि गंगे की सेंट्रल टीम ने उत्तराखंड की वाइल्डलाइफ टीम के साथ तीनों महत्वाकांक्षी प्रोजेक्टों का स्थलीय निरीक्षण किया। नगर निगम आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वीरियाल ने भारतीय वन्यजीव संस्थान भारत सरकार के वरिष्ठ वैज्ञानिक श्रेयश, भारतीय पर्यटन विकास निगम के चिन्मय शर्मा, नमामि गंगे उत्तराखण्ड के सामाजिक विशेषज्ञ डॉ पूरन चन्द्र जोशी एवं संदीप उनियाल को मौका मुआयना करा कर तीनों योजनाओं की विस्तृत जानकारी अधिकारियों को दी। इसके पश्चात तमाम अधिकारी निगम कार्यालय में पहुंचे जहां महापौर को उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि तीनों प्रोजेक्टों का कांसेप्ट बहुत शानदार है ।इन योजनाओं को धरातल पर लाने के बाद पर्यटन के साथ-साथ तीर्थाटन को भी इसका लाभ मिलेगा। महापौर ममगाई ने बताया कि उनके द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान उत्तराखंड की विभागाध्यक्ष डॉ रुचि बडौला को त्रिवेणी घाट पर अवलोकन केन्द्र, आस्था पथ पर गंगा वाटिका एवं संजय झील के जीर्णोद्धार के लिए पत्र प्रेषित किया गया था ।उनके द्वारा तुरंत पत्र का संज्ञान लेकर आज जिस रफ्तार के साथ मौका मुआयना कराने के लिए टीमों को भेजा गया है उससे साफ है कि जल्द ही यह योजनाएं धरातल पर उतर कर ऋषिकेश को पर्यटन हब के रुप में विकसित कराने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

गंगा तट पर बनी ये अद्भुत पेंटिंग्स तीर्थनगरी की सुंदरता पर लगाएंगी चार चांदः अनिता

ऋषिकेश के आस्थापथ पर नगर निगम द्वारा शहर के उदयीमान कलाकारों द्वारा बनवाई गई पेंटिंग्स का आज दोपहर मेयर अनिता ममगाई ने लोकार्पण किया। मौके पर गंगा की स्वच्छता के लिए सजग प्रहरी बनकर कार्य करने की शपथ दिलाई गई। वहीं शहर में गंगा की स्वच्छता के लिए शानदार कार्य कर रहे रवि शास्त्री, रोहित प्रताप, अशोक बेलवाल को तीर्थ नगरी का स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया।

आज सांई घाट के समीप आस्था पथ पर बनी खूबसूरत पेंटिंग का लोकार्पण कर मेयर अनिता ने कहा कि शहर के कलाकारों द्वारा बनाई गई पेंटिंग से आस्था पथ की आभा में चार चांद लगाने का काम किया है ।यहां आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को इन पेंटिंग को देख कर उत्तराखंड की महान संस्कृति के दर्शन होंगे। पेंटिंग में गोमुख, हिमालय, भागीरथी नदी अलकनंदा नदी, देवप्रयाग संगम, कौड़ियाला, ऋषिकेश, त्रिवेणी घाट, हरिद्वार हरकी पैड़ी आदि का सजीव चित्रण देवभूमि के हुनरमंद कलाकारों द्वारा किया गया है। आस्थापथ पर 400 स्क्वायर फिट के एरिया में माँ गंगा की गोमुख से हरिद्वार तक कि यात्रा के जीवंत चित्रण की पेंटिंग सभी के आर्कषण का केन्द्र रही।

इस दौरान सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल, पार्षद मनीष शर्मा, विजय बडोनी, विजेंद्र मोगा, अनीता प्रधान, अनीता रैना, लक्ष्मी रावत, राजेश दिवाकर, उमा बृजपाल राणा, शकुंतला शर्मा, पंकज शर्मा, गौरव कैंथोला, शीलू अग्रवाल, प्रिया ढकाल, गुरविंदर सिंह, लक्ष्मी शर्मा, शैलेंद्र रस्तोगी, ममता नेगी, सफाई निरीक्षक धीरेंद्र सेमवाल, अभिषेक मल्होत्रा, सचिन रावत, प्रशांत कुकरेती आदि मौजूद रहे।

बाघ बाड़े का निरीक्षण कर स्पीकर ने जानी वनाधिकारियों से बाघों को लाने की प्रक्रिया

स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने राजाजी नेशनल पार्क मोतीचूर रेंज में बन रहे बाघ बाड़े का निरीक्षण किया। उन्होंने वन अधिकारियों से बाघ बाडे की प्रगति के बारे में जानकारी ली।

अवगत करा दें कि राजाजी नेशनल पार्क का 550 वर्ग किमी का मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र वीरान सा है। वहां पिछले सात साल से सिर्फ दो बाघिनें ही हैं। दरअसल, पार्क से गुजर रहे हाइवे और रेल लाइन के कारण बाघों की आवाजाही एक से दूसरे क्षेत्र में नहीं हो पाती। यही वजह है कि गंगा के दूसरी तरफ के चीला, गौहरी और रवासन से बाघ मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र में नहीं आ पाते।इस सबको देखते हुए कॉर्बेट या दूसरे क्षेत्रों से मोतीचूर- धौलखंड क्षेत्र में बाघ शिफ्ट करने की योजना बनी। जिसके मद्देनजर मोतीचूर रेज में बाघ बाड़ा बनाया जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा निरीक्षण के दौरान पूछने पर रेंजर महेंद्र गिरी ने बताया कि बाघ शिफ्टिंग के मद्देनजर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। बाघों को यहां लाकर मोतीचूर में बनाए गए बाड़े में रखा जाएगा। वहां इनके व्यवहार पर नजर रखी जाएगी और फिर इन्हें मोतीचूर-धौलखंड क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। रेडियो कॉलर से इन पर निरंतर नजर रखी जाएगी। बताया कि बाघ बाड़े की हाथियों से सुरक्षा के दृष्टिगत इसके चारों तरफ सोलर पावर फेंसिंग भी की जा रही है।रेंजर ने बताया कि बाड़े में पाँच बाघों को लाने की योजना बनायी गई है जिन्हें चरणबद्ध तरीके से बाड़े में लाया जाएगा।

स्पीकर ने जंगल सफारी का लुप्त भी उठाया। वहीं विधानसभा अध्यक्ष ने वन अधिकारियों से राजाजी नेशनल पार्क में आने वाले सैलानियों एवं पर्यटक की संख्या के बारे में जानकारी ली।

इस अवसर पर मोतीचूर रेंज के रेंजर महेंद्र गिरी, वन दरोगा देवी प्रसाद, वन दरोगा उदय सिंह, वन दरोगा नरेंद्र सिंह, वन आरक्षी नवीन ध्यानी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

भरतघाट और अयोध्या आस्थापथ का कृषिमंत्री ने किया लोकापर्ण

मुनिकीरेती का पूर्णानंद खेल स्टेडियम को अब विश्व स्तरीय मैदान के रूप में विकसित करने की कवायद शुरू हो गई। स्टेडियम में राज्य नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगिताएं आयोजित की जायेगी। मुनिकीरेती स्थित गंगा तट पर भरतघाट और अयोध्या आस्थापथ का लोकार्पण कृषिमंत्री सुबोध उनियाल ने किया। उन्होंने कहा की अब पूर्णानंद मैदान मं बने खेल स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर को बनाने की तैयारी चल रही है। प्रदेश सरकार से इस पर वार्ता चल रही है। यहां पर अंतरराष्ट्री स्तर के टूर्नामेंट का आयोजन किया जायेगा। इसे क्षेत्र को पहचान तो मिलेगी। साथ ही उत्तराखंड के युवाओं के लिए बेहत्तर सुविधा मिलेगी।
मौके पर नगर पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी, एसडीएम नरेंद्रनगर युक्ता मिश्रा, मंडी समिति अध्यक्ष विनोद कुकरेती, सभासद गजेंद्र सजवाण, वीरेंद्र चैहान, मनोज बिष्ट धर्म सिंह, सचिन रस्तोगी, रोशनी रस्तोगी, मनीष डिमरी, तहसीलदार अयोध्या प्रसाद उनियाल, सिंचाई विभाग अधीक्षण प्रेम सिंह पंवार, अधिशासी अभियंता कमल सिंह, सहायक अभियंता मंगल सिंह, लोनिवि के अधिशासी अभियंता मोहम्मद आरिफ खान आदि थे।

35 लाख के बजट से जानकीझूला पुल रोशनी से होगा जगमग
कृषिमंत्री सुबोध उनियाल ने विधयाक निधि से जानकीझूला पुल पर लाइट लगाने के 35 लाख दिए हैं। इस बजट से झला पुल अत्याधुनिक लाइटे लगाई जायेगगी।

निशुल्क गर्म वस्त्र कैंप का किया उद्घाटन
कृषिमंत्री सुबोध उनियाल पूर्णानंद पाकिंग में क्रेजी फेडरेशन संस्था के गर्म कंबल निशुल्क बांटने के कैंप का उदघाटन किया। कहा कि संस्था की ओर से चलाया जा रहा अभियान काबिलेतौर है। इस मौके पर मनीष डिमरी ने बताया कि कंबल गरीब व असहाय को लोगों निशुल्क वितरित किये जायेंगे।

झुला पर पर बनेगी दुकानें
नवनिर्मित्त जानकी झूला पुल के आसपास मुनिकीरेती पालिका दुकाने बनायेगा। इस दुकानों को बेराजगार युवाओं को प्रोवाइड कराया जायेगा। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि बेरोजगार युवाओं रोजगार उपलब्ध कराया। पुल के बनने से यहां पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं के लिए यह पहल शुरू की जा रही है।

बागेश्वर के ग्रामीण क्षेत्रों पर आधारित रिर्पोट का मुख्यमंत्री ने किया विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की बैठक आयोजित हुई। आयोग में सदस्यों की नियुक्ति के पश्चात आयोग की यह पहली बैठक रही जिसमें उपाध्यक्ष सहित सभी नामित सदस्य एवं उच्चाधिकारी मौजूद रहे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपद बागेश्वर के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक व आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने एवं पलायन को कम करने हेतु आयोग द्वारा की गई सिफारिशों से सम्बन्धित पुस्तिका का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि पलायन आयोग द्वारा पलायन के मूल कारणों से सम्बन्धित दी गई प्राराम्भिक रिपोर्ट से ही स्पष्ट था कि राज्य से पलायन मुख्यतः शिक्षा व स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा एवं रोजगार की कमी रही है। उन्होंन कहा कि आयोग के सुझावो पर राज्य सरकार द्वारा नीतिगत निर्णय लिये जा रहे है। उन्होंने कहा कि आयोग को वर्किंग एजेन्सी के रूप में नहीं अपितु राज्य से पलायन रोकने तथा ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक व आर्थिक विकास के लिये थिंकटेक के रूप में कार्य करना होगा। आयोग के सदस्यों को ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न स्तरों पर कार्य करने का अनुभव है। उनके अनुभव राज्य के समग्र विकास में उपयोगी होंगे इसका उन्होंने विश्वास जताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोविड-19 से पूर्व ही मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, सोलर स्वरोजगार योजना तथा ग्रोथ सेन्टरों की स्थापना, एलईडी योजना का कार्य गतिमान रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक विकास एवं स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध करना इसका उद्देश्य था। सीमान्त क्षेत्रों के समग्र विकास के लिये मुख्यमंत्री सीमान्त सुरक्षा निधि की व्यवस्था की गई है। स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित वस्तुओं की सरकारी खरीद के लिये 5 लाख तक की सीमा निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा यूनीफार्म आपूर्ति के क्षेत्र में भी कार्य किया जा रहा है, पर्वतीय क्षेत्रों में इसे और विस्तार दिये जाने की जरूरत है। इनमें आत्मविश्वास जगाने की भी उन्होंने जरूरत बतायी। मुख्यमंत्री ने अच्छी शिक्षा व्यवस्था के लिये भी सदस्यों से सुझाव देने को कहा। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के कारगर ढ़ंग से उपयोग की दिशा में पहल की गई है। चीड़ से बिजली व पेलेटस बनाये जा रहे है। एलईडी निर्माण में 15 संस्थाये कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने राज्य में स्वयं का रोजगार खड़ा कर समाज को प्रेरणा देने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करने पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर युवाओं को तकनीकि प्रशिक्षण आदि की व्यवस्था पर भी ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने ग्रोथ सेन्टरों में क्रेडिट कार्ड योजना आरम्भ किये जाने की भी बात कही।
बैठक में उपाध्यक्ष, ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग डॉ0 एस0एस0नेगी ने बताया कि आयोग द्वारा अब तक राज्य के पर्वतीय जनपदों, ईको टूरिज्म, ग्राम्य विकास एवं कोविड-19 के प्रकोप के दौरान राज्य में लौटे प्रवासियों एवं उनके पुनर्वास पर आधारित 11 सिफारिशे प्रस्तुत की जा चुकी है।
बागेश्वर के ग्रामीण क्षेत्रों पर आधारित रिपोर्ट के सम्बन्ध में डॉ. नेगी ने बताया कि जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार जनपद बागेश्वर की जनसंख्या 2,59,898 है, इनमें 1,24,326 पुरूष तथा 1,35,572 महिलाएं है। पिछले 10 वर्षों में 346 ग्राम पंचायतों से कुल 23,388 व्यक्तियों द्वार अस्थायी रूप से पलायन किया गया है। पिछले 10 वर्षों में 195 ग्राम पंचायतों से 5912 व्यक्तियों द्वार पूर्णरूप से स्थायी पलायन किया गया है। आंकड़े दर्शाते है कि जनपद के सभी विकासखण्डों में स्थायी पलायन की तुलना में अस्थायी पलायन अधिक हुआ है। जनपद की प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2016-17 के लिए अनन्तिम रूप से 1,00,117 रूपये है।
आयोग द्वारा जनपद हेतु जो सिफारिशें रखी हैं उनमें प्रमुख रूप से पशुधन की गुणवत्ता में सुधार लाने एवं कृत्रिम गर्भाधान केन्द्रों की संख्या बढ़ाना, दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध उत्पादकों की उपज हेतु पनीर, घी आदि बनाने का प्रशिक्षण दिये जाने, दुग्ध समितियों की सक्रियता बढ़ाने एवं दुग्ध प्रसंस्करण केन्द्र खोले जाने। होम स्टे की संख्या बढ़ाये जाने, इकोटूरिज्म गतिविधियों को पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित किए जाने, पर्यटन से जुड़े कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ाए जाने, क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रम आयोजित किये जाने, मनरेगा में समान अवसर और भागीदारी सुनिश्चित करके महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बनाए रखना, फसलों को बंदरों और जंगली सूअरों जैसे जानवरों से नुकसान से बचाव हेतु वन विभाग की सहायता से बन्दरबाड़ो, सोलर पावर फैन्सिंग का निर्माण कराये जाना, ग्राम पंचायतों में नर्सरियों बनाये जाना तथा औषधीय एवं सुगंधित पौंधों की कृषि को महत्वपूर्ण आजीविका उत्पादन गतिविधियों में विकसित किए जाना, जनपद में जड़ी-बूटी की खेती एवं कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जाना, जनपद में चाय के क्षेत्रफल को बढ़ावा दिया जाना, जनपद में बागवानी के क्षेत्रों को बढ़ाये जाना शामिल है।
इस अवसर पर आयोग के सदस्यों रामप्रकाश पैन्यूली, सुरेश सुयाल, दिनेश रावत घण्डियाल, अनिल सिंह शाही एवं वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रूद्रप्रयाग से रंजना रावत ने अपने सुझाव रखे।
अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार ने आयोग की सिफारिशों पर की जा रही कार्यवाही की जानकारी दी। आयोग के सदस्य सचिव रोशन लाल एवं अन्य अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

मेयर अनिता के अभिनव मॉडल पर पर्यटन विभाग का सकारात्मक रूख

मेयर अनिता ममगाईं के अभिनव मॉडल पर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने सकारात्मक कार्रवाई के संकेत दिए हैं। मेयर अनिता ने इस संदर्भ में उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के संयुक्त निदेशक विवेक सिंह चैहान को जिला पर्यटन अधिकारी के माध्यम से पत्र लिखा था।

मेयर अनिता ने बताया कि बैराज जलाशय को साहसिक पर्यटन के रूप में विकसित करने की योजना उनके चुनावी घोषणा पत्र के 11वें बिंदु में शामिल रही है। इसको लेकर विगत 18 नवम्बर वर्ष 2019 में बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। बताया कि योग नगरी के रूप में समूचे विश्व में अपना विशेष स्थान रखने वाले ऋषिकेश के बैराज क्षेत्र में बोटिंग, राफ्टिंग क्याकिंग की गतिविधियां साहसिक खेलों में रुचि रखने वालों के लिए उपहार साबित होगा। पर्यटकों के यहां आने से व्यापार को बल मिलेगा।

1600 किमी सड़कों के निर्माण के लिए धनराशि मंजूर

उत्तराखंड की करीब 1600 किमी सड़कों का उद्धार होने की आस जगी है। शासन ने मरम्मत और सुधारीकरण के अभाव में खराब हो गई सड़कों को चमकाने के लिए 305 करोड़ रुपये मंजूर किए है। इस बजट से 74 मोटर मार्गों पर सुधारीकरण के नए काम होंगे, जबकि सड़कों पर पहले से चल रहे 25 कार्यों को सुधारा जाएगा।
बता दें कि कोविडकाल के दौरान लोनिवि सड़कों की मरम्मत नहीं कर पाया था। रही सही कसर मानसून के दौरान पूरी हो गई। बजट के अभाव में कई मोटर मार्गों पर सुधारीकरण के कार्य शुरू नहीं हो पा रहे थे। लेकिन अब उम्मीद जगी है।
शासन ने 74 सड़कों को चमकाने के लिए 238 करोड़ 47 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है। इसी तरह 25 चालू कार्यों के लिए 67.43 करोड़ की धनराशि जारी हुई है। ये धनराशि पूंजीगत व्यय के तहत विशेष सहायता योजना में मंजूर की गई है। पिछले दिनों मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने इस योजना की समीक्षा की थी और लोनिवि व अन्य विभागों को धनराशि 31 मार्च से पहले खर्च करने के निर्देश दिए थे।

15 मार्च तक दुरुस्त कर लें सड़कें
शासन ने सड़कों के निर्माण के लिए बजट जारी करने के साथ इसकी डेडलाइन भी तय कर दी है। सचिव लोनिवि आरके सुधांशु के मुताबिक, 15 मार्च 2021 तक सड़कों के सुधारीकरण के कार्य पूरे होने हैं। साथ ही सुधारीकरण के कार्यों की गुणवत्ता की जांच के लिए रैंडम सैंपलिंग भी कराई जाएगी।

आबादी बहुल क्षेत्र में हैं सड़कें
शासन ने जिन सड़कों के लिए बजट को मंजूरी दी है, उनमें अधिकांश सड़कें आबादी बहुल क्षेत्रों में हैं। इन सड़कों पर यातायात का खासा दबाव है। सड़कों में सुधार होने के बाद इससे यात्रियों को सुविधा होगी।

डबल लेन होगा दिवालीखाल-भराड़ीसैंण में मोटर मार्ग, बजट जारी
ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को जोड़ने वाली दिवालीखाल-भराड़ीसैंण मोटर मार्ग को डबल लेन बनाने को शासन ने बजट जारी किया है। अभी यह मोटर मार्ग सिंगल लेन है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मोटर मार्ग को डबल लेन की करने घोषणा की थी। संयुक्त सचिव (लोनिवि) श्याम सिंह ने मोटर मार्ग को डबल लेन करने के लिए आठ करोड़ 53 लाख 16 हजार की धनराशि मंजूर करने का आदेश जारी किया।