देहरादून सिटी टॉप-10 में शामिल

अगर आप उत्तराखंड में रहते हैं और खासतौर पर देहरादून में निवास करते हैं, तो आपके लिए खुशी का पल है। हाल ही में जागरन डॉट कॉम, KMPG और फेसबुक पर एक सर्वे किया गया है। इसमें लोगों से पूछा गया था कि सुरक्षा के लिए लिहाज से देश का सबसे सुरक्षित शहर कौन है? कौन सा ऐसा शहर है, जहां लोग खुद को महफूज महसूस करते हैं ? आपको जानकर खुश होगी कि देहरादून इस लिस्ट में पहले नंबर पर है।
सबसे खास बात ये है कि इस लिस्ट में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू जैसे महानगर टॉप-10 में जगह भी नहीं बना पाए। सुरक्षा के लिहाज से ये ब़ड़े शहर देहरादून के आगे बिल्कुल भी नहीं टिकते। एक वेबसाइट में बताया गया है कि ये सर्वे कुल मिलाकर 14 हजार लोगों पर किया गया है। हालांकि इस लिस्ट में इंदौर पहले नंबर पर है लेकिन वो सिर्फ रहने के लिहाज से पहले नंबर पर है।

जहां तक सुरक्षा की बात करें, तो देहरादून पहले नंबर पर बना हुआ है। देशभर में रहने के लिहाज से देहरादून तीसरे नंबर पर है, जबकि सुरक्षा के लिहाज से पहले नंबर पर है। ये हैं देश के 10 टॉप टेन शहर।
1- इंदौर
2- लखनऊ
3- देहरादून
4- वाराणसी
5- रायपुर
6-रांची
7- मेरठ
8-लुधियाना
9- पटना
10- कानपुर
सुरक्षा के लिहाज से देहरादून देशभर में पहले नंबर पर बना हुआ है। इसलिए अगर आप देहरादून से हैं, तो आपके लिए इससे गर्व का मौका कोई हो नहीं सकता। इससे पहले NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का एक सर्वे आया था, जिसमें कहा गया था कि उत्तराखंड में अपराध सबसे कम हैं और ये राज्य देश का सबसे सुरक्षित राज्य है।

उधम सिंह नगर में कार्निवाल का होगा आयोजन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में ऊधमसिंह नगर कार्निवाल के ‘‘लोगो‘‘ एवं वेबसाईट लाॅच की। 16 से 20 फरवरी 2019 तक आयोजित होने वाले इस कार्निवाल में एडवेंचर, कल्चरल एवं बिजनेस प्रमुख आकर्षण रहेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के आयोजनों में युवाओं की अधिक से अधिक भागीदारी होनी चाहिए। इससे युवा शक्ति को सकारात्मक राह भी मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं के कौशल विकास के प्रति विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस दिशा मे कई कार्यक्रम भी संचालित किये जा रहे हैं। हमारा प्रयास युवाओं में अधिक से अधिक स्वरोजगार के प्रति जागरूकता लाने का हैं। इस दिशा में विभिन्न जनपदों में आयोजित होने वाले कार्निवाल जैसे आयोजन काफी मददगार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोक संस्कृति व लोक कला को भी पहचान दिलाने का कार्य करते हैं।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर नीरज खैरवाल ने कहा कि जनपद में छिपी हुई प्रतिभाओ को आगे बढाने व उन्हें इस दिशा में मंच प्रदान करने के उद्देश्य से उधम सिंह नगर कार्निवाल का आयोजन किया जा रहा है। ऊधमसिंह नगर कार्निवाल में वाॅलीवुड नाईट, कव्वाली, कवि सम्मेलन, सूफी नाईट, फोटोग्राफी, वाॅल पेंटिग, ड्राईग, कूकिंग के साथ-साथ हरिपुरा बौर जलाशय मे वाटर स्पोर्टस सहित अनेक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। रूद्रपुर स्टेडियम को कार्निवाल विलेज बनाया गया है।

कूड़ा निस्तारण पर सरकार का विशेष ध्यानः त्रिवेन्द्र

उत्तराखंड सरकार कूड़ा निस्तारण की दिशा में विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए हरिद्वार में कूड़ा निस्तारण को एक बड़ा प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट में नीदरलैंड के विशेषज्ञ काम कर रहे है। प्रोजेक्ट सफल रहा था तो इससे एविशन फ्यूल, खाद आदि तैयार की जा सकेगी। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कही। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत पहले सब्सिडी 30 प्रतिशत मिली थी, जोकि अब बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जा रही है।

उन्होने कहा कि डोइवाला के आसपास करीब 25 से 50 एकड़ भूमि पर फिल्म सिटी बनेगी। इसके लिए भूमि तलाशी जाएगी। उत्तराखंड फिल्म जगत के हिसाब से पूरी तरह परिपूर्ण है, यहां की वादियों को कैमरे में कैद किया जाएगा। बड़े पर्दे पर उत्तराखंड की सौंदर्य छवि देखने को मिलेगी। इससे यहां पर्यटन बढ़ेगा।

उन्होने कहा कि अटल आयुष्मान योजना से राज्य में अब तक चार लाख 46 हजार गोल्डन कार्ड लोगों के बनाए जा चुके है। जबकि प्रतिदिन 35 हजार गोल्डन कार्ड विभिन्न क्षेत्रों में बन रहे है। इस योजना के मरीजों के बिल का भुगतान सरकार 15 दिनों के भीतर करेगी। साथ ही सप्ताह भर की निशुल्क दवाइयां भी देने का प्रावधान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी) शुरू किए जाने पर काम चल रहा है।

क्लीन फ्यूल से संचालित वाहनों को किया कर मुक्त

उत्तराखण्ड राज्य में समस्त मोटर वाहनों पर मोटर वाहन कर को अधिक तर्कसंगत बनाने, कर प्रणाली को अधिक सरल करने, राज्य के राजस्व में वृद्धि करने एवं परिवहन व्यवसायियों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य में मोटर वाहन कर की दरों को निम्नानुसार संशोधित किया गया है।

1. निजी मोटर यानों पर एक बार देय कर का निर्धारण यान के मूल्य पर आधारित किया गया है। उसमें दुपहिया यान के 03 वर्ग यथा-50 हजार रूपये मूल्य तक के लिए यान के मूल्य का 07 प्रतिशत, 50 हजार से 01 लाख रूपये मूल्य तक के लिए यान के मूल्य का 08 प्रतिशत और 01 लाख रूपये से ऊपर मुल्य के लिए यान के मूल्य का 09 प्रतिशत कर की दर निर्धारित की गई है। इसी प्रकार चार पहिया मोटर यान के 03 वर्ग यथा- 05 लाख रूपये मूल्य तक के लिए 08 प्रतिशत, 05 लाख से 08 लाख रूपये मूल्य तक के लिए 09 प्रतिशत और 10 लाख रूपये से ऊपर मूल्य के लिए यान के मूल्य का 10 प्रतिशत एक बार देय कर की दर निर्धारित की गई है। वायु प्रदूषण नियंत्रण को कम करने की दृष्टि से विद्युत बैटरी अथवा सोलर पावर अथवा सीएनजी से चालित यानों के लिए एक बार देय कर से छूट प्रदान की गई है।

2. वर्तमान में ड्राईवर को छोडकर 06 सीट तक की मोटर टैक्सी एवं 07 से 12 सीट तक की मैक्सी कैब के लिए क्रमशः 430 रूपये व 510 रूपये प्रति सीट प्रति त्रैमास कर की दरें निर्धारित है। सरलीकरण के उद्देश्य से उन दोनों प्रकार के यानों के लिए एक समान 500 रूपये प्रति सीट त्रैमास कर की दर निर्धारित की गई है। माल यान के लिए वर्तमान 230 रूपये प्रति टन त्रैमास कर की दर में मामूली वृद्धि करते हुए उसे 270 रूपये प्रति टन प्रति त्रैमास निर्धारित किया गया है। कृषि प्रयोजन से भिन्न व्यवसायिक प्रयोजन में प्रयुक्त टैªलर के सकल यान भार के प्रत्येक मीट्रिक टन के लिए पहली बार माल यान की भांति 270 रूपये प्रति मीट्रिक टन प्रति त्रैमास कर की दर निर्धारित की गई है।

3. ड्राईवर को छोडकर तीन पहिया मोटर यान, जिसमें तीन व्यक्तियों तक बैठने की क्षमता हो, प्रत्येक सीट के लिए 730 रूपये के स्थान पर 800 रूपये वार्षिक और 03 से अधिक 06 व्यक्तियों तक बैठने की क्षमता वाले तीनपहिया मोटर यानकी प्रत्येक सीट के लिए 845 रूपये के स्थान पर 01 हजार रूपये वार्षिक कर की दर निर्धारित की गई है। दोनों मामलों में 07 हजार रूपये एक बार देय कर की दर निर्धारित की गई है, जो स्वैच्छिक हैै। वायु प्रदूषण नियंत्रण करने के उद्देश्य से विद्युत बैटरी अथवा सोलर पावर अथवा सीएनजी से चालित यानों से देय कर के 20 प्रतिशत के बराबर छूट प्रदान की गई है।

4. राज्य के पर्वतीय क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, पर्वतीय मार्गों पर मैदानी मार्गों की तुलना में संचालन व्यय अधिक होता है। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में आम जनता को पर्याप्त परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की अनिवार्य आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए पर्वतीय मार्गों पर संचालित मंजिली गाडियों की कर की दरें मैदानी मार्गों की तुलना में आधी रखते हुए प्रति सीट प्रति माह कर की दर रूपये 50.00 निर्धारित की गई है।

5. आम जनता को अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने हेतु नगर बसों के संचालन को बढावा देने के लिए नगर निगम या नगरपालिका की सीमा के भीतर संचालित नगर बसों की 85 रूपयें प्रति सीट प्रति मास की दर को 50 रूपये प्रति सीट प्रति मास रखा गया है। मैदानी मार्गों में संचालित मंजिली गाडियों की वर्तमान दर में लगभग 18 प्रतिशत मामूली की वृद्धि की गई है।

6. राजस्व वृद्धि को ध्यान में रखते हुए अस्थाई रूप से पंजीकृत मोटर यानों तथा डीलर के कब्जे में रखी गई वाहनों की दरों में मामूली वृद्धि की गई है।
7. पेट्रोल चलित यानों की तुलना में डीजल चालित यानों पर ग्रीन उपकर की दरें अधिक रखी गई है।
(क) पेट्रोल चालित कार- 1500.00
(ख) डीजल चालित कार- 3000.00
पर्यावरण को प्रदूषित रहित बनाने के उद्देश्य से क्लीन फ्यूल (सौर ऊर्जा बैटरी सीएनजी) से संचालित वाहनों को कर मुक्त कर दिया गया है।

8. मेलों, धार्मिक सभाओं में यात्रियों को लाने ले जाने के लिए अस्थाई परमिट पर चलने वाले वाहनों तथा बारात, पर्यटक यात्रियों या अन्य आरक्षित पार्टियों की सवारियों के लिए विशेष परमिट पर संचालित वाहनों के लिए विशेष कर की वर्तमान 08 रूपये प्रति सीट कर की दर में मामूली वृद्धि करते हुए 10 रूपये प्रति सीट की गई है।

9. अन्य राज्यों से अस्थाई परमिट पर उत्तराखण्ड राज्य में आने वाले माल यानों एवं ठेका यानों आदि, के लिए कर की दरें तर्कसंगत किया गया है।

10. ऐसे निजी मोटर यान जो परिवहन यान के रूप में चलते हुए पाये जायें, के द्वारा किये जा रहे अनधिकृत संचालन को रोकने के लिए और ऐसी प्रवृति को हतोत्साहित करने के लिए कर की दरें निर्धारित की गई है।

विश्व के टॉप-10 में दून का चिड़ियाघर

देहरादून का चिड़ियाघर न सिर्फ देश, बल्कि विश्वभर में खूब चमक बिखेर रहा है। सोशल साइट फेसबुक के ऑफीशियल पेज पर सक्रिय दुनिया के 181 चिड़ियाघरों की रैंकिंग में उसे टॉप टेन में जगह मिली है, जबकि देश में वह पहले स्थान पर है। नेचर पार्क की तर्ज पर विकसित हो रहे देहरादून जू ने यह अहम उपलब्धि महज 45 दिन के अंतराल में हासिल की है।

यूं तो दुनियाभर में चिड़ियाघरों की संख्या हजारों में है, मगर फेसबुक के ऑफीशियल पेज पर 181 ही सक्रिय हैं। इनमें इसी साल पांच जून को शामिल हुआ देहरादून जू भी है। देहरादून जू के निदेशक पीके पात्रो के अनुसार फेसबुक के लाइक एलीजर सॉफ्टवेयर के जरिये यह रैंकिंग तय की जाती है। इसमें सभी चिड़ियाघर अपनी गतिविधियां इस पेज पर शेयर करते हैं। फिर लाइक, पोस्ट, कमेंट और प्रत्येक जू पर लोगों के ठहराव जैसे बिंदुओं के आधार पर सॉफ्टवेयर के जरिये इनकी रैंकिंग तय की जाती है, जो लाइक एलीजर पर देखी जा सकती है। इस रैंकिंग के ताजा आंकड़ों ने देहरादून जू को भी खिलखिलाने का मौका दे दिया। यह बताता है कि न सिर्फ देश, बल्कि विदेशों में भी देहरादून जू को लोग खासा पसंद कर रहे हैं।

देहरादून में मसूरी मार्ग पर मालसी में वर्ष 1976 में 25 हेक्टेयर क्षेत्र में वन चेतना केंद्र की स्थापना की गई। बाद में वहां हिरणों की कुछ प्रजातियां रखी गईं और नाम दिया गया मालसी डीयर पार्क। धीरे-धीरे यहां रेसक्यू किए जाने वाले पशु-पक्षी भी रखे जाने लगे और फिर शुरू हुई इसके उच्चीकरण की कवायद। 2012 में इस पार्क को मिनी जू का दर्जा मिला और 2015 में यह देहरादून जू बना।

सालभर में साढ़े छह लाख पर्यटक
नेचर पार्क की तर्ज पर विकसित हो रहे देहरादून जू में 350 पशु-पक्षी मौजूद हैं। इसके साथ ही वहां एक्वेरियम, फन पार्क कैक्टस पार्क सैलानियों के आकर्षण का केंद्र हैं। देहरादून जू के निदेशक पीके पात्रो के मुताबिक सैलानियों की संख्या हर साल बढ़ रही है। 2014-15 में यहां 2.10 लाख पर्यटक आए, जबकि 2015-16 में 3.20 लाख, 2016-17 में 4.30 लाख और 2017-18 में 6.50 लाख।

जल्द सुनाई देगी टाइगर की दहाड़
देहरादून जू में जल्द ही टाइगर की दहाड़ सुनाई देगी। इसके अलावा भालू, हाइना, घड़ियाल समेत अन्य वन्यजीव भी इसकी शोभा बढ़ाएंगे। जू के निदेशक पात्रो के मुताबिक इन जानवरों को देश के विभिन्न चिड़ियाघरों से लाया जाएगा। इस संबंध में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजा गया है।

जल्द मिलेगी ऋषिकेश को पर्यटन हब के रूप में नयी पहचान

ऋषिकेश के आईडीपीएल में पर्यटन विभाग वेलनेस सिटी बनाने जा रही है। जिसके बाद ऋषिकेश की पहचान में और इजाफा होगा। इसे पर्यटन हब के रूप में पहचान मिलेगी। इसके लिये विभाग ने तैयार शुरू कर दी है। आईडीपीएल की 633 एकड़ भूमि का उपयोग इस वेलनेस सिटी बनाने के लिये किया जायेगा। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक इस प्रोजेक्ट में काम शुरू कर दिया जाये।

डेवलपमेंट सपोर्ट सर्विस टू स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत ऋषिकेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन हब के रूप में देखा जा रहा है। यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या को देखते हुए पर्यटन विभाग ने वेलनेस सिटी की योजना तैयार की है। पर्यटकों को योग, संस्कृति, गंगा, नेचर, रिसोर्ट, हेल्थ सेंटर, बाजार, कॉरपोरेट डेस्टिनेशन जैसी सुविधाएं इस वेलनेस सिटी में मिलेंगी। वेलनेस सिटी आइडीपीएल को आवंटित 633 एकड़ यानि साढ़े तीन हजार बीघा जमीन पर बनेगी।

इसके लिए पर्यटन विभाग ने तकनीकी सलाहकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे। इसके लिए स्वीडन, अमेरिका, आयरलैंड, बैंकॉक समेत अंतरराष्ट्रीय मानक पूरा करने वाली नौ कंपनियां आगे आई हैं। इन कंपनियों का चयन इसी माह कर लिया जाएगा। इसके बाद एक साल के भीतर वेलनेस सिटी के निर्माण की कार्रवाई शुरू होगी। वेलनेस सिटी का निर्माण पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर किया जाना है। इससे राज्य सरकार पर बजट का भार नहीं पड़ेगा।

मिलेगा रोजगार
पर्यटन विभाग का मानना है कि इस योजना से जहां राज्य के पर्यटन को पंख लगेंगे, वहीं, हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। स्थानीय उत्पादों से लेकर लोक संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।

त्रिवेन्द्र सरकार के पॉलीथीन मुक्त एवं जल संरक्षण के प्रयासों की योगी ने की प्रशंसा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के सार्थक प्रयासों के कारण दोनों राज्यों के बीच अनेक मसले सुलझे है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की जमकर तारीफ की। इस मौके पर योगी आदित्यनाथ ने भी त्रिवेन्द्र सरकार द्वारा पॉलीथीन मुक्त एवं जल संरक्षण के लिए किये जा रहे प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि योगी जी की त्वरित निर्णय लेने की क्षमता से ही उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के मध्य नहरों एवं अलकनन्दा होटल के सम्बन्ध में समझौता हुआ है। अन्तर्राज्यीय बस सेवाओं को सुगम और सुदृढ़ बनाने के लिए दोनों राज्यों के बीच पारस्परिक समझौता किया गया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्य आपसी तालमेल से शीघ्र ही परिसम्पत्तियों से सम्बन्धित मामलों में निर्णय लेंगे और उनका निस्तारण करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दोनों राज्यों को ज्वाइंट वेंचर बनाकर कार्य करना होगा। जल के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए दोनों राज्यों को दीर्घकालीन योजना बनानी होगी। जल को संचय करने के लिए वर्षा जल को एकत्रित करना जरूरी है। जल संरक्षण से ईको सिस्टम भी ठीक होगा। जल संरक्षण के लिए दोनों राज्यों को मिल जुलकर प्रयास करने होंगे।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के सार्थक प्रयासों के परिणामस्वरूप अलकनन्दा होटल से जुड़ी समस्या का समाधान होकर उत्तर प्रदेश सरकार ने हरिद्वार में उत्तर प्रदेश भवन के नाम पर एक नवीन आवास पर्यटक गृह के निर्माण के लिए भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पर्यटक आवास का नाम भागीरथी पर्यटन गृह रखा जायेगा। इस आवास को उत्तराखण्ड की वास्तु शैली में बनाया जायेगा। आगामी दो माह में दोनों राज्य परिसम्पत्तियों से सम्बन्धित समस्याओं का समाधान आपस में बैठकर करेंगे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड जो भी सार्थक पहल करेगा उत्तर प्रदेश की ओर से उसमें पूरा सहयोग दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखण्ड सरकार की पॉलीथीन मुक्त एवं जल संरक्षण के लिए किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गंगा कि अविरलता एवं निर्मलता को बनाये रखने के लिए हम सबको अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। ‘नमामि गंगे’ केवल सरकार का अभियान न रहे, इसमें सबकी भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि 2019 में इलाहबाद में होने वाले कुंभ से पहले उत्तर प्रदेश में 15 दिसम्बर 2018 तक सीवरेज एवं नालों के पानी को गंगा में जाने से रोकने के लिए कार्ययोजना बनाई गई है। इसके लिए गंगा के किनारे उत्तर प्रदेश के सभी 27 जनपदों के 1556 गांवों को चिन्हित किया गया है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच पिछले 17-18 वर्षों से चल रहे विवादों का निपटारा दोनों राज्य सौहार्दपूर्ण माहौल में किया जायेगा। यह कार्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को लेकर किया जायेगा।

इस अवसर पर हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, उत्तर प्रदेश की पर्यटन मंत्री प्रो. रीता बहुगुण जोशी, आदि उपस्थित थे।

सीएम ने किया पुस्तक प्राचीन व वर्तमान टिहरी का विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भवानी प्रताव सिंह द्वारा संपादित पुस्तक प्राचीन एवं वर्तमान टिहरी का विमोचन किया। टिहरी महोत्सव कार्यक्रम में पहुंच सीएम में 31 करोड़ 95 लाख रूपये की विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण किया।

विधानसभा क्षेत्र टिहरी गढ़वाल के विकासखण्ड जाखणीधार के आवासीय भवनों हेतु एक करोड 57 लाख रूपये के निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया गया। विकासखण्ड जाखणीधार के कार्यालय भवन हेतु एक करोड़ आठ लाख 55 हजार रूपये के निर्माण कार्य का लोकार्पण किया। इसके अलावा जिन निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया गया। उनमें केन्द्रीय वित्त पोषित योजना ’स्वदेश दर्शन’ के अन्तर्गत कोटी में निर्मित टूरिस्ट पाथवे, पार्किंग, व्यू प्वाइंट, फ्लोटिंग हट तथा सर्विस सेटअप, चम्बा में मल्टी लेवल कार एवं बस पार्किंग एवं सिराई में ईको लॉज, मल्टीपरपस हॉल तथा यूटिलिटी भवन शामिल है।

मुख्यमंत्री ने भवानी प्रताप सिंह द्वारा सम्पादित पुराना दरबार ट्रस्ट की पुस्तक ’प्राचीन एवं वर्तमान टिहरी’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ज्ञान सिंह नेगी को पेंशन का चैक देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने अपने सम्बोधन में कहा कि 16 मई को टिहरी झील में कैबिनेट कराने का जो निर्णय लिया, यह निर्णय भविष्य में पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलायेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन को और अधिक बढ़ावा देने के लिये ’13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू डेस्टिनेशन’ की सरकार की परिकल्पना है। जिसमें टिहरी जिले में टिहरी झील को शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से टिहरी झील में बड़ा पोटेंशियल दिखता है। इस तरह के आयोजनों से वैश्विक स्तर पर टिहरी झील एक प्रमुख डेस्टिनेशन के रूप में उभर कर आयेगा। वेलनेस, योगा टूरिज्म, एडवेंचर, फिल्म आदि के क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में टिहरी झील राज्य में युवाओं को आर्थिक एवं आध्यात्मिक रूप से भी मजबूत करेगी। उत्तराखण्ड का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को उत्तराखण्ड आने के लिये आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को उत्तराखण्ड को प्रकृति द्वारा दी गई इस देन को समझना होगा।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिये जाने से पर्यटन राज्य की रोजी रोटी का जरिया बनेगा। उन्होंने कहा कि टिहरी महोत्सव के आयोजन से देश व विदेशीयों के लिये टिहरी झील आकर्षण का केन्द्र बनेगी। फ्लोटिंग हट्स यह कि विशिष्ट पहचान है। वॉटर स्पोर्ट्स, पैराग्लाइडिंग, ट्रेकिंग एवं अन्य गतिविधियां टिहरी में पर्यटन के क्षेत्र में नया आयाम स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि पर्यटक स्थलों पर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना जरूरी है।

राज्य सरकार ने सृजित किये रोजगार के नये मौके

उत्तराखंड को पर्यटन राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण कदम उठाये है। उन्होंने सैकड़ो रोजगार देने के लिये वीर चंद्र सिंह गंढ़वाली योजना का दायरा बढ़ाकर क्याकिंग, टेरेनबाइकिंग, कैरावेन, एग्लिंग, स्टार गेसिंग, बर्ड वॉचिंग, आदि गतिविधियों को जोड़ा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बुधवार को कोटी कॉलोनी क्षेत्र में टिहरी झील में तैरती बोट पर बैठक हुई। बैठक में 13 बिंदु रखे गए। लेकिन थराली उपचुनाव की आचार संहिता लागू होने के चलते जोशीमठ क्षेत्र से जुड़े एक बिंदु को स्थगित कर दिया गया। सरकार के प्रवक्ता व काबीना मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग) पॉलिसी में संशोधन कर पर्यटन से जुड़ी कई गतिविधियों को उद्योग का दर्जा दिया गया। अब कायाकल्प रिजॉर्ट, आयुर्वेद, योग, पंचकर्मा, बंजी जंपिंग, जॉय राइडिंग, सर्फिंग, कैंपिंग, राफ्टिंग जैसे उद्यम एमएसएमई नीति के तहत आएंगे। इस क्षेत्र में आने वाले उद्यमियों को उक्त नीति के तहत तमाम सुविधाएं मिलेंगी।

मेगा इन्वेस्टमेंट इंडस्टियल पॉलिसी के तहत आयुष और वेलनेस को लाया गया है। इससे होटल, रिजॉर्ट, क्याकिंग, सी प्लेन उद्योग, आयुर्वेद, योग जैसी 22 गतिविधियां को शामिल किया गया है। इन गतिविधियों के लिए आने वाले उद्यमों को सरकार की ओर से कई लाभ मिलेंगे।

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में 11 नई गतिविधियों के लिए उपकरणों की खरीद के लिए सहायता दी जाएगी। काबीना मंत्री कौशिक ने बताया कि चालू वर्ष को रोजगार वर्ष के रूप में घोषित किया गया है। सरकार का उद्देश्य पर्यटन और रोजगार को आपस में जोड़कर राज्य के युवाओं को रोजगार से जोड़ना है।

खुरूड़ी डांडा को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करेंगेः सतपाल

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने खुरुड़ी पौराणिक बिस्सू महोत्सव में पहुंचकर कहा कि खुरुड़ी बिस्सू महोत्सव को राज्य स्तर के मेले में शामिल किया जाएगा। साथ ही खुरुड़ी डांडा को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने खुरुड़ी मेले के आयोजन के लिए पांच लाख रुपये देने की घोषणा भी की।

विकासशील युवा समिति खत विशायल द्वारा खुरुड़ी थात में आयोजित महोत्सव के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे पर्यटन मंत्री ने कहा कि खुरुड़ी पौराणिक बिस्सू महोत्सव को राज्य स्तरीय मेले में शामिल करने व खुरुड़ी पर्यटन स्थल को विकसित करने की योजना बनाई गई है। विदेशों की तर्ज पर उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों का विकास किया जाएगा।

जौनसार-बावर को महासू सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए सौ करोड़ रुपये भी मिल चुके हैं। पर्यटन मंत्री ने कहा कि वे संत हैं, जो कहते हैं करते भी हैं। उन्होंने रंगकर्मी नंदलाल भारती द्वारा लिखे नमन उत्तराखंड गीत की प्रशंसा भी की। साथ ही रीति रिवाज पर आधारित सांस्कृतिक लोक कला मंच की सीडी का विमोचन भी किया।