सीएम ने मां गंगा से प्रदेश की खुशहाली की कामना की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को हरकी पैड़ी पर श्रीगंगा सभा द्वारा गंगा सप्तमी के शुभ अवसर पर अयोजित गंगा मैया जन्मोत्सव में प्रतिभाग किया, जहां उन्होंने मां गंगा की पूजा-अर्चना की एवं मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त करते हुये देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली के लिये मां गंगा से प्रार्थना की।
उल्लेखनीय है कि भारत में गंगा मैया का जन्मोत्सव वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन मनाया जाता है। गंगा जन्मोत्सव पुष्य नक्षत्र और अमृत सिद्ध योग में मनाया जाता है। इस दिन माता गंगा ब्रह्म लोक से ब्रह्मा जी के कमण्डल से निकलकर, भगवान विष्णु जी के चरणों को धोती हुई, भगवान आशुतोष की जटाओं में आई थी।
इस अवसर पर जिलाधिकारी विनय शंकर पाण्डेय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. योगेन्द्र सिंह रावत, सिटी मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष डॉ. जयपाल सिंह चौहान, मीडिया प्रभारी लव शर्मा, श्री गंगा सभा अध्यक्ष प्रदीप झा, महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, पुजारी अमित शास्त्री सहित सम्बन्धित अधिकारीगण एवं पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।

श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से चारधाम यात्रा ने पकड़ी रफ्तार

विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट रविवार सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चारण एवं विधि विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ के लिए खोल दिए गए। ग्रीष्मकाल के छह माह अब श्रद्धालु भगवान बद्रीविशाल के दर्शन व पूजा अर्चना बद्रीनाथ मंदिर में कर सकेंगे। कपाटोद्घाटन के अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से गेंदे के फूलों से सजाया गया था। सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों एवं जय बद्रीविशाल के जयकारों के साथ देश-विदेश से आये हजारों श्रद्धालु कपाट खुलने के साक्षी बने। श्री बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलते ही चारधाम की यात्रा विधिवत शुरू हो गई है। उल्लेखनीय है कि 3 मई को श्री गंगोत्री व श्री यमुनोत्री धाम औऱ 6 मई को श्री केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ के लिए खोले गए। दो साल कोविड के कारण चारधाम यात्रा प्रभावित रही। लेकिन इस बार कपाट खुलने के दौरान से ही भारी संख्या में श्रद्धालु व भक्तगण चार धामों में पहुंचे है तथा यह सिलसिला लगातार जारी है। बद्रीनाथ धाम में कपाटोद्घाटन के अवसर पर श्रद्धालु व भक्तजन देर रात से ही भगवान बद्रीविशाल के दर्शन करने हेतु कतार पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं द्वारा बारी बारी से भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किये।
इस अवसर पर श्री बद्रीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, नायब रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी आचार्य भुवन चंद्र उनियाल, बद्री केदार मंदिर सामिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय, उपाध्यक्ष किशोर पंवार, विधायक बद्रीनाथ राजेन्द्र भंडारी, पूर्व विधायक महेंद्र भट्ट, डीजीपी अशोक कुमार, आशुतोष डिमरी, वीरेंद्र असवाल, हरीश सेमवाल, जिलाधिकारी हिमांशु खुराना, एसपी श्वेता चौबे, सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

बदरीनाथ के भव्य रुप को संवारने की जिम्मेदारी सभी की-संधु

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.सन्धु ने बद्रीनाथ पहुंचकर मास्टर प्लान के तहत चल रहे निर्माण कार्याे का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यदायी संस्थाओं को गुणवत्ता के साथ-साथ तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को शीघ्र ही मैन पावर बढाने के निर्देश दिए। वहीं मुख्य सचिव ने व्यापारियों से मुलाकात की और कहा फिलहाल उनके लिए अस्थायी दुकानों का निर्माण किया जा रहा है तथा कार्य पूरे होने के बाद स्थायी दुकाने आवंटित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन और स्थानीय जनता के सहयोग से आने वाले वर्षाे में बद्रीनाथ का भव्य रूप दुनिया के सामने होगा जिससे यहां के व्यापारियों, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि पीएमओ भी डेली बेसिस पर इसकी मानीटरिंग कर रहा है।
उसके बाद मुख्य सचिव ने बदरीनाथ मास्टर प्लान तथा यात्रा की तैयारियों को लेकर बीआरओ गेस्ट हाउस में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने उन्हें गतिमान कार्यों और यात्रा की तैयारियों के बारे में जानकारी दी। मुख्य सचिव ने मास्टर प्लान कार्यों में लगे मजदूरों तथा अन्य कर्मचारियों के लिए अस्थायी आवास बनाने के निर्देश दिए। साथ ही यात्रा व्यवस्था को लेकर भी संबंधित विभागों को निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने गोविन्द घाट से पुलना पैदल मार्ग पर चल रहे निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यदायी संस्थाओं को कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए कहा कि 15 दिन बाद फिर इसका स्थलीय निरीक्षण करेंगे।
इस दौरान पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर, जिलाधिकारी हिमांशु खुराना, पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे, मुख्य विकास अधिकारी वरूण चौधरी, एडीएम डा. अभिषेक त्रिपाठी, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक सैनी, एसडीएम कुमकुम जोशी, धर्मेश गंगानी, मुख्य अभियन्ता अयाज अहमद, इओ सुनील पुरोहित, कमाण्डर मनीष कपिल, हेमकुण्ड साहिब के प्रबंधक सेवा सिंह सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

राज्य में नए पार्किंग स्थलों की चिन्हिकरण प्रक्रिया में आई तेजी

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने गुरुवार को सचिवालय में प्रदेश में बनाई जाने वाली नई पार्किंग प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने इस सम्बन्ध में पूर्व में आयोजित बैठक में सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में पार्किंग हेतु जगह चिन्हित कर, फीजिबिलिटी जांच करवाने के निर्देश दिए थे। इस क्रम में जनपदों से 180 स्थान चिन्हित किए गए थे, जिसमें से 134 को फीजिबिलिटी रिपोर्ट में पार्किंग के लिए उपयुक्त पाया गया है। शेष 39 की रिपोर्ट आनी बाकी है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पार्किंग के जगह चिन्हीकरण से लेकर संचालन तक के प्रत्येक स्टेप की तिथियां अभी से निर्धारित कर ली जाएं। और प्रत्येक पार्किंग की साइट स्पेसिफिक प्लानिंग कर तिथियां निर्धारित की जाएं, कि कब तक पार्किंग का संचालन शुरू हो जाएगा।
मुख्य सचिव ने पार्किंग प्रोजेक्ट्स को उनकी आवश्यकता और महत्त्व के अनुसार ए और बी कैटेगरी में वर्गीकृत कर लिया जाए। जिन पार्किंग के निर्माण में कोई समस्या नहीं है, उनमें तुरंत कार्य शुरू कर दिया जाए। ऐसे ऑनगोइंग प्रोजेक्ट्स जो पैसे की कमी के कारण धीमी गति से चल रहे हैं, उनके सम्बन्ध में शासन को अवगत कराया जाए। किसी भी प्रोजेक्ट के लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को अपने जनपद में लगातार नए स्थानों को खोजने के निर्देश दिए। उन्होंने यूजेवीएनएल, यूपीसीएल, जल निगम और जल संस्थान के साथ ही अन्य सभी नॉन गवर्नमेंटल संस्थानों द्वारा भी इसमें सहयोग की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव स्तर से पार्किंग प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा प्रत्येक सप्ताह की जाएगी।

पर्यटकों की बढ़ती संख्या से कारोबारियों की जगी उम्मीद

देहरादून। कोरोना से प्रभावित उत्तराखंड की लाइफ लाइन कहे जाने वाला पर्यटन क्षेत्र फिर से पटरी पर लौटने लगा है। पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या से न केवल इन स्थलों की रौनक बड़ रही है बल्कि अच्छा कारोबार होने से कारोबारियों के चेहरों पर चमक देखने को मिल रही है। उधर पर्यटन क्षेत्र की रफ्तार को और तेज करने के लिए पर्यटन विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है।

राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक पर्यटक स्थल रोब्बेर्स केव, सहस्त्रधारा, लच्छीवाला, देहरादून जू, एफआरआई समेत मसूरी की वादियों में देश-दुनिया से आ रहे पर्यटकों से रौनक लौटने लगी है। पर्यटन विभाग आर्थिकी को बढ़ाने के साथ ही प्रदेश के भीतर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने की कवायद में जुटा हुआ है। इसी क्रम में कोरोना से स्थिति सामान्य होने के बाद सभी पर्यटक स्थलों को सैलानियों के लिए खोल दिया गया है। ताकि पर्यटन कारोबार से जुड़े स्थानीय लोगों का जीवन-यापन ठीक से हो सके। इसके साथ ही सैलानियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पर्यटक स्थलों में सुरक्षा के तमाम इंतज़ाम किए गए हैं।

पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। अच्छा कारोबार होने से सभी कारोबारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा। कोरोना से सामान्य होती स्थिति को देखते हुए सैलानी घूमने के लिए निकल रहे हैं।

पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि पर्यटन प्रदेश होने के चलते उत्तराखंड की आर्थिकी का एक बड़ा जरिया भी पर्यटन ही है। सीजन शुरू होने के साथ पर्यटन स्थलों में सैलानियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा के तमाम इंतज़ाम किए गए हैं। कोरोना गाइडलाइन को ध्यान में रख पर्यटन गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है।

होम स्टे, साहसिक और पर्यटन निवेश प्रोत्साहन के लिए उत्तराखंड पर्यटन को मिला सर्वश्रेष्ठ स्टाल पुरस्कार

देहरादून। उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद के सहयोग से अयोजित तीन दिवसीय इंडिया ट्रेवल मार्ट (आईटीएम) का शनिवार को समापन हो गया। इसमें यात्रियों को आकर्षक पैकेज और अनूठे पर्यटन स्थल की विस्तार से जानकारी दी गई। भारत प्रमुख बी2बी ट्रैवल एंड टूरिज्म शोकेस और कॉन्क्लेव के पहले दो दिन यात्रा व्यापार के संबंध में विस्तार से चर्चा की गयी। जबकि मार्ट के अंतिम दिन शनिवार को घरेलू व अन्य पर्यटन की संभावनाओं से रूबरू कराया गया। इस मौके पर ट्रैवल एजेंटों, पैन इंडिया के टूर संचालकों और उत्तराखण्ड पर्यटन व गुजरात पर्यटन के अधिकारियों के लिए विशेष सत्र का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के समापन के मौके पर उत्तराखण्ड पर्यटन को होम स्टे, साहसिक और पर्यटन निवेश प्रोत्साहन व गुजरात पर्यटन को धोलावीरा (विश्व यूनेस्को विरासत स्थल) और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को बढ़ावा देने के लिए सर्वश्रेष्ठ स्टाल पुरस्कार से नवाजा गया।

उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद के उपनिदेश योगेन्द्र कुमार गंगवार ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन के लिए पहले से तय गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए उत्तराखण्ड लगातार काम कर रहा है। कार्यक्रम का उददेश्य यात्रियों के लिए यात्रा को और अधिक मनोरंजक तथा परेशानी मुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी के माध्यम से यात्रियों को विभिन्न आकर्षक पैकेज और अनूठे पर्यटन स्थलों की जानकारी दी गई।

आईसीएम ग्रुप के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजय गुप्ता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शोकेस और कॉन्क्लेव की निरंतर सफलता भारत में यात्रा सेवाओं की बढ़ती मांग और घरेलू और बाहर जाने वाले यात्रियों की खर्च करने की शक्ति को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा, आईटीएम देहरादून ने उत्तराखण्ड और पैन इंडिया के ट्रैवल एजेंटों और टूर ऑपरेटरों के साथ बी2बी और नेटवर्किंग का अवसर प्रदान किया।

आईटीएम देहरादून के अवसर पर उत्तराखंड पर्यटन, गुजरात पर्यटन के अधिकारियों और भीमताल, हरिद्वार, देहरादून, मसूरी, दिल्ली के अन्य होटल व्यवसायियों और देहरादून से टूर ट्रैवल एसोसिएशन और मीडिया के बीच वीडियो प्रस्तुतियों के साथ बातचीत सत्र का आयोजन किया गया। सत्र के दौरान, राज्य पर्यटन अधिकारियों ने कम ज्ञात स्थलों (अहमदाबाद से पोलो वन दिवस यात्रा), वन्यजीव पर्यटन, विरासत पर्यटन, एडवेंचर और ईको टूरिज्म, धार्मिक और तीर्थ पर्यटन, समुद्र तट, रुचि के स्थान, व्यंजन, मेला और त्योहारों पर प्रकाश डाला गया।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (आईएटीओ), ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीएएआई), एसोसिएशन ऑफ डोमेस्टिक टूर ऑपरेटर्स ऑफ इंडिया (एडीटीओआई), आउटबाउंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ओटीओएआई), एडवेंचर टूर जैसे ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन, ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एटीओएआई), इंडिया गोल्फ टूरिज्म एसोसिएशन (आईजीटीए), महाराष्ट्र टूर ऑर्गनाइजर्स एसोसिएशन (एमटीओए), द आईएएआई एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएआई), ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश (टीटीएयूपी), एंटरप्रिंग ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन, (ईटीएए), ट्रैवल एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएएफआई), टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन (टीओए), टूरिज्म लीडर्स क्लब (टीएलसी), और ट्रैवल मैगज़ीन- ट्रैवल मेल द्वारा प्रतिभाग किया गया।

लक्ष्मण झूला में नए पुल के टेंडर प्रक्रिया मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई

लोक निर्माण विभाग की ओर से लक्ष्मण झूला में पुराने झूला पुल के समीप टू-लेन मोटर पुल का निर्माण के लिए हुई टेंडर प्रक्रिया का मामला हाईकोर्ट पहंुच गया है। आरोप है कि अर्हता पूरी न करने वाली कंपनी को टेंडर दे दिया गया है। जिस पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाये रखने का आदेश जारी किया है। अब इस मामले में 20 फरवरी को सुनवाई होगी।
आपको बता दें कि इस पुल के निर्माण के लिए विभाग की ओर से 20 नवंबर, 2021 को टेंडर आमंत्रित किए गए थे। 23 नवंबर को टेंडर खोले गए। जिनमें हिलवेज कंस्ट्रक्शन कंपनी, कैलाश हिलवेज कंस्ट्रक्शन कंपनी और पीएंडआर इंफ्रा प्रोजेक्ट कंपनी के टेंडर को विभाग की ओर से सही पाया गया और पीएंडआर इंफ्रा प्रोजेक्ट के टेंडर को मंजूरी दे दी गई।
इस पर ऋषिकेश की हिलवेज कंस्ट्रक्शन कंपनी हाईकोर्ट पहुंच गयी। उच्च न्यायालय नैनीताल में विभाग की इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए हिलवेज कंस्ट्रक्शन कंपनी ने आरोप लगाया कि जिस कंपनी को काम दिया गया है वह टेंडर की अर्हता को पूरा नहीं करती है। कंपनी के निदेशक अजय शर्मा के अनुसार इस पूरे मामले में मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता को पत्र लिखकर कंपनी की ओर से आपत्ति दर्ज करानेे के बावजूद उनकी बात को नहीं सुना गया। जिस पर वे न्यायालय की शरण में गए। उनका कहना है कि न्यायालय में सुनवाई की तिथि तक जिस कंपनी को काम दिया गया उसके साथ एग्रीमेंट नहीं हुआ था। उन्हें अंदेशा है कि बैक डेट पर एग्रीमेंट किया जा सकता है। दूसरी ओर लोक निर्माण विभाग नई टिहरी के अधीक्षण अभियंता एनपी सिंह का कहना है कि 5 जनवरी, 2022 को संबंधित कंपनी के साथ एग्रीमेंट कर दिया गया था।

खटीमा में सुरई ईकोटूरिज्म जोन में जंगल सफारी का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा में सुरई ईकोटूरिज्म जोन में जंगल सफारी का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने जंगल सफारी भी की। सुरई ईकोटूरिज्म जोन प्रदेश का पहला ऐसा ईकोटूरिज्म जोन है, जहां पर्यटक जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा व आसपास के क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र में ऊंचा स्थान दिलाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। जैव विविधता और वन्य जीवों की मौजूदगी वाले तराई पूर्वी वन प्रभाग को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर उसके सुरई वन क्षेत्र को इको टूरिज्म जोन के रूप में तब्दील किया जाएगा, ताकि यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य का उपयोग स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मुहैया करवाने में किया जा सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वन कानून की जटिलताओं के कारण वनों के आसपास रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसमें उनकी खेती भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इस कठिनाई को समझते हुए हमने निर्णय लिया है कि वन और वन्य जीवों को आर्थिकी से जोड़ते हुए स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर मुहैया करवाए जाएंगे। इसी सोच के साथ हमने बीते 1 अक्टूबर 2021 को सीएम यंग ईकोप्रिन्योर योजना देहरादून में लॉच की थी। इस योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। शुरुआत के तौर पर खटीमा में सुरई ईकोटूरिज्म जोन विकसित कर उसमें जंगल सफारी प्रारम्भ की जा रही है। ग्राम समितियों के जरिए इस योजना का संचालन किया जाएगा। जंगल सफारी शुरू होने से जिप्सी मालिक, चालक और गाइड के रूप में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके लिए वन विभाग ने 30 जिप्सी संचालकों के साथ करार किया है। गाइड की भूमिका का सही निर्वहन करने के लिए कई युवकों को वन विभाग इसका प्रशिक्षण दे चुका है। सुरई ईकोटूरिज्म जोन में पर्यटकों की आमद से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। पूरे प्रदेश में इस योजना को विस्तार दिया जाएगा ताकि वनों, वन क्षेत्रों और वन्य जीवों को हम अपनी कमजोरी नहीं ताकत बना सकें। उन्होंने कहा कि सीएम यंग ईको प्रिन्योर स्कीम के अंतर्गत नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, ईकोटूरिज़्म, वन्यजीव टूरिज़्म आधारित कौशल को उद्यम में परिवर्तित किया जाएगा।

सुरई ईकोटूरिज्म जोन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की थी कि सुरई वनों की समृद्ध जैव विविधता को देखते हुए इसे क्षेत्र को सुरई इको टूरिज्म जोन (सुरई पारिस्थितिकी पर्यटन क्षेत्र) का स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इसके दो लाभ होंगे पहला यह कि जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए जैव विविधता के धनी इसे क्षेत्र को संरक्षित किया जाएगा और दूसरा, इसके वन मार्गों को जंगल सफारी के लिए विकसित किए जाने से यहां रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। वन विभाग ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर काम करते हुए सुरई वन क्षेत्र के वन मार्गों को जैव विविधता ट्रेल के रूप में विकसित कर दिया है। यह क्षेत्र 180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। जिसके सीमा में पूर्व दिशा में शारदा सागर डैम, पश्चिम में खटीमा नगर, उत्तर में मेलाघाट रोड तथा दक्षिण में पीलीभीत टाइगर रिजर्व क्षेत्र सटा हुआ है। प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत इस वन क्षेत्र में साल के वृक्षों, चारागाह और पानी की प्रचुर मात्रा है। इन तमाम वजहों से यहां बाघों की आवाजाही बनी रहती है। इसके अलावा स्तनधारी जानवरों की लगभग 125, पक्षियों की 150 से अधिक और सरीसृपों को तकरीबन 20 प्रजातियां भी इस वन क्षेत्र में पाई जाती हैं। यहां के वन मार्गों को विकसित कर लगभग 40 किलोमीटर का ट्रेल जंगल सफारी के लिए तैयार कर लिया गया है, जिसमें जिप्सी में बैठकर पर्यटक दुर्लभ वन्य जीवों (रॉयल बंगाल टाइगर, भालू, चीतल, सांभर, काकड़, पैंगोलिन, कोरल सांप, पांडा आदि) का दीदार करने के साथ ही सुरम्य जंगलों, घास के मैदानों, प्राचीन शारदा नहर और सुन्दर तालाबों का लुत्फ उठा सकेंगे।

सुरई ईकोटूरिज्म जोन में जंगल सफारी और ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल का सीएम करेंगे लोकार्पण

वर्ष 2021 के जाते-जाते प्रदेश की धामी सरकार खटीमा विधानसभा क्षेत्र को एक बड़ी सौगात देने जा रही है। 29 दिसम्बर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा में ’सुरई ईकोटूरिज्म जोन’ और ’ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल’ का लोकार्पण करेंगे। ’सुरई ईकोटूरिज्म जोन’ प्रदेश का पहला ऐसा ईकोटूरिज्म जोन होगा जहां पर्यटक जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे। अब तक हमारे प्रदेश में सिर्फ नेशनल पार्क और बायोस्फीयर रिजर्व (संरक्षित क्षेत्र) में ही जंगल सफारी का चलन रहा है। इसके अलावा ’ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल’ देश का पहला क्रोकोडाइल ट्रेल है जहां पर्यटक बेहद नजदीक जाकर मगरमच्छ की खतरनाक प्रजाति ’मार्श’ का सुरक्षित दीदार कर सकेंगे। यह दोनों योजनाएं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पूर्व में घोषित ’सीएम यंग ईकोप्रिन्योर स्कीम’ से जुड़ी हुई हैं जिसके तहत उत्तराखण्ड के स्थानीय लोगों की आर्थिकी को वनों और वन्य जीवों से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं। इस स्कीम के अंतर्गत 1 लाख युवाओं को ईकोप्रिन्योर बनाने का लक्ष्य है।
तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि चारों ओर वन क्षेत्र से घिरे खटीमा के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के साथ कैसे स्वरोजगार से जोड़ा जाए इसके लिए एक अभिनव योजना को धरातल पर उतारा जा रहा है। अब तक पर्यटन के लिहाज से पिछड़े रहे खटीमा व आसपास के क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र में ऊंचा स्थान दिलाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की सोच है कि जैव विविधता और वन्य जीवों की मौजूदगी वाले ’तराई पूर्वी वन प्रभाग’ को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर उसके सुराई वन क्षेत्र को इको टूरिज्म जोन के रूप में तब्दील किया जाए ताकि यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य का उपयोग स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मुहैया करवाने में किया जा सके। इसी सिलसिले में पूर्व में उन्होंने ’तराई पूर्वी वन प्रभाग’ के सुरई व आसपास के वन क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की घोषणा (संख्या-359/2021) की थी। उसके बाद से ही वन महकमा उनकी इस घोषणा को साकार करने में जुटा हुआ है। योजना को चार भागों में बांटकर धरातल पर उतारा जा रहा है। इनमें सुरई ईकोटूरिज्म जोन, ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल, खटीमा सिटी फॉरेस्ट और चुका प्रवासी पक्षी केन्द्र की स्थापना शामिल है। उन्होंने बताया कि सुरई ईकोटूरिज्म जोन और ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल योजना का निर्माण और विकास कार्य पूरा हो चुका है। जबकि खटीमा सिटी फॉरेस्ट और चुका प्रवासी पक्षी केन्द्र के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री आगामी 29 दिसम्बर को सुरई ईकोटूरिज्म जोन में जंगल सफारी का शुभारम्भ और ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल का लोकार्पण करने जा रहे हैं।

सुरई ईकोटूरिज्म जोन-
मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि सुरई वनों की समृद्ध जैव विविधता को देखते हुए इसे क्षेत्र को सुरई इको टूरिज्म जोन (सुरई पारिस्थितिकी पर्यटन क्षेत्र) का स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इसके दो लाभ होंगे पहला यह कि जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए जैव विविधता के धनी इसे क्षेत्र को संरक्षित किया जाएगा और दूसरा, इसके वन मार्गों को जंगल सफारी के लिए विकसित किए जाने से यहां रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। वन महकमे ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर रात-दिन काम करते हुए सुरई वन क्षेत्र के वन मार्गों को जैव विविधता ट्रेल के रूप में विकसित कर दिया गया है। यह क्षेत्र 180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। जिसके सीमा में पूर्व दिशा में शारदा सागर डैम, पश्चिम में खटीमा नगर, उत्तर में मेलाघाट रोड तथा दक्षिण में पीलीभीत टाइगर रिजर्व क्षेत्र सटा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत इस वन क्षेत्र में साल के वृक्षों, चारागाह और पानी की प्रचुर मात्रा में है। इन तमाम वजहों से यहां बाघों की आवाजाही बनी रहती है। इसके अलावा स्तनधारी जानवरों की लगभग 125, पक्षियों की 150 से अधिक और सरीसृपों को तकरीबन 20 प्रजातियां भी इस वन क्षेत्र में पाई जाती हैं। यहां के वन मार्गों को विकसित कर लगभग 40 किलोमीटर का ट्रेल जंगल सफारी के लिए तैयार कर लिया गया है, जिसमें जिप्सी में बैठकर पर्यटक दुर्लभ वन्य जीवों (रॉयल बंगाल टाइगर, भालू, चीतल, सांभर, काकड़, पैंगोलिन, कोरल सांप, पांडा आदि) का दीदार करने के साथ ही सुरम्य जंगलों, घास के मैदानों, प्राचीन शारदा नहर और सुन्दर तालाबों का लुत्फ उठा सकेंगे।

ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल-
सुरई ईकोटूरिज्म जोन की पश्चिमी सीमा पर ककरा नाला स्थित है। यह नाला क्रोकोडाइल (मार्श मगरमच्छ) का प्राकृतिक वास स्थल है। मीठे पानी के स्रोतों में पाई जाने वाली मगरमच्छ की यह प्रजाति भूटान और म्यांमार जैसे तमाम देशों में विलुप्त हो चुकी है। अंडा देने वाली यह प्रजाति बेहद खतरनाक मानी जाती है। मौजूदा समय में इस नाले में 100 से अधिक मार्श मगरमच्छ हैं। पर्यटक इन मगरमच्छों को आसानी से दीदार कर सकें इसके लिए 4 किलोमीटर लम्बे नाले को चौनलिंग फेंसिंग करके ’ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल’ के रूप में विकसित किया गया है। यह राज्य का पहला क्रोकोडाइल ट्रेल है। ट्रेल में तीन व्यू प्वाइंट और कई वॉच टॉवर बनाए गए हैं ताकि मगरमच्छों का सुरक्षित तरीके से नजदीक से दीदार हो सके।

वन और वन्य जीव बनेंगे आर्थिकी का जरिया-मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि हमारे प्रदेश में वन बहुतायत में पाए जाते हैं। प्रदेश का 71 प्रतिशत (37999.53 वर्ग किलोमीटर) भूभाग वन क्षेत्र है। इसमें से 24418.67 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र वन विभाग के अन्तर्गत है। वन कानून की जटिलताओं के कारण वनों के आसपास रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसमें उनकी खेती भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इस कठिनाई को समझते हुए हमने निर्णय लिया है कि वन और वन्य जीवों को आर्थिकी से जोड़ते हुए स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर मुहैया करवाए जाएंगे। इसी सोच के साथ हमने बीते 1 अक्टूबर 2021 को ’सीएम यंग ईकोप्रिन्योर योजना’ देहरादून में लॉच की थी। इस योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। शुरुआत के तौर पर खटीमा में ’सुरई ईकोटूरिज्म जोन’ विकसित कर उसमें जंगल सफारी प्रारम्भ की जा रही है। ग्राम समितियों के जरिए इस योजना का संचालन किया जाएगा। जंगल सफारी शुरू होने से जिप्सी मालिक, चालक और गाइड के रूप में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके लिए वन विभाग ने 30 जिप्सी संचालकों के साथ करार किया है। गाइड की भूमिका का सही निर्वहन करने के लिए कई युवकों को वन विभाग इसका प्रशिक्षण दे चुका है। ’सुरई इकोटूरिज्म जोन’ में पर्यटकों की आमद से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। पूरे प्रदेश में इस योजना को विस्तार दिया जाएगा ताकि वनों, वन क्षेत्रों और वन्य जीवों को हम अपनी कमजोरी नहीं ताकत बना सकें। उन्होंने कहा कि सीएम यंगईकोप्रिन्योर स्कीम के अंतर्गत नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, ईकोटूरिज़्म, वन्यजीव टूरिज़्म आधारित कौशल को उद्यम में परिवर्तित किया जाएगा।

1 करोड़ 4 लाख रुपये से जगमग हुई रोड, पहले अंधेरे के कारण होती थी परेशानी

ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हरिद्वार रोड पर आईडीपीएल गेट से श्यामपुर हाट तक निर्मित डिवाइडर पर मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा 1 करोड़ 4 लाख रुपए की लागत से निर्मित पथ प्रकाश व्यवस्था का आज विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने विधिवत पूजा अर्चना के पश्चात लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पथ प्रकाश व्यवस्था की जगमगाहट से स्थानीय लोगों एवं बाहर से आने वाले सैलानियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
मुख्य हरिद्वार सड़क मार्ग पर लोकार्पण समारोह के अवसर पर अग्रवाल ने कहा कि एमडीडीए के माध्यम से ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आंतरिक मोटर मार्गों के निर्माण के साथ-साथ पथ प्रकाश व्यवस्था में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा है कि हरिद्वार रोड पर चार धाम यात्रा की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं एवं योग नगरी ऋषिकेश की तरफ प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है, इससे मोटर मार्ग पर पथ प्रकाश व्यवस्था का होना अति आवश्यक था। उन्होंने कहा है कि जिस शानदार तरीके से मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा यह लाइट आधुनिक तकनीकी से लगाई गई है यह अपने आप में अभूतपूर्व है।
अग्रवाल ने कहा है कि जनप्रतिनिधि का कर्तव्य जनता की समस्या का समाधान करना होता है और इस ओर वह निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र में आंतरिक मोटर मार्ग सभी क्षेत्रों में दुरुस्त हो चुके हैं, जहां दुरुस्त होने की संभावना है वह कार्य भी शीघ्र प्रारंभ होगा।
अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा है कि विकास कार्यों में हमेशा कार्य की गुणवत्ता व तय समय सीमा पर पूरा करने का उनका आग्रह रहता है तथा कार्य की गुणवत्ता के लिए स्थानीय लोग भी सजग प्रहरी के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन करते हैं जो एक सजग नागरिक की भूमिका होती है। इसी वजह से क्षेत्र का विकास भी आगे बढ़ता है।
अग्रवाल ने कहा कि ऋषिकेश ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र की चकाचौंध से हर व्यक्ति परिचित होगा जिससे ऋषिकेश की अच्छी छवि बाहर से आने वाले सैलानियों के मन में भी जाएगी। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश विधानसभा विकास के मापदंड पर खरी उतर रही है और आज आदर्श विधानसभा के रूप में स्थापित हो चुकी है।
अग्रवाल ने कहा कि चुनाव का समय नजदीक है ऐसे समय में अनेक लोग नकारात्मक वातावरण बनाने का भी प्रयास करेंगे, उन लोगों से भी सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा है कि विकास के साथ-साथ वह हमेशा प्रत्येक नागरिक के साथ सुख-दुख में खड़े रहते हैं जो एक आदर्श जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है।
कोरोना काल के दौरान लगे लॉकडाउन के दिनों को याद करते हुए अग्रवाल ने कहा कि जब जरूरतमंदों के सामने रोजी रोटी का संकट था ऐसे समय में 13 हजार से अधिक लोगों को राशन के पैकेट एवं हजारों लोगों को मास्क, सैनिटाइजर का वितरण किया ताकि ऋषिकेश विधानसभा का प्रत्येक नागरिक कोरोना के प्रभाव से बच सके। इस अवसर पर स्थानीय लोगों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर एमडीडीए के अधिशासी अभियंता श्याम मोहन शर्मा, राम रतन रतूड़ी, सदानंद भट्ट, रतन सिंह बिष्ट, किशन नेगी, नरेंद्र रावत, राजवीर रावत, रवि शर्मा, क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रभाकर पैन्यूली, कमला नेगी, निर्मला उनियाल, रमेश चंद शर्मा, लक्ष्मी गुरुंग, रामेश्वर चंद्रियाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।