प्रदेश के ग्रोथ इंजन को बढ़ाने में उद्योगों का महत्वपूर्ण योगदान-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को राजपुर रोड, देहरादून स्थित एक निजी होटल में बी.एन.आई देहरादून द्वारा आयोजित बी.एन.आई दून ई-3 एक्सपो बिजनेस कॉन्क्लेव कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बिजनेस नेटवर्क इंटरनेशनल (बीएनआई) दून ई-3 एक्सपो में उपस्थित सभी उद्यमियों का स्वागत करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में निवेश करने वाले उद्यमी उत्तराखंड के विकास के सारथी एवं प्रदेश की प्रगति के वाहक हैं। बीएनआई दून एक्सपो केवल उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह हमारे राज्य में पनप रही उद्यमशीलता की भावना और नवीन मानसिकता का प्रमाण है। उत्तराखंड राज्य में सभी प्रकार के व्यवसाई अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सकते हैं, सार्थक संबंध बना सकते हैं और नए अवसर तलाश सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के ग्रोथ इंजन को दौड़ाने के लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच एक उचित समन्वय बेहद आवश्यक है। हमारे एक-एक उद्यमी की उपलब्धि हमें आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारे देश की अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। नरेंद्र मोदी द्वारा नए भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया है, जो अब पूरा होता दिखाई दे रहा है। आज पूरी दुनिया भारत को सक्षम, रचनाशील, बदलाव के लिए तैयार एक अभिनव आर्थिक इकोसिस्टम के रूप में देख रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड भी भारत की आर्थिक प्रगति में एक प्रमुख सहभागी बने और अग्रणी राज्यों में हमारा स्थान सुनिश्चित हो। इसके लिए सरकार कार्यरत है। राज्य सरकार निरंतरता के साथ अभावों को अवसरों में बदलने का कार्य कर रही है। राज्य सरकार प्रदेश को निवेश के लिए एक सर्वाधिक पसंदीदा गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए भी प्रयासरत है। राज्य में निवेश के लिए बेहतर कानून व्यवस्था, स्वच्छ पर्यावरण, रेल, सड़क तथा वायु परिवहन की सुविधा, सस्ती एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा जल संसाधन उपलब्ध हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण, फार्मा, आयुष और कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी, आईटी, पर्यटन, ग्रीन एनर्जी तथा सेवा क्षेत्र में कार्य किया जा रहा हैं। हमारी उद्योग अनुकूल नीतियों का परिणाम स्वरूप आज देश की विख्यात कंपनियां प्रदेश की प्रगति में अपना योगदान दे रही है। राज्य सरकार की नीतियों में प्रमुख रूप से मेगा औद्योगिक और निवेश नीति, एम.एस.एम.ई. नीति, मेगा टेक्सटाइल पार्क पॉलिसी, स्टार्टअप नीति, पर्यटन नीति, आयुष नीति, सौर ऊर्जा नीति, अरोमा पार्क नीति, इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण नीति, एयरोस्पेस एवं डिफेंस पॉलिसी, सूचना प्रौद्योगिकी नीति और निर्यात नीति शामिल है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना भी अति महत्वपूर्ण है। इसी कड़ी में हमने ’’एक जनपद-दो उत्पाद’’ योजना को लागू किया जिसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करना, उन्हें आजीविका का प्रमुख साधन बनाना है। संकल्प से सिद्धि के इस सकारात्मक और पारदर्शी माहौल में, उत्तराखंड के प्रत्येक निवेशक के लिए अवसरों का विस्तार हो रहा है।
इस दौरान कार्यक्रम में मेयर सुनील उनियाल गामा, महानगर अध्यक्ष भाजपा सिद्धार्थ अग्रवाल, सुनील, राहुल, प्रकाश, रितु मौर्य, प्रगति एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

अत्यधिक वन क्षेत्र में जड़ी बूटी उत्पादन रोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में प्रदेश के वन क्षेत्रों (वन पंचायत आदि) में जड़ी-बूटी उत्पादन के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक आयोजित हुयी। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में वन पंचायतों एवं वन से लगे क्षेत्रों में जड़ी-बूटी के उत्पादन एवं इससे रोजगार सृजन की असीम सम्भावनाओं को देखते हुए इस दिशा में गम्भीरता से कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में लगभग 70 प्रतिशत वन क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र में अत्यधिक संभावनाएं हैं। उन्होंने इसके लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस दिशा में अच्छा कार्य कर रहे राज्यों की पॉलिसी का भी अध्ययन कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिलाधिकारी एवं डीएफओ को महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से इसके लिए 25 करोड़ विभागीय बजट का प्राविधान किया जाएगा। बाकी के बजट के लिए कैम्पा एवं अन्य स्रोतों से भी बजट की पूर्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसके सफल संचालन के बाद वन पंचायतों की आर्थिकी में काफी सुधार आएगा। वन पंचायतों में अगले 5 वर्षों में 10 हजार हेक्टेयर में जड़ी-बूटी उत्पादन की सम्भावना है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों को आजीविका उपलब्ध कराने की दिशा एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) अनूप मलिक, सचिव दीपेन्द्र चौधरी एवं निदेशक उद्यान रणवीर सिंह चौहान सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहे।

ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए स्थान चिन्हित करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सोमवार को सचिवालय में ईको टूरिज्म एवं सरकारी भूमि की डिजिटल सूची तैयार किए जाने के सम्बन्ध में बैठक आयोजित की। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों एवं डीएफओ को ईको टूरिज्म की दिशा में स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर दिए जाने पर फोकस करते हुए प्रस्ताव तैयार किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में ईको टूरिज्म को बढ़ावा दिए जाने हेतु स्थान चिन्हित किए जाने के साथ ही डीपीआर तैयार किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि प्रस्ताव में डीपीआर के साथ फंडिंग और योजना पूर्ण होने की समय सीमा पहले से ही निर्धारित की जाएं। उन्होंने कहा कि ईको टूरिज्म को सफल बनाए जाने हेतु ईको पार्क से प्राप्त राजस्व का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसकी मरम्मत आदि के लिए प्रयोग किया जा सकेगा, इसका शासनादेश जारी किया जा चुका है।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश भर में एस्ट्रो विलेज, कैंपिंग आदि की अत्यधिक संभावनाएं हैं। इस दिशा में भी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा मार्ग एवं गैर चारधाम यात्रा मार्ग दोनों में ही ईको टूरिज्म में रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को शामिल करना आवश्यक है। इसके लिए स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण की आवश्यकता है तो प्रशिक्षण करवाइए। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में ऐसे विभिन्न स्थान हैं जहां कैंपिंग साइट्स विकसित की जा सकती हैं। पर्यटन विभाग द्वारा गाईड का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्य सचिव ने ऐसे स्थलों में जहां अभी फुटफॉल कम है, गाईड को कंडीशनल टर्म पर मानदेय भी दिया जा सकता है, ताकि गाईड काम करने को प्रोत्साहित हो सके। फुटफॉल बढ़ने के बाद गाईड अच्छा कमा लेंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि जिलाधिकारियों एवं अन्य सीनियर अधिकारियों द्वारा क्षेत्रों में दौरा करते समय स्थानीय लोग अक्सर अपनी बहुत छोटी छोटी मांगें और समस्याएं अधिकारियों के सम्मुख रखते हैं। उन्होंने कहा कि बहुत सी समस्याएं या मांगें इतनी छोटी होती हैं कि आसानी से पूर्ण की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इन छोटी छोटी मांगों को गंभीरता से लेते हुए मांगों को पूरा करने पर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि आमजन का सिस्टम पर विश्वास बना रहे।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में स्प्रिंग एंड रिवर रिजूविनेशन बोर्ड अस्तित्व में आने वाला है। इससे जल संरक्षण की दिशा में भी काफी कार्य होगा। इसमें जल संरक्षण के लिए चेक डैम और छोटे ताल और झीलें भी निर्मित होंगी। जो आगे ईको टूरिज्म की दिशा में काफी कारगर साबित होंगी। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से इसको भी ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव तैयार किए जाने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को सरकारी भूमि को अतिक्रमण से बचाने हेतु डिजिटल डाटा शीघ्र तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही इसके लिए पोर्टल तैयार हो जाएगा जिसमें डिजिटल डाटा अपलोड किया जाएगा, जिसकी लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस सूची को तैयार किए जाने का उद्देश्य हर प्रकार की सरकारी भूमि को अतिक्रमण से बचाना है। इसके लिए विभागों द्वारा जिला स्तरीय अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी। अतिक्रमण होने पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई भी की जाएगी।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक अनूप मलिक, सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी, मुख्य वन संरक्षक वन पंचायत डॉ. पराग मधुकर धकाते एवं सचिव चंद्रेश कुमार सहित जनपदों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समस्त जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

कड़ी मशक्त के बाद दमकल कर्मियों ने बुझाई आग, दो बसें जलकर हुई राख

संयुक्त यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड में एक निजी बस में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई। आग की लपटें उठते ही कंपाउंड में अफरा-तफरी मच गई। आग की लपटें उठने से बगल में खड़ी दूसरी निजी बस भी चपेट में आ गई। अग्निशमन कर्मचारियों ने आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक दो बसें जलकर राख हो गई। जबकि पास खड़ी तीसरी बस को आग लगने से बचा लिया गया।
सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे संयुक्त यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड में रिपेयरिंग के दौरान एक बस ने आग पकड़ ली। मरम्मत में जुटे कर्मचारी आग लगते ही भाग खड़े हुए। तेजी से फैलती आग में बस धूं-धूं कर जली, तो उसकी लपटें बगल में खड़ी बस तक पहुंच गई, जिससे वह बस भी जलकर खाक हो गई। बसों में आग लगने से कैंपस में अफरा-तफरी फैल गई। आसपास खड़े लोगों ने तत्काल इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी। अग्निशमन कर्मचारियों ने आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गनीमत रही कि पार्किंग में आग सिर्फ तीन बसों तक ही सीमित रही, जबकि बगल में ही दर्जनों की संख्या में और भी बसें खड़ी थी। हादसे में किसी के हताहत होने की अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। अग्निशमन अधिकारी बीरबल सिंह ने बताया कि यह हादसा प्रथम दृष्टया बस में रिपेयरिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट से हुआ। बताया कि बस मालिक हनीफ ने करीब पांच लाख रुपये का नुकसान होना बताया है। फिलहाल विभागीय टीम आग लगने से सही कारणों की जांच में जुटी है।

बागवानी योजनाओं के क्रियान्वयन में मजबूत इच्छाशक्ति के साथ प्रदेश हित का रखा जाये ध्यान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को बागवानी विकास की योजनाओं को धरातल पर लाये जाने के लिये मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने निर्देश दिये कि योजनाओं के क्रियान्वयन में मजबूत इच्छा शक्ति के साथ प्रदेश हित को ध्यान में रखा जाये। उन्होंने प्रदेश में सेब एवं कीवी उत्पादक क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर इससे जुड़े किसानों की समस्याओं को त्वरित ढंग से समाधान किये जाने के साथ ही विषय विशेषज्ञों के साथ विभागीय टीम गठित कर इस संबंध में जमीनी जरूरतों का समाधान करने के भी निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित बैठकों को मात्र कोरम पूरा करने का माध्यम नहीं बल्कि योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित करने का माध्यम बनाये जाने के भी निर्देश अधिकारियों को दिये हैं। मुख्यमंत्री ने 15 दिन के बाद इस संबंध में पुनः समीक्षा बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिये हैं।
गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित कैम्प कार्यालय में सेब की खेती एवं कीवी मिशन की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमाचल की भांति हमारे प्रदेश का किसान भी सेब एवं कीवी उत्पादन में अग्रणी बने तथा उनकी आर्थिकी बढ़े, इसके लिये प्रदेश में सेब उत्पादक क्षेत्रों के चिन्हीकरण, भूमि की उत्पादन क्षमता अच्छी किस्म की पौधों की किसानों तक उपलब्धता सुनिश्चित की जाये। उन्होंने कहा कि हमारा किसान रोजगार देने वाला भी बने, इस दिशा में कारगर ढंग से कार्य होना चाहिये। उन्होंने इसके लिये किसानों को प्रशिक्षण के साथ ही उन्हें जागरूक करने पर भी ध्यान देने को कहा तथा उत्पादों के बेहतर विपणन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर ध्यान देने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने 2030 तक बागवानी क्षेत्र में 3 हजार करोड़ की आय का लक्ष्य तो रखा है लेकिन इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये वर्षवार उत्पादन क्षमता के निर्धारण पर हमें ध्यान देना होगा। उन्होंने बागवानी क्षेत्र में कल्स्टर आधारित एप्रोच पर भी ध्यान देने पर बल दिया तथा सेब एवं कीवी उत्पादन क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज के प्रस्ताव भी तैयार करने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि हमें प्रदेश में नई कार्य संस्कृति के साथ कार्य करना होगा। हमारे प्रयासों से राज्य को कितना लाभ मिल रहा है अधिकारी इसका भी आकलन करें। योजनाओं को शीघ्रता से जमीन पर उतारने के लिये सरलीकरण, समाधान एवं संतुष्टि के मंत्र को ध्यान में रखा जाना चाहिये। कार्यों को लटकाने पर नहीं उन पर शीघ्रता से निर्णय लेकर आगे बढ़ने की दिशा में काय होना चाहिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बागवानी विकास की योजनाओं के लिये धन की कमी नहीं होने दी जायेगी।
बैठक में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सचिव मुख्यमंत्री विनय शंकर पाण्डेय, सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी, अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान, निदेशक उद्यान एच.एस. बवेजा के साथ अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने पुलिस परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

1425 अभ्यर्थियों को आज उत्तराखण्ड पुलिस में नियुक्ति दी गई है। पुलिस लाईन, देहरादून में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 55 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। आरक्षी जनपद पुलिस, आरक्षी पी.ए.सी/आई.आर.बी तथा फायरमैन में चयनित कुल सभी 1425 अभ्यर्थियों को आज नियुक्ति पत्र प्रदान किये गये। मुख्यमंत्री ने कहा पुलिस आरक्षी के जो 1550 शेष रिक्त पद हैं, उन पर नई भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारम्भ की जायेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों एवं उनके माता-पिता को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज राज्य के जनपदों एवं पीएसी वाहिनियों में पुलिस विभाग के विभिन्न संवर्गों में पुलिस आरक्षी के रूप में हमारे ऊर्जा से भरे नवयुवक एवं नवयुवतियां पुलिस का अभिन्न अंग बनने जा रहे हैं। पुलिस आरक्षी पुलिस फोर्स की प्राथमिक इकाई है, जो विभाग में नींव की तरह कार्य करते हैं एवं विभिन्न थाने चौकियों एवं चौराहों पर पुलिस का मुख्य चेहरा बनकर तैनात रहते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि हमारे ये पुलिस आरक्षी कड़ी मेहनत, लगन एवं ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस व्यवस्था किसी भी राज्य की सुरक्षा एवं समृद्धि का एक आवश्यक अंग है। उत्तराखंड पुलिस हमेशा से अपने कार्य के प्रति समर्पित रही है, कोरोनाकाल हो या फिर प्राकृतिक आपदा, हर विपरीत परिस्थितियों में हमारी पुलिस फोर्स ने बेहतरीन कार्य किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप राज्य सरकार उत्तराखंड पुलिस को एक आधुनिक और स्मार्ट पुलिस बल बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। उत्तराखण्ड पुलिस ने मित्रता, सेवा एवं सुरक्षा के रूप में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। उत्तराखण्ड की आबादी के अलावा राज्य में राज्य की आबादी से लगभग पांच गुना श्रद्धालुगण देवभूमि आते हैं। प्रदेश में चारधाम यात्रा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आ रहे हैं। हमारी मित्र पुलिस के जवान पूरी तत्परता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हम दूसरों के दर्द को अपना दर्द समझकर सेवाभाव से अपनी ड्यूटी करते हैं तभी हम सही अर्थों में अपने कर्तव्यों का भली भांति निर्वहन करने में सफल रहते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में पूर्ण पारदर्शिता के साथ परीक्षाएं कराने के लिए कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया है। इस कानून के लागू होने के बाद अभी तक सभी परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से सकुशल संपन्न कराई जा चुकी हैं। इस कानून के प्राविधान इतने कड़े किये गए हैं कि युवाओं के भविष्य के साथ कोई भी नकल माफिया खिलवाड़ नहीं कर सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को रोकने के लिए उन्होंने तय किया कि इसके लिए चाहे कितना भी संघर्ष करना पड़े, कितने भी लोगों की आलोचनाओं का शिकार होना पड़े, लेकिन एक गरीब माता-पिता के बेटे एवं बेटी के साथ अब वे अन्याय नहीं होने देंगे। एक सामान्य परिस्थिति में रहने वाले बेटे व बेटियों के माता-पिता के पास यदि कोई पूंजी होती है, तो उनकी शिक्षा होती है, उस पर भी लूट हो जायेगी, तो जो माता-पिता विपरीत परिस्थितियों में भी अपने बच्चों का लालन-पालन करते हैं और उनकी शिक्षा को आगे बढ़ाते हैं, उनके पास कुछ नहीं रह जायेगा। इस कानून के बनने के बाद प्रदेश सख्त नकल विरोधी कानून बनाने वाले राज्यों की श्रेणी में अग्रणी राज्य है।

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने उत्तराखण्ड पुलिस में भर्ती होने वाले सभी अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि अब हमारे इन युवाओं को जन सेवा करने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। समाज के लिए पुलिस का रोल बहुत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि समाज के साथ मधुर व्यवहार रखते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करना एवं समाज को सही दिशा में ले जाने में भी पुलिस की बड़ी भूमिका होती है।

पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा आज उत्तराखण्ड पुलिस को 1425 नये जवान मिल गये हैं। 2016 के बाद लगभग सात साल बाद उत्तराखण्ड पुलिस को नये आरक्षी मिले हैं। उन्होंने कहा कि इनकी प्रशिक्षण की शुरूआत भी आज से ही की जायेगी। इन सभी आरक्षी को सामान्य प्रशिक्षण के साथ ही तकनीक आधारित प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में वर्तमान में मुख्य आरक्षी दूरसंचार, उपनिरीक्षक तथा विधि विज्ञान प्रयोगशाला के अन्तर्गत कुल 538 पदों पर भर्ती प्रक्रिया गतिमान है।

इस अवसर पर मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक विनोद चमोली, अपर पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

272 अभ्यर्थियों को सीएम ने प्रदान किये नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्राविधिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 272 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। प्राविधिक शिक्षा विभाग द्वारा पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों के लिए मई 2023 में देहरादून में रोजगार मेले आयोजन किया गया था। विभिन्न कंपनियों में इन विद्यार्थियों के चयन के बाद आज नियुक्ति पत्र प्रदान किये गये।
मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई दी एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 9 वर्षों से देश में युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में जो अभियान चल रहा है, उसमें रोजगार मेले की एक कड़ी और जुड़ी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के उचित अवसर मिले इसके लिए विभिन्न तकनीकी संस्थाओं में प्रशिक्षण हेतु आधुनिक सुविधायें, ढांचागत विकास, उच्च स्तरीय ई-लर्निंग केन्द्रों की स्थापना, विभिन्न तकनीक के विस्तार, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना के लिए सरकार द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य प्रदेश को सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकसित करते हुए जनमानस की समस्याओं का पारदर्शिता पूर्ण निराकरण कर गुड गवर्नेंस देना है। इस कार्य में तकनीकी शिक्षा विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन छात्र-छात्राओं को आज नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए हैं उनके अन्दर जो जोश एवं प्रतिभा परिलक्षित हो रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वे इसी जोश के साथ अपनी लगन, ज्ञान एवं स्किल के बल पर उन्हें रोजगार देने वाली कम्पनियों की अपेक्षाओं में खरा उतरेंगे। मुख्यमंत्री ने उद्योगों के प्रतिनिधियों से अपेक्षा की है कि वे इंटर्नशिप, इण्डस्ट्रियल ट्रेनिंग के साथ-साथ हैण्डस आन प्रैक्टिकल के लिए राज्य सरकार को सहयोग देंगे एवं उत्तराखण्ड के छात्र-छात्राओं को इस क्षेत्र में और अधिक अवसर प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की स्थापना की रजत जयन्ती हेतु सरकार ने 25 संकल्प लिए हैं, इसी कड़ी में तकनीकी शिक्षा विभाग को वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली व्यावसायिक शिक्षा मिशन योजना के क्रियान्वयन हेतु जिम्मेदारी दी गयी है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रयास से प्रदेश में व्यावसायिक व तकनीकी शिक्षा के माध्यम से रोजगार व स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
तकनीकि शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों को शुभकामना देते हुए कहा कि आज इन युवाओं का पढ़ाई करने के बाद नौकरी करने का सपना पूरा हो रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जिन प्रतिष्ठानों द्वारा इनको नियुक्ति दी जा रही है, सभी अभ्यर्थी इन प्रतिष्ठानों में पूरी लगन के साथ कार्य करेंगे। हमारे ये अभ्यर्थी लगन से कार्य करेंगे, तो औद्योगिक संस्थानों का झुकाव हमारे युवाओं की ओर तेजी से बढ़ेगा। तकनीकि शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य के पॉलिटेक्निक के बेहतर अवस्थापना सुविधाओं के लिए 1 साल में 300 करोड़ रूपये दिये गये। इंडस्ट्री के साथ बैठक कर उनकी मांग के आधार पर राज्य में कोर्स बढ़ाये गये हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार मेलों के माध्यम से 60 प्रतिशत युवाओं का चयन हो रहा है। कुछ पॉलिटेक्निक से लगभग शत प्रतिशत छात्रों का भी चयन हो रहा है।
इस अवसर पर जानकारी दी गई कि 25 अप्रैल 2023 को कुमांऊ क्षेत्र के विभिन्न पॉलीटेक्निक संस्थाओं में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं हेतु राजकीय पॉलिटेक्निक काशीपुर में जो रोजगार मेले का आयोजन कराया गया था, उसमें 430 छात्र -छात्राओं ने रोजगार प्राप्त किया। इसी प्रकार गढ़वाल क्षेत्र के लिए 8 मई 2023 को आयोजित कराए गए रोजगार मेले में करीब 608 युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ। ऑनलाईन प्लेसमेंट सेल के माध्यम से 401 एवं विभिन्न संस्थाओं में आयोजित कैंपस प्लेसमेंट द्वारा 669 छात्रों को रोजगार प्रदान किये जाने के साथ ही कुल 2108 छात्रों को रोजगार प्राप्त हुआ है।
इस अवसर पर विधायक प्रमोद नैनवाल, सुरेश सिंह चौहान, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव रविनाथ रमन, निदेशक प्राविधिक शिक्षा आर.पी.गुप्ता, महानिदेशक यू कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत एवं प्राविधिक शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

नीति आयोग की बैठक में ग्रीन बोनस सहित राज्य हित के कई मुद्दों को सीएम ने उठाया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 8वीं बैठक में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के विकास में मार्गदर्शन और सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए राज्य से संबंधित विभिन्न विषयों को रखा।

ग्रीन बोनस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में वनों, बुग्यालों, ग्लेशियरों का संरक्षण करके हम सम्पूर्ण राष्ट्र को महत्वपूर्ण पर्यावरणीय सेवायें उपलब्ध करा रहे हैं। आईआईएफएम, भोपाल के एक अध्ययन के अनुसार उत्तराखण्ड के वनों से प्राप्त होने वाली इन सेवाओं का न्यूनतम मौद्रिक मूल्य 95,000 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष है। भविष्य में राज्यों के मध्य संसाधनों के आवंटन में इन वन एवं पारिस्थितिकी सेवाओं के मानक को बढ़ाने का उन्होंने अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक यह प्रणाली अस्तित्व में नही आती तब तक उत्तराखण्ड राज्य को ग्रीन बोनस प्रदान किया जाये।

भ्रमणशील जनसंख्या
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामान्यतः विभिन्न केन्द्र पोषित योजनाओं में स्थिर जनसंख्या के मानक का उपयोग किया जाता है। महत्वपूर्ण तीर्थ स्थानों विशेष तौर पर चार धाम तथा कांवड़ यात्रा मे उत्तराखण्ड में बड़ी संख्या में तीर्थ यात्रियों एवं पर्यटकों का वर्ष भर आवागमन होता है, जो राज्य की जनसंख्या का पांच से छह गुना है। तीर्थ यात्रियों एवं पर्यटकों को समस्त आधारभूत सुविधायें जैसे-पार्किंग, यातायात, पेयजल, स्वच्छता, आवास, परिवहन, जन सुरक्षा इत्यादि राज्य के सीमित संसाधनों से ही करनी होती है। उन्होंने वित्तीय संसाधनों के आवंटन एवं नीति निर्माण में इस महत्वपूर्ण तथ्य को सम्मिलित किये जाने का अनुरोध किया।

बाह्य सहायतित परियोजनायें
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की लगभग 19,000 करोड़ रूपये की 11 वाह्य सहायतित परियोजनायें पाइप लाइन में हैं। इन परियोजना प्रस्तावों पर नीति आयोग, डी.ई.ए, सम्बन्धित केन्द्रीय मंत्रालयों से संस्तुति तथा फण्डिंग एजेंसियों से सैद्धान्तिक सहमति प्राप्त हो चुकी है। राज्य के वित्तीय संसाधन बहुत सीमित हैं जिस कारण ई.ए.पी तथा सी.एस.एस पर ही हमारी निर्भरता है। वित्त मंत्रालय के आदेश के अनुसार उत्तराखण्ड एवं हिमाचल प्रदेश हेतु इसमें बमपसपदह लगायी गयी है। इन परियोजनाओं पर कटौती किये जाने से राज्य में अवस्थापना सुविधाओं के सृजन तथा आजीविका के अवसर बाधित हो जायेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री जी से इसका समुचित समाधान करवाने का अनुरोध किया।

ऊर्जा
मुख्यमंत्री ने राज्य में 25 मेगावाट से कम लघु एवं सूक्ष्म जल विद्युत परियोजनाओं की ही उत्पादन क्षमता लगभग 3500 मेगावाट है। इसमें से मात्र 200 मेगावाट का ही दोहन हो रहा है। उन्होंने अनुरोध किया कि 25 मेगावाट से कम क्षमता की परियोजनाओं के अनुमोदन तथा क्रियान्वयन का अधिकार राज्य सरकार को प्रदान किया जाए। इस निर्णय से लगभग 3000 मेगावाट तक विद्युत क्षमता का उपयोग शीघ्र करके विकसित भारत/2047 के विजन के अन्तर्गत स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन करते हुए नेट जीरो के लक्ष्यों को हासिल करने में भी सहयोग दे पायेंगे।

नदी जोड़ो परियोजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो योजना के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा कुछ हिमनद नदियों को वर्षा आधारित नदियों से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। ऐसी अति महत्वपूर्ण ‘‘नदी-जोड़ो परियोजना’’ के क्रियान्वयन हेतु अत्यधिक धनराशि की आवश्यकता है, इसके लिये मुख्यमंत्री ने भारत सरकार से विशेष वित्तीय सहायता एवं तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया।

केन्द्र पोषित योजनाओं में लचीलापन
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र पोषित अधिकांश योजनाएं वन साइज फिट ऑल के आधार पर बनती हैं। जो राज्यों की अपनी विशिष्ट परिस्थितियां एवं आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होती है, परन्तु राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जैसी योजनायें भी हैं जिसकी गाइडलाईन में पर्याप्त लचीलापन है। इसके कारण राज्य की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार कार्य करने की स्वायत्ता रहती है। स्वायत्ता की यही प्रक्रिया अन्य केन्द्र पोषित योजनाओं के लिये भी अपनायी जानी चाहिये ताकि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य केन्द्र पोषित योजनाओं का अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें।

औद्योगिक प्रोत्साहन नीति
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लागू औद्योगिक प्रोत्साहन नीति वर्ष 2017 के अन्तर्गत प्राप्त प्रोत्साहन वर्ष 2022 में समाप्त हो चुके हैं, जबकि जम्मू कश्मीर तथा पूर्वाेत्तर राज्यों हेतु इसी प्रकार की अन्य औद्योगिक नीति वर्तमान में भी चल रही है। पर्वतीय राज्य होने के कारण हमारी समस्यायें भी उन्हीं राज्यों की तरह ही हैं। उन्होंने औद्योगिक प्रोत्साहन नीति को उत्तराखण्ड राज्य में भी आगामी 5 वर्षाे के लिये विस्तारित करने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की कड़ी में उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य-सशक्त उत्तराखण्ड 2025 की अवधारणा के आधार पर तेज गति से कार्य प्रारम्भ कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा नीति आयोग, भारत सरकार की तर्ज पर राज्य में स्टेट इंस्टीट्यूट फॉर इंपावरिंग एंड ट्रांसफॉर्मिंग उत्तराखण्ड (सेतु) का गठन किया है। गुजरात के जी.आई.डी.बी की तर्ज पर अवस्थापना सुविधाओं के सृजन हेतु उत्तराखण्ड निवेश और अवस्थापना विकास बोर्ड का गठन किया गया है ताकि घरेलू एवं अन्तर्राष्ट्रीय निवेशकों को राज्य में आकर्षित किया जा सके। जल संरक्षण को बढ़ावा देने, बाढ़ नियन्त्रण में सहायक और सभी विकास कार्याे में इकोनॉमी तथा इकोलॉजी का सन्तुलन सुनिश्चित करने के लिये ‘स्प्रिंग एंड रिवर रिजूवनेशन अथॉरिटी बनायी जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा जल आधारित रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। नगरीय मल्टी मॉडल परिवहन सुविधा के लिये यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटयन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (यू.एम.टी.ए) का गठन किया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पी0एम0 गतिशक्ति में गुजरात के बाद उत्तराखण्ड दूसरा राज्य है, जिसके द्वारा अधिकतम कार्य पूर्ण किया गया है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में बद्री-केदार धाम के पुननिर्माण का संकल्प शीघ्र साकार होने जा रहा है। इसके लिये राज्य की ओर से मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार भी व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुमांऊ क्षेत्र में स्कन्द पुराण में उल्लिखित प्रमुख पौराणिक मंदिर तथा गुरूद्वारा को एक सर्किट के रूप में जोड़ने के लिये मानसखण्ड मंदिर माला मिशन प्रारम्भ की गयी है। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर लगभग 50,000 परिवारों को प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से रोजगार मिलने का अनुमान है। प्रथम चरण में 16 मंदिरों का अवस्थापना विकास किया जा रहा है। पहली बार जागेश्वर मंदिर पर आधारित गणतंत्र दिवस की झांकी को पहला स्थान मिला।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में ‘‘मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिमम गवर्नेंस’’ की अवधारणा के अन्तर्गत आई.टी का अधिक से अधिक उपयोग किया जा रहा है। अपणि सरकार पोर्टल पर लगभग 70 प्रतिशत सेवायें ऑनलाईन उपलब्ध है। ‘अपणों स्कूल अपणों प्रमाण’ के अन्तर्गत विद्यालय में ही छात्र-छात्राओं को सभी प्रमाण पत्र निर्गत किये जा रहे हैं। रोजगार के सृजन की दृष्टि से 18000 पॉली हाउस एक साथ स्वीकृत किये गये जबकि विगत वर्षों में लगभग 500 पॉली हाउस प्रतिवर्ष स्वीकृत होते थे। आगामी दो वर्षाे में प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रूप से लगभग एक लाख से अधिक रोजगार का सृजन होगा। पर्यटन नीति 2023 के अन्तर्गत लगभग 40 हजार करोड़ रूपये का निवेश सम्भावित है, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार सृजन होगा। विदेशों में रोजगार के आकर्षक अवसर उपलब्ध कराने हेतु मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना लायी गयी है। पर्यटक स्थलों पर सुगमतापूर्वक आवागमन के लिये 58 हैलीपोर्ट तथा हैलीपैड निर्मित किये गये हैं एवं 29 हैलीपोर्ट तथा हैलीपैड निर्माणाधीन है। स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रकार के ड्रोन के निर्माण तथा दूरस्थ क्षेत्रों में आवश्यकीय सेवाओं, विकास कार्याे की निगरानी के लिये ‘ड्रोन यूसेज एंड प्रमोशन पॉलिसी’ लायी जा रही है। सात जनपदों के 250 कृषकों को वर्तमान में ड्रोन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राज्य में महिलाओं को अधिक सशक्त बनाने के लिये 2025 तक 1.25 लाख लखपति दीदी का लक्ष्य रखा गया है एवं 33,158 परिवारों को लखपति दीदी के रूप में तैयार किया गया है।

नवरत्नों की माला पिरोने वाले इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को धामी प्रदान कर रहे नवीन ऊर्जा-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देवभूमि उत्तराखंड को वंदे भारत एक्सप्रेस के रूप में एक बड़ा तोहफा दिया, इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड के विकास के लिए निर्धारित उन नौ रत्नों का भी खुलकर जिक्र किया जिसके जरिए “डबल इंजन“ की सरकार पहाड़ी राज्य की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि हमारी सरकार का पूरा जोर, “विकास के नवरत्नों पर है“। अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि “नवरत्नों की माला को पिरोने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के जो प्रोजेक्ट यहां चल रहे हैं, उन्हें भी धामी की सरकार ने नई ऊर्जा दी है।
देवभूमि उत्तराखंड से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष लगाव किसी से छुपा नहीं है। उनका बार-बार उत्तराखंड आना और देवभूमि के विकास के प्रति उनके विचार एवं गतिमान व प्रस्तावित योजनाएं यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि अपने मुखारबिंद से उनका यह कहना कि “ये दशक उत्तराखंड का दशक होगा“, यह सब आज वास्तव में धरातल पर परिलक्षित हो रहा है।
आज वंदे भारत एक्सप्रेस के शुभारंभ के अवसर पर भी उन्होंने “ये दशक उत्तराखंड का दशक“ होगा वाली पंक्तियों को न केवल दोहराया बल्कि यह भी बताया कि किस तरह ये दशक उत्तराखंड का दशक होने जा रहा है। उन्होंने विकास के नवरत्नों पर विस्तार से बोलते हुए बताया कि किस तरह विकास के नवरत्न के तहत चल रहे कार्य उत्तराखंड के लिए आने वाले दिनों में कितने अहम साबित होंगे।

ये हैं विकास के नवरत्न
पहला रत्न- केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम में 1300 करोड़ रुपए से पुनर्निर्माण का कार्य।
दूसरा रत्न- ढाई हजार करोड़ रुपए की लागत से गौरीकुण्ड-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुण्ट साहिब रोपवे का कार्य।
तीसरा रत्न- कुमायूं के पौराणिक मंदिरों को भव्य बनाने के लिये मानसखण्ड मंदिर माला मिशन का काम।
चौथा रत्न- पूरे राज्य में होम स्टे को बढ़ावा, राज्य में 4000 से अधिक होम स्टे रजिस्टर्ड हो चुके हैं।
पांचवा रत्न- 16 ईको टूरिज्म डेस्टिनेशन का विकास।
छठा रत्न- उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, उधमसिंह नगर में एम्स का सेटलाइट सेंटर भी बनाया जा रहा है।
सातवां रत्न- करीब 2 हजार करोड़ रुपए की लागत वाली टिहरी लेक डेवलपमेंट परियोजना
आठवां रत्न- ऋषिकेश-हरिद्वार का एडवेंचर टूरिज्म और योग की राजधानी के रूप में विकास
नौवा रत्न- टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन। इस रेल लाइन पर भी जल्द काम शुरू हो जाएगा।

अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि आप लोगों ने एक कहावत सुनी होगी- सोने पर सुहागा। इसलिए इन नवरत्नों की माला को पिरोने के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर के जो प्रोजेक्ट यहां चल रहे हैं, उन्हें भी धामी की सरकार ने नई ऊर्जा दी है। 12 हजार करोड़ रुपए की लागत से चारधाम महापरियोजना पर तेज गति से काम हो रहा है। दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे तैयार होने से देहरादून-दिल्ली के बीच सफर और आसान हो जाएगा। रोड कनेक्टिविटी के साथ ही, रोप-वे कनेक्टिविटी के लिए भी उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। पर्वतमाला योजना आने वाले दिनों में उत्तराखंड का भाग्य बदलने जा रही है। इसके लिए जिस कनेक्टिविटी का उत्तराखंड के लोगों ने बरसों इंतजार किया है, वो इंतजार भी हमारी सरकार समाप्त कर रही है।

उत्तराखंड के कृषि उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग की व्यवस्था हो-धामी

कृषकों को कृषि एवं उद्यान के क्षेत्र में उत्पादन का अच्छा दाम मिले इसके लिए बेहतर मार्केटिंग की व्यवस्था की जाए। कृषकों की आय दुगुनी करने के लिए उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाए। किसानों को मोटे अनाजों के अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करें। किसानों की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए कृषि, उद्यान एवं अन्य संबंधित विभाग समन्वय से कार्य करें। अधिकारी बैठक में पूरी तैयारी से आयें, कार्य के प्रति किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सशक्त उत्तराखण्ड 2025 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कृषि एवं उद्यान के अल्प, मध्य एवं दीर्घकालिक रोडमैप की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मिलेट्स के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए, इसकी मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है, किसानों की आय को बढ़ाने में मिलेट्स अहम भूमिका निभायेगा। तीन सितारा, चार सितारा एवं पांच सितारा होटलों में मिलेट्स की व्यवस्था हो, इसके लिए इन्हें भी प्रोत्साहित किया जाए। पैक्स एवं क्रय केन्द्रों पर मिलेट्स खरीदने की उचित व्यवस्था रखी जाए। जो स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मंडुवा लेंगी, उनको इन्सेंटिव शीघ्र मिल जाए। उन्होंने कहा कि मिलेट्स उत्पादन के लिए प्राकृतिक और परंपरागत रूप से सभी संसाधन राज्य के पास हैं। मिलेट्स के क्षेत्र में उत्तराखण्ड को रोल मॉडल बनाने की दिशा में कार्य किये जाएं।
कृषि अवसंरचना निधि के तहत धीमी कार्य प्रगति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये कि इसमें निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मजबूत कार्ययोजना बनाई जाए। इसके तहत किसानों को ऋण लेने में कोई असुविधा न हो, इसके लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण की दिशा में ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदरों से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए जल्द ही वन विभाग, शहरी विकास एवं अन्य संबंधित विभागों की बैठक की जाए।
मुख्यमंत्री ने उद्यान विभाग के रोडमैप की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि राज्य में पॉलीहाउस स्थापना के कार्यों में अभियान के तहत कार्य किये जाएं। कैबिनेट द्वारा इसके लिए किसानों को 70 प्रतिशत अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इन पॉलीहाउस में फल, फूल, सब्जी का जो उत्पादन होगा, इनको देश भर में भेजा जायेगा। इसके लिए गढ़वाल और कुमायूं में मण्डी बनाने का निर्णय लिया गया है। पॉलीहाउस पर कार्य प्रगति की जल्द समीक्षा भी की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए। कीवी और एप्पल मिशन के तहत तेजी से कार्य किया जाए। मौन पालन के क्षेत्र में राज्य में अनेक संभावनाएं हैं। मौन पालन किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक अच्छा माध्यम है, इस दिशा में कार्य करने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा अगर बाहर से उच्च गुणवत्ता युक्त पौध ली जा रही है, तो उनका डीबीटी के माध्यम से समय पर भुगतान हो, यह सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, विनय शंकर पाण्डेय, दीपेन्द्र चौधरी, अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान, विजय कुमार जोगदाण्डे, कृषि, उद्यान एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।