भारतीय सेना के जवानों ने रेस्क्यू कर बचाई 313 लोगों की जान

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण मची तबाही के बीच सेना के जवान देवदूत बनकर राहत बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। मंगलवार को सेना के जवानों ने टनकपुर और नैनीताल से 313 लोगों का रेस्क्यू करते हुए सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसमें महिलाओं के अलावा छोटे बच्चे भी शामिल थे। देहरादून स्थित उत्तराखंड सब एरिया मुख्यालय से सेना के विशेष अभियान की जानकारी साझा की गई। प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि भारी बारिश के कारण काली नदी टकनपुर में जल स्तर बढ़ गया। मंगलवार को इस नदी में बाढ़ आ गई। सेना ने तत्काल सुबह साढ़े आठ बजे मुख्यालय उत्तराखंड उप क्षेत्र और उत्तर भारत क्षेत्र के तत्वावधान में पंचशूल ब्रिगेड की जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री से दो बाढ़ राहत कॉलम जुटाए। इसके बाद टनकपुर के शारदा घाट गांव और अंबेडकर नगर गांव में राहत बचाव अभियान चलाया गया। करीब चार घंटे ये अभियान चला। इस दौरान 283 ग्रामीणों को बचाया गया। इसमें 89 पुरुष, 139 महिलाएं और 55 बच्चे शामिल थे। जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के अतिरिक्त बचाव कॉलम किसी भी अप्रत्याशित आकस्मिकता से निपटने और नागरिक प्रशासन को आगे की सहायता के लिए बनबासा सैन्य स्टेशन पर स्टैंडबाय पर रखे गए हैं।
सेना के जवानों ने तल्लीताल नैनीताल में भी रेस्क्यू अभियान चलाया। यहां भी अचानक पानी बढ़ने और तेज बहाव के कारण कई दुकानदार अपनी-अपनी दुकानों में फंस गए। नैनीताल प्रशासन ने सहायता के लिए अनुरोध किया और सेना मौके पर पहुंच गई। पंचशूल ब्रिगेड की निगरानी और लक्ष्य प्राप्ति बैटरी से एक बाढ़ राहत कॉलम पंचशूल ब्रिगेड, मुख्यालय उत्तराखंड उप क्षेत्र और उत्तर भारत क्षेत्र के तत्वावधान में नैनीताल के तल्लीताल में बचाव अभियान चलाया गया। यहां छह घंटों में 30 लोगों को बचाया गया। इसमें दो बच्चे भी शामिल हैं। किसी भी अप्रत्याशित आकस्मिकता से निपटने के लिए नैनीताल मिलिट्री स्टेशन पर जवानों को मुस्तैद रखा गया है।

भारी बारिश से हुई तबाही, राहत और बचाव कार्यों में सेना के हेलीकाप्टर लगाये

प्रदेश में भारी बारिश के दौरान हुए भूस्खलन की घटनाओं में 40 लोगों की मौत हो गई। नैनीताल जिले में ही 25 लोगों की मौत हुई है। मरने वालों में 14 उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूर शामिल हैं। नैनीताल जिले के रामगढ़ ब्लॉक में 9 मजदूर घर में ही जिंदा दफन हो गए। जबकि, झुतिया गांव में ही एक मकान मलबे में दबने से दंपति की मौत हो गई, जबकि बेटा अभी लापता है। दोषापानी में 5 मजदूरों की दीवार के नीचे दबने से मौत हो गई।
नैनीताल जिले में ही क्वारब में 2, कैंची धाम के पास 2, बोहराकोट में 2 और ज्योलिकोट में एक की मौत हुई। अल्मोड़ा में छह लोगों की मलबे में दबने से मौत हुई है। जबकि, चंपावत में तीन और पिथौरागढ़-बागेश्वर में भी एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। बाजपुर में तेज बहाव में बहने से एक किसान की मौत हो गई। उधर, बारिश का पानी घर में घुसने से फैले करंट से किच्छा में यूपी के देवरिया के विधायक कमलेश शुक्ला के घर में फैला करंट फैलने से बहू की मौत हो गई। नैनीताल के ओखलकांडा और चम्पावत में आठ लोग लापता हैं।
दो दिन से हो रही बारिश से आपदा के चलते एसडीआरएफ की टीमें रातभर बचाव और राहत अभियान में जुटी रहीं। एसडीआरएफ ने इस दौरान छह सौ से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की। प्रदेश भर एसडीआरएफ की 29 स्थानों पर पोस्ट हैं। मौसम विभाग की ओर से भारी बारिश की चेतावनी के बाद, सभी टीमों को पहले ही हाई अलर्ट पर रखा गया था। इसी क्रम में एसडीआरएफ कमांडेंट नवनीत भुल्लर कंट्रोल रूम में डटकर, रातभर राहत और बचाव अभियान की निगरानी करते रहे। इस दौरान बारिश से हो रहे नुकसान, सड़क मार्ग पर फंसे वाहनों, पैदल मार्गों पर फंसे यात्रियों की जानकारी जुटाकर उन तक टीमें पहुंचाने का काम किया गया। बल की टीमों ने गौमुख ट्रैकिंग रूट, केदारनाथ पैदल मार्ग के साथ ही जगह बाढ़ और मलबे में फंसे लोगों को बचाने का काम किया। मंगलवार दोपहर बाद तक बल की टीमों ने छह सौ लोगों को सुरक्षित निकालने में कामयाबी हासिल की।

केदारनाथ में ठंड से बाबा दंडी भारती की मौत
केदारनाथ में बीते कई सालों से रह रहे बाबा दंडी भारती का मंगलवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि मंगलवार सुबह 5 बजे ठंड अधिक बढ़ने से उनकी मौत हुई है। उधर, रुड़की के लंढौरा में बारिश के दौरान एक दीवार गिरन जाने से नौ माह के बच्चे की मौत हो गई।

राहत-बचाव को मिले सेना के तीन हेलीकॉप्टर
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने बताया कि, सेना के तीन हेलीकॉप्टर को आपदा को लेकर संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जा रहा है। सभी डीएम से बारिश की वजह से किसानों की फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है।

पुलिया टूटने से कई गांवों का संपर्क कटा
सोमवार सुबह से हुई मूसलाधार बारिश से गौला की बाढ़ ने पूरे किच्छा क्षेत्र जमकर तबाही मचाई। किच्छा डैम फाटक तेज बहाव से क्षतिग्रस्त गए। कई बस्तियां पानी में डूब गईं। पानी बस्तियों में घुसने से लगभग एक दर्जन घर क्षतिग्रस्त एवं एक पुलिया टूट गई। प्रशासन ने डूबी बस्तियों में बचाव कार्य चला कर लोगों को बाहर निकाला।

सीएम ने दिए अतिवृष्टि से किसानों को हुए नुकसान का आंकलन करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय स्थित राज्य आपदा कंट्रोल रूम जाकर प्रदेश में बारिश से हुए नुकसान की जानकारी ली। मुख्यमंत्री कल से सभी जिलाधिकारियों से हर पल की अपडेट ले रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों के हवाई निरीक्षण भी कर रहे हैं, प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण भी कर रहे है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि अतिवृष्टि से जानमाल का जो नुकसान हुआ है। प्रभावितों को मानकों के अनुसार जल्द अनुमन्य सहायता राशि उपलब्ध कराया जाय। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि अतिवृष्टि से किसानों का जो नुकसान हुआ है, उसका आकलन कर जल्द रिपोर्ट भेजी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में सेना से तीन हेलीकॉप्टर लगाये जा रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी चमोली एवं रुद्रप्रयाग को फोन कर निर्देश दिये कि यात्रा मार्गों पर फंसे यात्रियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि धैर्य बनाकर रखें। अतिवृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार द्वारा तेजी से प्रयास किये जा रहे हैं। सभी जरूरी इंतजाम सरकार द्वारा किये जा रहे हैं।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, अपर प्रमुख सचिव अभिनव कुमार, सचिव आपदा प्रबंधन एस. ए. मुरूगेशन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिद्धिम अग्रवाल मौजूद थे।

पीएम ने सीएम को आपदा में हर संभव मदद का आश्वासन दिया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज दूरभाष पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उत्तराखण्ड में अतिवृष्टि से हुए नुकसान और संचालित बचाव व राहत कार्यों के बारे में जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने प्रदेश को हर आवश्यक सहयोग दिये जाने के प्रति आश्वस्त किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को वस्तुस्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में कुछ स्थानों पर नुकसान हुआ है। शासन प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है।

ई-रिक्शा के रुट निर्धारण को लेकर 21 को धरना-प्रदर्शन की तैयारी पूरी

विक्रम युनियन कार्यालय ऋषिकेश में विक्रम, आटो, जेएसए और टैक्सी युनियन के पदाधिकारीयों द्वारा बैठक कर 21 अक्टूबर को ई-रिक्शा के रुट निर्धारण के विरूद्ध होने वाले धरना प्रदर्शन की तैयारी को अंतिम रूप दिया गया।
उत्तराखंड विक्रम टैम्पो महासंघ के अध्यक्ष मंहत विनय सारस्वत की अध्यक्षता मे हुयी बैठक मे 21 अक्टूबर को ई-रिक्शाओ को नेशनल हाईवे से हटाकर उनके तय मानको के अनुसार रूटो पर संचालन करने के लिए आरटीओ कार्यालय ऋषिकेश पर वाहन स्वामियो द्वारा अपने वाहनो के साथ धरना-प्रदर्शन किया जायेगा।
बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि ई-रिक्शाओ की अत्यधिक संख्या के कारण नेशनल हाईवे में हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है। इन पर तत्काल रोक लगाते हुए नये वाहनो के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगायी जाये।
बैठक मे यह भी तय किया गया कि 21 अक्टूबर प्रातः 9 बजे वाहन स्वामी अपने वाहनों के साथ ऋषिकेश विक्रम युनियन के कार्यालय से देहरादून तिराहे से इंन्द्रमणी चौक से आरटीओ कार्यालय पहुंचेगे।
बैठक मे जेएसए युनियन ऋषिकेश अध्यक्ष विनोद शर्मा, सचिव सचिन अग्रवाल, टैक्सी युनियन ऋषिकेश के अध्यक्ष विजय पाल सिंह रावत, लक्ष्मण झूला विक्रम युनियन अध्यक्ष त्रिलोक भंण्डारी, महामंत्री अरूण कुमार, रामझूला विक्रम युनियन अध्यक्ष सुनील शर्मा, महामंत्री पंकज वर्मा, देवभूमि आटो युनियन ऋषिकेश राजेन्द्र लाम्बा, महामंत्री बचन गुप्ता, विक्रम युनियन ऋषिकेश के उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह सजवाण, कोषाध्यक्ष हरिमोहन, सहायक आटोरिक्शा मालिक चालक ऋषिकेश उपाध्यक्ष सुभाष चंन्द्र, सचिव संजय आर्य, पंचपुरी हरिद्वार रोडीबेल वाला संरक्षक सत्यनारायण शर्मा, सचिव विनोद शाह, डोईवाला विक्रम युनियन अध्यक्ष प्रताप यादव, सचिव जगदीश प्रसाद, आटो युनियन घाट रोड ऋषिकेश अध्यक्ष सोहन गौनियाल, नेपाली फार्म विक्रम युनियन अध्यक्ष भारत भूषण नौटियाल, सचिव राजेन्द्र राणा, गोविंद सिंह पयाल, पूर्व अध्यक्ष रामझूला फेरू जगवानी, प्रवीण नौटियाल, द्वारिका प्रसाद, संजय कोठारी, स्वामी मुकेश वत्स आदि उपस्थित रहे।

गौहरीमाफी में 25 गुजरों के लिए भगवान बनकर आई पुलिस

दो तीन से लगातार हो रही बारिश के कारण गंगा का जलस्तर अचानक बढ़ गया। मंगलवार सुबह गौहरीमाफी में गुर्जरों का 25 सदस्यीय दल गंगा के तेज बहाव के कारण टापू में फंस गया। सूचना मिलने पर रायवाला पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू कर सभी को सुरक्षित बचाया।
रायवाला थाना पुलिस के मुताबिक मंगलवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि गौहरीमाफी में गंगा के किनारे बने टापू में कई लोग फंस गए है। उनमें चीख पुकार मची हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और टापू में फंसे महिलाओं, बच्चे सहित 25 लोगों को सकुशल बचा लिया।
साथ में उनके मशेवियों को भी सुरक्षित निकाला गया। थानाध्यक्ष भुवन चंद्र पुजारी ने बताया कि गुर्जरों का डेरा सोमवार को उत्तरकाशी से यहां पर आया था। वे गौहरीमाफी में राम मंदिर स्थित गंगा के टापू में डेरा बनाकर रूका हुआ। ये लोग अपने मवेशियों को चारा खिला रहे थे कि वे गंगा का अचानक जलस्तर बढ़ने से वे टापू में फंस गए। टीम में उपनिरीक्षक रघुवीर कपरूवान, एसडीआरएफ उपनिरीक्षक चंदन भंडारी कांस्टेबल, विनोद कुमार, प्रवीन नेगी, संदीप, धर्मवीर, महेंद्र, किशोर, सुरेंद्र, संदीप, सुमित, रविंद्र आदि शामिल रहे।

बिगड़े मौसम का पल-पल जायजा लेते रहे सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में हो रही वर्षा का लगातार जायजा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने फोन के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों से जनपदों में बारिश की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिले में बारिश की स्थिति एवं आवागमन की स्थिति की प्रत्येक घंटे की रिपोर्ट दी जाए। प्रशासनिक अमले पहले ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर अलर्ट मोड पर हैं।
मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से भी सावधानी बरतने की अपील की है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आज प्रदेश के 1 से 12वीं कक्षा तक के सभी स्कूल बंद रखे गए हैं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में रिस्पांस टाइम कम से कम हो। यात्रियों को असुविधा न हो।

भारी बारिश के अलर्ट के बीच सीएम खुद करे मॉनीटिरिंग, लगातार रख रहे नजर

प्रदेश में भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सभी जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों और एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश की स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों से उनकी तैयारियों, बारिश की स्थिति आदि के बारे में विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी स्कूलों में 18 अक्टूबर को अवकाश रखने के निर्देश दिये। बहुत से जिलों में अवकाश कर भी दिया गया है। जिन जिलों में नहीं किया गया है, वे भी एहतियातन सोमवार को स्कूलों में अवकाश घोषित कर दें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री प्रदेश में आए हुए हैं। जरूरी होने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ठहराते हुए उनके रहने और भोजन आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसमें किसी तरह की लापरवाही न हो। पर्यटक और तीर्थयात्री यहां से अच्छा संदेश लेकर जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य, जिलों और तहसील स्तरों पर कंट्रोल रूम 24 घंटे संचालित हों। जिलों से इन दो दिन, हर घंटे रिपोर्ट भेजी जाए। कोई घटना होने पर उसकी सूचना तुरंत दी जाए। रेस्पोंस टाइम कम से कम होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जाए। आईटीबीपी, सीडब्ल्यूसी, बीआरओ, एसडीआरएफ, राजस्व, पुलिस आदि आपसी समन्वय से काम करें। ट्रेकर्स के बारे में पूरी सूचना रखी जाए और उनसे सम्पर्क रखें। लैंडस्लाइड जोन पर विशेष ध्यान रखा जाए। रास्ते बंद होने पर तुरंत खोलने की व्यवस्था हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि भूस्खलन आदि स्थिति में लोग कहीं फंसे नहीं। वे सुरक्षित स्थानों पर ठहरें। आपदा बचाव और राहत संबंधी उपकरण सुचारू स्थिति में हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए पूरी सावधानी बरतनी है। यात्रियों और पर्यटकों से भी सावधानी रखने की अपील की जाए, परंतु किसी तरह के पैनिक की भी जरूरत नहीं है। जिलाधिकारी, एसएसपी स्वयं मॉनिटरिंग करें।
बैठक में सभी जिलाधिकारियों से पूरी जानकारी ली गयी। बताया गया कि सभी जगह स्थिति अभी सामान्य है। एहतियातन चारधाम यात्रियों को सुरक्षित रूकाया गया है। रुकने, खाने की पर्याप्त व्यवस्था है।
बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ धन सिंह रावत, विधायक संजय गुप्ता, मुख्य सचिव डॉ एस एस संधु, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव एसए मुरूगेशन, आईजी वी मुरूगेशन, आईजी एसडीआरएफ पुष्पक ज्योति, एसीईओ आपदा प्रबंधन रिद्धिम अग्रवाल, सहित वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, बीआरओ, आईएमडी, आईटीबीपी, सीडब्ल्यूसी, उत्तराखण्ड सब एरिया, सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

तीर्थनगरी में पुलिस की मुनादी, गंगा तटों से हटाये गये लोग, सतर्क रहने की अपील

मौसम विभाग द्वारा भारी वर्षा की चेतावनी को देखते हुए ऋषिकेश पुलिस ने शहर में ठहरे यात्रियों, पर्यटकों तथा नदियों के किनारे रहने, बसे लोगों को सतर्क किया गया। वहीं, नदी किनारे घाटों व पहाड़ी क्षेत्र मे न जाने की अपील भी की गई।
मौसम विभाग ने आज और कल भारी वर्षा की चेतावनी/पूर्वानुमान जारी किया गया है। जिससे कि गंगा एवं अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ जाने तथा पहाड़ी इलाकों में भारी वर्षा के कारण भूस्खलन होने की संभावना जताई गई है। इसी को देखते हुए महेश जोशी, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली ऋषिकेश के द्वारा कोतवाली हाजा के समस्त अधिकारी/कर्मचारी गणों को मौसम द्वारा जारी चेतावनी से अवगत कराते हुए कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत प्रचार-प्रसार करने तथा नदियों के किनारे बसे लोगों को सतर्क एवं सुरक्षित करने हेतु आदेशित किया गया। जिसके बाद ऋषिकेश पुलिस के द्वारा मौसम विभाग द्वारा जारी भारी वर्षा की चेतावनी/पूर्वानुमान के दृष्टिगत ऋषिकेश क्षेत्र अंतर्गत अनाउंसमेन्ट/अन्य रूप से प्रचार-प्रसार कर मौसम विभाग द्वारा दी भारी वर्षा की चेतावनी की सूचना प्रयारित की गई।
पुलिस ने भारी वर्षा के पश्चात नदियों का जलस्तर बढ़ जाने की संभावना के दृष्टिगत गंगा एवं चंद्रभागा नदी किनारे झुग्गी-झोपड़ियों, घाटो एवं अन्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों को खतरे वाले स्थानों से हटाया गया और सतर्क किया गया।
वहीं, चार धाम यात्रा एवं पर्यटन हेतु पहाड़ी इलाकों में जाने वाले बाहरी राज्यो से आए हुए यात्री/पर्यटकों जोकि ऋषिकेश शहर में होटलों/धर्मशालाओ या अन्य रूप से ठहरे हुए हैं सभी को होटलों/धर्मशालाओ के बाहर वह शहर के मुख्य चौक चौराहों पर अनाउंसमेंट कर मौसम विभाग द्वारा दी गई चेतावनी से सूचित किया गया। साथ ही 2 दिन तक पहाड़ी इलाकों में न जाने की एडवायजरी दी गई।

ई-रिक्शाओं संचालकों पर परमिट के आधार पर संचालन नही करने का आरोप

विक्रम युनियन कार्यालय ऋषिकेश में समस्त विक्रम, टैक्सी, थ्रीविलर की एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई। जिसमें नगर में संचालित हो रहे ई-रिक्शाओं से लग रहे जाम से निजात दिलाने के लिए देहरादून की तरह ऋषिकेश में भी संचालित करने की मांग की गई। बैठक की अध्यक्षता विक्रम टैम्पो महासंघ उत्तराखंड के अध्यक्ष मंहत विनय सारस्वत ने की।
बैठक में तय किया गया कि 21 अक्टूबर को नेपाली फार्म, छिदरवाला, डोईवाला, ऋषिकेश, मुनिकीरेती, लक्ष्मण झूला क्षेत्र से सम्बंधित विक्रम एवं आटो वाहन अपने वाहनों का चक्का जाम कर ऋषिकेश आरटीओ कार्यालय पर प्रर्दशन कर ज्ञापन सौंपेंगे।
बैठक मे सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वर्तमान मे ई रिक्शाओ को परमिट फ्री करने के कारण क्षैत्र मे इनकी संख्या अनियंत्रित हो गयी है, जिसके चलते हुए नेशनल हाईवे पर जाम की स्थिति बनी हुयी है। विनय सारस्वत ने कहा कि ई रिक्शा के पंजीकरण पर रोक लगाने के साथ ही पूर्व मे इनके परमिटो पर दिये गये ग्रामीण क्षैत्रो मे ई-रिक्शाओ का संचालन देहरादून की भांति किये जाने की मांग की जायेगी।
बैठक मे विजयपाल सिंह रावत अध्यक्ष टैक्सी युनियन, त्रिलोक भंण्डारी अध्यक्ष लक्ष्मण झूला युनियन, सुनील शर्मा अध्यक्ष मुनिकिरेती, वीरेंद्र सिंह सजवाण उपाध्यक्ष, हरिमोहन कोषाध्यक्ष, पंकज वर्मा महासचिव, जगवाणी पूर्व अध्यक्ष रामझूला, राजेन्द्र लाम्बा अध्यक्ष थ्रीविलर ऋषिकेश, प्रवीण नौटियाल, बचन गुप्ता आदि मौजूद रहे।