खटीमा होली मिलन समारोह में उमड़ा जनसैलाब, मुख्यमंत्री ने जनसमुदाय संग साझा की उत्सव की खुशियां

सनातन धर्मशाला रामलीला मैदान, खटीमा में आयोजित भव्य होली मिलन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सहभागिता कर उपस्थित जनसमूह को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने पारंपरिक कुमाऊँनी होली, शास्त्रीय होली तथा थारू होली गायन में भाग लेकर जनसमुदाय के साथ उत्सव की खुशियां साझा कीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपराएं और पर्व हमारी सांस्कृतिक पहचान के सशक्त आधार हैं। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सद्भाव, समरसता और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “खटीमा मेरा घर है और खटीमावासी मेरा परिवार है। अपने परिवारजनों के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी समृद्ध विरासत को संजोने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने मातृशक्ति को नमन करते हुए कहा कि महिला शक्ति के बिना कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो सकता। प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है तथा इसी दिशा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की गई है।

उन्होंने कहा कि खटीमा सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है और ‘मिनी इंडिया’ के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। यहां सभी धर्मों, समुदायों और संगठनों के लोग प्रेम, एकता और सौहार्द के साथ रहते हैं तथा सभी पर्वों को मिल-जुलकर मनाते हैं। आधुनिक परिवेश के बीच भी खटीमा में पारंपरिक संस्कृति को जीवंत बनाए रखना अत्यंत सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने सभी से आह्वान किया कि हम सब मिलकर खटीमा, प्रदेश और देश की उन्नति के लिए कार्य करें तथा प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अपना योगदान दें। उन्होंने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे महोत्सव सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करते हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय नागरिकों के साथ होली खेलकर उत्सव की आनंदमयी भावना को और प्रगाढ़ किया तथा समस्त प्रदेशवासियों को सुख, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण होली की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, मेयर विकास शर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, दर्जा मंत्री मंजीत सिंह, पूर्व विधायक डॉ. प्रेम सिंह राणा, जिलाध्यक्ष कमल जिन्दल, उपाध्यक्ष अमित कुमार पांडे, महासचिव रमेश चंद्र जोशी, नंदन सिंह खड़ायत, गम्भीर सिंह धामी, सतीश भट्ट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम आवास पहुंचे चंपावत से आए होल्यार, सीएम ने दी बधाई

जनपद चम्पावत के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों से आए होल्यारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की और पारंपरिक अंदाज में उन्हें होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर होल्यारों ने कुमाऊँ अंचल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का अनुपम प्रदर्शन करते हुए खड़ी एवं बैठकी होली के पारंपरिक लोकगीतों का सुमधुर गायन किया।

मुख्यमंत्री धामी ने सभी होल्यारों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध लोकसंस्कृति, शास्त्रीय संगीत परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि चम्पावत सहित समूचे कुमाऊँ क्षेत्र की खड़ी और बैठकी होली अपनी विशिष्ट शैली, राग-रागिनियों की शास्त्रीयता और भक्ति भाव से परिपूर्ण प्रस्तुति के कारण देशभर में विशेष पहचान रखती है। यह परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है, जिसे संजोकर रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोक कला, लोक संगीत और पारंपरिक उत्सवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है। विभिन्न सांस्कृतिक मंचों, महोत्सवों और आयोजनों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। साथ ही ये समाज में आपसी भाईचारे, प्रेम और सौहार्द की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

इस अवसर पर होल्यारों ने प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और निरंतर प्रगति की कामना करते हुए पारंपरिक मंगल गीत प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री ने भी समस्त प्रदेशवासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कामना की कि यह रंगोत्सव सभी के जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता, सुख और समृद्धि लेकर आए। उन्होंने कहा कि होली का यह पावन पर्व हमें आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम, सद्भाव और एकता के रंग में रंगने का संदेश देता है।

चारधाम यात्रा 2025 के अभिनव ट्रैफिक कंट्रोल मॉडल के लिये युवा पुलिस अधिकारी लोकजीत सिंह को मिला राष्ट्रीय सम्मान

उत्तराखंड पुलिस के लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि चारधाम यात्रा 2025 के सफल संचालन हेतु विकसित अभिनव ट्रैफिक एवं कंट्रोल रूम प्रबंधन प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित SKOCH Award – India’s Honest Independent Honour के लिए चयनित किया गया है।

पुलिस अधीक्षक (यातायात) देहरादून लोकजीत सिंह के नेतृत्व में “चारधाम यात्रा 2025 : निर्बाध तीर्थ प्रबंधन हेतु अभिनव कंट्रोल रूम समाधान” नामांकन को 106वें SKOCH समिट में सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान शासन एवं विकास के क्षेत्र में विशिष्ट और परिणाम-आधारित नवाचारों के लिए प्रदान किया जाता है।

चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वर्ष 2025 में यातायात प्रबंधन को सुचारु, सुरक्षित एवं तकनीक-आधारित बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा उन्नत कंट्रोल रूम सिस्टम, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, डिजिटल समन्वय, इंटेलिजेंट रूट डायवर्जन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को सुदृढ़ किया गया। इस नवाचार के परिणामस्वरूप यातायात जाम में कमी, तीर्थयात्रियों की सुरक्षित आवाजाही तथा आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई।

यह सम्मान उत्तराखंड पुलिस व युवा पुलिस अधिकारी एसपी (ट्रैफिक) लोकजीत सिंह की तकनीकी दक्षता, पारदर्शी कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रमाण है। चारधाम यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में प्रभावी यातायात प्रबंधन राज्य की प्रशासनिक क्षमता और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।

उल्लेखनीय है कि यह पुरस्कार 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 106वें SKOCH समिट के दौरान प्रदान किया जाएगा।

उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने इस उपलब्धि पर एसपी
(ट्रैफिक) लोकजीत सिंह सहित पूरी ट्रैफिक पुलिस टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरी उत्तराखंड पुलिस के लिए प्रेरणास्रोत है तथा भविष्य में भी नवाचार आधारित पुलिसिंग को प्रोत्साहन देता रहेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि चारधाम यात्रा के उत्कृष्ट, सुव्यवस्थित और प्रभावी प्रबंधन के लिए युवा पुलिस अधिकारी लोकजीत सिंह को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित SKOCH Group द्वारा प्रदान किए जाने वाले SKOCH AWARD से सम्मानित किया जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल एक अधिकारी के उत्कृष्ट नेतृत्व की पहचान है, बल्कि उत्तराखंड की प्रशासनिक दक्षता और पुलिस विभाग की प्रतिबद्धता का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी है।

वर्ष 2024 की चारधाम यात्रा के दौरान आई चुनौतियों ने प्रशासन को अनेक महत्वपूर्ण सीख दी थीं। इन्हीं अनुभवों को आधार बनाते हुए पुलिस मुख्यालय ने वर्ष 2025 की यात्रा को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए एक सशक्त रणनीति तैयार की। IG रेंज के अंतर्गत एक केंद्रीकृत और प्रभावी कंट्रोल रूम के गठन का निर्णय लिया गया, जिसकी जिम्मेदारी एसपी लोकजीत सिंह को सौंपी गई। सीमित समय में ही उन्होंने अपनी टीम के साथ कंट्रोल रूम की स्थापना कर व्यापक तैयारियां प्रारंभ कर दीं। आधुनिक तकनीकी संसाधनों, निरंतर मॉनिटरिंग और बहु-एजेंसी समन्वय के माध्यम से यात्रा प्रबंधन को एक व्यवस्थित और परिणामोन्मुख ढांचे में ढाल दिया गया।

चारधाम यात्रा 2025 सरकार, शासन और पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि लक्ष्य केवल व्यवस्थाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करना था। श्री लोकजीत सिंह के नेतृत्व में कंट्रोल रूम ने व्यवस्थित योजना और त्वरित निर्णय क्षमता के साथ कार्य किया। यात्रा के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों को गतिशील और संवेदनशील तरीके से संभाला गया। धराली आपदा के समय रेस्क्यू कार्यों का प्रभावी समन्वय, पहलगाम आतंकी हमले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना, तथा विभिन्न हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी—इन सभी जटिल परिस्थितियों में उन्होंने सूझबूझ, संयम और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। संकट की हर घड़ी में कंट्रोल रूम ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की, जिसके परिणामस्वरूप यात्रा को सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित किया जा सका।

लोकजीत सिंह की यह उपलब्धि उनके निरंतर उत्कृष्ट कार्यों की श्रृंखला का एक और स्वर्णिम अध्याय है। इससे पूर्व वर्ष 2021 में कोविड प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित FICCI द्वारा FICCI Smart Policing Award से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2024 में चारधाम यात्रा प्रबंधन में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राज्यपाल द्वारा उत्कृष्ट सेवा पदक भी प्रदान किया गया था।

चारधाम यात्रा जैसे विशाल और आस्था से जुड़े आयोजन का सफल संचालन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनविश्वास और सुरक्षा का प्रश्न भी होता है। एसपी लोकजीत सिंह ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व, तकनीकी दक्षता और टीम भावना के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि सुनियोजित रणनीति और समर्पित प्रयासों से कठिन से कठिन चुनौतियों का भी प्रभावी समाधान संभव है। राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त यह सम्मान पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा, गौरव और विश्वास का प्रतीक है।

चंपावत में खड़ी होली महोत्सव का भव्य शुभारम्भ, मुख्यमंत्री धामी ने संस्कृति संरक्षण का दोहराया संकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत में कलश संगीत कला समिति द्वारा आयोजित खड़ी होली महोत्सव का वर्चुअल माध्यम से विधिवत शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कुमाऊँ की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कुमाऊँ अंचल की खड़ी होली एवं बैठकी होली केवल एक पर्व या सांस्कृतिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि यह हमारी समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक लोकसंगीत और सामाजिक समरसता की सजीव अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा हमारी लोक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक एकता को सशक्त बनाती आई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। होली के पारंपरिक गीतों, वाद्ययंत्रों और सामूहिक सहभागिता से परिपूर्ण यह उत्सव लोगों को बचपन की मधुर स्मृतियों से जोड़ता है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का माध्यम बनता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोककला, लोकभाषा और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश में विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों, मेलों एवं महोत्सवों को प्रोत्साहन देकर स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया जा रहा है। इससे न केवल सांस्कृतिक विरासत सशक्त हो रही है, बल्कि स्थानीय कलाकारों को भी नई पहचान और अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे तथा सामाजिक सौहार्द और सामूहिकता की भावना को और अधिक सुदृढ़ करेंगे। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि कलश संगीत कला समिति द्वारा इस प्रकार के आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि, कलाकार एवं सांस्कृतिक प्रेमी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा के लिए बनेगी एसओपी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी कार्यालयों और कार्यस्थलों पर अधिकारी- कर्मचारी और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए मुख्य सचिव को एसओपी बनाने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर, 21 फरवरी को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुई घटना के साथ ही हाल के समय में अन्य स्थानों पर सरकारी अधिकारी- कर्मचारियों के साथ हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए, ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कर्मचारी नेताओं की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सरकार कार्मिकों के मान – सम्मान और सुरक्षा को लेकर हमेशा गंभीर रही है।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को फोन कर, अधिकारी, कर्मचारियों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने डीजीपी को भी निर्देश दिए हैं कि सरकारी कार्यालयों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, साथ ही इस तरह की घटनाओं पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए, उन्होंने एसएसपी देहरादून को भी शिक्षा निदेशालय में हुई घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

इस मौके पर राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार, उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के अध्यक्ष राम सिंह चौहान, महामंत्री मुकेश बहुगुणा एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

सीएम धामी ने विराट हिन्दू सम्मेलन में किया प्रतिभाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बालावाला देहरादून में विराट हिन्दू सम्मेलन में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि यह मात्र एक सम्मेलन नहीं, बल्कि हिंदू समाज की चेतना, एकता और आत्मगौरव का महापर्व भी है। हिंदू समाज आज न केवल जागृत और समर्पित है बल्कि अपने धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्र के प्राचीन वैभव को पुनः लौटाने के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ संगठित भी हो रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष में पूरे देश में इस प्रकार के विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का विषय है कि वे विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन से जुड़े हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 100 वर्षों में देश के सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित कर राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन के हृदय में सशक्त रूप से स्थापित करने का कार्य भी किया है। शिक्षा, कृषि, ग्राम विकास, समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान, सेवा कार्य, कला और विज्ञान ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहाँ संघ के स्वयंसेवकों ने निस्वार्थ भाव से योगदान न दिया हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है। यहां भाषा, संस्कृति, जाति और क्षेत्र के आधार पर अनेकों भिन्नताएँ हैं। लेकिन इन सबके बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हमेशा भेदभाव से ऊपर उठकर भारत की एकात्मता को मजबूत किया है और जन-जन में एक भारत – श्रेष्ठ भारत की भावना जगाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में भाषाएं अलग हो सकती है, परंपराएँ भिन्न हो सकती हैं, पूजा- पद्धतियां और जीवन शैली अलग हो सकती है, परंतु मूल सत्य और मानवीय मूल्य एक ही रहते हैं। इसी भावना का व्यापक स्वरूप ही हिंदुत्व है । जो भारत को अपनी मातृभूमि और पितृभूमि मानता है, इसकी संस्कृति, परंपरा, जीवनशैली और मूल्यों का आदर करता है, उसकी पूजा-पद्धति चाहे कोई भी हो, पर उसकी आत्मा हिंदू है। हिंदुत्व हमें सिखाता है कि हम सब एक हैं, हमारी विविधताएँ ही हमारी शक्ति हैं, और हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि के मूल स्वरूप को बनाये रखने लिए निरंतर कार्य कर रही है। सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून के साथ ही ऑपरेशन कालनेमी के माध्यम से सनातन धर्म को बदनाम करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है। देश में सबसे पहले यूसीसी लागू कर सभी को समान अधिकार देना हो, मदरसा बोर्ड को खत्म कर सभी संप्रदायों के बच्चों के लिए राज्य में समान शिक्षा व्यवस्था की नींव डालनी हो या फिर राज्य में “हिन्दू स्टडी सेंटर बनाकर सनातन हिंदू संस्कृति के विभिन्न विषयों में शोध करने वाले युवाओं की सहायता करनी हो, हर क्षेत्र में कार्य किये जा रहे हैं।

इस अवसर पर विधायक बृज भूषण गैरोला, पार्षद प्रशांत खरोला, ब्रहम्चारी केशर स्वरूप, ललित बुड़ाकोटी, सुभाष बड़थ्वाल, गोपाल सिंह एवं बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैज्ञानिक व्याकरण: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति, डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति भी विद्यार्थियों को प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केन्द्र एवं ई-संस्कृत संभाषण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ और उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के त्रैमासिक पत्र संस्कृत वार्ता का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान ऊँचे पर्वतों और ऐतिहासिक मंदिरों से ही नहीं, बल्कि ज्ञान और आस्था की भाषा देववाणी संस्कृत से भी है। वेदों से लेकर उपनिषदों तक, रामायण से लेकर महाभारत तक, आयुर्वेद से लेकर खगोलशास्त्र तक, गणित से लेकर दर्शनशास्त्र तक हमारे ज्ञान की जड़ें संस्कृत में ही निहित हैं। संस्कृत हमारे अतीत की स्मृति मात्र नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की संभावना भी है। संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैज्ञानिक व्याकरण है। पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी आज भी विश्व के भाषाविदों के लिए आश्चर्य का विषय है। आज विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में संस्कृत की वैज्ञानिकता पर विभिन्न प्रकार के शोध किए जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के विशेष प्रयास किए गए हैं। संस्कृत साहित्य को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया जा रहा है। एआई के माध्यम से संस्कृत ग्रंथों को नए स्वरूप में सबके सामने रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से संस्कृत अध्ययन और शोध का केंद्र रही है। राज्य में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। सभी जनपदों में आदर्श संस्कृत ग्रामों की स्थापना की गई है। उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है। राज्य में पहली बार ‘गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना’ की शुरुआत की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के माध्यम से अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन, अखिल भारतीय वेद सम्मेलन, अखिल भारतीय संस्कृत कवि सम्मेलन, संस्कृत शिक्षक कौशल विकास कार्यशाला और संस्कृत छात्र प्रतियोगिता जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संस्कृत विद्यार्थियों के लिए सरकारी सहायता, शोध कार्यों में सहयोग एवं रोजगार के अवसर सुनिश्चित कर इसे नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार द्वारा राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किये हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में सुविधाओं को बढ़ाया गया है। प्रत्येक जनपद में एक-एक संस्कृत ग्राम बनाये गये हैं। संस्कृत को बढ़ावा देने के अलग सिस्टम बनाने की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, खजान दास, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय, निदेशक संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी मौजूद थे।

आवास सचिव का एमडीडीए की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में देहरादून शहर को सुनियोजित, आधुनिक एवं सुव्यवस्थित स्वरूप देने के उद्देश्य से मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा संचालित प्रमुख परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि शहरी आधारभूत संरचना को सुदृढ़ किया जाए तथा यातायात, पार्किंग और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। इसी क्रम में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार लगातार विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं तथा समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण कर कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा की निगरानी कर रहे हैं। आज आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की तीन अति महत्वपूर्ण परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।

*इंदिरा मार्केट पुर्नविकास परियोजना*
इंदिरा मार्केट एवं टैक्सी स्टैंड क्षेत्र के प्रभावित दुकानदारों को एक सुव्यवस्थित और आधुनिक मार्केट में स्थानांतरित किए जाने हेतु यह परियोजना संचालित की जा रही है। परियोजना के प्रथम चरण का कार्य प्रगति पर है। वर्तमान में C एवं D ब्लॉक में दो तल का बेसमेंट निर्माण पूर्ण किया जा चुका है तथा शीर्ष तल का निर्माण कार्य गतिमान है। परियोजना के अंतर्गत तीन तल के बेसमेंट का प्रावधान करते हुए कुल 1050 कार पार्किंग की व्यवस्था की गई है। बेसमेंट निर्माण पूर्ण होने के उपरांत दुकानों का निर्माण कार्य किया जाएगा। परियोजना को दिसंबर माह तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि प्रभावित दुकानदारों को शीघ्र दुकानों का आवंटन किया जा सके। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों तथा निर्धारित समयसीमा के अनुरूप कार्य पूर्ण करने के संबंध में विशेष निर्देश दिए गए।

*आढ़त बाजार परियोजना*
देहरादून शहर के केंद्र में तहसील चौक से सहसपुर चौक के मध्य स्थित सड़क को 24 मीटर चौड़ी व्यवस्थित सड़क के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है। वर्तमान में सड़क की चौड़ाई 16 से 18 मीटर होने के कारण यातायात जाम की समस्या बनी रहती है। इस समस्या के समाधान हेतु हरिद्वार बाइपास पर लगभग 7.7 हेक्टेयर भूमि पर नवीन आढ़त बाजार विकसित किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों की मंडियों हेतु सुव्यवस्थित लेआउट तैयार कर निर्माण कार्य प्रगति पर है।व्यवसायियों एवं आमजन की सुविधा हेतु लगभग 650 वाहनों की क्षमता वाली मल्टी लेवल कार पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त वेयरहाउस, कार्यालय, ओवरहेड वाटर टैंक, एसटीपी (STP), पार्क एवं अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने निर्देश दिए कि गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करते हुए निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण किया जाए।

*मल्टी लेवल कार पार्किंग, तहसील परिसर*
पलटन बाजार एवं तहसील चौक क्षेत्र में पार्किंग की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए नवीन तहसील कार्यालय के साथ मल्टी लेवल कार पार्किंग का निर्माण प्रस्तावित है। इस संबंध में दरबार साहिब से वार्ता की प्रक्रिया प्रचलित है। उक्त स्थल पर आधुनिक तहसील कार्यालय के साथ लगभग 1000 वाहनों की पार्किंग सुविधा विकसित करने का प्रस्ताव है। परियोजना की जटिलता को देखते हुए सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वार्ता प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कर परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

*निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारी*
निरीक्षण के दौरान प्राधिकरण सचिव मोहन सिंह बर्निया, अधिशासी अभियंता सुनील कुमार, अपर अभियंता नवीन चंद्र जुनेजा, नज़ीर अहमद, वास्तुविद प्रशांत नौटियाल एवं परियोजना निदेशक निर्माण इकाई सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों को परियोजनाओं में गति लाने तथा मानकों के अनुरूप समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

*आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान*
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून शहर के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईसी रोड मार्केट, आढ़त बाजार एवं मल्टी लेवल कार पार्किंग जैसी परियोजनाएं शहर की यातायात व्यवस्था, व्यापारिक गतिविधियों और आमजन की सुविधाओं को सुदृढ़ करेंगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप एवं निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किए जाएं। परियोजनाओं में पारदर्शिता, तकनीकी मजबूती एवं दीर्घकालिक उपयोगिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित निगरानी रखने तथा किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए, ताकि आमजन को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

सीमांत क्षेत्रों के निवासी देश की सीमा के प्रहरी: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चमोली के बिरही (बेडूबगड़) में नीति-माणा जनजाति कल्याण समिति की ओर से आयोजित तीन दिवसीय जनजाति समागम 2026 के समापन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नीति घाटी भोटिया जनजाति के शीतकालीन प्रवास एवं अन्य भूमि संबंधी मामलों का निस्तारण किये जाने, बेडूबगड़ भोटिया पड़ाव में सामुदायिक भवन का निर्माण, स्व. गौरा देवी जी की प्रतिमा एवं पार्क निर्माण किये जाने, बैरासकुंड मंदिर का सौंदर्यीकरण किये जाने, बेडूबगड़ पड़ाव की भूमि को सुरक्षित करने के लिए कार्य किये जाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन हमारी जनजातीय परंपराएं, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। जनजातीय समाज ने सदियों से अपनी परंपराओं और प्रकृति संरक्षण की भावना को पहचान दिलाने का काम किया है। हमारे सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय भाई देश के सजग प्रहरी भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, एकलव्य आदर्श विद्यालय समेत जनजातीय समाज के लिए कई कल्याकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे जनजातीय समाज की आजीविका में सुधार हुआ है। समाज के अन्तिम पंक्ति में खडे व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना हमारा उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री ने कहा जनजाति समाज के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने हेतु प्राइमरी से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। प्रदेश में 16 स्थानों में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं। जनजाति समुदाय की बेटियों की शादी के लिए 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक वर्ष जनजातीय महोत्सव एवं खेल महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है। टिम्मरसैंण महादेव के सौंदर्यकरण और पहुंच मार्ग के लिए 26 करोड़, हीरामणि मंदिर के लिए 75 लाख और मलारी गांव के सामुदायिक स्थल के लिए 34 लाख की राशि जारी की चुकी है।

मुख्यमंत्री ने आयोजन में जनसहभागिता को अनुपम उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन ही उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान हैं। ये आयोजन न केवल समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और मूल जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सामूहिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा जनजातीय समुदाय ने सदियों से अपनी परंपराओं, लोकज्ञान और प्रकृति-संरक्षण की भावना से हमारी सभ्यता को मजबूती प्रदान की है। विशेषकर सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले हमारे जनजातीय भाई-बहनों का जीवन हमेशा से संघर्ष, अनुशासन और सामूहिकता की अनुपम मिसाल रहा है। आज आवश्यकता है कि हमारी इस महान जनजातीय परंपरा के पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय उत्पादों और प्राकृतिक संसाधनों को सहेजा जाए, जिससे ये ज्ञान हमारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।

उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय भी आदरणीय प्रधानमंत्री जी की सकारात्मक सोच का प्रतीक है। देशभर में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संग्रहालय स्थापित किए गए हैं। पूरे देश के लिए ये गर्व की बात है कि आज संथाल आदि वासियों की बेटी आदरणीय श्रीमती द्रौपदी मूर्मू जी देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं। जो ये दिखाता है कि जनजातीय समुदाय अब देश का नेतृत्व करने में भी सक्षम है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री जी ने जनजातीय समाज के विकास के लिए बजट को 3 गुना बढ़ाकर ये सुनिश्चित किया है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं का लाभ इस समुदाय के प्रत्येक परिवार तक पहुँचे ये सभी ऐतिहासिक परिवर्तन केवल डबल इंजन वाली केन्द्र व राज्य सरकार में ही संभव हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा माणा को देश के अंतिम गांव की जगह देश के प्रथम गांव की संज्ञा दी, और उनके इसी विचार और मार्गदर्शन से प्रेरणा लेते हुए हमारी सरकार भी उत्तराखंड के जनजातीय समूदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत प्रदेश के 128 जनजातीयगांवों को चिन्हित किया है। जहाँ अब बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ -साथ रोज़गार, बेहतर शिक्षा औरस्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।साथ ही, राज्य में कालसी, मेहरावना, बाजपुर और खटीमा में संचालित एकलव्य आदर्शआवासीय विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय बच्चों को निशुल्क शिक्षा और आवास की सुविधा मिल रही है। वहीं, देहरादून के चकराता और बाजपुर में नए आवासीय विद्यालयों का निर्माण कार्यभी तेजी से जारी है। वर्तमान में 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं। राज्य में जनजातीय वर्ग के जो शिक्षित बेरोजगार युवा हैं। उन्हें तकनीकी शिक्षा सेजोड़ने के लिए तीन आई.टी.आई. संस्थान भी संचालित किए जा रहे हैं, जिससे वे कौशल प्राप्त कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें । इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जनजातीय छात्र-छात्राओं के लिए निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है और उन्हें हर माह छात्रृत्ति भी दी जा रही है।

उन्होंने कहा जनजातीय समुदाय की बेटियों के विवाह हेतु 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है तथा जनजातीय शोध संस्थान के लिए 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड भी स्थापित किया गया है। वहीं, जनजातीय संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य मेंप्रतिवर्ष जनजाति महोत्सव एवं खेल महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा हमारा प्रयास है कि देवभूमि में पलायन रुके और हमारे युवाओं को अपने ही गाँव में रोजगार के अवसर मिलें, इसी दिशा में होम स्टे योजना एक मजबूत माध्यम बनकर उभरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चमोली जनपद में 800 से अधिक होम स्टे संचालित हो रहे हैं, जिनसे 4 हजार से अधिक स्थानीय लोग स्वरोजगार से जुड़ चुके हैं। वहीं, उत्तराखंड की जनजातीय संस्कृति अपने आप में पर्यटन का एक बड़ा आकर्षण है। इसालिए होम स्टे के साथ-साथ साहसिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के जरिए न कवल आजीविका के नए अवसर सृजित कर रहे हैं, बल्कि अपनी समृद्ध परंपराओंऔर संस्कृति को भी वैश्विक पहचान दिला रहे हैं।

इस मौके पर थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल, भाजपा जिला अध्यक्ष गजपाल बर्तवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष चमोली दौलत सिंह बिष्ट,पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी, नगर पालिका अध्यक्ष गोपेश्वर संदीप रावत, नीति माणा जनजाति कल्याण समिति के अध्यक्ष हरीश परमार, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार बीडी सिंह, दलबीर दानू, राज्य मंत्री हरक सिंह नेगी, भाजपा महामंत्री अरुण मैठाणी, बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ अभिषेक त्रिपाठी सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

कानून व्यवस्था पर राजधानी के क्षेत्राधिकारियों को सख्त निर्देश, जवाबदेही होगी तय

डालनवाला में गोलीकाण्ड की गंभीर घटना के संबंध में राजीव स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक, गढ़वाल परिक्षेत्र द्वारा घटनास्थल पर पहुँचकर विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने घटनास्थल की परिस्थितियों, उपलब्ध भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्यों तथा अब तक की गई पुलिस कार्यवाही की गहन समीक्षा की।

पुलिस महानिरीक्षक द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून को निर्देशित किया कि *घटना में संलिप्त आरोपियों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करते हुए विशेष टीमों का गठन किया जाए तथा गिरफ्तारी के लिए सभी आवश्यक विधिक, तकनीकी एवं सर्विलांस संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए।* उन्होंने स्पष्ट किया कि *अपराधियों को अतिशीघ्र गिरफ्तार कर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु ठोस रणनीति तैयार की जाए।*

▪️उक्त संवेदनशील घटना के दृष्टिगत *परिक्षेत्रीय कार्यालय में जनपद देहरादून के समस्त क्षेत्राधिकारियों (सीओ) के साथ गोष्ठी आयोजित की गई।* बैठक में जनपद में *हाल के दिनों में घटित आपराधिक घटनाओं की समीक्षा करते हुए उनके त्वरित अनावरण एवं प्रभावी रोकथाम के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। -:*

▪️ सभी क्षेत्राधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में *नियमित रूप से भ्रमणशील रहेंगे तथा पुलिस बल की सक्रिय उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे।* वे अधीनस्थ थाना एवं चौकी प्रभारियों को नियमित रूप से ब्रीफ करते हुए कानून व्यवस्था के प्रति सजग बनाए रखेंगे।

▪️ ऐसे *विवादित मामलों, जिनसे शांति एवं कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो, उन्हें प्राथमिकता पर लेते हुए उनका निस्तारण क्षेत्राधिकारी अपने निकट पर्यवेक्षण में कराना सुनिश्चित करेंगे।*

▪️समस्त क्षेत्राधिकारी *संदिग्ध व्यक्तियों की धरपकड़ के लिए नियमित चेकिंग अभियान चलाएं तथा रूटीन चेकिंग के साथ विभिन्न स्थानों पर आकस्मिक (रैंडम) चेकिंग भी की जाए, जिससे आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सके। आपसी रंजिश, भूमि विवाद अथवा अन्य संवेदनशील मामलों में समय रहते निरोधात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।*

▪️*सोशल मीडिया के माध्यम से प्रकाश में आने वाले मामलों में विलंब न करते हुए तत्काल संज्ञान लेकर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।* सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को सुदृढ़ करते हुए अफवाहों एवं भ्रामक सूचनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाएगा।

▪️क्षेत्राधिकारी समय-समय पर *अपने क्षेत्र के बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करें* तथा विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर सुरक्षा एवं साइबर अपराध संबंधी जानकारी प्रदान करें।

▪️*किसी भी क्षेत्र में इस प्रकार की आपराधिक घटनाओं की पुनरावृत्ति होने पर संबंधित थानाध्यक्ष, चौकी प्रभारी के साथ-साथ संबंधित क्षेत्राधिकारी की जवाबदेही भी निर्धारित की जाएगी।*

उन्होंने सभी अधिकारियों को *कानून व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने, आमजन में सुरक्षा की भावना स्थापित करने तथा अपराधियों के विरुद्ध कठोर एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु पूर्ण सतर्कता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।