मुख्यमंत्री आवास में रोजगार के क्षेत्र में किये जा उद्यानिकी विभाग के ट्रायल हो रहे सफल

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री आवास में उद्यान विभाग के द्वारा राज्य के उद्यानिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में कई प्रकार के ट्रायल किये जा रहे है। जिनसे युवा इन क्षेत्रों को रोजगार के रुप में अपनाये। इसी क्रम में मुख्यमंत्री आवास परिसर में उद्यान विभाग द्वारा एक पेड पर आम की 42 प्रजातियों की ग्राफ्टिंग की गयी। अरूनिमा, अरूनिका, अम्लिका, सूर्या, लालिमा, मल्लिका, निलय, आम्रपाली इत्यादि को मिलाकर कुल 42 प्रजातियों की ग्राफ्टिंग एक पेड पर की गयी।
मुख्य उद्यान अधिकारी देहरादून डाॅ0 मीनाक्षी जोशी द्वारा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को इन प्रजातियों के बारे में विस्तृत से जानकारी दी गयी। वहीं, आवास परिसर में मौनपालन से इस वर्ष 22 कि0ग्रा0 शहद का उत्पादन हुआ। जिस पर मुख्यमंत्री द्वारा पुनः मौनपालन को बढ़ावा देने हेतु योजना बनाने हेतु निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री द्वारा उद्यान प्रभारी दीपक पुरोहित को आवास परिसर में औद्यानिकी की अन्य गतिविधियां भी शुरू करने हेतु निर्देशित किया गया। पुरोहित द्वारा बताया कि आवास परिसर में अगले वर्ष तक अनुमानित आम की 200 से भी अधिक प्रजातियाँ लगायी जायेंगी।

नही कटेगा वेतन मुख्यमंत्री ने दिए आदेश, कई राहत भरी घोषणाएं भी की

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने घोषणा की है कि प्रत्येक आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्री के खाते में एक-एक हजार रूपए की सम्मान राशि दी जाएगी। इनकी संख्या 50 हजार से अधिक है। वहीं, मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम की व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 15 करोड़ रूपये की धनराशि भी स्वीकृत की है। इसके अतिरिक्त गढ़वाल एवं कुमाऊँ मंडल विकास निगम हेतु भी मुख्यमंत्री ने 2-2 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है। कोविड-19 के दृष्टिगत पूर्व में लॉकडाउन के कारण परिवहन निगम के साथ ही कुमाऊँ मंडल विकास निगम एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम के आय के संसाधनों में कमी के कारण संसाधनों के विकास हेतु मुख्यमंत्री ने यह धनराशि स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में शीघ्र आदेश निर्गत हेतु सचिव वित्त को निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस धनराशि से इन निगमों के नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो सकेगी तथा कार्य संचालन में सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा की परिवहन निगम की बसों का संचालन शुरू किया गया है इसमें यात्रियों को सुविधा होने के साथ ही परिवहन निगम के आय के संसाधनों में वृद्धि होगी। इस हेतु गढ़वाल मंडल विकास निगम के अध्यक्ष महावीर सिंह रांगड ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
उधर, मुख्यमंत्री ने सचिवालय एवं अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों व स्वास्थ्य कर्मियों के 1 दिन के वेतन कटौती के आदेश को वापस लिए जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के इस आदेश से सचिवालय परिचारक संघ के अध्यक्ष विशन सिंह राणा व अन्य कार्मिकों ने उनका आभार व्यक्त किया है।

15वें वित्त आयोग की 143.50 करोड़ रूपये की अनटाईड अनुदान धनराशि का सीएम ने किया हस्तांतरण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को सचिवालय में डिजिटल माध्यम से त्रिस्तरीय पंचायतों (ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत) को कुल 238.38 करोड़ रूपये की धनराशि का हस्तांतरण किया। जिसमें 15वें वित्त आयोग की प्रथम किश्त एवं राज्य वित्त आयोग की धनराशि का एक साथ डिजिटल हस्तांतरण किया गया। जिसमें उत्तराखण्ड की 7791 ग्राम पंचायतों, 95 क्षेत्र पंचायतों एवं 13 जिला पंचायतों के लिए 15 वें वित्त आयोग की 143.50 करोड़ रूपये की अनटाईड अनुदान धनराशि एवं राज्य वित्त आयोग की 94.88 करोड़ की धनराशि शामिल है।

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत 15 वें वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग द्वारा पंचायतों हेतु संस्तुत अनुदानों को ऑनलाईन एक साथ डिजिटल हस्तान्तरण के माध्यम से संबंधित पंचायतों को हस्तान्तरित करने की शुरूआत की गई। इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रथम चरण में 09 फरवरी 2020 को हरिद्वार में आयोजित जिला पंचायत अध्यक्षों-उपाध्यक्षों एवं क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के अभिमुखीकरण कार्यक्रम में केन्द्रीय पंचायतीराज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा 14वें वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग की धनराशियों के एकमुश्त डिजिटल हस्तान्तरण की शुरूआत की गई।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि भारत सरकार द्वारा लागू मा. प्रधानमंत्री जी की महत्वाकांक्षी योजना डिजिटल इंडिया का प्रोग्राम का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को उन्नत करना, सरकारी योजनाओं की जानकारी ऑनलाईन पंहुचाना एवं ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय पंचायत दिवस के अवसर पर 24 अप्रैल 2020 को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल का शुभारम्भ किया गया। उन्होंने कहा कि इससे जहां एक ओर राजकीय कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी वहीं पोर्टल के माध्यम से पंचायत को केन्द्रीय वित्त एवं राज्य वित्त व अन्य स्त्रोतों से प्राप्त धनराशि एवं पंचायत में कराये जा रहे विकास कार्यों की प्रगति के साथ-साथ अन्य जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पंचायतों को एक साथ धनराशि का डिजिटल हस्तान्तरण से पंचायतों को विकासपरक योजनाओं के साथ-साथ कोरोना वायरस महामारी से ग्रामवासियों केे बचाव हेतु आवश्यक उपायों और बाहर से आये नागरिकों को संस्थागत क्वारंटीन सबंधी व्यवस्था हेतु सामुदायिक भवनों की स्वच्छता, विद्युत व्यवस्था, पेयजल, सैनिटाइजेशन एवं अन्य आवश्यक कार्यों को पूर्ण करने में सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर जानकारी दी गई कि वित्त विभाग के शासनादेश के अनुसार केन्द्रीय वित्त के संदर्भ में प्राथमिक अनुदान अनटाईड है, जिसका उपयोग स्थानीय निकायों द्वारा स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है। राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि से निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का मानदेय पंचायतीराज विभाग द्वारा भुगतान किया जायेगा। अवशेष धनराशि में से 20 प्रतिशत धनराशि कोरोना महामारी के बचाव हेतु प्रचार-प्रसार, सेनेटाईजेशन व महामारी से सबंधित अन्य कार्यों पर व्यय की जायेगी। इसके अलावा जलापूर्ति व्यवस्था, सीवरेज ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जल निकासी एवं स्वच्छता, सामुदायिक परिसम्पतियों के रख-रखाव, स्ट्रीट लाईट तथा आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण-अतिरिक्त कक्षा कक्ष का निर्माण एवं सामुदायिक भवन निर्माण आदि विकास कार्य किये जायेंगे।

मुख्यमंत्री ने हाईटेक मशीन खरीदने के लिए जारी की धनराशि, टेस्टिंग में मिलेगी बढ़ी मदद

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेश में कोविड टेस्टिंग बढ़ाने के लिये दून, हल्द्वानी व श्रीनगर मेडिकल कालेज के लिये 3 हाईटेक टेस्टिंग मशीन क्रय करने के लिये 11.25 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है। यह धनराशि राज्य आपदा मोचन निधि से स्वीकृत की गई है। क्रय की जाने वाली इन हाईटेक मशीनों की टेस्टिंग क्षमता 800 प्रति दिन है। इस प्रकार इससे 2400 टेस्टिंग प्रतिदिन हो सकेगी। अभी तक इन मेडिकल कालेजों में स्थापित मशीनों की टेस्टिंग क्षमता कम थी।
इसके अतिरिक्त प्रदेश से 50 से 100 सेम्पल जांच के लिए चण्डीगढ़ की इम्पेक्ट लेब में भेजे जा रहे हैं। जबकि नई दिल्ली स्थित एनसीडीसी लेब में हरिद्वार से 300, उधमसिंह नगर से 300 तथा नैनीताल से 100 सेम्पल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। जबकि लगभग 50 टेस्ट आई.आई.पी की टेस्टिंग लेब में किये जा रहे हैं।
जनपद स्तर पर भी जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 7 स्थानों पर टू नाट मशीन स्थापित की गई है। इनमें से चार ने कार्य आरम्भ कर दिया है जबकि 11 मशीनों की और व्यवस्था की जा रही है।
प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने बताया कि राज्य के इन तीन मेडिकल कालेजों में हाइटेक मशीनों की स्थापना एवं टू नाट मशीनों की जनपद स्तर पर स्थापना से राज्य में कोरोना की जांच में तेजी आयेगी।

17 चिकित्सक और मिले…
सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने जानकारी देते हुए बताया कि राजकीय संयुक्त चिकित्सालय रामनगर एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भिकियासैंण का कार्य पीपीपी मोड पर संचालित होने से इन चिकित्सालयों में कार्यरत 17 चिकित्सक राज्य को मिल गये हैं। इसमें 7 विशेषज्ञ चिकित्सक भी शामिल है। इन चिकित्सकों की तैनाती उन अस्पतालों में की जायेगी जहां चिकित्सकों की कमी है। ये दोनों चिकित्सालय विश्व बैंक परियोजना के तहत पीपीपी मोड पर संचालित हो रहे हैं।

खुशखबरीः उत्तराखण्ड में मैट्रो रेल की संभावनाओं को लेकर मंथन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आज सचिवालय में यूनिफाईड मैट्रो पॉलिटन ट्रांसपोर्ट ऑथोरिटी (यू.एम.टी.ए) की बैठक हुई। बैठक में उत्तराखण्ड मैट्रो रेल परियोजना के कॉम्प्रीहेंसिव मॉबिलिटी प्लान (सी.एम.पी) को मंजूरी दी गई। देहरादून शहर में दिल्ली मैट्रो रेल कॉरपोरेशन के सहयोग से रोप-वे प्रणाली की डीपीआर तैयार की जा रही है। हरिद्वार-ऋषिकेश एवं नेपाली फार्म-विधानसभा कोरिडोर में मैट्रो लाईट के निर्माण के साथ ही हरिद्वार शहर में पी.आर.टी के निर्माण हेतु अनुमोदन प्राप्त किया गया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में यू.एम.टी.ए का गठन किया गया है। इसमें आवास मंत्री, उत्तराखण्ड उपाध्यक्ष, मुख्य सचिव सदस्य सचिव, सचिव आवास, वित्त, परिवहन, नियोजन, राजस्व एवं शहरी विकास सदस्य हैं।
बैठक में एमडी उत्तराखण्ड मैट्रो रेल जितेन्द्र त्यागी ने देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश मैट्रोलाईट सिस्टम पर विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया। इस अवसर पर उन्होंने हरिद्वार से ऋषिकेश, देहरादून से नेपाली फार्म तक मैट्रो लाईट के लिए रूट प्लान स्टडी के बारे में जानकारी दी। देहरादून व हरिद्वार शहर के लिए भी बनाई गई योजना के बारे में जानकारी दी गई।
इस अवसर पर आवास मंत्री मदन कौशिक, प्रमुख सचिव आनन्द वर्द्धन, सचिव नितेश झा एवं सबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार अपनाने के लिए मीडिया सलाहकार दे रहे महत्वपूर्ण जानकारी

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य के लोगों को रोजगारपरक जानकारी दे रहे है। साथ ही सरकार की वह कौन सी नीतियां है जो उनके लिए स्वरोजगार में सहायक बन सकती है, इसकी भी सिलसिलेवार जानकारी दे रहे है। यह जानकारी उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो अपना स्वरोजगार करने के इच्छुक है। युवा भी बड़ी संख्या में सोशल मीडिया में उन्हें फाॅलो कर रहे है। साथ कई सवालों के माध्यम से स्वरोजगार की दिशा में कदम भी बढ़ा रहे है।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट की कलम से ….

मेरा प्रयास रहता है कि मैं हर उत्तराखंडी को ये भरोसा दिला सकूं कि हम राज्य में रहकर भी बहुत कुछ कर सकते हैं।
90 के दशक में भीमताल में फूलों की खेती ने लोगों को नई दिशा दिखाई थी, फूलों से अच्छा खासा रोजगार लोगों को मिला। भीमताल की महाशीर के बारे में देश-दुनिया मे कौन नहीं जानता।
मैंने बचपन मे अपने पिता से सुना था, अंग्रेजो के समय में लंदन में आयोजित होने वाली टी एक्जीबिशन में बेरीनाग की चाय, टी क्वीन का खिताब जीतती रही।
आज जब बड़े पैमाने पर प्रवासी भाई बहन घर लौटे हैं, तो एक नया विश्वास पैदा हो रहा है। जैसा कि हमारे मुख्यमंत्री जी का कहना है, आवा अपणु गौं का वास्ता कुछ करा। तो ये सही समय भी है, और सरकार ने मौका भी दिया है। माननीय मुख्यमंत्री जी ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की है जिसमें स्वरोजगार के लिए भारी सब्सिडी मिल रही है। इसी तरह प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के जरिये भी स्वरोजगार के लिए ऋण मिलता है। नाबार्ड, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत भी स्वरोजगार शुरू करने के लिए उचित दरों व सब्सिडी के साथ लोन की सुविधा है।

हमारा उत्तराखण्ड विविधताओं से भरा है। उत्तराखंड में प्रकृति ने सभी ऋतुयें और सभी तरह की भौगोलिक परिस्थिति प्रदान की है। इस लिहाज से वोकल फॉर लोकल से आत्मनिर्भर बनने के लिए यह उचित समय भी है और मौका भी है।
प्रदेश के हर जिले और हर घाटी की अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और जलवायु है। पर्वतीय क्षेत्रों में साग- भाजी का उत्पादन है, तो कहीं फलों का, कहीं फूलों का और कहीं अनाज का। उत्तरकाशी जिला जहां फल और सब्जी पट्टी के लिए विख्यात है, वहां की राजमा अपने विशिष्ट स्वाद के लिए पहचानी जाती है। उसी तरह हमारे पर्वतीय जिलों में नींबू, नारंगी, माल्टा, खुमानी, आलू बुखारा, नाशपाती, काफल आदि का भरपूर उत्पादन होता है। गढ़वाल कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में मंडवा, झंगोरा, जौ, गहत, भट्ट, मसूर, तोर और रामदाना (स्थानीय भाषा मे चुआ) का भरपूर उत्पादन होता है।
हम चाहें तो अपने बुरांस के जूस को प्रमोट करके कोला पेप्सी के टक्कर का बना सकते हैं। हम चाहें तो काफल को चेरी के जैसी मार्केट दे सकते हैं। हमारे सीमांत जिलों में बड़ी मात्रा में भेड़-बकरी पालन होता है। उनकी ऊन से पीढ़ियों से लोग कालीन निर्माण में प्रयोग होती है।

बागेश्वर को तो ताम्र नगरी ही कहा जाता है। जहां तांबे से बर्तन, वाद्य यंत्र आदि अनेक उपयोगी वस्तुएं बनती हैं, चंपावत में लौह से बनी वस्तुओं का प्रचलन है। रिंगाल, कंडाली, भीमल, भांग के रेशे पहाड़ में हर जगह व्याप्त हैं जिनसे अच्छी खासी इंडस्ट्री खड़ी हो सकती है। की।
रानीखेत का चैबटिया गार्डन सेव के लिए और सेब की प्रजातियों पर शोध के लिए प्रसिद्ध है। रानीखेत के निकट की गगास घाटी साग सब्जी के क्षेत्र में सबके लिए प्रेरणा है।
हमारा गैरसैण और नौटी का क्षेत्र तथा कुमाऊँ में चैकोड़ी में शानदार चाय के बागान है।
हमारे तराई के जिले गेहूं, चावल, गन्ना सब्जियां भरपूर मात्रा में उत्पन्न करते हैं।
हमारे उच्च हिमालयी क्षेत्र में जड़ी बूटी उत्पादन की प्रबल सम्भावनाएं हैं। कुटकी, अतीश, जटामाशी, हरड़, बहेड़ा, आंवला का उत्पादन फार्मा कंपनियों की जरूरत है।
इस तरह हमारा हर गांव, हर क्षेत्र, हर जिला एक विशेषता लिए है। अब जरूरत है, हमें उन विशेषताओं को अर्थव्यव्स्था से जोड़ने की, स्वरोजगार अपनाने की।
मुझे विश्वास है, हमारा उत्तराखण्ड स्वरोजगार के रास्ते आत्मनिर्भर जरूर बनेगा।

समाज कल्याण विभाग के कार्यालयों, स्कूल, हॉस्टलों की दीवारों पर बनेगी कुमांऊ की ऐंपण पेंटिंग

कुमांऊ की प्रसिद्ध ऐंपण कला को अब समाज कल्याण विभाग नशे के खिलाफ ढाल बनाएगा। इस कला के जरिए नशे के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए विभाग अपने कार्यालयों, स्कूल और हॉस्टलों की दीवारों पर ऐंपण पेंटिंग बनाने जा रहा है। बता दें कि केंद्र सरकार ने समाज कल्याण विभाग को नशा मुक्ति कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी है। जिला समाज कल्याण अधिकारी हेमलता पांडे ने कार्यक्रम की शुरुआत की है।

सर्वप्रथम इसकी शुरूआत देहरादून से की जाएगी, यहां सर्वे चौक स्थित जिला समाज कल्याण कार्यालय में ऐपण पेंटिंग कराने की योजना है। इसके बाद कंडोली स्थित विभाग के सरकारी हॉस्टल व भगत सिंह कॉलोनी स्थित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में होगी।

क्या है ऐपण लोक कला
ऐपण उत्तराखंड के कुमांऊ मंडल की प्रसिद्ध लोककला चित्रकला है, जो विश्व प्रसिद्ध है। कुमाऊं में दीपावली, देवी पूजन, लक्ष्मी पूजन, यज्ञ, हवन, जनेऊ संस्कार, छठ कर्म, शिवपूजन, विवाह, व्रत-त्योहार में घर की चौखट व दीवारों पर ऐपण लोक कला बनाने की परंपरा है। इसमें घर के आंगन से मंदिरों तक के मार्ग में ऐपण कला बनाई जाती है। इसमें सबसे पहले गेरू से पुताई करते हैं। इसके बाद उसके ऊपर बिस्वार (चावल के आटे का घोल बनाकर) से चित्र बनाए जाते हैं। इन चित्रों को शुभ माना जाता है।

प्रशिक्षित शिक्षकों के जरिए स्कूलों के अध्यापकों को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जाएः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन की दृष्टिगत युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाय। ग्राम सभा में भी समय-समय पर लोगों को प्रशिक्षित किया जाए। स्कूलों में आपदा प्रबंधन से संबंधित सप्ताह में एक क्लास की व्यवस्था हो। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत लोगों को आपदा प्रबंधन के लिए जागरूक करना जरूरी है। आगजनी घटनाओं एवं वर्षाकाल के लिए लोगों को प्रशिक्षित करना जरूरी है। आपदा की चुनौतियों का सामना करने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल भी कराई जाए।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए जो भी प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं उनको और प्रभावी बनाने के लिए विशेषज्ञों की राय ली जाए जिन शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है उनके माध्यम से सभी स्कूलों के अध्यापकों को भी ट्रेनिंग दी जाए आपदा प्रबंधन के दृष्टिगत संचार तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाए।
मानसून के दृष्टिगत सभी तैयारियां पूरी कर ली जाय। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों का चिन्हीकरण किया जाय। आपदा रिस्पांस टाइम को कम से कम करने का प्रयास किया जाय। लोगों को कोविड 19 से बचाव के लिए विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया जाय।

बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा बताया गया कि मौसम से संबंधित सटीक जानकारियों के लिए मुक्तेश्वर एवं सुरकंडा में डॉप्लर रडार लगाने का कार्य चल रहा है। इस वर्ष 12321 युवक मंगल दल एवं 10908 युवक-युवतियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। संचार तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए तहसील स्तर पर 184 सेटेलाइट फोन उपलब्ध कराए गए हैं। 2012 से अब तक 27 आपदा से संवेदनशील ग्रामों के 699 परिवारों का पुनर्वास किया गया है। गढ़वाल मंडल में 84 एवं कुमाऊं मंडल में 100 भूकंप पूर्व चेतावनी तंत्र उपकरण स्थापित किए गए हैं। गंगा नदी पर कोटेश्वर से लेकर ऋषिकेश तक 8 संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ चेतावनी तंत्र स्थापित किए गए हैं।

राज्य एवं जिला स्तर पर कार्मिकों को इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम का प्रशिक्षण दिया गया है। राज्य आपदा मोचन निधि के तहत प्रदेश के सभी जनपदों को कुल 98 करोड़ रुपए, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को 20 करोड़ रुपए, लोक निर्माण विभाग को 30 करोड़ रुपए, पेयजल संस्थान को 20 करोड़ रुपए एवं चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग को 16 करोड़ रुपए की धनराशि दी गई है।

हवाई यात्रियों के लिए सरकार ने संस्थागत क्वारंटीन की जगह होम क्वारंटीन की दी मंजूरी

उत्तराखंड सरकार ने हवाई जहाज से सफर करने वाले यात्रियों के लिए कुछ राहत दी है। यदि 75 संवेदनशील शहरों में ऐसे यात्री नहीं आते हैं, तो उन्हें संस्थागत क्वारंटीन की जगह होम क्वारंटीन किया जाएगा। यानी यदि आप संवेदनशील शहरों से उत्तराखंड आ रहे हैं तो आपको संस्थागत क्वारंटीन किया जाएगा। संवेदनशील शहरों से आने वालों को भुगतान कर होटल या फिर सरकार के संस्थागत क्वांरटीन सेंटर में सात दिन के लिए क्वारंटीन रहना होगा।

आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार अब घोषित 75 संवेदनशील शहर से नहीं आने वाले यात्री को 14 दिन होम क्वारंटीन में रहना होगा। अगर कोई यात्री कनेक्टिंग फ्लाइट से दिल्ली या किसी अन्य संवेदनशील शहर पर विमान बदलता है तो उसे भी होम क्वारंटीन रहना होगा।

प्रदेश सरकार ने देश के 75 शहरों को कोविड-19 के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानते हुए सात दिन का अनिवार्य संस्थागत क्वारंटीन रहने के आदेश दिए हैं। सरकार ने इसमें संशोधन किया है अब गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार, बुजुर्गों और परिवार में किसी की मृत्यु पर आने वाले लोगों को सात दिन का अनिवार्य संस्थागत क्वारंटीन नहीं होना होगा।

सिर्फ एक ट्वीट से उत्तरप्रदेश के मैनपुरी में भटक रहा दिव्यांग पहुंचा अल्मोड़ा

बीते 30 मई को मैनपुरी निवासी केसी दुबे ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को टैग करते हुए ट्वीट किया था कि मैनपुरी में उनके घर के आसपास एक मानसिक रूप से दिव्यांग सड़कों पर भटक रहा है। लॉकडाउन के चलते उनके द्वारा उसे खाना एवं हाथ में घाव हो जाने के कारण इलाज भी कराया गया। उससे पूछताछ पर उसके द्वारा मजखाली, रानीखेत, द्वाराहाट आदि का नाम लिया जा रहा है।

यह ट्वीट मिलते ही फौरन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने उत्तराखंड पुलिस व महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार को टैग करते हुए इस मामले पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री का ट्वीट मिलते ही अल्मोड़ा पुलिस इस मिशन में जुट गई। अल्मोड़ा द्वारा मैनपुरी में संपर्क किया गया। मनोज द्वारा बताए गए पते मजखाली, रानीखेत क्षेत्र में उसकी फोटो पहचान हेतु भेजकर उसकी पहचान लगाने का प्रयास किया गया। आखिरकार मेहनत रंग लायी और मनोज के पिता का पता लगा, जिनसे वार्ता कर उक्त प्रकरण से अवगत कराया गया। युवक मनोज नाथ के पिता श्री पूरन नाथ निवासी- ग्राम कामा, पो0-बग्वालीपोखर, राजस्व क्षेत्र द्वाराहाट ने बताया कि उनका बेटा दिमागी रूप से अस्वथ्य है, कई बार दिल्ली, बरेली एवं सुशीला तिवारी से ईलाज भी कराया जा चुका है, मनोज मार्च 2019 में घर से मैनपुरी हेतु निकला था, तब से उससे कोई सम्पर्क नहीं हो पाया है। इस पर रविवार को हरि राम एवं कांस्टेबल संन्तोष यादव मैनपुरी रवाना हुए। मैनपुरी निवासी के सी दुबे के साथ छानबीन कर मनोज का पता लगाया गया और उसे सोमवार को वापस अपने घर अल्मोड़ा सकुशल भेज दिया गया। पुलिस के इस त्वरित एक्शन की मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस ने सही मायनों में मित्र पुलिस की भूमिका निभाई है।