ऋषिकेश मेयर अनिता ने सीएम से मुलाकात कर राहत राशि का डेढ़ लाख का चेक सौंपा

कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए राज्य आपदा राहत कोष में नगर निगम मेयर अनिता ममगाई ने डेढ़ लाख रूपए देकर मिसाल कायम की है।

मेयर अनिता ने मुख्यमंत्री आवास में जाकर राहत राशि का चेक मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को सौंपा। कोविड-19 के दृष्टिगत मेयर ने मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु डेढ़ लाख रुपए का चेक दिया। जिसमें एक लाख पति डा. हेतराम ममगाई व पुत्र 50 हजार डा. हिमांशु ममगाई की ओर से दिए गए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश मेयर द्वारा कोरोना के खिलाफ जंग में कुशलता के साथ सरकारी नियमों का अनुपालन कराने एवं चलाये जा रहे राहत कार्यों की सराहना की। मेयर अनिता ममगाई ने मुख्यमंत्री की होसला अफजाई का आभार व्यक्त किया।

एम्स ने एक दिन के वेतन से दिए 80 लाख रूपए
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश की ओर से कोरोना वायरस (कोविड 19) के विश्वव्यापी बढ़ते दुष्प्रभाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री केयर फंड में 80 लाख से अधिक की धनराशि दान की है। इसमें संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों का एक दिन का वेतन शामिल है।

निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि संस्थान हमेशा जनहित व स्वास्थ्य सेवा को लेकर तत्पर रहता है, लिहाजा एम्स ऋषिकेश संकट की इस घड़ी में अपने संपूर्ण संसाधनों से मरीजों की सेवा में जुटा है। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने बताया कि संस्थान की ओर से कोरोना मरीजों के लिए एम्स में 100 बेड का आइसोलेशन वार्ड संचालित किया जा रहा है और इस संख्या को जल्द बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मरीजों के सैंपल की जांच के लिए माइक्रो बायोलॉजी विभाग में प्रयोगशाला शुरू कर दी गई है,जिसमें संस्थान में आने वाले कोविड 19 आशंकित मरीजों के अलावा राज्य के विभिन्न अस्पतालों से आने वाले नमूनो की जांच भी नियमिततौर पर की जा रही है। निदेशक एम्स प्रो.रवि कांत जी ने बताया कि संस्थान द्वारा कोविड 19 ग्रसित मरीजों की सुविधा के लिए संस्थान में वेंटीलेटर्स की संख्या 65 से बढ़ाकर 200 की जा रही है, इस दिशा में कार्य चल रहा है।

जनता कर्फ्यू से लगातार निर्धनों को सूखा राशन और भोजन उपलब्ध करा रहा रियल एस्टेट

कहते है सही वक्त पर और जरूरतमंद व्यक्ति के चेहरे पर जो मुस्कान ला दे, वहंी वास्तव में समाज को दिशा दे सकता है। देशव्यापी लॉकडाउन में रियल एस्टेट एसोसिएशन यही काम ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में जरूरतमंदों के लिए कर रहा है। जनता कर्फ्यू से ऋषिकेश में सक्रिय रियल एस्टेट एसोसिएशन रोजाना उत्तम क्वालिटी का आटा का कट्टा मात्रा 10 किलो, चावल मात्रा 10 किलो, दो किलो दाल, हर तरह के मसाले के पैकेट, एक लीटर सरसों के तेल की शीशी लोगों के जरूरतमंद लोगों के घर-घर जाकर पहुंचा रहा है।

वहीं दूसरी ओर ऐसे लोग जो खुले आसमान के नीचे रहने पर मजबूर है और न ही उनके पास खाना पकाने के लिए चूल्हा जैसी कोई व्यवस्था है। इन लोगों का ख्याल भी रियल एस्टेट ने बखूबी से रखा है। इन लोगों के लिए संगठन के अध्यक्ष दिनेश कोठारी ने दो वक्त का बना हुआ भोजन उपलब्ध कराया है। दिनेश कोठारी का मानना है कि जिंदगी बार-बार नहीं मिलती है, अगर हमारे जरिए किसी के चेहरे पर मुस्कान लाई जा सकती है, तो इसे हमें अपनाना चाहिए। उन्होंने तमाम सामर्थ्यवान लोगों से संकट की इस घड़ी में निर्धन वर्ग के लोगों की मदद को आगे आने का भी आह्वान किया।

संगठन अध्यक्ष दिनेश कोठारी को अपनी युवा टीम का भी बहुत सपोर्ट मिल रहा है या यूं कहे कि दिनेश कोठारी की रीढ़ की हड्डी यही युवा है, इसमें विशाल कक्कड़, विवेक तिवारी, सार्थक कोठारी, अंकित अरोड़ा, सोनू किंगर, शिवम किंगर, आशीष छाम, आशीष नरूला, शैलेष जैन आदि युवा शामिल रहते है।

बाहरी राज्यों से लौटे लोगों को राज्य में ही रोका जा सकता है…, इसकी रणनीति तैयार करे आयोग

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कारण हुए रिवर्स पलायन पर पलायन आयोग से अध्ययन रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों से गांव वापस लौटे उत्तराखंड वासियों को किस तरह राज्य में रोका जा सकता है, इसे लेकर रणनीति तैयार की जाए। सीएम ने मंगलवार को अपने आवास पर मंत्रिपरिषद के साथ देश में लॉकडाउन से पैदा परिस्थितियों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आपदा को अवसर के रूप में किस प्रकार बदला जाए हमें इस दिशा में गंभीरता से सोचना होगा। लॉकडाउन की स्थिति के लिए केंद्र सरकार की ओर से जारी होने वाले निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में कार्य योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। बदलते हालात में अर्थव्यवस्था को किस प्रकार मजबूती प्रदान की जाए, इसकी भी चुनौती है। उन्होंने कहा कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को लौटे हैं।

ये लोग रिवर्स माइग्रेशन की ओर अग्रसर हों, इसके लिए पलायन आयोग एक अध्ययन रिपोर्ट तैयार करके पेश करे। आयोग इनसे वार्ता कर उनसे सुझाव भी प्राप्त करे। यहां लौटे लोगों को यहां पर बेहतर संसाधन एवं सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें रोका जा सकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम एवं लॉकडाउन के दौरान सरकार सामूहिक निर्णय लेगी। इस संबंध में कोई भी विभाग अपने स्तर से किसी भी प्रकार का आदेश निर्गत नहीं कर सकेगा।

कोरोना संक्रमण की रोकथाम में तैनात सभी लोगों के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख की सम्मान निधि की व्यवस्था की गई है। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया है जो इससे संबंधित प्रकरणों को देखेगी तथा किसी अनहोनी की स्थिति में उनके आश्रितों को यह धनराशि प्रदान करने की संस्तुति करेगी।

सीएम के निर्देश पर तीन माह तक प्रति माह प्रति कार्ड मिलेगा 7.5 किग्रा अतिरिक्त खाद्यान्न

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर राज्य खाद्य योजना में अप्रैल से जून 2020 तक तीन माह के लिए प्रति माह प्रति कार्ड 7.5 किग्रा अतिरिक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए 33.84 लाख रूपये की राशि जारी की गई है।

वर्तमान में राज्य खाद्य योजना के प्रचलित राशन कार्ड धारकों को 2.5 किग्रा चावल 11 रुपये प्रति किलो की दर से और 5 किग्रा गेहूँ 8.60 रूपये प्रति किग्रा की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। अब अप्रैल, मई व जून 2020 इन तीन महीनों के लिए 7.5 किग्रा खाद्यान्न प्रति माह प्रति कार्ड के स्थान पर 15 किग्रा खाद्यान्न प्रति माह प्रति कार्ड (7.5 किग्रा चावल व 7.5 किग्रा गेहूँ) पूर्व निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा।

सस्ता राशन विक्रेता भी कोरोना वॉरियर्स की श्रेणी में शामिल

23 लाख से अधिक परिवारों को सस्ता राशन उपलब्ध कराने वाले उत्तराखंड के विक्रेताओं को भी सरकार ने कोरोना वॉरियर्स की श्रेणी में रखा है। यदि संक्रमण से उनकी मौत होती है, तो उनके आश्रितों को 10 लाख रुपये की सहायता राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलेगी। बता दें कि प्रदेश में नौ हजार से अधिक सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें हैं। इन दुकानों के माध्यम से 23 लाख से अधिक परिवारों को हर महीने सस्ता राशन वितरित किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन में सस्ते गल्ले की इन दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक सस्ता राशन पहुंचाने के काम में ये दुकानें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

सरकार ने इन विक्रेताओं को भी कोरोना वॉरियर्स की श्रेणी में शामिल किया है। सचिव खाद्य आपूर्ति सुशील कुमार का कहना है कि कोरोन वॉरियर्स को लेकर जारी शासनादेश में सस्ते गल्ले की दुकानों के विक्रेताओं को भी इसमें शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री की पहल पर संशोधित हुआ आदेश, अब भत्तों में भी 30 प्रतिशत की होगी कटौती

उत्तराखंड के विधायकों का 30 प्रतिशत वेतन के साथ ही उनके भत्ते में भी कटौती होगी। यह पैसा कोरोना महामारी से लड़ने के लिए बने कोविड-19 फंड में जाएगा। विधायकों के वेतन व भत्तों से यह कटौती एक अप्रैल से 31 मार्च 2021 तक होगी। इस संबंध में सचिव विधायी एवं संसदीय कार्य प्रेम सिंह खिमाल ने आदेश जारी किए हैं। कोरोना के खिलाफ जारी जंग में आगे लड़ाई के लिए आवश्यक फंड जुटाने को प्रदेश मंत्रिमंडल ने पिछले दिनों बैठक करके विधायकों, मंत्रियों व मुख्यमंत्री के वेतन से 30 फीसदी कटौती का निर्णय लिया था। जिसमें संशोधन करते हुए सरकार ने शासनादेश जारी कर दिया है।
इसके तहत अब विधायकों, मंत्रियों व मुख्यमंत्री को मिलने वाले भत्तों में भी 30 फीसदी की कटौती की जाएगी। कैबिनेट ने अधिनियम की धारा 24 में संशोधन को मंजूरी देते हुए वेतन व भत्तों में कटौती के प्रस्ताव पर मुहर लगाई। विदित हो कि कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय के बाद यह संशय था कि एक साल के लिए विधायक के सिर्फ वेतन से 30 फीसदी की कटौती होगी या फिर इसमें भत्ते भी शामिल होंगे। प्रदेश में एक विधायक को 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। इस हिसाब से यदि प्रदेश सरकार के नौ मंत्री व राज्य मंत्रियों को छोड़ दें तो बाकी 62 विधानसभा सदस्यों के 30 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन के हिसाब से एक साल की सहयोग निधि 66 लाख 96 हजार रुपये बैठती है। यदि इसमें मंत्रियों और राज्य मंत्रियों की राशि को जोड़ दें तो इसमें कुछ और इजाफा हो जाता है। लेकिन, आदेश में निर्वाचन क्षेत्र भत्ता व सचिव भत्ता में भी 30 प्रतिशत की कटौती करने का उल्लेख किया गया है।

पार्थिव शरीर को पैतृक गांव ले जाने से नहीं रोका जा सकता
लॉकडाउन के दौरान पार्थिव देह (डेड बॉडी) को पैतृक गांव ले जाने से नहीं रोका जा सकता है। पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) अशोक कुमार ने इस संबंध में सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने आगाह भी किया कि मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में परमिशन देने में हीलाहवाली या लापरवाही करने से कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पुलिस भी परोक्ष रूप से जिम्मेदार होगी।

विदेशियों ने कहा 1 बजे तक हम स्वतंत्र, तो फिर पुलिस ने क्या किया, पढ़िए पूरी खबर

टिहरी जिले की तपोवन चैकी पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान घूम रहे विदेशी सैलानियों को अनोखे अंदाज में सजा दी। कोरोना संक्रमण से लोग बचे रहें, इसके लिए पुलिस कई बार सख्ती तो कई बार अलग-अलग अंदाज में लोगों को समझा रही है। तपोवन पुलिस ने बेवजह घूम रहे विदेशी सैलानियों से कोरे कागज पर 500 बार लिखवाया कि लॉकडाउन के दौरान उनसे गलती हुई है।
तपोवन चैकी प्रभारी उप निरीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि शनिवार को उन्होंने पुलिसकर्मियों के साथ नीम बीच से लेकर साईं घाट तक गश्त की। इस दौरान 10 विदेशी नागरिक गंगा किनारे चहल-कदमी करते हुए दिखाई दिए।
इस दौरान विदेशियों से बेवजह घूमने का कारण पूछा तो बोले एक बजे तक स्वतंत्र घूम सकते हैं। पुलिस ने बताया कि रिलैक्सेशन पीरियड केवल जरूरत का सामान खरीदने के लिए है, गंगा किनारे स्नान करने, ध्यान करने या चहल-कदमी करने के लिए नहीं है। पुलिस ने विदेशी नागरिकों से नियमों का उल्लंघन होने पर कोरे कागज पर 500 बार लिखवाया कि उनसे गलती हो गई।

लॉकडाउन और दो सप्ताह बढ़ाने पर राज्यों के बीच सहमति बनी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोविड-19 से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श करने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस की है। कई राज्यों ने प्रधानमंत्री से लॉकडाउन और दो सप्ताह बढ़ाने का अनुरोध किया है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि लॉकडाउन और दो सप्ताह बढ़ाने पर राज्यों के बीच सहमति लगती है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ हमारा संघर्ष तब तक मजबूत रहेगा जब तक देश का प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभायेगा और सरकार तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करेगा।
मोदी ने लॉकडाउन तथा परस्पर सुरक्षित दूरी पर जोर देते हुए कहा कि लोगों का जीवन बचाने के लिए यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार का मंत्र जान है तो जहान है के स्थान पर जान भी और जहान भी होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि केन्द्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से कोविड-19 का प्रकोप घटाने में मदद मिली है, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है और सतर्कता जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगले तीन-चार सप्ताह वायरस के प्रभाव को जानने के लिए महत्वपूर्ण हैं। मोदी ने कहा कि भारत में आवश्यक दवाई की पर्याप्त आपूर्ति है और अग्रिम पंक्ति में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कालाबाजारी और जमाखोरी करने वाले लोगों को सख्त चेतावनी दी। डॉक्टरों और चिकित्सकर्मियों पर हमले और पूर्वोत्तर तथा कश्मीर के छात्रों के साथ बुरे बर्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। उन्होंने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों पर काबू करने तथा परस्पर दूरी बनाये रखने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा मजबूत करने और रोगियों तक टेलीमेडिसन के जरिये पहुंचने को भी कहा। उन्हांेने सुझाव दिया कि कृषि उपज की डायरेक्ट मार्केटिंग करने से मंडियों में भीड़ को रोका जा सकता है। इसके लिए कृषि उत्पाद मंडी समिति प्रावधानों में सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की मदद हो सकेगी। प्रधानमंत्री ने आरोग्य सेतु एप को लोकप्रिय बनाने को कहा। उन्होंने इसके लिए दक्षिण कोरिया और सिंगापुर में मिली सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव से भारत ने इस एप के माध्यम से यह प्रयास किया है। इस एप को ई-पास के रूप में इस्तेमाल संभावना तलाशने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करने में सहायक होगा।
आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संकट आत्मनिर्भर बनने और देश को आर्थिक शक्ति बनाने का एक मौका है। बैठक में मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों की स्थिति के बारे में अवगत कराया और महामारी को काबू करने के उपाय, स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार प्रवासी मजदूरों की मदद और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाये रखने के कदमों की जानकारी दी।

कोरोना संक्रमण से वॉरियर्स की जीवन क्षति होने पर सीएम कोष से आश्रितों को मिलेगा 10 लाख

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर निर्णय किया गया है कि कोविड- 19 कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम और बचाव कार्यों में लगे सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों (संविदा, आउटसोर्स आदि) एवं सभी कोरोना वारियर्स जो कि कोविड-19 कोरोना संक्रमण से बचाव एवं राहत कार्यों में तैनात हैं, यदि वे संक्रमित होते हैं तो उनके उपचार का व्यय राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। उनके जीवन की क्षति होने पर उनके आश्रित को मुख्यमंत्री राहत कोष से सीधे 10 लाख रूपए दिए जाएंगे।

उधर, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर कोरोना वायरस की रोकथाम हेतु चिह्नित किए गए राजकीय मेडिकल कॉलेजों को सुदृढ़ किए जाने और उनकी क्षमता में वृद्धि किए जाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री राहत कोष से चिकित्सा शिक्षा विभाग को 10 करोङ रूपए अवमुक्त किए गए हैं।

दानवीरों में अब चमोली की देवकी भंडारी का भी होगा जिक्रः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि चमोली जनपद की गौचर निवासिनी देवकी भंडारी ने अपने नाम को चरितार्थ किया है। उन्होंने वैश्विक संकट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पीएम केयर फंड में 10 लाख रुपए की अपनी सारी पूंजी देकर जरूरतमंदों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। इस भरत भूमि में दानवीर कर्ण और राजा बलि की दानवीरता की कहानियाँ हमने सिर्फ किताबों में पढ़ी थी लेकिन आज साक्षात देख भी ली है। निस्वार्थ भाव से सब कुछ त्याग और दान देने की हमारी भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करते हुए देवकी ने अकेले होकर भी पूरे भारतवर्ष को अपना परिवार समझा और हमारे सामने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। नारी शक्ति के रूप में हम सबके लिए बहुत बड़ी प्रेरणा हैं। कोरोना से लड़ने के लिए ऐसा हर एक प्रयास इस जंग को मजबूत करेगा।

वहीं, एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरर्स, रानीपुर, हरिद्वार के अध्यक्ष संदीप जैन ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 7,51,000 (सात लाख इक्यावन हजार) का चेक भेंट किया। इसके साथ ही, संजीवनी यूए सिविल सर्विसेज उत्तराखण्ड की अध्यक्षा निपुनिका सिंह ने भी मुख्यमंत्री राहत कोष में दो लाख रूपये का चेक भेंट किया।

एक दिन के वेतन का चेक सौंपा
उत्तराखंड वन विकास निगम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक दिन के वेतन के योगदान के रूप में 25,72,548 रुपए का चेक दिया है। यह चेक वन मंत्री हरक सिंह रावत एवं प्रबंध निदेशक मोनिष मल्लिक ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपा। उन्होंने पीएम केयर्स फंड के लिए भी पांच लाख रुपए का चेक मुख्यमंत्री को सौंपा।

इसी क्रम में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल गोयल ने भी मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख दो हजार रुपए का चेक दिया। इससे पूर्व भी उन्होंने मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख रुपए का चेक दिया था।

शाक्य बौद्ध समुदाय ने 23 लाख की राशि दी
शाक्य बौद्ध समुदाय ने मुख्यमंत्री राहत कोष में कुल 23 लाख रूपये की राशि दी गई है। शाक्य बौद्ध समुदाय की ओर से आध्यात्मिक नेता एचएच शाक्यृत्जीन, एचएच रत्ना वज्र शाक्य और एचएच ज्ञान वज्र शाक्य ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को उक्त राशि के चेक भेंट किए। कुल 23 लाख रूपये की राशि में से एचएच शाक्यृत्जीन, एचएच रत्ना वज्र शाक्य और एचएच ज्ञान वज्र शाक्य द्वारा 3 लाख रूपये, डोलमा फोड्रांग द्वारा 3 लाख रूपये, न्गोर पाल एवाम चोडान द्वारा 3 लाख रूपये, शाक्य कालेज द्वारा 3 लाख रूपये, द ग्रेट शाक्य मोनलाम फाउंडेशन द्वारा 5 लाख रूपये, शाक्य ननरी द्वारा 3 लाख रूपये और शाक्य सेंटर द्वारा 3 लाख रूपये का अंशदान किया गया है।

घर बैठे गैजेट्स पर पढ़़ाई कर सकेंगे छात्र, श्रीदेव सुमन विवि ने जारी की व्यवस्था

श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध 53 राजकीय महाविद्यालयों और 114 निजी कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं लॉकडाउन के दौरान घर बैठे ऑनलाइन पढ़ाई कर सकेंगे। विवि प्रशासन ने वेबसाइट पर विभिन्न एजुकेशलन साइट्स, प्रोफेशनल संस्थानों के लिंक शेयर किए हैं।

लॉकडाउन के चलते श्रीदेव सुमन विवि सेमेस्टर परीक्षाओं का केंद्रीय मूल्यांकन नहीं कर पा रहा है। कॉलेज बंद होने के कारण छात्र-छात्राएं भी पढ़ाई से वंचित हैं। कुलपति डा. पीपी ध्यानी और कुछ कर्मचारी लॉकडाउन पीरियड में सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए कार्यालय में जरूरी कामकाज निपटाने पहुंच रहे है।

कुलपति डा. ध्यानी का कहना है कि लॉकडाउन में छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करने में कोई दिक्कतें न हो, इसके लिए देश-दुनिया के टॉप विश्वविद्यालय, बिजनेस संस्थान, जॉब सीकर वेब, समाचार एजेंसियों के लिंक विवि की वेबसाइट पर विवि प्रशासन ने हाइपर लिंक कर दिया है। अब छात्र-छात्राएं घर बैठे पीसी, लैपटॉप, मोबाइल, टैबलेट पर इन लिंकस को खोलकर अपडेट रह सकते हैं।

उन्होंने कालेजों के प्राचार्यों और निदेशकों को लॉकडाउन के दौरान छात्र-छात्राओं से निरंतर संवाद बनाए रखने को कहा है। कहा कि छात्रों की कोई भी समस्या हो तो उन्हें सोशल नेटवर्किंग साइट्स, ई-मेल, व्हाट्स एप, ट्वीटर आदि माध्यम से हल करें। कुलपति का कहना है कि यदि लॉकडाउन पीरियड लंबा खिंचता है, तो सेमेस्टर परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने शिक्षकों के घरों पर ही भेजे जाएंगे।