मुख्यमंत्री ने स्वयं संज्ञान लेकर फसलों के नुकसान की रिपोर्ट देने के दिए निर्देश

उत्तराखंड में भारी वर्षा और ओलावृष्टि से फसलों को पहुंचे नुकसान को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत बेहद गंभीर है। इसके तहत मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को फसल क्षति का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को आश्वासन देते हुए कहा है कि किसानों की हरसंभव मदद की जाएगी।
इन दिनों नियमित अंतराल में हो रही वर्षा और ओलावृष्टि रबी की फसल पर भारी पड़ रही है। विशेषकर मैदानी क्षेत्रों में रबी की मुख्य फसल गेहूं समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों के माथों पर बल पड़े हैं। अब मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को ओलावृष्टि और भारी वर्षा से किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद कृषि महकमा हरकत में आ गया है। सचिव कृषि आर.मीनाक्षी सुंदरम ने कृषि निदेशक को निर्देश दिए हैं कि वह भी अपने स्तर से फसलों को पहुंचे नुकसान का आकलन कराकर रिपोर्ट शासन को भेजना सुनिश्चित करें। उधर, कृषि निदेशक गौरीशंकर ने बताया कि सभी जिलों के मुख्य कृषि अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में जल्द से जल्द सर्वे कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है, ताकि प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति की जा सके। दूसरी तरफ, निदेशक हार्टिकल्चर मिशन संजय श्रीवास्तव ने बताया कि वर्षा और ओलावृष्टि से फल-सब्जियों को पहुंची क्षति का भी आकलन कराया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि राज्य सरकार ने स्वयं इसका संज्ञान लिया है। यह राज्य के किसानों के लिए अच्छी खबर है। नही तो पहले हमें सरकार से मांग करनी पड़ती थी। किसानों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया है कि उनकी समस्याओं का संज्ञान लेकर त्रिवेन्द्र सरकार समय-समय पर राहत देती आ रही है। गौरतलब है कि पहले भी किसानों की समस्याओं को लेकर राज्य सरकार ने किसानों के हितों को लेकर कई राहत देने वाले कार्य किये है। इस बार का बजट भी किसानों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वही गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर भुगतान के लिए अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था भी त्रिवेन्द्र सरकार ने की है।

उत्तराखंड सरकार ने कोरोना को महामारी घोषित किया

उत्तराखंड सरकार ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कैबिनेट के फैसले की पुष्टि की है। वायरल संक्रमण से बचाव के लिए प्रदेश में उत्तराखंड महामारी रोग अधिनियम (कोविड-19) में लागू कर दिया है। इससे जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को वायरस की रोकथाम के लिए असीमित अधिकार प्राप्त हो जाएंगे।
मदन कौशिक ने बताया कि इसके तहत अब स्कूल और आंगनबाड़ी के बाद राज्य के सभी कॉलेज, सिनेमाघर और मल्टीप्लेक्स 31 मार्च तब बंद रहेंगे। लेकिन मेडिकल कॉलेज खुले रहेंगे। वहीं राज्य में आइसोलेशन वार्ड के लिए 50 करोड़ की राशि मंजूर की है।
उत्तराखंड सरकार ने मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल की बैठक में कोरोनो वायरस को लेकर यह फैसला लिया है। सबसे खास बात ये है कि कोरोना को राज्य सरकार ने महामारी घोषित कर दिया है। प्रदेशभर में कोरोना से बचाव के मद्देनजर सावधानी व जागरुकता पर जोर दिया गया है। मॉल पर फिलहाल निर्णय नहीं हुआ है। किसी भी प्रकार के कार्यक्रम से पहले सरकार से अनमुति लेनी जरूरी होगी। कोरोना को देखते हुए नर्सिंग स्टाफ के खाली पद भरे जाएंगे। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त पद सृजित किए जाएंगे। बसों में सेनिटेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ज्यादा लोगों एक जगह पर एकत्र होने से रोका जाएगा। इस आदेश की अवहेलना करने पर आईपीसी की धारा 188 के तहत 1 माह से 6 माह के कारावास का प्रावधान किया गया है। भविष्य में कोरोना की तीव्रता बढ़ने पर प्रीफेब्रिकेटेड 100 बेड का हॉस्पिटल तैयार किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर निजी भवन, चिकित्सा ईकाई भवन को अस्पताल बनाया जाएगा। आपात स्थिति से निपटने के लिए 140 विभागीय एम्बुलेंस को अलर्ट पर रखा गया है।

स्वास्थ्य सचिव को असीमित अधिकार
महामारी अधिनियम लागू होने के बाद सचिव स्वास्थ्य को असीमित अधिकार होंगे। सचिव स्वास्थ्य अपनी शक्तियां जिलों में जिलाधिकारी और सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) डेलिगेट करेगा। इसके तहत कई शक्तियां डीएम में निहित होंगी। राज्य सरकार पहले ही तमाम बड़े आयोजनों को रद्द कर चुकी है। 12वीं तक के स्कूलों और विद्यालयों में 31 मार्च तक अवकाश घोषित किया गया है। वहीं सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में बायोमीट्रिक हाजिरी पर भी रोक लगाई जा चुकी है।

दो ट्रेनी आईएफएस सहित छह के सैंपल भेजे
कोरोना की आशंका के चलते दो ट्रेनी आईएफएस समेत छह और मरीजों के सैंपल शनिवार को जांच के लिए वायरोलॉजी लैब हल्द्वानी भेजे गए हैं। इस तरह से जिले से शनिवार तक 20 सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। जिसमें से अब तक आई सभी 11 मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर सतर्कता बरत रहे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार विभिन्न अस्पतालों और संस्थानों से संपर्क कर रही हैं। इसी क्रम में शनिवार को छह सैंपल जांच के लिए डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कालेज, हल्द्वानी स्थित वायरोलॉजी लैब भेजे गए। इसमें दो सैंपल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे दो ट्रेनी आईएफएस के भी शामिल हैं।
अकादमी के 62 ट्रेनी आईएफएस के अलग-अलग ग्रुप पिछले दिनों विभिन्न देशों से ट्रेनिंग टूर से लौटे थे। सभी की स्क्रीनिंग करने के बाद शुक्रवार को चार ट्रेनी आईएफएस के सैंपल जांच के लिए भेजे थे। शनिवार को भी दो और ट्रेनी आईएफएस के सैंपल दून अस्पताल से जांच के लिए भेजे। इसके अलावा शनिवार को जो चार और मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं, उनमें एम्स ऋषिकेश और निजी अस्पतालों में इलाज कराने को पहुंचे थे। ये चारों भी हाल में विदेश से लौटे हैं। सीएमओ डॉ. मीनाक्षी जोशी ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। साथ ही संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों को निगरानी पर रखा जा रहा है।

सरकार के बजट में रोजगार के लिए नए उद्योगों को प्राथमिकता

त्रिवेन्द्र सरकार ने इस बार जेंडर बजट में करीब 6204 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। यह पिछले बजट से करीब 12 करोड़ रुपये अधिक है। प्रदेश में जेंडर बजट 2007-08 से शुरू किया गया था। वित्त विभाग के अनुसार, जेंडर बजट का मतलब है सामान्य बजट में महिलाओं से संबंधित योजनाओं के लिए अलग से व्यवस्था करना। इस बार जेंडर बजट 6204 करोड़ रुपये का रखा गया है।
पिछले बजट में जेंडर बजट के तहत 6192 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी। इस बार सबसे अधिक इजाफा कल्याणकारी योजनाओं में किया गया है। पिछले बजट में कल्याणकारी योजनाओं के लिए 681 करोड़ रुपये की व्यवस्था की थी। इस बार इसके लिए 912 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। 11 विभाग ऐसे हैं, जिनमें शत प्रतिशत जेंडर बजट की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कई विभाग हैं जिन्होंने महिला संबंधित योजनाओं में 20 प्रतिशत की व्यवस्था की है।

इन विभागों की योजनाओं में शत प्रतिशत व्यवस्था
(करोड़ रुपये में)
पुलिस 06.30
शिक्षा, खेल 20.51
परिवार कल्याण 83.78
कल्याण योजनाएं 912
ग्राम्य विकास 07.60
उद्योग 07.50
परिवहन 03.50
वन 00.33
अनुसूचित जाति 74
अनुसूचित जनजाति 03.90
पशुपालन संबंधित कार्य 33

नए उद्योगों को मिलेगी रफ्तार, सरकार ने उठाया वित्तीय भार
उत्तराखंड में नए उद्योगों को रफ्तार देने के लिए सरकार ने बजट में वित्तीय भार उठाया है। सरकार ने 2020-21 के बजट में औद्योगिक विकास के लिए 382 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 100 करोड़ अधिक है। नए औद्योगिक निवेश के प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट में प्राथमिकता दी है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में उद्योग विभाग को लगभग 276 करोड़ का बजट दिया गया था। इस बार सरकार ने इसे बढ़ा कर 382 करोड़ किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में नए एमएसएमई उद्योग, बुनियादी ढांचे का विकास, नए इंडस्ट्रियल एरिया, हथकरघा एवं हस्तशिल्प, खादी ग्रामोद्योग पर सरकार का फोकस है।
ग्रोथ सेंटरों के लिए सरकार ने बजट में 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। सरकार की योजना न्याय पंचायत स्तर पर ग्रोथ सेंटर स्थापित करने की है। अब तक 83 ग्रोथ सेंटरों के लिए विभिन्न विभागों को पैसा दिया गया है। इसी तरह मेक इन इंडिया के लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।

कोरोनावायरस से बचने के लिए इन उपायों को करें

कोरोनावायरस से पूरा विश्व में दहशत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, कोरोनावायरस से भी खतरनाक वायरस पहले भी सक्रिय हुए हैं। इनसे बड़ी संख्या में लोग ग्रसित हुए और मौत का शिकार भी हुए जबकि कोरोना में राहत वाली बात यह है कि इसमें मृत्यु दर बहुत कम है। फिर भी कोरोना को लेकर दहशत का माहौल बहुत ज्यादा है। ऐसे में डॉक्टर दहशत में न आने और एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं।

क्या है कोरोनावायरस
चिकित्सकों ने बताया कि कोरोना (कोविद-19) वायरस विषाणुओं का एक बड़ा समूह है। जो इंसानों में सामान्य जुकाम से लेकर श्वसन तंत्र की गंभीर समस्या तक पैदा कर सकता है। इसके अलावा कोरोनावायरस से सार्स और मर्स जैसी जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं।

कोरोना इंफेक्शन के लक्षण
कोरोनावायरस की वजह से रेस्पेरेटरी ट्रेक्ट यानी श्वसन तंत्र में हल्का इंफेक्शन हो जाता है। जैसा कि आमतौर पर कॉमन कोल्ड यानी सर्दी, जुकाम में देखने को मिलता है। हालांकि इस बीमारी के लक्षण बेहद कॉमन है और कोई भी कोरोनावायरस से पीड़ित न हो तब भी उसमें ऐसे लक्षण दिख सकते हैं। जिसमें नाक बहना, सिर में तेज दर्द, खांसी और कफ, गला खराब, बुखार, थकान और उल्टी महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ होना, निमोनिया और ब्रांकाइटिस।

कैसे फैलता है कोरोना
यह वायरस बीमार रोगी के खांसने, छींकने से स्वस्थ इंसान के शरीर में सांस व मुंह के रास्ते प्रवेश करता है।

कैसे बचे-सुझाव
– जब कोई खांसे या छींके तो आपको उस व्यक्ति से छह फीट से अधिक रखनी चाहिए, ताकि विषाणु आप तक जीवित न पहुंच सके।
– मुंह को मास्क से कवर कर रखें और रोज बदलें
– मास्क न होने पर कुहनी से मुंह ढक कर खांसे
– बचाव के लिए भीड़भाड़ वाले इलाके में प्रवेश न करें। शुरुआती दौर में संक्रमित व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं दिखते बल्कि यह रोग को फैलाने मेें सक्षम होता है।
– किसी भी संभावित संक्रमित वस्तु को छूने के बाद हाथों को पानी साबुन से 20 सेकेंड तक धोएं।
– हाथ मिलाने से बचें, अभिवादन के लिए नमस्ते कर सकते हैं।

वहीं, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने बताया कि कोरोना को लेकर घबराने की नहीं सावधानी बरतने की जरूरत है। अफवाहों पर ध्यान न दें। उत्तराखंड में कोरोना का कोई केस अब तक सामने नहीं आया है। एक कोरोना मरीज के निजी अस्पताल में भर्ती होने का जो पत्र वायरल हुआ है, वह निराधार हैं। देहरादून के किसी निजी अस्पताल में कोरोना का मरीज भर्ती नहीं है। पत्र में गलत तथ्य लिखने वाले संबंधित चिकित्सा अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किया है।

जानिए त्रिवेन्द्र सरकार के बजट में किसको क्या मिला

त्रिवेंद्र रावत की सरकार ने बजट में राजस्व बढ़ाने के प्रयास किये है। जैविक खेती और किसानों की आय दोगुनी करने के वायदे को सरकार ने बजट के माध्यम से आगे बढाया है। पर्यटन में सरकार को केंद्र से खासी मदद मिलती रही है। इस सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए एडवेंचर टूरिज्म विभाग खोलने की तैयारी में है। इससे जुड़ी नई योजनाएं त्रिवेंद्र सिंह रावत के बजट में हैं।

विधेयक जो अधिनियम बन गए
– वर्ष 2019-20 का बजट
– माल एवं सेवा कर संशोधन अधिनियम
– उत्तराखंड शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण अधिनियम
– उत्तराखंड मंत्री वेतन, वेतन, भत्ता 2019 अधिनियम
– उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद संशोधन अधिनियम
– उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम
– उत्तराखंड भूतपूर्व मुख्यमंत्री आवासीय एवं अन्य सुविधाएं
– उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम
– उत्तराखंड जैविक कृषि अधिनियम
– उत्तराखंड पंचायती राज संशोधन अधिनियम
– कृषि उत्पाद मंडी संशोधन अधिनियम
– फल पौधशाला अधिनियम

सदन में पेश हुए ये विधेयक
– संयुक्त प्रांत आबकारी अधिनियम 1910 संशोधन विधेयक
– यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी रुड़की विधेयक
– उत्तराखंड-उत्तरप्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 संशोधन अधिनियम (संशोधन विधेयक)
– उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1959 संशोधन अधिनियम (संशोधन विधेयक)
– उत्तराखंड साक्षी संरक्षण विधेयक
– उत्तराखंड पंचायती राज संशोधन विधेयक
– उच्च शिक्षा परिषद अधिनियम, 1995 संशोधन विधेयक
– उत्तराखंड उपकर संशोधन विधेयक
– ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक

किस मद के लिए कितना बजट…
राजस्व प्राप्तियां- 42439.33 करोड़ रुपये
कर्मचारियों के वेतन, भत्तों पर खर्च- 14673.96 करोड़
योजनाओं के लिए बजट- 11137.30 करोड़
घाटे को पूरा किया 460 करोड़ रुपये,पब्लिक अकाउंट से लेकर राजस्व घाटा पूरा

रिवर्स पलायन- 18 करोड़ रुपये
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन- 76 करोड़
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना- 53 करेड़
गन्ना भुगतान- 240 करोड़
पैक्स कम्प्यूटराइजेशन- 10 करोड़
पशुपालन- 414.35 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना- 20 करोड़ रुपये

बुनियादी ढांचा
मुजफ्फरनगर रुड़की रेल मार्ग- 70 करोड़
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना- 1072 करोड़
सौंग पेयजल बांध परियोजना- 130 करोड़
नाबार्ड के सहयोग से पेयजल की 22 नई योजनाओं के लिए 190 करोड़

स्मार्ट सिटी-123 करोड़
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी- 95 करोड़
शहरी विकास एडीबी योजना- 103 करेड़
राज्य वित्त आयोग से शहरी निकायों के लिएरू774.24 करोड़
जिला योजना के तहत 665 करोड़

स्वास्थ्य
हैल्थ एवं वेलनेस सेंटर- 380.50 करोड़
मेडिकल कालेज हल्द्वानी एवं संबद्ध अस्पताल- 110 करोड़
दून मेडिकल कालेज- 96.79 करोड़

समाज कल्याण
आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण- 48.60 करोड़
नंदा गौरा योजना- 80 करोड़
बाल पोषण योजना- 25 करोड़

विद्यालयी शिक्षा- 7867.99 करोड़
एअरोस्पेसे व रक्षा उद्योग- 50 करोड़
एमएसएमई सहायता योजना- 35 करोड़
वनों को आग से बचाने के लिए- 19.92 करोड़
जायका- 110 करोड़

होम स्टे- 11.50 करोड़
पर्यटन विकास बाह्य सहायता- 119 करोड़

सड़क सुरक्षा कोष- 06 करोड़
लोक निर्माण विभाग को सड़क सुरक्षा के लिए- 7 करोड़

जौलीग्रांट विस्तार- 295 करोड़
खेल एवं युवा कल्याण- 239.94
राष्ट्रीय खेल- 90 करोड़
विश्व बैँक की नई योजना- 315 करोड़

2019-20 में जीडीपी की रैंकिंग में उत्तराखंड को दूसरा स्थान
-केदारनाथ में 32 लाख श्रद्धालु आए

बजट के प्रावधान
-जमरानी बांध के अंतर्गत आ रहे लोगों के पुनर्वास के लिए 220 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
-हर घर नल से जल के लिए 134 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
-हरिपुरा और तुमड़िया जलाशय के लिए पावर प्रोजेक्ट पर 20-21 में काम शुरू हो जाएगा।
-जंगली जानवरों द्वारा किए गए नुकसान प्राकृतिक आपदा की सूची में शामिल।
-गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित।
-मंडुवा, उड़द, गहत, मसूर, आदि के लिए लिए कृषि उत्पादन सर्वेक्षण योजना
-कौशल विकास के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाएगा।
-युवाओं को हुनर विशेष सिखाने लिए मुख्यमंत्री शिक्षुता योजना के तहत निश्चित राशि दी जाएगी।
-राज्य के 67 गांवों को सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य।
-2021 में 3063 शिक्षा विभाग में नियुक्तियां की जाएगी।
-बाल विकास में 1224 कर्मियों की भर्ती की जाएगी।
-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 76 करोड़ की धनराशि का प्रावधान
-निवेशक सम्मेलन में 22 हजार करोड़ की पूंजी निवेश से 57314 रोजगार के अवसर मिलेंगे।
-विदेशों में बसे लोगों को निवेश से जोड़ने के लिए अलग से विभाग बनेगा।
-पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए 2174 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है।
-रबी खरीफ के लिए 23 करोड़ा का प्रावधान किया गया है।
-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 53 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित
-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकनाइजेशन के तहत 500 फार्म मशीनरी बैंक, 800 कस्टम हायरिंग
सिस्टम स्थापित होंगे।
-किसानों के अवशेष गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 240 करोड़
की धनराशि की व्यवस्था।
-राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के लिए 100 करोड़ की धनराशि।
-दुग्ध सहकारिताओं के विकास के लिए 444.62 करोड़ का प्रावधान।
-सहकारी समिति में कंप्यूटराइजेशन के लिए 10 करोड़ का प्रावधान।
-दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान योजना के तहत 27 करोड़ का प्रावधान।

नई योजनाएं
– हल्द्वानी-अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के लिए हेली सेवा शुरू की जाएगी।
-दिव्यांग, वृद्धावस्था, विधवा पेंशन 1000 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रतिमाह करा दी गई है।
-स्कूलों में 3 लाख से अधिक छात्रों को फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा।
-सबके लिए स्वास्थ्य- शीघ्र ही 314 डाक्टरों के पदों को भरने के लिए चिकित्सक चयन आयोग
बना लिया जाएगा।
-जायका परियोजना (वन पंचायतों के वन आवरण में वृद्धि, वनों के निक टवर्ती गांववालों की
-आजीविका में सुधार तथा वनों पर निर्भरता कम करने के लिए 110 करोड़ का प्रावधान।
-ईको टूरिज्म नीति जल्द लागू होगी।
-वीरचंद्र गढ़वाली योजना के लिए 17.50 करोड़ प्रावधान।
-पशुपालन विभाग के लिए 414.35 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
-नरेगा के लिए 266.70 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
-सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से डेढ़ सौ से अधिक जनसंख्या वाले सीमावर्ती गांवों में सड़क पहुंचाई जाएगी।

उत्तराखंड में फल-सब्जी पर नहीं लगेगा मंडी शुल्क

उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र के फार्मूले को अपनाया है। प्रदेश में लागू उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम को खत्म कर इसकी जगह केंद्र का मॉडल एक्ट (कृषि उपज एवं पशुधन विपणन अधिनियम) को लागू किया है। मंत्रिमंडल ने इसकी मंजूरी दे दी है।
केंद्र ने किसानों की आय बढ़ानेे के लिए कृषि उत्पादों का व्यापार खुला करने के लिए मॉडल एक्ट को लागू किया है। अब किसानों को मंडियों में कृषि उत्पाद लाने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। किसान अपने उत्पाद को उचित दामों पर मंडी से बाहर कहीं भी बेच सकेंगे। मंडी समिति की ओर से फल-सब्जी व अन्य कृषि उत्पादों के कारोबार पर शुल्क नहीं लिया जाएगा।
वर्तमान में लागू उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम (एपीएमसी) में यह व्यवस्था है कि मंडी समिति के अधीन आने वाले क्षेत्रों में फल-सब्जी के कारोबार पर एक प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाता है। लाइसेंस के बिना कोई भी आढ़ती कृषि उत्पादों का कारोबार नहीं कर सकता है। मॉडल एक्ट में बिना लाइसेंस के भी आढ़ती किसानों का उत्पाद खरीद सकते हैं।

कांट्रेक्ट फार्मिंग से बंजर होने से बचेगी कृषि भूमि
उत्तराखंड के किसान अब कांट्रेक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) कर सकेंगे। मंत्रिमंडल ने कांट्रेक्ट फार्मिंग एक्ट 2018 को राज्य में लागू करने की मंजूरी दे दी है। इससे कृषि क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार किसानों से खेती के लिए कांट्रेक्ट कर सकते हैं।


कर्नाटक और मैसूर की तर्ज पर राज्य में कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक्ट बनाया है। इस एक्ट के आधार पर प्रदेश में अनुबंध खेती की मंजूरी दे दी है। इस एक्ट के लागू होने से जिन किसानों के काफी कृषि भूमि है और वे बुढ़ापे में खेेतीबाड़ी नहीं कर सकते हैं। ऐसे किसान अपनी कृषि भूमि को कांट्रेक्ट फार्मिंग के लिए कंपनी को लीज पर दे सकते हैं। किसान के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने एक्ट में व्यवस्था की है। जिससे लीज पर दी जाने वाली जमीन को न तो ट्रांसफर किया जाएगा और न ही उस पर कोई कब्जा कर सकता है।

राज्य में तीन लाख हेक्टेयर भूमि बंजर
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब सात लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। जिसमें रबी और खरीफ फसलें उगाई जाती है। लगभग तीन लाख हेक्टेयर कृषि भूमि बंजर हो चुकी है। जंगली जानवरों और बंदरों की समस्या, सिंचाई का अभाव से किसान खेती छोड़ रहे हैं। राज्य गठन के बाद प्रदेश में लगभग 17 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल कम हुआ है।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को दिये निर्देश, उद्योग मित्र की बैठकें आयोजित कर समस्याओं का त्वरित समाधान हो

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उद्यमियों से मेरा सामाजिक दायित्व (माई सोसियल रिस्पांसिबिलिटी) के तहत प्रदेश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य की बेहतरी के लिये सहयोगी बनने की अपेक्षा की है। उन्होंने प्रदेश में उद्योगों को सुविधायुक्त वातावरण प्रदान करने, उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये भी सभी सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये हैं।
सचिवालय में इंडस्टस्ट्रीज एशोसियेशन ऑफ उत्तराखण्ड (आई.ए.यू) के प्रतिनिधियों एवं शासन के उच्चाधिकारियों के साथ एशोसियेशन की समस्याओं एवं सुझावों पर कार्यवाही किये जाने सम्बन्धी बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के अनुकूल नीतियां निर्धारित किये जाने के बावजूद भी उद्यमियों की कोई समस्या हो तो उसका त्वरित समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने आई.ए.यू द्वारा प्रदेश में एम.एस.एम.ई सेक्टर को बढ़ावा देने के साथ ही उद्यमियों की विभिन्न समस्याओं एवं सुझावों पर त्वारित कार्यवाही हेतु अधिकारियों को निर्देश दिये। उन्होंने श्रम, उद्योग एवं सिडकुल, सीडा से सम्बन्धित समस्याओं के निराकरण हेतु नियमित रूप से उद्योग मित्र की बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिये है कि जिलास्तरीय अधिकारी उद्यमियों के साथ अच्छा व्यवहार करें उनकी समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने श्रम, उद्योग एवं सिडकुल आदि, उद्यमिता विकास से जुड़े जिलास्तरीय अधिकारियों के कार्य व्यवहार की जांच करने के भी निर्देश दिये हैं। उन्होंने उद्यमियों से अपेक्षा की कि वे समय समय पर अपनी समस्याओं से विभागीय प्रमुखों को भी अवगत कराये ताकि औद्योगिक विकास मे तेजी आ सके।
मुख्यमंत्री ने उद्यमियों का ऊधम सिंह नगर की भांति मेरा सामाजिक दायित्व के तहत प्रदेश में शिक्षा व स्वास्थ्य की बेहतरी के लिये कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उधमसिंह नगर में इस योजना के तहत 1100 स्कूलों को 528 स्कूलों में संयोजित कर उन्हें उद्यमियों द्वारा गोद लेकर इनमें परिवहन, स्मार्ट क्लास तथा अध्यापकों की संख्या दुगनी करने के साथ ही पढ़ाई का बेहतर वातावरण सृजित किया गया है। इसी प्रकार जनपद के 8 अस्पतालों का उच्चीकरण कर उन्हें हाईटेक बनाया गया है। उन्होंने अन्य जनपदों में भी इस प्रकार के प्रयास करने की उद्यमियों से अपेक्षा की।
मुख्यमंत्री ने एशोसियेशन की मांग पर प्रत्येक जनपद में ईएसआई अस्पताल के लिये भूमि उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये। उन्होंने हरिद्वार व उधम सिंह नगर में ईएसआई हास्पिटल की स्वीकृति के लिये केन्द्रीय श्रम मंत्री से वार्ता करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमियों के व्यापक हित में ग्रिवास कमीटी भी गठित की गई है। यहां भी वे अपनी समस्याये रख सकते हैं।

देहरादून में हुई आईटीएटी की सर्किट बैंच की स्थापना

केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा गुरूवार को हरिद्वार बाई पास स्थित होटल में आयकर अपीलीय अधिकरण (आईटीएटी) की देहरादून सर्किट बैंच का मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत एवं आयकर अपीलीय अधिकरण के अध्यक्ष जस्टिस पीपी भट्ट की उपस्थिति में शुभारम्भ किया। उत्तराखण्ड पोस्टल सर्किल द्वारा तैयार की गई विशेष एलबम का भी अनावरण किया गया।

उत्तराखंड से विशेष लगाव, सभी लोग ईमानदारी से टैक्स देंः रविशंकर
इस अवसर पर अपने सम्बोधन में केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उनका उत्तराखण्ड से विशेष लगाव है। देहरादून में आईटीएटी की सर्किट बैंच की स्थापना को राज्य हित में बताते हुए इसे आयकर अपीलार्थियों एवं अधिवक्ताओं के व्यापक हित में बताया। उन्होंने इस अवसर पर जौलीग्रांट हवाई अड्डे पर वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराये जाने की भी घोषणा की।

उन्होंने कहा कि देश को आर्थिक रूप से सशक्त बाने तथा विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिये जरूरी है कि सभी लोग ईमानदारी से टैक्स दें। उन्होंने कहा कि देश की 130 करोड़ की आबादी में मात्र 9 करोड़ लोग ही टेक्स देते हैं। एक करोड़ की आय दिखाने वाले 2 हजार प्राफेसनल हैं, जबकि पिछले चार साल में 2 करोड़ लोग विदेश गये। 2.50 करोड़ लोगों ने नई गाड़ी खरीदी, 10 लाख से ऊपर अपनी आय दिखाने वाले मात्र 50 हजार हैं, यह स्थिति सोचनीय है। हमें ईमानदारी से टैक्स देने की सोच बढ़ानी होगी।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा आयकर दाताओं के हित में बड़े निर्णय लिये है। अब 31 अक्टूबर के बाद किसी भी करदाता को नोटिस डिजिटल फार्मेट में ही भेजी जाएंगी। पेनाल्टी के निर्धारण के लिये तीन आयकर आयुक्तों की समिति बनाई गई है। 31 मार्च तक आईटीएटी के तहत विभिन्न न्यायालयों में जितने भी केस लंबित है उसमें अपीलार्थी को मूल धनराशि ही जमा करनी होगी। उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री के रिफार्म परफार्म एवं ट्रांसफार्म की अवधारण के साथ कर सुधारों एवं समावेशी डिजिटल भारत की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में 121 करोड़ लोगों के पास मोबाइल है 70 करोड़ स्मार्टफोन है। फर्जी नाम से चलने वाले एकाउन्ट को बंद कर 1.40 करोड़ की बचत की गई है। उन्होंने कहा कि सभी गांवों में बिजली पहुंचाने के साथ ही 2.50 लाख न्याय पंचायतों में आप्टिकल फाइवर लाइन बिछाई गई हैं। इससे पूरा देश नेटवर्किंग से जुड़ जायेगा।

उन्होंने कहा कि दुनिया के 06 देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश तेजी से विकास की ओर अग्रसर हैं दुनिया में देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है। उन्होंने नागरिकता कानून को आस्था के कारण पीड़ितों को मदद करने वाला बताते हुए कहा कि यह नागरिकता देने वाला है किसी की नागरिकता छीनने वाला नहीं।

अधिवक्ताओं की समय के साथ होगी आर्थिक बचत
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आईटीएटी की सर्किट बेंच को राज्य के लिये बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि इससे अपीलार्थियों एवं अधिवक्ताओं को बार-बार दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा तथा उनकी समय के साथ-साथ आर्थिक बचत भी होगी। उन्होंने कहा कि लोगों को स्वकर निर्धारण की दिशा में आगे आना चाहिए तथा ईमानदारी के साथ अपना टैक्स अदा करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने राज्य में नगर पालिका एवं नगर पंचायतों में भी स्वकर निर्धारण की व्यवस्थ बनायी है। आपसी सहयोग विश्वास व समन्वय से विवादों का समाधान हो इसकी भी उन्होंने जरूरत बतायी। उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश के विकास में जागरूक नागरिकों द्वारा ईमानदारी के साथ टैक्स के रूप में दिये गये सहयोग की बड़ी भूमिका रहती है।

आईटीएटी के अध्यक्ष जस्टिस पीपी भट्ट ने कहा कि इस सर्किट बैंच की स्थापना से राज्य के करदाताओं को लाभ होगा। इस बैंच की दिल्ली से राज्य में सम्बन्घित 880 अपीलों के दस्तावेज यहां लाये गये है। इनका शीघ्र निस्तारण हो इसका उन्होंने आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इस बैंच को और अधिक जनोपयोगी बनाये जाने तथा कार्य निर्वहन में आई टी का अधिकतम उपयोग का उनका प्रयास रहेगा।

अनाथ बच्चों को 5 प्रतिशत आरक्षण देगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के वैष्णो माता मंदिर, पोस्ट ऑफिस चैक नत्थनपुर में रूपये 96.33 लाख की लागत से नलकूप निर्माण कार्य, रूपये 96.01 लाख लागत से ग्राम पंचायत नत्थनपुर में नलकूप निर्माण कार्य का शिलान्यास, अम्बेडकर बस्ती नत्थनपुर में रूपये 97.11 लाख की लागत से नलकूप निर्माण कार्य का लोकार्पण एवं मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा नत्थनपुर में सामुदायिक भवन एवं मिलन केन्द्र निर्माण कार्य का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया।
अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि क्षेत्र से लगे सैयद नाले के शेष बचे कार्यों को शीघ्र ही पूर्ण किया जाएगा, जिसमें लगभग 4.5 करोड़ रूपये की लागत आएगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की पानी की समस्या को दूर करने के लिए इन निर्माण कार्यों को ससमय पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देहरादून के आसपास के क्षेत्र की पानी की समस्या को दूर करने के लिए सूर्यधार झील का कार्य किया जा रहा है। इससे क्षेत्र के 29 गांवों को गुरूत्व आधारित पीने का पानी उपलब्ध होगा। इसके साथ ही, सौंग बांध हेतु भूमि की व्यवस्था हो गयी है। प्रभावितों के विस्थापन के तुरन्त बाद इसके निर्माण का कार्य प्रारम्भ कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बांध के निर्माण का कार्य 350 दिनों में पूर्ण किया जाएगा।

सैनिकों के लिए उनका आई कार्ड ही प्रवेश पत्रः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक देश का गौरव हैं। राज्य सरकार सैनिकों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री आवास एवं सचिवालय में सैनिकों के प्रवेश के लिए उनके आई कार्ड को मान्यता दे दी गयी है। अब कोई भी सैनिक अपना आई कार्ड दिखा कर सचिवालय में प्रवेश कर सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा परम विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली धनराशि को 15 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रूपये किया गया है। इसी प्रकार अति विशिष्ट सेवा मेडल की धनराशि को भी 7 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार किया गया है। सेना मेडल प्राप्त सैनिकों को 1 लाख रूपये दिए जाएंगे। इसी प्रकार विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त सैनिक को दी जाने वाली धनराशि को 3 हजार से बढ़ाकर 75 हजार किया गया है। उन्होंने कहा कि अनाथ बच्चों 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें कौशल विकास कार्यक्रमों से भी जोड़ा जाएगा।

अनाथ बच्चों को भी 5 प्रतिशत आरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में अनाथ बच्चां के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की है। इससे राजकीय अनाथालयों में रह रहे अनाथ बच्चों को रोजगार प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। इस वर्ष महिलाओं के लिए 5100 किओस्क की व्यवस्था की जाएगी, ताकि महिलाएं अपने पैरों में खड़ी हो सकें। महिलाओं को मजबूती प्रदान करने के लिए एकल महिलाओं को बिना ब्याज के 1 लाख रूपये एवं महिला समूहों को बिना ब्याज के 5 लाख रूपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

कलेक्ट्रेट होंगे ऑनलाइन
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कलेक्ट्रेट को ऑनलाइन किया जायेगा जिससे आम जनता को पेपर लैस सुविधा प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सुविधा के माध्यम से आम जनमानस की समस्याओं का निस्तारण करने में आसानी होगी तथा साथ ही लोगों की समस्याओं को ट्रेस कर यथा समय निराकरण करने में भी मदद मिल सकेगी।

युवाओं को तरजीह देगी सरकार, युवा आयोग का गठन करने की तैयारी में सरकार

राज्य सरकार ने युवा वर्ग के हितों का संरक्षण करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत राज्य में युवा आयोग का गठन किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो आयोग के गठन का मकसद युवा शक्ति के सर्वांगीण विकास के साथ ही रोजगार के अवसरों का सृजन करना है। प्रस्तावित युवा आयोग का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इसे कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
बताया जा रहा कि उत्तराखंड में युवाओं की संख्या काफी ज्यादा है। अगर मतदाताओं के लिहाज से आकलन करें तो 18 से 39 वर्ष तक के युवा वर्ग का हिस्सा 55 फीसद से ज्यादा है। राजनीतिक नजरिये से देखे तो युवा तबका उत्तराखंड में एक बड़े वोट बैंक की भूमिका में है। राज्य में दो साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं, लिहाजा सरकार अब इन्हें लक्ष्य कर भावी योजनाओं को आकार दे रही है। युवाओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार ही है, इसलिए आने वाले दो वर्षों में सरकार का फोकस ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने पर है। प्रस्तावित युवा आयोग का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण उद्देश्य भी यही है।
यूं तो उत्तराखंड में युवा नीति वर्ष 2011 से ही वजूद में है लेकिन अब इसमें कुछ अहम संशोधन किए जाने की तैयारी है। दरअसल, पिछले साल संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) का एक प्रतिनिधिमंडल उत्तराखंड आया था। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के विभिन्न विभागों, गैर सरकारी संस्थाओं और सिविल सोसायटी के सदस्यों से विचार-विमर्श किया। इसकी रिपोर्ट के आधार पर अब प्रदेश में संशोधित युवा नीति पर काम चल रहा है। अब नीति में युवा कल्याण विभाग को नोडल विभाग बनाने की तैयारी है। सभी विभाग अपने यहां युवा विकास की कार्ययोजना बनाने के साथ ही इसका अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। इनके बीच आपसी समन्वय बनाने का काम युवा कल्याण विभाग करेगा।
संशोधित युवा नीति के मुताबिक ही अलग युवा आयोग का गठन किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक आयोग में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के अलावा लगभग आधा दर्जन सदस्य शामिल किए जाएंगे। इनमें विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों को तरजीह दी जाएगी। यह भी संभव है कि स्वयं मुख्यमंत्री युवा आयोग के पदेन अध्यक्ष हों। युवा आयोग के गठन से पहले सभी विभागों को युवाओं के विकास के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। युवा आयोग के जरिये रोजगार के साथ ही विकास में युवाओं की भूमिका सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार युवा आयोग के गठन के संबंध में गंभीरता से विचार कर रही है। संभवतया इस तरह के आयोग का गठन करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य होगा। युवाओं के चहुंमुखी विकास और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।