10 करोड़ रूपए की लागत से तैयार हो रहा ट्रांजिट कैंप

विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा जाने वाले पर्यटकों के लिए पर्यटन विभाग की भूमि पर ट्रांजिट कैंप- रजिस्ट्रेशन कार्यालय का निर्माण कार्य इन दिनों तीव्र गति से जारी है। इसे पर्यटकों की मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखकर 10 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है। कार्यदायी संस्था के अनुसार कैंप का कार्य अगले वर्ष 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा।

2013 की आपदा के बाद राज्य सरकार ने यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए ट्रांजिट हॉस्टल योजना पर काम करना शुरू किया। चंद्रभागा और गोपालनगर से लगती 3.70 हेक्टेअर वन भूमि को जनवरी 2019 में पर्यटन विभाग को ट्रांसर्फर किया गया। करीब साल बीतने के बाद आखिरकार पिछले कुछ दिनों पूर्व कार्यदायी संस्था बिडकुल ने यहां में काम शुरू कर दिया है। वर्तमान में 45 मीटर लंबी और चौड़ी बिल्डिंग निर्माण के लिए खुदाई का कार्य पूरा हो चुका है। बिडकुल के जेई राहुल ने बताया कि पर्यटन विभाग के निर्देश पर ट्रांजिट कैंप का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। मौसम आदि का कोई व्यवधान नहीं हुआ तो जुलाई 2021 तक ट्रांजिट कैंप का कार्य पूरा हो जाएगा।

ट्रांजिट कैंप का निर्माण भूतल, प्रथम और घ्द्वितीय तल में होगा। इसमें भूतल में दो मल्टीपल टिकट काउंटर होंगे। इसमें महिला, पुरूष के अलावा सिनियर सिटीजन और विकलांगों के लिए अलग से सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा इसी तल में बैंक व एटीएम सुविधा भी उपलब्ध होगी। पर्यटन विभाग और चारधाम यात्रा से जुड़ा संयुक्त रोटेशन का कार्यालय भी यहां होगा। प्रथम तल में दुकानें लगेंगी। इन दुकानों में यात्रियों के लिए भोजन आदि सुविधाएं उपलब्ध होंगी। द्वितीय तल मेें यात्रियों के लिए ठहरने की व्यवस्था होगी। करीब एक समय में 150 यात्री यहां ठहर सकेंगे। इसके अलावा यहां 250 बसों के लगभग पार्किंग की सुविधा भी होगी।

यदि तैरना सीखना है तो तालाब में जाना पड़ेगाः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि आत्म सुरक्षा की दृष्टि से महिलाओं का शारिरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। इससे उनके मन में अपनी असुरक्षा का भाव समाप्त होगा तथा आत्म विश्वास मजबूत होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी पहल भी स्वयं उन्हें करनी होगी क्योंकि यदि तैरना सीखना है तो तालाब में जाना ही पड़ेगा।

शुक्रवार को डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून में आयोजित दो दिवसीय ‘‘सेल्फ डिफेंस वर्कशाप फार गर्ल्स’’ से सम्बन्धित कार्यशाला को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय जूडो-कराटे एवं अन्य सुरक्षा से सम्बन्धित उपायों के प्रशिक्षण से छात्राओं में आत्म विश्वास एवं आत्म सुरक्षा का भाव जागृत होगा। उन्होंने कहा कि जब भी महिलाओं से सम्बन्धित कोई कार्यक्रम होता है तो वहां पर महिलाओं की सुरक्षा की बात भी जरूर होती है। यह महिलाओं के सम्मान से जुड़ा विषय भी है। महिलाओं के अन्दर आत्म सुरक्षा का भाव जागृत हो इसके लिए उनका शारिरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। उन्हें आत्म सुरक्षा के विभिन्न विषयों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने छात्राओं से अपेक्षा की कि वे शारिरिक व्यायाम योग, मार्शल आर्ट आदि के लिए प्रतिदिन एक घंटा अवश्य निकालें। इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, इससे उन्हें अपने को फिट रखने में भी मदद मिलेगी। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने विद्यालय में स्थापित शौर्य दीवार पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को नमन किया।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उपाध्यक्ष उच्च शिक्षा उन्नयन समिति दीप्ति रावत ने कहा कि आज लड़कियों के साथ ही लड़कों को भी अच्छे व्यवहार एवं नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता की सीख देने की जरूरत है। इसके लिए परिवार के जिम्मेदार लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने छात्राओं को सजग एवं सतर्क रहते हुए ऊँचे मनोबल के साथ आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने कहा कि छात्राओं को निडर होकर अपनी बात रखनी चाहिए इसके लिए यदि जरूरत पड़े तो उन्हें महिला सुरक्षा हेतु उपलब्ध विभिन्न हैल्प लाइनों एवं पोर्टलों का भी उपयोग करना चाहिए।
मेयर सुनील अनियाल गामा ने कहा कि नगर निगम द्वारा गांधी पार्क के साथ ही नगर के 100 वार्डों में भी जिम बनाये जायेंगे ताकि हमारे लोग शारिरिक रूप से स्वस्थ रहें। उन्होंने सभी से देहरादून को सुन्दर व स्वच्छ बनाने तथा शहर प्लास्टिक मुक्त बनाने में भी मददगार बनने की अपेक्षा की।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सिविल डिफेंस की असस्टिन्ट डिप्टी कमाण्डेंड जनरल एकता उनियाल ने कहा कि सेल्फ डिफेंस आज वक्त की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आत्म सुरक्षा के उपयोग सम्बन्धी प्रशिक्षण उन्हें मजबूत बनायेंगे। छात्राओं को हर परिस्थिति का सामना करने के लिये अपने को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि सिविल डिफेंस द्वारा दिये जाने वाला प्रशिक्षण भी उन्हें आत्म विश्वास बढ़ाने में मददगार होगा।

रिस्पना नदी की अध्ययन रिपोर्ट की शीघ्र डीपीआर तैयार किया जाएः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रिस्पना को ऋषिपर्णा नदी के स्वरूप में लाने के लिये किये जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच), रूड़की की ओर से रिस्पना नदी के सम्पूर्ण क्षेत्र की भूमि व जल संवर्धन से सम्बन्धित विस्तृत प्रस्तुतिकरण का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनआईएच रुड़की द्वारा तैयार की गई इस विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर शीघ्र डीपीआर तैयार की जाए। ताकि अगले माह तक इसकी निविदा प्रकाशित कर कार्य प्रारम्भ किया जा सके। मुख्यमंत्री ने इस सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित विभागों की संयुक्त बैठक भी आयोजित किये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि रिस्पना का पुनर्जीवीकरण देहरादून शहरवासियों के व्यापक हित से जुडा विषय भी है। इसमें देहरादून के पर्यावरण को संरक्षित करने में मदद मिलेगी तथा भविष्य में जल संकट के समाधान की भी राह प्रशस्त हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारम्भिक चरण में रिस्पना एवं कोसी नदी को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अन्य नदियों को भी पुनर्जीवित किया जायेगा। आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए जल संरक्षण की दिशा में विशेष प्रयासों की उन्होंने जरूरत बतायी। जल संरक्षण के लिए वृक्षारोपण करना जरूरी है। सूखे जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करना हम सबका दायित्व है।

रिस्पना नदी का देहरादून से अनूठा रिश्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून शहर के मध्य से गुजरती हुयी रिस्पना नदी का देहरादून के साथ एक अनूठा रिश्ता भी है। मिशन ऋषिपर्णा देहरादून वासियों के पास एक मौका है इस नदी को उसके पुराने अविरल स्वरूप में वापस लाने का। शहर के संतुलित विकास हेतु समय की मांग है कि रिस्पना को पुनर्जीवित किया जाए। हमारे वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए यह आवश्यक पहल भी है। उन्होंने कहा कि रिस्पना के उद्गम क्षेत्र में किये गये व्यापक वृक्षारोपण से हरियाली होगी और भूजल स्तर में भी वृद्धि होगी। यह हमारे लिए प्रकृति की सुंदरता की सौगात भी होगी।

बनेंगे 19 छोटे चैक डेम
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी, रूड़की की अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया है रिस्पना नदी क्षेत्र के 53.45 कि0मी0 केचमेंट एरिया के इस क्षेत्र में 19, छोटे चैक डेम तैयार किये जायेंगे। जल की गुणवत्ता के लिये बेहतर उपचार की व्यवस्था के साथ ही तालाबों के निर्माण एवं सतही जल के प्रबन्धन पर ध्यान दिया जाना होगा। इस क्षेत्र में वाटर हारवेस्टिंग पर ध्यान देने, नदी क्षेत्र के आस पास एसटीपी के निर्माण के साथ ही सौंग बांध से भी इसमे जल उपलब्धता की बात कही गई है।

मेरी यात्रा एप से यात्रियों को मिली सुविधाः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को आपदा प्रबंधन विभाग के सौजन्य से एसडीआरएफ द्वारा निर्मित एप्प ‘मेरी यात्रा’ का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एसडीआरएफ द्वारा आपदा प्रबंधन एवं यात्रियों की सुविधा की दृष्टि से उत्कृष्ट एप्प बनाया गया है। आज के आईटी युग में लोगों को ऑनलाइन सम्पूर्ण जानकारी की मांग होती है। उन्होंने कहा कि इस एप्प में उत्तराखण्ड के विशिष्ट स्थानों के बारे में भी जानकारी दी जाय।

उन्होंने कहा कि यह एप उत्तराखण्ड में पर्यटन क्षेत्रों की जानकारी एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित जानकारियों का अपडेट मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस एप्प के माध्यम से जिस स्थान एवं क्षेत्र के चित्रों को दर्शाया जा रहा है, उस स्थान एवं क्षेत्र का पूरा विवरण दिया जाय। जो प्रमुख मंदिर एवं विशिष्ट चीजें सिर्फ उत्तराखण्ड में हैं, उनको भी इस एप्प में शामिल किया जाए।

कमांडेंट एसडीआरएफ तृप्ति भट्ट ने कहा कि इस एप्प में यात्रियों को सूचनाएं एवं सुविधाएं एक साथ उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। एप्प के माध्यम से यात्रियों को अपने निकटवर्ती क्षेत्रों में होम स्टे, प्रमुख स्थलों, आपातकालीन नम्बर, अतिथि गृह, प्रमुख पर्यटक एवं अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि इस एप्प में कई और फीचर जोड़े जायेंगे। जिससे यात्रियों के लिए और सुगमता हो।

अब 25 नहीं 31 जनवरी तक बन सकेंगे आयुष्मान गोल्डन कार्ड

मेयर अनिता ममगाईं ने गोल्डन कार्ड बनाने से वंचित रह गए लोगों के लिए सौगात दी है। उन्होंने 25 जनवरी तक चलने वाले शिविर को 31 जनवरी तक चलाने का निर्णय लिया है। इस पर अटल आयुष्मान योजना के चैयरमैन ने शिविर की तिथि आगे बढ़ाने की संस्तुति दे दी है। शिविर आगे बढ़वाने को लेकर नगर की जनता ने मेयर का आभार प्रकट किया हैं।

पिछले करीब एक पखवाड़े से नगर निगम में गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए शहर के विभिन्न वार्डो से लोगों की जबरदस्त भीड़ उमड़ रही थी। गोल्डन कार्ड बनवाने की अतिंम तिथि नजदीक आते ही अब तक कार्ड बनवाने से वंचित रह गये लोगों द्वारा मेयर अनिता ममगाईं से शिविर की तिथि आगे बढ़ाने की गुहार लगाई’ जा रही है। इस पर मेयर ने योजना चेयरमैन दिलीप कोटियाल से बात कर और उन्हें बताया’ की तमाम प्रयासों के बावजूद अभी भी हजारों लोगों के गोल्डन कार्ड नहीं बन पाये हैं। कोई भी व्यक्ति केन्द्र सरकार की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना का लाभ उठाने से वंचित न रह जाये इसके लिए कुछ दिन और कैम्प लगाने की अनुमति प्रदान की जाए।

मेयर अनिता ममगाईं की तमाम बातों का तुरंत संज्ञान लेते हुए पूर्व निर्धारित तिथि 25 जनवरी से बढ़़ाकर 31 जनवरी तक कैम्प जारी रखने के निर्देश योजना चेयरमैन ने दिए हैं। मेयर ने बताया कि अटल आयुष्मान योजना का गोल्डन कार्ड बनाने के लिए चल रहा विशेष अभियान अब 25 जनवरी के बजाए 31 जनवरी तक चलेगाा। अटल आयुष्मान योजना में पात्र लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाने में तेजी लाने के लिए भी कैम्प में कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने बताया कि योजना में पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा प्राप्त करने के लिए पात्र लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड बनाना अनिवार्य है। तीर्थ नगरी में लाभार्थियों का कार्ड बनाने के लिए अभियान की समय सीमा बढ़़ाई गई है।

मुख्यमंत्री ने एक माह में सभी विभागों को पलायन रोकने के लिए कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य के चयनित ब्लॉकों में पलायन पर केंद्रित विशेष योजना संचालित करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने माइग्रेशन मिटीगेशन फंड स्थापित करने और एक माह में सभी विभागों को पलायन को रोकने के लिए कार्ययोजना प्रस्तुत करने को भी कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भू-अभिलेखों में महिलाओं का नाम प्राथमिकता के आधार पर दर्ज किया जाये। इको-टूरिज्म पॉलसी को शीघ्र अमलीजामा देने के भी निर्देश दिये। विश्वकर्मा भवन, सचिवालय में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन को लेकर आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने यह बातें कही।
सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए बनें फ्लेक्सीबल योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों पर खास फोकस किया जाए। वहां पलायन को रोकने बनाई जाने वाली योजनाएं फ्लेक्सीबल हों। कोशिश की जाए कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले अधिक से अधिक स्थानीय लोग वहां रहने के लिए प्रेरित हों। सामरिक संवेदनशीलता को देखते हुए यह बहुत जरूरी है।
भू-अभिलेखों में महिलाओं का नाम भी दर्ज किए जाने की व्यवस्था हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के गांवों में महिलाओं का अनुपात अधिक है। गांवों में संचालित योजनाओं को महिला केंद्रित हों। जरूरी है भू-अभिलेखों में उनका नाम भी दर्ज हो। इससे उन्हें कृषि, पशुपालन, स्वरोजगार आदि के लिए ऋण मिलने में आसानी रहेगी। राजस्व विभाग इसके लिए आवश्यक प्रावधान करे।
इको टूरिज्म पॉलिसी जल्द से जल्द बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग को इको टूरिज्म पॉलिसी जल्द से जल्द बनाने के लिए निर्देशित किया। इको टूरिज्म के लिए वन विभाग व पर्यटन विभाग आपसी समन्वय से काम करें। उन्होंने कहा कि होम स्टे को दूसरी पर्यटन गतिविधियों व मार्केट से लिंक किया जाए। होम स्टे करने वालों को हॉस्पिटेलिटी के प्रशिक्षण की व्यवस्था हो। एडवेंचर स्पोर्ट्स को प्राथमिकता दी जाए। पर्यटन विभाग एक मोबाईल एप बनाए जिसमें जिलावार वहां के वन्य जीवन, वनस्पति, पर्यटन स्थलों, ट्रेकिंग स्थलों, होटल, होम स्टे आदि की जानकारी मौजूद हो।
ग्रामीण क्षेत्रों में फील्ड स्टाफ की कमी को दूर करने की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों में फील्ड स्टाफ की कमी को दूर करने की आवश्यकता है। पेयजल की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान देना होगा। किसानों की आय दुगुनी करने के लिए ऑफ सीजन सब्जियों के उत्पादन, मत्स्य पालन, बकरी पालन, फ्लोरीकल्चर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। क्लस्टर बेस्ड एप्रोच अपनानी होगी। एमएसएमई के तहत पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं को स्वरोजगार के लिए लघु ऋणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
रेखीय विभाग करें गैप एनालिसिस
मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन से सर्वाधिक प्रभावित गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा आदि रेखीय विभाग गैप एनालिसिस करें। और जहां कमी नजर आती है, उसे प्राथमिकता से दूर किया जाए। एक माईग्रेशन मिटिगेशन फंड स्थापित किया जाए। राज्य के चिन्हित ब्लॉकों में पलायन पर केंद्रित विशेष योजना संचालित की जाए। मुख्यमंत्री सीमावर्ती क्षेत्र विकास योजना को फ्लेक्सीबल बनाया जाए। सभी विभाग पलायन को लेकर एक माह में कार्ययोजना बनाकर प्रस्तुत करें।
उत्तराखण्ड ग्रामीण विकास व पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने बताया कि राज्य के 36 विकासखण्ड चिन्हित किए गए हैं जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन की अधिक समस्या रही है। इनमें अल्मोड़ा के 7, बागेश्वर के 1, चमोली के 5, पौड़ी के 12, पिथौरागढ़ के 5, रूद्रप्रयाग का 1 और टिहरी के 5 ब्लॉक शामिल हैं। गांवों से निकटवर्ती छोटे कस्बों में बसने की प्रवृत्ति देखने को मिली है। योजनाओं को महिला केंद्रित किए जाने की जरूरत है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मार्केट से लिंक करना होगा। कई क्षेत्रों में बकरी पालन आय का बड़ा जरिया बना है।

रानी लक्ष्मीबाई चौक के नाम से जाना जाएगा चौदहबीघा चौक

यत्र नारिस्तु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवता, जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते है। लोगों में नारियों के प्रति सम्मान जगाने के लिए चौदहबीघा पुल चौक पर 10 फीट ऊंची रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा लगाने जा रही है। इससे चौदहबीघा पुल चौक को भी रानी लक्ष्मीबाई चौक के रूप में भी पहचान मिलेगी। इस वहन नगर पालिका मुनिकीरेती करेगी।

नगर पालिका परिषद मुनिकीरेती-ढालवाला के वार्ड संख्या सात के सभासद गजेन्द्र सजवाण ने बताया कि वर्तमान में नारियों के प्रति सम्मान लोगों में कम हो रहा है, जबकि देश को आजाद कराने में नारियों की भी अहम भूमिका रही है। यही बात पर उन्होंने अपने वार्ड में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने वाली वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा लगाने की ठानी और बोर्ड की पहली ही बैठक में इसका प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी सहित बोर्ड के सभी सदस्यों ने सर्व सहमति से पास कर दिया। बैठक में तय हुआ कि प्रतिमा 10 फीट ऊंची रहेगी और इसे चौदहबीघा पुल चौके समीप लगाया जाएगा। प्रतिमा का निर्माण जयपुर राजस्थान में किया जा रहा है।

सभासद ने बताया कि प्रतिमा लगाने का मकसद प्रत्येक नागरिक खासतौर पर युवाओं में नारियों के प्रति सम्मान जगाना है। उन्होंने बताया कि प्रतिमा के चारों और फैंसी लाइटें लगाई जाएंगी। इससे यह सेल्फी प्वाइंट के रूप में भी विकसित हो सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रतिमा लगाने में करीब 15 लाख रुपए खर्च होंगे। सभासद गजेन्द्र सजवाण ने प्रतिमा लगाने के लिए पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी और अधिशासी अधिकारी बद्री प्रसाद भट्ट का आभार व्यक्त किया है।

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश दु्रत गति से अग्रसरः भगतसिंह

राज्यपाल महाराष्ट्र भगत सिंह कोश्यारी और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को नवी मुम्बई में संयुक्त रूप से राज्य अतिथि गृह एवं एम्पोरियम ‘‘उत्तराखण्ड भवन‘‘ का लोकार्पण किया।
राज्यपाल महाराष्ट्र भगत सिंह कोश्यारी ने उत्तराखण्ड भवन के निर्माण के लिए उत्तराखण्ड वासियों को बधाई व शुभकामनाएं दी। उन्होंने मकर सक्रांति की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश द्रुत गति से प्रगति कर रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का नेतृत्व में उत्तराखण्ड राज्य आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऑल वेदर रोड व हवाई सेवा के विकास से कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अपने गाँवों से जुड़े रहने से हम अपनी संस्कृति को भी संरक्षित रख सकेंगे।

मराठी और उत्तराखंड की भाषा में समानता
राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने कहा कि मराठी और उत्तराखण्ड की भाषा में भी समानता है, जो हमें एकत्व का बोध कराती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में दोनों राज्यों के लोगों को एक दूसरे की संस्कृति को निकट से जानने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि मकर सक्रांति के पावन पर्व पर उत्तराखण्ड भवन का लोकार्पण व शुभारम्भ उत्तराखण्ड व महाराष्ट्र के लिए सांस्कृतिक व आर्थिक क्षेत्र में एक नई क्रान्ति का प्रारम्भ है।

उत्तराखंड भवन प्रदेश के लोगों के लिए सदैव खुले रहेंगे
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि मकरैण पर्व के अवसर पर लोकार्पित उत्तराखण्ड भवन निश्चित रूप से राज्य के सम्मान का प्रतीक साबित होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड भवन के द्वार प्रदेश व प्रदेश के बाहर के लोगों के लिए सदैव खुले रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उत्तराखण्ड भवन में दो कमरे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के रोगियों के तीमारदारों के लिए आरक्षित रहेंगे। आधुनिक और नए जमाने के डिजाइन से बना उत्तराखंड भवन मुम्बई आने वाले उत्तराखंड वासियों को सुविधा देने के साथ प्रवासी उत्तराखंडियों को प्रदेश से जोड़ने में मददगार साबित होगा। उत्तराखण्ड भवन में उत्तराखण्ड के उत्पाद भी उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही, पर्यटकों एवं निवेशकों की सहायता हेतु इनमें कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। 39 करोड़ 73 लाख रूपए की लागत से निर्मित चार मंजिला उत्तराखंड भवन में 40 कमरे हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने बताया कि देश की औद्योगिक राजधानी में उत्तराखंड भवन बनने से प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को भावी निवेशकों तक ले जाने के अलावा फिल्म शूटिंग और पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखण्ड की ओर फिल्म इंडस्ट्री का रूझान बढ़ा है। उत्तराखण्ड को हाल ही में बेस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का अवार्ड प्राप्त हुआ है। फिल्म कॉन्क्लेव के आयोजन के बाद मिले सुझावों के अनुसार अवस्थापना सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। जिसके चलते उत्तराखण्ड में लगभग 200 से अधिक विभिन्न भाषाओं की फिल्मों और सीरियल्स की शूटिंग चल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने छोटे-छोटे ग्रामों को मोटर मार्गों से जोड़ा है। राज्य को रोड कनेक्टिविटी और विलेज कनेक्टिविटी के क्षेत्र में 10 अवार्ड प्राप्त हुए हैं। राज्य के घर-घर को बिजली पहुंचायी जा चुकी है। देश के पहले तीन ओडीएफ राज्यों में उत्तराखण्ड शामिल है। उन्होंने कहा कि नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिये राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। कोसी और रिस्पना नदियों के पुनर्जीवीकरण का कार्य चल रहा है।

10 फरवरी से ड्रोन से होगी राज्य के मगरमच्छ और घड़ियालों की गिनती

10 फरवरी से राज्य में मगरमच्छों और घड़ियालों की गिनती ड्रोन कैमरे से हो सकेगी। दस दिन के भीतर यह काम पूरा हो जाने की उम्मीद है। इसी के साथ उत्तराखंड देश में पहला ऐसा राज्य बन जाएगा जहां मगरमच्छ और घड़ियालों की गिनती ड्रोन से होगी।

वन विभाग ड्रोन फोर्स नेपाल और उत्तर प्रदेश की सीमा के अंदर उत्तराखंड के चार वन वृत्त में काम करेगी। नेपाल सीमा से सटी शारदा नदी, हरिद्वार के शिवालिक वृत्त, राजाजी टाइगर रिजर्व और कार्बेट पार्क के 6370 वर्ग किलोमीटर में लगभग 12 साल बाद मगरमच्छ व घड़ियाल की गणना करेगा। गणना में राज्य की नदियों, झीलों, दलदल में छोटे और हाई क्वालिटी ड्रोन कैमरों की सहायता ली जाएगी। शारदा नदी, गोला नदी, गंडोर टुंबड़िया, रामगंगा, नानक सागर, बाण गंगा, कालागढ़ जलाशयों में पानी के बहाव के अनुरूप ड्रोन कैमरों को फिक्स किया जाएगा। इन कैमरों की प्रतिदिन की वीडियोग्राफी का विश्लेषण किया जाएगा। मगरमच्छ और घड़ियालों की गणना के बाद वन विभाग की ड्रोन फोर्स पूरे उत्तराखंड के वन क्षेत्र की निगरानी करेगा। उत्तराखंड में मगरमच्छ और घड़ियाल की गणना वर्ष 2008 में की गई थी। तब गणना में सामने आया था कि प्रदेश में 123 मगरमच्छ व 223 घड़ियाल हैं।

प्रभागीय वनाधिकारी हरिद्वार आकाश वर्मा बताते है कि ड्रोन का इस्तेमाल मगरमच्छों की गणना में किया जाएगा। इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। हालांकि हरिद्वार वन प्रभाग में दो साल से निजी ड्रोन की मदद ले रहे हैं।

डॉ. धकाते ने बनाई थी ड्रोन फोर्स
देशभर में उत्तराखंड ने सबसे पहले ड्रोन फोर्स बनाई है। ड्रोन फोर्स बनाने का श्रेय वन संरक्षक कुमाऊं जोन डॉ. पीएम धकाते को जाता है। डॉ. पीएम धकाते ड्रोन फोर्स के जन्मदाता एवं समन्वयक हैं। उनका दावा है कि ड्रोन फोर्स वन तस्करी रोकने और वनों की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगी। पर्यावरण मित्र रविंद्र मिश्रा का कहना है कि ड्रोन फोर्स इस कार्य में शत प्रतिशत परिणाम देगी। ड्रोन फोर्स से वनों की सुरक्षा में मदद तो मिलेगी और जल्दी नतीजे प्राप्त होंगे।

किसानों को बिना ब्याज के ऋण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि पर्वतीय खेती के लिए सिंचाई की सुविधा पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इसके लिए जलाशय विकसित करने हांगे। क्लस्टर आधारित खेती और जैविक उत्पादों के सर्टिफिकेशन की व्यवस्था भी किसानों की आय को बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है। मुख्यमंत्री एक स्थानीय होटल में नाबार्ड द्वारा आयोजित स्टेट क्रेडिट सेमिनार 2020-21 में सम्बोधित कर रहे थे।

जलाशय संवर्धन के लिए राज्य सरकार ने की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड भौगोलिक विषमताओं वाला प्रदेश है। पर्वतीय खेती अधिकांशतः असिंचित है। लिफ्ट सिंचाई बहुत खर्चीली होती है। इसलिए ग्रेविटी आधारित पेयजल व सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति के लिए जलाशयों का निर्माण जरूरी है। सूखते जलस्त्रोतों को देखते हुए वर्षा जल संचयन महत्वपूर्ण है। नदियों के पुनर्जीवन के लिए भी जलाशय आवश्यक हैं। चाल-खाल भी बचाने होंगे। राज्य सरकार ने इस दिशा में शुरूआत की है। पिथौरागढ़, चम्पावत, अल्मोड़ा, पौड़ी, चमोली, देहरादून आदि जिलों में जलाशय व झीलें विकसित की जा रही हैं। इसका आने वाले समय में बहुत फायदा होगा। इन जलाशयों के निर्माण की फंडिंग के लिए नाबार्ड को आगे आना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय को बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुत सी कोशिशें प्रारम्भ की गई है। किसानों को व्यक्तिगत रूप से 1 लाख तक व समूह को 5 लाख तक का कृषि ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है।

वैल्यु एडिशन पर जोर
उत्पादों के वैल्यु एडिशन पर विशेष बल दिया जा रहा है। प्राकृतिक रूप से उपलब्ध फाईबर कंडाली और इंडस्ट्रीयल हैम्प आधारित उत्पादों की वैश्विक बाजार में बहुत मांग है। इनसे तैयार किए जाने वस्त्रों की अच्छी कीमत मिलती है। एरोमैटिक्स की भी उत्तराखण्ड में काफी सम्भावनाएं हैं।

जैविक उत्पादों का सर्टिफिकेशन
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड के कृषि व संबंधित उत्पाद स्वाभाविक रूप से जैविक हैं। इनके सर्टिफिकेशन की सही तरीके से व्यवसथा करनी होगी। किसानों को भी इसकी जानकारी देनी होगी।

उत्तराखण्ड को कृषि क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में मिले पुरस्कार
कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने खेती के क्षेत्र में कई पहल की है। यही कारण है लगातार दो बार कृषि कर्मण पुरस्कार सहित पिछले 2 वर्षों में 6 पुरस्कार उत्तराखण्ड को मिले हैं। आर्गेनिक खेती में हम काफी आगे बढ़ चुके हैं।

हार्टीकल्चर के लिए काश्तकारों को मिले मध्यम व दीर्घ अवधि के ऋण
हॉर्टीकल्चर के लिए काश्तकारों के अल्पावधि के साथ ही मध्यम व दीर्घ अवधि के ऋण उपलब्ध कराने होंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में नहरों की मरम्मत और जंगली जानवरों से बचाने के लिए खेतों की फेंसिंग भी जरूरी है। किसानों के उत्पाद खराब न हों, इसके लिए शीतगृहों की व्यवस्था करनी होगी।

उत्तराखण्ड के प्राथमिकता क्षेत्र हेतु 24,656 करोड़ रूपए की ऋण सम्भाव्यता आंकलित
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक सुनील चावला ने बताया कि वर्ष 2020-21 के लिए नाबार्ड द्वारा उत्तराखण्ड की प्राथमिकता क्षेत्र हेतु कुल ऋण सम्भाव्यता 24,656 करोड़ रूपए आंकलित की गई है। जबकि वर्ष 2019-20 में यह 23,423 करोड़ रूपए थी। इस वर्ष के स्टेट फोकस पेपर का विषय ‘उच्च तकनीकी से कृषि’ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 के लिए नाबार्ड द्वारा उत्तराखण्ड की कुल ऋण सम्भाव्यता 24,656 करोड़ रूपए आंकलित की गई है। इनमें से लगभग 11,802 करोड रूपए की कृषि ऋण सम्भाव्यता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विभिन्न गैर सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, बैंकों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया।