उत्तराखंड ग्रामीण क्षेत्र में शौच से मुक्त होने वाला चौथा राज्यः त्रिवेन्द्र

राज्यपाल डॉ.कृष्ण कान्त पाल एवं मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ’स्वच्छता ही सेवा‘ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। स्वच्छता अभियान के व्यापक प्रचारप्रसार एवं जन जागरूकता के लिए राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने गढ़वाल एवं कुमांऊ के लिए एकएक स्वच्छता रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। राज्यपाल ने कहा कि जन और देश हित में 02 अक्टूबर 2014 को सम्पूर्ण भारत में स्वच्छता की शपथ ली गई। उसके बाद समयसमय पर स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से ऊर्जा देने की आवश्यकता है। ताकि स्वच्छता मिशन के लक्ष्य में किसी भी प्रकार का भटकाव न आए। राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन सालों में विश्वविद्यालयों ने स्वच्छता अभियान पर अच्छा कार्य किया है। गोविन्द बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय ने स्वच्छता के मामले में देश के सभी विश्वविद्यालयों में से प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि अन्य संस्थाओं, स्कूलों को भी इससे प्रेरित होकर इस अभियान को आगे बढ़ाना होगा। इस स्वच्छता पखवाड़े में 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री के जन्म दिवस के अवसर पर सेवा दिवस, 25 सितम्बर को पं.दीन दयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी के अवसर पर सर्वत्र स्वच्छता दिवस एवं 02 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत दिवस के रूप में मनाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन एवं नए भारत के लक्ष्य को हम सबको गम्भीरता से लेना होगा। मोहल्लों एवं गांवों से एम्बेस्डर बनकर इस अभियान को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड ग्रामीण क्षेत्रों में शौच से मुक्त(ओ.डी.एफ) होने वाला देश का चौथा राज्य है। मार्च 2018 तक राज्य के शहरी क्षेत्र को भी पूर्ण रूप से ओ.डी.एफ करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के कार्यक्रमों में सबका योगदान जरूरी है। स्वच्छता मिशन को सफल बनाने के लिए जन सहयोग एवं सहभागिता के साथ ही सबको व्यक्तिगत प्रयास भी करने होंगे। पेयजल मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि पिछले 03 वर्षों से शीर्ष पदाधिकारियों से लेकर गांव के अन्तिम व्यक्ति तक सभी लोग स्वच्छता अभियान से जुड़े हैं। किसी भी अभियान को सफल बनाने के लिए समाज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

राज्य में विद्युत कटौती न्यूनतम करने को हो रहा मूल्यांकन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देशों के क्रम में लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने तथा विद्युत कटौती न्यूनतम करने के उद्देश्य से राज्य में हर दिन प्रत्येक विद्युत वितरण खण्ड में विद्युत आपूर्ति कितनी बार गई व कितनी देर के लिए गई का मूल्यांकन किया जा रहा है। सचिव ऊर्जा राधिका झा ने बताया कि प्रतिदिन विद्युत आपूर्ति रिपोर्ट का अनुश्रवण किया जा रहा है तथा इसके आधार पर विद्युत आपूर्ति गुणवत्ता के क्रियान्वयन को अधिकारियों की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट में शामिल किया जायेगा। इससे अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति में सुधार लाने के लिये व्यक्तिगत रूप से कार्य करना आवश्यक होगा। सचिव झा ने सभी अधीक्षण अभियन्ताओं एवं अधिशासी अभियन्ताओं को निर्देश दिये है कि दैनिक रूप से विद्युत बाधा का अनुश्रवण किया जाय और विद्युत आपूर्ति में कम से कम कटौती की जाय। उन्होंने बताया कि ऊर्जा विभाग द्वारा यह योजना राज्य में प्रथम बार लागू की गई है तथा विभाग द्वारा इस दिशा में विशेष कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है, जिसके फलस्वरूप विगत वर्ष में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में माह अप्रैल से जुलाई(चार माह) में प्रणाली में कुल औसतन विद्युत व्यवधान 268 के सापेक्ष घटकर 241 हो गया है तथा इन विद्युत व्यवधानों की अवधि 12586 मिनट से घटकर 9386 मिनट हो गयी हैं। अतः विगत वर्ष की तुलना में सम्मानित विद्युत उपभोक्ताओं को 3200 मिनट अधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हुई है, यद्यपि ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों के सापेक्ष अभी अपेक्षाकृत कम सुधार आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यृत आपूर्ति में बाधा की सूचना व्यक्ति विशेष द्वारा(मैनवली) दी जाती है तथा शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट से कम विद्युत बाधित सूचना की गणना नहीं की जाती है। उन्होंने बताया कि सभी विद्युत वितरण खण्डों की रेटिंग इन मानकों के आधार पर करना भी प्रारम्भ किया गया है, इससे कमी वाले क्षेत्रों को लक्षित कर विशेष कार्य योजना बनाने तथा क्रियान्वयन में आसानी होगी एवं आपसी प्रतिस्पर्धा से कर्मी स्वयं भी विद्युत आपूर्ति में सुधार हेतु प्रोत्साहित होंगे।

कृषि आय के साथ एलाइड सेक्टर्स में भी फोकस

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ 2022 तक किसानों की आय दो गुनी करने की कार्ययोजना की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जनपदों में क्लस्टरवार कृषि को प्रोत्साहित किया जाय। फसलों की उत्पादकता बढ़ानी होगी, इसके लिये उन्नत किस्म के बीजों तक किसानों की पहुंच बनानी होगी। जिलाधिकारी, क्लस्टर्स के अनुसार वहां पैदा होने वाली फसलों का अध्ययन कर, उन्नत बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करें। सरकार के कई विभाग और विभिन्न परियोजनाएं कृषि तथा एलाइड क्षेत्रों में काम कर रही है, इन सभी को एक समग्र कोआर्डिनेटेड प्रयास करने की जरूरत है। सीएम ने जनपद स्तर पर सभी संबन्धित विभागों की कोर्डिनेशन कमेटी बनाने के निर्देश भी दिये। जिस क्लस्टर में जो फसल या उत्पाद चिन्हित हो उससे जुड़े सेक्टर में लोगों को स्किल डेवलेपमेंट योजना के अन्तर्गत प्रशिक्षित भी किया जाय। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि कृषि आय को दोगुना करने के लक्ष्य हेतु सभी संबन्धित सभी शासनादेशों एवं गाइडलाइन्स का एक संकलन तैयार कर न्याय पंचायत स्तर तक भेजा जाये। उन्होंने हर गांव के लिये एक माइक्रो प्लान और पर्सपेक्टिव प्लान बनाने को भी कहा। प्रमुख सचिव ने कहा कि मनरेगा, आईफैड, ग्राम्या और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के कई प्रावधानों के अन्तर्गत जिलाधिकारी, जनपदों में आजीविका संसाधन सृजित कर किसानों की मदद कर सकते है। कृषि सचिव ने कहा कि सभी जिलाधिकारी, अपने जनपदों में क्लस्टरवार मॉडल डी.पी.आर. बनायें। कृषि विभाग के सहायक कृषि अधिकारी, जो कि कृषि विषय में पोस्ट ग्रेजुएट तक हैं, उनका उपयोग करें। कृषि के साथ एलाइड सेक्टर्स में भी फोकस करें। पुष्प उत्पादन मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन का प्रदेश में बड़ा स्कोप है। उत्तराखण्ड हर वर्ष 125 करोड़ रूपये का शहद निर्यात कर रहा है। इस अवसर पर सभी जिलाधिकारियों ने अपने-अपने जनपदों से प्रस्तावित कार्ययोजना की जानकारी दी।

अब स्थानीय भाषा में भी दर्ज हो सकेगी शिकायत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में समाधान पोर्टल हेतु स्मार्ट आई.वी.आर.(इंटरैक्टिव वॉयस रेस्पॉन्स) सिस्टम के माध्यम से सार्वजनिक शिकायतों को मोबाईल/दूरभाष पर प्राप्त कर उनका निस्तारण किये जाने सम्बन्धी सेवा का शुभारम्भ किया। जन समस्याओं और सुझावों को और अधिक सुगम बनाने के लिए कोई भी व्यक्ति टोल फ्री नम्बर 1905 पर फोन कर अपनी शिकायत या सुझाव को पंजीकृत करा सकते है। इसके लिए शिकायतकर्ता को अपना नाम, पता, मोबाईल नम्बर एवं शिकायत का विवरण देना होगा। शिकायत एन.आई.सी. के पोर्टल पर दर्ज हो जायेगी। उसके बाद शिकायत, सम्बन्धित विभाग को भेजी जायेगी। जिसका सम्बन्धित विभाग द्वारा 10 दिन के अन्दर फीडबैक दिया जायेगा। आईवीआर सिस्टम के तहत एक साथ 15 लोग शिकायत/सुझाव दर्ज करा सकते हैं। इसमें लोग स्थानीय भाषा में भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। जिसके लिए अनुवाद की व्यवस्था भी रहेगी। त्रिवेन्द्र ने कहा कि समाधान पोर्टल पर आई.वी.आर. सिस्टम के होने से जनसमस्याओं के निवारण में तेजी आयेगी। समस्याओं के निवारण के लिए सम्बन्धित विभागों की जिम्मेदारी तय रहेगी। इससे प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की समस्याएं पहुंचेगी तथा सुझाव भी मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अच्छी बात है कि आई.वी.आर. सिस्टम में स्थानीय बोलियों को भी सम्मिलित किया गया है।

ईद उल अजहा में नमाज को खुले गुरूद्वारे

जहां एक और धर्म, मजहब के नाम पर रार मची है। वहीं देवभूमि उत्तराखंड में धार्मिक सहिष्णुता की नजीर पेश हुई है। आदि गुरु शंकराचार्य की तपस्थली जोशीमठ में गुरुद्वारे में ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज मुस्लिम भाईयों ने पढ़ी। बारिश और ठंड को देखते हुए गुरुद्वार प्रबंधन ने नमाज पढ़ने के लिए गुरुवारे के द्वार खोल दिए।
जानकारी के अनुसार चमोली जिले के जोशीमठ में रात भर से भारी वर्षा और ठंड हो रही है। ईद के मौके पर मुस्लिम समाज के लोग नमाज पढ़ना चाहते थे। लेकिन भारी बारिश से खुले मैदान में नमाज पढ़ना मुश्किल हो रहा था। लगभग 600 लोग नमाज अता करने के लिए गांधी मैदान की तरफ आ रहे थे। बारिश और ठंड को देखते हुये जोशीमठ के गुरुद्वारे प्रबंधक ने मुस्लिम भाईयों से गुरुद्वारे में नमाज अता करने के लिए आमंत्रित किया। सभी मुस्लिम समाज के लोगों ने यहां गुरुद्वारे में नमाज पढ़ी। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ईद-उल-अजहा की नमाज पढ़ी। इस दौरान देश की एकता और तरक्की की दुआ मांगी गई। नमाज के बाद अन्य धर्म के लोगों ने भी ईद की मुबारक दी और एक दूसरे के गले लगे।

खुशखबरी! भारत में जल्दी ही टिल्टिंग ट्रेन दिखेगी

स्विटजरलैंड के सहयोग से भारत में टिल्टिंग ट्रेन चलाने की योजना बन रही है। ये ट्रेन घुमावदार रास्तों में अपने आप ही मोटर बाइक की तरह झुक जाएगी। ट्रेन के अपने आप झुकने से यात्रियों को सहूलियत होगी। इस संबंध में भारत सरकार ने स्विट्जरलैंड सरकार के साथ समझौता किया।
टिल्टिंग ट्रेन अभी सिर्फ दुनिया के 11 देशों में चल रही है। टिल्टिंग ट्रेन अभी इटली, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, फिनलैंड, रूस, चेक गणराज्य, ब्रिटेन, स्विटजरलैंड, चीन जर्मनी और रूमानिया में है।
एक अधिकारी ने मीडिया को जानकारी दी कि ट्रेन जब तेज घुमाव या ढाल से गुजरती है कि तो ट्रेन घुमाव के विपरीत दिशा में झुक जाती है। इससे यात्रियों को का बैलेंस बना रहता है, उन्हें झुकना नहीं पड़ता। जैसे कि ट्रेन बाईं ओर मुड़ेगी तो अपने आप ही बाईं ओर कुछ उठ जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐसी ट्रेनें चलाने के बारे में दोनों देशों में समझौता हो चुका है। इस समझौते का लक्ष्य ट्रैक्शन रोलिंग स्टॉक, ईएमयू एवं ट्रेन सेट, ट्रैक्शन प्रणोदन उपकरण, माल और यात्री कारें, टिलटिंग ट्रेन, रेलवे विद्युतीकरण उपकरण आदि क्षेत्रों में सहयोग करना है।
गोवा में विकसित होगी तकनीक
दूसरे समझौते में कोंकण रेलवे कार्पोरेशन लिमिटेड और स्विट्जरलैंड की कंपनी स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के बीच हुआ तो गोवा में स्घ्थापित सुरंग बनाने वाली तकनीकी संस्थान के विकास में मदद मिलेगी।

बच्चों को बेहतर खेल सुविधा मिले, इसके लिये हो रहा है कामः त्रिवेन्द्र

29 अगस्त यानी राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर प्रदेश के मुखिया त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गाँधी पार्क में आयोजित ‘रन फॉर उत्तराखण्ड‘ का हरी झण्डी दिखाकर शुभारम्भ किया। इस अवसर पर सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री बोले राष्ट्रीय खेल दिवस एक ऐसे खिलाड़ी, मेजर ध्यान चंद कीे याद में मनाया जाता है जिसने देश की आन बान और शान के लिये जी-तोड़ मेहनत की। भारत को हॉकी का सरताज बना दिया। कभी हार न मानना, मुश्किलों में बहाना नहीं बनाना, जुझारूपन, लीडरशिप क्वालिटी जैसी बातें हम मेजर ध्यान चंद के जीवन से सीख सकते हैं। ‘रन फॉर उत्तराखण्ड‘ में नौजवानों एवं बड़ी उम्र के लोगों को भाग लेते हुए देख कर बहुत खुशी हो रही है। हम राज्य के विकास के लिये दौड़ें, हम जो भी करें राज्य के लिये करें। हमारे लिये राज्य का विकास ही सर्वोच्च होना चाहिए। आप लोगों के मजबूत इरादे, जोश और खेल भावना को देखकर ही इस रैली को ‘रन फॉर उत्तराखण्ड‘ नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय खेल होने हैं। उसकी तैयारियों के लिये एक महत्वपूर्ण शुरूवात हुयी है। इसके लिये हम आयोजन स्थलों को भी तैयार कर रहे हैं। बच्चों को बेहतर खेल सुविधाएं मिलें, इस पर सरकार गम्भीरता से काम कर रही है। समय-समय पर ऐसे आयोजन होते रहेंगे, ताकि राज्य राष्ट्रीय खेलों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर सके। इस वर्ष यह दौड़ उत्तराखण्ड के लिये हो रही है, अगले वर्ष यह दौड़ देश के लिये होगी। इस अवसर पर खेल मंत्री अरविन्द पाण्डे, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, हरबंस कपूर, खजानदास, शूटिंग टेªनर जसपाल राणा सहित बड़ी संख्या में स्कूलकॉलेजों के छाघ्त्रछात्राएं और एनसीसी कैडेट्स उपस्थित थे।

अच्छा प्रर्दशन करें तो निकायों को मिल सकती है 75 लाख की धनराशि

स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम में स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रथम तीन स्थान पाने वाले नगर निगम, नगर पालिका को क्रमशः 75, 50 एवं 25 लाख रूपये का पुरस्कार दिया जाएगा। यह घोषणा एक स्थानीय होटल में स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन तकनीकी एवं स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्याशाला में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यशाला उत्तराखण्ड में स्वच्छता कार्यक्रम के अभियान को मजबूती देगी। यह हमारे लक्ष्यों को पूर्ण करने में मददगार होगी। उन्होंने कहा कि स्वच्छता कार्यक्रम के लिए मानसिंकता में बदलाव की आवश्यकता, आम व्यक्ति की जागरूकता एवं सहभागिता से यह लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। ठोस अपशिष्ठ एवं प्रबन्धन की दिशा में आधुनिक तकनीक और शोध की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी के माध्यम से हम बडा से बडा लक्ष्य प्राप्त कर सकते है। सरकारी स्तर पर स्वच्छता कार्यक्रम की महत्ता को दर्शाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता के प्रयासों को कर्मचारियों के वार्षिक प्रवृष्टि में अंकित किया जायेगा।
नगर विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि स्वच्छता कार्यक्रम में नवीन तकनीकी के प्रयोग हेतु स्थानीय निकायों को अपनी आमदनी बढाने के प्रयासों पर बल देना होगा। शहरी विकास मंत्री ने कहा कि मार्च 2018 तक शत-प्रतिशत शौचालय ओडीएफ, डोर-टू-डोर कलेक्शन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जायेगा। इसके अतिरिक्त शत-प्रतिशत एलईडी का लक्ष्य प्राप्त किया जायेगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम कि कार्य संस्कृति से अन्य नगर पालिका प्रभावित होती है। इसलिए नगर निगम की जिम्मदारी स्वच्छता के सन्दर्भ में अधिक है।
सचिव शहरी विकास राधिका झा ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वच्छता के कार्यक्रम को लेकर संवेदनशील है। जिलाधिकारियों को साप्ताहिक नगर आयुक्त एवं अधिशासी अधिकारियों, नगर निगम के साथ समीक्षा बैठक करने के निर्देश दिये गये है। राज्य स्तरीय कार्यशाला में स्वच्छता विषय पर शपथ ली गई एवं स्वच्छता कार्यक्रम की एक मार्गदर्शिका पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता विषय के इनोवेटिव टेक्नोलाॅजी के प्रयोग सम्बन्धी देशभर के विशेषज्ञों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी लगायी गयी है।

35वीं बार मन की बात में मोदी बोले शिक्षक दिवस पर 5साल के लिये संकल्प लेकर पूरा करे

नरेंद्र मोदी ने 35वीं बार मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से देश को संबोधित किया। पीएम हर महीने के आखिरी रविवार को 11 बजे इस कार्यक्रम के माध्यम से देश को संबोधित करते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने हरियाणा में हुई हिंसा पर चिंता जताई। अहिंसा परमो धर्म ये हम बचपन से सुनते आए हैं। पीएम ने कहा कि मैंने लाल किले से भी कहा था कि आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी। चाहे वो सांप्रदायिक आस्था हो, चाहे वो राजनैतिक विचार धाराओं के प्रति आस्था हो, चाहे वो व्यक्ति के प्रति आस्था हो, चाहे वो परम्पराओं के प्रति आस्था हो, आस्था के नाम पर, कानून हाथ में लेने का किसी को अधिकार नहीं है। मैं देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि कानून हाथ में लेने वाले, हिंसा के राह पर दमन करने वाले किसी को भी, चाहे वो व्यक्ति हो या समूह हो, न ये देश कभी बर्दाश्त करेगा और न ही कोई सरकार बर्दाश्त करेगी। हर किसी को कानून के सामने झुकना होगा, कानून जवाबदेही तय करेगा और दोषियों को सजा दे कर रहेगा।
स्वच्छता का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि 2 लाख 30 हजार से भी ज्यादा गांव, खुले में शौच से अपने आपको मुक्त घोषित कर चुके हैं। शौचालयों की कवरेज 39 से करीब-करीब 67 पहंची है। मैं आह्वान करता हूं कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती से 15-20 दिन पहले से ही स्वच्छता ही सेवा मुहिम चलाएं। ऐसा स्वच्छता खड़ी कर दें कि 2 अक्टूबर सचमुच में गांधी के सपनों वाली 2 अक्टूबर हो जाए। प्रधानमंत्री मोदी ने पुणे की अपर्णा का मैसेज उठाते हुए कहा कि क्या आपको नहीं लगता है कि जब हम, हमारे घर के आस-पास कोई सामान बेचने के लिए आता है, कोई फेरी लगाने वाला आता है। किसी छोटे दुकानदार से, सब्जी बेचने वालों से हमारा संबंध आ जाता है, कभी ऑटो-रिक्शा वाले से संबंध आता है। जब भी हमारा किसी मेहनतकश व्यक्ति के साथ संबंध आता है तो हम उससे भाव का तोल-मोल करने लग जाते हैं, मोल-भाव करने लग जाते हैं। नहीं इतना नहीं, दो रुपया कम करो, पांच रुपया कम करो और हम ही लोग किसी बड़े रेस्त्रां में खाना खाने जाते हैं तो बिल में क्या लिखा है देखते भी नहीं हैं, धड़ाम से पैसे दे देते हैं। इतना ही नहीं शोरूम में साड़ी खरीदने जाएं तो कोई मोल-भाव नहीं करते हैं, लेकिन किसी गरीब से अपना नाता आ जाए तो मोल-भाव किए बिना रहते नहीं हैं। गरीब के मन को क्या होता होगा, ये कभी आपने सोचा है? उसके लिए सवाल दो रुपये- पांच रुपये का नहीं है। उसके ह्रदय को चोट पहुंचती है कि आपने वो गरीब है इसलिए उसकी ईमानदारी पर शक किया हैं। दो रुपया- पांच रुपया से आपके जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन आपकी ये छोटी-सी आदत उसके मन को कितना गहरा धक्का लगाती होगी कभी ये सोचा है? खेल पर पीएम ने कहा कि खेल मंत्रालय ने खेल प्रतिभा की खोज के लिए स्पोर्ट्स टैलेंट सर्च पोर्टल तैयार किया है। इस पर कोई भी बच्चा जिसने खेल के क्षेत्र में कुछ उपलब्धि हासिल की है, वो पोर्टल पर अपना बायोडाटा या वीडियो अपलोड कर सकता है। सलेक्ट इमर्जिंग प्लेयर्स को खेल मंत्रालय ट्रेनिंग देगा और मंत्रालय कल इस पोर्टल को लॉन्च करने वाला है। खुशी की खबर है कि भारत में 6 से 28 अक्टूबर तक फीका अंडर-17 वर्ल्ड कप का आयोजन होने जा रहा है।
पीएम ने कहा कि 5 सितंबर को हम सब शिक्षक दिवस मनाते हैं। हमारे देश के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन जी का जन्मदिवस है। वे राष्ट्रपति जरूर थे, लेकिन जीवन भर अपने आप को एक शिक्षक के रूप में ही वो प्रस्तुत करते थे। वो हमेशा शिक्षक के रूप में ही जीना पसंद करते थे। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि इस बार जब हम शिक्षक दिवस मनाए। तो हम सभी एक संकल्प लें। हर किसी को 5 साल के लिए, किसी संकल्प से बांधिए, उसे सिद्ध करने का रास्ता दिखाइये और 5 साल में वो पाकर कर रहे। जीवन में सफल होने का आनंद पाएं।

परेड ग्रांउड में 28 अगस्त से विश्व स्तरीय पुस्तक मेले का आयोजन

आम नागरिको में पढाई-लिखाई की प्रवृत्ति को बढ़ाने के लिए एवं जागरूकता में वृद्धि के उद्देश्य से लगाये जाने वाले विश्व पुस्तक मेला के आयोजन को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने समीक्षा की। पढेगा उत्तराखण्ड और बढेगा उत्तराखण्ड थीम को लेकर परेड ग्राउण्ड में लगाई जाने वाले विश्व पुस्तक मेला का आयोजन 28 अगस्त से 05 सितम्बर तक किया जा रहा है। पुस्तक मेला का उद्घाटन राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि एनबीटी के अधीन लगाई जाने वाले विश्व पुस्तक मेला में लगभग 200 प्रकाशको के स्टॉल लगाये जायेंगे। आशा जताई कि 2019 तक पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य हासिल करने में यह पुस्तक मेला सहयोगी होगा। 9 दिवसीय विश्व पुस्तक मेला में प्रतिदिन सुबह 11 बजे से सायं 8 बजे तक अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। विचार गोष्ठी, बौद्धिक परिचर्चा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विश्व विद्यालय, अर्न्तविद्यालय प्रतियोगिता के आयोजन में प्रख्यात साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं समाजसेवी को आमंत्रित किया गया है।
आम नागरिको को न्यूनतम 10 प्रतिशत की छूट पुस्तको पर होगी। जो छात्र अपने पहचान पत्र के साथ आयेंगे, उन्हें 20 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसके अतिरिक्त महापुरूषों से संबंधित पुस्तकों पर 20 प्रतिशत की छूट होगी। पुस्तक मेला का उद्देश्य उत्तराखण्ड के छात्र-छात्राओं में पढ़ने की अभिरूचि को जगाना है तथा विश्व स्तरीय पुस्तकों की उपलब्धता आमजन तक पहुंचाना है।