सीएम ने गंगोत्री धाम के लिये 32 श्रद्धालुओं को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य सरकार की मातृ-पितृ तीर्थाटन योजना के तहत 32 श्रद्धालुओं के एक दल को हरी झंडी दिखाकर गंगोत्री धाम के लिए रवाना किया।

हल्द्वानी सर्किट हाउस में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुखद एवं मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित मातृ-पितृ तीर्थाटन योजना का उद्देश्य उन्हें धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर प्रदान करना और उनके जीवन में आध्यात्मिक शांति एवं आनंद का संचार करना है।

पांच दिवसीय यात्रा पर रवाना हुआ श्रद्धालुओं के इस दल में 19 महिला एवं 13 पुरुष यात्री शामिल हैं। इस दल में सम्मिलित श्रद्धालु गंगोत्री धाम सहित मार्ग के विभिन्न पवित्र धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे। इन यात्रियों के आवास, भोजन आदि की व्यवस्था गढ़वाल मंडल विकास नियम के पर्यटक आवास केन्द्रों में की गई है।

इस अवसर पर विधायक बंशीधर भगत (कालाढूंगी) एवं राम सिंह कैड़ा (भीमताल), भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, राज्य सरकार में विभिन्न दायित्वधारी, कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत, आईजी रिद्धिम अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

कृषि मेले किसानों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों के बीच नवाचार व ज्ञान के प्रसारित करने का माध्यमः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंतनगर विश्वविद्यालय में आयोजित 118वे अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने पंतनगर विश्वविद्यालय द्वारा उत्पादित नवीन दलहनी प्रजातियों का लोकार्पण व पंतनगर प्रवाह नामक पुस्तक का विमोचन किया।

मेले में आयोजित रजत जयंती राज्य स्थापना गोष्ठी एवं संवाद कार्यक्रम में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस वर्ष के किसान मेले और कृषि प्रदर्शनी में 400 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से 200 से अधिक स्टॉल देश के विभिन्न राज्यों से आए कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्योगों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों द्वारा लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन मात्र कृषि उत्पादों और यंत्रों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये किसानों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों के बीच ज्ञान, अनुभव और नवाचार के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम भी होते हैं। इस प्रकार के कृषि मेलों के माध्यम से जहां एक ओर हमारे किसान भाई एक ही स्थान पर नवीनतम कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, आधुनिक यंत्रों और नई शोधों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, वहीं उन्हें विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी मिलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस मेले में प्रदर्शित की जा रही आधुनिक तकनीकों और नवाचारों के माध्यम से हमारे किसान भाई पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ नई वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर अपनी खेती को और भी अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बना पाएंगे। उन्होंने कहा कि जिससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि प्रदेश की कृषि व्यवस्था भी सशक्त और समृद्ध बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारत विकसित राष्ट्र के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी संकल्प के साथ केंद्र सरकार द्वारा हमारे अन्नदाताओं की आय को दोगुना करने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज, देशभर के 11 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिसके अंतर्गत उत्तराखंड के भी लगभग 9 लाख के करीब अन्नदाताओं को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपए सहायता राशि प्रदान की जा रही है। आज जहां एक ओर सभी प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (डैच्) में अभूतपूर्व वृद्धि कर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है। वहीं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसान को प्राकृतिक आपदाओं, फसल रोगों और कीटों से होने वाले नुकसान हेतु सुरक्षा कवच भी प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के द्वारा खेतों की मिट्टी की वैज्ञानिक जांच कर किसानों को पोषक तत्वों की कमी और आवश्यक उर्वरकों की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे उनकी उपज की गुणवत्ता और भूमि की उर्वरता दोनों में सुधार हो रहा है, और इसके साथ ही, किसान मानधन योजना, मिलेट मिशन, बागवानी विकास मिशन, कृषि यंत्र सब्सिडी, बूंदबूंद सिंचाई योजना, डिजिटल कृषि मिशन जैसी अनेकों योजनाओं द्वारा किसानों को लाभ पहुंचाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में कृषि को विकास का प्रमुख इंजन मानते हुए जहां एक ओर किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट को 3 लाख रुपये से बढाकर 5 लाख रुपये करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है, वहीं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ सिंचाई और कृषि तकनीकों के विकास पर भी विशेष फोकस किया गया है। उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने देश के अन्नदाताओं को बड़ी सौगात देते हुए 24 हजार करोड़ रुपये की पीएम धन धान्य कृषि योजना और दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु लगभग 11 हजार 500 करोड़ रुपये की लगात के दलहन उत्पादकता मिशन का शुभारंभ किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी राज्य सरकार भी प्रदेश के किसानों के उत्थान एवं समृद्धि हेतु संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हम एक ओर जहां प्रदेश में किसानों को तीन लाख रुपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं कृषि उपकरण खरीदने हेतु फार्म मशीनरी बैंक योजना के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने किसानों के हित में नहरों से सिंचाई को पूरी तरह मुफ्त करने का काम किया है। साथ ही, हमने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पॉलीहाउस के निर्माण हेतु 200 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान भी किया है। जिसके अंतर्गत अब तक राज्य में लगभग 115 करोड़ रुपए की सहायता से करीब 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं। इतना ही नहीं, हम जहां एक ओर गेहूं खरीद पर किसानों को 20 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस प्रदान रहे हैं, वहीं हमने गन्ने के रेट में भी 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की है। उन्होंने कहा कि हमने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट भी स्वीकृत किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार सब्जियों की तरह ही फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। हाल ही में हमारी सरकार ने 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति, कीवी नीति, स्टेट मिलेट मिशन और ड्रैगन फ्रूट नीति जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को लागू किया है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के तहत बागवानी को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है। हम किसानों की उपज की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए ग्रेडिंग सॉर्टिंग यूनिट के निर्माण के लिए भी अनुदान प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज इस अवसर पर मैं, आप सभी कृषि वैज्ञानिकों से आग्रह करना चाहता हूँ कि आप हमारी पारंपरिक कृषि व्यवस्था पर भी अनुसंधान करें, और जानें कि हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्षों से अपनी कृषि सभ्यता को कैसे संरक्षित रखा, अपनी धरती की उर्वरकता को कैसे बनाए रखा और उत्पादन की गुणवत्ता को भी निरंतर सुनिश्चित किया। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह करते हुए कहा कि आप लोग अपने शोध कार्य और नवीनतम तकनीकी ज्ञान को शीघ्रता से किसानों तक पहुँचाएँ, ताकि ये ज्ञान उनके उत्पादन और आय में वृद्धि का माध्यम बन सके और हमारी कृषि अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस अवसर पर हम किसानों की प्रगति पर चर्चा करने के साथ-साथ प्रदेश में नकल विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता पर संवाद करने के लिए भी एकत्रित हुए हैं। उक्त दोनों विषयों पर जीबी पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की छात्रा पूजा जोशी ने समान नागरिक संहिता, नीति शर्मा ने किसान मेले की प्रगति एवं छात्र निधि अवस्थी ने नकल विरोध कानून पर अपने विचार साझा किए जबकि समृद्धि किसान उत्पादक संगठन की सीमा रानी ने अपने सफल खेती के अनुभव साझा किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू कर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून और अधिकार स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि हमने अनुभव किया कि समाज में कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई है। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य इन्हीं भेदभावों को समाप्त कर राज्य के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यूसीसी के लागू होने से न केवल राज्य से सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं, बल्कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को भी बल मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं,यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर सभी नागरिकों के बीच समानता से समरसता स्थापित करने का एक संवैधानिक उपाय है। परन्तु ये देश का दुर्भाग्य रहा कि स्वतंत्रता के पश्चात कई दशकों तक देश में एक ऐसी पार्टी का शासन रहा जिसने अपने वोट बैंक के चक्कर में यूसीसी को लागू नहीं होने दिया। जबकि विश्व के प्रमुख मुस्लिम देशों सहित दुनिया के सभी सभ्य देशों में पहले से ही समान नागरिक संहिता लागू है। उन्होंने कहा कि हम भली-भांति जानते थे कि भारत में सर्वप्रथम यूसीसी लागू करने का मार्ग सरल नहीं होगा परंतु जब नीयत साफ हो और जनभावना साथ हो, तो कोई भी बदलाव असंभव नहीं रहता। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को संरक्षित रखने के प्रति भी पूर्ण रूप से संकल्पबद्ध होकर काम कर रही है।

कुलपति डॉ मनमोहन सिंह चौहान ने यूसीसी व नकल विरोधी कानून लागू करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन व निर्देशन में विश्वविद्यालय शोध व प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में पूरे प्रदेश में इंटिग्रेटेड फार्मिंग पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आज प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 2 लाख 61 हजार हो गई है जो 26 प्रतिशत ग्रोथ रेट पर है। उन्होंने बताया कि मेले में 507 स्टॉल लगाए गए हैं व अभी तक लगभग 20 हजार किसानों द्वारा प्रतिभाग किया गया है।

कार्यक्रम में विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, सुरेश गाड़िया, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

छात्र हित में धामी का फैसला, भर्ती परीक्षा की रद्द, तीन माह में पुनः आयोजित होगी परीक्षा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को यूं ही युवा दिलों की धड़कन और युवा हितैषी नहीं कहा जाता। वे युवाओं की बातों को न सिर्फ गौर से सुनते हैं बल्कि, उन्हें पूरा करने से भी पीछे नहीं हटते। 21 सितंबर को यूकेएसएसएससी पेपर लीक का प्रकरण सामने आने के बाद युवाओं ने पेपर को रद्द कर पुनः कराने और सीबीआई जांच की मांग करी तो सीएम धामी ने इस पर तत्काल एक्शन लेते हुए 10 दिन के भीतर ही पेपर को रद्द कर पुनः परीक्षा आयोजित कराने के निर्देश दे डाले। इसके साथ ही, पुनः आयोजित होने वाली इस परीक्षा में वही छात्र शामिल होंगे, जिन्होंने पहले भी यह परीक्षा दी थी। इन छात्रों की फीस का पूरा वहन राज्य सरकार उठाएगी। पुनः आयोजित होने वाली यह परीक्षा अन्य परीक्षाओं के कार्यक्रम पर कोई असर नहीं डालेगी।

ये निर्णय इस बात का प्रमाण है कि सीएम धामी के दिल में युवा और युवाओं के दिल में सीएम धामी बसते हैं। इससे पहले सीएम धामी ने खुद परेड ग्राउंड स्थित धरना स्थल पर जाकर प्रदर्शनकारी युवाओं से वार्ता कर उन्हें मामले की जांच का आश्वासन दिया था। राज्य गठन के इतिहास में यह पहला मौका था कि जब सूबे का मुखिया खुद धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों से वार्ता करने गया हो। यह इस बात का प्रमाण है कि सीएम धामी युवाओं के प्रति बेहद ही संवेदनशील हैं। जिस कारण वह उनके हितों में निर्णय लेने से एक कदम भी पीछे नहीं हटते।

चार साल में युवाओं के लिए नौकरी के द्वार खोलना और 25000 पदों पर उन्हें नियुक्ति प्रदान करना भी इस बात का बड़ा प्रमाण है कि सीएम धामी युवा हितैषी हैं।

21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में पेपर में अनियमितताओं की खबरें बाहर आने के बाद छात्रों ने प्रदेशभर में प्रदर्शन किया था। जिस पर सीएम धामी ने खुद परेड ग्राउंड जाकर छात्रों को आश्वासन देते हुए मामले की पारदर्शी जांच के निर्देश दिए थे। इसके लिए एसआईटी गठन के साथ ही जांच आयोग भी बनाया गया था। जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अब आयोग ने परीक्षा को रद्द कर दिया है।

सीएम धामी का स्पष्ट संदेश है कि उत्तराखंड में छात्र हमेशा सरकार के लिए सर्वाेच्च प्राथमिकता हैं। सरकार छात्रों के हितों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होने देगी और हर छात्र को निष्पक्ष अवसर और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराना हमारी प्रतिबद्धता है। उनका यह युवा हितैषी कदम छात्रों के विश्वास को पुनः मजबूत करता है और यह दिखाता है कि उत्तराखंड में नेतृत्व केवल आदेश देने वाला नहीं, बल्कि युवाओं की भावनाओं और भविष्य की जिम्मेदारी समझने वाला भी है।

अतिवृष्टि से प्रभावित मालदेवता व केसरवाला के स्थलीय निरीक्षण को पहुंचे सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अतिवृष्टि से प्रभावित देहरादून जनपद के मालदेवता क्षेत्र एवं केसरवाला का स्थलीय निरीक्षण कर वहाँ की स्थिति का जायज़ा लिया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की गति तेज करने के निर्देश अधिकारियों को दिए तथा स्थानीय नागरिकों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि के कारण प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों, पुलों एवं सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुँचा है, जिससे आमजन के जीवन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने निर्देश दिए कि अवरुद्ध मार्गों को शीघ्र चालू किया जाए, सुरक्षित पेयजल व बिजली की आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन व प्रशासन की टीम निरंतर फील्ड में सक्रिय है और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ राहत, बचाव व पुनर्वास कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि नदियों के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए आपदा से निपटने हेतु विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

मुख्यमंत्री राज्य आपदा परिचालन केंद्र और विभिन्न जिलों की परिस्थितियों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं एवं सभी जिलाधिकारियों के साथ नियमित संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों के प्रत्येक नागरिक की समस्याओं को तात्कालिक प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए।

स्थलीय निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के साथ विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर सचिव बंशीधर तिवारी सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

देहरादून पहुंचे पीएम मोदी, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए 1200 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की, प्रभावितों से भी मिले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून का दौरा किया और उत्तराखंड में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए समीक्षा बैठक की।

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में बाढ़ और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों के लिए 1200 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की।

प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत व्यापक सहायता की घोषणा की।

प्रभावितों से मिलकर संवेदना व्यक्त की
प्रधानमंत्री ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा मित्र स्वयंसेवकों से भी मिले और उनके प्रयासों की सराहना की। केंद्र सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की बहाली और पुनर्निर्माण के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

आत्मनिर्भर उत्तराखंड का सपना साकार कर रही पौड़ी की मातृशक्ति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का संकल्प अब धरातल पर खिलता नज़र आ रहा है। जनपद पौड़ी गढ़वाल के कोट ब्लॉक की महिलाएं लिलियम फूलों की खेती से आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं। इन फूलों की खुशबू अब न केवल खेतों में, बल्कि महिलाओं के जीवन में भी उम्मीद और समृद्धि की महक भर रही है।

उद्यान विभाग, ग्रामोत्थान परियोजना एवं एनएचएलएम के संयुक्त प्रयासों से कोट ब्लॉक में 22 पॉली हाउस बनाए गए हैं। पहले चरण में आठ पॉली हाउसों में महिला समूहों ने हॉलैंड से आयातित ओरिएंटल और डांसिंग स्टार वैरायटी के बल्ब लगाए हैं।

महिलाओं को जिला योजना से 50 प्रतिशत अनुदान, उत्पादन से लेकर विपणन तक हर स्तर पर सहयोग और बाज़ार उपलब्ध कराने की गारंटी सरकार द्वारा दी जा रही है। ए-ग्रेड लिलियम की कीमत 80 रुपये, बी-ग्रेड 70 रुपये और सी-ग्रेड 60 रुपये तक तय की गई है। इससे यहां की महिलाएं प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक की आय का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा उत्तराखण्ड की मातृशक्ति हमारे राज्य का वास्तविक बल है। कोट ब्लॉक की महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि संकल्प और परिश्रम से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। यह सिर्फ फूलों की खेती नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार और महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल है। हमारी सरकार हर बेटी और हर महिला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के सपने को साकार करने में हमारी मातृशक्ति सबसे बड़ी सहभागी बनेगी।
यह पहल न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि प्रदेश सरकार की महिला सशक्तिकरण, नवाचार आधारित खेती और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की परिकल्पना को नई दिशा दे रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विज़न

हमारा संकल्प है कि उत्तराखण्ड की हर बेटी और हर महिला अपने सपनों को पंख दे सके। आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का मार्ग हमारी मातृशक्ति के साहस और मेहनत से ही प्रकाशित होगा। आज पौड़ी की धरती से जो खुशबू उठ रही है, वही कल पूरे उत्तराखण्ड की पहचान बनेगी।

सीएम धामी के प्रयासों की बदौलत पिथौरागढ़ का खूनी गांव अब देवीग्राम हुआ

पिथौरागढ़ जिले में तहसील पिथौरागढ़ स्थित ग्राम “खूनी” का नाम बदलकर अब “देवीग्राम” कर दिया गया है। मुख्यमंत्री के विशेष प्रयासों से भारत सरकार ने खूनी ग्राम का नाम बदलने की अनुमति प्रदान कर दी है, इसके बाद उत्तराखंड शासन के राजस्व विभाग ने इसकी विधिवत अधिसूचना जारी कर दी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्थानीय निवासी लंबे समय से गांव का नाम बदलने की मांग कर रहे थे, उनकी भावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने भारत सरकार से अनुमोदन प्राप्त कर अब यह मांग पूरी कर दी है। अब आधिकारिक रूप से ग्राम “खूनी” को “देवीग्राम” के नाम से जाना जाएगा। यह कदम राज्य सरकार की जन भावनाओं के प्रति प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का प्रतीक है।

उत्तराखंडः 8300 श्रमिकों के खाते में धामी सरकार ने भेजे 25 करोड़

उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से चलाए गए विशेष अभियान के तहत राज्य के श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को बड़ी राहत दी गई है। अभियान के अंतर्गत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 8299 लाभार्थियों को 24.85 करोड़ की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की।

यह राशि श्रमिकों और उनके आश्रितों को विभिन्न योजनाओं जैसे पुत्री विवाह सहायता योजना, मृत्यु अनुदान योजना, प्रसूति सहायता योजना एवं शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत दी गई है। पहली बार बोर्ड स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर आनलाइन निस्तारण किया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को आयोजित कार्यक्रम में बोर्ड के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने श्रम विभाग को निर्देश दिए कि श्रमिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए, साथ ही उद्योगों और श्रमिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उद्योग और श्रमिक दोनों के बीच तालमेल बेहतर होगा तो रोजगार के अवसर निरंतर उपलब्ध होंगे और छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान तत्काल संभव हो सकेगा। उन्होंने श्रम विभाग के लेबर सेस मैनेजमेंट पोर्टल और ई-श्रम पोर्टल पर की गई उत्कृष्ट प्रगति की भी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था से न केवल श्रमिकों को समय पर लाभ मिलेगा बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली भी मजबूत होगी

कार्यक्रम के दौरान दायित्वधारी गीता रावत, उप श्रमायुक्त मधु नेगी चौहान, विपिन कुमार, उमेश चंद्र राय, केके गुप्ता सहित श्रम विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, एचडीएफसी बैंक की ओर से सुमित गोयल, इशान शर्मा और रोहित थपलियाल भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

चलाया गया विशेष अभियान
श्रम सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी ने जानकारी दी कि विगत एक माह में विशेष अभियान चलाकर यह निस्तारण सुनिश्चित किया गया। उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी श्रमिकों से संबंधित आवेदनों का समयबद्ध समाधान अभियान आधारित दृष्टिकोण से किया जाएगा, ताकि पात्र श्रमिक समय पर लाभ उठा सकें।

धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला, उत्तराखंड से मदरसा बोर्ड होगा खत्म

अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को लेकर धामी कैबिनेट ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस कड़ी में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक-2025 को मंजूरी दी गई है, जिसे ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में 19 अगस्त से प्रारंभ हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।

इस विधेयक के अधिनियम बनने पर इसके तहत उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। अभी तक अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान का दर्जा केवल मुस्लिम समुदाय को ही मिलता है, लेकिन अधिनियम के तहत मुस्लिम के साथ ही अन्य अल्पसंख्यक समुदायों सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई व पारसी को भी यह सुविधा मिलेगी

यही नहीं, मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों में गुरुमुखी व पाली भाषा भी पढ़ाई जा सकेगी। इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय के शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देने वाले मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2016 और उत्तराखंड गैर सरकारी अरबी व फारसी मदरसा नियम, 2019 को एक जुलाई, 2026 से समाप्त कर दिया जाएगा।

अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान विधेयक के अधिनियम बनने पर यह देश ऐसा पहला अधिनियम होगा, जो राज्य में सभी अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा स्थापित शैक्षिक संस्थानों को पारदर्शी ढंग से न केवल मान्यता देगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता व उत्कृष्टता भी सुनिश्चित करेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट की बैठक में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से रखे गए इससे संबंधित विधेयक को चर्चा के बाद स्वीकृति दे दी गई। अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अधिनियम के अंतर्गत राज्य के सभी छह अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को एक छतरी के नीचे लाया जाएगा।

धार्मिक शिक्षा पर कोई रोक नहीं
अधिनियम के लागू होने पर मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा पर कोई रोक नहीं होगी। प्राधिकरण इसका पाठ्यक्रम निर्धारित करेगा। वह यह भी सुनिश्चित करेगा कि इन संस्थानों में उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड के तय मानकों के अनुसार शिक्षा दी जाए और विद्यार्थियों का मूल्यांकन निष्पक्ष व पारदर्शी हो।

अधिनियम की खास बातें
अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान का दर्जा प्राप्त करने के लिए प्राधिकरण से अनिवार्य रूप से लेनी होगी मान्यता।
मान्यता प्राप्त करने को संस्थान का सोसायटी, ट्रस्ट या कंपनी एक्ट में पंजीकरण अनिवार्य। भूमि, बैंक खाते व अन्य संपत्तियां भी संस्थान के नाम होनी चाहिए।
इन संस्थानों की स्थापना व संचालन में प्राधिकरण हस्तक्षेप नहीं करेगा, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता व उत्कृष्टता सुनिश्चित करेगा।
वित्तीय गड़बड़ी, पारदर्शिता की कमी अथवा धार्मिक व सामाजिक सद्भावना के विरुद्ध गतिविधियों की स्थिति में वापस ली जाएगी मान्यता।
ये होंगे लाभ
अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को पारदर्शी प्रक्रिया से मिलेगी मान्यता।
शिक्षा की गुणवत्ता के साथ अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकार भी रहेंगे सुरक्षित।
संस्थानों के संचालन की निगरानी और समय-समय पर आवश्यक निर्देश जारी कर सकेगी सरकार।

राज्य में “एआई मिशन“ प्रारंभ होगा, जो “एक्सीलेंस सेंटर“ के रूप में विकसित होगाः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं का शुभारंभ किया। इनमें डिजिटल उत्तराखण्ड एप का उद्घाटन, सुरक्षित, स्केलेबल और सुगम्य प्लेटफॉर्म आधारित 66 वेबसाइटों का उद्घाटन, नगरीय क्षेत्र में कूड़ा उठाने वाले वाहनों की रियल टाइम ट्रैकिंग के लिए विकसित की गई जीआईएस आधारित वेब एप का उद्घाटन, जन सुविधा के लिए संचालित 1905 सीएम हेल्पलाइन में एआई के अनुप्रयोग नवाचार का शुभारंभ और अतिक्रमण की निगरानी के लिए वेब आधारित एप्लीकेशन का शुभारंभ शामिल हैं।

मुख्यमंत्री घोषणाएं-
1-भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए राज्य में नेक्स्ट-जनरेशन डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिसके अंतर्गत डिजास्टर रिकवरी के लिए भी एक अलग से मैकेनिज्म बनाया जाएगा।

2-राज्य में शीघ्र ही भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए “एआई मिशन“ प्रारंभ किया जाएगा, जिसे “एक्सीलेंस सेंटर“ के रूप में विकसित किया जाएगा।

3-गुड गवर्नेंस की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए राज्य में नेक्स्ट-जनरेशन रिमोट सेंसिंग एवं ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर का विकास किया जाएगा।

4-राज्य में एक विशिष्ट आईटी कैडर स्थापित करने के लिए सरकार प्रयास करेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड सुंदर पहाड़ी राज्य होने के साथ ही तकनीकी रूप से दक्ष राज्य के रूप में आगे बढ़े, इसके लिए राज्य सरकार “हिल से हाइटेक“ के मंत्र पर कार्य कर रही है। आज प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी 5 महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की गई है। ये सभी नवाचार शासन व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने के साथ ही विभिन्न सेवाओं में गति एवं पारदर्शिता भी लाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया अभियान के माध्यम से प्रौद्योगिकी और नवाचार का विस्तार हुआ है। उनके ’डिजिटल इंडिया’ के सपने को साकार करने के लिए राज्य सरकार भी निरंतर प्रयास कर रही है। “डिजिटल उत्तराखण्ड“ एप के माध्यम से लोग घर बैठे ही अनेक सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। अब लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह एप प्रधानमंत्री के ’मिनिमम गवर्नमेंट-मैक्सिमम गवर्नेंस’ के मंत्र को साकार करने में सहायक होगा। इससे सरकारी सेवाओं को एकीकृत, सरल और सुलभ बनाने में सहायता मिलेगी और विभिन्न गतिविधियों की मॉनिटरिंग भी आसानी से होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्लेटफॉर्म पर आधारित 66 नई सरकारी वेबसाइटें विभागीय जानकारी को सुरक्षित, त्वरित और पारदर्शी तरीके से जनता तक पहुंचाएंगी। जीआईएस आधारित वेब ऐप शहरी क्षेत्रों में कूड़ा उठाने वाले वाहनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगा। अतिक्रमण की रोकथाम के लिए एक वेब-आधारित ऐप के माध्यम से कोई भी नागरिक अतिक्रमण की तस्वीर या वीडियो अपलोड कर सकेगा, जिस पर संबंधित विभाग तुरंत जांच कर कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि 1905 सीएम हेल्पलाइन राज्य के नागरिकों और सरकार के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस सेवा में भी एआई आधारित सुविधाओं से शिकायतों का ऑटो-केटेगराइजेशन, त्वरित समाधान और फॉलो-अप मॉनिटरिंग और भी बेहतर तरीके से होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में ऑनलाइन शिक्षा, ई-स्वास्थ्य सेवा और भूलेख डिजिटलीकरण जैसे कार्यों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल और सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से लोगों को घर बैठे ही अनेक सरकारी सेवाओं का लाभ प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लासरूम और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म का भी विस्तार किया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को टेलीमेडिसिन और ई-संजीवनी सेवाओं के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह घर बैठे उपलब्ध कराने का भी कार्य किया जा रहा है। “अपणी सरकार“ पोर्टल द्वारा 886 सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध करवाया जा रहा है। राज्य के लगभग 95 प्रतिशत गांवों में दूरसंचार कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है।

इस अवसर पर विधायक खजानदास, प्रमुख सचिव एल. फैनई, सचिव नितेश झा, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, नीरज खेरवाल, डॉ. वी. षणमुगम, श्रीधर बाबू अदांकी, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, निदेशक आईटी गौरव कुमार (वर्चुअल माध्यम), नगर आयुक्त देहरादून नमामि बंसल, संबंधित विभागों के अपर सचिव एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।