राज्य के सभी वन्यजीव पार्क में 18 साल तक के बच्चों का नही लगेगा शुल्क

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मालसी डियर पार्क स्थित देहरादून-जू में 1-7 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले वन्य जीव सप्ताह का शुभारम्भ किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उत्तराखण्ड के टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क, वन्यजीव अभ्यारण्य, कन्जर्वेशन रिजर्व, चिड़ियाघर, नेचर पार्क में देशभर के 18 साल तक के बच्चों हेतु निःशुल्क प्रवेश दिया जायेगा, इससे देश के 45 करोड़ युवा छात्रों एवं युवाओं को पर्यटन से जोड़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ये युवा प्रदेश के पर्यटन एवं ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने में हमारे ब्राण्ड एम्बेस्डर भी बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की, कि उत्तराखण्ड का 71 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र है। यहां के स्थानीय लोगों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण करने हेतु, वन, वन्यजीव एवं पर्यावरण के क्षेत्र अत्यंत महत्पूर्ण है। यहां के लोगों को वनों एवं वन्यजीवों के आर्थिकी से जोड़ने हेतु सी.एम. यंग-ईकोप्रिन्योर स्कीम की शुरुआत की जायेगी। इस स्कीम के अन्तर्गत 1 लाख युवाओं को ईको-प्रिन्योर बनाया जायेगा। इस स्कीम के अन्तर्गत नेचर गाइड, ड्रोन पाइलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, ईकोटूरिज्म, वन्यजीव टूरिज्म आधारित कौशल के उद्यम में परिवर्तित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने वन्य जीव संघर्ष में अपनी जान गंवाने वाले, वन कार्मिकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिये शीघ्र नीति निर्धारण की भी बात कही है।
मुख्यमंत्री ने इस प्रकार के प्रकृति एवं वन्य जीवों से संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े कार्यक्रमों में छात्रों की भी भागीदारी सुनिश्चित किये जाने पर बल देते हुए कहा कि राज्य का 71 प्रतिशत भू भाग वनों से आच्छादित है, इसमें हमारा प्रकृति से जुड़ाव स्वाभाविक से रहता है। राज्य के 6 राष्ट्रीय उद्यान, 7 वन्य जीव विहार, 4 संरक्षण आरिक्षित तथा 2 टाइगर रिजर्व राज्य की पहचान हैं। वनों एवं वन्य जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन में राष्ट्रीय स्तर पर हमारी निरंतर पहचान बनी रहे इसके लिये सभी को सहयोगी बनना होगा। संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देने में भी वन्य जीवों का बड़ा महत्व है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अवधारणा के मूल में ऊर्जा एवं पर्यटन को राज्य की आर्थिकी का मजबूत आधार माना गया था। हम इस दिशा में प्रयासरत है। मुख्यमंत्री ने सभी से राज्य के विकास में सहयोगी बनने की अपेक्षा करते हुए कहा कि हमें जो भी जिम्मेदारी मिली है। हम उसे पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ निभाये ताकि हमें इसमें पछतावा न हो, पूरे मनोयोग से बेहतर ढ़ंग से कार्य करने वालों की ईश्वर भी मदद करता है। इससे आत्म सन्तुष्टि भी मिलती है, मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य समाज के अन्तिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुचाना है सभी के सहयोग से हम इसमें अवश्य सफल होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सांप, तितली एवं बांज वृक्ष पर आधारित तीन पोस्टर, कामन वर्ड ऑफ उत्तराखण्ड कॉफी टेबल बुक तथा स्कूलों के लिये दी जाने वाली ई-बुक का भी लोकार्पण किया।
अपने सम्बोधन में वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड से सभी की आस्था जुड़ी है। कार्बेट नेशनल पार्क उत्तराखण्ड की पहचान है। उन्होंने कहा कि वन एवं वन्य जीवों के संवर्धन मे भी देश मे उत्तराखण्ड का अपना महत्व है। देवभूमि के साथ ही यह गंगा यमुना की धरती है। हमारे राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव विहार, नेचर पार्क, चिडिया घर टाइगर रिजर्व के साथ ही बढ़ती टाइगरों व हाथियों एवं सैंकड़ो पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां समृद्ध जैव विविधता की परिचायक तथा पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। उन्होंने कहा कि वनों एवं वन्य जीवों के संरक्षण में उत्तराखण्ड देश की धरोहर है। उन्होंने मुख्यमंत्री को युवा एवं ऊर्जावान मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि उनकी युवा सोच प्रदेश को विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ायेगी। प्रदेश का समग्र विकास ही हम सबका संकल्प भी है।
इस अवसर पर उन स्कूलों के प्रधानाचार्यों को भी सम्मानित किया गया जिनमें इको क्लब का गठन किया गया है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक जे.एस. सुहाग, अपर प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा आदि उपस्थित थे।

पर्यटन मंत्रालय के तहत ईकोटूरिज्म विंग का गठन-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर सॉलिटेयर फार्म मालसी, देहरादून में उत्तराखण्ड एडवेंचर फेस्ट में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने पर्यटन पर आधारित लगाई गई प्रदर्शनियों का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पर्यटन परियोजनाओं के विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक पर्यटन सुविधा एवं निवेश प्रकोष्ठ का निर्माण किया जायेगा। पर्यटन उद्योगों से संबंधी सभी प्रस्तावों पर विशेष रूप से पर्यटन विभाग द्वारा ही कार्यवाही की जायेगी, न कि उद्योग विभाग के द्वारा। शहरी विकास विभाग और आवास विभाग विशेष रूप से उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों के लिए बहुस्तरीय कार-लिफ्ट स्थान स्थापित करने के लिए एक परियोजना शुरू की जायेगी। नवंबर, 2021 में कुमाऊं के रामनगर में साहसिक कार्य पर निवेश सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा। खेल विभाग की ओर से पंडित नैन सिंह सर्वेयर पर्वतारोहण प्रशिक्षण संस्थान पर्यटन विभाग को सौंपा जाएगा। उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को एक स्थायी, पर्यावरण के अनुकूल उद्योग के रूप में विकसित करने के मार्ग तलाशने के लिए पर्यटन मंत्रालय के तहत एक समर्पित ईकोटूरिज्म विंग का गठन किया जाएगा। ईकोटूरिज्म विंग का उद्देश्य दीर्घकालिक विचारों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक सहभागिता व सामाजिक नेतृत्व की भागीदारी के साथ ईकोटूरिज्म का विकास सुनिश्चित करना होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए जाना जाता है। उत्तराखण्ड में पर्यटन के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं हैं। हर साल करोड़ों में पर्यटक यहां आते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं से उत्तराखंड को पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ावा मिलेगा। ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन जैसे निर्माण कार्य आज उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे हैं। राज्य में सड़क, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी तेजी से बढ़ी है। विभिन्न क्षेत्रों में नई पॉलिसी लाई जा रही है एवं उनका सरलीकरण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चार धाम यात्रा प्रारंभ हो चुकी है, इस दौरान यात्रियों को किसी तरह की तकलीफ ना हो इसके लिए हरसंभव सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान पर्यटन से जुड़े लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा ऐसे लोगों को सरकार ने 200 करोड़ का आर्थिक पैकेज दिया। जो धनराशि सीधे लाभार्थियों के खातों में जा रही है। उत्तराखंड को आने वाले दस वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में नंबर वन राज्य बनाने का प्रयास किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन एवं ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य में अनेक संभावनाएं हैं।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि हमार मूल मंत्र है कि हम सर्विस प्रोवाइडर बनें। पर्यटकों को जितनी अधिक सुविधाएं मिलेंगी एवं पर्यटन आधारित गतिविधियां जितनी अधिक बढ़ेगी। इस क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को उतना ही फायदा होगा। पर्यटन रोजगार को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हवाई, सड़क एवं रेल कनेक्टिविटी में तेजी से सुधार हो रहे हैं सरकार का प्रयास है कि राज्य में कनेक्टिविटी को बढ़ाकर पर्यटन एवं तीर्थाटन को बढ़ावा दिया जाय। हम पर्यटन के साथ ही प्रदूषण रहित पर्यटन पर भी ध्यान दे रहे हैं। राज्य में विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने पर कार्य किया जा रहा है।
उद्योग मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन की दृष्टि से अनेक महत्वपूर्ण स्थल हैं। पर्यटन के क्षेत्र में राज्य में अनेक सराहनीय कार्य हुए हैं। अनेक नये टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित हो रहे हैं।
सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने कहा कि विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित इस दो दिवसीय उत्तराखण्ड एडवेंचर फेस्ट में पर्यटन एवं उससे संबंधित गतिविधियों के बारे में लोगों को जागरूक करने के प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का सभी तक लाभ पहुंचे इसके लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। विश्व पर्यटन दिवस की इस वर्ष की थीम ‘‘समावेशी विकास के लिए पर्यटन‘‘ है। पिछले दो साल में कोरोना के कारण विश्वभर में पर्यटन से जुड़े लोगों के कार्य प्रभावित हुए हैं। राज्य में पर्यटन के साथ ही साहसिक गतिविधयों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस अवसर पर फिक्की के टूरिज्म विंग की राज्य संयोजक डॉ. नेहा शर्मा, किरन टोडरिया एवं पर्यटन गतिविधियों से जुड़े लोग उपस्थित थे।

आप ने पर्यटन दिवस पर गोष्ठी का आयोजन कर वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा की

अंतरराष्ट्रीय पर्यटन दिवस के मौके पर पर्यटन नगरी ऋषिकेश में आम आदमी पार्टी ने एक गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी में विभिन्न वक्ताओं ने वैश्विक महामारी कोरोना के चलते पिछले दो साल से आर्थिक मंदी से जूझ रहे पर्यटन कारोबारियों की पीड़ा और वर्तमान परिस्थितियों पर अपने विचार रखे।
सोमवार की दोपहर नेपाली फार्म स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए पार्टी के बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ राजे सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। मगर इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उत्तराखंड में सिमटते पर्यटन व्यवसाय और इन से जुड़ी हुई चुनौतियों के बारे में अपनी राय रखते हुए विधानसभा के संगठन मंत्री दिनेश असवाल ने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, बस जरूरत है तो ईमानदार कोशिश की। गोष्ठी को आप नेता संजय पोखरियाल, सेक्टर प्रभारी विक्रांत भारद्वाज, मीडिया प्रभारी नरेंद्र सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य तेजपाल असवाल, महंत विनायक गिरी, अजय रावत, मनमोहन नेगी आदि ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने मे पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। विश्व पर्यटन दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का नैसर्गिक प्राकृतिक सौन्दर्य सदियों से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। जबकि यहां के चारधाम देश व दुनिया के करोड़ों लोगों के आस्था के केंद्र रहे हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने मे पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन दिवस को मनाये जाने का मुख्य उद्देश्य, दुनियाभर में लोगों को पर्यटन के महत्व के प्रति जागृत करना है। उन्होंने कहा कि पर्यटन की किसी भी देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चारधाम सड़क परियोजना एवं ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाईन का निर्माण तेजी से हो रहा है। इससे प्रदेश में आने वाले पर्यटकों, तीर्थयात्रियों को आवागमन में आसानी होगी। रोड़ कनेक्टिविटी एवं हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार से निश्चित रूप से राज्य के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की आर्थिकी के लिए लाभकारी होगा। श्री केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण कार्य अंतिम चरण पर है। इसे विश्व स्तरीय धार्मिक स्थल बनाया जा रहा है। बद्रीनाथ मन्दिर के सौन्द्रयीकरण की दिशा में पहल की गई है। उन्होंने कहा कि साहसिक पर्यटन के दृष्टिगत माउंटेनियरिंग, रिवर राफ्टिंग, ट्रैकिंग, कैम्पिंग, पैराग्लाईडिंग, माउंटेन बाईकिंग आदि गतिविधियों का भी राज्य में काफी विस्तार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण के चलते आर्थिक मंदी से जूझ रहे चारधाम यात्रा और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों के लिए राज्य सरकार ने 200 करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज जारी कर संजीवनी देने का काम किया। जिसकी बदौलत चारों धाम के होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी संचालक आदि के साथ ही पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए एकमुश्त सहायता राशि सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गई है। यह धनराशि लाभार्थियों के खाते में सीधे जमा करायी जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पर्यटन हमारी आर्थिकी का महत्वपूर्ण विषय रहा है। इसके लिये राज्य में नये पर्यटन स्थलों के विकास के साथ ही पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा पर्यटकों की सुख सुविधाओं का विशेष ध्यान दिये जाने पर कार्य किया जा रहा है। हमारा प्रयास राज्य के नैसर्गिक प्राकृतिक सौन्दर्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं जैव विविधता को देश व दुनिया के सामने लाना है।

उत्तराखंड में अल्ट्रा लक्जरी वैन कैरवानं के साथ कर सकेंगे पर्यटक सैर

उत्तराखंड के दूरस्थ स्थानों पर अब पर्यटक अल्ट्रा लक्जरी वैन कैरवान से अपने परिवार और दोस्तों के साथ सफर कर सकेंगे। अत्याधुनिक विशेषताओं से लैस विशेष वाहन कैरवान का शुक्रवार को पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) के परिसर में रिबन काटकर शुभारंभ किया।
कैरवान इन्वेस्टर प्रमोशन सेल की नोडल अधिकारी पूनम चंद ने बताया कि कैरवान को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना में शामिल किया गया है। राज्य सरकार की पर्यटन नीति के तहत एमएसएमई के अंतर्गत कैरवान खरीद सकते हैं। इसके लिए सरकार की ओर से तय अनुदान भी दिया जा रहा है। इसका पर्यटकों और उत्तराखंड़ वासियों दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि यात्रा के शौकीन पर्यटकों के लिए यह कैंपिंग वाहन घर जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। इस वाहन के साथ आप सोशल डिस्टेंसिंग को मेंनटेंन करते हुए सड़क के रास्ते कहीं भी यात्रा कर सकते हैं। कैरवान के जरिए पर्यटक अपने पसंदीदा पर्यटन स्थल पर सड़क यात्रा कर आसानी से पहुंच सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस वाहन में एलसीडी टीवी, सैटेलाइट टीवी, जीपीआरएस नेविगेशन सिस्टम, वॉशरूम, पेंट्री, कॉफी मेकर, माइक्रो वेव आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं।
कैरवान से ट्रैवल करने का एक बड़ा फायदा ये है कि इसमें बैठकर आपको कभी ऐसा अनुभव नहीं होगा कि आप घर से बाहर आए हुए हैं। कैरवान के जरिए पर्यटक दूरदराज के इलाकों, जंगलों और नदियों के किनारे अपनी उत्तराखंड यात्रा को यादगार बना सकते हैं। कैरवान में घर जैसा ही वातावरण मिलता है, इसमें आप अपने परिवार, दोस्तों के साथ मस्ती करते हुए आराम से यात्रा कर सकते हैं। वहीं यह स्थानीय लोगों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के साथ उन्हें स्वावलम्बी बनाने की दिशा में एक अच्छी पहल है। कैरवान के माध्यम से पर्यटक सड़क यात्रा कर अपनी पसंदीदा स्थल पर पहुंच सकेंगे। कैरवान में आवास भोजन की सुविधा होने के चलते पर्यटकों को अलग से होटल की बुकिंग नहीं करानी पड़ेगी।
इस अवसर पर युगल किशोर पंत, अपर सचिव पर्यटन, कर्नल अश्विनी पुंडीर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (साहसिक पर्यटन), विवेक सिंह चौहान अपर निदेशक, योगेंद्र सिंह गंगवार उप निदेशक, एस.एस. सामंत वरिष्ठ शोध अधिकारी समेत विभाग के अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

चारधाम यात्रा को सुलभ बनाने के लिए वाहनों की लॉटरी निकली शुरु

गढ़वाल मंडल टैक्सी चालक एवं मालिक एसोसिएशन ऋषिकेश के तत्वावधान में एसोसिएशन के हरिद्वार रोड स्थित मुख्यालय में चार धाम यात्रा के मध्य नजर टैक्सी वाहनों की लॉटरी निकाली गई। पंडित आसाराम सकलानी के वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय पाल सिंह रावत ने चार धाम यात्रा हेतु टैक्सी वाहनों की लॉटरी निकाली। टैक्सी वाहन संख्या नं. यूके-14टीए 1569 मेघा चौहान की टैक्सी का प्रथम नंबर निकला।
इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजयपाल सिंह रावत ने कहा कि देश-विदेश से आने वाले तीर्थ यात्रियों को अतिथि देवो भव की भावना के अनुसार सुगम, सुलभ, वाजिब दाम पर दुर्घटना रहित यात्रा कराना एसोसिएशन का मुख्य उद्देश्य है। इस दौरान सचिव विजेंद्र कंडारी, प्रधान नरेंद्र वर्मा, सह सचिव रमेश सिंह रावत, कोषाध्यक्ष उमेश चौहान, उप कोषाध्यक्ष जोग जीवन बनर्जी, सोहन सिंह रौतेला, ग्रीश नेगी, दिगंबर सिंह बिष्ट, अनुपम भाटिया, शिवकुमार बजाज, भगवत पांडे, छोटेलाल दीक्षित, वीरेंद्र कुमार मिश्रा, अमर सिंह, देशराज, जगबीर खरोला, आदि टैक्सी चालक एवं मालिक उपस्थित थे।

राफ्ट संचालकों में खुशी, साहसिक रोमांच का सफर हुआ शुरु

पर्यटन व्यवसाय से जुड़े 15 हजार लोगों को पर्यटन विभाग की ओर से अब तक 7 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है। उक्त बात गंगा नदी राफ्टिंग रोटेशन समिति द्वारा साहसिक पर्यटन राफ्टिंग सीजन समारोह के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने अपने संबोधन में कहीं।
प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने रविवार को मुनिकीरेती स्थित खारास्रोत में गंगा नदी राफ्टिंग रोटेशन समिति द्वारा साहसिक पर्यटन राफ्टिंग सीजन समारोह का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर राफ्टिंग, एयरो स्पोर्ट्स सेवा प्रदाताओं सहित समस्त पर्यटन कारोबारियों को संबोधित करते हुए पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि साहसिक पर्यटन राफ्टिंग सीजन समारोह का शुभारंभ करते हुए उन्हें अपार प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने आयोजन कर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कोरोना काल के पश्चात साहसिक पर्यटन राफ्टिंग का प्रारंभ होना पर्यटन व्यवसायियों के लिए बेहद ही सुखद है।
पर्यटन मंत्री महाराज ने कहा कि कोविड संक्रमण के चलते आर्थिक मंदी से जूझ रहे चारधाम यात्रा और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों के लिए राज्य सरकार ने 200 करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। पर्यटन विभाग की ओर से अब तक पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लगभग 15 हजार लोगों को 7 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है।
महाराज ने कहा कि पर्यटन विभाग द्वारा विशेष क्षेत्र एवं गतिविधियों हेतु बनाई गई समितियों के पास अपने संसाधन से पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत 631 राफ्टिंग प्रति गाइड के हिसाब से 10 हजार रूपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी गई है। जिस पर 63 लाख 10 हजार की धनराशि व्यय की गयी।
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी पंजीकृत 301 राफ्टिंग, एयरो स्पोर्टस सेवा प्रदाताओं को राहत देते हुए उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा लिए जाने वाले लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क में भी छूट प्रदान की है। इस पर 65 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई।
महाराज ने कहा कि पर्यटन विभाग द्वारा एडवेंचर टूर ऑपरेटरों को भी बड़ी राहत देते हुए 30 लाख 30 हजार रूपये का आर्थिक पैकेज दिया गया है। इसके तहत 303 एडवेंचर टूर ऑपरेटरों को 10 हजार रूपये प्रति फर्म के हिसाब से एकमुश्त आर्थिक सहायता दी गई है।
इस अवसर पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, मुनिकीरेती नगर पालिका अध्यक्ष रोशन रतूड़ी, एसीईओ पर्यटन कर्नल अश्वनी पुंडीर, संयुक्त निदेशक पर्यटन विवेक चौहान, जिला साहसिक खेल अधिकारी सोवत राणा, दिनेश भट्ट, विकास भंडारी, हुकम सिंह रावत, रामपाल भंडारी, मदन बडोनी, धनवीर भंडारी, हेमंत चौहान, अनुराग रावत, राजेश पुंडीर, राजेंद्र भंडारी, अजय धमान्दा, लेखराज भंडारी, वीरेंद्र गुसाईं और पंकज भट्ट आदि उपस्थित थे।

टिहरी झील में सी प्लेन और व्यवसायिक गतिविधियां संचालित करने के लिए विशेष योजना तैयार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक दिवसीय जनपद भ्रमण के दौरान कोटी कॉलोनी में टिहरी झील का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने डोबरा चांठी पुल फ्लोटिंग हट्स का भी निरीक्षण किया। टिहरी झील को विश्वस्तरीय पर्यटक स्थल बनाने के लिए वेपकॉस कंपनी को तीन माह में डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए है। 1200 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से झील के आसपास व्यवस्थाएं स्थापित की जानी है। इससे बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि टिहरी झील को विश्व स्तरीय टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है उन्होंने कहा कि टिहरी झील में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिस को मूर्त रूप देने के लिए बुनियादी सुविधाएं स्थापित की जाएगी, ताकि पर्यटकों के आवागमन से स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो सके।
इस अवसर पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, स्थानीय विधायक धन सिंह नेगी विधायक घनसाली शक्ति लाल शाह, विधायक प्रतापनगर विजय सिंह पवार जिलाधिकारी इवा आशीष श्रीवास्तव, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट, अपर निदेशक पर्यटन पूनमचंद आदि उपस्थित थे।

सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर हो रही हैं मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर विभिन्न विभागों के अन्तर्गत सीएम घोषणाओं की समीक्षा अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन द्वारा की जा रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बुधवार को पर्यटन विभाग से सम्बन्धित सीएम घोषणाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्धारित समय सीमा के अन्दर सीएम घोषणाओं को पूर्ण करने के निर्देश दिये हैं। बैठक में बताया गया कि पर्यटन विभाग में मुख्यमंत्री घोषणा के अन्तर्गत 109 घोषणाएं हुई हैं, जिनमें से विभाग द्वारा 65 घोषणाओं में शासनादेश निर्गत किया जा चुका है।
अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि विभाग द्वारा उन घोषणाओं जिनके क्रियान्वयन हेतु शासनादेश निर्गत कर दिया गया है, विभाग द्वारा निरन्तर प्रभावी अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाय। विभाग द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि शासनादेश किये जाने हेतु 34 घोषणाएं अवशेष हैं। उन्होंने निर्देश दिये कि विभाग द्वारा उक्त के संदर्भ में समयबद्ध रूप से 1 माह के भीतर माह में शासनादेश निर्गत करने की कार्यवाही की जाय एवं घोषणाओं की पूर्ति हेतु निरन्तर अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाय।
बैठक में सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, प्रभारी सचिव एस०एन०पाण्डे, उपसचिव हीरा सिंह बसेड़ा, उप सचिव चिरंजी लाल उपस्थित थे।

11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है इंजीनियरिंग का नायाब नमूना गरतांग गली की सीढ़ियां

भारत-तिब्बत व्यापार की गवाह रही उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का देश-विदेश के पर्यटक दीदार करने लगे हैं। गरतांग गली की सीढ़ियों का पुनर्निर्माण कार्य जुलाई माह में पूरा किया जा चुका है। इसके बाद से ही ऐसे में रोमांचकारी जगहों पर जाने के शौकीन पर्यटकों के लिए यह जगह एक शानदार विकल्प है।

गरतांग गली की करीब 150 मीटर लंबी सीढ़ियां अब नए रंग में नजर आने लगी हैं। करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी गरतांग गली की सीढ़ियां इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है। इंसान की ऐसी कारीगरी और हिम्मत की मिसाल देश के किसी भी अन्य हिस्से में देखने के लिए नहीं मिलेगी।

1962 भारत-चीन युद्ध के बाद इस लकड़ी की सीढ़ीनुमा पुल को बंद कर दिया गया था, अब करीब 59 सालों बाद वह दोबारा पर्यटकों के लिए खोला गया है। कोरोना गाइडलाइन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस ही लोगों को पुल में भेजा जा रहा है। पेशावर से आए पठानों ने 150 साल पहले इस पुल का निर्माण किया था। आजादी से पहले तिब्बत के साथ व्यापार के लिए उत्तकाशी में नेलांग वैली होते हुए तिब्बत ट्रैक बनाया गया था। यह ट्रैक भैरोंघाटी के नजदीक खड़ी चट्टान वाले हिस्से में लोहे की रॉड गाड़कर और उसके ऊपर लकड़ी बिछाकर रास्ता तैयार किया था। इसके जरिए ऊन, चमड़े से बने कपड़े और नमक लेकर तिब्बत से उत्तरकाशी के बाड़ाहाट पहुंचाया जाता था। इस पुल से नेलांग घाटी का रोमांचक दृश्य दिखाई देता है। यह क्षेत्र वनस्पति और वन्यजीवों के लिहाज से काफी समृद्ध है और यहां दुर्लभ पशु जैसे हिम तेंदुआ और ब्लू शीप यानी भरल रहते हैं।

सामरिक दृष्टि से संवेदनशील है नेलांग घाटी
नेलांग घाटी सामरिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है। गरतांग गली भैरव घाटी से नेलांग को जोड़ने वाले पैदल मार्ग पर जाड़ गंगा घाटी में मौजूद है। उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी चीन सीमा से लगी है। सीमा पर भारत की सुमला, मंडी, नीला पानी, त्रिपानी, पीडीए और जादूंग अंतिम चौकियां हैं।

वहीं, सतपाल महाराज पर्यटन मंत्री उत्तराखंड कहा ने भारत सरकार ने पर्यटकों की आवाजाही पर लगाई थी रोक। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बने हालात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उत्तरकाशी के इनर लाइन क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया था। यहां के ग्रामीणों को एक निश्चित प्रक्रिया पूरी करने के बाद साल में एक ही बार पूजा अर्चना के लिए इजाजत दी जाती रही है। इसके बाद देश भर के पर्यटकों के लिए साल 2015 से नेलांग घाटी तक जाने के लिए गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से इजाजत दी गई।

पर्यटन सचिव ने बताया कि दिलीप जावलकर उत्तराखंड धरोहर संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके तहत नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का 64 लाख रुपये की लागत से पुनर्निर्माण कार्य पूरा करने के बाद पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। गरतांग गली के खुलने के बाद स्थानीय लोगों और साहसिक पर्यटन से जुड़े लोगों को फायदा मिल रहा है। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए यह एक मुख्य केंद्र बन रहा है।

वहीं, मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी, उत्तरकाशी ने कहा के पुनर्निर्माण कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पुरानी शैली में पुननिर्माण कार्यों को जुलाई माह में पूरा कर लिया गया था। कोरोना नियमों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस पर्यटकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।

नेलांग घाटी के आसपास-हर्षिल
हर्षिल, हिमालय की तराई में बसा एक गांव, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां से गंगोत्री की दूरी मात्र 21 किलो मीटर ही बचती है, जो कि हिन्दुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। गंगोत्री तक रास्ता अपने आप में इतना मनमोहक है कि एक बार से आपका मन नहीं भरेगा।

केदारताल
केदारताल उत्तराखंड में सबसे खूबसूरत झीलों में से एक ताल है। यह गंगोत्री से 18 किमी की दूरी पर स्थित, गढ़वाल हिमालय में दूर केदार ताल निश्चित रूप से साहसिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है। केदारताल से केदारगंगा निकलती है जो भागीरथी की एक सहायक नदी है।