तीर्थनगरी में व्यापारियों ने एकजुट होने का लिया निर्णय

तीर्थनगरी में व्यापारियों में एकजुटता काफी समय से देखने को नहीं मिल रही है। इसके चलते संगठन में एक पद सत्ताधारी तो दूसरा पद विपक्षी पार्टी की झोली में जाता है और नतीजा यह रहता है कि किसी भी मुद्दे पर आम सहमति नहीं बन पाती है। फिर चाहे अतिक्रमण का मामला हो, या प्रशासन के किसी भी आदेश का। एकजुट न हो पाने से प्रत्येक गली में अलग-अलग व्यापारिक संगठन तैयार हो गए है। इसका खामियाजा सीधा व्यापारियों को झेलना पड़ता है। मगर, आज एक पहल हुई और तीन मुख्य व्यापारिक संगठनों को एक बनाने पर जोर दिया गया।

इसके अतिरिक्त सभी व्यापारी मिलकर एक नया व्यापारिक महासंगठन बनायेंगे जो महानगर स्तर का होगा।

कपड़ा व्यापारी संगठन के अध्यक्ष राजीव मोहन ने कहा कि अगर तीनों व्यापार मण्डल एक नहीं होते तो ऋषिकेश का एक महानगर व्यापार मण्डल बनाया जाये।

स्वर्णकार संगठन के अध्यक्ष यशपाल पंवार ने कहा कि अगर नगर उघोग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के नेता एका नहीं करते तो हम सभी संस्थाओं को प्रांतीय उघोग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल से अपनी सम्बधता खत्म कर देनी चाहिये और अपना नया व्यापार मण्डल बनाकर ऐसे स्वार्थी नेताओं का बहिष्कार करना चाहिये।

व्यापार सभा के पूर्व अध्यक्ष नवल कपूर ने कहा कि ऋषिकेश के व्यापारियों का संगठन बनाना चाहिये जो कि मजबूत संगठन होगा और हमारी मजबूती से प्रदेश स्तरीय हर व्यापारिक संगठन हमसे जुड़ेगा।

पंजाबी महासभा के अध्यक्ष कृष्ण कुमार लाम्बा ने कहा कि ये कुछ चंद व्यापारी नेता जो केवल अधिकारियों की चाटुकारिता कर अपने स्वार्थ सिद्ध करने का काम करते हैं इनमे से कुछ तो इसलिये व्यापारी नेता बने हैं कि अपने उल्टे सीधे काम को बचा सके ऐसे नेताओं से हमें व्यापारियों को बचाना चाहिये व नया संगठन बनाना चाहिये और जब तक वार्ता नहीं हो जाती हम किसी भी सदस्यता का फार्म नहीं भरेंगे ।

व्यापार सभा के अध्यक्ष मनोज कालडा ने कहा कि कुछ लोग आज की इस बैठक में जाने से मना कर रहे थे परन्तु ये सही नहीं मेरा मानना है एक ही खिड़की में सदस्यता होनी चाहिये और सभी को जोड़कर समान अधिकार के साथ चुनाव लड़ने का अधिकार मिलना चाहिये ।

प्रदेश उघोग व्यापार मण्डल के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि शहर हित में तीनों संगठन एक हों मैं इसके लिये तैय्यार हूँ जो निर्णय सभी व्यापारी लेंगे मैं सहमत हूँ ।

बैठक का संचालन कर समाजसेवी जयेन्द्र रमोला ने कहा कि हम यहॉं पर लगभग 80 प्रतिशत प्रांतीय उघोग व्यापार मण्डल से जुड़े हैं और हमें एका का प्रयास करने के लिये नगर उघोग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के नेताओं से बात करने के लिये एक समिति बनानी चाहिये कि वे एक होकर व्यापारी हितों के लिये कार्य करें नाकि पद की लालसा के लिये व्यापारियों का स्तेमाल करें ।

बनी पांच सदस्यदीय कमेटी
बैठक में वार्ता करने के लिये एक पॉंच सदस्य की कमेटी बनाई गई। जिसमें मनोज कालडा, विनोद शर्मा, राजीव मोहन, राजकुमार तलवार, नवल किशोर, विवेक वर्मा व प्रदीप गुप्ता को शामिल किया गया।

बैठक में यह व्यापारी रहे मौजूद
बैठक में होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष मदन नागपाल, अजय गर्ग, दीपक प्रताप जाटव, पार्षद मनीष शर्मा, पार्षद देवेन्द्र प्रजापति, पार्षद जगत नेगी, हितेन्द्र पंवार, केवल कृष्ण लांबा, राजकुमार तलवार, धर्मेश मनचंदा, मधु जोशी, हर्षित गुप्ता, राजपाल ठाकुर, संजय पंवार, मनोज गोसाई, प्रदीप गुप्ता, मनोज साहल, गोविंद सिंह, विवेक वर्मा, अखिलेश मित्तल, अक्षत गोयल, सुनील गोयल, पंकज चंदानी, प्रदीप कुमार, विवेक तिवारी, हरीश दरगन, योगेश पाल, राधावल्लभ, पंकज गुप्ता, प्रमोद कुमार शर्मा, नागेंद्र सिंह, तनवीर सिंह, दीपक कुकरेजा, विनीत, राही कपाड़िया, हरिओम बेदी, यशपाल सिंह पवार, विनोद शर्मा, राजीव मोहन, कपिल गुप्ता, नवल कपूर, सरदार विक्की सेठी, राजेश कुमार तायल, गगनदीप सिंह बेदी, जयपाल सिंह बिट्टू, संजय शर्मा, अरविंद कुमार, अतुल सरीन, अशोक नेगी, सतीश कालरा, राजीव आनंद, नटवर श्याम, दीपक कपूर, कपिल आनंद, रमन अरोड़ा, राधे मोहन साहनी, नितिन जैन, नितिन किशोर, रमनप्रीत सिंह, दीपक बंसल, गौरव अग्रवाल, हरिराम वर्मा, देवेश जैन, देवी प्रसाद, राजकुमार मारवा, संजय भट्ट, सुमित त्यागी, जितेंद्र आनन्द, पंकज अरोड़ा, राजीव गावड़ी, शिवम गेरा, रमन अरोड़ा, ज्योति शर्मा, सरदार बूटा सिंह, जितेंद्र सिंह पवार, नितिन गुप्ता, अजीत सिंह गोल्डी, अनु गुलाटी, ललित सक्सेना, मनोज त्यागी, अमित कुमार, जितेंद्र पाल पाटी, गौरव यादव, नीरज यादव, राजेश साहनी, मनोज सेठी, धीरज मखीजा, एकांत गोयल आदि शामिल थे।

सीएम त्रिवेंद्र ने पर्वों पर स्थानीय उत्पादों को खरीदने पर दिया जोर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास में हिमालय देवभूमि संसाधन ट्रस्ट द्वारा पहाड़ी अनाजों से तैयार मिठाईयों ‘‘देवभोग स्वीट्स’’ का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से एवं मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देशों पर वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए यह नई पहल शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह एक सराहनीय पहल है। देवभूमि प्रसाद की सफलता के बाद अब देवभोग स्वीट्स की प्रगति की कहानी शुरू हो रही है। उन्होंने कहा कि दीपावली का पर्व आने वाला है। पर्वों में उत्तराखण्ड के अनाजों पर आधारित स्वास्थ्यवर्धक मिठाईयों की डिमांड तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने जनता से पर्वों पर स्थानीय उत्पादों का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि स्वीट्स के लिए ऑनलाईन मार्केटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाय।

हिमालय देवभूमि संसाधन द्वारा उत्तराखण्ड के मन्दिरों के लिए स्थानीय अनाजों पर आधारित प्रसाद बनाया जा रहा है। अब इसको और अधिक विस्तारित करते हुए उत्तराखण्ड के 12 स्वास्थ्य वर्धक अनाजों से मिठाईयां बनाई जा रही है। इस कार्य में हिमालय देवभूमि संसाधन के संस्थापक गोविन्द सिंह मेहर एवं महासचिव बी.एस.रावत एवं अंशुल गुप्ता के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा ये मिठाईयां और प्रसाद बनाया जा रहा है। देवभोग प्रसाद की डिमांड काफी तेजी से बढ़ी है। उत्तराखण्ड के स्थानीय अनाजों से जो मिठाइयां एवं प्रसाद बनाया जा रहा है, यह अनाज भी स्थानीय स्तर पर लोगों से खरीदा जा रहा है। जिससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने के साथ ही उच्च गुणवत्ता युक्त उत्पाद भी लोगों को मिल रहे हैं। इन मिठाइयों में जिन स्थानीय अनाजों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उनमें मंडुआ, चैलाई, झंगोरा, कुट्टू का आटा, गहत, सोयाबीन, उड़द की दाल का प्रयोग किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट, आईटी सलाहकार रविन्द्र दत्त, विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते उपस्थित थे।

बाजारों में जाल निर्माण कार्य का मेयर अनिता ने किया निरीक्षण

बाजारों में जल निकासी की समस्या का स्थाई समाधान कराने के लिए नगर निगम प्रशासन नालियों पर जाल लगाए जाने का कार्य कर रहा है। इससे पूर्व निगम प्रशासन की ओर से नालियों में बरसाती पानी की निकासी के लिए जर्जर पाइपों को भी बदल कर नई पाईप लाइन भी डाली गई हैं। उक्त तमाम कार्यों का निरीक्षण मेयर अनिता ममगाईं ने किया।

विजयदशमी के सरकारी अवकाश के बावजूद नगर निगम मेयर अनिता ममगाईं उक्त निर्माण कार्य का जायजा लेने बाजार पहुंची। जहां उन्होंने व्यापारियों को पर्व की बधाई देने के साथ जाल लगाने के निर्माण कार्य में निगम को किए गए सहयोग के लिए उनका आभार जताया। उन्होंने बताया कि शहर के तमाम बाजारों में जल निकासी की समस्या का स्थाई समाधान कराने के लिए जहां जर्जर पाइप लाइनों को बदला जा रहा है वहीं जाल लगाकर दुकानों की सुंदरता के लिए टाईले भी लगवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदार को समय अवधि में निर्माण कार्य पूर्ण करने के लिए निर्देशित भी किया गया है। निरीक्षण के दौरान सहायक अभियंता आनंद मिश्रवाण, जल संस्थान से जेई वीरेंद्र राणा, पार्षद रीना शर्मा, विजय बडोनी, कमला गुनसोला, अजीत गोल्डी, नितिन गुप्ता, राजेश भट्ट, पंकज शर्मा, सुनील उनियाल, मदन कोठारी, हितेंद्र पंवार, संजय पवार, प्रवीण अग्रवाल, मेजर कृष्ण खुराना, प्रिंस डंग, भारत डंग, जितेंद्र अग्रवाल, अमरीक, प्रीतपाल सिंह आदि मौजूद रहे।

शपथ पत्र देकर अब उत्तराखंड में वाटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर को मंजूरी

उत्तराखंड में वाटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर को मंजूरी मिल गई हैं। इससे पूर्व कोरोना संक्रमण के चलते राज्य में इस पर रोक लगा दी गई थी। अब मंजूरी मिलने के बाद जिला प्रशासन को गाइडलाइन का पालन कराना होगा।

मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने आदेश जारी कर कहा कि वाटर स्पोर्ट्स, ट्रैकिंग, पर्वतारोहण, ऐरो स्पोर्ट्स, कैंपिंग संचालित करने वालों को सशर्त मंजूरी दी जा रही है। कंपनी, एजेंसी, टूर ऑपरेटर्स को कोरोना संक्रमण रोकने को लेकर अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना होगा।

कहा कि एजेंसियों को जिला प्रशासन, जिला पर्यटन अधिकारियों को शपथ पत्र देना होगा। गाइडलाइन के तहत गतिविधियां संचालित होंगी। आरोग्य सेतु एप हर व्यक्ति को अपने मोबाइल फोन पर डाउनलोड करना होगा।

उद्यमिता, नवाचार एवं स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए राज्य में यह नई पहल

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में ‘मुख्यमंत्री सलाहकार समूह’ की प्रथम बैठक आयोजित की गई। राज्य में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने ‘‘स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता पर मुख्यमंत्री सलाहकार समूह’’ स्थापित किया है। राज्य में स्टार्टअप ईकोसिस्टम विकसित करने के लिए इस समूह द्वारा नवाचार और उद्यमिता के लिए राज्य में एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने, अनुसंधान और नये उत्पादों, सेवाओं, व्यापार मॉडल के विकास को प्रोत्साहित करने, उपयुक्त पॉलिसी योजनाओं और आवश्यक समर्थन प्रणाली को विकसित करने हेतु परामर्श देना है। इसके अलावा पाठ्यक्रम, मॉड्यूल प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में नवाचार और उद्यमशीलता के बारे में जागरूकता, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निकायों और एजेंसियों के साथ आवश्यक साझेदारी हेतु सलाह देना है। बनाए गए ‘मुख्यमंत्री सलाहकार समूह’ में 07 सरकारी एवं 06 गैर सरकारी सदस्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि आत्मनिर्भरता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकल के लिए वोकल बनने की जो बात कही गई यह उस दिशा में प्रयास है। उद्यमिता, नवाचार एवं स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए राज्य में यह नई पहल की जा रही है। जिसमें सरकारी के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के गैर सरकारी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इन विशेषज्ञों की सलाह से राज्य के औद्योगिक विकास एवं हिमालयी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड विविध जैव विविधताओं वाला राज्य है, यहां कि जैव विविधता का फायदा लेते हुए इस दिशा में अनेक कार्य हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे नवोदित राज्य में औद्योगिक विकास की बहुत संभावनाएं हैं। राज्य में इन्वेस्टर समिट के दौरान सवा लाख करोड़ के एमओयू हस्ताक्षरित किये गये। जिसमें से 25 हजार करोड़ के कार्यों की ग्राउंडिंग हो चुकी है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कोविड 19 के जिस दौर से हम गुजर रहे हैं, उससे औद्योगिक गतिविधियां जरूर प्रभावित हुई हैं। इस दौर दिक्कतें भी आई हैं और नई संभावनाएं भी विकसित हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस समूह के विशेषज्ञों द्वारा उत्तराखण्ड में मेडिकल एवं मेंटल हेल्थ को लेकर क्या कार्य हो सकते हैं, इस पर जरूर सुझाव दें। उन्होंने कहा कि ग्रुप के सभी सदस्यों के सुझावों पर गम्भीरता से कार्य किया जायेगा।

वीडियो कांफ्रेंस से विशेषज्ञों के सुझाव
वीडियो कांफ्रेंस से कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों और अवसरों, नवाचार और उद्यामिता को बढ़ावा देने के लिए नई पहलों पर चर्चा की गई। इंडियन एंजल नेटवर्क के फाउण्डर डॉ. सौरभ श्रीवास्तव ने सुझाव दिया कि राज्य में उद्यमिता के विकास के लिए जो भी योजना बने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से बने। स्टार्टअप के तहत जॉब क्रियेशन पर विशेष ध्यान दिया जाय। उत्तराखण्ड के उत्पादों की अलग ब्रांडिंग हो, वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जाय। नैना लाल किदवई ने कहा कि रूरल टूरिज्म एवं होम स्टे को बढ़ावा दिया जाय। एग्रो प्रोसेसिंग एवं फोरेस्टरी सेक्टर में अनेक कार्य किये जा सकते हैं। विनीत नायर ने कहा कि मेंटल हेल्थ के क्षेत्र में अनेक कार्य हो सकते हैं। हमें सबसे पहले बच्चों के मेंटल हेल्थ पर फोकस करना होगा। स्टार्टअप का भविष्य साइंस और तकनीक पर आधारित है। इस दिशा में पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की जरूरत है। रमन रॉय ने कहा कि लाईवलीहुड बिजनेस पर ध्यान देने की जरूरत है। राज्य बिजनेस के कल्चर को प्रमोट करने की जरूरत है। विभिन्न सेक्टर में कार्य करने के लिए प्रत्येक सेक्टर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने होंगे। संजीव बिखचंदानी ने कहा कि राज्य में कुछ बड़े उद्योग स्थापित करने होंगे। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत अनेक कार्य किये जा सकते हैं।

कोरोना महामारी से नुकसान में चल रहे पर्यटन कारोबारियों के लिए सरकार की पहल, होटल और होम स्टे पर मिलेगी छूट

कोरोना महामारी से आर्थिक नुकसान पर चल रहे पर्यटन कारोबारियों को अब सरकार राहत देने जा रही है। सरकार ने राज्य में पर्यटन प्रोत्साहन कूपन योजना को अपनी मंजूरी दी है। होटलों और होम स्टे में तीन दिन तक ठहरने की बुकिंग करने पर सरकार की ओर से 25 प्रतिशत या अधिकतम एक हजार रुपये की छूट के लिए कूपन दिया जाएगा। इस कूपन पर होटल और होम स्टे में कमरे के बिल पर छूट मिलेगी।

देहरादून स्मार्ट सिटी पोर्टल पर पर्यटक श्रेणी में पंजीकरण करने वाले पर्यटकों को कम से कम तीन दिन ठहरने पर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के माध्यम से अधिकतम एक हजार और कम से कम 25 प्रतिशत प्रतिदिन छूट का कूपन जारी किया जाएगा।

बता दें कि छूट का लाभ ऑनलाइन बुकिंग पर ही मिलेगा। कूपन के माध्यम से गढ़वाल मंडल पर्यटन विकास निगम, कुमाऊं मंडल पर्यटन विकास निगम के साथ ही निजी होटल और होम स्टे में कमरे के बिल में छूट दी जाएगी। देहरादून जिले में मसूरी, चकराता, ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र, हरिद्वार जिले में नगर निगम क्षेत्र, पौड़ी जिले में कोटद्वार को छोड़ कर पूरा जिला, नैनीताल जिले में हल्द्वानी ओर काठगोदाम क्षेत्र को छोड़ कर पूरे जिले में योजना लागू होगी। ऊधमसिंह नगर जिले में यह योजना लागू नहीं होगी।

अनलॉक-चार में बाजार, धार्मिक स्थलों, मॉल, बाजार आदि को खोलने की अनुमति मिली

राज्य सरकार ने अनलॉक-चार की एसओपी जारी कर नीट और जेईई परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों को छूट दी है। नई एसओपी में बाहर से आने वाले लोगों को तीन दिन की बजाय अब चार दिन की एनटीपीसीआर निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट पर छूट मिलेगी। स्मार्ट सिटी की वेबसाइट http://dsclservices-org-in/apply-php पर पंजीकरण की शर्त को बरकरार रखा गया है। 
मुख्य सचिव ओमप्रकाश की ओर से जारी की गई एसओपी में वे तमाम रियायतें हैं जो केंद्रीय गृह मंत्रालय की एसओपी में दी गईं थीं। बाजार, धार्मिक स्थलों, मॉल, बाजार आदि को खोलने की अनुमति दी गई है। प्रदेश में भी 21 सितंबर के बाद पहले के अधिकतम 50 लोगों की शर्त को हटाकर 100 कर दिया गया है। स्कूल, कॉलेज में छात्र 21 के बाद सशर्त जा सकेंगे। पार्कों आदि में 21 के बाद अधिकतम 100 लोग सुबह की सैर आदि कर पाएंगे। 
स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर पंजीकरण की शर्त को बरकरार रखा गया है। यह भी साफ कर दिया गया है कि व्यक्ति और सामान की आवाजाही में किसी तरह का प्रतिबंध नहीं रहेगा। कंटेनमेंट जोन की पाबंदियों को बरकरार रखा गया है। वरिष्ठ नागरिक, गर्भवती महिलाओं आदि को पहले से मिल रही छूट जारी रहेगी। 
वहीं, राज्य से बाहर हाई कोविड लोड शहरों को जाने वालों को पांच दिन में वापस लौटने पर क्वारंटीन नहीं होना होगा। सात दिन से अधिक की वापसी पर इन्हें 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन होना होगा। विदेश से आने वाले लोगों को सात दिन संस्थागत और सात दिन होम क्वारंटीन में रहना होगा। 

– राज्य में बाहर से आने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना होगा और स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होगा। 
– कोविड हाई लोड शहरों से आने वालों को सात दिन संस्थागत और सात दिन के लिए होम क्वारंटीन होना होगा। लेकिन, बिना लक्षण वाले और आरटीपीसीआर की निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट वालों को क्वारंटीन नहीं होना होगा। 
– ऐसे सभी लोग जो सात दिन के लिए अंतिम संस्कार या अन्य वजहों से आते हैं, उन्हें भी क्वारंटीन नहीं होना होगा।
– कोविड हाई लोड वाले शहरों से होकर हवाई जहाज से आने वालों को 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन होना होगा।

बाहर से आने वाले और उद्योग प्रबंधन की सहमति वाले कर्मियों, विशेषज्ञों को क्वारंटीन नहीं होना होगा। इसी तरह वीवीआईपी मूवमेंट पर भी रोक नहीं है। सेना को क्वारंटीन से लेकर अन्य सभी इंतजाम अपने स्तर पर करने होंगे।

– प्रदेश में अधिक संक्रमण वाले इलाकों में कंटेनमेंट जोन बनेंगे और जिला प्रशासन अपनी विभागीय वेबसाइट पर जोन की सूचना प्रदर्शित करेंगे और इसकी सूचना राज्य सरकार के साथ ही केंद्र को भी दी जाएगी।
– 30 सितंबर तक शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे
– ऑनलाइन शिक्षा जारी रहेगी और इसे प्रोत्साहित किया जाएगा। 21 सितंबर से 50 प्रतिशत स्टाफ स्कूल आ सकेगा।
– कंटेनमेंट जोन से बाहर के स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक के छात्र 21 सितंबर से स्कूल आ सकेंगे। अभिभावकों की लिखित अनुमति लेनी होगी और स्कूल आना स्वैच्छिक होगा।

वहीं, 21 सितंबर से राजनीतिक सभा, खेल, धार्मिक गतिविधियों के लिए सौ तक की संख्या में लोग भाग ले सकेंगे। 20 सितंबर तक अंतिम संस्कार में 20 से ज्यादा और विवाह समारोह में 50 ज्यादा लोग शामिल नहीं होंगे। इसके बाद सौ की संख्या की अनुमति होगी। 21 सितंबर से ओपन एअर थियेटर खुल सकेंगे।

– जिला प्रशासन कंटेनमेंट जोन के बाहर बिना राज्य सरकार की अनुमति के लॉकडाउन नहीं करेगा।
– सामाजिक दूरी के नियम का पालन कराने के लिए धारा 144 लगाई जा सकेगी।
जेईई, नीट सहित अन्य परीक्षा के छात्रों और अभिभावकों को भी कराना होगा पंजीकरण
– इन सभी को स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होगा। इनको क्वारंटीन नहीं होना होगा। राज्य से बाहर से आने वाले और राज्य में जिलों के बीच आवागमन करने वाले छात्रों पर भी यह नियम लागू होगा। जिला प्रशासन इनके आने जाने की व्यवस्था करेगा।
– प्रदेश में एक जिले से दूसरे जिले में जाने वाले लोगों को भी स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होगा। इनको भी क्वारंटीन नहीं किया जाएगा।

यूजेवीएनएल ने विद्युत उत्पादन में अपना रिकाॅर्ड तोड़ा

उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) ने वित्तीय वर्ष 2018-2019 में पिछले वर्ष के मुकाबले 288 मिलियन यूनिट अधिक बिजली का उत्पादन कर रिकॉर्ड कायम किया है। यूजेवीएनएल के एमडी संदीप सिंघल ने बताया कि वर्ष 2011-12 के बाद यह दूसरा अवसर है जब विद्युत गृहों में इतना उत्पादन हुआ है। बीते वित्तीय वर्ष में उत्पादन लक्ष्य 4800 मिलियन यूनिट के सापेक्ष 5075 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया गया। यह वार्षिक लक्ष्य का 105.7 प्रतिशत है। लघु जल विद्युत परियोजनाओं के उत्पादन भी शामिल कर लिया जाए तो इस वर्ष 5088.80 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन किया गया। निगम की स्थापना के बाद से अभी तक का यह सर्वाधिक उत्पादन भी है। इससे पूर्व निगम का किसी भी एक वर्ष का सर्वाधिक उत्पादन 5262 मिलियन यूनिट था।
रिकॉर्ड विद्युत उत्पादन की स्थिति न्यूनतम ई-फ्लो (एमईएफ) लागू होने के बाद की है। वर्ष 2011-12 में न्यूनतम ई-फ्लो के नियम का प्रविधान नहीं था। न्यूनतम ई-फ्लो के कारण निगम का उत्पादन 244 मिलियन यूनिट कम रहने का आकलन किया गया था। एमईएफ के तहत प्रत्येक बांध एवं बैराज से न्यूनतम ई-फ्लो छोड़ना अनिवार्य होता है। संदीप सिंघल (एमडी, यूजेवीएनएल) का कहना है कि जल विद्युत परियोजनाएं अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। रिकॉर्ड उत्पादन भविष्य के लिए बेहतर संकेत है। आने वाले दिनों में मांग के अनुरूप आपूर्ति करने में निगम सक्षम हो जाएगा।

कोरोना काल में जीडीपी धड़ाम, तिमाही के आंकड़ें हुए जारी

कोरोना से निपटने के लिए लागू लॉकडाउन का जीडीपी ग्रोथ पर बेहद विपरीत असर देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। 1996 के बाद से यह पहला मौका है, जब जीडीपी के तिमाही नतीजों में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 1996 से ही देश में जीडीपी के तिमाही नतीजे घोषित किए जाने का प्रचलन है। बीते साल इसी अवधि में जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी थी। इसके अलावा जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी की रफ्तार 3.1 पर्सेंट थी, जो बीते 8 सालों का सबसे निचला स्तर था। इस लिहाज से देखें तो कोरोना ने भारत की जीडीपी पर बुरी तरह कहर बरपाया है। मौजूदा तिमाही और इस पूरे वित्त वर्ष में ही इसका असर देखने को मिल सकता है।
सरकार ने जीडीपी के आंकड़े जारी करते हुए कहा है कि कोरोना काल में निजी निवेश में तेजी से कमी आई है और उपभोक्ता में गिरावट दर्ज की गई है। इसी के चलते जीडीपी ने गोता लगाया है। देश की जीडीपी जून तिमाही में 26.9 लाख करोड़ रुपये रही है, जबकि बीते साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 35.35 लाख करोड़ रुपये का था। इस तरह बीते साल की तुलना में जीडीपी ग्रोथ में 23.9 पर्सेंट की कमी दर्ज की गई है।बता दें कि लॉकडाउन के बाद केंद्र सरकार ने देश में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए करीब 21 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया था, लेकिन यह आंकड़ा बताता है कि सरकारी उपायों से अर्थव्यवस्था पर लोगों का भरोसा नहीं बढ़ा है।
इसके अलावा देश के 8 कोर उद्योगों में भी उत्पादन में 9.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई में उर्वरक को छोड़कर अन्य सातों क्षेत्रों कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, इस्पात, सीमेंट तथा बिजली क्षेत्र के उत्पादन में गिरावट आई है। जुलाई में इस्पात का उत्पादन 16.5 प्रतिशत, रिफाइनरी उत्पादों का 13.9 प्रतिशत, सीमेंट का 13.5 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 10.2 प्रतिशत, कोयले का 5.7 प्रतिशत, कच्चे तेल का 4.9 प्रतिशत और बिजली का 2.3 प्रतिशत नीचे आया है। वहीं दूसरी ओर जुलाई में उर्वरक का उत्पादन 6.9 प्रतिशत बढ़ा।

जीएसटी काउंसिल ने मामना राज्यों को भारी राजस्व का नुकसान

जीएसटी काउंसिल की करीब 5 घंटों तक चली विशेष बैठक में राज्यों के राजस्व की भरपाई के मुद्दे पर गंभीर चर्चा की गई। काउंलिस की बैठक में इस एक खास मुद्दे पर कई विकल्पों को ध्यान में रखकर चर्चा हुई। सभी राज्यों के वित्त मंत्री इस बात पर सहमत थे कि साल 2020-21 कोविड की वजह से काफी मुश्किल भरा रहा है और इस वजह से जीएसटी राजस्व में और ज्यादा गिरावट देखी गई। काउंसिल का आकलन है कि इस साल के लिए राज्यों को राजस्व का कुल घाटा 2 लाख 35 हजार करोड़ का हो सकता है।
काउंसिल में इस मुद्दे पर साफ चर्चा हुई कि ये घाटा केवल जीएसटी की वजह से नहीं हुआ है बल्कि कोविड की वजह से भी राज्यों को काफी नुकसान हुआ है। जीएएसटी का असर समझें तो इस साल के लिए ये घाटा 97,000 करोड़ रूपए का हो सकता है। चर्चा के बाद राज्यों के सामने दो विकल्प दिए गए हैं। वे चाहें तो जीएसटी राजस्व घाटे के 97000 करोड़ के लिए आरबीआई से कम ब्याज दर पर कर्ज ले सकते हैं। इस विकल्प में उन्हें कम उधार लेना पड़ेगा और साल 2022 के बाद कंपन्सेशन सेस के जरिए जो संग्रह किया जाएगा उससे घाटे की भरपाई की जाएगी।
दूसरे विकल्प में राज्य कुल 2,35,000 करोड़ की राशि के घाटे की भरपाई के लिए आरबीआई से उधार ले सकते हैं जिसमें कोविड की वजह से नुकसान भी शामिल है। चर्चा के बाद एक बात साफ हो गई कि जीएसटी के नुकसान के लिए उधार केन्द्र सरकार को नहीं लेना होगा। अब ये विकल्प राज्यों के ऊपर छोड़ दिया गया है। दोनों विकल्पों पर चर्चा के लिए राज्यों को 7 दिनों का वक्त दिया गया है और परिषद सात दिनों के बाद फिर से इन विकल्पों पर अंतिम फैसला लेगी।