दिल्ली हाईकोर्ट ने आखिर क्यों कहा कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के नारे ढ़ोंग

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार पर तीखा व्यंग्य कसा है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के नारों को कोर्ट ने ढोंग करार देते हुए कहा कि केंद्र सरकार स्थानीय उद्यमियों को बढ़ावा देने के मामले में ‘पाखंडी’ साबित हुई है। हाईकोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी विभिन्न क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सर्विस उपलब्ध कराने के लिए निकले टेंडरों में कंपनियों की योग्यता के पैमाने में बदलाव को लेकर की है।
हाईकोर्ट की पीठ सेंटर फॉर एविएशन पॉलिसी, सेफ्टी एंड रिसर्च की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने केंद्र और एएआई को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है और साथ ही निर्देश दिया कि टेंडरों के आवंटन की वैधता याचिका के निस्तारण पर आने वाले फैसले पर निर्भर होगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर राजनीतिक नेतृत्व पर सख्त रुख दिखाया और कहा, यह बेहद दुख कि बात है कि एकतरफ सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर’ बनने की बात कर रही है तथा दूसरी तरफ ऐसे टेंडर निकालती है, जो छोटी कंपनियों को क्षेत्रीय हवाईअड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सर्विस के लिए हिस्सेदारी करने से रोकते हैं।
जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा, असल में यह दिखता है कि यदि आप वास्तव इन लोगों (छोटी कंपनियों) को हटाना चाहते हैं तो ऐसा ही कहिए। अपने भाषणों में आप बड़ी बड़ी बातें करते हैं। आपका राजनीतिक नेतृत्व मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत की बात करता है, वे स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कहते हैं, लेकिन आपकी कार्रवाई आपके शब्दों से मेल नहीं खाती। आप पूरी तरह पाखंडी हैं।
पीठ ने एडिशन सॉलिसिटर जनरल संजय जैन से अपने राजनीतिक नेतृत्व से यह बोलने के लिए कहा कि यदि आप इस तरह से चलना चाहते हैं तो मेक इन इंडिया पर भाषण क्यों देते हैं। संजय जैन केंद्र सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की तरफ से उपस्थित हुए थे। पीठ ने उनसे सवाल किया, क्या वे (राजनीतिक नेतृत्व) को इसके बारे में पता भी है। पीठ ने कहा, हम कहते हैं कि इस देश या उस देश से आयात बंद करो और दूसरी तरफ हम हमारे अपने उद्यमियों को भी विफल कर रहे हैं।
टेंडर में भाग लेने के लिए 35 करोड़ रुपये से ज्यादा की उपलब्धता और शेड्यूल्ड एयरलाइंस के साथ काम करने की योग्यता का पैमाना बनाया गया है। इसका हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा, आप बड़ी जेब और शायद विदेशी टाइप वाले बड़े खिलाड़ी (कंपनियां) को ही अंदर आने देना चाहते हैं।
क्षेत्रीय हवाईअड्डों पर जहां आने वाली फ्लाइटों की संख्या कुछ ही होती हैं, वहां काम कर रहे छोटे खिलाड़ियों के चार्टर्ड एयरलाइंस को संभालने के अनुभव की आपने अनदेखी कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा, यदि छोटे खिलाड़ियों को विकसित नहीं होने दिया जाएगा, तब कुछ ही स्थापित बड़े खिलाड़ी बचेंगे, जो अपने मार्केट प्रभुत्व के कारण सरकार पर अपनी शर्तें थोपना चाहते कर देंगे।

’’रेड नोटिस’’ जारी हुआ तो पीएनबी को पहले किश्त मिल गई

पंजाब नेशनल बैंक से धोखाधड़ी मामले में बैंक को वसूली की पहली किश्त के रूप में 24.33 करोड़ रुपये मिले हैं। ये जानकारी कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने दी है। मंत्रालय ने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक ने सूचित किया है कि उसे अमेरिका से नीरव मोदी मामले में वसूली की पहली किश्त के रूप में अमेरिकी डॉलर 3.25 मिलियन (24.33 करोड़ रुपये के बराबर) प्राप्त हुए हैं। मंत्रालय ने कहा कि 2018 में पीएनबी ने मंत्रालय को अमेरिका में नीरव मोदी की कंपनियों के बारे में जानकारी दी थी। इन कंपनियों ने वहां न्यूयार्क के दक्षिणी जिले में दिवाला सुरक्षा के तहत याचिका दायर की थी। पंजाब नेशनल बैंक ने तब मंत्रालय से न्यूयार्क में दिवाला प्रक्रिया में मदद करने का अनुरोध किया था।
मंत्रालय की विज्ञप्ति में इसकी जानकारी देते हुये कहा गया है कि पीएनबी ने उसे सूचित किया है कि बैंक को उसके बकाये की वसूली के तौर पर 32.5 लाख डालर (24.33 करोड़ रुपये) की पहली किस्त प्राप्त हुई है। इसमें कहा गया है कि कर्जदार की संपत्ति के परिसमापन से अमेरिका के चैप्टर 11 ट्रस्टी के पास 1.10 करोड़ डालर (करीब 82.66 करोड़ रुपये) की राशि उपलब्ध है जिसे पीएनबी सहित बिना सुरक्षा प्रावधान वाले रिणदाताओं में वितरित किया जायेगा। आगे की वसूली अन्य खर्चो और दूसरे दावेदारों के दावों के निपटान पर निर्भर करेगी।
बता दें कि इससे पहले मंगलवार को ही इंटरपोल ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी नीरव मोदी की पत्नी एमी मोदी के खिलाफ धन शोधन के आरोपों में एक वैश्विक गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। उन्होंने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुरोध पर वैश्विक पुलिस निकाय इंटरपोल ने ‘रेड नोटिस’ जारी किया है।
एक बार भगोड़े के खिलाफ जारी किए गए इस तरह के नोटिस के बाद, इंटरपोल अपने 192 सदस्यीय देशों को उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने या हिरासत में लेने के लिए कहता है, जब उसे उनके देशों में देखा जाता है। इसके बाद प्रत्यर्पण या निर्वासन की कार्यवाही शुरू हो सकती है।
ऐसा माना जा रहा है कि 2018 में बैंक धोखाधड़ी का कथित मामला प्रकाश में आने के तुरंत बाद एमी मोदी देश छोड़ चुकी हैं। ईडी ने एमी मोदी पर अपने पति नीरव मोदी के अलावा उसके रिश्तेदार मेहुल चोकसी और अन्य पर धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरेाप लगाया है।
लंदन में मार्च, 2019 में गिरफ्तार किये जाने के बाद नीरव मोदी (49) इस समय ब्रिटेन की जेल में है। इस वर्ष की शुरूआत में मुंबई की एक अदालत ने उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था और उसकी संपत्तियों को जब्त किये जाने के भी आदेश दिये थे। ईडी नीरव मोदी से संबंधित लगभग 329 करोड़ रुपये की संपत्तियों को पहले ही जब्त कर चुकी है।
गौरतलब है कि मुंबई में पीएनबी की एक शाखा में दो अरब डॉलर से अधिक की कथित धोखाधड़ी के सिलसिले में धनशोधन के आरोपों में ईडी नीरव मोदी, चोकसी और अन्य की जांच कर रहा है।

40 लाख रुपए तक के सालाना सकल कारोबार को जीएसटी से छूट

वित्त मंत्रालय ने कहा कि 40 लाख रुपए तक के सालाना सकल कारोबार को जीएसटी से छूट है। शुरू में यह सीमा 20 लाख रुपए थी। वित्त मंत्रालय के ट्वीट में कहा गया है कि इसके अतिरिक्त डेढ़ करोड़ रुपए तक के सकल सालाना कारोबार पर संयोजन योजना का विकल्प चुना जा सकता है। इस योजना के तहत केवल एक प्रतिशत कर देना पड़ता है।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि वस्तु और सेवा कर-जीएसटी लागू होने के बाद ज्यादातर वस्तुओं पर कर की दर कम हो गई। अब 28 प्रतिशत जीएसटी केवल विलासिता की वस्तुओं पर ही लगता है। 28 प्रतिशत की कर श्रेणी की कुल दो सौ तीस वस्तुओं में से करीब दो सौ वस्तुओं को कम दर वाली श्रेणी में लाया गया है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि निर्माण क्षेत्र विशेष रूप से आवास क्षेत्र को अत्यधिक राहत देकर पांच प्रतिशत कर की श्रेणी में रखा गया है। किफायती आवास पर कर की दर घटाकर एक प्रतिशत की गई है। जीएसटी लागू होने के बाद से करदाताओं की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। शुरू में जीएसटी रिटर्न भरने वालों की संख्या 65 लाख थी जो अब एक करोड़ 24 लाख से अधिक हो गई है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि जीएसटी में सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह स्वचालित हैं और अब तक पचास करोड़ रिटर्न ऑनलाइन भरी गई हैं। जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक एक अरब 31 करोड़ ई-वे बिल सृजित किए गए हैं जिनमें से करीब चालीस प्रतिशत वस्तुओं के अंतर-राज्य परिवहन के लिए हैं। ई-वे बिल की संख्या स्थिर रूप से बढ़ रही है। इस वर्ष 29 फरवरी को एक दिन में सबसे अधिक 25 लाख से ज्यादा बिल बनाए गए।

ब्याज दरों में और कटौती के मिले संकेत, गर्वनर बोले हमारे तरकश में कई तीर

भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती के संकेत दिये है। वहीं, कोरोना महामारी से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए किए गए उपायों को जारी रखने का अप्रत्यक्ष रुप से दावा भी किया गया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एक कार्यक्रम में कहा कि, चाहे दर में कटौती हो या फिर अन्य नीतिगत कदम, हमारे तरकश के तीर अभी खत्म नहीं हुए हैं।
बता दें कि आरबीआई ने छह अगस्त को जारी नीतिगत समीक्षा में रेपो दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। केंद्रीय बैंक इससे पहले पिछली दो बैठकों में नीतिगत दर में 1.15 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। फिलहाल रेपो दर चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर 3.35 प्रतिशत और सीमांत स्थायी सुविधा (एमसीएफ) दर 4.25 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि महामारी की रोकथाम के बाद अर्थव्यवस्था को मजबूती के रास्ते पर लाने के लिए सावधानी के साथ आगे बढ़ना होगा। केंद्रीय बैंक द्वारा पिछले दिनों घोषित राहत उपायों के बारे में दास ने कहा, किसी भी तरह से यह नहीं मानना चाहिए कि आरबीआई उपायों को जल्द हटा लेगा। 
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि कोविड-19 महामारी के प्रकोप और अन्य पहलुओं पर एक बार स्पष्टता होने के बाद आरबीआई मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि पर अपने पूर्वानुमान देना शुरू कर देगा। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, बैंकिंग क्षेत्र लगातार मजबूत और स्थिर बना हुआ है और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एकीकरण सही दिशा में एक कदम है। दास ने कहा, बैंकों का आकार जरूरी है, लेकिन दक्षता इससे भी महत्वपूर्ण है। बैंक तनाव का सामना करेंगे, यह जाहिर सी बात है, लेकिन अधिक महत्वपूर्ण यह है कि बैंक चुनौतियों के समक्ष किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं और उसका सामना करते हैं।
वहीं, लॉकडाउन के दौरान आम जनता को राहत देने के लिए केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कई कदम उठाए। इन्हीं में से एक है लोन मोरेटोरियम यानी लोन स्थगन की सुविधा। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि लोन मोरेटोरियम की सुविधा एक अस्थायी समाधान था। ऋण समाधान ढांचे से कोविड-19 संबंधी बाधाओं का सामना कर रहे कर्जदारों को टिकाऊ राहत मिलने की उम्मीद है।
कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न स्थिति से आरबीआई की प्रतिक्रिया अभूतपूर्व रही है। आरबीआई द्वारा किए गए उपायों का उद्देश्य कोविड-19 की कठिन स्थिति से निपटना है और यह स्पष्ट रूप से स्थायी नहीं है। उन्होंने कहा कि महामारी के रोकथाम के बाद अर्थव्यवस्था को मजबूती के रास्ते पर लाने के लिए सावधानी के साथ आगे बढ़ना होगा। वित्तीय क्षेत्र को सामान्य स्थिति में लौटना चाहिए। दास ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह से यह नहीं मानना चाहिए कि आरबीआई उपायों को जल्द हटा लेगा। कुल मिलाकर, बैंकिंग क्षेत्र लगातार मजबूत और स्थिर बना हुआ है।

एकल खिड़की सिस्टम, कई योजनाओं को मिलेगा आकार

मुख्य सचिव ओम प्रकाश की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य में उद्योगों की स्थापना के लिये विभिन्न विभागों से वांछित स्वीकृतियों, अनुज्ञापनों, व अनुज्ञायें प्राप्त करने के लिये गठित उत्तराखण्ड उद्यम एकल खिड़की सुगमता एवं अनुज्ञापन अधिनियम 2012 के अंतर्गत राज्य प्राधिकृत समिति की बैठक आयोजित हुई।
बैठक में 12.936 करोड़ लागत के मैसर्स बागनाथ पावर प्रा0 लि0 सोलर पावर परियोजना लागत 12.936 करोड़ के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इस स्वीकृत प्रोजेक्ट में 13 लोगों को सेवायोजन प्राप्त होगा। इसी क्रम में पोलट्री हैचरी के 43 करोड़ 71 लाख लागत के भगवानपुर हरिद्वार प्रोजेक्ट को स्वीकृत दी गई, जिसमें 68 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा।
इसी क्रम में मेगा इन्डस्ट्रियल एण्ड इन्वेस्टमेंट पॉलिसी 2015 एण्ड मेगा टेक्सटाईल पार्क पॉलिसी 2014 के तहत मैसर्स बालाजी एक्शन बुल्डवेल द्वारा प्रस्तावित अक्टूबर 2018 से मार्च 2020 तक के विद्युत बिलों के छूट के प्रस्तावों पर स्टेट लेवल कमेटी के अनुमोदन के आधार पर मुख्य सचिव द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई, तथा ब्याज अनुदान की राशि 10 लाख 86 हजार 816 रूपये छूट की स्वीकृति दी गई।
मैसर्स गलवालिया इस्पात उद्योग प्रा0लि0 को अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 तक की अवधि के विद्युत बिल के छूट के प्रस्ताव पर स्टेट लेवल कमेटी के अनुमोदन के आधार पर मुख्य सचिव द्वारा स्वीकृति दी गई। इसी क्रम में मैसर्स फुटवियर को 18 लाख 4 हजार 968 रूपये की स्टांप डयूटी की अदायगी मैसर्स नीटछेम लाईफसाइन्स को 40 लाख 28 हजार 719 धनराशि की स्टाम्प डयूटी अदायगी, मैसर्स अल्टीमेट फ्लेक्सी को अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 तक की अवधि के विद्युत बिल की छूट स्टेट लेवल कमेटी की संस्तुति पर विद्युत बिल में छूट तथा 2 लाख 31 हजार का ब्याज अनुदान की स्वीकृति प्रदान की गई। इसी क्रम में मैसर्स पारले एग्रो प्रा0लि0 का ब्याज अनुदान स्वीकृत किया गया। मैसर्स सिवान्ता स्पूनटैक्स प्रा. लि. को अक्टूबर 19 से मार्च 2020 तक की अवधि के विद्युत बिल की स्टेट लेवल कमेटी के अनुमोदन के आधार पर स्वीकृत दी गई।
काशीपुर में मैसर्स ऊषा एलुमिनियम प्रा0 लि0 उद्योग लागत 22.40 करोड़ के प्रस्ताव, 24 करोड़ लागत के मैसर्स कार्बेट द आईकन स्पा एण्ड रिजोर्ट के प्रस्तुत प्रस्तावों को आगामी बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये।
एक अन्य परियोजना नैनबाग टिहरी में 3 मेगावाट क्षमता के मैसर्स रैसून एनर्जी प्रा0 लि0 के सोलर एनर्जी पावर जनरेशन के 12 करोड़ 45 लाख के प्रोजेक्ट तथा काशीपुर के 360 करोड़ के मैसर्स बेहल पेपर्स मिल लि0 के प्रस्ताव को तथा बाजपुर में मैसर्स मौनार्ड इण्डस्ट्रीज के प्रस्ताव को शीघ्र आगामी बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ने सम्बन्धित विभागों को उद्योगों इकाई की स्थापना में अपने विभाग से संबंधित आपत्तियों को शीघ्र निराकरण के निर्देश दिये।
बैठक में प्रमुख सचिव उद्योग मनीषा पंवार, सचिव राजस्व सुशील कुमार, एमडी सिडकुल एस. मुरूगेशन, अपर सचिव उर्जा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी तथा निदेशक उद्योग सुधीर नौटियाल, उपनिदेशक पल्लवी जोशी सहित सम्बन्धित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

हुडको ने की सोशल सेक्टर में निवेश की पेशकश

सचिवालय में हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा सचिवालय सभागार में मुख्य सचिव ओम प्रकाश के समक्ष हुडको द्वारा संचालित योजनाओं का प्रस्तुतिकरण दिया गया।
मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने हुडको के अधिकारियों को बताया कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा जी.एस.डी.पी. से 2 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण सुविधा प्राप्त करने के लिये केन्द्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा निर्धारित 4 क्षेत्रों यथा वन नेशन वन राशन कार्ड, शहरी निकायों के सुदुढ़ीकरण एवं पॉवर सेक्टर, राज्य को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के अंतर्गत जिला स्तर के बिजनेस रिफार्म, नवीनीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाना से सम्बन्धित रिफार्म्स कार्य दिसम्बर 2020 तक पूर्ण किये जाने हैं, जिसके लिये राज्य सरकार द्वारा प्रभावी कदम उठाये गये हैं। उन्होंने कहा कि इन रिफार्म्स के आधार पर राज्य को लगभग 4600 करोड़ रूपये की अतिरिक्त ऋण सुविधा मिलेगी। उन्होंने हुडको द्वारा प्रस्तावित सोशल सेक्टर में निवेश की पेशकश को उपयोगी बताते हुए उपस्थित विभागीय सचिवों को निर्देश दिये कि वे अपने अपने विभाग की योजनाओं में हुडको के सहयोग की संभावनाओं का पता लगायें। उन्होंने सचिव लोक निर्माण विभाग, नगर विकास, राजस्व एवं वी.सी एमडीडीए, एम.डी. यूकेएमआरसी को अपने अपने विभाग में हुडको की पेशकश की संभावनाओं को तलाशने के निर्देश दिये।
प्रस्तुतीकरण में उत्तराखण्ड में चल रहे परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, मेट्रो रेल, रोपवे, सड़क, पुल, फ्लाई ओवर, स्कूल, अस्पताल, ट्रांसपोर्ट नगर पार्किंग कॉम्प्लेक्स, उद्योग अवस्थापना, पॉवर प्रोजेक्ट में हुडको द्वारा निवेश करने की पेशकश की गई। प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया कि हुडको द्वारा जून 2020 तक उत्तराखण्ड में 708 करोड़ रूपये के ऋण जारी किये गये हैं, जिसमें हाउसिंग क्षेत्र में 373.07 करोड, शहरी अवस्थापना क्षेत्र में 324.77 करोड़, अन्य में 5.93 करोड़ तथा हुडको निवास योजना में 4.45 करोड़ अब तक जारी किये जा चुके हैं।
बैठक में सचिव मा. मुख्यमंत्री/चिकित्सा अमित सिंह नेगी, सचिव लोक निर्माण विभाग आर.के. सुधांशु, सचिव शहरी विकास शैलेश बगोली, वी.सी. एमडीडीए रणवीर सिंह चैहान, हुडको के क्षेत्रीय प्रमुख हरिमोहन भटनागर, सहायक महाप्रबंधक (परियोजना) संजय भार्गव, सहायक महाप्रबंधक (वित्त) अशोक ललवानी उपस्थित थे।

कृषि मंत्री ने कहा-रोजगारपरक खेती से प्रदेश के किसानों को जोड़ना होगा

कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने सचिवालय में कृषि एवं इससे सम्बद्ध विभागों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय योजनाओं की जानकारी सभी सीडीओ को होनी चाहिए, इसके लिए विभाग और सीडीओ आपसी समन्वय बनाकर कार्य किए जाएं।
कृषि मंत्री ने विभाग के अधिकारियों से विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि विभाग एवं सीडीओ द्वारा इनकी लगातार मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने किसानों की आर्थिकी को मजबूती प्रदान करने के लिए अधिकारियों के सुझाव भी मांगे ताकि अच्छे सुझावों को लागू किया जा सके। रेशम विभाग के अधिकारियों से कपड़ा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उत्पादन गति बढ़ाए जाने के निर्देश दिए।
कृषि मंत्री ने उनके द्वारा 3 वर्ष पूर्व जिला उद्यान अधिकारी एवं मुख्य उद्यान अधिकारी को एक-एक ग्राम गोद लिए गये गावों की अद्यतन जानकारी ली। उन्होंने कहा कि गोद लिए गए गावों में क्लस्टर बेस्ड कृषि पर अधिक फोकस किया जाए। उन्होंने प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना के अन्तर्गत ड्रिप सिंचाई को प्रायोरिटी के साथ लिए जाने के निर्देश दिए।
कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में विकास के लिए परंपरागत खेती को बढ़ावा देने के साथ ही इनोवेटिव होने की आवश्यकता है। उत्तराखण्ड में 90 प्रतिशत किसान स्मॉल एवं मार्जिनल लेवल के हैं। आत्मनिर्भर भारत योजना के अन्तर्गत एफ पी ओ की नाबार्ड के माध्यम से प्रस्तुतीकरण करवा कर पूर्ण जानकारी गावों तक पहुंचाई जाए।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश में एरोमैटिक और हर्बल की अत्यधिक संभावनाएं हैं। एरोमा के क्षेत्र में क्लस्टर बेस्ड योजनाएं लायी जाएं। इसके साथ ही, गुलाब के उत्पादन के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में योजना तैयार की जाए। हर्बल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट को भी औषधीय पौधों के लिए विशेष योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए। यह क्षेत्र रोजगार एवं आय का एक महत्वपूर्ण श्रोत बन सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों के उत्पादों की मार्केटिंग के लिए एक मैकेनिज्म तैयार किया जाए।
उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि फलों के ट्रेडिशनल प्लांट्स की प्लांटेशन को छोड़ उच्च गुणवत्ता के प्लांट्स की प्लानिंग को शुरू किया जाए। मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी विकास योजना आत्म निर्भर भारत के अन्तर्गत ऑपरेशन ग्रीन योजना कलैक्टिव फार्मिंग में अधिक ध्यान दिया जाए। लोगों को जानकारी उपलब्ध कराने हेतु योजनाओं का प्रचार प्रसार किया जाए। पर्वतीय क्षेत्रों में मशरूम की खेती को बढ़ावा दिया जाए। पर्वतीय क्षेत्रों में मशरूम के उत्पादन को बढ़ा कर दूसरे कृषि उत्पादों की ओर आकर्षित किया जाए। जनपद स्तर में अधिकारियों को आ रही समस्याओं के लिए कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने शासन के उच्चाधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद स्तर की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। सोइल मैप और उसके अनुरूप फसलों की जानकारी का चार्ट सीडीओ को भी उपलब्ध कराया जाए ताकि उस फसल के अनुरूप योजनाएं बनाई जा सकें।
इस अवसर पर सचिव हरबंश चुग सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी, जनपदों से मुख्य विकास अधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

केन्द्र की हर योजना के केन्द्र बिन्दु में है किसानः नरेन्द्र तोमर

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भारत सरकार द्वारा कृषि विकास के सम्बन्ध में हाल ही में किए गए प्रयासों के सम्बन्ध में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए लगातार एक के बाद एक कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकारों ने भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कृषि अवसंरचनाओं के विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित करना है। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। कृषि क्षेत्र में निजी निवेश को गांवों और खेतों तक पहुंचाना हमारा उद्देश्य है। कृषि अवसंरचनाओं के विकास में एक लाख करोड़ का यह पैकेज एक बड़ा कदम साबित होगा।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम को गति देने के लिए राज्यों को एक सेमिनार का आयोजन करना चाहिए जिसमें कृषि अवसंरचनाओं के विकास और संभावनाओं पर चर्चा की जाए। एक सर्वेक्षण करा कर कृषि क्षेत्र में गैप्स ढूंढ कर उनके लिए योजनाएं बनायी जानी चाहिए। किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए ताकि किसान अपने उत्पाद को लंबे समय तक एवं उचित मूल्य मिलने तक सुरक्षित रख सकें। उन्होंने कहा कि हमने 10 हजार फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ) बनाने का लक्ष्य रखा है।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इस फंड के माध्यम से पोस्ट हार्वेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एवं बिचैलियों को समाप्त करने में भी मदद मिलेगी साथ ही कोल्ड चेन, कोल्ड स्टोरेज इंटीग्रेटेड पैक हाउसेस, सप्लाई चेन सर्विसेज, कम्युनिटी फार्म मशीनरी, रेफ्रिजरेटेड ट्रांसपोर्टेशन और कम्युनिटी ड्राइंग यार्ड जैसी अवसंरचनाओं को विकसित करने में इस फंड का प्रयोग किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि हम अपने किसानों को आत्मनिर्भर कृषि के माध्यम से उद्यमी बनाना चाहते हैं। 31 मार्च 2021 तक इसके लिए सभी राज्य अपने योजनाओं को उपलब्ध करा दिया जाए।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों की आय को बढ़ाने के लिए शुरू की गयी आत्मनिर्भर कृषि योजना के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने में यह योजना मील के पत्थर की भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा केंद्र द्वारा प्रत्येक जनपद में दो-दो एफपीओ बनाए जाने हेतु दिए गए लक्ष्य को हम समय पूरा कर लेंगे। अन्य मैदानी राज्यों की तुलना में हमारे पर्वतीय राज्यों की परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का अधिकांश भूभाग पर्वतीय है। जहां पर अलग-अलग प्रकार की क्लाइमेट कंडीशन है। उन्होंने पर्वतीय राज्यों के लिए अलग से नीति बनाई जाने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड मैं बेमौसमी फल-सब्जियों की अपार संभावना है। इनके उत्पादन में फोकस करके किसानों की आय को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में जड़ी बूटियों की अत्यधिक संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को रू. 3 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, इसके साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों को भी रू. 5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की कृषि में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री परषोत्तम रूपाला, मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शिवराज सिंह चैहान एवं मुख्यमंत्री हरियाणा मनोहर लाल खट्टर सहित विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों ने भी अपने सुझाव दिए।

यूटयूब में वेस्ट मेटिरियल से उपयोगी वस्तुएं बनाना सीखा और जीत लिया राष्ट्रीय पुरस्कार

केशव भट्ट (वरिष्ठ पत्रकार)
आज के वक्त में कोई भी चीज बेकार नहीं होती हैं, घर के पुराने वेस्ट मेटिरियल हों या पुराने अखबार। इनसे भी घर को नया लुक दिया जा सकता है, बशर्ते उसका बखूबी इस्तेमाल करने का हुनर आपके पास हो। इस बात को सच साबित करने में लगी है बागेश्वर जिले के मेलाडुंगरी गांव की अर्चना भंडारी। लॉकडाउन में ऑनलाइन शिल्पकला के अपने हुनर से अर्चना ने न केवल राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय शिल्पकला प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया, बल्कि अब वो स्वयं शिल्पकला में अभिनव प्रयोग करने के साथ 20 अन्य बालिकाओं को भी पुराने अखबार, गत्ते व अन्य वैस्ट मैटीरियल का सदुपयोग कर उपयोगी सामान बनाने का प्रशिक्षण देने में जुटी पड़ी है।
कोरोना काल के लॉकडाउन में अर्चना की प्रतिभा निखर कर सामने आई। शुरूआत में उसने कोरोना वायरस से बचाव के लिए घर में ही मॉस्क बनाकर बांटने शुरू कर दिए। समय था तो उसने यूटयूब से वेस्ट मेटिरियल से उपयोगी वस्तुएं बनाना भी सीखना शुरू कर दिया और ऑनलाइन शिल्पकला में राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में द्वितीय पुरूष्कार भी हांसिल कर लिया। इससे उसके सांथियों ने भी शिल्पकला सीखने की बात कही तो अब वो 20 बालिकाओं को भी पुराने अखबार, गत्ते व अन्य वैस्ट मैटीरियल का सदुपयोग कर उपयोगी सामान बनाने का प्रशिक्षण देने में लगी है। अर्चना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के सांथ ही स्वरोजगार अभियान को लेकर काफी जागरूक है। कई नुक्कड़ नाटकों में प्रतिभाग कर वो इसका संदेश भी दे चुकी हैं। अभी रक्षाबंधन के त्यौहार पर उन्हें पांच सौ राखियों की डिमांड मिली है तो वो सभी राखियां बनाने में जुटी पड़ी हैं।

हर दिन सुबह आठ से दस बजे तक के प्रशिक्षण में हाईस्कूल, ग्रेजुएशन कर रहे छात्राओं के सांथ ही नौकरीपेशा भी अर्चना से कलमदान, पेन स्टैंड, न्यूज पेपर होल्डर, फोटो फ्रेम, ज्यूलरी बॉक्स समेत राखी बनाना सीख रहे हैं। लगातार अभ्यास से वो अब पारंगत होते जा रहे हैं और अभी तक उन्होंने तीन हजार से भी ज्यादा सजावटी सामान बना दिए हैं। गुजरात सूरत के एक स्कूल में सुपरवाईजर पोस्ट पर तैनात भावना नयाल लॉकडाउन में स्कूल बंद होने पर गांव आ गई और अब वो भी यहां शिल्पकला का प्रशिक्षण ले खुश हैं।
अर्चना की इस पाठशाला में हर कोई अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए पूरी मेहनत से जुटे हैं। वहीं अर्चना भी उनका उत्साहवर्धन कर बेटियों की प्रतिभा को सामने लाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को सच साबित कर समाज को नया संदेश देने में लगी है।

रमेश भट्ट के नए गीत का टीजर लांच, ’’मेरी शान उत्तराखण्ड’’ स्वरोजगार अपना रहे युवाओं को समर्पित

कोरोना संकट के बीच अपने घर लौटे प्रवासियों के उत्साहवर्धन के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट का गीत जल्द ही सामने आने वाला है। रमेश भट्ट ने ‘मेरी शान उत्तराखण्ड’ नाम के गीत का एक टीजर अपने फेसबुक पेज पर डाला है, जिसे बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

जय जय हो देवभूमि गीत से धूम मचा चुके रमेश भट्ट का नया गीत ‘मेरी शान उत्तराखण्ड’ बेहद ही खास है और यह जल्द ही सामने आने वाला है। फिलहाल इस गीत के पोस्ट प्रोडक्शन का काम चल रहा है।

इस गीत की खासियत ये है कि इस गीत में कोरोना संक्रमण के चलते घर लौटे प्रवासियों को नई दिशा मिलेगी। देवभूमि उत्तराखंड की महिमा का वर्णन करते हुए रमेश भट्ट ने इस गीत के माध्यम से प्रदेश युवाओं से स्वरोजगार अपनाने और अपनी माटी को संवारने की अपील की है। गीत के बोल हर उत्तराखण्डी में जोश भरने वाले हैं।

फेसबुक में लिंक को देखने के लिए यहां क्लिक करें…
https://www.facebook.com/947292551970436/posts/3451340721565594/

खासतौर से युवाओं से किया गया आह्वाहन स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। रमेश भट्ट का कहना है कि प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत बनाने का जो संकल्प लिया है, वो हर भारतीय को प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री ने भी कोरोना संकट को अवसर मानते हुए स्वरोजगार के लिए गंभीर प्रयास किए हैं। इन्हीं बातों को सोचकर ये ख्याल आया कि क्यों न घर लौटे युवाओं को प्रेरित किया जाय। उनमें जोश भरा जाय, ताकि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी यहां के काम आ सकें, मैं समझता हूं, गीत संगीत इस संदेश को पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उत्तराखण्ड में वो तमाम संसाधन, वो तमाम खूबियां मौजूद हैं जिनका सही इस्तेमाल करके हम उत्तराखण्ड को आत्मनिर्भर बना सकते हैं, ऐसी ही सोच मुख्यमंत्री की भी है। हम सब आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड बनाने के लिए संकल्पित हैं।*

अजय ढौंडियाल के निर्देशन में तैयार हो रहे इस गीत के बोल स्वयं रमेश भट्ट ने लिखे हैं, जबकि ईशान डोभाल ने संगीत तैयार किया है। सिनेमैटोग्राफी संदीप कोठारी ने की है। जल्द ही शिल्पा प्रोडक्शन के बैनर तले यह गीत सबके सामने होगा।