मुख्यमंत्री के निर्देश पर पर्यटन विभाग ने स्वरोजगार के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरु की

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद पर्यटन विभाग स्वरोजगार योजनाओं का लाभ देने के लिए कोई कमसर नही छोड़ना चाहता है। इसके लिए विभाग ने ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी है। ऑनलाइन सिस्टम से घर बैठे ही आवेदन किया जा सकता है। इससे आवेदकों को बड़ा फायदा होगा। अब उन्हें कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वहीं, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत इलेक्ट्रिक बस खरीदने पर 50 प्रतिशत या 15 लाख तक सब्सिडी मिलेगी।
कोरोना महामारी के चलते प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। स्वरोजगार की योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना और पंडित दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में तहत अब बेरोजगार युवा प्रदेश के अंदर विभिन्न मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसें खरीद कर रोजगार शुरू कर सकते हैं। बसों का संचालन परिवहन निगम के निर्धारित रूटों के साथ ही अंतर नगरीय क्षेत्रों में किया जाएगा। 
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में इलेक्ट्रिक बसों के अलावा अन्य वाहनों की खरीद पर पूर्व की भांति 25 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। वहीं, गैर वाहन मद में आवेदकों को पर्वतीय क्षेत्रों में 33 प्रतिशत या 15 लाख और मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत या 10 लाख तक सब्सिडी दी जा रही है। होम स्टे के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में 33 प्रतिशत  या 10 लाख और मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत या अधिकतम सात लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी।
पर्यटन विभाग के सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था लागू होने से योजना में पारदर्शिता आएगी और घर बैठे लोग आवेदन कर सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और योजना की रियल टाइम में मानीटरिंग हो सकेगी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और होम स्टे योजना के लिए अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। 

यहां करें आवेदन 
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना और होम स्टे योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पर्यटन विभाग की वेबसाइट http://vcsgscheme-uk-gov-in पर किया जाएगा। स्वरोजगार शुरू करने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति घर बैठे आवेदन कर सकता है।

निर्मल ब्लॉक और वीआईपी कॉलोनी में एमडीडीए ने की कार्रवाई

(एनएन सर्विस)
मसरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने शुक्रवार को निर्मल ब्लॉक में दो बहुमंजिला भवन और वीआईपी कॉलोनी में निर्मित दो भवनों के छह फ्लेटों को सील किया है। अवैध निर्माणों के खिलाफ हुई एमडीडीए की कार्रवाई से बिल्डरों में भगदड़ मची रही।
शुक्रवार को एमडीडीए के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर श्याममोहन शर्मा के नेतृत्व में टीम निर्मल ब्लॉक पहुंची। यहां पर दो अवैध निर्माणाधीन भवनों की सीलिंग के आदेश पूर्व में ही जारी हुए थे। इस पर अमल करते हुए एमडीडीए टीम ने निर्मल ब्लॉक बी प्लॉट गली नंबर एक में नीरज अग्रवाल का पांच मंजिला भवन, त्रिलोकीनाथ यादव का आमबाग ब्लॉक प्लॉट नंबर एक गली नंबर दो पशुलोक में पांच मंजिला भवन को सील किया। इसके बाद टीम वीआईपी कॉलोनी पहुंची। यहां टीम ने किरण सुनेजा पत्नी दीपक सुनेजा का श्री रेजीडेंसी में अवैध रूप से निर्मित तीन फ्लैट्स को सील किया, जबकि शेष छह फ्लैट्स में रिहाइश होने के कारण सील नहीं किये। टीम ने यहां अन्य व्यक्ति संजय कुमार अग्रवाल 29 फ्लैट और एक स्टोर के तीन फ्लैट्स को सील किया है, जबकि शेष 26 फ्लैट्स जो कि वन रूम सेट हैं सील नहीं किए। टीम ने बताया कि रिहायश होने के चलते नोटिस देकर इन्हें खाली करवाया जायेगा फिर सील की कार्रवाई पूरी की जायेगी।
प्राधिकरण की टीम में अधिशासी अभियंता श्याम मोहन शर्मा, सहायक अभियंता मनोज जोशी, अवर अभियंता प्रेमपाल सिंह व पुलिसकर्मी मौजूद रहे।

स्टाॅक में लाखों रुपये की हेराफेरी, एक्सपायरी माल देख भड़की मंत्री

(एनएन सर्विस)
टिहरी जिले में स्थित मुनिकीरेती स्थित पशुपालन विभाग के केंद्रीय औषधि भंडारण गृह में उस समय हड़कंप मच गया, जब राज्य मंत्री रेखा आर्य ने औचक निरीक्षण कर छापेमारी की। छापेमारी के बाद रेखा आर्य ने बताया कि गोदाम में लाखों रुपए की ऐसी दवाइयां रखी गई है जो कि एक्सपायर हो चुकी है। वहीं, कुछ लाखों रुपए के बिल ऐसे भी पाए गए हैं, जो कि आर्डर के बाद दवाइयां आई ही नहीं। जबकि इनका भुगतान फर्म को कर दिया गया है।
राज्यमंत्री ने बताया कि स्टॉक रजिस्टर में 2019 के दौरान दिए गए, आर्डर को 2020 में दर्ज किया गया है। और 2020 के आर्डर 2019 में दर्ज किया गया है। जिसे देखने से पता चला कि इस मामले में भी बड़े स्तर पर घोटाला किया गया है। यह घोटाला विभागीय उच्च अधिकारियों के इशारे पर किया जाना बताया गया है। जिसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद घोटाले में संलिप्त सभी बड़े से बड़े अधिकारी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
राज्य मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि यह बड़े स्तर पर की गई वित्तीय अनियमितता है। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि दवाई खरीदने मे अधिकारियों ने अपनी कमाई ही देखी है। सरकार का फायदा नहीं देखा है। उनका कहना था की यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण लापरवाही है जिसकी गंभीरतापूर्वक जांच की जाएगी। उनका कहना था कि छापेमारी पशुपालकों की शिकायत पर की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी पशुपालक का दवाई खरीदने मे उत्पीड़न नहीं होने देगी। जिसे उनके विभाग द्वारा गंभीरता पूर्वक लिया गया है। छापेमारी के दौरान निजी सचिव लाल सिंह नागरकोटी सहित अन्य अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे ।

मंत्री ने दिए एफआइआर के आदेश दिए
राज्य मंत्री रेखा आर्य ने भ्रष्टाचार में लिप्त सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम को एफआइआर के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि दवा भंडारगृह में निरीक्षण करने के दौरान कई तरह की अनियमितताएं पाई गई हैं। साफ पता लगता है कि दवाओं को लेकर बड़ा घोटाला हुआ है। मामले में उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। फिलहाल रजिस्टर और भंडारगृह को सील किया गया है।

राज्य में फिल्मांकन के लिए राज्य सरकार ने गाइडलाइन जारी की

(एनएन सर्विस)
राज्य सरकार ने प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग के लिए गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत कोविड-19 के चलते प्रदेश में पहले से लागू नियम शूटिंग दल पर प्रभावी रहेंगे। फिल्म निर्माता को शूटिंग यूनिट का वेबसाइट पर पंजीकरण करवाना होगा। महानिदेशक सूचना कार्यालय देहरादून में शूटिंग दल, अवधि और लोकेशन को लेकर पूरा विवरण देना होगा।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने गाइडलाइन जारी करते हुए बताया कि कोई भी फिल्म निर्माता इसका पालने करते हुए राज्य में फिल्मांकन कर पाएगा। फिल्म प्रोडक्शन कंपनी को कोविड-19 की रोकथाम के लिए उठाए गए समस्त कदमों का विवरण राज्य सूचना विभाग को देना जरुरी होगा। महानिदेशक सूचना की तरफ से समस्त सूचनाएं और अनुमतियां संबंधित जिलाधिकारियों को भेजी जाएंगी। शूटिंग में आने वाले दल के प्रत्येक व्यक्ति की कोविड को लेकर ट्रेनिंग अनिवार्य रहेगी। सोशल डिस्टेसिंग, फेस्क मास्क, दस्ताने और अन्य सुरक्षा उपकरणों को दल साथ में लाएगा। अगर दल के किसी सदस्य में कोरोना के लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत निकटवर्ती सरकारी अस्पताल और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी देगा।
वहीं, शूटिंग के दौरान प्रोडक्शन कंपनी को एक नोडल अधिकारी की तैनाती भी करनी होगी। जो जिला प्रशासन को प्रत्येक सदस्य का डाटा बेस तैयार करके देगा। थर्मल स्कैनिंग से लेकर पीपीई किट व अन्य उपकरणों की जानकारी रखनी होगी। इस्तेमाल के बाद उन्हें कैसे नष्ट किया जा रहा है इसकी भी सूचना प्रशासन को देनी होगी।  
प्रोडक्शन कंपनी कोे फिल्म सेट का दिन में दो बार सैनिटाइजेशन करना अनिवार्य होगा। फोर्क लिफ्ट का कम से कम इस्तेमाल करने, सेट के बाहर, वेटिंग रूम, रेस्ट रूम में हैंड सैनिटाइजर रखना अनिवार्य होगा। स्टाफ में 65 साल से अधिक के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं लाने की अनुमति नहीं दी गई है। गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर लाना बेहद जरूरी है तो इसकी अनुमति जिलाधिकारी से प्राप्त करनी होगी।
वहीं, शूटिंग स्थल पर व्यक्तियों की संख्या भी कम से कम रखने पर जोर दिया गया है। इंडोर में होने वाली शूटिंग में अनिवार्य स्टाफ की संख्या 15 और आउटडोर में 30 लोग ही रहेंगे। मेकअप और हेयर ड्रेंसिंग के स्थान पर बार बार सैनिटाइजेशन करना होगा। शूटिंग स्थल पर सभी को मास्क, दस्ताने व फेस शील्ड पहननी होगी। 
एक अन्य निर्देश में शूटिंग दल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए ट्रैवलिंग प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। जिला प्रशासन इसकी निगरानी करेगा। वाहनों में यात्रियों की संख्या गाइडलाइन के अनुसार ही रहेगी। प्राइवेट प्रापर्टी पर शूटिंग के लिए अनिवार्य अनुमति के साथ लोकेशन के सैनिटाइजेशन का खास ख्याल रखना होगा।

पर्यटन उद्योग को राहत देते हुए त्रिवेन्द्र सरकार ने लिए कई अहम फैसले, जानिए

(एनएन सर्विस)
सचिव पर्यटन एवं संस्कृति दिलीप जावलकर ने बताया कि कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेश में पर्यटन उद्योग पर गम्भीर प्रभाव पड़ा है। इसके तहत पर्यटन उद्योग से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े व्यक्तियों/इकाईयों/संस्थानों को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देशों के तहत राहत प्रदान की गई है। इससे लगभग 2.43 लाख लोग लाभान्वित होंगे।
उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग एवं अन्य विभागों में पंजीकृत पर्यटन व अन्य इकाईयों, जो पर्यटन अथवा राज्य सरकार के किसी अन्य विभाग से अपने व्यवसाय के संचालन हेतु सेवायें यथा-विद्युत कनेक्शन, पेयजल कनेक्शन प्राप्त करते हैं, अथवा व्यवसाय के संचालन हेतु राजकीय संस्था यथा थ्ैै।प्ए उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि के अन्तर्गत पंजीकृत कर्मियों एवं पर्यटन उद्योग में पंजीकृत फोटोग्राफरों, जिनकी जिलाधिकारियों के माध्यम से कराये गये त्वरित सर्वेक्षण के आधार पर प्रदेश में कुल संख्या लगभग 2.43 लाख है उन्हें प्रति कार्मिक रू 1,000- की दर से वन टाईम आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से वितरित किये जाने का निर्णय लिया गया है। इसका व्यय मुख्यमंत्री राहत कोष से वहन किया जायेगा। इसमें जहां पर्यटन विशेष क्षेत्र/गतिविधि समितियों (टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण/गंगा नदी राफ्टिंग प्रंबन्धन समिति) के पास अपने संसाधन है तथा जिन रिवर गाइड व अन्य कार्मिकों को लाभान्वित किया जा चुका है। उन्हें उक्त श्रेणी में धनराशि प्राप्त नही होगी किन्तु विभाग द्वारा दी गयी राशि रूपये 1,000- से अन्यून होगी।
सचिव पर्यटन ने बताया कि वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना व दीन दयाल होम स्टे योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2020-21 के प्रथम तिमाही (माह अप्रैल से माह जून 2020) के ऋण पर लिये जाने वाले ब्याज की प्रतिपूर्ति भी राज्य सरकार द्वारा सम्बन्धित जिलाधिकारियों के माध्यम से की जायेगी। इसका भी व्यय वहन मुख्यमंत्री राहत कोष से किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा के अन्तर्गत लगने वाले पंजीकरण/नवीनीकरण शुल्क को एक वर्ष की अवधि के लिए समाप्त/शून्य किया गया है। इसके साथ ही परिवहन विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना के आधार पर पर्यटन से जुड़े बस/टैक्सी/मैक्सी कैब/ऑटो रिक्शा/विक्रम/ई-रिक्शा में योजित लगभग 1,01,185 कार्मिकों की जिलेवार सूची परिवहन विभाग द्वारा जिलाधिकारी को प्रति कार्मिक रूपये 1,000- की दर से वन टाईम आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से वितरित किये जाने हेतु उपलब्ध करायी जायेगी।
उन्होंने बताया कि संस्कृति विभाग 6675 सूचीबद्ध कलाकारों की सूची सम्बन्धित जिलाधिकारी को उपलब्ध कराने के साथ ही प्रति कलाकार रूपये 1,000 की दर से वन टाईम आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से वितरित किये जाने हेतु उपलब्ध करायी जायेगी। जिसे जिलाधिकारी अपने स्तर से डी.बी.टी के माध्यम से सम्बन्धित कलाकारों को वितरित करेंगे।
उन्होंने यह भी जानकारी दी है कि जहां संभव हो, स्थानीय निकाय पर्यटन सम्बन्धी इकाईयों को अपने स्तर से रजिस्ट्रेशन/नवीनीकरण शुल्क अथवा कर से एक साल तक राहत दिये जाने हेतु स्वतंत्र होंगे, जिस हेतु उनके द्वारा विधिसम्मत प्रक्रिया निर्धारित की जायेगी।

महामारी के प्रभाव तक ही बढ़ा किराया रहेगा लागू, बस व्यवसायियों को दी राहत

(एनएन सर्विस)
उत्तराखंड सरकार ने बसों के किराये में दोगुने से अधिक वृद्धि कर दी है। किराये में वृद्धि महामारी अधिनियम के प्रभावी रहने तक लागू रहेगी। एक्ट हटते ही बढ़ा किराया कम हो जाएगा। कोविड-19 के चलते बसों में सोशल डिस्टेसिंग के मानकों के अनुसार 50 प्रतिशत यात्रियों को ही बैठाया जाना है। ऐसे में परिवहन व्यवसायी सरकार से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। बसों का संचालन करने में भी दिक्कत आ रही थी। व्यवसायियों का कहना था कि आधी सवारी के किराये से तेल का खर्च भी नही निकल पा रहा है। ऐसे में उनके सामने रोजी रोजी का संकट उत्पन्न हो गया है। सरकार ने यह निर्णय परिवहन व्यवसाय को बचाने के लिए लिया है।
शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि कोविड-19 के कारण प्रदेश में बसों को सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों के अनुरूप 50 प्रतिशत सवारी ले जाने की अनुमति है। लेकिन बस संचालकों ने 50 प्रतिशत सवारी के साथ मौजूदा किराया दर पर वाहन संचालन में असमर्थता जताई। घाटा होने की स्थिति में वे बसें नहीं संचालित कर रहे थे। इससे यात्रियों को टैक्सी के माध्यम से आना जाना पड़ रहा था, जिससे जनता पर बोझ पड़ रहा था। ऐसे में सरकार ने बसों के किराये में वृद्धि का निर्णय लिया है। बसों का किराया दोगुना बढ़ाया जा रहा है, लेकिन यह तभी तक प्रभावी होगा, जबतक महामारी एक्ट राज्य में लागू है।

किराए की लिस्ट-सिटी बस में किराया दर 
पहले दो किमी    – 07 से बढ़ाकर 14 रु
दो से छह किमी   – 10 से बढ़ाकर 20 रु
छह से 10 किमी  – 15 से बढ़ाकर 30 रु
10 से 14 किमी  –  20 से बढ़ाकर 40 रु
14 से 19 किमी  – 25 से बढ़ाकर 50 रु
19 से 24 किमी  – 30 से बढ़ाकर 60 रु
24 से 29 किमी  – 35 से बढ़ाकर 70 रु
29 किमी से अधिक- 40 से बढ़ाकर 80 रु

नॉन-डीलक्स बस किराया
साधारण बसें (मैदानी क्षेत्र) – 1.05 से बढ़ाकर 2.10 रुपये प्रति किमी
साधारण बसें (पर्वतीय क्षेत्र)- 1.50 से बढ़ाकर 3 रुपये प्रति किमी

वातानुकुलीत श्रेणी में
थ्री बाय टू सीटर बसें – 1.25 गुणा वृद्धि
टू बाय टू सीटर बसें  – 1.9 गुणा वृद्धि
सुपर डीलक्स (वॉल्वो) – तीन गुणा वृद्धि

ऋषिकेश मंडी 24 जून तक के लिए सील

(एनएन सर्विस)
ऋषिकेश क्षेत्र में अब कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में कोरोना वायरस ने पैर पसार लिए हैं। यहां मंडी समिति अध्यक्ष विनोद कुकरेती सहित छह अन्य लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। प्रशासन इन सभी के प्रथम और द्वितीय संपर्क में आने वाले लोगों की खोजबीन कर रहा है।
देहरादून निरंजनपुर स्थित कृषि उत्पादन मंडी समिति में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ रहे मामलों को देखते हुए कृषि उत्पादन मंडी समिति ऋषिकेश में रैंडम सैंपलिंग ली गई थी। 13 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ऋषिकेश कृषि मंडी समिति में 97 लोगों के सैंपल लिए थे। जिनमें मंडी समिति अध्यक्ष, कर्मचारी, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर और पल्लेदार शामिल थे। इन सभी के सैंपल को जांच के लिए चंडीगढ़ लैब भेजा गया था। वहां से जांच रिपोर्ट बुधवार रात 9 बजे पहंुची है। इस रिपोर्ट में मंडी समिति परिसर में सात लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह सभी लोग एसिम्टोमेटिक यानी बिना कोरोना लक्षण वाले पाए गए हैं। इन सात लोगों में मंडी समिति अध्यक्ष विनोद कुकरेती सहित छह अन्य व्यापारी शामिल है। मंडी समिति अध्यक्ष ने फोन पर इस बात की पुष्टि की है।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में ऋण की उपब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश

(एनएन सर्विस)
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति उत्तराखण्ड की विशेष बैठक आयोजित हुई। बैठक में वार्षिक ऋण योजना 2020-21 पर चर्चा करते हुए स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को संचालित किये जाने की पर्याप्त संभावनाओं पर विचार करते हुए वार्षिक ऋण योजना को बढ़ाकर 25 हजार 793 करोड़ की संशोधित वार्षिक ऋण योजना अनुमोदित की गई। ज्ञातव्य है कि पूर्व में यह वार्षिक योजना 23 हजार 980 करोड़ की स्वीकृति थी जिसे राज्य में स्थानीय प्रवासी युवाओं के स्वरोजगार की संभावनाओं के आर्थिक गतिविधियों को संचालित किये जाने की संभावना को देखते हुए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति उत्तराखण्ड द्वारा डी.एल.आर.सी/डी.सी.सी द्वारा अनुमोदित वार्षिक ऋण योजना में विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लक्ष्यों को बढ़ाकर योजना का आकार बढ़ाया गया, तथा इस योजना में 1 हजार 913 करोड़ रूपये की वृद्धि की गयी।
मुख्य सचिव द्वारा चर्चा के दौरान बैंकर्स एवं अधिकारियों को निर्देश दिये कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा घोषित मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में व्यक्तिगत ध्यान देकर अधिक से अधिक लाभार्थियों को लाभ पहुंचाया जाए। बैठक में बताया गया कि युवा उद्यमियों द्वारा डेरी एवं कुक्कुट पालन के क्षेत्र में अधिक उत्साह दिखाया जा रहा है। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागाध्यक्ष को निर्देश दिये कि युवा उद्यमियों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों को तकनीकी दृष्टि से मदद कराकर बैंकर्स से स्वीकृत कराने में सक्रिय सहयोग दें।
मुख्य सचिव द्वारा जिला स्तरीय पुर्ननिरीक्षण समितिध्जिला परामर्शदात्री समिति की प्रगति की समीक्षा के दौरान एजीएम राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति एसबीआई रमेश कुमार पंत द्वारा बताया गया कि जनपद देहरादून, नैनीताल एवं रुद्रप्रयाग जिलों में मई माह में बैठक नहीं हो पायी है बाकी सभी जिलों में जिला स्तरीय पुर्ननिरीक्षण समितिध्जिला परामर्शदात्री समिति की बैठक की जा चुकी है। इस पर मुख्य सचिव द्वारा अवशेष तीनों जनपदों में शीघ्र बैठक कराये जाने हेतु वित्त सचिव सौजन्या को सम्बन्धित जिलाधिकारियों से समन्वय कर क्रियान्वित करने के निर्देश दिये गये।
बैठक में अपर मुख्य सचिव एम.एस.एम.ई मनीषा पंवार, सचिव कृषि एवं पशुपालन आर. मीनाक्षी सुन्दरम, वित्त सचिव सौजन्या, अपर सचिव सोनिका, इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता, उप महाप्रबंधक एस.बी.आई बी.एल सैनी तथा सहायक महाप्रबंधक एन.एस रावत, सी.जी.एम नाबार्ड सुनील चांवला, डीजीएम आर.बी.आई तारिका सिंह, क्षेत्रीय निदेशक आर.बी.आई राजेश कुमार सहित समस्त विभागों के सचिव एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

अमेजन प्राइम के माध्यम से बेचेंगे उत्पाद, उत्तराखंड के उद्योगों को मिलेगा फायदा

(एनएन सर्विस)
कोरोना महामारी के कारण उद्योगों के सामने आ रही बाजार की दिक्कत अब जल्द खत्म होगी। उद्योगों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए अमेजन प्राइम सामने आया है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (आईएयू) के पहल के बाद अमेजन प्राइम प्रबंधन उद्योगों के प्रोडक्ट उसके माध्यम से बेचने पर सहमत हो गया है। इससे उत्तराखंड के उद्योगों को काफी फायदा हो सकता है। इसके साथ ही आईएयू ने बिजनेस प्लेटफार्म तैयार किया है। जिसके माध्यम से राज्य के उद्योग अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग कर सकेंगे।
आईएयू के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने बताया कि कोरोना संकट के चलते उद्योगों के सामने बाजार की चुनौती खड़ी हो गई है। इसके समाधान के लिए सोमवार को आईएयू की ओर से वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें अमेजन प्राइम के सीनियर अधिकारी भी शामिल हुए। आईएयू की पहल पर अमेजन प्रबंधन उद्योगों के रजिस्ट्रेशन को तैयार हो गया है। जिसके बाद उद्योग अमेजन के माध्यम से और डायरेक्ट भी अपने प्रोडक्ट बेच सकते हैं।
इसके साथ ही इस दौरान एसोसिएशन की ओर से आईएयू बिजनेस प्लेट फार्म की घोषणा की है। इसके माध्यम से राज्य का कोई भी उद्योग अपने माल की मार्केटिंग कर सकता है। इससे उद्योगों को बड़ा फायदा होगा और उनके माल की अधिक बिक्री हो पाएगी। अभी तक यहां के उद्योगों में बनने वाले माल के बारे में लोगों को पता नहीं चल पाता है और जो माल यहां बन रहा है, लोग उसे बाहर से खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। कहा कि यह बिजनेस प्लेटफार्म उद्योगों को एक मार्केटिंग का प्लेटफार्म देगा।
पंकज गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में कई उद्योग ऐसे हैं जिनके प्रोडक्ट की डिमांड खत्म हो चुकी है लेकिन उद्योगों के सामने कोरोना के बाद कई नए अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं। खासकर जो माल चीन से आता था, उसे अपने देश या प्रदेश में भी बना सकते हैं। इसके लिए केंद्र सरकार भी कार्ययोजना तैयार कर रही है। इसलिए आईएयू मेडिकल डिवाइस, डिस्पोजेबल मैन्युफैक्चरिंग पर काम कर रहा है। इसके लिए सौ ऐसे आइटम की लिस्ट तैयार कर ली गई है। जिसकी टेक्नोलॉजी लेकर यहां आसानी से बनाया जा सकता है। इसमें लागत भी कम आएगी।
20 से 25 करोड़ में इस प्रकार के उद्योगों को लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देखा जा रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई तीन लाख करोड़ की आत्मनिर्भर इकोनॉमिक पैकेज का उत्तराखंड के उद्योग फायदा नहीं उठा रहे हैं। अभी तक मात्र दस हजार उद्योग ही इसका फायदा उठा रहे हैं। जबकि 75 हजार उद्योग इसका फायदा उठा सकते हैं। सेमिनार में इस पैकेज के बारे में उद्योगों को बताया गया और उन्हें पैकेज की सीमा खत्म होने से पहले इसका लाभ लेने की अपील की गई। सेमिनार में प्रदेशभर के उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

याद है या भूल गए देहरादून की साप्ताहिक बंदी का आदेश इस शनिवार और रविवार को भी है लागू

राज्य सरकार द्वारा देहरादून में कोरोना संक्रमण को देखते हुए नगर निगम क्षेत्र के बाजारों को अगले आदेश तक यानि की शनिवार और रविवार के लिए बंद करने का निर्णय लिया था। साप्ताहिक बंदी के तहत कल शनिवार और रविवार को देहरादून नगर निगम क्षेत्र बंद रहेगा। बतातें चले कि 5 जून को जिलाधिकारी आशीष श्रीवास्तव की तरफ से इस संबंध में आदेश जारी हुए थे। देहरादून नगर निगम क्षेत्र के बाजार पिछली बार की तरह इस बार भी बंद रहेंगे। इसके अलावा बंदी के दौरान वाहनों का भी संचालन नहीं होगा। सिर्फ आवश्यक सेवा से जुड़ी दुकानें, मेडिकल स्टोर और वाहन के संचालन की इजाजत दी गई है।इस दौरान पेट्रोल पंप, फल-सब्जी, मेडिकल स्टोर, डेयरी, गैसएजेंसी, टिफिन सर्विस, लाइसेंस धारक मीट की दुकानें, औद्योगिक इकाइयां और अस्पतालों की ओपीडी खुली रहेंगी। वहीं स्वास्थ्य, चिकित्सा, पेयजल, नगर निगम और विद्युत विभाग के दफ्तर भी खुले रहेंगे।
वहीं, सभी दुकानें, प्रतिष्ठान, शराब के ठेके, बैंक, सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी एवं निजी कार्यालय बंद रहेंगे। आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहन और एंबुलेंस को छोड़ परिवहन सेवाएं बंद रहेंगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने 5 जून को यह आदेश जारी किए थे।

डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जिले में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर नगर निगम क्षेत्र में संख्या ज्यादा है। जिसे देखते हुए दो दिन की साप्ताहिक बंदी का निर्णय लिया गया है। डीएम ने बताया कि इस दौरान आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिले में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामले चिंता की बात है। लेकिन, प्रशासन अपनी ओर से इसे रोकने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। लोगों से भी अपील है कि वह लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। जनसहयोग और जागरूकता के जरिये ही हम इस पर अंकुश लगा सकते हैं।