स्वरोजगारः पिरूल प्रोजेक्ट में प्रति क्विंटल 100 रूपए की धनराशि देगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिग द्वारा जिलाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और सौलर व पिरूल परियोजनाओं की समीक्षा की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में वास्तव में जरूरतमंदों और बेरोजगार को प्राथमिकता दी जाए। सभी विभागों में चल रही स्वरोजगार योजनाओं को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के साथ जोङा जाए। सोलर व पिरूल प्रोजेक्ट की आवश्यक प्रक्रियाएं समय से पूरी हों। मुख्यमंत्री ने सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिग द्वारा जिलाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और सोलर व पिरूल परियोजनाओं की समीक्षा की।

होप पोर्टल पर स्वरोजगार योजनाओं को अपलोड करे
मुख्यमंत्री ने कहा कि होप पोर्टल पर स्वरोजगार की सभी योजनाओं की सूचना अपलोड की जाए। एक प्लेटफार्म पर आने से लोगों को इन योजनाओं की जानकारी मिल पाएगी और इसका लाभ उठा सकेंगे। जन प्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाए।

प्रत्येक जिले में दो-दो स्वरोजगार प्रेरक
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश है हर बेरोजगार साथी अपना रोजगार प्रारम्भ कर सके। लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के लिए प्रत्येक जिले में एक महिला और एक पुरूष स्वरोजगार प्रेरक तैनात किए जाएंगे।

किसानो के उत्पादों की बिक्री की व्यवस्था हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अपने उत्पादों की बिक्री के लिए निश्चिंत होना चाहिए। उनके उत्पादों की बिक्री की व्यवस्था पर काम किया जाए। हॉर्टीकल्चर, पॉल्ट्री, मत्स्य, बकरी और भेड़पालन लाभदायक हो सकते हैं। इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। कोशिश की जाए कि अदरक, हल्दी आदि के बीज मांग के अनुरूप स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हों। किसानों को उन्नतशील खेती का प्रशिक्षण बंद कमरों तक ही सीमित न रहे, यह प्रशिक्षण का लाभ खेतों तक पहुंचे। कृषि विज्ञान केंद्रों का अधिकाधिक उपयोग हो।

लाभकारी प्रोजेक्ट पर संबंधित विभाग गाइडलाइन तैयार करें
आवेदकों को प्रोजेक्ट बनाने के लिए सारी जानकारी दें। इसमें ऑफलाईन आवेदन की भी व्यवस्था हो। विभिन्न व्यवसायों के प्रोजेक्ट किस प्रकार लाभकारी हो सकते हैं, इसके लिये संबंधित विभाग गाइडलाइन तैयार करें। जिला रोजगार समितियां आवेदकों की काउंसिलिंग भी करें। डीएम हर जिले में कुछ मॉडल प्रोजेक्ट स्थापित करें। बैंकों से समन्वय स्थापित किया जाए और ऋण प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं का निस्तारण तुरंत किया जाए।

सोलर व पिरूल प्रोजेक्ट में प्रक्रियाएं समय पर पूरी हों
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोलर व पिरूल प्रोजेक्ट को प्राथमिकता से लिया जाए। किसी भी एसडीएम के पास इनसे संबंधित फाईल एक सप्ताह से ज्यादा लम्बित नहीं रहनी चाहिए। जिलाधिकारी लगातार इसकी समीक्षा करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में पिरूल प्रोजेक्ट में पिरूल एकत्रीकरण पर स्वयं सहायता समूहों को एक रूपया प्रति किलो वन विभाग और 1.5 रूपया (एक रूपया पचास पैसे) प्रति किलो विकासकर्ता द्वारा दिया जाता है। अब राज्य सरकार भी अतिरिक्त 1 रूपया प्रति किलो अर्थात 100 रूपए प्रति क्विंटल की राशि देगी।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में ट्रेडिंग भी शामिल
अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में विनिर्माण व सेवा क्षेत्र के साथ ट्रेडिंग को भी लिया गया है। योजना की वेबसाइट पर मॉडल प्रोजेक्ट अपलोड किए गए हैं। प्रोजेक्टों की डीपीआर के स्टैंडर्ड फार्मेट भी उपलब्ध कराए गए हैं। वेबसाइट लांच करने के कुछ ही दिनों में काफी लोगों ने आवेदन किया है।

सोलर और पिरूल प्रोजेक्ट
सचिव राधिका झा ने प्रदेश में सोलर व पिरूल प्रोजेक्टों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि सोलर में 283 परियोजनाएं आवंटित की गई हैं जिसमें 203 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा और 800 करोङ रूपए का निवेश होगा। बहुत सी परियोजनाओं का यूपीसीएल का करार हो चुका है। पिरूल के भी 38 प्रोजेक्ट आवंटित किए जा चुके हैं। इनका भी यूपीसीएल के साथ करार किया जा चुका है।
वीडियो कांफ्रेंसिग में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट, आईटी सलाहकार रवीन्द्र दत्त, सचिव एल फैनई, अमित नेगी, आर मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक उद्योग सुधीर नौटियाल सहित अन्य अधिकारी व जिलाधिकारी उपस्थित थे।

त्रिवेन्द्र का दम, राज्य के लिये लिए है 11 बड़े फैसले, जो बदलेंगे राज्य की दशा और दिशा

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने बताया कि त्रिवेन्द्र सरकार ने तीन वर्षों में कई ऐसे फैसले लिए है जो जनता के हित के साथ ही जनभावनाओं के लिए बेहद जरुरी थे। इनमें 11 फैसले तो सीधे जनता से जुड़े हुए है। जिनका लाभ बड़ी संख्या में राज्य के लोगों को मिल रहा है या आने वाले समय में मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहते है। रोजगार और स्वास्थ्य के विषय में मुख्यमंत्री ने बड़े और दूरगामी फैसले लिए है।
मीडिया सलाहकार इन 11 बड़े फैसलों की दे रहे है जानकारी-

’11 बड़े फैसले’

’1. जनभावनाओं की राजधानी’: गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को राज्य जी ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करके जनभावनाओं का ख्याल रखा।

’2. चारधाम देवस्थानम बोर्ड गठित’: चार धाम यात्रा के सफल व बेहतर प्रबंधन के लिए चार धाम देवस्थानम बर्ड का गठन किया गया। इससे बद्री केदार, गंगोत्री यमुनोत्री के अलावा 51 बड़े मंदिरों के रखरखाव व प्रबंधन की जिम्मेदारी सरकार को मिली।

’3 अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना’: आयुष्मान भारत की तर्ज पर प्रदेश के समस्त परिवारों को सालाना 5 लाख रुपए तक का निशुल्क इलाज उपलब्ध कराने हेतु अटल आयुष्मान उत्तराखण्ड योजना लागू की गई। अपने राज्य के समस्त परिवारों को सुरक्षा कवच देने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य बना। अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग मुफ्त उपचार करवा चुके हैं।

’4. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार’ : साल 2017 में प्रदेश में 1031 डॉक्टर थे जिनकी संख्या अब बढ़कर 2600 के करीब हो गई है। 400 डॉक्टरों को केवल कोरोना काल मे ही नियुक्ति दी गई है। हर जिला अस्पताल में प्ब्न् की सुविधा है। दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को लाभ देने के लिए 35 अस्पतालोंध्केन्द्रों में टेली मेडिसिन सुविधा शुरू की गई है।

’5. ग्रोथ सेंटर’: ग्रामीण संसाधनों से लोकल इकोनॉमी जुटाने का तथा स्वरोजगार से जोड़ने के लिए करीब 100 ग्रोथ सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं।

’6. सभी 13 जिलों में 13 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ : पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 13 जिलों में 13 नए थीम बेस्ड टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित किए जा रहे हैं। टिहरी झील, गूलरभोज जलाशय, ट्यूलिप गार्डन प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं।

’7. होम स्टे’: ग्रामीण पर्यटन को मजबूत करने के लिए राज्य में 5000 होमस्टे बनाने का लक्ष्य है, जिसमे से अभी तक 2100 होमस्टे बनाये जा चुके हैं।

’8. इन्वेस्टर्स समिट’ : राज्य में उद्योगों और निवेश को विस्तार देने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सुविधा लागू है। 2018 में राज्य में पहली बार इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन हुआ जिसमें सवा लाख करोड़ के डवन् साइन हुए। इनमें से भी अब तक 21 हजार करोड़ के निवेश प्रोजेक्ट ग्राउंडेड हो चुके हैं।

’9. फिल्म पॉलिसी’: उत्तराखण्ड में फिल्म निर्माण की संभावनाओं को देखते हुए फिल्म नीति लाई गई। इससे फिल्मकारों को कई तरह की रियायतें दी जा रही हैं। पिछले 3 साल में राज्य में 250 से अधिक फिल्मों व सीरियल्स की शूटिंग हो चुकी है। इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल रहा है।

’10. कोरोना से लड़ाई’ : उत्तराखण्ड सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए हैं। लॉकडाउन पीरियड में कोई भूखा नहीं रहे इसका ख्याल रखा, प्रदेश में रह रहे अन्य प्रदेशों के मजदूरों को कभी भूखा नहीं सोने दिया, उनको उनके घर तक पहुंचाने के पर्याप्त इंतजाम किए। अन्य राज्यों से प्रवासी उत्तराखण्डियों को लाने के लिए भी सभी व्यवस्थायें की।

कोरोना काल मे हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया। आज राज्य में कोरोना मरीजों की देखभाल व इलाज के लिए 5 डेडिकेटेड कोविड अस्पताल, 10 डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर व 94 कोविड केयर सेंटर स्थापित किए गए हैं।

राज्य में आईसीयू की संख्या को 62 से बढ़ाकर 251 किया गया है। वेंटीलेटर्स कि संख्या को 37 से बढ़ाकर 113 किया गया है। बाइपैप मशीनों की संख्या 4 से बढ़कर 33 की गई है।

’11. मुख्यमन्त्री स्वरोजगार योजना’ : कोरोना के कारण घर लौटे प्रवासियों को घर मे काम देना हमारी प्राथमिकता है। हम राज्य के अधिक से अधिक युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना चाहते हैं इसलिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की गई है। इसके तहत अपना कोई भी काम शुरू करने के लिए ऋण लेने पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है।

सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार अपनाने के लिए मीडिया सलाहकार दे रहे महत्वपूर्ण जानकारी

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य के लोगों को रोजगारपरक जानकारी दे रहे है। साथ ही सरकार की वह कौन सी नीतियां है जो उनके लिए स्वरोजगार में सहायक बन सकती है, इसकी भी सिलसिलेवार जानकारी दे रहे है। यह जानकारी उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो अपना स्वरोजगार करने के इच्छुक है। युवा भी बड़ी संख्या में सोशल मीडिया में उन्हें फाॅलो कर रहे है। साथ कई सवालों के माध्यम से स्वरोजगार की दिशा में कदम भी बढ़ा रहे है।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट की कलम से ….

मेरा प्रयास रहता है कि मैं हर उत्तराखंडी को ये भरोसा दिला सकूं कि हम राज्य में रहकर भी बहुत कुछ कर सकते हैं।
90 के दशक में भीमताल में फूलों की खेती ने लोगों को नई दिशा दिखाई थी, फूलों से अच्छा खासा रोजगार लोगों को मिला। भीमताल की महाशीर के बारे में देश-दुनिया मे कौन नहीं जानता।
मैंने बचपन मे अपने पिता से सुना था, अंग्रेजो के समय में लंदन में आयोजित होने वाली टी एक्जीबिशन में बेरीनाग की चाय, टी क्वीन का खिताब जीतती रही।
आज जब बड़े पैमाने पर प्रवासी भाई बहन घर लौटे हैं, तो एक नया विश्वास पैदा हो रहा है। जैसा कि हमारे मुख्यमंत्री जी का कहना है, आवा अपणु गौं का वास्ता कुछ करा। तो ये सही समय भी है, और सरकार ने मौका भी दिया है। माननीय मुख्यमंत्री जी ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की है जिसमें स्वरोजगार के लिए भारी सब्सिडी मिल रही है। इसी तरह प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के जरिये भी स्वरोजगार के लिए ऋण मिलता है। नाबार्ड, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत भी स्वरोजगार शुरू करने के लिए उचित दरों व सब्सिडी के साथ लोन की सुविधा है।

हमारा उत्तराखण्ड विविधताओं से भरा है। उत्तराखंड में प्रकृति ने सभी ऋतुयें और सभी तरह की भौगोलिक परिस्थिति प्रदान की है। इस लिहाज से वोकल फॉर लोकल से आत्मनिर्भर बनने के लिए यह उचित समय भी है और मौका भी है।
प्रदेश के हर जिले और हर घाटी की अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और जलवायु है। पर्वतीय क्षेत्रों में साग- भाजी का उत्पादन है, तो कहीं फलों का, कहीं फूलों का और कहीं अनाज का। उत्तरकाशी जिला जहां फल और सब्जी पट्टी के लिए विख्यात है, वहां की राजमा अपने विशिष्ट स्वाद के लिए पहचानी जाती है। उसी तरह हमारे पर्वतीय जिलों में नींबू, नारंगी, माल्टा, खुमानी, आलू बुखारा, नाशपाती, काफल आदि का भरपूर उत्पादन होता है। गढ़वाल कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में मंडवा, झंगोरा, जौ, गहत, भट्ट, मसूर, तोर और रामदाना (स्थानीय भाषा मे चुआ) का भरपूर उत्पादन होता है।
हम चाहें तो अपने बुरांस के जूस को प्रमोट करके कोला पेप्सी के टक्कर का बना सकते हैं। हम चाहें तो काफल को चेरी के जैसी मार्केट दे सकते हैं। हमारे सीमांत जिलों में बड़ी मात्रा में भेड़-बकरी पालन होता है। उनकी ऊन से पीढ़ियों से लोग कालीन निर्माण में प्रयोग होती है।

बागेश्वर को तो ताम्र नगरी ही कहा जाता है। जहां तांबे से बर्तन, वाद्य यंत्र आदि अनेक उपयोगी वस्तुएं बनती हैं, चंपावत में लौह से बनी वस्तुओं का प्रचलन है। रिंगाल, कंडाली, भीमल, भांग के रेशे पहाड़ में हर जगह व्याप्त हैं जिनसे अच्छी खासी इंडस्ट्री खड़ी हो सकती है। की।
रानीखेत का चैबटिया गार्डन सेव के लिए और सेब की प्रजातियों पर शोध के लिए प्रसिद्ध है। रानीखेत के निकट की गगास घाटी साग सब्जी के क्षेत्र में सबके लिए प्रेरणा है।
हमारा गैरसैण और नौटी का क्षेत्र तथा कुमाऊँ में चैकोड़ी में शानदार चाय के बागान है।
हमारे तराई के जिले गेहूं, चावल, गन्ना सब्जियां भरपूर मात्रा में उत्पन्न करते हैं।
हमारे उच्च हिमालयी क्षेत्र में जड़ी बूटी उत्पादन की प्रबल सम्भावनाएं हैं। कुटकी, अतीश, जटामाशी, हरड़, बहेड़ा, आंवला का उत्पादन फार्मा कंपनियों की जरूरत है।
इस तरह हमारा हर गांव, हर क्षेत्र, हर जिला एक विशेषता लिए है। अब जरूरत है, हमें उन विशेषताओं को अर्थव्यव्स्था से जोड़ने की, स्वरोजगार अपनाने की।
मुझे विश्वास है, हमारा उत्तराखण्ड स्वरोजगार के रास्ते आत्मनिर्भर जरूर बनेगा।

आज से मंदिर, होटल, रेस्टोरेंट, शाॅपिंग माॅल खोलने की मिली अनुमति

आज से धार्मिक गतिविधियां सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक शुरू होंगी। मंदिरों के बोर्ड, ट्रस्ट या प्रबंधन समितियां सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करवाएंगी। होटल और होम स्टे को खोलने की अनुमति भी दे दी गई है। इसके साथ रेस्टोरेंट और शापिंग मॉल भी सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक खुल सकेंगे। वहीं, देहरादून नगर निगम क्षेत्र और कंटोनमेंट जोन में किसी भी गतिविधि को शुरू करने की अनुमति शासन ने नहीं दी है।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने होटल, रेस्टोरेंट, शापिंग मॉल और धार्मिक स्थल खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए गाइडलाइन जारी की है। जिलाधिकारी अपने अपने जिलों में इसके लिए अलग से दिशा-निर्देश जारी करने होंगे।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि आठ जून से प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट, शापिंग माल और धार्मिक गतिविधियों को शुरू करने की अनुमति प्रदान कर दी है। इसके लिए गाइडलाइन जारी की गई है। दिशानिर्देशों के तहत सभी जिले व्यवस्था बनाने के लिए कार्यवाही करेंगे।

होटल को खोलने की दी अनुमति
होटल, होम स्टे आदि सेवाओं को खोलने की अनुमति दे दी है। होटल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश हैं कि कोविड-19 के प्रति संवेदनशील 75 शहरों में से आने वालों की बुकिंग नहीं की जाएगी। देश के अन्य शहरों से आने वाले अतिथियों के लिए सात दिन तक के लिए बुकिंग होगी। होटल को जिला प्रशासन को प्रत्येक गेस्ट की सूचना देनी होगी। होटल प्रबंधन को प्रत्येक व्यक्ति से लिखकर लेना होगा कि वे पर्यटन स्थल या सार्वजनिक स्थल में नहीं जाएंगे। इसके लिए पर्यटन विभाग अलग से एसओपी जारी करेगा।

रेस्टोरेंट और शॉपिंग मॉल मालिकों को राहत
सरकार ने रेस्टोरेंट और शापिंग मॉल के मालिकों को राहत देते हुए सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक प्रतिष्ठान खोलने की अनुमति दे दी है। शापिंग मॉल मालिकों को लिखित में देना होगा कि एयर कंडिशनर चलाने के लिए सीपीडब्ल्यूडी के मानकों का पालन करेंगे। केवल पचास प्रतिशत दुकानें एक समय में खोली जाएंगी। जिला प्रशासन तय करेगा कि अधिकतम कितने लोग मॉल में एक समय में जा सकेंगे। इसके लिए अलग से एसओपी जारी की जाएगी। रेस्टोरेंट मालिकों को सामाजिक दूरी और सर्विस के दौरान टेबल की दूरी को लेकर भी व्यवस्था बनानी होगी।

धार्मिक स्थल खुलेंगे
धार्मिक स्थल सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक ही खुलेंगे। जिला प्रशासन मंदिरों के ट्रस्ट, बोर्ड और प्रबंधन समितियों से सलाह करने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या तय करेगा कि एस समय में कितने लोग मंदिर में आ सकते हैं।

देवस्थानम बोर्ड तय करेगा चारधाम यात्रा
प्रदेश सरकार ने चार धाम देवस्थानम बोर्ड को चार धाम यात्रा शुरू करने का जिम्मा सौंपा है। जारी गाइडलाइन के अनुसार बोर्ड प्रबंधन यात्रा को लेकर जिला प्रशासन और अन्य हक हकूकधारियों से चर्चा करेगा। आम सहमति बनने के बाद यात्रा शुरू की जाएगी। कितने श्रद्धालु यात्रा में आ सकते हैं, इसके लिए प्रोटोकॉल तय किया जाएगा। गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट निर्देश है कि कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा को मानकों का पूरी तरह से अनुपालन होगा। यात्रा शुरू करने से पहले उसका पूरी तरह से प्रचार किया जाएगा। इसके साथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए तय प्रावधानों के बारे भी जानकारी दी जाएगी। उड़ान योजना के तहत हेलीकॉप्टर से सवारी के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए सिविल एविएशन अलग से एसओपी जारी करेगा।

अन्य राज्यों के श्रद्धालु नहीं आयेंगे
प्रदेश सरकार के स्तर से जारी गाइडलाइन से स्पष्ट है कि चार धाम यात्रा और प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों में दर्शन के लिए केवल राज्य के नागरिकों को अनुमति होगी। प्रदेश के बाहर के लोगों को यात्रा और धार्मिक स्थलों में दर्शन की अनुमति नहीं होगी।

साप्ताहिक बंदी पर निगम कर्मचारियों के साथ जुटी रही महापौर

महापौर अनीता ममगाई ने रविवार को हो रही साप्ताहिक बंदी का लाभ उठाते हुए पूरे बाजार क्षेत्र को एक बार फिर से सैनेटाइज करवाया। बता दें कि शहर के व्यापारियों द्वारा महापौर से अनलॉक वन में बाजार में लोगों की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर सैनेटाइजेशन कराने का आग्रह किया गया था। जिस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए महापौर रविवार सुबह से ही मोर्चे पर डट गई। तमाम प्रमुख बाजारों और यहां पड़ने वाले आश्रमों और धर्मशालाओं में सैनेटाइजेशन कराया।
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए नगर निगम लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को शहर के तमाम प्रमुख बाजारों में सैनिटाइजर का छिड़काव किया गया। महापौर अनिता ममगाई की अगुवाई में नगर निगम अमले ने सैनिटाइजर टैंकर और फॉगिंग मशीनो के साथ मुख्य बाजार में छिड़काव किया। हरिद्वार रोड़, त्रिवेणी घाट बाजार, रेलवे रोड, मुखर्जी मार्ग, देहरादून मार्ग सहित विभिन्न बाजारों में निगम प्रशासन की ओर से सप्ताहिक अवकाश पर जोरदार तरीके से सैनेटाइजेशन कराया गया। महापौर ने दुकानों के बाहर सेनेटाइजर का छिड़काव की कमान खुद संभाली। क्षेत्रवासियों से घरों से बाहर न निकलने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील भी की।
महापौर अनीता ममगाई ने बताया कि वैश्विक महामारी को देखते हुए मार्च माह से ही निगम का फोकस सैनेटाइजेशन पर रहा है। लेकिन कुछ कपड़ों की दुकानों एवं अन्य व्यापारिक प्रतिषठानों में सेनेटाइजिंग मे दिक्कतें आ रही थी जिसे देख आज साप्ताहिक बंदी पर बाजारों को पूर्ण सैनेटाइजेशन कराया गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के लिए उपजिलाधिकारी, सहायक नगर आयुक्त और सैनेट्री इंस्पेक्टर को आदेशित किया गया है कि अपनी निगरानी में यह कार्य पूर्ण करायें। महापौर के अनुसार अनलॉक वन में अब सरकार का ध्यान लोगों की परेशानियों को दूर करने के साथ अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पूरी तरह से बाजारों को खोलने पर है। आने वाले दिनों में शहर के बाजारों में भी लोगों की आवाजाही और बढ़ेगी जिसके लिए आज बाजारों को पूरी तरह से सैनेटाइजेशन कराया गया है। आगे भी यह अभियान समय-समय पर निरंतर जारी रहेगा। इस दौरान पार्षद गुरविंदर सिंह, राजपाल ठाकुर, पवन शर्मा, हितेंद्र पवार, राजेश भट्ट, संजय पंवार आदि मौजूद रहे।

बिना शुल्क पेटीएम मनी ऐप में खोले निवेश खाता

विभिन्न कागजी जरुरतों की वजह से म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए खाता खोलना एक जटिल प्रक्रिया हुआ करती थी। डिजिटल प्लेटफॉर्म पेटीएम मनी ऐप ने इस सारी प्रक्रिया को डिजिटल कर म्यूचुअल फंड में निवेश को बेहद आसान बना दिया है। इसकी मदद से लोग बड़ी आसानी से म्यूचुअल फंड में निवेश कर अपनी संपत्ति को बढ़ा सकते हैं। अब आप बैंकों या वितरकों द्वारा वसूल किये जाने वाले कमीशन से बचते हुए बिना किसी शुल्क के निवेश खाता खोल सकते हैं तथा डायरेक्ट प्लान के द्वारा 1 प्रतिशत तक का अतिरिक्त लाभ कमा सकते हैं।

जानिए पेटीएम मनी पर खाता कैसे खोल सकते हैं और म्यूचुअल फंड में निवेश कैसे करें-

चरण 1- गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से पेटीएम मनी ऐप इंस्टॉल करें।
चरण 2- अपने पेटीएम खाते पर लॉग-इन करें या अपने मोबाइल नंबर के साथ एक नया खाता खोलें।
चरण 3- अपना केवाईसी पूरा करें, इसके साथ ही आप निवेश करने के योग्य हो जाते हैं।
चरण 4- होम स्क्रीन के निचले भाग में ’इंवेस्ट’ बटन पर टैप करें।
चरण 5- ’डिस्कवर म्यूच्यूअल फंड्स फॉर इन्वेस्टमेंट’ को चुनें। अब आप रेटिंग, सलाह, फंड मैनेजर और एएमसी जानकारी के आधार पर विभिन्न योजनाओं की तुलना कर सकते हैं।
चरण 6- अपनी पसंद का एक फंड चुनें और श्इनवेस्ट नाउ’ पर टैप करें।
चरण 7- ऐप आपको एसआईपी या एकमुश्त विकल्प के द्वारा निवेश की सुविधा देता है। अपने पसंदीदा विकल्प का चयन करें और निवेश की राशि दर्ज करें। इसके बाद, प्रोसीड टू पेमेंटश् पर टैप करें।
चरण 8- यूपीआई, नेट बैंकिंग या अपने बैंक के साथ ऑटो-पे सेट करके अपने भुगतान को स्वचालित कर भुगतान करें। लेनदेन पूरा करने के साथ ही प्रक्रिया समाप्त हो जाती है और आप एक म्यूचुअल फंड निवेशक बन जाते हैं।

अधिसूचना जारी, क्वारंटीन अवधि में रहने पर कर्मचारी को देना होगा वेतन

राज्य में कोरोना संदिग्ध कर्मचारियों को क्वारंटीन अवधि के दौरान 28 दिन का भुगतान युक्त अवकाश देना होगा। इस संबंध में राज्य सरकार के श्रम विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। श्रम विभाग के सचिव हरबंस सिंह चुघ ने अधिसूचना जारी होने की पुष्टि की। बता दें कि पिछली कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
यह आदेश प्रदेश में संचालित कारखानों, सभी दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों व उन व्यापारिक केंद्रों में जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं, पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। महामारी अधिनियम 1897 की शक्तियों के तहत यह प्रावधान किया गया है। इसके तहत यदि कोई कर्मचारी या कर्मकार कोविड-19 महामारी में संदिग्ध होता है और उसे क्वारंटीन किया गया हो, उसका संस्थान या नियोजक 28 दिन का अवकाश मंजूर करेंगे और उसे इस अवधि का पूरा भुगतान किया जाएगा। लेकिन इस तरह के अवकाश की मंजूरी के लिए कर्मचारी को स्वस्थ होने के बाद अपने नियोजक या प्राधिकृत व्यक्ति को चिकित्सा प्रमाण पत्र देना होगा।
वहीं, सभी कारखानों, दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, अधिष्ठानों के सूचना पट्ट और मुख्य द्वार पर कोविड-19 महामारी की रोकथाम को लेकर केंद्र व राज्य सरकार द्वारा बताए गए सुरक्षा उपायों को प्रदर्शित करना होगा।

उत्तराखंड का औषधीय धनिया पौधा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

उत्तराखंड, अल्मोड़ा जनपद, ताड़ीखेत विकास खंड, बिल्लेख गांव के केवलानंद उप्रेती के सिविल इंजीनियर पुत्र गोपाल दत्त उप्रेती द्वारा व्यक्तिगत प्रयासो के बल अपने बिल्लेख गांव स्थित सेव बगान में सात फुट एक इंच ऊंचे सुगंधित व औषधीय धनिये के पौंधे जैविक विधि से उत्पादित कर, कृषि उघम के क्षेत्र मे नई वैश्विक क्रान्ति की अलख जगा, कृषि वैज्ञानिकों, काश्तकारों तथा उद्यम विकास मे संघर्षरत उद्यमियो का ध्यान अपना नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मे दर्ज करा, वैश्विक फलक पर ख्याति अर्जित की है। इससे पूर्व यह रिकॉर्ड छह फुट एक इंच का था।

जैविक विधि से उत्पादित उक्त धनिया पौंधों का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए 21 अप्रैल को विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के वैज्ञानिक डॉ गणेश चौधरी द्वारा उत्पादित पौंधों का निरीक्षण कर इसकी पुष्टि की गई थी। माह मई प्रथम सप्ताह मे इस उपलब्धि को लिम्का बुक ऑफ रिकॉड्स में दर्ज किया जा चुका था।

आईसीएआर वैज्ञानिक डॉ गणेश चौधरी व उत्तराखंड के चीफ हॉर्टिकल्चर आफिसर टीएन पांडे, उत्तराखंड आर्गेनिक बोर्ड रानीखेत-मजखाली इंचार्ज डॉ देवेन्द्र सिंह नेगी, उद्यान सचल दल केंद्र बिल्लेख प्रभारी राम सिंह नेगी के द्वारा उक्त सुगंधित व औषधीय गुणों से युक्त तथा पाचन तंत्र को मजबूत करने वाला अम्बेलीफेरी कुल के धनिया पौंधे को विटामिन श्एश्, श्सीश् तथा श्केश् गुणों के साथ-साथ कैल्शियम, कॉपर, आयरन, कार्बोहाइट्रेड, थियामिन, पोटेशियम, फास्फोरस से युक्त बताया गया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक आमतौर पर धनिया पौंधों की ऊंचाई वैश्विक स्तर पर दो से छह फुट एक इंच तक देखी जाती रही। पहली बार उत्तराखंड मे सात फुट एक इंच धनिये पौंधे की अदभुत व आश्चर्य चकित कर देने वाली पैदावार कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अवलोकित की गई थी।

कृषि वैज्ञानिकों द्वारा की गई प्रत्यक्ष पुष्टि के बाद, उत्पादित पौंधों के पुनर्वालोकन तथा डाक्यूमेंटेशन कराने हेतु गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तथा लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से जुड़े पदाधिकारियों को 23 अप्रैल को पत्र भेज आमंत्रित किया गया था।

उत्तराखंड में कृषि को व्यवसायिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने पंतजलि से मांगा सहयोग

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास में पतंजलि योगपीठ के आचार्य बाल कृष्ण एवं कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक संपन्न हुई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के दृष्टिगत बहुत से लोग प्रदेश में वापस आए हैं। इन्हें स्वरोजगार से जोड़ने और शॉर्ट टर्म में आजीविका उपलब्ध कराने में कृषि क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जैव विविधता उत्तराखण्ड की विशेषता है। कृषि क्षेत्र में इसका लाभ लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती हमारे पूर्वजों की देन है। उन्होंने अनुभवों से इसका ज्ञान हासिल किया था। कृषि क्षेत्र में विकास के लिए परंपरागत खेती और आधुनिक तकनीक की मदद से किए जाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेती को व्यावसायिक सोच के साथ करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार फसलों का चयन करना होगा। प्रदेश में गिलोय, मुलेठी, हींग, अदरक, हल्दी और नींबू जैसे उत्पादों को प्रोसेस कर इसके लिए क्लस्टर खेती को बढ़ावा देते हुए उत्पाद की मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि इसका अच्छा मूल्य मिल सके।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने और किसानों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने में पतंजलि हर सम्भव सहायता करेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार डॉ. के. एस. पंवार, अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश एवं सचिव कृषि आर. मीनाक्षी सुंदरम सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

टिकटॉक को आ गया बाय-बाय करने का समय, स्वदेशी एप मित्रों हो रहा पॉपुलर

भारत में टिकटॉक का बाय-बाय करने का वक्त आ गया है। भारत के युवाओं की जुबां पर अब टिकटॉक नहीं बल्कि स्वदेशी निर्मित एप मित्रों का नाम है। अभी तक इस एप को 50 लाख से ज्यादा युवा गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर चुके है। इसे आईआईटी रूड़की के पूर्व छात्रों ने बनाया है। इसे टिकटॉक का क्लोन भी कहा जा रहा है।

आईआईटी के पूर्व छात्रों का कहना है कि एप लांच करते समय हमें ऐसे ट्रैफिक की उम्मीद नहीं थी। इसे बनाने के पीछे लोगों को सिर्फ भारतीय विकल्प देना था। आईआईटी रुड़की में वर्ष 2011 में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग ब्रांच से पासआउट छात्र शिवांक अग्रवाल ने अपने चार साथियों के साथ मित्रों एप बनाया है।

11 अप्रैल को हुआ था मित्रों एप लांच
पेटीएम के पूर्व सीनियर वाइस प्रेजिडेंट दीपक के ट्वीट के बाद इसकी चर्चा हर किसी की जुबान पर है। अचानक बड़ी संख्या में लोगों के एप डाउनलोड करने से नेटवर्क ट्रैफिक भी प्रभावित होने लगा। टीम मेंबर ने बताया कि वास्तव में 11 अप्रैल को एप लांच करते समय यह नहीं सोचा था कि इसे इतनी सफलता मिलेगी। टिकटॉक को पीछे छोड़ना जैसी कोई बात नहीं है। हमारा उद्देश्य लोगों को सिर्फ एक भारतीय विकल्प देना था। लोग इसका इस्तेमाल करना चाहेंगे या नहीं यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमें लोगों से जो आशीर्वाद मिला, उससे हम बहुत खुश हैं। उन्होंने बताया कि हमें किसी ने फंड नहीं दिया है, उनका फंड लोगों का प्यार ही है।

मित्रों स्वदेशी नाम, इसलिए देना उचित
टीम मेंबर ने बताया कि मित्रों का अर्थ मित्र ही है। एक तो यह भारतीय उपभोक्ताओं को भारतीय मंच के जरिए सेवा देने के लिए है। हम स्वदेशी नाम देकर भारतीय नामों के खिलाफ पूर्वाग्रहों को भी दूर करना चाहते हैं।