ग्रीन टैक्स लगाकर आय बढ़ायेगा देहरादून नगर निगम

देहरादून नगर निगम क्षेत्र में प्रवेश करने पर अब प्रवेश शुल्क देना होगा। मनाली जैसे शहरों की तर्ज पर देहरादून नगर निगम ने शहर में प्रवेश करने पर बाहरी वाहनों पर ग्रीन टैक्स लगाने की तैयारी की है। महापौर सुनील उनियाल गामा की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। टैक्स कितना होगा, कौन से वाहन इसके दायरे में आएंगे और किन्हें छूट रहेगी, इसका प्रारूप तैयार कर शासन को भेजने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जायेगी।
महापौर सुनील उनियाल गामा ने बताया कि देहरादून में पंजीकृत वाहनों को छूट रहेगी। कोरोना संक्रमण के चलते ठप पड़े कार्यो को शुरू करने और नगर निगम को फिर से पटरी पर लाने के लिए कसरत शुरू हो गई है। इसी के मद्देनजर गुरुवार को महापौर ने निगम कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। निगम की कार्यकारिणी के जनवरी में चुने जाने के बाद यह पहली बैठक रही। निगम के सभा हॉल में हुई बैठक में शारीरिक दूरी के साथ महापौर और नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय की मौजूदगी में बैठक शुरू हुई।
इसमें मुख्य एजेंडा निगम की आय बढ़ाने का रहा। इस दौरान महापौर ने प्रस्ताव रखा कि मनाली व कुछ अन्य शहरों में बाहरी राज्यों के वाहनों से ग्रीन टैक्स वसूला जाता है। मसूरी में भी ऐसी व्यवस्था है। ऐसे में देहरादून में भी ये टैक्स लगाया जाना चाहिए। इसे पार्षदों की ओर से हरी झंडी दे दी गई। महापौर गामा ने बताया कि निगम अधिकारी इस बारे में प्रारूप तैयार करेंगे और शासन से मंजूरी के बाद नगर निगम क्षेत्र में सभी सीमाओं पर टोल-बैरियर लगाकर टैक्स की वसूली की जाएगी। वहीं, बैठक में तय हुआ कि नए ग्रामीण वार्डों में सफाई की व्यवस्था प्रभावी बनाने के लिए एक जून से सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी। ऐसे 29 ग्रामीण वार्ड हैं, जहां मौजूदा समय में महज पांच-आठ सफाई कर्मचारी हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में शहर की तर्ज पर बस स्टैंड भी बनाए जाएंगे।

देवभूमि रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक और राधे बने महासचिव

लाॅकडाउन से एक ओर पूरा विश्व आर्थिक तंगी की ओर बढ़ रहा है। वहीं तीर्थनगरी में इसके कुछ सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे है। अपने अधिकारों को लेकर ऋषिकेश के रेस्टोरेंट मालिक और संचालक एक मंच पर आ गये है। इन्होंने देवभूमि रेस्टोरेंट एसोसिएशन के नाम से अपनी यूनियन का गठन कर लिया है।
जिसमें अध्यक्ष की जिम्मेदारी विवेक तिवारी, तिवारी शुद्ध भोजनालय को दी गई है। यह शहर का प्रतिष्ठित और पुराना रेस्टोरेंट है। जिये शहरवासी तिवारी कैंटी के नाम से भी जानते है। वहीं महासचिव की जिम्मेदारी राधे साहनी, मद्रास होटल को दी गई है। यह शहर का साउथ इडियन रेस्टोरंट है जिसे नगर के ही नही विदेशी भी काफी पंसद करते है। कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी विपुल चुघ, स्नैक्स प्वाइंट को दी गई है।
यूनियन के गठन के बाद पदाधिकारियों ने बताया कि जल्द ही अन्य पदों पर भी जिम्मेदारी दी जायेगी। रेस्टोरेंट और होटल को इस समय काफी नुकसान हुआ है। लाॅकडाउन ने हमें सिखाया है कि हमें एकजुट होकर इससे जूझना है। हम सबकी समस्याऐं लगभग एक जैसी है। लाॅकडाउन के कारण हमने रेस्टोरेंट के संचालन में कुछ फेरबदल भी किये है। होम डिलीवरी को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं, नगर के व्यापारियों ने रेस्टोरेंट मालिको और संचालकों की यूनियन बनने से खुशी जाहिर की है।

उत्तराखंड में शराब पर लगा हेल्थ केयर टैक्स

कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण उत्तराखंड को हुए नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार ने अहम फैसले लिए। इसमें पेट्रोल के दाम एक और डीजल के दाम दो रुपये बढ़ा दिए गए हैं। वहीं, शराब के विभिन्न ब्रांड में बीस रुपये से लेकर पांच सौ रुपये तक का हेल्थ केयर टैक्स लगाया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर मंत्रिमंडल की बैठक हुई। शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि प्रदेश सरकार ने कोरोना के चलते हुए राजस्व नुकसान को देखते हुए शराब, पेट्रोल और डीजल के दामों को बढ़ाया है।

शराब की प्रति बोतल पर हेल्थ केयर टैक्स लगाया है। शराब की तीनों श्रेणियों में दाम बढ़ाए गए हैं। नए रेट से अर्जित होने वाला टैक्स प्रदेश की विभिन्न योजनाओं और कोविड-19 रोकथाम में खर्च होगा। अनुमान है कि हेल्थ केयर टैक्स से 250 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व आएगा। बढ़े हुए दाम इस वित्तीय वर्ष में प्रभावी रहेंगे। प्रदेश सरकार ने ध्यान रखा है कि शराब के दाम उत्तर प्रदेश से कम रहें। पेट्रोल और डीजल पर वैट में मामूली वृद्धि की गई है। इस वृद्धि से प्रदेश को 120 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व एकत्रित होगा।

इन बातों पर कैबिनेट ने लिया फैसला
– उत्तराखंड में पेट्रोल एक रुपये और डीजल के दाम दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाने का फैसला लिया गया।
– शराब के दामों में तीन कैटेगरी में वृद्धि की गई है जो 20 रुपये से लेकर 425 रुपये के बीच है।
– उत्तराखंड लौटने वाले प्रवासियों के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू होगी।
– हरिद्वार में अस्थि विसर्जन पर लगी रोक हटा दी गई है।
– उद्यमियों को ऋण सब्सिडी में लाभ मिलेगा।
– 50 हेक्टेयर वाले पट्टे पर मशीन से हो सकेगा खनन

मंत्रिमंडल ने फैसला लिया है कि 50 हेक्टेयर तक के खनन पट्टों पर अब मशीन से खनन हो सकेगा। मामला अदालत में विचाराधीन पचास हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र वालेे पट्टाधारकों को यह अनुमति नहीं दी गई है। सरकार इसको लेकर हाईकोर्ट जाएगी। वहीं रायवाला से हरिद्वार के भोगपुर तक खनन पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए सरकार न्यायालय में जाने के साथ केंद्र से भी वार्ता करेगी।

दो शिफ्ट में काम करने की अनुमति
कारखानों में दो शिफ्ट में काम करने की अनुमति मंत्रिमंडल ने दे दी है। इसके लिए श्रमिकों को ओवर टाइम देना होगा। 11-11 घंटे की दो पालियों में काम करने वाले श्रमिकों को 6 कार्यदिवस काम करना होगा और प्रतिदिन तीन घंटे ओवरटाइम मिलेगा। निरंतर उत्पादन करने वाले कारखानों में 12-12 घंटे की दो शिफ्ट होगी। यहां चार घंटे का ओवर टाइम मिलेगा।

जानिए, इसबार के लॉकडाउन में क्या मिली छूट और क्या रहेंगे प्रतिबंध

कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन की अवधि को एक बार और बढ़ा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदेश जारी किया है चार मई को खुलने वाले लॉकडाउन को अब दो सप्ताह के लिए और बढ़ा दिया है। अब यह लॉकडाउन 17 मई तक जारी रहेगा। गृह मंत्रालय ने यह आदेश आपदा नियंत्रण कानून, 2005 के तहत लिया है। 
गृह मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि ग्रीन और ऑरेंज जोन में कुछ राहतें दी जाएंगी। वहीं, रेड जोन में कोई छूट नहीं दी जाएगी। रेड जोन और कंटेनमेंट क्षेत्र के बाहरी इलाकों में देश भर में प्रतिबंधित गतिविधियों के अलावा कुछ अतिरिक्त गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी। इनमें साइकिल रिक्शा और ऑटो रिक्शॉ, टैक्सी, ऑनलाइन कैब सेवा, जिले के अंदर और जिलों के बीच बसें, नाई की दुकान, स्पा और सलून आदि सेवाएं शामिल हैं। 
मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने के साथ ही नए दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके अनुसार ऑरेंज जोन में जिले के अंदर-अंदर लोगों और वाहनों को और लोगों को अनुमति प्राप्त गतिविधियों के लिए यात्रा करने की अनुमति होगी। चार पहिया वाहन में ड्राइवर के अलावा दो लोगों को बैठने की अनुमति होगी। 
ग्रीन जोन में देशभर में जारी कुछ प्रतिबंधित गतिविधियों को छोड़कर बाकी सभी गतिविधियों को अनुमति दी गई है। जिले के अंदर बसों के संचालन और बस डिपो के संचालन को अनुमति दी गई है। हालांकि बसों में 50 फीसदी यात्रियों को बैठाने का निर्देश दिया गया है। 

इन गतिविधियों पर पूरे देश में जारी रहेगा प्रतिबंध
इस दौरान हवाई यात्रा, रेल यात्रा, मेट्रो, सड़क से अंतरराज्यीय परिवहन, स्कूल, कॉलेज व अन्य शिक्षण संस्थान, ट्रेनिंग/कोचिंग संस्थान, होटल और रेस्टोरेंट आदि भीड़ जमा करने वाली गतिविधियों जैसे सामाजिक, राजनीति, सांस्कृतिक व अन्य कार्यक्रम, धार्मिक स्थान आदि की सेवाएं पूरे देश में प्रतिबंधित रहेंगी। हालांकि, मंत्रालय द्वारा चयनित कार्यों के लिए वायु, सड़क व रेल मार्ग द्वारा लोगों की यात्रा को अनुमति रहेगी। 
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। करीब ढाई घंटे चली बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सीडीएस बिपिन रावत, रेल मंत्री पीयूष गोयल आदि मंत्री समेत कई अधिकारी मौजूद रहे थे।

तीसरे चरण में क्या छूट मिलेगी?
-रेड जोन में किसी तरह की कोई गतिविधि नहीं
-ग्रीन जोन में आधी आबादी के साथ बसें चल सकती हैं
-रेड जोन में जरूरी सामान की ऑनलाइन डिलीवरी होगी
-मनरेगा के काम को मंजूरी
-ग्रीन जोन में शराब और पान की दुकानें खुल सकेंगी
-इन दुकानों में दो गज की दूरी रहेगी, एक बार पांच लोग से ज्यादा नहीं
-ऑरेंज जोन में जिलों के भीतर जरूरी काम के लिए वाहन चलाने की अनुमति
-ऑरेंज जोन में टैक्सी में ड्राइवर के अलावा दो लोगों के बैठने को मंजूरी
-शहरी इलाकों में उद्योंगों के खोलने की सशर्त अनुमति
-जरूरी सामान की मैन्यूफैक्चरिंग की इजाजत
-नवीकरणीय ऊर्जा के निर्माण की अनुमति
-रेड जोन में 33 फीसद लोगों के साथ निजी दफ्तर खोल सकते हैं
-ग्रामीण इलाकों के रेड जोन में निर्माण कार्य को मंजूरी
-ग्रामीण इलाकों में भी सभी दुकानों को खोलने की अनुमति
-कृषि संबंधी कामों के लिए मिली अनुमति
-स्वास्थ्य सुविधाएं चालू रहेंगी
-सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ओपीडी सेवा चालू
-बैंक, एनबीएफसी, इंश्योरेंस कंपनी को खुलने की इजाजत
-पोस्ट की सुविधा उपलब्ध रहेगी
-रेड जोन में ज्यादातर निजी संस्थान को खुलने की अनुमति

तीसरे चरण में क्या रहेगा बंद?
-हर जोन में स्कूल, कॉलेज बंद रहेंगे
-हर जोन में शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक गैर जरूरी काम के लिए आने जाने पर रोक
-हवाई, सड़क, ट्रेन और मेट्रो सफर पर रोक
-साइकिल, रिक्शा, ऑटो रिक्शा पर रोक
-टैक्सी और कैब भी नहीं चलेगी
-सैलून, नाई की दुकान, स्पा बंद रहेंगेघ्
-होटल और रेस्टोरेंट्स बंद रहेंगे
-सिनेमा हॉल, मॉल, जिम, स्पोर्ट्स क्लब बंद रहेंगे
-सभी धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम बंद रहेंगे
-65 उम्र से ज्यादा वाले और 10 साल से कम उम्र वाले बच्चों को घर में रहने की हिदायत
-जोन में बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्यों के पास सख्ती करने का अधिकार 

ग्रीन जोन के जिलों में सुबह सात से शाम छह बजे तक खुलेंगी दुकानें

उत्तराखंड में 9 जिलों में आज से लॉकडाउन में छूट दी जा रही है। केन्द्र सरकार द्वारा दुकानों को खोले जाने के संबंध में जारी गाइडलाइन पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित बैठक में विचार विमर्श किया गया।
बैठक में तय किया गया कि ग्रीन जोन वाले नौ पर्वतीय जिलों में केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार दुकानों को खोला जाएगा। यहां दुकानें सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक खुलेंगी। शराब, नाई, होटल और रेस्टोरेंट आदि जिन दुकानों को प्रतिबंधित रखा गया है, उन दुकानों को बंद रखा जाएगा।
चार जिलों देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंहनगर में वर्तमान की स्थिति बरकरार रहेगी। इन जिलों में आवश्यक वस्तुओं की दुकानें पहले की तरह सुबह सात से दोपहर एक बजे तक ही खुलेंगी। इन चार जिलों में यदि किन्हीं क्षेत्रों में शिथिलता दी जानी है तो उसके संबंध मे संबंधित जिलाधिकारी निर्णय लेंगे। इंटर स्टेट व इंटर डिस्ट्रिक्ट यातायात पर पहले की तरह ही रोक रहेगी।

हर हाल में सोशल डिस्टेंसिंग का करना होगा पालन
मुख्यमंत्री ने निजी निर्माण कार्यों की अनुमति दिये जाने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित कर ले कि सोशल डिस्टेंसिंग को हर हाल में बनाए रखा जाए। लोग बिना काम के बाहर न निकलें।
घर से बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग करें। मुख्यमंत्री ने छूट के दायरे में आने वाले नौ जिलों के लोगों से अपील की है कि जरूरी होने पर ही घर से निकले, अनावश्यक बाहर न जाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करें। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल कुमार रतूङी, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, शैलेश बगोली, राधिका झा उपस्थित थे।

इस समय राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता देंः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोविड-19 के दृष्टिगत सभी जिलाधिकारियों को जनपद की परिस्थिति के अनुकूल आम आदमी की समस्याओं के समाधान में मानवीय व व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने पर ध्यान देने को कहा है। उन्होंने कहा कि शादी विवाह में दूल्हा और दुल्हन दोनों के पक्षों की व्यावहारिकता देखें। ऐसे प्रकरण अंतर्जनपदीय भी हो सकते हैं। विवाह के लिए केन्द्र सरकार के सामाजिक दूरी व अन्य निर्देशों का अनुपालन करते हुए अनुमति प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जो लोग अपनी रिश्तेदारी आदि वजह से लॉक डाउन में फंस गए हैं उनका स्वास्थ्य परीक्षण करते हुए ग्रीन कैटेगरी के जनपदों में जाने की अनुमति प्रदान की जाए। यही नहीं जिन लोगों को क्वॉरेंटाइन में रखे हुए 14 दिन पूरे हो गए हैं उन्हें 15वें दिन स्वास्थ्य परीक्षण के बाद यथा स्थान भेजने की व्यवस्था कर दी जाए।
मुख्यमंत्री आवास में शासन के उच्चाधिकारियों के साथ सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोविड-19 के दृष्टिगत इससे संबंधित बचाव एवं राहत कार्यों की समीक्षा एवं भारत सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन के संबंध में व्यापक चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि काश्तकारों के व्यापक हित में आम व लींची के सीजन के दृष्टिगत इसे क्रय करने हेतु आने वाले ठेकेदारों को भी आवश्यक चिकित्सा सुरक्षा जांच के बाद आवागमन की सुविधा प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि मटर की खेती करने वाले किसानों के हित में फ्रोजन मटर की प्रोसेसिंग करने वाले उद्योगों को भी प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री ने गर्मी व सर्दी के मौसम में प्रदेश के सीमांत जनपदों उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़ में माइग्रेट होने वाले लोगों के आवागमन, पशुओं को चारा-पानी, गर्मी के दृष्टिगत पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉक डाउन के कारण प्रदेश में हजारों लोगों ने रिवर्स माइग्रेशन किया है, लॉक डाउन के बाद भी इनकी संख्या और बढ़ सकती है इसके लिए एक प्रोफॉर्मा तैयार किया गया है जिसमें उनकी दक्षता आदि का पूरा विवरण तैयार किया जाना है। इसके लिए 30 हजार आवेदन भेजे जा चुके हैं। यह प्रक्रिया भविष्य की योजना तैयार करने में मददगार हो सकेगी। जिला अधिकारी अपने जनपदों में इसका भी ध्यान रखें। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान के लिए अधिक से अधिक लोगों को प्रोत्साहित करने की भी अपेक्षा की। इस धनराशि से जनकल्याण के कार्यों में बड़ी मदद मिल सकती है। उन्होंने जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो भी निर्देश राज्य सरकार द्वारा कोविड-19 के दृष्टिगत राहत एवं बचाव कार्यों के संबंध में जारी किए जा रहे हैं उनका पालन गंभीरता के साथ सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों से जनपद में मेडिकल स्टाफ की तैनाती के साथ ही उनके प्रशिक्षण पर ध्यान देने को कहा ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप कृषि व खेती से संबंधित कार्यों को सुचारू रूप से संचालन की व्यवस्था की जाए। माइग्रेट लेबरों के हित में उद्योगों से समन्वय कर उनकी आवश्यकता के दृष्टिगत उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि माइग्रेट कैम्पों में नियमित रूप से हेल्थ चेकिंग व उनके मनोबल को बढ़ाने के भी प्रयास किए जाएं।
कहा कि आवश्यक सामान लेकर जाने वाले ट्रक ड्राइवरों को कतिपय जनपदों में 14 दिन के लिए क्वॉरेंटाइन किए जाने की बात भी सामने आ रही है, ऐसे ड्राइवरों के स्वास्थ्य की जांच कर उन्हें जाने दिया जाए। उन्होंने वितरित की जा रही सामग्री की एकाउंटिंग पर भी ध्यान देने को कहा। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को कोविड-19 के दृष्टिगत वन विभाग के जिन कर्मचारियों की तैनाती की गई है उन्हें वनाग्नि के बचाव आदि कार्यों के दृष्टिगत कार्यमुक्त कर दें, इनके स्थान पर पीआरडी स्वयं सेवकों की तैनाती की जाए ।
अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने कहा कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्ग, चारधाम सड़क परियोजना, कुंभ मेले से संबंधित कार्य, पुलों, नाबार्ड, लोनिवि, राज्य योजना व जिला योजना से संबंधित 75 प्रतिशत प्रगति वाले निर्माण कार्य किए जाने हैं, इसका परिचालन मानकों के अनुरूप किया जाना है। उन्होंने निर्माण कार्यों के मजदूरों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही इसका साप्ताहिक अनुश्रवण किए जाने तथा कार्य स्थल पर अथॉरिटी इंजीनियर, जे.ई. की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा, इसकी व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी इनकी रहेगी।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव उद्योग मनीषा पंवार, सचिव स्वास्थ्य नितेश झा, सचिव वित्त अमित नेगी, सचिव शहरी विकास शैलेश बगोली, सचिव पेयजल अरविंद ह्यांकी, सचिव कृषि आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव खाद्य सुशील कुमार एवं पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने उनके स्तर पर की जाने वाली व्यवस्थाओं पर जिलाधिकारियों से चर्चा की। जिलाधिकारियों ने अपनी समस्याओं से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

अगले 3 माह तक सभी कार्डधारकों को प्रति यूनिट 5 किलो चावल निशुल्क मिलेगा

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत आने वाले प्रत्येक राशन कार्ड धारक को प्रति सदस्य के हिसाब से 3 माह तक मुफ्त में पांच-पांच किलो अतिरिक्त चावल दिए जाने का राज्य सरकार ने निर्णय लिया है। शासन ने इस संबंध में सभी जिलों को आदेश भी जारी कर दिए हैं।
सचिव खाद आपूर्ति सुशील कुमार की ओर से जारी आदेश में योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में आने वाले प्रदेश के 13 लाख परिवारों के 62 लाख लोगों को यह लाभ दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी को अप्रैल, मई और जून यानि की 3 माह तक प्रतिमाह 5 किलो चावल निशुल्क दिया जाएगा।
राज्य सरकार ने यह व्यवस्था की है कि राशन कार्ड में यदि 5 सदस्य हैं तो परिवार को प्रतिमाह 25 किलो चावल मुफ्त में अलग से मिलेगा। सरकार की ओर से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन कार्ड धारकों को मिलने वाला सस्ता राशन इस बार एडवांस में दिया जा रहा है। सचिव ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि इस योजना के तहत आने वाले एवं प्राथमिकता वाले परिवारों को निशुल्क चावल वितरित करना शुरू कर दें। जिन जिलों में अप्रैल का राशन वितरित कर दिया गया है, वहां भी यह व्यवस्था अमल में लाई जाएगी।

80 करोड़ लोगों को अगले तीन महीने तक पांच किलो चावल या गेंहू मुफ्त मिलेगा

सरकार ने कोविड-19 से प्रभावित प्रवासी मजदूरों और गरीबों के लिए एक लाख 70 हजार करोड़ रूपये के राहत पैकेज की घोषणा की है। नई दिल्ली में आज संवाददाता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री सीतारामन ने बताया कि कोरोना के मुकाबले में लगे विभिन्न वर्ग के लोगों के लिए तीन महीने के लिए 50 लाख रूपये का बीमा भी कराया जाएगा। इनमें चिकित्सक, पैरा-मेडीकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी, सफाई कर्मचारी और आशा कार्यकर्ता शामिल है।
वित्तमंत्री ने बताया कि 80 करोड़ लोगों को अगले तीन महीने तक पांच किलो चावल या गेंहू मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा। यह इस समय दिए जा रहे 5 किलो राशन के अलावा होगा। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक परिवार को एक किलो दाल भी मुफ्त दी जाएगी।
वित्तमंत्री ने ये भी बताया कि मौजूदा प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत आठ करोड़ 70 लाख किसानों और अन्य लोगों को अप्रैल के पहले सप्ताह तक उनके खाते में 2 हजार रूपये जमा कर दिए जाएंगे। इससे बड़ी संख्या में गरीबी पेंशन पाने वाले लोग लाभान्वित होंगे जिनमें गरीब विधवाएं, दिव्यांगजन, स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं और उज्ज्वला योजना का लाभ ले रही महिलाएं भी शामिल हैं। वित्घ्त मंत्री ने मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी में भी वृद्धि की घोषणा की जिससे 5 करोड़ परिवारों को फायदा मिलेगा।
वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को अगले तीन महीनों के दौरान एक-एक हजार रूपये की दो किस्तों में तदर्थ अनुदान दिया जाएगा। इससे करीब तीन करोड़ गरीब वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को लाभ पहुंचेगा।

अधिक दाम वसूलने पर आढ़ती का थोक लाइसेंस निरस्त किया

कृषि उत्पादन मंडी समिति में तोता राम एंड संस नाम की दुकान पर फुटकर में सब्जी बेची जा रही है। यह जानकारी मिलते ही मंडी समिति के अध्यक्ष विनोद कुकरेती ने आढ़ती का थोक लाइसेंस निरस्त कर दिया है।
यह जानकारी देते हुए मंडी अध्यक्ष विनोद कुकरेती ने बताया कि तोताराम एंड संस के मालिक के पास केवल थोक में फल और सब्जियां बेचने का लाइसेंस है। मगर लगातार सूचना मिल रही थी कि मालिक रिटेल में महंगे दामों पर फल और सब्जी बेच रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल तोताराम एंड संस के मालिक को थोक में बेचने के लिए जारी किया गया लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। बताया यदि और किसी आढ़ती की इस प्रकार की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ भी यही कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने कृषि उत्पादन मंडी समिति के अंदर फल और सब्जियों के थोक रेट की लिस्ट भी जारी की है।

सरकार के बजट में रोजगार के लिए नए उद्योगों को प्राथमिकता

त्रिवेन्द्र सरकार ने इस बार जेंडर बजट में करीब 6204 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। यह पिछले बजट से करीब 12 करोड़ रुपये अधिक है। प्रदेश में जेंडर बजट 2007-08 से शुरू किया गया था। वित्त विभाग के अनुसार, जेंडर बजट का मतलब है सामान्य बजट में महिलाओं से संबंधित योजनाओं के लिए अलग से व्यवस्था करना। इस बार जेंडर बजट 6204 करोड़ रुपये का रखा गया है।
पिछले बजट में जेंडर बजट के तहत 6192 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी। इस बार सबसे अधिक इजाफा कल्याणकारी योजनाओं में किया गया है। पिछले बजट में कल्याणकारी योजनाओं के लिए 681 करोड़ रुपये की व्यवस्था की थी। इस बार इसके लिए 912 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। 11 विभाग ऐसे हैं, जिनमें शत प्रतिशत जेंडर बजट की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कई विभाग हैं जिन्होंने महिला संबंधित योजनाओं में 20 प्रतिशत की व्यवस्था की है।

इन विभागों की योजनाओं में शत प्रतिशत व्यवस्था
(करोड़ रुपये में)
पुलिस 06.30
शिक्षा, खेल 20.51
परिवार कल्याण 83.78
कल्याण योजनाएं 912
ग्राम्य विकास 07.60
उद्योग 07.50
परिवहन 03.50
वन 00.33
अनुसूचित जाति 74
अनुसूचित जनजाति 03.90
पशुपालन संबंधित कार्य 33

नए उद्योगों को मिलेगी रफ्तार, सरकार ने उठाया वित्तीय भार
उत्तराखंड में नए उद्योगों को रफ्तार देने के लिए सरकार ने बजट में वित्तीय भार उठाया है। सरकार ने 2020-21 के बजट में औद्योगिक विकास के लिए 382 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 100 करोड़ अधिक है। नए औद्योगिक निवेश के प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट में प्राथमिकता दी है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में उद्योग विभाग को लगभग 276 करोड़ का बजट दिया गया था। इस बार सरकार ने इसे बढ़ा कर 382 करोड़ किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में नए एमएसएमई उद्योग, बुनियादी ढांचे का विकास, नए इंडस्ट्रियल एरिया, हथकरघा एवं हस्तशिल्प, खादी ग्रामोद्योग पर सरकार का फोकस है।
ग्रोथ सेंटरों के लिए सरकार ने बजट में 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। सरकार की योजना न्याय पंचायत स्तर पर ग्रोथ सेंटर स्थापित करने की है। अब तक 83 ग्रोथ सेंटरों के लिए विभिन्न विभागों को पैसा दिया गया है। इसी तरह मेक इन इंडिया के लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।