जीएसटी परिषद की 50वीं बैठक में शामिल हुए मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल


जीएसटी परिषद की 50वीं बैठक केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित की गयी। बैठक में उत्तराखण्ड राज्य का प्रतिनिधित्व वित्त मंत्री डॉ प्रेम चंद अग्रवाल द्वारा किया गया। बैठक में विभिन्न विषयों यथा विधि समिति द्वारा संस्तुत विषयों तथा फिटमेंट समिति द्वारा संस्तुत विषयों पर विस्तृत चर्चा की गयी।

बैठक में राज्य द्वारा वर्ष 2022-23 के लिए रु0 2 करोड़ तक के वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए वार्षिक रिटर्न दाखिल करने में छूट दिए जाने, जीएसटीआर 3 बी तथा जीएसटीआर 2 ए में अंतर होने पर आईटीसी दिए जाने की सुविधा वर्ष 2017-18 तथा वर्ष 2018-19 की भांति एक निश्चित सीमा के अधीन दिनांक 01 अप्रैल, 2019 से दिनांक 31 दिसम्बर, 2021 तक के लिए जारी रखने तथा जीएसटी ट्रिब्यूनल के गठन से सम्बंधित कार्यवाही प्रारम्भ किये जाने के परिप्रेक्ष्य में ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति तथा सेवा की शर्तों से सम्बंधित नियमों पर सहमति व्यक्त की गयी।

बैठक में फिटमेंट समिति द्वारा की गई संस्तुतियों के अंतर्गत कर दरों के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किए जाने तथा कतिपय विसंगतियों को दूर किये जाने पर विचार विमर्श किया गया, जिसका राज्य द्वारा समर्थन किया गया।

वित्त मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा जीएसटी सम्बन्धी विवादों के निपटारे के लिए जीएसटी ट्रिब्यूनल के गठन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए माननीय वित्त मंत्री महोदया, भारत सरकार का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया तथा जीएसटी परिषद को यह अवगत कराया गया कि राज्य में जीएसटी ट्रिब्यूनल की राज्य पीठ का गठन देहरादून में प्रस्तावित किया गया है।

केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में छूट प्राप्त करने वाली इकाइयों को राज्य सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति करने सम्बन्धी मामले में माननीय वित्त मंत्री महोदय द्वारा यह अवगत कराया गया कि अवशेष 42 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा किये जाने की दशा में राज्य पर रू० 2376 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा तथा राज्य द्वारा ऐसी धनराशि की प्रतिपूर्ति करनी होगी, जो राज्य के राजकोष में प्राप्त ही नही हुई है। इस परिप्रेक्ष्य में उनके द्वारा उक्त प्रतिपूर्ति राज्य स्तर से सम्भव नहीं हो पाने के विषय में अवगत कराया गया।

बैठक में श्री दिलीप जावलकर सचिव वित्त तथा डा0 अहमद इकबाल आयुक्त राज्य कर सहित अन्य विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

प्रदेश के ग्रोथ इंजन को बढ़ाने में उद्योगों का महत्वपूर्ण योगदान-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को राजपुर रोड, देहरादून स्थित एक निजी होटल में बी.एन.आई देहरादून द्वारा आयोजित बी.एन.आई दून ई-3 एक्सपो बिजनेस कॉन्क्लेव कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बिजनेस नेटवर्क इंटरनेशनल (बीएनआई) दून ई-3 एक्सपो में उपस्थित सभी उद्यमियों का स्वागत करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में निवेश करने वाले उद्यमी उत्तराखंड के विकास के सारथी एवं प्रदेश की प्रगति के वाहक हैं। बीएनआई दून एक्सपो केवल उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह हमारे राज्य में पनप रही उद्यमशीलता की भावना और नवीन मानसिकता का प्रमाण है। उत्तराखंड राज्य में सभी प्रकार के व्यवसाई अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सकते हैं, सार्थक संबंध बना सकते हैं और नए अवसर तलाश सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के ग्रोथ इंजन को दौड़ाने के लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच एक उचित समन्वय बेहद आवश्यक है। हमारे एक-एक उद्यमी की उपलब्धि हमें आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहे है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारे देश की अर्थव्यवस्था दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। नरेंद्र मोदी द्वारा नए भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया है, जो अब पूरा होता दिखाई दे रहा है। आज पूरी दुनिया भारत को सक्षम, रचनाशील, बदलाव के लिए तैयार एक अभिनव आर्थिक इकोसिस्टम के रूप में देख रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड भी भारत की आर्थिक प्रगति में एक प्रमुख सहभागी बने और अग्रणी राज्यों में हमारा स्थान सुनिश्चित हो। इसके लिए सरकार कार्यरत है। राज्य सरकार निरंतरता के साथ अभावों को अवसरों में बदलने का कार्य कर रही है। राज्य सरकार प्रदेश को निवेश के लिए एक सर्वाधिक पसंदीदा गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए भी प्रयासरत है। राज्य में निवेश के लिए बेहतर कानून व्यवस्था, स्वच्छ पर्यावरण, रेल, सड़क तथा वायु परिवहन की सुविधा, सस्ती एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा जल संसाधन उपलब्ध हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण, फार्मा, आयुष और कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी, आईटी, पर्यटन, ग्रीन एनर्जी तथा सेवा क्षेत्र में कार्य किया जा रहा हैं। हमारी उद्योग अनुकूल नीतियों का परिणाम स्वरूप आज देश की विख्यात कंपनियां प्रदेश की प्रगति में अपना योगदान दे रही है। राज्य सरकार की नीतियों में प्रमुख रूप से मेगा औद्योगिक और निवेश नीति, एम.एस.एम.ई. नीति, मेगा टेक्सटाइल पार्क पॉलिसी, स्टार्टअप नीति, पर्यटन नीति, आयुष नीति, सौर ऊर्जा नीति, अरोमा पार्क नीति, इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण नीति, एयरोस्पेस एवं डिफेंस पॉलिसी, सूचना प्रौद्योगिकी नीति और निर्यात नीति शामिल है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना भी अति महत्वपूर्ण है। इसी कड़ी में हमने ’’एक जनपद-दो उत्पाद’’ योजना को लागू किया जिसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करना, उन्हें आजीविका का प्रमुख साधन बनाना है। संकल्प से सिद्धि के इस सकारात्मक और पारदर्शी माहौल में, उत्तराखंड के प्रत्येक निवेशक के लिए अवसरों का विस्तार हो रहा है।
इस दौरान कार्यक्रम में मेयर सुनील उनियाल गामा, महानगर अध्यक्ष भाजपा सिद्धार्थ अग्रवाल, सुनील, राहुल, प्रकाश, रितु मौर्य, प्रगति एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

निजी निवेश को प्रोत्साहित करने को लेकर मंत्री डा. अग्रवाल ने ली आवास विभाग की बैठक

मंत्री वित्त, शहरी विकास, आवास संसदीय एवं विधायी कार्य पुनर्गठन तथा जनगणना प्रेम चन्द्र अग्रवाल की अपेक्षानुसार आवास विभाग के अन्तर्गत निजी निवेश को प्रोत्साहित किये जाने के सम्बन्ध में सम्बन्धित अधिकारियों के साथ मंथन किया गया।

उक्त बैठक में प्रकाश चन्द्र दुम्का, संयुक्त मुख्य प्रशासक, उत्तराखण्ड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण, देहरादून द्वारा आवास विभाग के अन्तर्गत निजी निवेश को प्रोत्साहित किये जाने के विषय पर प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसमें मुख्य रूप से निजी निवेश में आने वाली चुनोतियों तथा उसके निवारण के लिये Ease of doing business, policy level intervention तथा incentives के अन्तर्गत विस्तारपूर्वक चर्चा की गयी। आवास मंत्री द्वारा निर्देश दिये गये कि राज्य में निजी निवेश को प्रोत्साहित किये जाने के लिए वर्तमान नीतियों में संशोधन किया गया तथा इसके साथ-साथ निवेश अनुकूल नीति तैयार की जाय जिसमें निजी निवेशक राज्य में विभिन्न टाउनशिप योजनाओं में निवेश कर सकें।

इसके अतिरिक्त निवेशकों को किस प्रकार से incentives दिये जा सकते हैं. जिससे राज्य में निवेश हेतु आकर्षण बढ़ सके उस पर अन्य राज्यों की प्रोत्साहन नीतियों का अध्ययन कर स्पष्ट प्रस्ताव उपलब्ध कराया जाय। निजी निवेश को भूमि क्रय भू-उपयोग परिवर्तन तथा मानचित्र स्वीकृति तथा इसके साथ-साथ अन्य विभागों से मिलने वाली सेवाओं को सिंगल विण्डो व्यवस्था के माध्यम से निश्चित समयान्तर्गत प्रदान किये जाने का तंत्र विकसित किया जाय जिससे निजी निवेशकों को आवश्यक विभागीय सहयो तीव्रता से प्राप्त हो सके। राज्य में निजी निवेश विभिन्न परियोजनाओं में विशेषकर टाउनशिप आधारित परियोजनाओं में निजी निवेशक की भागीदारी सुनिश्चित किये जाने के लिये उपयुक्त वातावरण दिया जाना अत्यंत आवश्यक है. जिससे राज्य में निवेश के माध्यम से आवश्यक रोजगार सृजन किया जा सके। इसके साथ-साथ अवस्थापना सुविधाओं को विकसित करते हुए कर संग्रह में वृद्धि की जा सके राज्यान्तर्गत प्रस्तावित नये शहरों के विकास में निजी निवेश एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। इस हेतु नये शहरों के विकास हेतु प्रस्ताव के साथ-साथ निजी निवेश को आकर्षित करने हेतु कार्यवाही करने के निर्देश मा० आवास मंत्री जी द्वारा दिये गये।

बैठक के दौरान आवास मंत्री द्वारा यह भी निर्देश दिये कि भू-उपयोग परिवर्तन वालों विषयों पर प्राधिकरण स्तर से प्रस्तावों की स्वीकृति में तीव्रता लायी जाय।

बैठक में सचिव वित्त दिलीप जावलकर, सचिव आवास सुरेन्द्र नारायण पाण्डेय, प्रबन्ध निदेशक उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन जितेन्द्र त्यागी, सचिव मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण मोहन सिंह बर्निया, सचिव हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण उत्तम सिंह चौहान व अन्य अधिकारी उपस्थित रहें।

नवंबर में इस्वेस्टर्स समिट के शुभारंभ को सीएम ने किया पीएम से अनुरोध

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन की तैयारियों के सबंध में सचिवालय में बैठक लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि इन्वेस्टर्स समिट की सभी तैयारियां समय पर पूर्ण की जाएं। उत्तराखण्ड में नवम्बर/दिसम्बर 2023 में होने वाले इस इन्वेस्टर्स समिट के शुभारंभ के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अनुरोध किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड में कार्य करने की अनेक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने का यह हमारे पास अच्छा अवसर है। राज्य में उद्योगों की स्थापना के लिए अच्छे वातावरण के साथ ही बेहतर मानव संसाधन भी है। राज्य में अधिक से अधिक निवेशक आयें, इसके लिए मजबूत नई औद्योगिक नीति बनाई गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में हवाई, रेल एवं सड़क कनेक्टिविटी का जिस तेजी से विस्तार हो रहा है, यह औद्योगिक जगत के लोगों को देवभूमि उत्तराखण्ड आने के लिए आकर्षित कर रहा है।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के तहत 02 रोड शो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एवं 06 रोड शो राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तावित हैं। इसके अलावा मसूरी एवं रामनगर में मिनी कॉन्क्लेव का आयोजन भी प्रस्तावित है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के तहत राज्य में पर्यटन, उद्योग, आईटी, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा एवं अन्य विभिन्न क्षेत्रों में राज्य में निवेश के लिए रोड शो एवं अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा।

बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, विनय शंकर पाण्डे, एमडी सिडकुल रोहित मीणा एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

विजेताओं के पुरस्कार पाकर खिले चेहरे, सरकार की पहल को बताया सराहनीय

वित्त मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने बिल लाओ, इनाम पाओ योजना के प्रथम व द्वितीय लकी ड्रा के विजेताओं को मोबाइल फोन, स्मार्ट वाच, एयर बड्स वितरित किये। इस दौरान सबसे ज्यादा बिल अपलोड करने वालों को भी सराहा गया। इस मौके पर विजेताओं ने सरकार की जीएसटी बिल जागरूकता को लेकर की जा रही इस योजना की प्रशंसा की।
रिंग रोड स्थित राज्य कर मुख्यालय में बिल लाओ इनाम पाओ योजना के पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान करीब 100 लोगों को मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने पुरस्कार देकर शुभकामनाएं दी और आगे भी इसी तरह सामान खरीदने के बाद बिल लेने को कहा। उन्होंने कहा कि जीएसटी की चोरी ना करने वाले व्यापारियों और राज्य कर विभाग के अधिकारियों को भी जल्द सम्मानित करेंगे।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि अब तक 18,655 उपभोक्ता पंजीकृत हुये हैं, जिनके द्वारा 28,893 बिल अपलोड किये गये हैं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के भीतर इस योजना को लेकर जागरूकता बढ़ी है, उन्होंने कहा कि विजेताओं को पुरस्कार देने के बाद इसमें और बढ़ोतरी होगी।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि पंजीकृत उपभोक्ताओं में सर्वाधिक बिल अपलोड करने वालों में हरी राम टम्टा 91 बिल, साहिल शाह 83 बिल, हर्षित पाण्डे 82 बिल, राजन सिंह के 77 बिल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विक्रेता व्यापारियों में से रिलायंस रिटेल लि0 के 1664 बिल, अशोक अनिल इन्टरप्राइसेस के 1166 बिल, एयर प्लाजा रिटेल होलडिंग प्रा.लि. के 916 बिल अपलोड किये गये हैं।
इस अवसर पर डॉ. अहमद इकबाल, आयुक्त राज्य कर, आईएस बृजवाल, अपर आयुक्त (विशेष वेतनमान) राज्य कर, अनिल सिंह, अपर आयुक्त राज्य कर, अमित गुप्ता, अपर आयुक्त राज्य कर, राकेश वर्मा, संयुक्त आयुक्त राज्य कर, डॉ0 सुनीता पाण्डेय, संयुक्त आयुक्त राज्य कर, प्रवीण गुप्ता, संयुक्त आयुक्त राज्य कर, अनुराग मिश्रा, संयुक्त आयुक्त राज्य कर, एसएस तिरुवा, उपायुक्त राज्य कर सहित अन्य विभागीय अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित थे।

’राजस्व में हुई वृद्धि’
वित्त मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि गत वर्ष 2021-22 (माह जनवरी तक) रुपए 4625 करोड़ राजस्व की तुलना में संगत वर्ष 2022-23 (माह जनवरी तक) में रुपए 6236 करोड़ राजस्व प्राप्त किया गया है, जो कि लगभग 35 प्रतिशत अधिक है। माह जनवरी, 2022 में प्राप्त राजस्व रुपए 526 करोड़ की तुलना में माह जनवरी, 2023 में प्राप्त राजस्व रुपए 640 करोड़ है, जो कि लगभग 22 प्रतिशत अधिक है।

’पुरस्कार के लिए इन नंबरों पर करें संपर्क’
वित्त मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि विजेताओं को पुरस्कार प्राप्ति के सम्बन्ध में कोई भी सहायता तथा जानकारी हेतु विभाग द्वारा हेल्पलाइन नंबर 1800-120-122-277, 7618111270 तथा 7618111271 जारी किया गया है, जिस पर पुरस्कार प्राप्ति के सम्बन्ध में किसी भी समस्या के निराकरण के प्रयोजन से संपर्क किया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने विद्युत विभाग की समीक्षा में दिये निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने सचिवालय स्थित अपने सभागार में विद्युत विभाग की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विद्युत विभाग को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आज जो भी कार्य किए जा रहे हैं, उन्हें अगले 10, 15 साल बाद की आवश्यकता के अनुरूप तैयार किया जाए।
मुख्य सचिव ने भावी योजनाओं की डीपीआर टाइमलाइन के साथ तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भविष्य की मांग को देखते हुए सभी प्रोजेक्ट्स टाइमलाइन के साथ पूरे किए जाएं। साथ ही, विद्युत उत्पादन के अन्य स्रोतों के क्षेत्र में देश विदेश की बेस्ट प्रैक्टिसेज का अध्ययन कर उत्तराखण्ड में भी अपनाए जाने की संभावनाओं को तलाशा जाए।
मुख्य सचिव ने पिटकुल को आने वाले 10, 15 सालों की आवश्यकता के अनुरूप सब स्टेशन और लाइन अलाइनमेंट आदि की प्लानिंग तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक लाइंस के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में भारत नेट और ब्रॉडबैंड लाइंस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराए जाने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए।
मुख्य सचिव ने मांग की दृष्टि से प्रदेश के पीक सीजन के अनुरूप विद्युत उत्पादन बढ़ाए जाने हेतु अन्य विकल्पों पर भी ध्यान देने की बात कही। कहा कि कैनाल बेस्ड सोलर प्रोजेक्ट्स, हाइड्रो काइनेटिक टर्बाइन की दिशा में भी कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि पुराने छोटे हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स का नवीनीकरण, आधुनिकीकरण और उन्नयन का कार्य शुरू किया जाए।
इस अवसर पर सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक उरेडा रंजना राजगुरु एवं ऊर्जा निगमों के प्रबन्ध निदेशक सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

आवश्यकता की वस्तुओं को राज्य में ही निर्माण करने पर सीएस का जोर

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में शासन और विभाग के सभी अधिकारियों के साथ प्रदेश में निवेश योग्य योजनाओं के सम्बन्ध में चर्चा की। उन्होंने नियोजन विभाग से खरीद वरीयता नीति तैयार करने के निर्देश दिए। इस पॉलिसी के तहत विभागों से जानकारी मांगी जाए कि किस विभाग को किस प्रकार की खरीद करनी होती है। इसके अनुसार प्रदेश में ही वस्तुओं आदि का उत्पादन पर फोकस किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि इसके लिए प्रत्येक विभाग से एक प्रारूप में सभी प्रकार की जानकारियां मांगी जाएं ताकि प्रदेश में इन खरीदे जाने वाली वस्तुओं का उत्पादन किया जाए। इससे प्रदेश में उत्पादित होने से रोजगार तो उत्पन्न होगा ही साथ ही राज्य में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार खपत संचालित योजनाओं से प्रदेश को लाभ होगा।
मुख्य सचिव ने लैंड बैंक को पोर्टल पर अपलोड किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग लैंड बैंक पोर्टल पर अपने लिए सबसे उपयुक्त भूमि की तलाश कर सकेगा। इससे उस भूमि पर योजना की सफलता के अधिक सम्भावना होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पर्यटन विभाग के पास पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए विभिन्न जगहों पर अपनी भूमि हैं। पर्यटन विभाग के लिए पर्यटन से सम्बन्धित गतिविधियों के लिए उसकी लोकेशन बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। और पर्यटन इन भूमियों को प्रयोग करने की योजनाएं बना रहा है, परन्तु आसपास में किसी अन्य विभाग की भूमि है जो पर्यटन की उस योजना के लिए, अधिक अनुकूल है। तो पर्यटन विभाग को अपनी भूमि के बजाय उस अधिक उपयुक्त भूमि पर निवेश करने की आवश्यकता है न कि अपनी भूमि पर। उन्होंने कहा कि विभागों के पास जो भी भूमियां हैं वह सार्वजनिक सम्पत्ति है, जो विभाग को उनके कार्यों के लिए दी गयी है। उन्होंने अधिकारियों द्वारा उनके विभाग की भूमि में उन्हीं के विभाग से सम्बन्धित योजनाओं का ही संचालन हो, की मानसिकता को त्यागे जाने की जरूरत बताया। कहा कि प्रदेश के हित में जिस भूमि का जिस कार्य अथवा योजना के लिए अधिक उपयोगिता होगी, उसी कार्य के लिए प्रयोग की जानी चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में पोषक अनाजों पर अत्यधिक सम्भावनाएं हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को इस दिशा में योजनाएं तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने उद्यान विभाग को हॉर्टी टूरिज्म की दिशा में योजनाएं लाए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने वन विभाग को धनौल्टी की तर्ज पर प्रदेशभर में ईको टूरिज्म को बढ़ावा दिए जाने की भी बात कही। मुख्य सचिव ने कहा कि देहरादून मसूरी के आवासीय विद्यालय भारत ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। इस प्रकार के आवासीय विद्यालयों पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। इससे सिर्फ इन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी जिससे प्रदेश और प्रदेशवासियों को किसी न किसी रूप में लाभ मिलेगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में बहुत से निवेश और उद्योग छोटी-छोटी समस्याओं के कारण अटक जाते हैं। इनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए मैकेनिज्म तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए शासन, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री स्तर पर तीन स्तर में समितियां गठित की जा सकती हैं। पहले स्तर पर शासन स्तर पर समस्या का निराकरण किया जाए। यदि वहां समस्या का निस्तारण नहीं होता तो मुख्य सचिव स्तर पर किया जाएगा उसके बावजूद नहीं हो सकेगा तो मुख्यमंत्री स्तर पर गठित समिति उस समस्या का निस्तारण करेगी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार एवं अपर सचिव नियोजन रोहित मीणा सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

पर्वतीय क्षेत्रों के उत्पादों की मार्केटिंग कर बाजार उपलब्ध कराने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सोमवार को सचिवालय में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के साथ बैठक आयोजित की। बैठक के दौरान, मुख्य सचिव ने कहा कि फूड प्रोसेसिंग हमारी ताकत है। पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाला उत्पाद बाजार की कमी, मौसम और यातायात बाधित होने के कारण खराब हो जाता है। यह उत्पाद ऐसे ही बर्बाद न हो इसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों में ही फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को बढ़ावा दिया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि इसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां विकसित किए जाएं। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को उत्पादन बढ़ाने के बाद बाजार की चिंता न रहे। इसमें प्राईवेट सेक्टर को बढ़ावा दिया जाए। जो फूड प्रोसेसिंग यूनिट पहले से चल रहे हैं उन्हें और मजबूती प्रदान करने हेतु कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार भी सृजित होगा। उन्होंने सचिव उद्यान को क्लस्टर आधारित पॉलीहाउस पर भी फोकस किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पॉलीहाउस योजना बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए बीज, सैपलिंग और रॉ मटीरियल आदि की पूर्व में ही व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी योजना के लिए व्यावहारिक दृष्टि से आ रही समस्याओं को जाने बिना और उसके निराकरण के बिना किसी भी योजना का सफल होना असम्भव है। उन्होंने कहा कि उत्पाद को बढ़ावा देने से पहले उसके बाजार की व्यवस्था और किसानों और अन्य हितधारकों को विश्वास में लेना आवश्यक है। किसानों और अन्य हितधारकों से लगातार संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझ कर उनका निराकरण किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कार्ययोजना और उसकी टाईमलाइन पूर्व में ही निर्धारित किए जाने की बात कही।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव दिलीप जावलकर, बी.वी.आर.सी. पुरषोत्तम, डॉ. पंकज कुमार पाण्डे, अपर सचिव नियोजन रोहित मीणा एवं निदेशक उद्यान एच.एस. बवेजा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

राज्य में औद्योगिक संस्थानों को हर प्रकार की सुविधा देने के किये जा रहे प्रयास-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक नीति में उद्योगपतियों के सुझावों को भी शामिल किया गया है। सरकार का प्रयास है कि राज्य में अधिक से अधिक निवेश हो तथा पूर्व से स्थापित उद्योगों को और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो। गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में एग्रो फूड प्रोसेसिंग कॉन्क्लेव 2022 में कृषि, उद्यान, फूड प्रोसेसिंग से जुड़े देश एवं विदेश के उद्योगपतियों के साथ राज्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लॉजिस्टिक पॉलिसी शुरू की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की भूमि संस्कृति और आध्यात्म का केंद्र है। प्राकृतिक सौंदर्य एवं बेहतर मानव संसाधन दोनों उत्तराखण्ड के पास हैं। राज्य में औद्योगिक संस्थानों को हर प्रकार सुविधा देने के प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य में हवाई, रेल एवं संड़क कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके लिए औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों से समय-समय पर संवाद स्थापित किये गये हैं। राज्य में औद्योगिक विकास के लिए जो महत्वपूर्ण सुझाव मिले हैं, उन्हें राज्य की औद्योगिक नीति में शामिल किया गया है। इस कॉन्क्लेव को “एडवांटेज उत्तराखण्ड“ हेतु समर्पित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लघु उद्योगों के लिए अनेक संभावनाएं हैं। राज्य में बागवानी, जैविक खेती, औषधीय व सुगंधित पौधों की खेती के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं हैं। राज्य में फार्मास्युटिकल उद्योग, ऑटोमोबाइल उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आज अच्छा कारोबार कर रहा है। राज्य ने हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, एक फार्मास्युटिकल पार्क और एक अरोमा पार्क स्थापित किया है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि देश के विकास में कृषि का बहुत बड़ा योगदान है। उत्तराखण्ड में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अधिक बढ़ावा दिया जा रहा है। उद्योगों के विकास के लिए राज्य में विभिन्न अनुमतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू है। 11 फसलों को जी.आई. टैग किया जा रहा है। कीवी, सेब एवं मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं।
पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका का सबसे बड़ा संसाधन पशुपालन, दुग्ध एवं इससे संबंधित उत्पाद हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में डेयरी उत्पादों के प्रोडक्शन के साथ ही उनकी मार्केटिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। दुग्ध एवं उनसे संबंधित उत्पादों के क्षेत्र में राज्य में अनेक संभावनाएं हैं। उत्तराखण्ड में प्रतिभाओं की कमी नहीं हैं, इन प्रतिभाओं को उजागर करने की दिशा में ध्यान देने की जरूरत है। इसमें औद्योगिक संस्थानों की बड़ी भूमिका हो सकती है।
मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधू ने कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास के लिए औद्योगिक संस्थानों को हर संभव सुविधा देने के प्रयास किये गये हैं। राज्य में निवेशकों को लाईजन ऑफिसर की जरूरत होगी तो, उपलब्ध कराये जायेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में सड़क कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हो रहा है। अवस्थापना विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। औद्योगिक शांति में उत्तराखण्ड अग्रणी राज्य है। राज्य में औद्योगिक विकास की अनेक संभावनाएं हैं। राज्य में निवेश से निवेशकों को भी फायदा होगा एवं स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि राज्य में दो मेगा फूड प्रोसेसिंग पार्क हैं। काशीपुर में अरोमा पार्क भी बनाया गया है। कीवी के उत्पादन में राज्य में अच्छा कार्य हो रहा है। हर्बल उत्पादों एवं डेयरी के विकास में भी राज्य में अनेक संभावनाएं हैं।
सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने लॉजिस्टिक नीति, र्स्टाटअप नीति, नई औद्योगिक नीति, सर्विस सेक्टर नीति सहित राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास से संबंधित विभिन्न प्रयासों की जानकारी दी।
सचिव बी.वी.आर.सी पुरूषोत्तम ने सभी निवेशकों का स्वागत करते हुए कहा एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर एवं डेयरी पर आधारित इस कॉन्क्लेव में इन क्षेत्रों से जुड़े निवेशकों को आमंत्रित किया गया है। इन क्षेत्रों में राज्य में कार्य करने के लिए अनेक संभावनाएं हैं।
पतंजलि ग्रुप के एमडी आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि कृषि एवं उद्यान के क्षेत्र में उत्तराखण्ड में अनेक संभावनाएं हैं। राज्य में 4 तरह के एग्रो क्लाइमेटिक जोन हैं। भारत का पहली फूड प्रोसेसिंग यूनिट उत्तराखण्ड में स्थापित हुई। एरोमैटिक एवं मेडिसनल क्षेत्र में राज्य में काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य बद्री गाय के दूध, घी एवं एन्य उत्पादों को और अधिक प्रमोट करना होगा। राज्य की औषधीय गुणों वाली दालों की ब्रांडिंग पर भी ध्यान देना होगा।
इस अवसर पर विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव दिये।

जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने को सरकार का प्लान, बिल लाओ ईनाम पाओ योजना

वित्त मंत्री डॉ प्रेम चन्द अग्रवाल द्वारा विधानसभा परिसर, देहरादून में राज्य कर विभाग, उत्तराखण्ड की महत्वपूर्ण योजना “बिल लाओ ईनाम पाओ“ का रिमोट दबाकर उद्घाटन किया। इस मौके पर प्रेस वार्ता आयोजित की गयी।
शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में डॉ अग्रवाल ने बताया कि “बिल लाओ ईनाम पाओ“ योजना उपभोक्ताओं को बिल लेने के संबंध में जागरूक करने के उद्देश्य से प्रदेश के विकास एवं कर संग्रह में वृद्धि के योगदान को प्रोत्साहित करने के उददेश्य से संचालित की जा रही है।
वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने योजना का शुभारम्भ करते हुए बताया गया कि राजकोष को सुरक्षित तथा सुदृढ़ बनाने में समस्त हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित किये जाने की आवश्यकता के दृष्टिगत वस्तु की खरीद पर बिल प्राप्त करने की जागरूकता के सम्बन्ध में राज्य कर विभाग द्वारा ’’बिल लाओ ईनाम पाओ’’ योजना लागू की गई है। उन्होंने पत्रकार वार्ता में बताया कि यह योजना दिनांक 1 सितम्बर, 2022 से दिनांक 31 मार्च, 2023 तक की अवधि के बिल के संबंध में प्रभावी रहेगी। योजनावधि में पंजीकृत व्यापारियों से की गयी खरीद पर प्राप्त बिल को उपभोक्ताओं द्वारा ठस्प्च् न्ज्ञ ंचच पर अपलोड किये जाने पर ऐसे उपभोक्ताओं के पास लक्की ड्रा के माध्यम से मासिक पुरस्कार व योजना समाप्ति पर मेगा पुरस्कार जीतने का अवसर होगा।
वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि ईनाम के रूप में उपभोक्ताओं को कार, इलैक्ट्रिक स्कूटर, बाइक, लैपटॉप, मोबाईल फोन, स्मार्टवाच, माइक्रोवेव आदि जीत सकेंगें। माह समाप्ति के पश्चात् उपभोक्ताओं को अगले माह की 5 तारीख तक बिल अपलोड करने का अवसर दिया जायेगा तथा प्रत्येक माह के द्वितीय सोमवार को लॉटरी का लकी ड्रा निकाला जायेगा।
बताया कि हर महीने 1500 ईनाम दिये जायेंगे तथा माह अप्रैल/मई, 2023 में मेगा लकी ड्रा का आयोजन किया जायेगा जिसके अन्तर्गत 1888 पुरस्कार दिये जायेंगे। राज्य कर विभाग की ओर से “बिल लाओ ईनाम पाओ“ योजना के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर पावर प्वाइन्ट के माध्यम से प्रस्तुतीकरण दिया गया।
बताया कि यह योजना रेस्टोरेंट (फूड चेन को छोड़कर), मिठाईयां, ड्राई फ्रूट्स, रेडीमेड गारमेंट्स (नॉन ब्रांडेड), कपड़ा एवं साड़ियां, सैलून एवं ब्यूटी पार्लर्स, फुटवियर (नॉन ब्रांडेड), गेमिंग पार्लर, लॉन्ड्री सेवाएं एवं आर्टिफिशियल ज्वैलरी पर लागू है।
इस मौके पर कमिश्नर इकबाल अहमद, स्पेशल कमिश्नर आई एस बृजवाल, एडिशनल कमिश्नर अनिल सिंह, अमित गुप्ता, जॉइन्ट कमिश्नर अनुराग मिश्रा, प्रवीण गुप्ता, डिप्टी कमिश्नर एस एस तिरूआ, जगदीश सिंह आदि उपस्थित रहे।