चावल व गेंहू के अलावा अन्य फसलों पर सरकार देगी खरीद की गांरटी

सरकार ने कृषि की ओर कदम बढ़ाते हुये आगामी वित्त वर्ष के आम बजट में कुछ कारगर पहल किये जाने की संभावना जताई है। जिसके तहत सरकार गेहूं और चावल को छोड़ अन्य सभी फसलों की खरीद की गारंटी देने की योजना बना रही है।

योजना के तहत राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को गेहूं व चावल को छोड़कर सभी फसलों की न्यूनतम गारंटी देनी होगी। आम बजट में इस पर प्रावधान किये जाने की संभावना है। दरअसल, सरकार दो दर्जन से अधिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करती है, लेकिन गेहूं व चावल को छोड़ बाकी फसलों की खरीद आमतौर पर नहीं होती है। छिटपुट राज्यों में कुछ-कुछ फसलों की खरीद कर ली जाती है। हालांकि, गेहूं व चावल की खरीद की शत प्रतिशत गारंटी नहीं होती है।

गेहूं व चावल की सरकारी खरीद पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में की जाती है। बाकी राज्यों में छिटपुट तौर पर थोड़ी बहुत होती है। इनके अलावा ढेर सारी फसलें होती हैं, जो किसानों की आमदनी को प्रभावित करती हैं। इसे लेकर किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। जिन फसलों की एमएसपी घोषित भी होती है, लेकिन उनकी खरीद नहीं होती है। इससे किसानों को घाटा उठाना पड़ता है। किसानों की यह मांग लंबे समय से होती आ रही है कि उनकी उपज की खरीद की गारंटी होनी चाहिए।

कृषि मंत्रालय ने आम बजट के लिए इस आशय का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें जिंस बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को नुकसान से बचाने की रणनीति तैयार की गई है। इसके मुताबिक राज्यों को इन फसलों के मूल्य कम होने की दशा में उपज की खरीद का पूरा हक होगा, जिसके लिए केंद्र भरपाई की गारंटी देगा। किसानों को बाजार मूल्य में उतार चढ़ाव के जोखिम से बचाने की रणनीति तैयार की गई है।

योजना का उद्देश्य खरीद लागत, भंडारण, विक्रय लागत, पूंजी पर ब्याज और अन्य आकस्मिक खर्च को कवर करते हुए खरीद और विक्रय मूल्य के अंतर में अगर घाटा हुआ तो केंद्र सरकार भरपाई करेगी। यह विशेष प्रावधान मध्य प्रदेश सरकार की शुरु की गई भावांतर योजना से मिलती जुलती होगी। घाटे के इस अंतर का 40 से 50 फीसद केंद्र सरकार देगी, जबकि बाकी राज्य सरकारों को वहन करना होगा। खरीद किये जाने वाली जिंसों की बिक्री का पूरा दायित्व राज्य सरकारों का होगा।

इसरो ने पीएसएलवी के जरिये लांच किये 31 उपग्रह

भारत ने 12 जनवरी को अंतरिक्ष के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। सुबह नौ बजकर अठ्ाइस मिनट पर इसरो ने श्रीहरिकोटा से 31 उपग्रहों की लॉन्च किया। इसी के साथ ही इसरो के उपग्रहों का शतक पूरा हो गया है। शुक्रवार को लॉन्च उपग्रहों में से एक काफी खास है, जिससे पड़ोसी देश पाकिस्तान भी सावधान है। ये उपग्रह है कार्टोसैट-2, जिसे आई इन द स्काई भी कहा जा रहा है।

क्यों घबरा रहे हैं चीन और पाकिस्तान?

इस उपग्रह के जरिए धरती की तस्वीरें ली जा सकती हैं। बॉर्डर पर आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखने में भारत को आसानी होगी। यह एक अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट है जो कि दुश्मन पर नजर रखने के काम आएगा। इस उपग्रह की मदद से हम बॉर्डर पार भी पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।

आपको बता दें कि इसरो ने शुक्रवार सुबह नौ बजकर अठ्ाइस मिनट पर पीएसएलवी के जरिए एक साथ 31 उपग्रह को लॉन्च किया। भेजे गए कुल 31 उपग्रहों में से तीन भारतीय हैं और 28 छह देशों से हैंरू कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका भी शामिल हैं।

इसलिए भी है खास

पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का कार्टोसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है। इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं। कुल 28 अंतरराष्ट्रीय सह-यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं।

बौखलाया पाकिस्तान

भारत की इस उपलब्धि पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत जिन उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है, उससे वह दोहरी नीति अपना रहा है। इन उपग्रहों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उद्देश्य में किया जा सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि इनका इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं के लिए ना किया जाए, अगर ऐसा होता है कि इसका क्षेत्र पर गलत प्रभाव पड़ेगा।

साल की पहली अंतरिक्ष परियोजना

31 अगस्त 2017 इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था। पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है। अन्नादुरई ने कहा, पीएसएलवी अपने 39वें परियोजना (पीएसएलवी-सी 39) तक बहुत सफल रहा था, पीएसएलवी-सी 39 हमारे लिए एक बहुत बड़ा झटका था क्योंकि हीट शील्ड अलग नहीं हो पाए थे।

सुप्रीम कोर्ट में पहली बार वकील से सीधे जज बनेंगी इंदु

उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश केएम जोसेफ व वरिष्ठ अधिवक्ता इंदू मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है।

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सरकार से इन दोनों ही लोगों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है। इंदू मल्होत्रा को 2007 में वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया गया था। वे सुप्रीम कोर्ट में अभी तक नियुक्त हुईं सातवीं महिला जज होंगी। अभी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में आर. भानुमति अकेली महिला जज हैं। स्वतंत्रता के बाद से अभी तक सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ छह महिला जज हुई हैं।

जस्टिस केएम जोसेफ फिलहाल उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज हैं। वे उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का आदेश रद करने वाली पीठ में शामिल थे। उसके बाद उनके स्थानांतरण की चर्चाएं रहीं लेकिन उत्तराखंड से उनका स्थानांतरण नहीं हुआ।

कोलेजियम ने इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस शिव कुमार सिंह को स्थाई करने की सिफारिश की है। हालांकि कोलेजियम के समक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुल 11 अतिरिक्त जजों को स्थाई करने का प्रस्ताव था, लेकिन शिव कुमार सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा था। इसलिए फिलहाल उनके बारे में सिफारिश की गई है। बाकी प्रस्तावों पर कोलीजियम बाद में विचार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट में महिला जज

सुप्रीम कोर्ट 1950 में बना उसके 39 साल बाद 1989 में एम फातिमा बीवी सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज नियुक्त हुईं। फातिमा बीवी केरल हाईकोर्ट से सेवानिवृत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त हुईं थी। वे 29 अप्रैल 1992 को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत हुईं। बाद में वे तमिलनाडु की राज्यपाल भी नियुक्त हुईं।

सुप्रीम कोर्ट में दूसरी महिला जज सुजाता वी मनोहर हुईं जिन्होंने जज के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत बाम्बे हाईकोर्ट जज से की थी। वे सुप्रीम कोर्ट में 8 नवंबर 1994 से 27 अगस्त 1999 तक न्यायाधीश रहीं। जस्टिस सुजाता मनोहर के सेवानिवृत होने के करीब पांच महीने बाद जस्टिस रूमा पाल सुप्रीमकोर्ट की जज बनीं। जस्टिस पाल सबसे लंबे समय तक रहीं। वे 28 जनवरी 2000 से लेकर 2 जून 2006 तक सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रहीं। उनके बाद चार साल तक सुप्रीम कोर्ट मे कोई महिला जज नहीं रही।

चार साल बाद झारखंड हाईकोर्ट की तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश नियुक्त हुईं। जस्टिस मिश्रा 30 अप्रैल 2010 को सुप्रीम कोर्ट जज बनी और 27 अप्रैल 2014 को सेवानिवृत हुईं। इसी दौरान जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की जज बनीं। जस्टिस देसाई 13 सितंबर 2011 से लेकर 29 अक्टूबर 2014 तक सुप्रीम कोर्ट जज रहीं। इस दौरान पहली बार सुप्रीम कोर्ट में एक साथ दो महिला जज रहीं।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की सेवानिवृति के करीब दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट की वर्तमान महिला जज आर. भानुमति सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त हुईं। जस्टिस भानुमति 13 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश नियुक्त हुईं वे 19 जुलाई 2020 को सेवानिवृत होंगी। सुप्रीम कोर्ट के 67 सालों के इतिहास में सिर्फ दो बार एक साथ दो महिला जज रहीं।

अनियंत्रित ट्रक ने लिया पांच वाहन को चपेट में, दो की मौत

ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से पुराने बस अड्डे की ओर जाने वाली रोड़ पर मंगलवार को सड़क दुर्घटना हो गयी। दुर्घटना में स्कूटी सवार एक मजदूर व कार चालक की मौके पर मौत हो गयी। वहीं सूमो सवार छह अन्य घायल हो गये। ट्रक चालक मौके से फरार होने में सफल रहा। वहीं देर रात ट्रक चालक के खिलाफ मुकादमा दर्ज कर लिया गया है।
मंगलवार का दिन तीर्थनगरी के लिये बड़ा दुखहारी रहा। बेकाबू ट्रक ने पांच वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। आलम यह रहा कि ऑल्टो कार बुरी तरह से कुचल कर सिमट गयी। वहंी सूमो तो 90 डिग्री का कोण बनाते हुये आगे के दौ टायरों पर खड़ी हो गयी। वहीं मौके पर दूसरी तरफ से आ रहे स्कूटी सवार भी इनके बीच में समा गये। स्कूटी भी पिचक कर खिलौना बन गयी। वहीं एक और बाइक सवार ने मौके पर ब्रेक लगाकर खुद को किसी तरह बचा लिया।
घटना उस वक्त की जब नगर में नो एंट्री व जीरो जोन का समय होता है। ऐसे में पुलिस अधिकारियों पर भी सवाल उठना लाजिमी है। आखिर कार कैसे नो एंट्री के समय ये माल वाहक ट्रक नगर के बीच से होकर जा रहे थे।
दुर्घटना में कुंदन (25 वर्ष) निवासी शांति नगर ऋषिकेश, मूल निवासी बिहार व रामस्वरूप (58 वर्ष) पुत्र हरि सिंह रावत निवासी इंदिरा नगर ऋषिकेश की मौके पर ही मौत हो गई। अन्य लोगों में राधेश्याम (40 वर्ष) पुत्र धर्मपाल निवासी सुंजडू, मुजफ्फरनगर, सतीश (40 वर्ष) पुत्र सज्जन प्रजापति निवासी भरत विहार ऋषिकेश, जुनवरी देवी (45 वर्ष) पत्नी महेंद्र सिंह निवासी नीरगड्डू तपोवन टिहरी गढ़वाल, हरिनारायण (70 वर्ष) पुत्र सुधांशु निवासी मायाकुंड ऋषिकेश, शिशुपाल (24 वर्ष) पुत्र महेंद्र निवासी नीरगड्डू टिहरी गढ़वाल को राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहां देर रात सभी घायलों को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
गौरतलब है कि रेलवे रोड से हीरालाल मार्ग की ओर ढलान पर आ रहे सीमेंट से लदे एक ट्रक के ब्रेक फेल हो गए। तेज ढलान होने के कारण चालक ट्रक पर नियंत्रण खो बैठा। रेलवे स्टेशन की ओर से आने वाली यह सड़क आगे चलकर पुराने रोडवेज अड्डे पर मिलती है और यहां से दायीं ओर और बायीं ओर के लिए सड़कें कटती है। जबकि सामने पुराना रोडवेज अड्डे की दीवार है। तिराहे के पास अनियंत्रित ट्रक ने अपने आगे चल रही एक ऑल्टो कार को टक्कर मारते हुए घसीट दिया। जिससे ऑल्टो कार अपने आगे चल रहे टाटा सूमो वाहन से जा टकराई और टाटा सूमो अपने आगे चल रहे एक अन्य ट्रक से जा भिड़ा। इतना ही नहीं सबसे आगे चल रहा ट्रक भी मोड़ नहीं काट पाया और सामने पुराना रोडवेज बस अड्डे की बाउंड्री के बाहर लगे विद्युत ट्रांसफार्मर से जा भिड़ा। इस बीच एक स्कूटी सवार भी इन वाहनों के बीच बुरी तरह कुचल गया। सीमेंट लदे ट्रक की गति इतनी तेज थी कि दोनों ट्रकों के बीच में जो भी वाहन आए उनके परखच्चे उड़ गए। भीषण दुर्घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जाम हो गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस की मदद से घायलों को वाहनों से बाहर निकाला। जिन्हें 108 आपात सेवा की मदद से राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया गया।

चौथी गोली का सबूत नहीं मिला, अब नहीं होगी दोबारा जांच

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी जरूरी कागजातों की जांच करने वाले वकील अमरेंद्र सरन ने कोर्ट में जानकारी देते हुये बताया कि महात्मा गांधी की हत्या मामले में अब दोबारा से जांच नहीं की जायेगी। उन्होंने कहा कि बापू की हत्या करने में नाथूराम गोडसे के अलावा किसी और के होने के सबूत नहीं मिले है।

उन्होंने कोर्ट को जानकारी देकर कहा कि जिस फॉर बुलेट थ्योरी की बात होती है उसका भी कोई सबूत नहीं है। बता दें कि पंकज फडनीस की एक थ्योरी थी कि गांधी की हत्या चार गोलियां मार कर हुई थी।

उल्लेखनीय है कि सु्प्रीम कोर्ट ने इस मामले में पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और सीनियर वकील अमरेन्द्र शरण को न्याय मित्र नियुक्त किया था। इस याचिका में गांधी हत्याकांड में ‘तीन बुलेट की कहानी’ पर प्रश्न चिह्न लगाने के साथ यह सवाल भी उठाया गया था कि क्या नाथूराम गोडसे के अलावा किसी अन्य व्यक्ति ने चौथी बुलेट भी दागी थी?

इस हत्याकांड में अदालत ने 10 फरवरी, 1949 को गोडसे और आप्टे को मौत की सजा सुनाई थी। वहीं विनायक दामोदर सावरकर को साक्ष्यों की कमी के कारण संदेह का लाभ दे दिया गया था। पूर्वी पंजाब हाई कोर्ट द्वारा 21 जून, 1949 को गोडसे और आप्टे की मौत की सजा की पुष्टि के बाद दोनों को 15 नवंबर, 1949 को अंबाला जेल में फांसी दे दी गयी थी।

क्या महात्मा गांधी का कोई दूसरा हत्यारा भी था? वैसे पुलिस तो इस कहानी पर भरोसा करती है कि गांधी पर तीन गोलियां चलाई गई थीं, लेकिन क्या चौथी गोली भी थी जिसे नाथूराम गोडसे के अलावा किसी और ने चलाया था? ऐसे कई सवालों को लेकर उच्चतम न्यायालय में दायर एक याचिका पर 6 अक्टूबर को सुनवाई हुई थी।

उर्दू में दर्ज एफआईआर में है पूरी वारदात का जिक्र

30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में महात्मा गांधी की हत्या हुई थी, बापू की हत्या की एफआईआर उसी दिन यानी 30 जनवरी को दिल्ली के तुगलक रोड थाने में दर्ज की गई थी। एफआईआर उर्दू में लिखी गई थी जिसमें पूरी वारदात के बारे में बताया गया था।

विरोध के बाद हटा हज दफ्तर से भगवा रंग

यूपी में योगी सरकार हर जगह भगवा रंग को तवज्जो दे रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्कूल और बसों के बाद अब योगी सरकार ने लखनऊ स्थित हज कमिटी दफ्तर की बाउंड्री वॉल को भगवा रंग में रंग दिया था, हालांकि विवाद बढ़ने पर योगी सरकार को अपने कदम पीछे खिंचने पड़े। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे लेकर शनिवार को सफाई पेश की।
हज कमेटी दफ्तर की बाउंड्री वॉल को भगवा रंग से रंगे जाने के बाद सरकार की तरफ से सफाई दी गई। योगी सरकार ने सफाई पेश करते हुए कहा कि पुताई करने में ज्यादा गहरे रंग का इस्तेमाल हुआ इसे ठीक किया जा रहा है।

इसके बाद हज कमिघ्टी दफ्तर की बाउंड्री वॉल को फिर से सफेद रंग से पुताई की गई। आपको बता दें कि शुक्रवार को हज कमिटी दफ्तर की बाउंड्री वाल को भगवा रंग में रंगे जाने पर विवाद बढ़ा था। इससे पहले दीवारें सफेद और हल्की हरे रंग में थीं, लेकिन इसकी दीवारों पर गेरुआ रंग चढ़ा दिया गया था।
इस कदम पर राजनीति शुरू हो गई थी। विपक्षी नेताओं और उलेमाओं ने इस कदम का धुर-विरोध किया था। उनका कहना है कि सरकार इस मामले में भी मजहबी जज्बात कुरेदने में जुटी है। आपको बता दें कि इससे पहले भी उत्तरप्रदेश में काफी जगह इस प्रकार का प्रयोग हो चुका है।
इतना ही नहीं यूपी के पुलिस थाने तक भगवा रंग रंगे जाने लगे हैं। लखनऊ के कोतवाली कैसरबाग में भगवाकरण का काम शुरू हुआ है। बिजनौर और आजमगढ़ जिले के बाद राजधानी लखनऊ में भी थाने का भगवाकरण शुरू हुआ है।

यहां दिन की शुरूआत होगी राष्ट्रगीत से

एक तरफ जहां पूरे देश में वंदे मातरम और राष्ट्रगान को लेकर बहस चल रही है। दूसरी ओर हरियाणा के एक गांव ने ऐसा फैसला किया है, जिससे पूरे गांव की दिन की शुरुआत राष्ट्रगान की आवाज से ही होगी। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के जाट बहुल भनकपुर गांव में अब रोज सुबह 8 बजे राष्ट्रगान बजेगा, इसके लिए गांव वालों ने 3 लाख रुपये खर्च कर करीब 20 लाउडस्पीकर लगाए जाएंगे।

गांव में करीब 5000 की आबादी है। ऐसा करने वाला भनकपुर हरियाणा का पहला गांव होगा। गुरुवार को गांव के सरपंच सचिन मदोतिया ने इस बात का ऐलान किया। उनके साथ स्थानीय विधायक और अन्य नेता भी मौजूद रहे।

ऐसा बताया जा रहा है कि गांव का सरपंच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए उनके ही घर में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। उनका कहना है कि उन्हें ये आइडिया जब आया, जिस दौरान उन्होंने तेलंगाना के जम्मीकुंटा के बारे में सुना। वहां पर भी लोग अपने दिन की शुरुआत राष्ट्रगान से ही करते हैं।

भनकपुर गांव इससे पहले भी चर्चा का विषय बना रहा है। इस गांव में कुल 22 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, इसके अलावा गांव को स्वच्छता के अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है।

गौरतलब है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर पिछले कुछ समय से बवाल जारी रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही सिनेमा हॉल में भी फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य हो गया है।

केजरीवाल का कद आप में सबसे बड़ा

आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए जिन तीन लोगों के नाम तय किए गए हैं, उससे साफ है कि पार्टी में केजरीवाल का कद सबसे बड़ा है। पार्टी में केजरीवाल का साफ हस्तक्षेप है। 
आम आदमी पार्टी के ये तीन उम्मीदवारों के नाम के ऐलान से और स्पष्ट हो गया है। यही नहीं इससे इस तथ्य पर भी मुहर लगती है कि जिस-जिस ने भी केजरीवाल से असहमति दिखाई और उनके काम करने के तौर तरीकों पर सवाल उठाए आम आदमी पार्टी के संरक्षक ने उसको निपटा दिया। ऐसे लोगों की काफी लंबी लिस्ट है।
आम आदमी पार्टी के मंचीय कवि कुमार विश्वास केजरीवाल से असहमति रखने के ताजा शिकार हैं। विश्वास और केजरीवाल के बीच कई मुद्दों पर अलग-अलग राय देखने को मिली है। चाहे वो मामला कपिल मिश्रा का हो या अमानतुल्लाह खान का।
केजरीवाल के गुट में कुमार विश्वास को राष्ट्रवादी और बीजेपी से हमदर्दी रखने वाले व्यक्ति के तौर देखा जाता है, जबकि केजरीवाल के राजनीति इसके विरोध में है। हाल के दिनों में विश्वास आप में ढांचागत बदलाव की बात करते रहे हैं। जाहिर है पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को ये बर्दाश्त नहीं होता।कुल मिलाकर आम आदमी पार्टी में कुमार का विश्वास सिमटता दिख रहा है। हालांकि उनके पास राजस्थान का प्रभार है।

कभी केजरीवाल के पुराने और मजबूत रणनीतिकार रहे योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की आम आदमी पार्टी से विदाई बड़ी हृदय विदारक रही। 2015 के विधानसभा चुनावों के बाद योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण और केजरीवाल के बीच जबरदस्त मतभेद उभरकर सामने आए। हालात ये बन गए कि पार्टियों की बैठकों में नेताओं के बीच गाली गलौज और हाथापाई की नौबत आ गई।
योगेंद्र और प्रशांत भूषण पार्टी से अलग हो गए। दोनों नेता आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से थे, लेकिन केजरीवाल ने दोनों को पार्टी से बाहर कर दिया। योगेंद्र और प्रशांत ने स्वराज अभियान नाम से एक दल बनाया और दिल्ली में अपनी लड़ाई लड़ने की ठानी।
योगेंद्र यादव की अगुवाई में स्वराज अभियान ने एमसीडी चुनावों में भी हिस्सा लिया, लेकिन उन्हें आशातीत सफलता नहीं मिली। राज्यसभा के उम्मीदवारों के ऐलान के बाद योगेंद्र और प्रशांत ने ट्वीट कर इसे पार्टी का घोर पतन करार दिया।
कभी दिल्ली में सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर दो करोड़ घूस लेने का सनसनीखेज आरोप लगाया था। 2017 की गर्मियों में कपिल मिश्रा और केजरीवाल टीम के बीच जबरदस्त जंग चलती रही। कपिल को कुमार विश्वास का समर्थन हासिल था और संघर्ष धीरे-धीरे बढ़ता गया। बाद में कपिल मिश्रा बीजेपी की ओर खिसकते गए और विवाद मंद पड़ता गया, लेकिन पूरे मामले में चुप्पी साधे केजरीवाल कपिल मिश्रा के लिए सियासी तौर पर साइलेंट किलर साबित हुए।
केजरीवाल के खिलाफ सबसे पहले बगावती सुर छेड़ने वाले विनोद कुमार बिन्नी ने आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा के खिलाफ सबसे आवाज उठाई और चुनावी मैदान में भी उन्हें चुनौती दी।
कभी दिल्ली में केजरीवाल के साथ मिलकर राजनीति करने वाले बिन्नी ने केजरीवाल की पहली सरकार में मंत्री पद न मिलने के बाद बगावती सुर अपना लिए थे।
इसके बाद अगले चुनाव के लिए पार्टी की ओर से टिकट न मिलने पर उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बाद में बिन्नी को पार्टी से निलंबित कर दिया।

जहां आज तक कोई सीएम नहीं आया, वहां योगी जाएंगे

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए पूरे पांच साल तक नोएडा में कदम नहीं रखा। यूपी की सियासत में एक भ्रम है कि सत्ता में रहते हुए जिस सीएम के कदम नोएडा में पड़े हैं वो दोबारा से सत्ता में वापसी नहीं कर सके। अखिलेश से लेकर मायावती तक इसी भ्रम में पड़ी रही और नोएडा में मुख्यमंत्री रहते हुए कदम नहीं रखा, लेकिन उत्तर प्रदेश के मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस अंधविश्वास को धता बताते हुए नोएडा आने का फैसला किया है।
योगी आदित्यनाथ 25 दिसंबर को नोएडा पहुंच रहे हैं। यहां वे मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे। ये मेट्रो नोएडा के बोटेनिकल गार्डन से दिल्ली के कालका जी तक जाएगी। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस नई मेट्रो लाइन के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे।

बता दें कि अखिलेश को उसी टोटके का डर से तमाम मुख्यमंत्री नोएडा आने से कतराते रहे। उन्होंने पांच साल तक सत्ता में रहते हुए एक बार भी नोएडा में कदम नहीं रखा। इसके बावजूद 2017 के विधानसभा चुनाव में वो अपनी सत्ता को बरकरार नहीं रख सके हैं।

मायावती 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही हैं, लेकिन इन पांच सालों में मायावती ने नोएडा में कदम तक नहीं रखा। जबकि ग्रेटर नोएडा के दादरी के पास उनका पैतृक गांव है।
इसके बावजूद वे नहीं आई। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने कार्यकाल में नोएडा को सजाने सँवारने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। अंबेडकर पार्क से लेकर नोएडा एक्सप्रेस वे भी बनवाया। हालांकि, एक बार मायावती यहां आई थी, लेकिन उनकी सत्ता चली गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ दोनों नोएडा आ रहे हैं। अब देखना होगा कि क्या यह अंधविश्वास महज एक भ्रम रह जाता है या सच साबित होगा।

अगले माह जनवरी से 2000 रूपये के कैशलेस पर नहीं देना होगा एक्स्ट्रा चार्ज

डेबिट कार्ड से किसी दुकान पर 2000 रुपये तक की खरीदारी करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के तौर पर कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना होगा। यह चार्ज केंद्र सरकार दो साल तक स्वयं ही वहन करेगी।

डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से उठाया जा रहा यह कदम अगले साल जनवरी से लागू होगा। केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह व्यवस्था ठीक से लागू हो, इसके लिए एक कमेटी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल-सितंबर-2017 में केवल डेबिट कार्ड से दो लाख 18 हजार, 700 करोड़ का कैशलेस लेनदेन हुआ है।

अगर यही रफ्तार रही तो इस वित्त वर्ष के अंत तक यह चार लाख 37 हजार करोड़ का हो जाएगा। उन्होंने इसके साथ ही बताया कि सरकार देश केा एक ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने के लिए लगातार नये प्रयास कर रही है और देश इसकी तरफ अग्रसर हो रहा है।

बता दें कि इससे पहले आरबीआई ने एमडीआर चार्जेज घटा दिए थे। इनको लेकर कारोबारियों ने आपत्ति जताई थी। कारोबारियों का कहना था कि इससे व्यापारियों का खर्च बढ़ेगा। इसको देखते हुए ही सरकार ने यह कदम उठाया है।

एमडीआर क्या है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह रेट है, जो बैंक किसी भी दुकानदार अथवा कारोबारी से कार्ड पेमेंट सेवा के लिए लेता है। ज्यादातर कारोबारी एमडीआर चार्जेज का भार ग्राहकों डालते हैं और बैंकों को दी जाने वाली फीस का अपनी जेब पर भार कम करने के लिए ग्राहकों से भी इसके बूते फीस वसूलते हैं।