बेंगलुरू के बाबा की सामने आयी करतूत

पाखंडी स्वामी और बाबाओं की हरकतें थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं। अब कर्नाटक के एक मठ में स्वयंभू स्वामी को एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया है। सूत्रों के मुताबिक बेंगलुरू के येलहांका स्थित मठ की यह घटना है। दयानंद उर्फ नंजेश्वर स्वामीजी को एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया। दयानंद इसी मठ के स्वामी पर्वतराज शिवाचार्य स्वामी का बेटा बताया जा रहा है।
बनना चाहता था मठ का महंत
बताया जा रहा कि दयानंद इससे पहले भी कई महिलाओं के साथ ऐसी हरकत कर चुका है। 2011 में वह मठ का महंत बनना चाहता था, लेकिन मठ के भक्तों के विरोध के चलते उसका यह मंसूबा पूरा न हो सका। विरोध के चलते बाद में दयानंद ने अपना नाम बदलकर नंजेश्वर स्वामीजी रख लिया।
पहले भी कर चुका है ऐसी हरकत
बताया जाता है कि दयानंद मठ के लिए दी गई जमीन का दुरुपयोग करता था। लोगों का कहना है कि दयानंद की यह हरकत पहली बार नहीं है। इससे पहले भी वह कई बार महिलाओं के साथ ऐसा कर चुका है।
गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों में कई स्वयंभू बाबा और स्वामी महिलाओं का उत्पीड़न करने के आरोप में पकड़े जा चुके हैं।

सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध

राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पाल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने दून विश्वविद्यालय में आयोजित प्रथम ‘‘इंटर यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स मीट’’ का शुभारम्भ किया। 26 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक आयोजित स्पोर्ट्स मीट के लिए आयोजक दून विश्वविद्यालय को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों को क्वालिटी एजुकेशन, उच्च स्तरीय व मौलिक शोध व स्पोर्ट्स का सेंटर बनाने के लिए अनेक पहल की गई हैं। प्रयास किया जा रहा है कि विश्वविद्यालयों के छात्रछात्राओं के बहुमुखी व्यक्तित्व का विकास हो। राज्यपाल ने कहा कि अभी पहला आयोजन होने के कारण इस प्रतियोगिता में कम इवेंट्स शामिल की गई हैं। अगले वर्षों में इसमें और भी खेलों को शामिल किया जाएगा। राज्य में पहली बार ‘‘इंटर यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स मीट’’ आयोजित की गई है। शुरूआत छोटी जरूर है परंतु मजबूत शुरूआत है। प्रतिभागी खिलाड़ियों के जोश में कोई कमी नहीं दिख रही है। राज्यपाल ने कार्यक्रम में उपस्थित मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षा मंत्री को प्रदेश में अंतर महाविद्यालय 2020 क्रिकेट प्रतियोगिता कराए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे बड़ी संख्या में राज्य की प्रतिभाएं उभर कर सामने आएंगी। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा व खेल एक दूसरे के पूरक हैं। चरित्र निर्माण में जितना महत्व शिक्षा का है उतना ही महत्व खेलों का भी है। राज्यपाल ने ओलम्पियन मनीष रावत का उदाहरण देते हुए कहा कि खिलाड़ी भी युवाओ के लिए रोल मॉडल हैं। उŸाराखण्ड की भौगोलिक स्थितियां खिलाड़ियों के स्टेमिना केा बढ़ाने में सहायक है। राज्य में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। इन्हें समुचित प्लेटफार्म उपलब्ध करवाए जाने की जरूरत है। इसके लिए सरकार प्रयासरत भी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रथम अंतर विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिता के आयोजन के लिए राज्यपाल डॉ. के.के.पाल की पहल पर आभार व्यक्त करते हुए प्रतियोगिता के लिए 11 लाख रूपए दिए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खेलों से शारीरिक और मानसिक विकास ही नहीं बल्कि टीम भावना और सामूहिकता की भावना का विकास भी होता है। यह खेल प्रतियोगिता, युवा छात्र छात्राओं के लिए एक बढ़िया अवसर है। खिलाड़ियों द्वारा किए गए मार्च पास्ट की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्च पास्ट में खिलाड़ियों के जज्बे और रुचि की झलक दिखाई दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि युवा खिलाड़ी आज विश्वविद्यालय, कल प्रदेश और फिर देश के लिए खेलेंगे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार प्रदेश को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उठाए जा रहे विभिन्न कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि सभी विश्वविद्यालय अखिल भारतीय स्वच्छता रैंकिंग में अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करें। इसी प्रकार सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय एनएसी रैंकिंग हेतु भी अनिवार्य रूप से आवेदन करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ऐसा पहला स्टेट हो गया है जहां सभी डिग्री कॉलेज में शतप्रतिशत प्राचार्यों की तैनाती है। अब सरकार ने प्राचार्यों को असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी की स्थिति में गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं लेने का अधिकार भी दे दिया है। सरकार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पूरा ध्यान दे रही है। इससे पूर्व राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागी टीमों के खिलाड़ियों के मार्च पास्ट की सलामी ली। उन्होंने रंग बिरंगे गुब्बारे हवा में छोड़कर प्रतियोगिता का औपचारिक उद्घाटन किया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के पहले उद्घाटन मैच के खिलाड़ियों से मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दी।

जल्द भारतीय वायुसेना को मिल सकते है अमेरिकी ड्रोन, ट्रंप सरकार ले सकती है फैसला

खबर आई है कि अमेरिका भारतीय वायु सेना को ड्रोन देने पर विचार कर रहा है। जिससे भारत इन ड्रोन्स को अपनी वायु सेना में शामिल कर सकेगा। अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया है कि ट्रंप सरकार भारत के हथियारों से लैस ड्रोन की मांग पर गहराई से विचार कर रहा है।

भारतीय वायु सेना का मानना है कि इन ड्रोन्स के मिलने से उसकी रक्षा क्षमता काफी मजबूत हो जाएगी। इसी साल की शुरूआत में भारतीय वायु सेना ने अमेरिकी सरकार के सामने जनरल एटमिक्स प्रीडेटर सी एवेंजर्स एयरक्राफ्ट खरीदने का प्रस्ताव रखा था। यह सर्वविदित है कि भारतीय वायुसेना को लगभग 80 से 100 इकाइयों की आवश्यकता है और यह सौदा लगभग 8 अरब डॉलर का होगा। इसी वर्ष 26 जून को व्हाइट हाउस में पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई सफल बैठक के बाद से ही ट्रंप प्रशासन इस डील पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

इस मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत को 22 अनआर्मड गार्डियन ड्रोन बेचने की घोषणा की थी, जो हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी करने की भारतीय नौसेना की क्षमताओं में वृद्धि करेगी। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया, श्विदेश मंत्रालय के संदर्भ में खरीद पर जल्द निर्णय हो सकता है, लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि कैसे हमारे रिश्ते और मजबूत तथा गहरे हो सकते हैं। आपको बता दें कि पूर्ववर्ती ओबामा सरकार ने भारत को मुख्य रक्षा साझीदार का दर्जा दिया था और ट्रंप प्रशासन भी भारतीय अनुरोध को आगे बढ़ा रहा है।

पिछले हफ्ते ही अमेरिकी रक्षा मंत्री रेक्स टिलरसन ने अपने बयान में कहा था कि डोनॉल्ड ट्रंप प्रशासन भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। टिलरसन ने चीन और पाकिस्तान को आड़े हाथ लेते हुए कहा था कि पेइचिंग की उकसावे वाली कार्रवाई उन अंतरराष्ट्रीय कानूनों व तरीकों के खिलाफ है जिनके भारत और अमेरिका पक्षधर हैं और साथ ही स्पष्ट किया था कि वॉशिंगटन यह आशा करता है कि पाकिस्तान अपनी सीमा के अंदर सक्रिय आतंकवादी समूहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगा।

जाने, गूगल किसकी जयंती मना रहा है?

उत्तराखंड के नैन सिंह को गूगल ने श्रद्धांजलि दी है। गूगल ने डूडल के जरिये उनके कार्य को सराह रहा है। रायल ज्योग्रेफिकल सोसायटी एवं सर्वे ऑफ इंडिया के लिए पं. नैन सिंह रावत भीष्म पितामह के रूप में माने जाते हैं। कहते हैं नैन सिंह रावत ही दुनिया के पहले शख्स थे जिन्होंने लहासा की समुद्र तल से ऊंचाई कितनी है, बताई। उन्होंने अक्षांश और देशांतर क्या हैं, बताया। इस दौरान करीब 800 किमी तक पैदल यात्रा की और दुनिया को ये भी बताया कि ब्रह्मपुत्र और स्वांग एक ही नदी है।

भारत चीन सीमा पर स्थित मुनस्यारी तहसील के अंतिम गांव मिलम निवासी पं. नैन सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1830 को अमर सिंह मिलव्वाल के घर हुआ था। यह परिवार सामान्य परिवार था। अलबत्ता नैन सिंह के दादा धाम सिंह रावत को कुमाऊं के राजा दीप चंद ने 1735 में गोलमा और कोटल गांव जागीर में बख्शे थे। पं. नैन सिंह रावत की शिक्षा प्राथमिक स्तर तक ही हुई थी। बाद में इसी विद्यालय में वह शिक्षक हो गए थे। शिक्षक बनने पर उन्हें लोगों ने पंडित की उपाधि दे दी। उन्हें इसी नाम से जाना जाता है। इनके चचेरे भाई स्व. किशन सिंह रावत भी शिक्षक थे। दोनों भाइयों को पंडित की उपाधि मिली थी।
पं. नैन सिंह रावत ने अपने जीवन में उपलब्धि वर्ष 1955-56 से प्रारंभ की। लाघ -इट-वाइट बंधुओं के साथ दुभाषिए तथा सर्वेक्षक के रूप में तुर्किस्तान की यात्रा कर चुके थे। तिब्बती भाषा का ज्ञान और इनकी कार्यकुशलता से प्रभावित जर्मन बंधु इन्हें अपने साथ यूरोप ले जाना चाहते थे। नैन सिंह रावत रावलपिंडी तक तो पहुंचे परंतु अपनी माटी की याद आते ही वापस लौट आए। वर्ष 1863 में उन्हें देहरादून बुलाया, जहां पर सुपरिडेंटेंट कर्नल जेटी वाकर द्वारा ग्रेट ट्रिग्नोमेट्रिक सर्वे में एक अन्वेषक के रूप में की गई और उन्हें भारतीय सीमा के बाहरी क्षेत्रों में कार्य करने के लिए टापोग्राफिकल आवजर्वेशन का प्रशिक्षण दिया गया।
भ्रमण करने का था शौक
बिट्रिश भारत के दौरान अंग्रेजों ने गुप्त रूप से तिब्बत और रूस के दक्षिणी भाग का सर्वेक्षण की योजना बनाई। इस कार्य के लिए अंग्रेजों को पं. नैन सिंह रावत का नाम सुझाया। अंग्रेजों ने उन्हें नाप जोख का कार्य सौंपा। उन्हें ब्रह्मपुत्र घाटी से लेकर यारकंद इलाके तक की नाप जोख करनी थी। इस कार्य के लिए उनके भाई किशन सिंह रावत और पांच लोग शामिल किए गए। यह कार्य गुप्त होने से नाप जोख खुले आम नहीं कर सकते थे।

पंडित नैन सिंह द्वारा वर्ष 1865 से 1885 के मध्य लिखे गए यात्रा वर्णन में हिमालय तिब्बत तथा मध्य एशिया की तत्कालीन भाषा के साथ अनेक एशिसाई समाजों की दुलर्भ झलक मिलती है। इस दौरान उन्होंने 1865-66 में काठमांडू-ल्हासा-मानसरोवर, 1967 सतलज सिंधु उद्गम व थेक जालुंग, 1870 डगलस फोरसिथ का पहला यारकंद-काशगर मिशन, 1873 डगलस फोरसिथ का दूसरा यारकंद-काशगर मिशन, 1874-75 लेह-ल्हासा, तवांग थी।
पं. नैन सिंह रावत द्वारा तीन पुस्तकें ठोक-ज्यालुंग की यात्रा, यारकंद यात्रा और अक्षांस दर्पण पुस्तकें 1871 से 73 के मध्य प्रकाशित हुई थी। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी जीवनी भी लिखी थी, लेकिन वह खो गई। तिब्बत की राजधानी ल्हासा का इसमें सुंदर वर्णन था। वर्ष 1890 में उनका देहांत हो गया।
कम्पेनियन इंडियन इम्पायर अवार्ड से हुए थे सम्मानित
1200 मील पैदल चल कर सर्वे करने वाले पं. नैन सिंह रावत को अंग्रेजी हुकूमत ने कोलकाता में सीआईएस (काम्पेनियन इंडियर अवार्ड) से सम्मानित किया था। तब एक भारतीय को अंग्रेजों द्वारा इतने बड़े सम्मान से सम्मानित किए जाने पर कोलकाता में जश्न मना था। भारतीयों ने इसका स्वागत अपने घरों में घी के दीये जलाकर किया था।
आज गूगल नैन सिंह की जयंती मना रहा है
सर्च इंजन गूगल ने नैन सिंह रावत का डूडल बनाया है, जिन्हें बिना किसी आधुनिक उपकरण के पूरे तिब्बत का नक्शा तैयार करने का श्रेय जाता है। कहा जाता है कि अंग्रेजी हुकूमत के लोग भी उनका नाम पूरे सम्मान के साथ लेते थे। उस समय तिबब्त में किसी विदेशी शख्स के जाने पर सख्त मनाही थी। अगर कोई चोरी छिपे तिब्बत पहुंच भी जाए तो पकड़े जाने पर उसे मौत तक की सजा दी सकती थी। ऐसे में स्थानीय निवासी नैन सिंह रावत अपने भाई के साथ रस्सी, थर्मामीटर और कंपस लेकर पूरा तिब्बत नाप आए। दरअसल 19वीं शताब्दी में अंग्रेज भारत का नक्शा तैयार कर रहे थे लेकिन तिब्बत का नक्शा बनाने में उन्हें परेशानी आ रही थी। तब उन्होंने किसी भारतीय नागरिक को ही वहां भेजने की योजना बनाई। जिसपर साल 1863 में अंग्रेज सरकार को दो ऐसे लोग मिल गए जो तिब्बत जान के लिए तैयार हो गए।

कथा के श्रवण को दक्षिण भारत से पहुंचे हजारो लोग

तीर्थनगरी ऋषिकेश में सनातन धर्म के श्रुति धर्मगं्रथ उपनिषद कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा में दक्षिण भारत से हजारों लोंगों का दल यहां पहुंचा।
परमार्थ निकेतन गंगातट पर कथा का भव्य शुभारंभ आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती महाराज, आश्रम परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज व दक्षिण भारत से आए कथा व्यास नेच्चुर वेंकटरमण ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि आत्मा ही सबसे बड़ा तीर्थ है। आत्मा ही सत्य है। मन यदि स्वच्छ होगा तो आत्मा भी पवित्र होगी और जब आत्मा पवित्र होती है तब हम परमात्मा की प्राप्ति का लक्ष्य अतिशीघ्र हासिल कर लेते हैं। आश्रम परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि हिमालय की धरती आरण्यक संस्कृति है। इस धरती ने हमारी सभ्यता, संस्कृति एवं संस्कारों को जन्म दिया है। पूरे विश्व को वसुधैव कुटुंबकम का मंत्र दिया व सर्वे भवंतु सुखिनरू की संस्कृति दी। आज उसी धरती पर उपनिषदों के गहन ज्ञान की धारा प्रवाहित हो रही है। कथा व्यास नेच्चुर वेंकटरमण के सानिध्य में यह कथा सात दिनों तक आयोजित होगी। इस अवसर पर आश्रम परिवार ने कथा व्यास वेंकटरमण को शिवत्व का प्रतीक रुद्राक्ष का पौधा भी भेंट किया।

परमाणु हथियार रखने को पाक बना रहा सुरंग

कुछ दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने कहा था कि भारत के कोल्ड वॉर का जवाब देने के लिए पाकिस्तान ने शॉर्ट रेंज के परमाणु हथियार विकसित कर लिए हैं। लेकिन अब खबर आ रही है कि पड़ोसी देश अपने परमाणु हथियारों का जखीरा रखने के लिए सुरंगों का निर्माण कर रहा है और ये सुरंगे दिल्ली से महज 750 किलोमीटर और अमृतसर से कुछ सौ किमी की दूरी पर स्थित हैं।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमृतसर के नजदीक पाकिस्तान के मियांवाली जिले में इन सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। ये भारत की राजधानी दिल्ली से महज 750 किमी तथा आर्थिक राजधानी मुंबई से 1500 किमी की दूरी पर स्थित हैं। टनल में संभावित हमले को देखते हुए परमाणु हथियारों को रखा जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार इन सुरंगों की लंबाई और चौड़ाई दस मीटर है। ये सुंरगें चौड़ी सड़कों से जुड़ी हुईं हैं और इनमें आने-जाने के अलग- अलग दरवाजे हैं। खुफिया जानकारी के अनुसार प्रत्येक टनल में 12 से 24 परमाणु हथियारों को रखा जा सकता है। एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्घ्तान 130-140 वॉरहेड के परमाणु शस्घ्त्रागार को तेजी से बढ़ा रहा है। साथ ही रिपोर्ट का कहना है कि पाक अपने शस्त्रागार को और मजबूत बना रहा है व अधिक साइटों पर इनकी तैनाती कर रहा है जिनके बारे में पता लगाना फिलहाल कठिन है।

सीएम त्रिवेंद्र ने किया सूचना पुस्तिका का विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में उत्तराखंड राज्य के सरकारी बैंकिंग कार्य के भारतीय रिजर्व बैंक देहरादून द्वारा आरंभ किए जाने का उद्घाटन किया। ज्ञातव्य हो कि इससे पहले उत्तराखण्ड राज्य के सरकारी बैकिंग कार्य भारतीय रिजर्व बैंक की कानपुर शाखा से निष्पादित किए जाते थे। इस अवसर पर बधाई देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार हेतु बैंकिंग कार्यालय देहरादून में प्रारंभ होना एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य सरकार के वित्त एवं बैंकिंग कामकाज में सहूलियत होगी, साथ ही आर्थिक प्रगति में तेजी आएगी। वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि इससे रिजर्व बैंक और राज्य सरकार के मध्य बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी। राज्य गठन के बाद से राज्य में बैंकिंग सेवाओं में 4 गुना की बढ़ोत्तरी हुई है। राज्य सरकार आर्थिक संतुलन को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रधान मुख्य महाप्रबंधक भारतीय रिजर्व बैंक एस. रामास्वामी ने आश्वासन दिया कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा राज्य के विकास में पूर्ण सहयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकिंग प्रभाग के प्रदेश में होने से कोषागारों, उपकोषागारों एजेंसी बैंक को एवं भारतीय रिजर्व बैंक के बीच बेहतर तालमेल से कार्य हो सकेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र द्वारा उत्तराखण्ड गवर्नमेंट बैंकिंग बिजनेस की जानकारी उपलब्ध कराने हेतु भारतीय रिजर्व बैंक की ‘‘सूचना पुस्तिका‘‘ का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर सचिव वित्त अमित नेगी, भारतीय रिजर्व बैंक देहरादून के महाप्रबंधक सुब्रत दास एवं रिजर्व बैंक के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

हनीप्रीत की एक ही रट, निर्दोष हूं

पुलिस शिकंजे में हनीप्रीत की हालत बिगड़ गई है। पंचकूला के चंडी मंदिर थाने में बंद हनीप्रीत के सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया है। एक सफाईकर्मी ने बताया कि हनीप्रीत हवालात में एकटक दीवार की निहारते हुए खोई हुई है। उसकी पहली रात भारी बेचौनी में गुजरी है। कल आधी रात में उसका मेडिकल टेस्ट भी कराया गया।
38 दिन से सारी दुनिया की नजरों से ओझल रही हनीप्रीत अब मीडिया और उसके सवालों से बच नहीं सकी। कभी कैमरे पर तरह की अदाओं से इतराने वाली और 21 तरह के किरदार बदलने वाली हनीप्रीत मीडिया से बचने के लिए चेहरा ढंके तेज कदमों से भागती जा रही थी। उससे कई सवाल हुए, लेकिन वो एक ही रट लगाए है कि वो बेकसूर है।
पुलिस की कड़ी घेराबंदी में मेडिकल कराने आधी रात में सिविल अस्पताल पहुंची हनीप्रीत को अपने बचाव के लिए भी पुलिसवालों का ही सहारा लेना पड़ा। हनीप्रीत के साथ पकड़ी गई उसकी साथी और डेरा समर्थक बठिंडा की रहने वाली सुखदीप का भी मेडिकल टेस्ट कराया गया है। हनीप्रीत के अंदर अब मीडिया का सामना करने का ताब नहीं बचा है।
हनीप्रीत पुलिस थाने की हवालात के सख्त फर्श पर रातभर चैन से सो भी नहीं सकी। सारी रात उसे याद आता रहा सुनारिया जेल में बंद राम रहीम और सताता रहा अपने अंजाम का खौफ. हनीप्रीत के हालात बदले तो तस्वीर बदल गई। 25 अगस्त से पहले राजरानी जैसे ऐशो-आराम की जिंदगी गुजारने वाली हनीप्रीत कानून से छिपती दर-दर भटकती रही।
हनीप्रीत को उसकी एक महिला साथी के साथ तीन अक्टुबर की दोपहर 3 बजे पुलिस ने पकड़ा। इसके बाद पुलिस हनीप्रीत और उस महिला को करीब 4 बजे पंचकूला के सेक्टर-23 में बने चंडी मंदिर थाने लाई। करीब एक घंटा कागजी कार्यवाही के बाद हनीप्रीत से पूछताछ शुरू हुई। पहले राउंड की ये पूछताछ करीब 2 घंटे चली। इसके बाद उसका हवालात से सामना हुआ।

उत्तराखंड खुले में शौच से मुक्त होने वाला चौथा राज्य

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गांधी एवं शास्त्री जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास और गांधी पार्क में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की तस्वीरों और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ ही विभिन्न सामाजिक आंदोलनों में भी भारत को नेतृत्व प्रदान किया। महात्मा गांधी का स्वच्छ भारत का सपना आज पूरे देश का मिशन बन चुका है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद दिया की उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान को घरघर तक पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान में उत्तराखंड मजबूती के साथ अपने कदम आगे बढ़ा रहा है। उत्तराखंड देश का चौथा राज्य है जो ग्रामीण क्षेत्रों में ओडीएफ राज्य अर्थात खुले में शौच से मुक्त राज्य का दर्जा पा चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के शहरी क्षेत्र मार्च 2018 तक ओडीएफ हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री का भाव पूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिया गया ‘‘जय जवानजय किसान‘‘ का नारा आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। आज देश की मजबूती के लिए उसकी सुरक्षा में लगे जवानों और देश के अन्नदाता किसानों को हर तरह से खुशहाल और मजबूत रखना होगा।

चोटी काट आरोपी पर तीन लाख का इनाम

दिल्ली, यूपी और राजस्थान सहित कई राज्यों में चोटी कटने घटनाएं बंद क्या हुई अब जम्मू-कश्मीर में शुरू हो गई हैं। कश्मीर में रहस्यमय तरीके से चोटी कटने के मामले सामने आ रहे हैं। इस वजह से महिलाओं और बच्चों में दहशत का माहौल बना हुआ है। कश्मीर पुलिस ने चोटी काटने वाले शख्स पर 3 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, कश्मीर से चोटी कटने के करीब 30 मामले सामने आए हैं। इससे परेशान होकर श्रीनगर के बाटमालू इलाके में लोगों ने जमकर हंगामा मचाया। यहां कुछ नकाबपोश लोगों ने घर के अंदर घुसकर एक महिला के चेहरे पर स्प्रे छिड़का और चोटी काटकर फरार हो गए। अनंतनाग जिले के एक गांव में अज्ञात शख्स एक घर की किचन में घुस गया।
वहां उसने कुछ स्प्रे छिड़का, जिसके बाद खाना बना रही 16 वर्षीय लड़की बेहोश हो गई। उसी दौरान उसकी चोटी काट ली गई। दूसरी तरफ, सिजीमर गांव में एक महिला की सोते हुए चोटी काट ली गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन कुछ हाथ नहीं लग पाया। कुलगाम जिले से 12 और अनंतनाग जिले से 2 चोटी काटने के मामले दर्ज हो चुके हैं।
यह मामला सीएम महबूबा मुफ्ती तक पहुंच गया है। इसे संज्ञान में आते ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों से बात की। उन्होंने आरोपियों को पकड़ने के लिए स्पेशल टीम बनाने के लिए कहा है। इसके साथ ही चोटी काटने वाले आरोपी के सिर पर 3 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। स्थानीय महिलाओं और बच्चों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
बताते चलें कि बीते दिनों भारत के कई राज्यों में चोटी कटने के मामले सामने आए थे। दिल्ली के छावला गांव से शुरू हुआ यह मामला एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, यूपी, बिहार और कई अन्य राज्यों में अचानक फैल गया था। इन घटनाओं में पुलिस अभी तक कोई सुराग नहीं ढूंढ पाई है। चोटी काटने की अफवाहों में कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं।