राज्य में तो विरोध करने की परंपरा सी बन गयीः त्रिवेन्द्र

इन दिनों मेडिकल कोर्स की फीस को लेकर भारी विरोध देखने को मिल रहा है। जिस पर प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने सरकार का इस संबंध में रूख बयां करते हुये कहा कि प्राइवेट निवेशक कॉलेज निर्माण से लेकर अन्य खर्चों की भरपाई स्वयं उठाते है। इसके लिये सरकार की ओर से उन्हें कोई अनुदान नहीं दिया जाता है। तो ऐसे में हम उन्हें हतोत्साहित नहीं कर सकते है। प्रदेश में कई ऐसे अभिभावक है, तो इन फीस को भरने में सक्षम है, तो निवेशकों को हतोत्साहित नहीं करना चाहिए।

सरकार ने हाल ही में हुए बजट सत्र में उत्तराखंड अनुदानित निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थाओं (प्रवेश तथा शुल्क निर्धारण विनियम) (संशोधन) विधेयक-2018 पारित किया है। इस संशोधित विधेयक में निजी मेडिकल कॉलेजों को फीस निर्धारण का अधिकार दिया गया है। इससे पहले निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए फीस का निर्धारण हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के जिम्मे था। अब विधेयक के एक्ट का स्वरूप लेते ही निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस वृद्धि का रास्ता भी तकरीबन साफ हो गया है। निजी मेडिकल कॉलेजों ने फीस वृद्धि की कसरत शुरू कर दी है। प्रदेश में इसका विरोध भी शुरू हो गया है। इस संबंध में बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने साफगोई के साथ सरकार का पक्ष रक्षा।

उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश में ऐसे बच्चे या अभिभावक आते हैं जो खर्च कर सकते हैं तो उन्हें लगता है कि निजी मेडिकल कॉलेजों के क्षेत्रों में पूंजी निवेशकों को रोकना नहीं चाहिए। प्रदेश में तमाम निजी कालेज हैं और कई निवेशक निजी कॉलेज खोलने के लिए आवेदन कर रहे हैं। अगर हम इन्हें रोकते हैं तो राज्य का अहित होता है। प्रदेश में इस मसले पर चल रहे विरोध पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विरोध हर चीज का होता है चाहे अच्छा किया जाए या बुरा। विरोध करना राज्य की परंपरा सी बन गई है।

किसानों की आय बढ़ाने के लिये स्थानीय उत्पादों को दे बढ़ावा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने विकासखण्ड कर्णप्रयाग के कालेश्वर में हिमालयन एक्शन रिसर्च सेन्टर (हार्क) एवं यू-कॉस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हिमालय जंगली उत्पादों के मूल्य सवंर्धन से बने उच्च उत्पाद के ब्रॉन्ड ‘‘माउन्टेन बीम‘‘ का शुभांरभ किया। इस दौरान उन्होंने हार्क संस्थान के कोल्ड स्टोर, नये उत्पादों के रिसर्च यूनिट एवं खाद्य प्रसंस्करण यूनिट का अवलोकन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हार्क संस्था ने तीन उत्पादों से कार्य शुरू किया था और आज संस्था द्वारा 30 से अधिक उत्पाद तैयार किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि परम्परागत कार्यो के साथ प्राकृतिक उत्पादों को उपयोगी बनाकर उनका मूल्य संवर्धन करना जरूरी है। किसानों की आय में वृद्वि करने के लिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ही उसकी ब्रान्डिंग और प्रोसेसिंग पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों में व्यावसायिक सोच विकसित करना जरूरी है। राज्य सरकार द्वारा न्याय पंचायतों को ग्रोथ सेन्टर के रूप में विकसित करने की योजना बनायी जा रही है। इन ग्रोथ सेन्टरों में स्थानीय उत्पादों को बढावा दिया जायेगा तथा अधिक से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों को इससे जोडा जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास के लिए महिला सशक्तिकरण जरूरी है। उन्होंने हार्क संस्था में कार्य करने वाली सभी महिलाओं को उत्तम प्रोसेसिंग एवं ब्रान्डिंग हेतु आवश्यक प्रशिक्षण देनेे को कहा, जिससे उच्च गुणवत्ता के उत्पाद तैयार कर राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा मूल्य मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए हमें अपने अधिकार एवं कर्मो के प्रति सजग रहना होगा।

त्रिवेन्द्र ने कहा कि जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ रही है। जैविक उत्पादों को तैयार कर हम अच्छी आजीविका अर्जित कर सकते है। उन्होंने कहा कि बाजार की डिमांड को देखते हुए किनवा एवं शहद की अच्छी तरह से प्रोसेसिंग और ब्रान्डिंग कर आजीविका में वृद्वि की जा सकती है। शहद के उत्पादन को बढाने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में सहकारी संस्थाऐं बनायी जायेंगी। उन्होंने हार्क संस्था द्वारा तैयार किये गये उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि जंगली फलों की सही ढंग से प्रोसेसिंग कर उत्तम उत्पाद तैयार किये जा रहे है, जिससे स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार के अवसर भी मिल रहे है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया तथा हार्क संस्था द्वारा तैयार किये 14 उत्पादों की मॉउन्टेन वैन को हरी झण्डी दिखाकर देहरादून में मार्केटिंग के लिए रवाना किया।

हार्क संस्था विगत 30 वर्षो से हिमालय क्षेत्र के सीमांत किसानों के साथ आजीविका से संबधित गतिविधियों में कार्य कर रही है, जिसमें बागवानी, कृषि एवं सहकारिता उत्पादों को तैयार किया जा रहा है। महिला सहकारिता का गठन हार्क ने 10 वर्ष पूर्व कालेश्वर में किया था, जिसमें वर्तमान में दो हजार महिलाएं जुडी है। हार्क संस्था द्वारा दो ब्रान्डों में 30 से अधिक उत्पाद तैयार किये जा रहे है।

मोदी सरकार पूरे देश में एक ही राशन कार्ड करने करने जा रही

मोदी सरकार एक ऐसी व्यवस्था करने शुरू करने जा रही है, जिसके बूते आप देशभर में एक ही राशन कार्ड का इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही इससे गलत तरीके से राशन कार्ड बनने पर रोक लग सकेगी।

मोदी सरकार चाहती है कि आधार कार्ड की तर्ज पर हर एक राशन कार्ड को एक विशिष्ट (यूनिक) पहचान नंबर दिया जाए। इससे फर्जी राशन कार्ड बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी, जिसमें एक ऑनलाइन एकीकृत (इंटेग्रेटेड) सिस्टम बनाया जाएगा। इस सिस्टम में राशन कार्ड का डेटा स्टोर होगा।

इसके बन जाने के बाद अगर देश में कहीं भी कोई अगर फर्जी राशन कार्ड बनवाने की कोशिश करेगा, तो इस सिस्टम के जरिये से पता चल जाएगा। इसके बाद अगर कोई नया राशन कार्ड बनवाने जाता है, तो वह ऐसा कर नहीं पाएगा।

अगले महीने से शुरू होगा काम

इस ऑनलाइन सिस्टम का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि कोई भी लाभार्थी देश के किसी हिस्से में और किसी भी राशन की दुकान पर सब्सिडी वाला अनाज ले सकेंगे। इस व्यवस्था पर अगले महीने से काम शुरू होगा।

इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जो अपने राज्य से दूसरे राज्य में नौकरी की खातिर पलायन कर चुके हैं। मौजूदा समय में लाभार्थी अपने गांव या आसपास की राशन की दुकान से सब्सिडी वाला अनाज खरीदते हैं। मगर, एक बार यह ऑनलाइन नेटवर्क तैयार हो गया, तो दूसरे राज्यों में नौकरी के सिलसिले में गए लोगों को कहीं से भी राशन लेने की सुविधा मिल जाएगी. इससे काफी बड़े स्तर पर लोगों को फायदा मिल सकेगा।

मौजूदा समय में देश के सिर्फ चार राज्यों में ही यह सुविधा है, जहां कि एक राज्य के लाभार्थी दूसरे राज्य के राशन की दुकान से अनाज खरीद सकते हैं। यह राज्य हैं, राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना।

क्या वाकई विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है आयुष्मान भारत

नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम यानी आयुष्मान भारत को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूदी दे दी है। इस योजना को मोदी केयर भी कहा जाता है। विदित हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषण इस साल के बजट में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने की थी।

कैबिनेट ने नेशनल हेल्थ मिशन को जारी रखने पर भी सहमति दी है। यह योजना 31 मार्च 2020 तक चलेगी और केंद्र सरकार इसके लिए 85,217 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
इस योजना के तहत हर परिवार को पांच लाख रुपये तक का हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या पर कोई रोक नहीं है। इस योजना के तहत कौन से परिवार आएंगे, इसका फैसला आर्थिक आधार पर होगा। इस योजना के दायरे में आने वाले परिवारों को सरकारी और चुने हुए प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलेगी। जो परिवार इस योजना के तहत आएंगे उन्हें इलाज की सुविधा देश भर में कहीं भी मिल सकेगी।

क्या है आयुष्मान भारत योजना

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस साल पेश किए गए बजट में दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि इसके तहत करीब 10 करोड़ परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये का मेडिकल कवर भी दिया जाएगा। साथ ही इस योजना का लाभ देश की 40 फीसदी आबादी यानी 50 करोड़ लोगों को मिलेगा। इसमें निजी क्षेत्र की कंपनियां भी भाग ले सकेंगी।

जेटली ने कहा था कि भारत को स्वस्थ भारत बनाया जाएगा, इसके लिए देशभर में 1.5 लाख स्वास्थ्य केंद्र खोले जाएंगे। इन स्वास्थ्य केंद्रों के खोले जाने का फायदा आम लोगों को फौरी तौर पर होगा, क्योंकि उन्हें आम बीमारियों के इलाज के लिए दूर नहीं जाना होगा और पास के इन केंद्रों से इलाज करा सकेंगे। साथ ही आरोग्य से जुड़ी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।

शुरुआती इलाज में मिलेगा फायदा

आम लोगों को पांच लाख रुपये की बीमा का फायदा तब मिलेगा जब बीमारी बड़ी या फिर गंभीर होने की स्थिति में वह हॉस्पिटल में भर्ती होगा, लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों का फायदा छोटे और बड़े हर तरह के बीमार लोगों को तुरंत मिलेगा।

नई योजना के तहत हर तीन संसदीय क्षेत्र या फिर एक राज्य में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। फिलहाल देश में निजी और सरकारी दोनों मेडिकल कॉलेजों से हर साल 67 हजार एमबीबीएस और 31 हजार पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर पास होकर निकलते हैं। ऐसे में कई नए मेडिकल कॉलेज खुलने से डॉक्टरों की कमी दूर होगी और लोगों के इलाज के लिए पर्याप्त डॉक्टर सुलभ हो सकेंगे।

पांच वर्षों की तुलना एक वर्ष से करेंः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने भ्रष्टाचार को मिटाने में जनता से सहयोग की अपेक्षा की है। प्रदेश में पिछले एक वर्ष में संस्थागत भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया गया है। यह भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में भ्रष्टाचारियों में दहशत ही नहीं बल्कि भ्रष्टाचारी, भ्रष्ट तरीके से कमाये गये धन को वापस करने की बात कर रहे है। मुख्यमंत्री ने कैंसर रोगियों और हृदय रोगियों के लिये एक माह के भीतर मॉडल लैब स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि एक वर्ष के भीतर प्रदेश की सड़कों के सभी दुर्घटना सम्भावित क्षेत्र (ब्लैक स्पॉट) ठीक कर दिए जाएंगे। अपै्रल माह तक 108 सेवा की 111 अतिरिक्त एम्बुलेंस आ जाएंगी। प्रदेश में खाद्य सामग्री की जांच के लिये मोबाईल फूड टेस्टिंग लैब की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने इन सचल वाहनों को भी झंडी दिखाकर रवाना किया।

रविवार को प्रदेश सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने पर परेड ग्राउण्ड में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने पिछले एक वर्ष में अपनी सरकार द्वारा प्रदेश हित में लिये गये निर्णयों व कार्यों की जानकारी जनता के समक्ष रखी। मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने पर जनता के समक्ष राज्य सरकार के गुड गवर्नेंस मॉडल को प्रस्तुत किया। लगभग 20 मिनट के सम्बोधन में मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही करने की बात दृढ़ता के साथ दोहराई। उन्होंने ग्राम्य विकास, महिला सशक्तिकरण, चिकित्सा, स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था, सूचना प्रौद्योगिकी, जल संरक्षण, विद्युतीकरण, शिक्षा, स्वच्छता, समाज कल्याण जैसे सभी महत्वपूर्ण सैक्टरों में पिछले एक वर्ष में किये गए कार्यों की जानकारी दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास के अपने विजन को भी साझा किया। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में बाल लिंगानुपात पर किये गये अध्ययन को जारी किया।

उन्होंने कहा कि उनके द्वारा जनता से उत्तराखण्ड को विकसित पारदर्शी व भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने का वायदा किया गया था। उसके परिणाम भी सामने है। पांच वर्षों की तुलना में प्रदेश में इस एक वर्ष की अवधि में अपराध, हत्या, मृत्यु की घटनाओं में कमी आयी है। पुलिस द्वारा अपराधों के नियन्त्रण में प्रभावी कार्यवाही की जा रही है।

उन्होंने अपनी सरकार द्वारा एक वर्ष की उपलब्धियों को जनता के सम्मुख पेश किया। जिनमें फॉर्म मशीनरी बैंक, सस्ता ऋण वितरण, मॉडल स्कूलों के लिये ‘के’ यान मशीने, गैस कनेक्शन वितरण, स्टैण्डअप योजना, डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र, आशाओं को सम्मान, दुग्ध संघो को प्रोत्साहन, ओडीएफ नगर निकायों का सम्मान, ई रिक्शा योजना, सौभाग्य योजना आदि योजनाओं रही।

सात महिलाओं को सीएम ने प्रदान की सखी ई-रिक्शा

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपने आवास पर कार्यक्रम आयोजित किया। महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राज्य में सामाजिक दृष्टि से कमजोर व निराश्रित एकल महिलाओं के लिये पं. दीन दयाल उपाध्याय सामाजिक सुरक्षा कोष एकल महिला ऋण योजना के तहत एक लाख तक का ऋण एक प्रतिशत ब्याज पर दिये जाने की योजना का शुभारम्भ किया।

इस योजना का उद्देश्य गांवों में ही रोजगार सृजन कर महिलाओं की स्थिति को सुदृढ़ करते हुये उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। राज्य सरकार द्वारा अकेली महिलाओं के लिये यह सौगात दी है। पशुपालन व मत्स्य पालन को भी इसमें सम्मिलित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एकल मंिहलाओं के लिये सखी ई-रिक्शा योजना के तहत सात महिलाओं को ई-रिक्शा की चाबी व सेफ्टी किट प्रदान की। उन्होंने ई-रिक्शा में बैठकर इसके संचालन की भी शुरूआत की। इसके लिये 50 हजार प्रति ई-रिक्शा अनुदान दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कैलेण्डर तथा विभिन्न प्रचार सामग्री का भी विमोचन किया तथा महिलाओं को सेफ्टि नैपकिन किट भी वितरित किये। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आंगनबाडी कार्यकत्रियों को मोबाईल तथा सुपर वाईजर केा टेबलेट उपलब्ध कराये जायेंगे ताकि उन्हें अपने कार्यो के सम्पादन में आसानी हो सके।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने महिलाओं से अपना उत्साह एवं आत्म विश्वास हर समय बनाये रखने को कहा। उन्होंने कहा कि धरती को हम मां कहते हैं धरती की भंाति महिलाओं में भी धारण करने की क्षमता है ।

प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों में भी महिला अधिकारी बेहतर क्षमता का प्रदर्शन कर रही है। प्रदेश में 03 डीएम, 04एसएसपी, 05 सीएमओ के अलावा अन्य महिला अधिकारी कार्यरत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश पुलिस में महिलाओं की भागीदारी 11 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इसका प्रतिशत 07 ही है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि महिला दिवस के अवसर पर प्रदेश में 293 एएनएम को नियुक्ति पत्र जारी किये गये है। 380 वेकेंसी निकाली गई है। 481 डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है। जिसमें 193 महिलायें है उसमें भी 159 उत्तराखण्ड की है। 2100 एएनएम तथा 12 हजार आशा वर्करों का 02 लाख का बीमा का लाभ दिये जाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश की आशा कार्यकत्रियों को वर्ष 2012-13 से रूकी हुई वार्षिक प्रोत्साहन धनराशि हेतु 33 करोड़ रूपये जारी कर दिये गये हैं। 108 योजना के तहत 61 एम्बुलेंस वाहन दी गई है। शीघ्र 111 और एम्बुलेंस वाहन उपलब्ध कराये जायेंगे। हर जिले में आईसीयू स्थापित किये जा रहे है। प्रति आईसीयू पर दो करोड़ व्यय होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2011 में 0-06 का आयु लिंगानुपात प्रति 1000 के विपरीत 890 था।

मुख्यमंत्री ने महिलाओं से अपील भी की कि वे सरकार द्वारा महिलाओं के कल्याण के लिये संचालित विभिन्न कार्यक्रमों व योजनाओं की जानकारी प्राप्त का उनका अधिक से अधिक उपयोग कर आर्थिक व सामाजिक रूप से मजबूत बने।

बीएसएफ फिर चर्चा में, जवान को मिली सजा जरा हट के

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में एक जवान को पीएम मोदी के नाम के आगे माननीय या श्री न लगाकर संबोधित करना भारी पड़ गया। इसकी कीमत उसे सात दिन के वेतन के रूप में गवानी पड़ी। बताया जा रहा है कि बीएसएफ ने इसे पीएम का अपमान मानते हुये सात दिन का वेतन काट लेने की सजा दी।

21 फरवरी को बीएसएफ के 15वें बटालियन के मुख्यालय महतपुर, नाडिया (पश्चिम बंगाल) में एक जवान संजीव कुमार ने एक रिपोर्ट देते हुए मोदी कार्यक्रम शब्द का इस्तेमाल किया।

बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कमांडेंट अनूप लाल भगत इससे काफी नाराज हुए और उन्होंने संजीव कुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

संजीव के खिलाफ संक्षिप्त सुनवाई हुई और उन्हें बीएसएफ एक्ट की धारा 40 (व्यवस्था के प्रति पक्षपात और बल का अनुशासन) के तहत दोषी पाया गया।

बीएसएफ के कई अधिकारियों ने इस सजा को थोड़ा सख्त बताया और कहा कि इसकी जरूरत नहीं थी।

वेस्ट को बेस्ट में बदलना आवश्यकः रामदेव

पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में नव निर्मित भवन का उद्घाटन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया। उन्होंने कहा पतंजलि योगपीठ योग व आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। भारत को विश्वगुरू बनाना है तो योग व आयुर्वेद को बढ़ावा देना होगा।

पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के वार्षिक समारोह में त्रिवेन्द्र बोले भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति विश्व में सर्वोपरि है। भारत योग एवं आयुर्वेद के माध्यम से विश्व को शांति, सुख व स्वस्थ जीवन की परिकल्पना दे सकता है।

स्वस्थ विश्व की परिकल्पना के लिए आयुर्वेद के क्षेत्र में निरन्तर शोध जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से 21 जून को अन्तराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। योग के माध्यम से भारत ने विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

आयुष मंत्री हरक सिंह ने कहा कि योग एवं आयुर्वेद का उल्लेख वेदों, उपनिषदों एवं पुराणों में प्राचीन समय से ही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कोटद्वार के निकट चरक डाण्डा में देश का पहला आयुर्वेद शोध संस्थान बनाने का निर्णय लिया है।

स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत के निर्माण में ऋषि-मुनियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वेद, पुराण, उपनिषद एवं ऋषियों के तप एवं साधना के संस्कार भारतीय संस्कृति में हैं। उन्होंने कहा कि न्यू इंडिया के संकल्प को पूरा करने के लिए स्वदेशी वस्तुओं एवं उत्पादों को बढ़ावा देना जरूरी है। वेस्ट को बेस्ट में बदलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एविडेन्स बेस मेडिसिन के रूप में औषधियों को प्रसिद्धि दिलाना एवं पाण्डुलिपियों का संरक्षण करना जरूरी है।

जानिए किसने कहा राजनीति बेहद कठिन, मगर मैं कर सकता हूं बदलाव…

सुपरस्टार रजनीकांत चेन्नई स्थित एक कॉलेज में छात्रों से कहा कि वे एक अच्छी सरकार चला सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब जयललिता नहीं रहीं, करुणानिधि भी बीमार हैं। उन्होंने एमजीआर का नाम लेते हुए कहा कि मैं उनकी तरह राज्य की सेवा कर सकता हूं। उन्होंने कहा कि एमजीआर जैसे लोग हजारों साल में एक बार पैदा होते हैं।

एमजीआर एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में एमजीआर की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद रजनीकांत ने छात्रों से बातें कीं। रजनीकांत ने इस मौके पर एमजी रामचंद्रन की ही तरह सफेद धोती और शर्ट पहना था।

छात्रों से उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि राजनीति का रास्ता बेहद कठिन है, लेकिन मैं एक अच्छी सरकार का नेतृत्व कर सकता हूं। उन्होंने एमजीआर के शासन का जिक्र करते हुए कहा कि मैं राज्य की जनता को एक बार फिर से वैसी ही सरकार दे सकता हूं. ईश्वर मेरे साथ है और मुझे विश्वास है कि मैं राज्य में ये बदलाव ला सकता हूं।

रजनीकांत ने कहा कि एम करुणानिधि, जीके मुप्पनर और दूसरे नेताओं के साथ मेरे अच्छे संबंध रहे हैं। इन लोगों से मैंने राजनीति सीखी है। राजनीति के रास्ते में तमाम मुश्किलें, कठिनाइयां और दिक्कतें आती हैं। इसका रास्ता कांटों से भरा हुआ है, लेकिन आपका नजरिया साफ हो, तो आप सब कुछ पार कर सकते हैं।

रजनीकांत ने इस दौरान उन लोगों को भी जवाब दिया जो कलाकारों के राजनीति में आने पर सवाल उठा रहे हैं। रजनीकांत ने कहा कि मैं स्वागत की उम्मीद नहीं करता, लेकिन आप हतोत्साहित क्यों कर रहे हैं। मैं अभी सिर्फ 67 साल का हूं. राजनेता अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं, इसलिए हमें राजनीति में आना पड़ रहा है। पिछले साल के आखिरी दिन रजनीकांत ने राजनीति में आने का ऐलान किया था।

सरकार की योजनाओं की पहुंच गांव तक पहुंचेः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक आधुनिक सूचना तकनीकि की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया। प्रदेश का डाटा बेस सेन्टर शीघ्र तैयार करने, सभी न्याय पंचायतों में कामन सर्विस सेन्टर (सीएससी) की स्थापना के साथ ही वैलून तकनीकी के उपयोग पर ध्यान देने के भी निर्देश दिये है। आईटी के क्षेत्र में भारत सरकार के सहयोग से संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये है।

सचिवालय में आईटी विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने निर्देश दिये कि सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच गांवों तक सुनिश्चित हो तथा शासकीय कार्यकलापों, कार्यक्रमों व योजनाओं के साथ ही जन सुविधाओं से सम्बन्धित विभिन्न विषयों को आईटी से जोड़ा जाय। उन्होंने कहा कि सभी ग्राम पंचायतों तक आईटी की पहुंच सुनिश्चित होने से ग्रामीण क्षेत्रों तक योजनाओं व सुविधाओं का लाभ सुलभ हो सकेगा तथा शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार के साधन भी उपलब्ध हो सकेंगे। इससे स्मार्ट विलेज की कल्पना भी साकार हो सकेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों तक आधुनिक शिक्षा के प्रसार एवं स्वस्थ मनोरंजन की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान दौर सूचना प्रौद्योगिकी का है। अतः इस दिशा में सभी विभागों को प्रभावी पहल करनी होगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि लोगों को आधार कार्ड बनाने में परेशानी न हो इसके लिये जिलाधिकारियों को आधार किट उपलब्ध कराये जाय तथा शासकीय कार्यालयों के माध्यम से भी यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। उन्होंने सभी विभागों में आईटी विभाग से समन्वय स्थापित कर योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने को कहा। उन्होंने आईटी विभाग के पुनर्गठन हेतु आवश्यक पदों के सृजन पर भी सहमति जतायी। उन्होंने कहा कि आईटी के अधिक से अधिक उपयोग से कार्यो में पारदर्शिता व सुगमता आयेगी।
निदेशक आईटीडीए अमित सिन्हा ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से अवगत कराया कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में संचार व्यवस्था हेतु एयरोस्टेट (बैलून) की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए आईआईटी मुम्बई से एमओयू किया गया है। परियोजना का प्रथम ट्रायल अहमदनगर में किया जा चुका है, जबकि दूसरा ट्रायल उत्तराखण्ड में अप्रैल में प्रस्तावित है।
प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के अन्तर्गत ई साक्षरता हेतु मार्च 2019 तक पांच लाख छह हजार लोगों को प्रशिक्षण दिये जाने का लक्ष्य रखा गया है। एक लाख पैंतालीस हजार लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि राज्य में ड्रोन पर शोध एवं प्रशिक्षण का कार्य किया जायेगा। मार्च 2018 तक एनटीआरओ केन्द्र प्रारम्भ किये जाने की योजना है। वर्ष 2018 में सभी 7095 ग्राम पंचायतों को कॉमन सर्विस सेंटर (सी.एस.सी) से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। अभी 6226 ग्राम पंचायतों में सी.एस.सी स्थापित हैं। प्रदेश के नागरिकों को प्रमाण पत्र एवं अन्य सेवाओं के लिए 131 ई-डिस्ट्रिक्ट केन्द्र, 16 सेवायोजन केन्द्र तथा 2160 कार्यशील सी.एस.सी के माध्यम से 16 सेवाएं पौड़ी तथा 13 सेवाएं राज्य के अन्य जिलों में प्रदत्त हैं।