शाह कर्नाटक में कमल खिलाने को खेलेंगे येदियुरप्पा कार्ड!

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का शनिवार से कर्नाटक दौरा शुरु हो गया है। पहले दिन चुनावी बिगुल फूंकते हुए शाह ने नारा दिया- अबकी बार, बीजेपी सरकार। कई गुटों में बंटी राज्य बीजेपी इकाई में जोश भरने के इरादे से शाह तीन दिवसीय दौरे पर कर्नाटक पहुंचे है। उन्होंने कहा कि राज्य बीजेपी के प्रमुख बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में पार्टी विधानसभा चुनाव जीतेगी।
केम्पे गौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नजदीक पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, दोस्तों, हमारी पार्टी एकजुट है और आगामी दिनों में येदियुरप्पा के नेतृत्व में चुनावी लड़ाई में उतरने के लिए तैयार है। देखते रहिए हम राज्य में बीजेपी की सरकार बनाएंगे। कर्नाटक में इस वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं जिसके लिए पार्टी ने 150 से ज्यादा सीट जीतने का लक्ष्य रखा है। सत्तारूढ़ कांग्रेस सत्ता बरकरार रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है लेकिन बीजेपी ने कहा है कि उसकी ध्रुवीकरण की राजनीति का मुकाबला करने के लिए उसने रणनीति तैयार कर ली है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुरेश कुमार ने कहा कि बीजेपी न तो लिंगायत धर्म के मुद्दे को उछालेगी न ही कांग्रेस के ध्रुवीकरण की राजनीति के खिलाफ कन्नड़ भाषा विवाद को राजनीतिक हथियार बनाएगी। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस राज्य की सबसे बड़े लिंगायत समुदाय के अलग धर्म का समर्थन करती है जिसे बीजेपी को नुकसान पहुंचाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी का लिंगायत धर्म समुदाय में काफी जनाधार है। कुमार ने कहा कि बीजेपी लोगों और समुदायों के बीच घृणा फैलाने के लिए भाषा के मुद्दे का भी इस्तेमाल नहीं करना चाहती। शाह का कर्नाटक दौरा पार्टी को मजबूत करने के लिए पूरे देश के 110 दिन के उनके दौरे का हिस्सा है।

हाईकमान सुलझा पायेगा मदन कौशिक और सतपाल महाराज के समर्थकों में मारपीट का मामला!

हरिद्वार का घटनाक्रम अब भाजपा हाईकमान के दरवाजे पर आ गया है। हाईकमान अब मामले में दोनों मंत्रियों के बीच सुलह करवायेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। दो कैबिनेट मंत्रियों के समर्थकों के सार्वजनिक रूप से आमने-सामने आ जाने से भाजपा की किरकिरी हो रही है। वहीं अनुशासित पार्टी की छवि को भी इस घटनाक्रम से नुकसान पहुंचा है। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बाद मंत्रिमंडल में नंबर दो की हैसियत के मंत्री हैं। इसी साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव के जरिये महाराज ने राज्य की राजनीति में कदम रखा। उत्तराखंड में भाजपा की भारी भरकम जीत के बाद वह भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे, हालांकि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर पुराने पार्टी कार्यकर्ता त्रिवेंद्र सिंह रावत को तरजीह दी।
वहीं, हरिद्वार के विधायक मदन कौशिक भी भाजपा के कद्दावर नेताओं में शामिल हैं। विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज करते आ रहे कौशिक की छवि तेजतर्रार नेता की है। कौशिक के कद का अंदाजा इस बात ये लगाया जा सकता है कि उन्हें प्रदेश सरकार के प्रवक्ता की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है।
गुरुवार को हुए टकराव के बाद जिस तरह पार्टी नेता और विधायक साफ तौर पर दो खेमों में बंटे नजर आए, उससे यह भी स्पष्ट हो गया कि चिंगारी काफी वक्त से सुलग रही थी और मौका सामने आते ही इसने असंतोष की आग कर रूप ले लिया। हालांकि, अब प्रदेश नेतृत्व इस असहज स्थिति से निबटने के लिए आगे आ गया है। इससे समझा जा रहा है कि जल्द इस प्रकरण का पटाक्षेप हो जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष ने बताया हादसा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने हरिद्वार की घटना को महज एक हादसा बताया है। कहाकि यह दो मंत्रियों के बीच टकराव जैसी कोई बात नहीं है। दरअसल, हरिद्वार में जलभराव को लेकर स्थानीय जनता में आक्रोश था। प्रशासन अगर आश्रम प्रबंधन से इस सिलसिले में पूछ लेता, तो यह नौबत आती ही नहीं।
उन्होंने कहा कि यह मामला सतपाल महाराज के आश्रम के लोगों और नगर निगम कर्मचारियों के बीच का है। इसे बेवजह राजनैतिक रूप से तूल नहीं देना चाहिए। मैंने दोनों मंत्रियों से इस संबंध में बात की है। परिवार का मामला है, जल्द सुलझा लिया जाएगा।

अब मोदी के इशारे पर काम कर रहे नीतीश, दिखाया शरद यादव को आईना

भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से नई सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार के इस कदम से बिहार की राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है। नीतीश कुमार की अगुवाई वाला जेडीयू जल्द ही केन्द्र में एनडीए सरकार का हिस्सा हो जाएगा क्योंकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने नीतीश कुमार को केन्द्र सरकार में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आनेवाले दिनों में किस तरह का बिहार में सियासी समीकरण देखने को मिलेगा? आनेवाले लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा और जेडीयू की बिहार में क्या रणनीति है?

नीतीश की दो टूक
नीतीश ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद शरद यादव के बगावती तेवर पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखते हुए उन्हें दो टूक जवाब दे दिया। नीतीश ने कहा कि उन्होंने नई सरकार बनाने का फैसला सर्वसम्मति के आधार पर लिया था। उन्होंने कहा कि कुछ भी करने से पहले पार्टी के लोगों से जरूर पूछता हूं। ऐसे में शरद यादव को जो भी फैसला लेना है उसके लिए वह पूरी तरह से स्वतंत्र हैं।

सरकार में शामिल हो जेडीयू
माना जा रहा है कि जेडीयू को केन्द्र सरकार में दो या तीन अहम मंत्रालय दिया जा सकता है। लेकिन, इससे पहले जेडीयू की 19 अगस्त को बुलाई गई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में केंद्र सरकार में शामिल होने पर फैसला हो सकता है।

शरद यादव पर कार्रवाई
जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शरद यादव पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें राज्यसभा में पार्टी के नेता पद से हटा दिया है। इसको लेकर जेडीयू की तरफ से उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को पत्र लिखा है। पार्टी ने शरद यादव की जगह आरसीपी सिंह को राज्यसभा में अपना नेता चुना है।

बदल जाएगा सियासी समीकरण
जेडीयू के केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद पूरी तरह से बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में समीकरण बदल जाएगा। कल तक जिस नीतीश कुमार को विपक्ष की तरफ से धर्मनिरपेक्षता का बड़ा नेता माना जा रहा था और विपक्षी दल उनकी अगुवाई के बारे में सोच रही थी वो अब करीब डेढ़ साल बाद आनेवाले लोकसभा चुनाव में पिछले चुनाव के उलट मोदी के पक्ष में चुनाव् प्रचार करते हुए दिखेंगे।

जिंदगीभर सम्मान पाने वाले हामिद अंसारी का ये कैसा बयान!

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने गुरुवार को संसद में केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। अपने कार्यकाल के अंतिम दिन उन्होंने देश की राजनीति को गरमा दिया। उन्होंने संसद में मुसलमानों में असुरक्षा और भय का माहौल का जिक्र करते हुए जाते-जाते सियासी दांव खेला है। जानकार इसे कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मान रहे है, तो वहीं सोशल मीडिया में हामिद अंसारी की कडं़ी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया में चल रहे ट्रोल में लोगों ने पद जाने के बाद मुसलमानों में भय और असुरक्षा को लेकर उठाये गये तर्क पर सवाल खड़े कर रहे है।
उपराष्ट्रपति अंसारी ने कहा, मैंने 2012 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के हवाले से कुछ कहा था। आज भी मैं उनके शब्दों को कोट कर रहा हूं। किसी लोकतंत्र की पहचान इससे होती है कि उसमें अल्पसंख्यकों की कितनी सुरक्षा मिली हुई है? लोकतंत्र में अगर विपक्षी समूहों को स्वतंत्र होकर और खुलकर सरकार की नीतियों की आचोलना करने की इजाजत न हो तो वह अत्याचार में बदल जाती है। उपराष्ट्रपति के इस बयान पर उच्च सदन में खूब तालियां भी बजीं। अंसारी ने कहा, साथ में अल्पसंख्यकों की जिम्मेदारी भी जरूरी है। उनके पास आलोचना का अधिकार है लेकिन उस अधिकार का मतलब यह नहीं है कि संसद को बाधित करें। उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता चर्चा में है न कि चर्चा को बाधित करने में।
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपने विदाई भाषण में शायराना अंदाज में राज्यसभा के सदस्यों को धन्यवाद कहा और शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने अपने भाषण के अंत में कहा, आओ कि आज खत्म करें दास्ताने इश्क, अब खत्म आशिकी के फसाने सुनाएं हम। अंसारी ने उपराष्ट्रपति के तौर पर लगातार 2 कार्यकाल पूरे किए। वह 2007 में उपराष्ट्रपति बने थे। बाद में 2012 में भी वह दोबारा उपराष्ट्रपति चुने गए।

किसने कहा, 2024 में देश की बागडोर संभालेंगे योगी!

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट को उम्मीद है कि उनका बेटा देश का प्रधानमं़त्री बनेगा। उन्होंने तो योगी आदित्यनाथ के प्रधानमंत्री बनने तक की तारीख बता दी है, उनका कहना है कि 2024 में योगी भारत के प्रधानमंत्री होंगे।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद बिष्ट को भरोसा है कि उनका बेटा एक दिन प्रधानमंत्री बनेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए योगी की जरूरत थी। जिस तरह योगी विकास के लिए तेजी से फैसले ले रहे हैं, उससे वह संतुष्ट हैं।
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि मुख्यालय में गुरूवार को पत्रकारों से सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि यूपी और उत्तराखंड के विकास कार्यों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली में 9 और 10 का अंतर है। विकास की गति पर उन्होंने उत्तराखंड को नौ और यूपी को 10 अंक दिए। उन्होंने कहा उत्तराखंड में उतनी तेजी से निर्णय नहीं हो रहे। यहां की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ऐसा हो रहा है।
उन्होंने बताया कि योगी चुनाव के दौरान फरवरी में गांव आए थे। मौजूदा विधायक ऋतु खंडूड़ी को जीत दिलाने में योगी की बड़ी भूमिका रही। गांवों की समस्या के बारे में उन्होंने कहा कि यदि गांवों में चकबंदी हो जाय तो बेहतर रहेगा। इससे पलायन भी रूकेगा। जिन स्कूलों में छात्र संख्या कम है, उन्हें प्रदेश सरकार द्वारा बंद कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि महायोगी गुरूगोरखनाथ महाविद्यालय बिथयाणी के प्रबंधक होने के नाते वह कॉलेज की मान्यता संबंधी कार्य के लिए यहां आए हैं। मेरा प्रयास है कि कॉलेज में पीजी की कक्षाएं शुरू हों। इस क्षेत्र में यह अकेला महाविद्यालय है।

किसने कहा, कर लो अपनी मनमर्जी, 2019 में देखूंगा आपको!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में सांसदों की उपस्थिति के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सदन में सांसदों को उपस्थित रहना चाहिए। उन्होंने कहा, आप और मैं कुछ नहीं हैं, जो है वह भाजपा है, पार्टी है। बार—बार व्हिप क्यों देना पड़ता है। अब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उच्च सदन के लिये निर्वाचित हुए हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि सदन में गैर हाजिर रहने वाले पार्टी सदस्यों पर उनकी नजर रहेगी। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले भी प्रधानमंत्री ने सदन में सांसदों की उपस्थिति का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए सांसदों को सदन में रहने के लिए कहा था। हाल ही में संसदीय पार्टी की बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सदस्यों के सदन से अनुपस्थित रहने पर नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। संसद के वर्तमाल सत्र में ही राज्यसभा में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष का संशोधन के साथ पारित हो गया। इसके चलते केंद्र सरकार को किरकिरी का सामना करना पड़ा। सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों के पूरी संख्या में उपस्थित नहीं होने के कारण विपक्ष का संशोधन पारित हो गया था।
कुछ समय पहले शाह ने संसदीय दल की बैठक में लगातार गैरहाजिरी होने पर नाराजगी और निराशा जाहिर की थी। उन्होंने पार्टी सांसदों को संसद के दोनों सदनों में मौजूद रहने को कहा। साथ ही ये भी हिदायत दी कि इस बात को हल्के में ना लिया जाए और दोबारा ऐसा ना हो। बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का स्वागत किया और पिछले तीन वर्षों के दौरान पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनके कामकाज की प्रशंसा की ।
मोदी ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी का अध्यक्ष होना कोई आसान काम नहीं है और अमित शाह ने अपने कौशल एवं कठिन परिश्रम से पार्टी संगठन का सफलतापूर्वक विस्तार किया है।

शिया बोर्ड के हलफनामे से राम जन्म भूमि विवाद में नया मोड़ आने के संकेत

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का हल निकलने की उम्मीद प्रबल होती जा रही है। शुक्रवार सेे सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ मामले की सुनवाई करेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ लंबित चुनौतियों के साथ यूपी शिया वक्फ बोर्ड की ओर से दायर हलफनामे पर विशेष पीठ सुनवाई करेगी। साथ ही बोर्ड द्वारा विवादिल स्थल पर मालिकाना हक जताने की अपील पर साथ में सुनवाई कर सकती है।
रामलला विराजमान, हिन्दू महासभा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड समेत तमाम पक्षकारों हाईकोर्ट के तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ के 30 सितंबर 2010 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने दो-एक के बहुमत से फैसला सुनाते हुए राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी बोर्ड मे बांटने का आदेश दिया था। सर्वोच्च अदालत ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाएं विचारार्थ स्वीकार की थीं और हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। साथ ही कहा था कि मामला लंबित रहने तक संबंधित पक्षकार विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखेंगे। इसके बाद भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने दर्शनार्थियों के लिए मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की जिसका विरोध मुख्य याचिकाकर्ता मोहम्मद हाशिम ने की थी। लेकिन अदालत ने स्वामी की मांग को मुख्य मामले के साथ सुनवाई करने का निर्णय लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तीन न्यायाधीशों जस्टिस दीपक मिश्रा, अशोक भूषण और अब्दुल नजीर की विशेष पीठ का गठन मामले पर सुनवाई के लिए किया। शुक्रवार, 11 अगस्त को दोपहर दो बजे से इस मामले पर नियमित सुनवाई होगी या फिर अंतरिम राहत की मांग वाले आवेदनों पर विचार किया जाएगा। यह सुनवाई के दौरान ही विशेष पीठ स्पष्ट करेगी। दरअसल इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष पीठ का गठन करते हुए अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया है और रजिस्ट्री ने संबंधित पक्षकारों को ऐसी कोई सूचना दी है जिससे यह साफ हो कि विशेष पीठ मामले के किस पहलू पर गौर करेगी। साथ ही अदालत से स्वामी ने भी आवेदन में जल्द सुनवाई की मांग कई बार की है और अदालत ने उन्हें जल्द सुनवाई करने का भरोसा भी दिलाया था।
सुनवाई की तिथि से कुछ दिन पहले ही शिया बोर्ड ने हलफनामा दाखिल कर मामले में समुचित समझौते का रुख व्यक्त किया। उसने कहा कि विवादित स्थल से समुचित दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में एक मस्जिद का निर्माण किया जा सकता है। इसके बाद ठीक अगले दिन शिया बोर्ड ने ढहाए जा चुके विवादिल स्थल की जमीन के मामले में 1946 में दिए गए ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दे दी। सात दशक बाद दायर याचिका में उसने विवादित स्थल पर मालिकाना हक जताते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले में खामी बताई और सुप्रीम कोर्ट से मामले पर विचार कर फैसला करने की गुजारिश की। इस अपील में कहा गया है कि मस्जिद बाबर ने नहीं, मीर बाकी ने बनवाई थी जो एक शिया था।
खास बात ये है कि हलफनामे में शिया वक्फ बोर्ड ने यह भी कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड शांतिपूर्ण तरीके से इस विवाद का हल नहीं चाहता। इस मसले को सभी पक्ष आपस में बैठकर सुलझा सकते हैं जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट उन्हें समय दे। बोर्ड ने कहा कि इसके लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाए। सर्वोच्च अदालत इस मामले को बातचीत के जरिए हल करने को पहले ही कह चुका है। ऐसे में शिया बोर्ड का हलफनामा इस मामले का अदालत का रुख बदल सकता है और सभी पक्षकारों से समझौते को लेकर अदालत सवाल कर सकती है।

हरिद्वार की घटना से प्रदेश की राजनीति में भूचाल आने के संकेत!

हरिद्वार की घटना से प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बवाल हो गया है। दो कैबिनेट मंत्रियों के समर्थकों में जमकर लाठी और डंडे चले। जिसमें नगर निगम के मेयर मनोज गर्ग को गंभीर चोटें आयी है। दूसरी, ओर भाजपा के चार विधायक खुलकर सतपाल महाराज के समर्थन में आ गये है। जिसे मदन कौशिक को घेरने की राजनीति के रुप में देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस प्रकरण से पूर्व मुख्यमंत्री निशंक और सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत के बीच और खाई पट सकती है।
आरोप है कि अतिक्रमण हटाने को गई टीम पर कार्रवाई के दौरान कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के समर्थकों ने मेयर मनोज गर्ग और नगर निगम हरिद्वार के कर्मचारियों पर हमला कर दिया है। जानकारी के अनुसार बारिश के कारण खन्ना नगर में जलभराव हो रहा था। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के प्रेमनगर आश्रम के ठीक बराबर में पॉश कालोनी खन्ना नगर स्थित है। सुबह हुई बारिश के दौरान हरिद्वार की सड़कें जलमग्न हो गईं। खन्ना नगर में भी जलभराव हो गया। जलभराव की स्थिति का जायजा लेने मेयर मनोज गर्ग मौके पर पहुंचे तो वहां मौजूद भीड़ का आरोप था कि प्रेमनगर आश्रम के अतिक्रमण के चलते ही कालोनी में जलभराव की नौबत आ रही है। आरोप है कि आश्रम की ओर से नाले पर भी कब्जा किया गया है। इससे पानी की निकासी रुक गई है।
मौके पर नगर निगम की टीम जैसे ही आश्रम के अतिक्रमण को तोड़ने लगी तो आश्रम के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। मेयर गर्ग के साथ शहरी विकास मंत्री मंत्री मदन कौशिक के समर्थक मौजूद थे। देखते ही देखते दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। आरोप है कि आश्रम से सतपाल महाराज के समर्थक डंडे लेकर आए और उन्होंने मेयर के साथ ही नगर निगम कर्मचारियों और कौशिक समर्थकों पर हमला बोल दिया। इससे मेयर को चोट आई है। उन्हें किसी तरह बचाकर अस्पताल पहुंचाया गया।
इस दौरान कौशिक के समर्थकों ने जेसीबी चला कर अतिक्रमण तुड़वा दिया। इससे गुस्साए महाराज समर्थकों ने पथराव किया तो जवाब में दोनों ओर से पत्थर बाजी हुई। इसमें दोनों पक्ष से करीब आधा दर्जन लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस दौरान पुलिस को लाठियां फटकारकर किसी तरह स्थित नियंत्रित करनी पड़ी। मंत्री मदन कौशिक के समर्थक महाराज के समर्थकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर वहां प्रदर्शन करने लगे। प्रशासन और पुलिस की टीम दोनों पक्षों को समझाने में जुटी रही। उधर, नगर निगम ने सतपाल महाराज के आश्रम के गेट पर बाहर कूड़ा डाल दिया है।

गाली गलौच, अभद्रता और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोपी है बेनाम

जिला आबकारी अधिकारी पौड़ी के साथ गाली-गलौच, अभद्रता करने और सरकारी काम में दखल देने के आरोपी पौड़ी पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम सहित इसी मामले के दो अन्य आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पौड़ी की अदालत ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। आरोपियों ने बुधवार को कोर्ट में सरेंडर किया था। आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई गुरुवार को होगी।
जिला आबकारी अधिकारी ने पौड़ी कोतवाली में इस मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। आरोप है कि 24 अप्रैल को पौड़ी डीएम कार्यालय में वार्ता के दौरान पालिकाध्यक्ष पौड़ी यशपाल बेनाम, बिंजाल संस्था की अध्यक्ष सरिता नेगी और अशोक बिष्ट ने जिला आबकारी अधिकारी पौड़ी प्रभा शंकर मिश्रा के साथ अभद्रता और गाली-गलौच की थी। आबकारी अधिकारी ने इस मामले में पुलिस को तहरीर दी थी। जिस पर कोतवाली पौड़ी ने 27 अप्रैल को मुकदमा दर्ज किया। सहायक अभियोजन अधिकारी श्रद्धा रावत ने बताया है कि चार्ज शीट दाखिल होने के बाद कोर्ट ने समन जारी किए थे। बुधवार को आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर किया। साथ ही जमानत अर्जी लगाई। कोर्ट ने आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है और जमानत अर्जी पर सुनवाई की तिथि गुरुवार को नियत की।

टोल दिए बिना ही अखिलेश ने काफिले को कराया पार!

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव बुधवार को उस वक्त विवादों में घिर गए जब बाराबंकी के एक टोल प्लाजा मैनेजर ने आरोप लगाया कि अखिलेश के काफिले की लगभग 175 गाड़ियां टोल का भुगतान किए बिना ही निकल गईं।
टोल प्लाजा के मैनेजर ने एक विडियो मीडिया के सामने जारी किया। इस विडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से समाजवादी पार्टी के बैनर और झंडे वाली गाड़ियों का काफिला टोल प्लाजा पर रुके बिना ही तेजी से निकलता है। इस काफिले में लग्जरी गाड़ियों के अलावा बाइकें भी शामिल थीं।
सबसे पहले इस विडियो में लाल रंग का समाजवादी पार्टी के बैनर-झंडे से सजा एक रथ निकलता है और उसके पीछे गाड़ियों का काफिला। हालांकि, विडियो में अखिलेश यादव कहीं दिख नहीं रहे हैं लेकिन दावा किया जा रहा है कि इस काफिले की ही किसी गाड़ी में अखिलेश बैठे थे। यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश के काफिले पर टोल नहीं देने का आरोप लगा है, इससे पहले भी नवंबर में विकास यात्रा के दौरान उनके काफिले की गाड़ियों पर टोल न चुकाने के आरोप लगे थे।