सीएम धामी ने युवाओं से किया वायदा करा पूरा, अग्निवीर आरक्षण नियमावली जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक और वायदे को पूरा करते हुए, सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों को विभिन्न विभागों की वर्दीधारी सेवाओं में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान कर दिया है। इस संबंध में सोमवार को कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की ओर से विधिवत तौर पर उत्तराखंड राज्याधीन सेवाओं में समूह ग के सीधी भर्ती के वर्दीधारी पदों पर सेवायोजन हेतु सेवामुक्त अग्निवीरों को क्षैतिज आरक्षण नियमावली-2025 जारी कर दी है।

सैन्य बहुल प्रदेश होने के कारण उत्तराखंड सरकार के इस निर्णय को मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। इसी नियमावली के जरिए अब सेवामुक्त हुए अग्निवीरों को विभिन्न विभागों के वर्दीधारी पदों पर 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाएगा। इसमें पुलिस आरक्षी (नागरिक/पीएसी), उप निरीक्षक, प्लाटून कमांडर पीएसी, अग्निशामक, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, बंदी रक्षक, उप कारापाल, वन आरक्षी, वन दरोगा, आबकारी सिपाही, प्रवर्तन सिपाही और सचिवालय रक्षक जैसे महत्वपूर्ण वर्दीधारी पद शामिल हैं।

“देश की सेवा कर लौटे पूर्व अग्निवीर प्रदेश का गौरव हैं। उन्हें सम्मान और रोजगार का अवसर देना हमारी जिम्मेदारी है। यह निर्णय सेवामुक्त हुए अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। हमारी सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को हर तरह से सेवायोजन का प्रयास कर रही है”।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

जर्मनी में उत्तराखंड के युवाओं को मिलेगा स्टार्टअप क्षेत्रों में मौका, हुआ एमओयू

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखण्ड सरकार और जर्मन स्थित इनोवेशन हब राइन-माइन, के मध्य लेटर ऑफ इन्टेन्ट (एल.ओ.आई) पर हस्ताक्षर किये गये। इसका उद्देश्य उत्तराखण्ड को कुशल युवाओं को जर्मनी में स्वास्थ्य, ऑटोमोबाइल, व्यावसायिक प्रशिक्षण, हाइड्रोजन एवं नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, नवाचार आधारित स्टार्टप जैसे क्षेत्रों से जोड़ना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड के युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में यह एक अच्छी पहल है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। राज्य सरकार द्वारा युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभिन्न देशों की मांग के आधार पर भी राज्य के युवाओं को कौशल विकास से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं के कौशल विकास के साथ ही विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण की व्यवस्था भी राज्य सरकार द्वारा कराई गई है। युवाओं को रोजगार से जोड़ने की सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। कौशल विकास और विदेशी भाषा का प्रशिक्षण दिये जाने के बाद राज्य के कई युवा विदेशों में नौकरी कर रहे हैं।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, विनय शंकर पाण्डेय, सी. रविशंकर, जर्मन प्रतिनिधिमंडल में राउनहाइम शहर के मेयर डेविड रेंडल,जर्मनी के विदेशी निवेश प्रकोष्ठ के सलाहकार सौरभ भगत तथा इनोवेशन हब राइन-माइन के सीईओ स्टीफन विट्टेकिंड मौजूद थे।

राज्य में “एआई मिशन“ प्रारंभ होगा, जो “एक्सीलेंस सेंटर“ के रूप में विकसित होगाः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं का शुभारंभ किया। इनमें डिजिटल उत्तराखण्ड एप का उद्घाटन, सुरक्षित, स्केलेबल और सुगम्य प्लेटफॉर्म आधारित 66 वेबसाइटों का उद्घाटन, नगरीय क्षेत्र में कूड़ा उठाने वाले वाहनों की रियल टाइम ट्रैकिंग के लिए विकसित की गई जीआईएस आधारित वेब एप का उद्घाटन, जन सुविधा के लिए संचालित 1905 सीएम हेल्पलाइन में एआई के अनुप्रयोग नवाचार का शुभारंभ और अतिक्रमण की निगरानी के लिए वेब आधारित एप्लीकेशन का शुभारंभ शामिल हैं।

मुख्यमंत्री घोषणाएं-
1-भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए राज्य में नेक्स्ट-जनरेशन डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिसके अंतर्गत डिजास्टर रिकवरी के लिए भी एक अलग से मैकेनिज्म बनाया जाएगा।

2-राज्य में शीघ्र ही भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए “एआई मिशन“ प्रारंभ किया जाएगा, जिसे “एक्सीलेंस सेंटर“ के रूप में विकसित किया जाएगा।

3-गुड गवर्नेंस की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए राज्य में नेक्स्ट-जनरेशन रिमोट सेंसिंग एवं ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर का विकास किया जाएगा।

4-राज्य में एक विशिष्ट आईटी कैडर स्थापित करने के लिए सरकार प्रयास करेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड सुंदर पहाड़ी राज्य होने के साथ ही तकनीकी रूप से दक्ष राज्य के रूप में आगे बढ़े, इसके लिए राज्य सरकार “हिल से हाइटेक“ के मंत्र पर कार्य कर रही है। आज प्रदेश में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी 5 महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की गई है। ये सभी नवाचार शासन व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने के साथ ही विभिन्न सेवाओं में गति एवं पारदर्शिता भी लाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया अभियान के माध्यम से प्रौद्योगिकी और नवाचार का विस्तार हुआ है। उनके ’डिजिटल इंडिया’ के सपने को साकार करने के लिए राज्य सरकार भी निरंतर प्रयास कर रही है। “डिजिटल उत्तराखण्ड“ एप के माध्यम से लोग घर बैठे ही अनेक सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। अब लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह एप प्रधानमंत्री के ’मिनिमम गवर्नमेंट-मैक्सिमम गवर्नेंस’ के मंत्र को साकार करने में सहायक होगा। इससे सरकारी सेवाओं को एकीकृत, सरल और सुलभ बनाने में सहायता मिलेगी और विभिन्न गतिविधियों की मॉनिटरिंग भी आसानी से होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्लेटफॉर्म पर आधारित 66 नई सरकारी वेबसाइटें विभागीय जानकारी को सुरक्षित, त्वरित और पारदर्शी तरीके से जनता तक पहुंचाएंगी। जीआईएस आधारित वेब ऐप शहरी क्षेत्रों में कूड़ा उठाने वाले वाहनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगा। अतिक्रमण की रोकथाम के लिए एक वेब-आधारित ऐप के माध्यम से कोई भी नागरिक अतिक्रमण की तस्वीर या वीडियो अपलोड कर सकेगा, जिस पर संबंधित विभाग तुरंत जांच कर कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि 1905 सीएम हेल्पलाइन राज्य के नागरिकों और सरकार के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस सेवा में भी एआई आधारित सुविधाओं से शिकायतों का ऑटो-केटेगराइजेशन, त्वरित समाधान और फॉलो-अप मॉनिटरिंग और भी बेहतर तरीके से होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में ऑनलाइन शिक्षा, ई-स्वास्थ्य सेवा और भूलेख डिजिटलीकरण जैसे कार्यों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल और सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से लोगों को घर बैठे ही अनेक सरकारी सेवाओं का लाभ प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लासरूम और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म का भी विस्तार किया जा रहा है। दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को टेलीमेडिसिन और ई-संजीवनी सेवाओं के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह घर बैठे उपलब्ध कराने का भी कार्य किया जा रहा है। “अपणी सरकार“ पोर्टल द्वारा 886 सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध करवाया जा रहा है। राज्य के लगभग 95 प्रतिशत गांवों में दूरसंचार कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है।

इस अवसर पर विधायक खजानदास, प्रमुख सचिव एल. फैनई, सचिव नितेश झा, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, नीरज खेरवाल, डॉ. वी. षणमुगम, श्रीधर बाबू अदांकी, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, निदेशक आईटी गौरव कुमार (वर्चुअल माध्यम), नगर आयुक्त देहरादून नमामि बंसल, संबंधित विभागों के अपर सचिव एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

अंतर्राष्ट्रीय टाइगर दिवसः सीएम धामी ने की घोषणा, टाइगर फोर्स में होगी अग्निवीरों की तैनाती

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंतर्राष्ट्रीय टाइगर दिवस के अवसर पर घोषणा की है कि कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में स्थापित की जा रही टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स में उत्तराखंड के अग्निवीरों को सीधी तैनाती दी जाएगी। टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स में 80 से अधिक युवाओं की भर्ती होगी। इस बल का प्राथमिक उद्देश्य बाघों और उनके आवास की सुरक्षा को मजबूत करना है। इससे न केवल बाघ संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिलेगी बल्कि अग्निवीर योजना के तहत प्रशिक्षित युवाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का उद्देश्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस फोर्स की स्थापना से वृहद बाघ संरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी तथा अवैध शिकार पर रोक लगेगी टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का मुख्य काम बाघों के अवैध शिकार को रोकना होगा। प्रशिक्षित जवान वन क्षेत्रों में गश्त करेंगे, खुफिया जानकारी इकट्ठा करेंगे और शिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। इससे वन्यजीव अपराधों पर नियंत्रण के साथ ही यह फोर्स वन और वन्यजीव से संबंधित अन्य अपराधों जैसे लकड़ी की तस्करी, अवैध खनन और अतिक्रमण पर भी नियंत्रण रखेगी।

मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन में भी सहयोगी बनेगी यह फोर्स

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाघों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। यह फोर्स वनों की कटाई और उनके आवास को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोकने में मदद करेगी तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष का प्रबंधन में भी सहयोगी बनेगी, उन्होंने कहा कि कई बार बाघ आबादी वाले क्षेत्रों में आ जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष होता है। यह फोर्स ऐसी स्थितियों को संभालने और नियंत्रित करने में प्रशिक्षित होगी, ताकि दोनों पक्षों को नुकसान न हो। इस फोर्स को आधुनिक निगरानी तकनीकों, जैसे ड्रोन, थर्मल इमेजिंग और जीपीएस ट्रैकिंग से लैस किया जा सकता है, जिससे उनकी दक्षता बढ़ेगी।

बाघ संरक्षण में भारतीय सेना (अग्निवीरों) की भागीदारी

उत्तराखंड के अग्निवीरों की सीधी तैनाती बाघ संरक्षण में भारतीय सेना (या सेना से प्रशिक्षित कर्मियों) की भागीदारी का एक अनूठा उदाहरण है। अग्निवीर भारतीय सेना द्वारा कठोर अनुशासन और प्रशिक्षण से गुजर चुके होते हैं। यह प्रशिक्षण उन्हें शारीरिक रूप से फिट, मानसिक रूप से मजबूत और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करता है। यह गुण उन्हें वन गश्त और वन्यजीव अपराधों से निपटने में अत्यधिक प्रभावी बनाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना के जवान रणनीतिक योजना और त्वरित निर्णय लेने में निपुण होते हैं। अग्निवीरों को अक्सर आधुनिक हथियारों और संचार प्रणालियों के उपयोग का ज्ञान होता है, जो उन्हें वन्यजीव संरक्षण के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग करने में सक्षम बनाएगा। अग्निवीर राष्ट्र सेवा की भावना से ओत-प्रोत होते हैं। वन्यजीव संरक्षण भी एक प्रकार की राष्ट्र सेवा है, और यह भावना उन्हें अपने कर्तव्य के प्रति अधिक समर्पित बनाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने से उन्हें क्षेत्र के भूगोल, मौसम और स्थानीय चुनौतियों की बेहतर समझ होगी, जिससे उनका काम और प्रभावी होगा।

यह पहल वृहद बाघ संरक्षण के प्रयासों को देगी मजबूती

मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व, जो भारत में बाघों के सबसे महत्वपूर्ण आवासों में से एक है, को अब एक अत्यधिक प्रशिक्षित और समर्पित बल की सुरक्षा मिलेगी। इससे अवैध शिकार की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। अग्निवीरों की भर्ती से स्थानीय समुदाय भी संरक्षण प्रयासों में शामिल होगा, जिससे एक सकारात्मक माहौल बनेगा। उन्होंने कहा कि यदि यह मॉडल सफल होता है, तो इसे देश के अन्य बाघ अभयारण्यों और संरक्षित क्षेत्रों में भी दोहराया जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर बाघ संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह घोषणा बाघ संरक्षण के प्रति एक मजबूत प्रतिबद्धता दर्शाती है यह कदम कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व और उत्तराखंड में बाघों के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

सचिवालय में कौशल विकास और श्रम विभाग की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में कौशल विकास और श्रम विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में युवाओं को कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने के लिए सभी संबंधित विभागीय सचिव समन्वय बनाकर कार्य करें। उन्होंने मुख्य सचिव को सचिवों के साथ बैठक कर इसके लिए ठोस रणनीति बनाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कौशल विकास को इन्क्यूबेशन और ग्रोथ सेंटरों से जोड़ने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद में स्थानीय लोगों को प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, कारपेंटर, मिस्त्री जैसे कार्यों के लिए बेहतर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। उद्योगों की मांग और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण कोर्स तैयार किए जाएं। प्रशिक्षण केंद्रों में अत्याधुनिक मशीनें, प्रयोगशालाएं (लैब्स) और स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना की जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जनपद की पारंपरिक पहचान को ध्यान में रखते हुए लोगों को कौशल विकास और प्रशिक्षण से जोड़ा जाए। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण बढ़ाने के साथ ही सभी कुशल श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि बाल श्रम मुक्ति के लिए लक्षित पुनर्वास से संबंधित कार्रवाई हेतु शीघ्र योजना बनायी जाए। राज्य के बड़े जनपदों में बाल श्रम मुक्ति के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि स्वरोजगार के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिये विशेष कौशल विकास केंद्रों की स्थापना की जाए तथा प्रदेश के दूरदराज इलाकों में स्किल ऑन व्हील्स वैन की शुरूआत की जाए। मुख्यमंत्री ने हेल्थकेयर और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में राज्य के युवाओं को विदेश में रोजगार से जोड़ने के लिए संबंधित देशों में स्थित भारत के दूतावासों से संपर्क किये जाने पर बल देते हुये ऐसे युवाओं को विदेशी भाषाओं के कोर्स कराने हेतु दून विश्वविद्यालय से नियमित समन्वय स्थापित किये जाने के भी निर्देश दिए। जनपदों में बनाए जा रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित किये जाने की भी बात मुख्यमंत्री ने कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक वर्ष कितने युवाओं को कौशल विकास और रोजगार से जोड़ा गया इसके विवरण के साथ दीर्घकालिक योजना के बारे में कौशल विकास विभाग 10 दिनों के भीतर स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत करे।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 27 आईटीआई में प्रशिक्षण ले रहे अभ्यर्थियों को दो वर्षीय कोर्स के अंतर्गत एक वर्ष का प्रशिक्षण आईटीआई में तथा एक वर्ष का प्रशिक्षण उद्योगों में प्रदान करने हेतु भारत सरकार से सहमति प्राप्त हो गई है। पाँच अन्य आईटीआई के लिए शीघ्र ही सहमति प्राप्त किये जाने की प्रक्रिया गतिमान है।

बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव श्रीधर बाबू अदांकी, सी. रविशंकर एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंडः परियोजना के तहत 5.60 लाख चिन्हित परिवारों की आजीविका संवर्द्धन का लक्ष्य

ग्रामोत्थान परियोजना (ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना) प्रदेश के 10 हजार निर्धनतम परिवारों की आजीविका को सहारा देने में कारगर साबित हुई है। परियोजना के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत कुल 5.60 लाख जरूरतमंद परिवारों की आजीविका में वृद्धि करने का लक्ष्य रखा गया है।

ग्राम्य विकास विभाग, अंतराष्ट्रीय कृषि विकास निधि की वित्तीय सहायता से इस परियोजना का संचालन कर रहा है। वर्ष 2023 से लागू यह योजना अब प्रदेश के सभी 13 जनपदो के 95 विकासखडों में लागू की जा चुकी है। परियोजना का लक्ष्य कृषि आधारित गतिविधियों में सक्रिय किसानों, उत्पादक समूहों, आजीविका संघों को बैंको के माध्यम से वित्तीय सहयोग प्रदान करते हुए ग्रामीण उद्यमशीलता को बढ़ावा देते हुए, जरूरतमंद परिवारों की आय को दोगुना करना है। इस परियोजना की कुल लागत 2789.27 करोड़ है। जिसमें अल्पआय वाले, 5.60 लाख परिवारों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 3.24 लाख से अधिक परिवारों को योजना से जोड़ दिया गया है। परियोजना के तहत अति गरीब 10 हजार परिवारों को विशेष पैकेज के जरिए आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, अच्छी बात यह है कि शुरुआती दो साल में योजना के तहत लक्ष्य से अधिक 10732 परिवारों को इसका लाभ मिल चुका है।

परियोजना के तहत दुग्ध उत्पदान, बकरी पालन, मुर्गीपालन, रिटेल रिपेयर शॉप आदि गतिविधियों के जरिए, कुल 7341 परिवारों की वार्षिक आय, में डेढ़ लाख रुपए से अधिक तक की वृद्धि हुई है। साथ ही इस परियोजना की विभिन्न गतिविधियों में शामिल 3751 महिलाओं की सालाना आय एक लाख से अधिक पहुंचा जा चुकी है।

सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध हों, इसके लिए ग्रामोत्थान परियोजना संचालित की जा रही है। इसका लक्ष्य सीमित आय वाले परिवारों को उनके कौशल और आस पास मौजूद संसाधनों से जोड़ते हुए, आजीविका के अवसर प्रदान करना है। योजना निर्धनतम परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

सरकारी नौकरी मात्र नौकरी नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्वः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास के मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में 112 नवचयनित परिवहन आरक्षियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा मार्ग पर सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 2 प्रचार वाहनों को भी रवाना किया।

नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले नव चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह सफलता न केवल चयनित युवाओं के परिश्रम, अनुशासन और संकल्प का परिणाम है, बल्कि इसमें उनके परिवारजनों के सहयोग, त्याग और आशीर्वाद की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि परिवहन विभाग में परिवहन आरक्षी का पद अत्यंत महत्वपूर्ण है, चाहे यात्री सेवाओं का सुचारू संचालन हो, सड़क सुरक्षा की निगरानी हो, वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया हो या प्रदूषण नियंत्रण हो, प्रत्येक व्यवस्था में इनकी अहम भूमिका हैं। इसलिए आपकी यह नौकरी मात्र एक सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि एक सामाजिक उत्तरदायित्व भी है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नवनियुक्त परिवहन आरक्षियों से अपेक्षा करता हूँ कि आप न केवल अपने कार्यस्थल पर कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन बनाए रखेंगे, बल्कि आमजन के साथ संवाद और सहयोग की भावना से भी कार्य करेंगे। प्रयास होना चाहिए कि आमजन का कार्य ऑटो मोड पर हो उन्हें अनावश्यक न भटकना पड़े। सरकार भ्रष्टाचार की कार्य संस्कृति को जड़ से समाप्त करने के लिए संकल्पबद्ध है। टोल फ्री नम्बर 1064 पर भ्रष्टाचार की शिकायतों की प्रभावी सुनवाई हो रही है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि परिवहन विभाग प्रदेश में सुगम और सुरक्षित सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन हम सभी जानते हैं कि जैसे जैसे राज्य में वाहनों की संख्या में वृद्धि हुई है, सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में भी चिंताजनक बढ़ोत्तरी हुई है। इसलिए राज्य में दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए हमने फरवरी 2025 में ’’नई उत्तराखण्ड सड़क सुरक्षा नीति 2025’’ लागू की है। इस नीति के अन्तर्गत सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां निर्धारित करते हुए वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ हमारे इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग करेंगे।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के योग्य, परिश्रमी और प्रतिभावान युवाओं को उनकी काबिलियत के आधार पर पारदर्शी तरीके से समान अवसर प्राप्त हों। पारदर्शी तरीके से होने वाली भर्ती और पदोन्नति युवाओं में भरोसा जगाती है। यह पारदर्शिता बेहतर तरीके से उन्हें प्रतियोगिता में उतरने के लिए प्रेरित करती है, हमारी सरकार इसी दिशा में निरंतर काम कर रही है। पूर्व की सरकारों की और से भर्ती प्रक्रियाओं पर लगाये गए कलंक को मिटाने के लिए ही हमने राज्य में देश का सबसे कठोर ’’नकल विरोधी कानून’’ लागू किया है। इस कानून के लागू होने के पश्चात प्रदेश में सभी परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से सकुशल संपन्न हो रही हैं, इसी का नतीजा है कि हम पिछले 3 वर्षों में 23 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देने में सफल रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पूर्व की सरकारों में नौकरी में भाई भतीजावाद के साथ ही भ्रष्टाचार भी अपने चरम पर था। हम प्रदेश में भ्रष्टाचार रूपी इस दीमक को जड़ से समाप्त करने के लिए ’‘ज़ीरो टॉलरेंस’’ की नीति के तहत कार्य कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले तीन वर्षों में हमने भ्रष्टाचार में लिप्त करीब 200 से अधिक लोगों को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया है और हमारा ये अभियान लगातार जारी है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्य सभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सचिव बृजेश कुमार संत, अपर सचिव रीना जोशी सहित परिवहन विभाग के अधिकारी एवं सभी नवचयनित अभ्यर्थी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने विभिन्न पदों पर नियुक्त 139 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए

उच्च शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत विभिन्न पदों पर नियुक्त 139 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नियुक्ति पत्र वितरित किए। मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के राज्य सरकार के विकल्प रहित संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता एवं ईमानदारी से जुटने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में अब नौकरियां सिर्फ और सिर्फ योग्यता, प्रतिभा व क्षमता के आधार पर मिल रही है। प्रतियोगिता परीक्षाओं को निष्पक्षता व ईमानदारी से संपन्न कराया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि साढ़े तीन वर्षों के दौरान राज्य में विभिन्न सेवाओं में नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या अब तेईस हजार के आंकड़े को पार करने वाली है।

मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत असिस्टेंट प्रोफेसर के 52 पदों पर लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों के साथ ही चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत मेडिकल कॉलेजों के 18 प्रोफेसर्स व 36 एसोसिएट प्रोफेसर और नर्सिंग कॉलेजों में ट्यूटर व मेडिकल सोशल वर्कर के 33 पदों पर चिकित्सा सेवा चयन आयोग के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं को निष्पक्षता व ईमानदारी के साथ संपन्न कराने के लिए कड़े प्राविधान किए हैं। पेपर लीक की समस्या को जड़ से समाप्त करने का काम किया गया है। जिसके चलते युवाओं को उनकी योग्यता व प्रतिभा का पूरा सम्मान मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों की प्रतिभा व परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस सफलता में उनके अभिभावकों व गुरुजनों के योगदान व मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि अध्यापन अधिक जिम्मेदारी का कार्य है, जिसके माध्यम से हम युवाओं का मार्गदर्शन कर उनका भविष्य ही नहीं गढ़ते हैं बल्कि समाज के निर्माण में भी योगदान करते हैं। नवनियुक्त अभ्यर्थियों को इस चुनौतीपूर्ण दायित्व को पूरी ईमानदारी व समर्पण से निभाने के लिए प्रतिबद्धता से जुटना होगा। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी नौकरी ही नहीं बल्कि मानवता की सेवा करने का महान अवसर है। लिहाजा आपके कार्य व्यवहार में हमेशा सेवा की भावना परिलक्षित हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को सशक्त बनाने के लिए ऐतिहासिक काम हो रहे हैं। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत करने, नए अस्पतालों का निर्माण व आधुनिकीकरण करने के साथ ही हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने और चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था के सुदृढीकरण के लिए भी ठोस कार्य हो रहे हैं। देश में सबसे पहले उत्तराखंड में नई शिक्षा नीति को लागू करने का ऐतिहासिक काम किया गया है। प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में आधारभूत सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है और गुणवत्तापरक शिक्षा व्यवस्था के लिए सभी आवश्यक उपाय सुनिश्चित किये जा रहे हैं। प्राध्यापकों के खाली पदों को तेजी से भरा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्राध्यापकों को छात्रों को अच्छी शिक्षा देने के साथ ही उनमें समाज व देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं को उद्यमिता एवं स्टार्टअप के लिए तैयार किया जाय। उत्तराखंड में प्रतिभा और कौशल से परिपूर्ण नवाचार करने वाले युवाओं की भरमार है। उन्हें प्रोत्साहित करने हेतु सरकार अनेक कदम उठा रही है। देवभूमि उद्यमिता योजना के जरिए युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। मेधावी छात्रों को प्रतिमाह छात्रवृत्ति एवं शोध को बढावा देने के लिए रू. 18 लाख तक का शोध अनुदान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य को हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सभी लोगों को सामूहिक रूप से जुटे रहने का आह्वान किया।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में उच्च शिक्षा विभाग में फैकल्टी के सभी पदों को भर लिया गया है। ऐसा करने वाला उत्तराखंड देश का अग्रणी राज्य हो गया है। इसी तरह मेडिकल कॉलेजों में नियमित फैकल्टी भरने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेजों में 70 प्रतिशत पद भरे जा चुके हैं और आगामी तीन माह में फैकल्टी के 85 प्रतिशत से अधिक पद भरे जाएंगे। शीघ्र ही मेडिकल कॉलेजों के लिए 400 एसोसिएट प्रोफेसर्स की नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी।

कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास एवं सविता कपूर, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन एवं डॉ. जयपाल सिंह, सचिव उच्च शिक्षा डॉ. रंजीत सिन्हा, सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर. राजेश कुमार भी उपस्थित रहे।

सीएम ने दिया उच्च शिक्षा विभाग में छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने पर विशेष जोर

उच्च शिक्षा विभाग में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। व्यावसायिक, उद्यमिता एवं रोजगार परक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। उच्च शिक्षा से डिग्री प्राप्त करने के बाद युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए उनके कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। विदेशों में मानव संसाधन की आवश्यकता के अनुसार युवाओं को विदेशी भाषा के साथ ही कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाए। विदेशों में रोजगार के लिए राज्य से दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए विदेशी दूतावासों से सम्पर्क कर विभिन्न देशों की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। ये निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता परक और रोजगारपरक शिक्षा के लिए प्राध्यापकों को भी आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण दिया जाए। शिक्षण गतिविधियों को रुचिकर बनाने के लिए शिक्षण सहायक सामग्री की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की लाइब्रेरी में पुस्तकों की पर्याप्त उपलब्धता के साथ ही प्रयोगशालाओं में आवश्यक उपकरणों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ने वाले मेधावी छात्रों के लिए राज्य सरकार की भारत दर्शन योजना के तहत देश के प्रमुख संस्थानों में भ्रमण कराया जाए। राज्य के अधिकतम विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को नैक ग्रेडिंग सिस्टम में लाने के प्रयास किये जाएं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार राज्य में उच्च शिक्षा उन्नयन की दिशा में तेजी से कार्य किये जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा में बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए पाठ्यक्रम को नवाचार से जोड़ा जाए। इसके लिए शिक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले प्रतिष्ठित संस्थानों से भी सहयोग लिया जाए। बच्चों को प्रतियोगी परीक्षा और शैक्षणिक पाठ्यक्रम की पुस्तकें आसानी से और निःशुल्क उपलब्ध हो, इसके लिए ई-लाइब्रेरी सिस्टम को मजबूत बनाया जाए। महाविद्यालयों में व्यावसायिक कोर्स भी शुरू कराए जाएं। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर.मीनाक्षी सुंदरम, डॉ. रंजीत सिन्हा उपस्थित थे।

परिवहन विभाग में नियुक्त आठ अभ्यर्थियों को मिला सीएम के हाथों नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में परिवहन विभाग के अन्तर्गत सम्भागीय निरीक्षक (प्राविधिक) पद पर नियुक्त 08 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। उन्होंने सभी अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह आपके जीवन की नई शुरुआत है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नव चयनित अभ्यर्थी अपने कार्यक्षेत्र में नवाचार करेंगे और परिवहन विभाग में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला राज्य है। राज्य में परिवहन के क्षेत्र में बहुत चुनौतियां हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वाहनों की फिटनेस जाँच, मोटर वाहन अधिनियम और नियमों के पालन कराने और सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों में सम्भागीय निरीक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, ऐसे में सड़क सुरक्षा और वाहनों की फिटनेस से संबंधित कार्यों में परिवहन विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
इस अवसर पर सचिव परिवहन बृजेश कुमार संत, अपर सचिव परिवहन एवं प्रबंध निदेशक उत्तराखण्ड परिवहन निगम रीना जोशी एवं परिवहन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।