UKSSSC भर्ती मामले में अब तक 41 आरोपियों की गिरफ्तारी

उत्तराखंड को भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार लगातार काम कर रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित अलग-अलग विभागों में समूह ग भर्ती परीक्षा में गड़बड़ियों की शिकायत मिलते ही कठोर निर्णय लिए। UKSSSC मामले में कुल 18 अभियुक्तों पर चार्जशीट हो चुकी है जबकि गैंगस्टर एक्ट हेतु 21 आरोपियों की जुडिशल रिमांड स्वीकृत हो चुकी है।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले में संलिप्त 41 आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी हो चुकी है वही दूसरी ओर वन दरोगा मामले में 03 सचिवालय रक्षक भर्ती में एक आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है।

एसटीएफ ने प्रमुख कड़ियों को जोड़ते हुए तीन ऐसे अभियुक्तों को भी गिरफ़्तार किया है जो UKSSSC और सचिवालय रक्षक परीक्षा धांधली दोनों में शामिल हैं। इसके अलावा वर्ष 2016 में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी की भर्ती मामले में भी दो आरोपियों को गिरफ़्तार किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार प्रदेश में सुशासन के संकल्प के साथ युवाओं के हित में तत्परता से काम कर रही है। जब तक एक एक दोषी को सजा नहीं मिलती तब तक सरकार चैन से नहीं बैठेगी।

मुख्यमंत्री की सख्ती के कारण पुलिस ने UKSSSC परीक्षा भर्ती मामले में 94.79 लाख कैश बरामद किया है। इसी मामले में दो दर्जन से ज्यादा बैंक अकाउंट फ्रीज किए जा चुके जिसमे करीब तीस लाख की राशि जमा है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर 22 जुलाई को किया गया था मुकदमा दर्ज

इस पूरे मामले में UKSSSC ने 4 व 5 दिसंबर 2021 को स्नातक स्तर की परीक्षा तीन पालियों में आयोजित की थी जिसमें करीब 160000 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी एवं 916 अभ्यर्थी चयनित हुये थे। बेरोजगार संगठनों एवं कई छात्रों ने मुख्यमंत्री से मिलकर इस परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जांच हेतु मांग की थी। मामले की गम्भीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर 22 जुलाई को मुकदमा दर्ज किया गया। जिसमें 41 आरोपियों को गिरफ्तार कर दिया गया है। इसके अलावा सचिवालय रक्षक एवं कनिष्ठ सहायक (ज्यूडिशियरी) परीक्षाओं की जाँच भी STF को सौंपी गई। इसके साथ ही वर्ष 2020 में उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा वन आरक्षी (फॉरेस्ट गार्ड) परीक्षा में ब्लूटूथ के जरिये नकल कराने वाले गिरोह की भी विस्तृत जाँच एसटीएफ को सौंपी गई।

कैबिनेट ने राज्य लोक सेवा आयोग को सौंपी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर एक ओर इस मामले में आयोग के तत्कालीन सचिव को निलम्बित कर दिया गया वहीं दूसरी ओर UKSSSC द्वारा गतिमान 7000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को राज्य लोक सेवा आयोग (UKPSC) को हस्तान्तरित करने के सम्बंध में 9 सितंबर को कैबिनेट से प्रस्ताव पारित कर दिया गया।

इलेक्शन मोड में आयोजित होगी परीक्षा, आयोग ने जारी किया कैलेंडर

मुख्यमंत्री के अपेक्षा अनुसार युवाओं का हित देखते हुए लोक सेवा आयोग ने समूह ग परीक्षाओं का कैलेंडर तैयार कर दिया है। साथ ही परीक्षाओं को इलेक्शन मोड में करवाने के दृष्टिगत फुल प्रूफ प्लान तैयार किया है।

अगले माह अक्तूबर में रिक्तियों का विज्ञापन प्रस्तावित

राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग को सौंपी गई विभिन्न समूह ‘ग’ की परीक्षाओं का आयोजन पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से जल्द से जल्द कराने के लिए उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ० राकेश कुमार द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये हैं। डॉ राकेश कुमार ने बताया कि आयोग को उपलब्ध कराई गई रिक्तियों के सापेक्ष पहले चरण में चयन प्रक्रिया प्रारम्भ करते हुए पुलिस आरक्षी, राजस्व उप निरीक्षक / लेखपाल, वन आरक्षी एवं सहायक लेखाकार / लेखा परीक्षक आदि विभिन्न पदों के लिये विस्तृत रिक्ति विज्ञापन माह अक्टूबर 2022 में साप्ताहिक आधार पर जारी किया जाना प्रस्तावित हैं।

अभ्यर्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए उनको परीक्षाओं की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिले, इसके लिए उक्त पदों हेतु परीक्षा का आयोजन माह दिसम्बर 2022, जनवरी फरवरी तथा मार्च, 2023 में किया जा सकता है। इसकी सूचना, यथासमय प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में अलग से विज्ञप्ति जारी कर दी जाएगी।

परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए अलग अनुभाग का गठन, कार्मिकों की तैनाती

डाॅ राकेश कुमार ने बताया कि समूह ग के इन पदों की चयन प्रक्रिया को जल्द से जल्द सुचारू ढंग से संचालित किये जाने के लिए एक अलग अनुभाग का गठन करते हुए 06 कार्मिकों की तैनाती की गयी है।

आयोग में अभ्यर्थी पृच्छा निवारण प्रकोष्ठ की स्थापना

आयोग में अभ्यर्थी पृच्छा निवारण प्रकोष्ठ (Candidate Grievance Redressal Cell (CGRC) स्थापित कर दिया गया है। अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की जानकारी लेनी हो तो यहाँ से ऑफलाईन अथवा ऑनलाईन जानकारी ली जा सकती है। इसके लिये आयोग में स्थापित टोल फ्री नम्बर 07060002410 या दूरभाष 01334-244143 आयोग की email ID ukpschelpline@gmail.com, Website link psc.uk.gov.in/ commission/suggestions अथवा Twitter Handle @ukpscofficial का उपयोग किया जा सकेगा। विस्तृत विवरण आयोग की वेबसाईट psc.uk.gov.in पर देखा जा सकता है।

शैलेश बगोली से जारी किया शासनादेश, समूह ग की 23 परीक्षाएं उत्तराखंड लोक सेवा आयोग कराएगा

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीधि में शामिल रही 23 परीक्षाएं उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा कराई जायेगी। इस सम्बन्ध आज सचिव कार्मिक एवं सतर्कता शैलेश बगोली की ओर से शासनादेश जारी कर दिया गया है। शासनादेश में बताया गया है कि उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग की परिधि में संशोधन करते हुए समूह ग की 23 परीक्षाओं की जिम्मेदारी उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग को दे दी गई है।

अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक प्रकरण का खुलासा होने के बाद से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से लगातार युवाओं के हित में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की गतिमान परीक्षाओं को मंत्रिमंडल ने उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग से कराने का फैसला लिया था। अब इसी क्रम में उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग की परीधि में बदलाव करते हुए 23 परीक्षाओ का जिम्मा भी उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को दिया गया है। इन परीक्षाओं में राजस्व उपनिरीक्षक/लेखपाल, बंदी रक्षक, पर्यावरण पर्यवेक्षक/प्रयोगशाला सहायक(समस्त विभाग), राज्य सरकार द्वारा स्थापित या नियंत्रित निगम, निकाय संस्थान, मानचित्रकार/सर्वेयर(समस्त विभाग/राज्य सरकार द्वारा स्थापित या नियंत्रित निगम/निकाय/संस्थान, वन आरक्षी, अवर अभियंता, अनवेक्षक कम संगणक, पुलिस आरक्षी-पीएससी/आईआरबी/अग्निशामक, उपनिरीक्षक पुलिस/अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, कृषि/पशुपालन, उद्यान(स्नातक), सहकारिता पर्यवेक्षक, गन्ना पर्यवेक्षक/दुग्ध पर्यवेक्षक, सहायक लेखाकार/लेखा निरीक्षक, कनिष्ठ सहायक, वैयक्तिक सहायक, सहायक लेखाकार, व्यवस्थापक/व्यावस्थाधिकारी, पुलिस रैंकर्स, वाहन चालक, अनुदेशक, मत्स्य निरीक्षक, मुख्य आरक्षी/दूरसंचार पुलिस, स्केलर(वन विभाग) शामिल हैं।

रोजगार के लिए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग व अन्य एजेंसियां पारदर्शी तरीका अपनाएंः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु को निर्देश दिये हैं कि प्रदेश में भविष्य में पारदर्शी एवं सुचिता पूर्ण ढंग से चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाए ताकि योग्य युवाओं का चयन हो सके। उन्होंने इस सम्बन्ध में उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग तथा अन्य चयन एजेंसियों को सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाये जाने के भी निर्देश दिये हैं।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा जिन पदों के रिजल्ट घोषित कर दिये हैं किंतु संस्तुति अभी नहीं भेजी गई है उस संबंध में भी केस टू केस निर्णय लेने हेतु मुख्य सचिव एवं सचिव कार्मिक को निर्देश दिये हैं। ऐसी परीक्षायें जिनमें अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आवेदन आमंत्रित किये जा चुके हैं तथा कोई भी परीक्षा आयोजित नहीं की गई है उनमें लोक सेवा आयोग के स्तर पर नियम संगत कार्यवाही कर चयन प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये हैं कि उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की जो परीक्षायें लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जानी हैं उसके लिये शीघ्र विज्ञापन निर्गत कर चयन प्रक्रिया प्रारम्भ की जाय। मुख्यमंत्री ने परीक्षा परिणाम घोषित पुलिस रैंकर्स भर्ती परीक्षा के संबंध में भी शीघ्र कार्यवाही हेतु सचिव कार्मिक को निर्देश दिये हैं।

यूकेएसएसएससी के अधिकारी सरकार के रडार पर, विजिलेंस जांच के आदेश

सतर्कता विभाग ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पूर्व सचिव संतोष बडोनी, पूर्व परीक्षा नियंत्रक नारायण सिंह डांगी, आयोग के तीन अनुभाग अधिकारियों और आरएमएस कंपनी के मालिक सहित कुल छह के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश जारी किए हैं। विजिलेंस इनके खिलाफ जल्द मुकदमा दर्ज कर सकती है।
आयोग की एक के बाद एक कई परीक्षाओं पर सवाल उठने के बाद, सरकार ने एसटीएफ से इस मामले में आयोग के अधिकारियों की भूमिका पर रिपोर्ट मांगी थी। जिसमें सामने आया कि परीक्षा आयोजित करवाने वाली कंपनी आरएमएस टैक्नोसॉल्यूशन का अनुबंध, अक्तूबर 2019 में ही समाप्त हो गया था। इसके बावजूद कंपनी से ना सिर्फ काम लिया गया बल्कि भुगतान भी किया गया। एसटीएफ ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट की थी। अब शनिवार को इसी रिपोर्ट के आधार पर सीएम से अनुमोदन लेने के बाद सतर्कता विभाग ने आयोग के तत्कालीन सचिव, परीक्षा नियंत्रक सहित छह के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक नारायण सिंह डांगी के साथ ही संतोष बडोनी को भी बतौर परीक्षा नियंत्रक इसके लिए जिम्मेदार माना गया है। डांगी इसी साल जनवरी में रिटायर हो गए थे, इसके बाद परीक्षा नियंत्रक की भूमिका भी बडोनी के पास थी। इसके साथ ही आयोग में गोपन विभाग के अनुभाग अधिकारी बृजलाल बहुगुणा, दीपा जोशी, कैलाश नैनवाल भी जांच के दायरे में आए हैं। कंपनी को किए गए भुगतान की फाइल में इन सभी के हस्ताक्षर हैं। इसके साथ ही आरएमएस टैक्नोसॉल्यूशन के मालिक राजेश चौहान की भी विजिलेंस जांच होगी। इसमें से संतोष बडोनी को आयोग से हटाने के बाद सरकार निलंबित भी कर चुकी है। जबकि पीसीएस अधिकारी डांगी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बहुगुणा और दीपा जोशी की नियुक्ति मूल रूप से दूसरे विभागों में है, दो साल पहले ही उनका कैडर मर्जर किया गया।
भर्ती घपले में गिरफ्तार आरोपियों की कमाई अवैध संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई जल्द हो सकती है। एसटीएफ की टीमें सरगना सैयद सादिक मूसा समेत जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह रावत, लखनऊ की निजी कंपनी के मालिक राजेश चौहान, धामपुर के माफिया केंद्रपाल, रामनगर के चंदन मनराल समेत तमाम आरोपियों की अवैध संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही है।
वन दरोगा भर्ती की ऑनलाइन परीक्षा में नकल माफिया के गठजोड़ का पर्दाफाश करने में एसटीएफ को समय लग रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि एसटीएफ दिल्ली की भर्ती एजेंसी, परीक्षा सेंटरों और निरीक्षकों की सीडीआर का इंतजार कर रही है, जिससे पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
एसटीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के साथ आयोग का अनुबंध अक्तूबर 2019 में समाप्त हो गया था। इसके बावजूद कंपनी से दो दर्जन परीक्षाएं आयोजित करवाई गईं। जिसके लिए 22 करोड़ रुपये का भुगतान अलग-अलग चरणों में किया गया। इन सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक सम्पत्ति की जांच के आदेश दिए गए हैं। नियमानुसार सरकारी कार्मिकों के खिलाफ जांच के लिए कार्मिक विभाग से अनुमति ली जाती है, अब अनुमति मिलने के बाद विजिलेंस मुकदमा दर्ज करते हुए, जांच शुरू करेगी।

नीति के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर लोगों से मांगे गए हैं सुझाव, जानिए सरकार की ये खास पहल

उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन बनाने के लिए नई फिल्म नीति-2022 में सरकार कई प्रोत्साहन व वित्तीय सहायता देने जा रही है। नीति के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। नीति में फिल्मों की शूटिंग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया जाएगा। इसके अलावा राज्य की गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी बोलियों में बनने वाली फिल्मों पर 40 प्रतिशत अनुदान या अधिकतम दो करोड़ का अनुदान दिया जाएगा।

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी नितिन उपाध्याय ने बताया कि उत्तराखंड फिल्म नीति-2022 का ड्राफ्ट लोगों के सुझाव के लिए विभागीय वेबसाइट http://www.uttarainformation.gov.in पर प्रकाशित किया गया।
उक्त प्रस्तावित फिल्म नीति-2022 पर यदि अभी भी कोई व्यक्ति सुझाव देने के इच्छुक हो तो दिनांक 15 सितम्बर, 2022 तक विभागीय Email- ufdc2015@gmail.com पर प्रेषित कर सकते हैं। 15 सितम्बर, 2022 तक प्राप्त सुझावों पर विचार करते हुए फिल्म नीति के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने की कार्यवाही की जायेगी।

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी नितिन उपाध्याय ने बताया राज्य के नैसर्गिक सौंदर्य व लोक संस्कृति को विश्व पटल पर लाने के उद्देश्य से देश-विदेश से फिल्म निर्माताओं व निदेशक को शूटिंग के लिए नई नीति में प्रोत्साहन व वित्तीय लाभ देने का प्रावधान किया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार व पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। नीति में फिल्मों को अनुदान, फिल्म पुरस्कार-सम्मान, उत्तराखंड की बोलियों में बनने वाली फिल्मों एवं कलाकारों को प्रोत्साहन के अलावा शूटिंग की अनुमति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की जा रही है।

सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग, उत्तराखण्ड के अधीन गठित उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद द्वारा ‘‘उत्तराखण्ड फिल्म नीति-2022’’ का ड्राफ्ट तैयार कर लोगों के सुझाव प्राप्त करने हेतु दिनांक 20 जुलाई, 2022 का विभागीय वैबसाईट लिंकः
http:// www.uttarainformation.gov.in/images/download/filmpolicydraft2022.pdf पर अपलोड किया गया था। उक्त के क्रम में फिल्म पॉलिसी को लेकर कतिपय व्यक्तियों एवं संस्थाओं के सुझाव प्राप्त हुए है।

नीति में ये मिलेंगे लाभ
– पर्वतीय क्षेत्रों में सिनेमाघरों व स्टूडियो में उपकरण खरीदने पर 25 प्रतिशत या अधिकतम 25 लाख का अनुदान।
– पर्वतीय क्षेत्रों में मोबाइल थियेटर वाहन खरीदने पर 15 लाख का अनुदान।
– फिल्म प्रशिक्षण संस्थान के लिए 25 प्रतिशत या अधिकतम 50 लाख का अनुदान।
– स्थानीय बोली में बनने वाली फिल्मों की शूटिंग के दौरान किए गए व्यय पर 40 प्रतिशत अनुदान।
– स्थानीय व हिंदी में सर्वोत्तम फिल्म को 10 लाख का पुरस्कार
– शूटिंग के दौरान फिल्म यूनिटों को जीएमवीएन व केएमवीएन के रेस्ट हाउस में ठहरने पर 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी।

पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर युवाओं को रोजगार का भरपूर अवसर देगी सरकार-धामी

उत्तराखंड राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा लगभग 7000 पदों पर गतिमान भर्ती प्रक्रिया राज्य लोक सेवा आयोग को हस्तांतरित करने के सम्बंध में आज कैबिनेट से प्रस्ताव पारित हो गया है। मुख्यमंत्री धामी के निर्देश हैं कि भर्ती परीक्षाओं की शुचिता और गरिमा बनाए रखने के लिए राज्य सरकार हर संभव कदम उठाएगी।

इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने इन भर्तियों को राज्य लोक सेवा आयोग से कराने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने शीघ्र ही भर्ती परीक्षाओं का एक कैलेंडर जारी कर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।

सीएम ने भविष्य की परीक्षाओं का भी एडवांस कैलेंडर जारी करने के निर्देश दिये
मुख्यमंत्री धामी के निर्देश है कि वर्तमान विज्ञापित पदों के साथ-साथ राज्य सरकार के सभी विभाग एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपने यहां सीधी भर्तियों के रिक्त पदों की सूची बनाते हुए आयोग को उपलब्ध कराएं जिससे भविष्य की परीक्षाओं का भी एडवांस कैलेंडर जारी किया जा सके।

वे समस्त परीक्षाएं जिनमें अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा किसी भी चरण की परीक्षा आयोजित कर परिणाम घोषित कर दिया गया है, किन्तु चयन प्रक्रिया पूर्ण नहीं हुई है. उन परीक्षाओं की अवशेष कार्यवाही उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा की जायेगी। वे समस्त परीक्षाएं जिनमें अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आवेदन आमंत्रित किये जा चुके हैं तथा कोई भी परीक्षा आयोजित नहीं की गयी है; उनमें लोक सेवा आयोग की परिधि में जाने के पश्चात् पुनः विज्ञप्ति प्रकाशित किए जाने की दशा में अभ्याथियों को आवेदन शुल्क से मुक्त रखा जाएगा। राज्य सरकार सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और स्वच्छता के लिए प्रतिबद्ध है

शीघ्र से शीघ्र परीक्षाएं कराकर युवाओं को नौकरी देना सरकार की पहली प्राथमिकताः सीएम
युवाओं का मनोबल बनाए रखने के लिए राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से शीघ्र से शीघ्र परीक्षाएं कराकर युवाओं को नौकरी देना सरकार की पहली प्राथमिकता है। युवा बेरोजगारों को स्वस्थ प्रतिस्पर्धी माहौल देने के लिए सरकार कृतसंकल्प है।

अपनों को नौकरी लगाता तो परिवार के ही 20 से 30 बन जाते शिक्षक-पूर्व शिक्षा मंत्री

उत्तराखंड में इन दिनों सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के नेताओं पर भाई भतीजा वाद को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं,सत्ता के रूतबे के दम पर नेताओं ने अपने-अपने करीबीयों को नौकरी पर लगाया। उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से जहां उत्तराखंड सेवा अधीनस्थ चयन आयोग पेपर लीक मामले की जांच चल रही है। जिसमें केई आरोपियों को पकडा जा चुका हैं, तो वहीं दूसरी तरफ विधानसभा में बैकडोर से हुई नियुक्तियों को लेकर पूर्व विधान सभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और प्रेमचंद अग्रवाल की मुश्किले बढ़ी हुई है। क्योंकि विधान सभा में बैकडोर से हुई भर्तियों की जांच चल रही है। इन सब के बीच कई पूर्व मंत्रीयों पर भी मंत्री रहते हुए अपने करीबीयों को नौकरी लगाने के आरोप लग रहे है। पूर्व शिक्षा मंत्री और गदरपुर से विधायक अरविंद पाण्डेय पर भी शिक्षा मंत्री रहते अपने करीबीयों को नौकरी लगाने के आरोप लगे हैं,यहां तक कि शोसल मीडिया पर एक लिष्ट वायरल हो रही थी, जिसमें बिहार के रिश्तेदारों को उत्तराखंड नौकरी लगाने के आरोप अरविंद पाण्डेय पर लगे,लेकिन इन्ही आरोप को लेकर भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे अरविंद पाण्डेय से पत्रकारों ने कई तहर के सवालों की बछौर की तो अरविंद पाण्डेय ने बडी सहजता से उनके उपर लग रहे आरापों के जवाब दिए।

नियमों की अनदेखी से हुई हैं नियुक्ति जो जांच के लिए हूं तैयार
अरविंद पाण्डेय का कहना है कि जो लिस्ट शोसल मीडिया में वायरल की गई है,उसको लेकर यहीं कहना चाहता हूं कि यदि अगर नियुक्ति में अगर कहीं कोई अनदेखी हुई है तो दुनियां की कोई भी सबसे बड़ी जांच मेरे उपर कराई जाएं उसके लिए मैं तैयार हूं। ईश्वर को साक्षी मानकर जांच में पूरा सहयोग करूंगा। और अगर जांच में दोषी पाया जाता हूं कि नियमों की अनदेखी कर मेरे कार्यकाल में नियुक्ति हुई है,तो प्रदेश की जनता जो सजा देना चाहेगी उसे हंसकर भुगतने के लिए तैयार हूं।

अपनों को नौकरी लगाता तो परिवार के ही 20 से 30 बन जाते शिक्षक
इतना की नहीं अरविंद पाण्डेय का कहना है कि उनके परिवार में 20 से 30 लोगों ने बीएड किया हुआ है,अगर मैं कोई शिफारिश करता तो प्रदेश में मंत्री रहते हुए मेरे कार्यकाल में 15000 के लगभग भर्ती हुई है,उसमें परिवार के कई लोग शिक्षक बन जाते। लेकिन पूरी पारदर्शिता और नियमों को देखते हुए भर्ती हुई है। यहां तक कि अशासकीय स्कूलों में भर्ती के लिए 25 नम्बर के इंटरव्यू को 5 नम्बर का किया गया ताकि शिक्षकों की भर्ती में पारदर्शिता आएं और आज अशासकीय स्कूलों में योग्य शिक्षक ही भर्ती हो रहे है। क्योंकि आवेदन करने वाले अभियार्थियों में सबसे पहले टॉप सेवन की मैरिड बनती है,जिन्हे इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। जबकि इंटरव्यू में 5 से 3 नम्बर देना अनिवार्य है। यानी के मेरे रहते अनिमियतताओं के जो आरोपा लगते थे। उन आरोपों को दूर किया गया।

उत्तराखंड आन्दोलन में गया हूँ जेल
अरविंद पांडेय का कहना है कि कुछ लोग उनकी छवि यूपी बिहार से होने की भी बताने की कोशिश करते हैं,लेकिन वह साफ कहना चाहते हैं कि वह उधम सिंह नगर के रहने वाले हैं,और उत्तराखंड आंदोलन के दौरान उन्होंने बढ़-चढ़कर भाग लिया था,यहां तक कि वह कहना चाहते हैं कि जब वह उधम सिंह नगर में उत्तराखंड आंदोलन के दौरान अलग राज्य उत्तराखंड बनाए जाने की मांग को लेकर आंदोलन करते थे, तो उन्हें स्थानीय जनता भी पीटा करती थी और यूपी में रहने के लिए ही उस समय कहती थी। लेकिन उन्होंने उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर मुखरता से उठाया और जेल तक गई लेकिन अब जब उन्हें इस तरह की बातें सुनने को मिलती है तो उन्हें ठीक नहीं लगता है।

यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने की 35वीं गिरफ्तारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह के सख्त निर्देशों के क्रम में यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में स्पेशल टास्क फ़ोर्स उत्तराखण्ड की कार्रवाई लगातार जारी है। इस मामले में आज एसटीएफ ने 35वीं गिरफ़्तारी कर ली है।

इसके साथ ही यूकेएसएसएससी की स्नातक स्तरीय परीक्षा पेपर लीक मामले में पूर्व में गिरफ्तार चार अभियुक्तों की जुडिशल रिमांड की कार्यवाही भी सचिवालय रक्षक परीक्षा लीक मुकदमे में की गई है।

वन दरोगा ऑनलाइन परीक्षा मामले में भी 2 अभियुक्त पहले गिरफ्तार हो चुके हैं

पिछले कुछ दिनों में इस प्रकार अलग-अलग दर्ज तीन मुकदमों में कुल 38 लोग की गिरफ्तारी हो चुकी है।

मुख्यमंत्री उत्तराखंड के सख्त निर्देश के क्रम में कि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए इसलिए पेपर लीक मामले में फरार दो अपराधी क्रमशः सादिक मूसा निवासी अंबेडकरनगर उत्तर प्रदेश पर दो लाख का ईनाम और योगेश्वर राव निवासी गाजीपुर उत्तर प्रदेश पर गिरफ्तारी पर एक लाख का ईनाम पुलिस महानिदेशक द्वारा घोषित किया गया है

उत्तराखंड एसटीएफ द्वारा पेपर लीक मामले में गिरफ़्तार अभियुक्त संदीप शर्मा पुत्र स्वर्गीय राजेश शर्मा निवासी जुल्हान मोहल्ला जसपुर जनपद उधम सिंह नगर अभियुक्त ने अन्य अभियुक्त के साथ मिलकर गाजियाबाद एक फ्लैट में जनपद उधम सिंह नगर एवं जनपद हरिद्वार के कई अभ्यर्थियों को ले जाकर प्रश्न पत्र हल कराया गया था।

गिरफ्तार अभियुक्त के जसपुर और ठाकुरद्वारा में आयुर्वेदिक और पैरा मेडिकल सहित तीन कॉलेज हैं। अभियुक्त से पूछताछ और अन्य जानकारी के आधार पर दो दर्जन के करीब छात्रों को चिन्हित किया गया है। उत्तराखण्ड एसटीएफ द्वारा गवाहों के बयान एवं तकनीकी साक्ष्य के आधार पर अभियुक्त को अरेस्ट किया गया। इस गिरफ्तारी से उत्तर प्रदेश में नकल माफियाओं के धामपुर के बाद गाजियाबाद में हुई नकल के सेंटर का पर्दाफाश करने में सफलता मिली है।

35 हजार करोड़ के एमओयू धरातल पर, 15 हजार करोड़ की परियोजनाओं में उत्पादन शुरु

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित उत्तराखण्ड निवेशक सम्मान समारोह के दौरान निवेशकों को प्रतीक चिन्ह तथा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।

रिफॉर्म-परफॉर्म-ट्रांसफॉर्म के मंत्र के साथ आगे बढ़े
मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों ने उद्योग के क्षेत्र में प्रदेश को नया आयाम दिया है। प्रदेश की आर्थिकी व राजस्व को बढ़ाने में औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का योगदान अमूल्य है। आप सभी हमारे ब्राण्ड अम्बेसडर है। उत्तराखण्ड योग, आध्यात्म एवं आयुष की भूमि है। उत्तराखण्ड औद्योगिक विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उद्योगों के लिए जैसा वातावरण उत्तराखण्ड में है, यह निवेशकों को उत्तराखण्ड की ओर आकर्षित करता है। जनवरी, 2020 से अब तक प्रदेश में 15 हजार करोड़ की परियोजनाओं में उत्पादन प्रारंभ हुआ है। कोरोना जैसी महामारी आने के बावजूद इतना निवेश प्रदेश में आना निश्चित ही बड़ी उपलब्धि है। इन्फ्रास्ट्रक्चर, नीति सुधार व सरलीकरण की दिशा में काफी काम किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश को एक नई पहचान मिल रही है। इन आठ सालों में भारत समृद्ध एवं शक्तिशाली बना है। प्रधानमंत्री का उत्तराखण्ड से विशेष लगाव है जिसका परिणाम आप सभी देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि उद्योगों के लिये अच्छी सड़क, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी का होना जरूरी है, इन क्षेत्रों में राज्य में तेजी से कार्य हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के युवाओं की क्षमता, समर्पण, कड़ी मेहनत और समझ में विश्वास दिखाने के लिए निवेशकों को धन्यवाद दिया और कहा कि जो परियोजनाएं शुरू की गई हैं, वे राज्य में नई संभावनाएं पैदा करेंगी और राज्य के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होंगी। उन्होंने कहा कि हम “रिफॉर्म-परफॉर्म-ट्रांसफॉर्म“ के मंत्र के साथ आगे बढ़े हैं। हमने नीतिगत स्थिरता, समन्वय तथा व्यापार करने में सुगमता पर जोर दिया है। उन्होंने निवेशकों और उद्योगपतियों को यह कहते हुए आश्वस्त किया कि राज्य सरकार नीति, निर्णयों और सकारात्मक उद्देश्य के साथ विकास के काम करती है। हम सब आपके हर प्रयास में आपके साथ रहेंगे और हर कदम पर आपका साथ देंगे।
उद्योग मंत्री चन्दन राम दास ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य की स्थापना जब हुई तो हर किसी की कल्पना थी कि पहाड़ का पानी एवं जवानी पहाड़ के काम आये। यह तभी सम्भव हो सकता था जब उत्तराखण्ड में उद्योगों को तेजी से बढ़ावा मिले। 2018 में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इन्वेस्टर सम्मिट आयोजित किया गया, जिसके सफल परिणाम भी देखे गये। प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना होगा।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य तेजी से निवेश के लिये प्रमुख गंतव्य स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र कम पूंजी निवेश से अधिक उत्पादन एवं रोजगार सृजित कर सकता है। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में राज्य आगे बढ़ रहा है।
सचिव उद्योग डॉ पंकज कुमार पाण्डेय ने अपने संबोधन में निवेशकों को बधाई दी और राज्य में भविष्य में अपने उद्योग के विस्तार के लिए उनका आवाहन किया। उन्होंने कहा कि सरकार नई नीतियों को लागू कर रही है और राष्ट्रीय गति शक्ति योजना बनाने के प्रधान मंत्री जी के दृष्टिकोण की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।

इन्वेस्टर्स समिट के बाद 35 हजार करोड़ के एमओयू धरातल पर क्रियान्वित
राज्य ने 2018 में अपना पहला निवेश शिखर सम्मेलन ’डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड आयोजित किया था, जिसमें कई क्षेत्रों में 600 से अधिक निवेशकों द्वारा रूपये एक लाख चौबीस हजार करोड़ से अधिक के समझौता ज्ञापन/निवेश इच्छा पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए थे। हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों के कार्यान्वयन का नियमित रूप से अनुश्रवण किया गया। इसके परिणामस्वरूप रू. 35 हजार करोड़ से अधिक के एमओयू धरातल पर क्रियान्वित हो गए हैं। यह परियोजनाएं विभिन्न क्षेत्रों की हैं, जिनमें विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और ऊर्जा क्षेत्र सम्मिलित हैं।
राज्य सरकार ने आयोजित सम्मान समारोह में ऐसे निवेशकों को सम्मानित किया जिन्होंने 2020 के बाद अपना उत्पादन कार्य प्रारम्भ किया था। इस आयोजन में 68 निवेशकों को आमंत्रित किया गया था, जिसमें एमएसएमई एवं वृहद स्तर, दोनों क्षेत्रों के निवेशक सम्मिलित थे। आयोजन में निवेशकों ने अपने अनुभव साझा किए और राज्य में व्यापार करने में आसानी की सराहना की। उन्होंने उत्तराखण्ड में निवेश के लिए मैत्रीपूर्ण शान्त वातावरण की भी प्रशंसा की। इस अवसर पर निवेशकों ने कहा कि वे उत्तराखण्ड में और अधिक निवेश के लिए उत्साहित हैं।
इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण, आयुक्त उद्योग रोहित मीणा तथा निदेशक उद्योग एस. सी. नौटियाल, आर.जे. काव्य, प्रमुख उद्यमी एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।