प्रत्येक तीसरी लोकसभा में एक मेडिकल कॉलेज बनाने का लक्ष्यः अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देश को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नंबर वन बनाने के लिए मोदी सरकार लगातार कार्य कर रही है। केंद्र सरकार ने देश के प्रत्येक राज्य में एम्स खोलने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक तीसरी लोकसभा में एक मेडिकल कॉलेज बनाने का लक्ष्य हम वर्ष 2024 तक पूरा करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के द्वितीय दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
अपने संबोधन में उपाधि प्राप्त करने वाले चिकित्सकों एवं उनके परिजनों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश एम्स ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में कम समय में सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत से कदम उठाए हैं, जिनमें अटल आयुष्मान योजना एवं प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के साथ ही देश में एम्स की संख्या को बढ़ाकर 22 करना जैसे कार्य शामिल हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के अनुसार अपनी जगह दूसरे के सुख का विचार करने वाला ही सच्चा ज्ञानी है। देश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। देश के नागरिक स्वस्थ हों, दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें, इसके लिए आप सभी को अपना महत्वपूर्ण योगदान देना होगा। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है, जिससे अब तक लगभग एक करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में एम्स की स्थापना हुई। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज ने इस काम को आगे बढ़ाया। ऋषिकेश में एम्स की स्थापना उन्हीं के कार्यकाल में हुई थी, मुझे खुशी है इस बात की कि तेजी के साथ विकास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यहां से उपाधि लेने वालों सम्मानित करने का मौका मिल रहा है यह भी हमारे लिए गौरव की बात है। कहा कि यहां स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसका लाभ सिर्फ उत्तराखंड कोई नहीं मिल रहा है, बल्कि देश के पश्चिम क्षेत्र को भी इसका लाभ मिल रहा है। आने वाले समय में देश को 22 और एम्स मिलने वाले हैं। अटल बिहारी वाजपेई ने छह एम्स से शुरुआत की थी। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस काम को तेजी के साथ आगे बढ़ाया है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि ऋषिकेश पूरे विश्व में योग की राजधानी है। अध्यात्म के शिखर का यह स्थान है। यहां दीक्षा समारोह का होना गौरव की बात है। उपाधि ग्रहण करने वालों को समाज में जाकर लोगों के जीवन की रक्षा करनी है। देश के विराट व्यक्तित्व गृह मंत्री अमित शाह के हाथों आप सभी को उपाधि मिल रही है, यह बड़े गौरव की बात है।

एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रविकांत ने युवा चिकित्सकों को दुनिया से सीखो और दुनिया को भी सिखाओ की सीख दी। उन्होंने कहा कि युवा चिकित्सकों को सदा स्मरण रखना चाहिए कि चिकित्सा व्यवसाय में रोगियों के लिए हर समय उपलब्ध होना, अपने कार्य में दक्ष होना और मिलनसार होना अनिवार्य है। एक डॉक्टर के कार्य की कुशलता इतनी ही नहीं है कि वह मरीज को कितनी जल्दी ठीक करता है, बल्कि मरीज का ठीक होना बहुत हद तक इस बात पर भी निर्भर करता है कि डॉक्टर का मरीज के साथ कैसा व्यवहार है। उन्होंने युवा चिकित्सकों से कहा कि प्रारंभिक वर्षों में आपका व्यवहार ही आपको आगे बढ़ने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक रोगी से बातचीत आपकी क्षमताओं का परीक्षण और सीखने का अनुभव प्रदान करेगी। उन्होंने युवा चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे वंचित तबके के लोगों पर विशेष ध्यान दें। अपकी डॉक्टरी तभी सभी सफल होगी, जब आपकी उत्कृष्टता का लाभ समाज के निचले तबके तक पहुंचेगा।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, डॉ. हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, राज्य मंत्री धन सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल रतूड़ी, विधायक एवं अध्यक्ष एम्स ऋषिकेश पद्मश्री डॉ. समीरन नंदी भी उपस्थित थे।

दूसरा दीक्षांत समारोह हुआ सम्पन्न
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 13 पीएचडी, पीजी, एमबीबीएस 2013, 2014, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों को डिग्री और मेडल देकर सम्मानित करेंगे। उन्होंने बताया कि कुल 252 विद्यार्थियों को डिग्री दी जानी है। साथ ही 132 विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र भी दिए जाने हैं। एम्स के प्रथम दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिरकत की थी।

सरकार के बजट में रोजगार के लिए नए उद्योगों को प्राथमिकता

त्रिवेन्द्र सरकार ने इस बार जेंडर बजट में करीब 6204 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। यह पिछले बजट से करीब 12 करोड़ रुपये अधिक है। प्रदेश में जेंडर बजट 2007-08 से शुरू किया गया था। वित्त विभाग के अनुसार, जेंडर बजट का मतलब है सामान्य बजट में महिलाओं से संबंधित योजनाओं के लिए अलग से व्यवस्था करना। इस बार जेंडर बजट 6204 करोड़ रुपये का रखा गया है।
पिछले बजट में जेंडर बजट के तहत 6192 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी। इस बार सबसे अधिक इजाफा कल्याणकारी योजनाओं में किया गया है। पिछले बजट में कल्याणकारी योजनाओं के लिए 681 करोड़ रुपये की व्यवस्था की थी। इस बार इसके लिए 912 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। 11 विभाग ऐसे हैं, जिनमें शत प्रतिशत जेंडर बजट की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कई विभाग हैं जिन्होंने महिला संबंधित योजनाओं में 20 प्रतिशत की व्यवस्था की है।

इन विभागों की योजनाओं में शत प्रतिशत व्यवस्था
(करोड़ रुपये में)
पुलिस 06.30
शिक्षा, खेल 20.51
परिवार कल्याण 83.78
कल्याण योजनाएं 912
ग्राम्य विकास 07.60
उद्योग 07.50
परिवहन 03.50
वन 00.33
अनुसूचित जाति 74
अनुसूचित जनजाति 03.90
पशुपालन संबंधित कार्य 33

नए उद्योगों को मिलेगी रफ्तार, सरकार ने उठाया वित्तीय भार
उत्तराखंड में नए उद्योगों को रफ्तार देने के लिए सरकार ने बजट में वित्तीय भार उठाया है। सरकार ने 2020-21 के बजट में औद्योगिक विकास के लिए 382 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 100 करोड़ अधिक है। नए औद्योगिक निवेश के प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के बजट में प्राथमिकता दी है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में उद्योग विभाग को लगभग 276 करोड़ का बजट दिया गया था। इस बार सरकार ने इसे बढ़ा कर 382 करोड़ किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में नए एमएसएमई उद्योग, बुनियादी ढांचे का विकास, नए इंडस्ट्रियल एरिया, हथकरघा एवं हस्तशिल्प, खादी ग्रामोद्योग पर सरकार का फोकस है।
ग्रोथ सेंटरों के लिए सरकार ने बजट में 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। सरकार की योजना न्याय पंचायत स्तर पर ग्रोथ सेंटर स्थापित करने की है। अब तक 83 ग्रोथ सेंटरों के लिए विभिन्न विभागों को पैसा दिया गया है। इसी तरह मेक इन इंडिया के लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।

त्रिवेन्द्र के बजट में राजस्व बढ़ाने का संकल्प दिखा

उत्तराखंड में करीब 53 हजार करोड़ से अधिक का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में विकास की बुनियाद को मजबूत करने और रोजगार को बढ़ाने का इरादा जताया। सरकार का ध्यान कुंभ मेले के आयोजन पर भी गया। 2021 में होने वाले हरिद्वार महाकुंभ को प्रदेश सरकार भव्य और ग्रीन कुंभ परिकल्पना के आधार पर आयोजित करेगी। इस परिकल्पना को पंख देने के लिए सरकार ने बजट में 1205 करोड़ रुपये खर्च करना तय किया है। महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 450 करोड़ के स्थायी और एक हजार रुपये के अस्थायी कार्य किए जाएंगे। सरकार की कोशिश है कि महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु चारधाम की यात्रा भी कर पाए। इसके लिए चारधाम और ऑलवेदर रोड को महाकुंभ से पहले पूरा करने का सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है। कुंभ के लिए सरकार अलग से सुरक्षा व्यवस्था के तहत 60.12 करोड़ रुपये भी खर्च करेगी।

विकासपरक बजट पेश करते हुए बतौर वित्त मंत्री सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक ही मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष को चारो खाने चित कर दिया। मुख्यमंत्री ने बजट पेश करने के तुरंत बाद सदन में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया। इसके साथ ही अब प्रदेश में दो राजधानी होंगी।
बजट में सरकार ने बेहतर रोड कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी है। 2020-21 में सड़कों और पुलों की मरम्मत के लिए 300 करोड़ रुपये रखे हैं। पिछले बजट में कुल 180 करोड़ का प्रावधान था। सीमा के 150 से अधिक जनसंख्या वाले गांवों को सड़कों से जोड़ा जाएगा। मार्च 2020 तक 67 गांवों को ग्रामीण मोटरमार्गों से जोड़ा जाएगा। बुनियादी ढांचे पर जोर देते हुए लोक निर्माण विभाग के लिए 2055 करोड़ का बजट रखा है। सड़क निर्माण में तेजी लाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 1072 करोड़ की व्यवस्था की है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के लिए सरकार ने 70 करोड़ रखे हैं।
सरकार रोजगार के मुद्दे पर भी संभली है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड युवा आयोग के गठन की घोषणा की। सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग और प्रवक्ता संवर्ग में 3063 पदों 2020-21 में तैनाती की जाएगी। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विभाग में 1224 नई भर्ती होंगी। इसके साथ ही नया हुनर सीखने वालों के लिए एक नई योजना मुख्यमंत्री शिक्षुता योजना शुरू करने का एलान बजट में किया गया। प्रदेश में 2022 तक सभी डिग्री कालेजों के पास अपना भवन होगा। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 78 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है। रूसा योजना एवं राज्य योजना के तहत यह बजट प्रस्तावित किया है।

प्रदेश के सात लाख से ज्यादा लोगों को 1165 करोड़ की योजनाओं से पीने का साफ पानी मिल सकेगा। जल जीवन मिशन, अर्द्धनगरीय क्षेत्रों के लिए पेयजल कार्यक्रम और नाबार्ड पोषित योजनाओं के लिए बजट प्रावधान किए गए हैं। रोडवेज बसों में सफर पहले की तुलना में और अधिक सुहाना होगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में 110 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बजट में सरकार की ओर से परिवहन सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ ही परिवहन निगम को वित्तीय संकट से उबारने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सांसद, विधायक, स्कूली छात्राएं, मान्यता प्राप्त पत्रकार, दिव्यांग परिवहन निगम बसों में मुफ्त यात्रा कर सकें, इसके लिए बजट में 24 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में 295 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। सरकार की ओर से बजट जारी होने के साथ ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि एयरपोर्ट का विस्तार किया जा सके। बजट में देहरादून-श्रीनगर-टिहरी, हल्द्वानी-अल्मोड़ा- पिथौरागढ़ध्धारचूला के लिए हेली सेवाएं शुरू करने का प्रावधान किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के प्रोजेक्ट सिक्योर हिमालय के तहत गंगोत्री नेशनल पार्क में देश का पहला ‘स्नो लेपर्ड कंजर्वेशन सेंटर’ का निर्माण किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2020-21 में कैंपा योजना के तहत 215 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बजट वृक्षारोपण व वर्षा जल संरक्षण योजनाओं के लिए होगा। इसके अलावा पर्यावरण निदेशालय के गठन व विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए 12.93 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है।

प्रदेश सरकार की ओर से निराश्रित वृद्धजनों को आरामदायक जीवन देने के लिए वृद्धाश्रम खोले जाएंगे। वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना के तहत सरकार ने अलग से बजट का प्राविधान किया है। इस बजट से प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रम तैयार किए जाएंगे। यहां वृद्ध लोगों के रहने, खाने-पीने व मनोरंजन की समुचित व्यवस्थाएं की जाएंगी। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में हर जरूरतमंद वृद्ध, दिव्यांग, विधवा, किसान, निराश्रित परित्यक्त महिलाओं को पेंशन का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसमें 4 लाख 75 हजार वृद्धजनों, 78 हजार दिव्यांगों, 1 लाख 78 हजार विधवा, 30 हजार किसानों और 5500 निराश्रित परित्यक्त महिलाओं को पेंशन से जोड़ा जाएगा। इसके लिए 1048 करोड़ रुपये की धनराशि बजट में प्रस्तावित की है।प्रदेश सरकार ने बजट में गन्ना किसानों की होली खुशनुमा करने का प्रयास किया है। किसानों को बकाया गन्ना भुगतान के लिए बजट में 240 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। इसके साथ ही सरकारी, सहकारी और निजी चीनी मिलों को विभिन्न तरह के लोन की सुविधा भी दी गई है। ताकि, किसानों को बकाया और वर्तमान भुगतान त्वरित किया जा सके।
प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में स्मार्ट सिटी के लिए 123 करोड़ रुपये का बजट रखा है। जिससे स्मार्ट सिटी के काम होंगे। वहीं अब तक देहरादून स्मार्ट सिटी लि. को लेकर एक हजार करोड़ से अधिक के वर्कआर्डर जारी हो चुके हैं। अब स्मार्ट सिटी का दायरा 10 से बढ़कर 100 वार्डों तक हो गया है।

उत्तराखंड में फल-सब्जी पर नहीं लगेगा मंडी शुल्क

उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र के फार्मूले को अपनाया है। प्रदेश में लागू उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम को खत्म कर इसकी जगह केंद्र का मॉडल एक्ट (कृषि उपज एवं पशुधन विपणन अधिनियम) को लागू किया है। मंत्रिमंडल ने इसकी मंजूरी दे दी है।
केंद्र ने किसानों की आय बढ़ानेे के लिए कृषि उत्पादों का व्यापार खुला करने के लिए मॉडल एक्ट को लागू किया है। अब किसानों को मंडियों में कृषि उत्पाद लाने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। किसान अपने उत्पाद को उचित दामों पर मंडी से बाहर कहीं भी बेच सकेंगे। मंडी समिति की ओर से फल-सब्जी व अन्य कृषि उत्पादों के कारोबार पर शुल्क नहीं लिया जाएगा।
वर्तमान में लागू उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम (एपीएमसी) में यह व्यवस्था है कि मंडी समिति के अधीन आने वाले क्षेत्रों में फल-सब्जी के कारोबार पर एक प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाता है। लाइसेंस के बिना कोई भी आढ़ती कृषि उत्पादों का कारोबार नहीं कर सकता है। मॉडल एक्ट में बिना लाइसेंस के भी आढ़ती किसानों का उत्पाद खरीद सकते हैं।

कांट्रेक्ट फार्मिंग से बंजर होने से बचेगी कृषि भूमि
उत्तराखंड के किसान अब कांट्रेक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) कर सकेंगे। मंत्रिमंडल ने कांट्रेक्ट फार्मिंग एक्ट 2018 को राज्य में लागू करने की मंजूरी दे दी है। इससे कृषि क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार किसानों से खेती के लिए कांट्रेक्ट कर सकते हैं।


कर्नाटक और मैसूर की तर्ज पर राज्य में कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक्ट बनाया है। इस एक्ट के आधार पर प्रदेश में अनुबंध खेती की मंजूरी दे दी है। इस एक्ट के लागू होने से जिन किसानों के काफी कृषि भूमि है और वे बुढ़ापे में खेेतीबाड़ी नहीं कर सकते हैं। ऐसे किसान अपनी कृषि भूमि को कांट्रेक्ट फार्मिंग के लिए कंपनी को लीज पर दे सकते हैं। किसान के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने एक्ट में व्यवस्था की है। जिससे लीज पर दी जाने वाली जमीन को न तो ट्रांसफर किया जाएगा और न ही उस पर कोई कब्जा कर सकता है।

राज्य में तीन लाख हेक्टेयर भूमि बंजर
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब सात लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। जिसमें रबी और खरीफ फसलें उगाई जाती है। लगभग तीन लाख हेक्टेयर कृषि भूमि बंजर हो चुकी है। जंगली जानवरों और बंदरों की समस्या, सिंचाई का अभाव से किसान खेती छोड़ रहे हैं। राज्य गठन के बाद प्रदेश में लगभग 17 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल कम हुआ है।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को दिये निर्देश, उद्योग मित्र की बैठकें आयोजित कर समस्याओं का त्वरित समाधान हो

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उद्यमियों से मेरा सामाजिक दायित्व (माई सोसियल रिस्पांसिबिलिटी) के तहत प्रदेश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य की बेहतरी के लिये सहयोगी बनने की अपेक्षा की है। उन्होंने प्रदेश में उद्योगों को सुविधायुक्त वातावरण प्रदान करने, उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये भी सभी सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये हैं।
सचिवालय में इंडस्टस्ट्रीज एशोसियेशन ऑफ उत्तराखण्ड (आई.ए.यू) के प्रतिनिधियों एवं शासन के उच्चाधिकारियों के साथ एशोसियेशन की समस्याओं एवं सुझावों पर कार्यवाही किये जाने सम्बन्धी बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के अनुकूल नीतियां निर्धारित किये जाने के बावजूद भी उद्यमियों की कोई समस्या हो तो उसका त्वरित समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने आई.ए.यू द्वारा प्रदेश में एम.एस.एम.ई सेक्टर को बढ़ावा देने के साथ ही उद्यमियों की विभिन्न समस्याओं एवं सुझावों पर त्वारित कार्यवाही हेतु अधिकारियों को निर्देश दिये। उन्होंने श्रम, उद्योग एवं सिडकुल, सीडा से सम्बन्धित समस्याओं के निराकरण हेतु नियमित रूप से उद्योग मित्र की बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिये है कि जिलास्तरीय अधिकारी उद्यमियों के साथ अच्छा व्यवहार करें उनकी समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने श्रम, उद्योग एवं सिडकुल आदि, उद्यमिता विकास से जुड़े जिलास्तरीय अधिकारियों के कार्य व्यवहार की जांच करने के भी निर्देश दिये हैं। उन्होंने उद्यमियों से अपेक्षा की कि वे समय समय पर अपनी समस्याओं से विभागीय प्रमुखों को भी अवगत कराये ताकि औद्योगिक विकास मे तेजी आ सके।
मुख्यमंत्री ने उद्यमियों का ऊधम सिंह नगर की भांति मेरा सामाजिक दायित्व के तहत प्रदेश में शिक्षा व स्वास्थ्य की बेहतरी के लिये कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उधमसिंह नगर में इस योजना के तहत 1100 स्कूलों को 528 स्कूलों में संयोजित कर उन्हें उद्यमियों द्वारा गोद लेकर इनमें परिवहन, स्मार्ट क्लास तथा अध्यापकों की संख्या दुगनी करने के साथ ही पढ़ाई का बेहतर वातावरण सृजित किया गया है। इसी प्रकार जनपद के 8 अस्पतालों का उच्चीकरण कर उन्हें हाईटेक बनाया गया है। उन्होंने अन्य जनपदों में भी इस प्रकार के प्रयास करने की उद्यमियों से अपेक्षा की।
मुख्यमंत्री ने एशोसियेशन की मांग पर प्रत्येक जनपद में ईएसआई अस्पताल के लिये भूमि उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये। उन्होंने हरिद्वार व उधम सिंह नगर में ईएसआई हास्पिटल की स्वीकृति के लिये केन्द्रीय श्रम मंत्री से वार्ता करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमियों के व्यापक हित में ग्रिवास कमीटी भी गठित की गई है। यहां भी वे अपनी समस्याये रख सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1925 रूपये प्रति क्विंटल करने की स्वीकृति दी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में रबी-खरीद सत्र 2020-21 की समीक्षा की। उन्होंने गेहूँ क्रय का समर्थन मूल्य 1925 रूपये प्रति क्विंटल किये जाने की स्वीकृति प्रदान करते हुए कहा कि किसानों को अधिकतम मूल्य एवं बेहतर सुविधायें उपलब्ध हो, यह हमारा प्रयास होना चाहिए। गत वर्ष प्रदेश में गेहूँ का समर्थन मूल्य 20 रूपए बोनस के साथ कुल 1860 रूपये प्रति क्विंटल था जिसमें इस वर्ष 65 रूपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि किसानों को उनकी उपज का समय पर भुगतान हो इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। गेहूं किसानों को समय पर भुगतान हेतु उन्होंने 150 करोड़ की धनराशि खाद्य विभाग को दिये जाने की भी स्वीकृति दी।
मुख्यमंत्री ने समय पर गेहूं क्रय केन्द्रों की स्थापना, सीमान्त क्षेत्रों के साथ ही कुम्भ के दृष्टिगत हरिद्वार में भण्डारण क्षमता बढ़ाये जाने की व्यवस्था किये जाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान सभी सम्बन्धित विभागों से इस सम्बन्ध में प्रभावी कार्य योजना बनाकर आपसी समन्वय से कार्य योजना बनाने को कहा। उन्होंने किसानों को समय पर भुगतान के साथ ही क्रय केन्द्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित करने के भी सम्बन्धित विभागों को निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने ऑर्गेनिक गेहूँ के उत्पादन एवं इस क्षेत्र में कार्य कर रहे किसानों को भी आवश्यक सहयोग दिये जाने की बात कही। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने खाद्य विभाग, सहकारिता एवं नैफेड के माध्यम से कुल 174 क्रय केन्द्रों तथा आवश्यकतानुसार नये बोरों के क्रय किये जाने पर सहमति प्रदान की।
सचिव खाद्य सुशील कुमार ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश में वर्ष 2020-21 में 3,27,000 हेक्टेयर में गेहूँ की बुआई तथा 9,60,000 मी.टन गेहूँ के उत्पादन का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि वर्ड बैंक के साथ हुए समझौते के तहत पांच-पांच सौ मी.टन क्षमता के दो टेम्पररी गोदाम धारचूला एवं हरिद्वार में स्थापित किये जाने के साथ ही ऊधम सिंह नगर व ऋषिकेश में 50 हजार मी.टन क्षमता के दो नये भण्डारण गृह बनाये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि रबी विपणन सत्र 2020-21 में 2.00 लाख मी.टन गेहूँ के संग्रहण हेतु लगभग 2.00 लाख मी.टन भण्डारण क्षमता की आवश्यकता होगी। वर्तमान में विभाग के पास विभागीय/राज्य भण्डारण निगम/केन्द्रीय भण्डारण निगम से किराये पर ली गयी कुल 191707.300 मी.टन अतिरिक्त भण्डारण क्षमता उपलब्ध है।
बैठक में सचिव आर. मीनाक्षी सुदरम, आर.एफ.सी कुमाऊ ललित मोहन श्याल, आर.एफ.सी गढ़वाल चन्द्र सिंह, अपर जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर जगदीश चंद काण्डपाल, निदेशक कृषि गौरी शंकर, एम.डी यू.सी.एफ इरा उप्रेती, प्रबन्धक एफ.सी.आई बी.बी. सिंह सहित अन्य सम्बन्धित विभागों एवं संस्थानों के अधिकारी उपस्थित थे।

अनाथ बच्चों को 5 प्रतिशत आरक्षण देगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के वैष्णो माता मंदिर, पोस्ट ऑफिस चैक नत्थनपुर में रूपये 96.33 लाख की लागत से नलकूप निर्माण कार्य, रूपये 96.01 लाख लागत से ग्राम पंचायत नत्थनपुर में नलकूप निर्माण कार्य का शिलान्यास, अम्बेडकर बस्ती नत्थनपुर में रूपये 97.11 लाख की लागत से नलकूप निर्माण कार्य का लोकार्पण एवं मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा नत्थनपुर में सामुदायिक भवन एवं मिलन केन्द्र निर्माण कार्य का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया।
अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि क्षेत्र से लगे सैयद नाले के शेष बचे कार्यों को शीघ्र ही पूर्ण किया जाएगा, जिसमें लगभग 4.5 करोड़ रूपये की लागत आएगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की पानी की समस्या को दूर करने के लिए इन निर्माण कार्यों को ससमय पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देहरादून के आसपास के क्षेत्र की पानी की समस्या को दूर करने के लिए सूर्यधार झील का कार्य किया जा रहा है। इससे क्षेत्र के 29 गांवों को गुरूत्व आधारित पीने का पानी उपलब्ध होगा। इसके साथ ही, सौंग बांध हेतु भूमि की व्यवस्था हो गयी है। प्रभावितों के विस्थापन के तुरन्त बाद इसके निर्माण का कार्य प्रारम्भ कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बांध के निर्माण का कार्य 350 दिनों में पूर्ण किया जाएगा।

सैनिकों के लिए उनका आई कार्ड ही प्रवेश पत्रः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक देश का गौरव हैं। राज्य सरकार सैनिकों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री आवास एवं सचिवालय में सैनिकों के प्रवेश के लिए उनके आई कार्ड को मान्यता दे दी गयी है। अब कोई भी सैनिक अपना आई कार्ड दिखा कर सचिवालय में प्रवेश कर सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा परम विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली धनराशि को 15 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रूपये किया गया है। इसी प्रकार अति विशिष्ट सेवा मेडल की धनराशि को भी 7 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार किया गया है। सेना मेडल प्राप्त सैनिकों को 1 लाख रूपये दिए जाएंगे। इसी प्रकार विशिष्ट सेवा मेडल प्राप्त सैनिक को दी जाने वाली धनराशि को 3 हजार से बढ़ाकर 75 हजार किया गया है। उन्होंने कहा कि अनाथ बच्चों 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें कौशल विकास कार्यक्रमों से भी जोड़ा जाएगा।

अनाथ बच्चों को भी 5 प्रतिशत आरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में अनाथ बच्चां के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की है। इससे राजकीय अनाथालयों में रह रहे अनाथ बच्चों को रोजगार प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। इस वर्ष महिलाओं के लिए 5100 किओस्क की व्यवस्था की जाएगी, ताकि महिलाएं अपने पैरों में खड़ी हो सकें। महिलाओं को मजबूती प्रदान करने के लिए एकल महिलाओं को बिना ब्याज के 1 लाख रूपये एवं महिला समूहों को बिना ब्याज के 5 लाख रूपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

कलेक्ट्रेट होंगे ऑनलाइन
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कलेक्ट्रेट को ऑनलाइन किया जायेगा जिससे आम जनता को पेपर लैस सुविधा प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सुविधा के माध्यम से आम जनमानस की समस्याओं का निस्तारण करने में आसानी होगी तथा साथ ही लोगों की समस्याओं को ट्रेस कर यथा समय निराकरण करने में भी मदद मिल सकेगी।

फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षाः कोचिंग सेंटर का संचालक गिरफ्तार

फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा में ब्लूटूथ डिवाइस से नकल कराने का झांसा देकर युवकों से ठगी करने वाले गिरोह के सरगना कोचिंग सेंटर संचालक मुकेश सैनी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के पास से एक ब्लूटूथ, ईयर फोन, मोबाइल और अन्य दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।
पुलिस ब्लूटूथ की बारीकी से जांच कर रही है। साथ ही फरार चल रहे गिरोह के सात आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस ने सरगना को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।
एसएसपी ने बताया कि गिरोह का सरगना युवाओं को परीक्षा में नकल कराने के लिए ईयर फोन और ईयर पिक डिवाइस का प्रयोग कराता था। ईयर पिक से परीक्षार्थी फोटो खींचकर आरोपी को भेजते थे। इसके बाद उधर से ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से पेपर साल्व करवाया जाता था। ब्लूटूथ के माध्यम से ये लोग मात्र दो घंटे में ही पूरा पेपर सॉल्व करवा देते थे। उन्होंने बताया कि मुकेश के पास जो ब्लूटूथ डिवाइस मिला है, उसकी बारीकी से जांच की जा रही है। उम्मीद है कि ब्लूटूथ से कई अन्य जानकारियां मिलेंगी, जिसके आधार पर आगे की जांच की जाएगी।
एसएसपी डी सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस ने प्रेसवार्ता कर बताया कि देहरादून एसटीएफ और हरिद्वार पुलिस को शिकायत मिल रही थी कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और प्राविधिक शिक्षा परिषद में पेपर लीक कराने के साथ ही ब्लूटूथ के माध्यम से नकल कराई जा रही है। 16 फरवरी को फॉरेस्ट गार्ड भर्ती के लिए लिखित परीक्षा थी। मंगलौर क्षेत्र स्थित कुआंहेड़ी निवासी आलोक हर्ष पुत्र शिवलोक हर्ष ने पुलिस से शिकायत कर बताया था कि वह गुरुकुल नारसन स्थित ओजस्व कॅरियर इंस्टीट्यूट से परीक्षा की तैयारी कर रहा था। कोचिंग सेंटर के संचालक मुकेश सैनी ने बताया कि था कि वह चार लाख रुपये में परीक्षा का पेपर उपलब्ध करा सकता है। साथ ही पास करवाकर नौकरी भी लगवा देगा।
इसी बीच मुकेश सैनी के दोस्त कपिल से उसकी मुलाकात हुई। कपिल ने भी बताया कि मुकेश ने उससे भी चार लाख रुपये मांगें हैं और वह रुपये दे रहा है। झांसे में आकर उसने मुकेश को एक लाख रुपये दे दिए थे। मुकेश ने बताया था कि परीक्षा से पहले उसे कॉलेज के बाहर ही पेपर उपलब्ध करा दिया जाएगा।
ऐसे संज्ञान में आया मामला
बताया कि कपिल को उसने एक ब्लूटूथ डिवाइस दी है, जो वह उसे उपलब्ध करा देगा और ब्लूटूथ के जरिये पेपर साल्व करवा देगा। परीक्षा वाले दिन आलोक ज्वालापुर स्थित परीक्षा केंद्र के बाहर खड़ा था, लेकिन उसे पेपर और ब्लूटूथ उपलब्ध नहीं करवाया गया था। इस चक्कर में उसकी परीक्षा भी छूट गई थी। एसएसपी ने बताया कि मंगलौर पुलिस ने शिकायत के आधार पर गिरोह के सरगना मुकेश सैनी, निवासी ग्राम हरचंदपुर हाल निवासी गुरुकुल नारसन, कुलदीप राठी, गुरु वचन, हाकम सिंह जसोल निवासी उत्तरकाशी हाल निवासी ज्ञान आईएएस कोचिंग सेंटर, पंकज, अश्वनी, निवासी नारसन कलां, सुधीर, अशोक ग्राम बूढ़पुर जट्ट के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। तभी से आरोपी फरार चल रहे थे। एसएसपी ने बताया कि शुक्रवार को कोचिंग सेंटर पर छापा मारकर गिरोह के सरगना मुकेश सैनी को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने बताया कि मामले में आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा भी बढ़ाई गई है।
एसएसपी के अनुसार, जांच में सामने आया है कि गिरोह का सरगना मुकेश सैनी प्रदेश स्तरीय और एसएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक या फिर ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से नकल कराता था। वह नकल से पास कराने के बाद नौकरी भी लगवाता था। साथ ही युवाओं को नकल का झांसा देकर एडवांस में रकम लेता था। कई ऐसे युवाओं के बारे में जानकारी मिली है, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है।
फॉरेस्ट गार्ड की कमी से जूझ रहा महकमा
वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड केे करीब 3650 पद हैं। इनमें से 1218 पद खाली हैं। इन पदों पर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से जल्द भर्ती होने की उम्मीद वन विभाग को थी। इसी के चलते वन विभाग ने कई-कई साल से फॉरेस्ट गार्ड के पद पर काम कर रहे कई वन कर्मियों को प्रमोट कर वन दरोगा बना दिया। नई भर्ती होने तक इनमें से कइयों को फॉरेस्ट गार्ड की ड्यूटी अब भी निभानी पड़ रही है। कारण यह भी है कि प्रदेश में अब फायर सीजन शुरू हो गया है। विभाग में फॉरेस्ट गार्ड की कमी है। ऐसे में प्रमोट होने वाले कर्मियों को प्रभारी के रूप में काम करना पड़ रहा है।

नगर निगम की टीम ने मांस विक्रेताओं को नोटिस जारी किये

स्वास्थ्य अधिकारियों से जांच करवाए बिना मांस बेचने वालों पर नगर निगम का डंडा चला। इस दौरान निगम की टीम ने यहां दो मांस विक्रेताओं का चालान काटकर दस हजार रुपये जुर्माना वसूला है। साथ ही छह लोगों को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस भी जारी किया गया है।
नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम इंद्रा नगर स्थित मीट मार्केट पहुंची। इस दौरान सफाई निरीक्षक सचिन रावत ने मांस विक्रेताओं के लाइसेंस और नालियों का निरीक्षण लिया। इसमें अधिकांश के लाइसेंस की वैधता समाप्त पाई गई। इस पर सफाई निरीक्षक ने शीघ्र ही ऑनलाइन लाइसेंस नवीनीकरण कराने का निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने दो मांस विक्रेताओं का चालान कर दस हजार रुपये का जुर्माना वसूला। खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने यहां बिक रहे मांस का परीक्षण किया। इसमें उन्होंने छह मीट विक्रेताओं को बिना मांस की जांच कराए बिक्री करने पर नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि स्लाटर हाउस में मांस कटना चाहिए। साथ ही वहीं डॉक्टरों को मांस का निरीक्षण करवाना चाहिए। उनकी लिखित सहमति के बाद ही मांस को बेचा जा सकता है। इस अवसर पर सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल भी उपस्थित थे।

केन्द्रीय बजट में लॉजिस्टिक्स नीति जारी करने की घोषणा

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के जरिये निवेशकों को आकर्षित करने, छोटे और मझोले कारोबारियों को उत्पीड़न से बचाने और प्रतिस्पर्धी बाजारों में उनके लिए मौका बनाए रखने की कोशिश कर रही केंद्र सरकार निवेश से लेकर निर्यात तक, नियमन, प्रमाणन और परिवहन संबंधी खर्चे घटाएगी। साथ ही इनसे संबंधित झंझट भी खत्म करेगी। हालांकि सरकार लॉजिस्टिक्स नीति बनाने की घोषणा कर इस दिशा में पहले ही आगे बढ़ चुकी है, लेकिन बजट में कुछ प्रावधान कर इसे जल्द ही अमली जामा पहनाने का भी संकेत दिया गया है। वित्त मंत्री ने सिंगल विंडो ई-लॉजिस्टिक्स मार्केटप्लेस की सुविधा के साथ लॉजिस्टिक्स नीति जारी करने की घोषणा बजट में की है।
सिंगल विंडो
सिंगल विंडो से नियमन-प्रमाणन में लगने वाला वक्त बचेगा, दुश्वारियां घटने के साथ लॉजिस्टिक्स मद में लागत कम होगी। अभी इस मद में सकल घरेलू उत्पाद का 14 फीसद से अधिक खर्च होता है, जिसे वर्ष 2022 तक 10 फीसद के नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत का लॉजिस्टिक्स सेक्टर 20 से अधिक सरकारी एजेंसियों, सरकार की 40 सहायक पार्टनर कंपनियों, 37 निर्यात संवर्धन परिषद और 500 से अधिक प्रमाणपत्रों के साथ बेहद जटिल है। अभी 16,000 करोड़ डॉलर (करीब 12 लाख करोड़ रुपये) के बाजार वाले इस सेक्टर में 200 शिपिंग कंपनियां, 36 लॉजिस्टिक्स सेवाएं, 129 इनलैंड कंटेनर डिपो, 168 कंटेनर फ्रेट स्टेशन और 50 से अधिक आइटी सिस्टम व बैंक शामिल हैं, जो 10 हजार से अधिक वस्तुओं के परिवहन में अपनी भूमिका निभाते हैं।
यह क्षेत्र 1.20 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। इतनी अहम भूमिका निभाने वाले इस सेक्टर की जटिलता यहीं खत्म नहीं होती। आयात-निर्यात के मामले में भी 81 प्राधिकरणों और 500 प्रमाणपत्रों की जरूरत पड़ती है। नियमन, प्रमाणन के बाद ही परिवहन के जाल में उलझे इस सेक्टर से संबंधित कार्यशैली पर आर्थिक सर्वेक्षण में भी सवाल उठाए गए थे। निर्यात के लिए दिल्ली से जा रहे माल के बंदरगाह तक पहुंचने में 19 दिन लगने का उदाहरण देकर सर्वे रिपोर्ट में खामी से निजात पाने का सुझाव दिया गया था।
वित्त मंत्री ने बजट पेश करने के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों के लिए लॉजिस्टिक्स के संबंध उन सभी उपायों और सुविधाओं की घोषणा की है, जिससे परिवहन, प्रमाणन और नियमन में खर्च घटेगा। बजट में ब्लॉकध्तालुका स्तर पर भंडारण गृह, गांव स्तर पर बीज भंडार गृह, रेल और हवाई सेवा से जुड़ी कोल्ड चेन की व्यवस्था की गई है। सरकार का मानना है कि इससे लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा और निर्यात में 5-8 फीसद की वृद्धि होगी। उद्यमी गुणवत्ता पूर्ण निर्माण करेंगे। इसके अलावा सरकार ने लॉजिस्टिक्स बाजार को 2022 तक 250 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। वह मान रही है तब इस क्षेत्र में करीब 2.20 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा।
इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस सेल
निवेशकों के लिए एंड-टु-एंड यानी शुरू से लेकर अंत तक हर स्तर पर सुविधाएं देने के लिए इस सेल का प्रावधान किया गया है। इसमें निवेशक को निवेश से पहले सलाह, भूमि की उपलब्धता के साथ केंद्र और राज्य से अनुमति दिलाने की सुविधा भी शामिल होगी। यह सेल भी फेसलेस होगा यानी इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस सेल का पोर्टल बनेगा और आवेदन से लेकर निस्तारण तक पूरी व्यवस्था ऑनलाइन होगी।
निर्यातकों के लिए ई-रिफंड
केंद्र, राज्य एवं स्थानीय स्तर पर निर्यातित वस्तु पर लिए गए शुल्क व कर की वापसी ई-रिफंड से होगी। निर्यातकों को विभागों के चक्कर नहीं काटने होंगे। इसके लिए सरकार योजना लांच करने जा रही है।