पिछले 16 माह में देश में 2 करोड रोजगार का हुआ सृजन

देश में लोकसभा चुनाव नजदीक हैं ऐसे में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के आंकड़े मोदी सरकार के आत्मविश्वास को और मजबूत कर सकते हैं। देश में पिछले 16 माह के दौरान (सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक) करीब दो करोड़ रोजगार सृजित हुए हैं। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के पास उपलब्ध कंपनियों के ‘वेतन भुगतान’ संबंधी आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) तथा पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा चलाई जाने वाली विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने वाले लोगों की संख्या के आधार पर रोजगार को लेकर रिपोर्ट जारी करता है। ईएसआईसी के वेतन भुगतान से जुड़े आंकड़े भी इनमें से एक हैं जिन्हें सीएसओ अपनी रिपोर्ट में जारी करता है।

ईएसआईसी अपने पास पंजीकृत लोगों को स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा सेवायें उपलब्ध कराता है। इसमें वे सभी प्रतिष्ठान शामिल होते हैं जिसमें 20 या अधिक कर्मचारी काम करते हैं तथा जिनका वेतन 21,000 रुपये तक है। ईएसआईसी की इस योजना से सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक 1.96 करोड़ नये अंशधारक इस योजना से जुड़े। वहीं ईपीएफओ के आंकड़ों से पता चलता है कि संगठित क्षेत्र में दिसंबर 2018 में 7.16 लाख रोजगार सृजित हुए जो एक साल पहले इसी महीने में 2.37 लाख के मुकाबले लगभग तीन गुना है।
इसके अनुसार सितंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक 72.38 लाख लोग ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े। ईपीएफओ के दायरे में वे सभी कंपनियां आती हैं जहां 20 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। जिन कर्मचारियों का वेतन 15,000 रुपये मासिक तक है, वे अनिवार्य रूप से योजना के दायरे में आते हैं।
इसी अवधि में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से जुड़ने वाले अंशधारकों की संख्या 9,66,381 रही। एनपीएस के अंतर्गत केंद्रीय तथा राज्य सरकार के कर्मचारी आते हैं। आम लोग भी इसे स्वेच्छा से अपना सकते हैं। इसमें कहा गया है कि मौजूदा रिपोर्ट संगठित क्षेत्र में रोजगार के बारे में जानकारी देती है और समग्र रूप से रोजगार का आकलन नहीं करती है।

अब उत्तराखंड में भी सवर्णों को मिलेगा आरक्षण

अपर मुख्य सचिव,कार्मिक एवं सतर्कता, राधा रतूड़ी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा संविधान संशोधन के उपरान्त आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसी क्रम में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा भी 5 फरवरी, 2019 को ‘‘उत्तराखण्ड लोक सेवा (आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिये आरक्षण) अध्यादेश 2019’’ लागू कर दिया गया है।
इस प्रकार केन्द्र सरकार तथा गुजरात सरकार के बाद उत्तराखण्ड देश में दूसरा राज्य है, जहां उक्त आरक्षण लागू किया गया है। प्रदेश के बेरोजगार शिक्षित युवाओं के लिये यह अच्छी खबर है, जिसके अन्तर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग भी आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह अध्यादेश समस्त विभागों, उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग तथा अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को प्रेषित किया गया है, ताकि इस पर तत्काल अधियाचन एवं विज्ञप्ति जारी की जाये तथा अधिक से अधिक बेरोजगार नौजवानों को शीघ्र रोजगार प्राप्त हो सके।
इसके तहत लोक सेवाओं और पदों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के पक्ष में उत्तराखण्ड राज्य के उन स्थायी निवासियों को आरक्षण प्राप्त होगा, जो अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण की मौजूदा योजना के अन्तर्गत सम्मिलित नहीं है।
ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के व्यक्ति जिनके परिवारों की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय रु 8 लाख से कम हो आरक्षण के इस प्रयोजन के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो में चिन्हित हैं। परिवार, की आय में सभी स्रोतों से अर्थात् वेतन, कृषि, व्यवसाय, पेशा आदि से प्राप्त आय सम्मिलित होगी। उक्त आय लाभार्थी द्वारा आवेदन के वर्ष से पूर्व वित्तीय वर्ष के लिए आय होगी।

सहकारिता सबका साथ सबका विकास के विचार को साकार करने में मददगारः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि केन्द्र सरकार ने पिरूल को मनरेगा से जोडने की सैद्धान्तिक सहमति प्रदान कर दी है। उत्तराखण्ड को यह प्रोजेक्ट के रूप में उपलब्ध होगा। राज्य में अब पिरूल बेरोजगारी दूर करने तथा आय के संसाधनों में वृद्धि में भी मददगार होगा। इससे 143 प्रकार के आइटम तैयार किये जा सकते है। सहकारिता से भी इससे संबंधित योजनाओं को जोड़ा जायेगा।

सोमवार को देर सांय मुख्यमंत्री आवास में जिला सहकारी बैंको एवं भेषज संघो के नव निर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं संचालकगणों के स्वागत समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि पिरूल हमारी आर्थिकी मजबूती का प्रमुख आधार बन सकता है। इस सम्बन्ध में उन्होंने कुछ दिन पूर्व केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री से पिरूल एकत्रीकरण कार्य को मनरेगा से जोडने का अनुरोध किया था। अब केन्द्र सरकार द्वारा इसकी सैद्धान्तिक सहमति प्रदान कर दी है। यह राज्य के लिये बेरोजगारी को दूर करने, आय के साधन बढाने में भी गेम चेन्जर साबित होगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि ग्रामीण जनजीवन में बदलाव लाने के साथ ही ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती के लिये सहकारिता एक बडा माध्यम है। स्वरोजगार के लिये विभिन्न रोजगार परक कार्यक्रमों के लिये अधिक से अधिक धनराशि उपलब्ध कराने के प्रयास किये जाये। ब्याज की कम दर होने से यह समाज में बदलाव का भी माध्यम बन सकता है। इसके लिये सहकारिता से जुडे लोगों को आम आदमी के पास जाना होगा। उसे अपने साथ जोडना होगा। योजनाओं की जानकारी आम आदमी तक पहुचानी होगी।

उन्होंने कहा कि सहकारिता से जुडे लोग कोपरेटिव द्वारा पं.दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता ऋण योजना के तहत ऋण लेने वालों की स्थितिका भी जायजा लिया जाय कि क्या उन्हें इससे कितना फायदा हुआ। इससे अधिक से अधिक लोग इसके प्रति आकर्षित होंगे तथा अधिक से अधिक लोगों को इसका फायदा मिल सकेगा। इस योजना के तहत अब तक 03 लाख लोगों को ऋण दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ट्राउट मछली पालन, अंगूरा ऊन केे कलस्टर तैयार किये जाये। यह भी आर्थिकी को मजबूती प्रदान करेगा। इस प्रकार सहकारिता सबका साथ सबका विकास के विचार को साकार करने में भी मददगार साबित हो सकेगी। हमें सहकारिता को समाज की बेहतरी के लिये आम आदमी से जोडना होगा।
इस अवसर पर सहकारिता राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सहकारिता को जनता से जोडने के लिये निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। सहकारिता को भ्रष्टाचार से मुक्त करने की दिशा में भी हमारे प्रयास जारी है।

चीनी मिल में एथनॉल प्लांट को पीपीपी मोड में शुरू करने की योजना

चीनी मिल में प्रस्तावित एथनॉल प्लांट को पीपीपी मोड पर संचालित किया जाएगा। साथ ही चीनी मिल पर किसानों के बकाया गन्ना मूल्यों का भी भुगतान जल्द किया जाएगा। यह बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पेराई सत्र के शुभारंभ के दौरान डोईवाला में कहीं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने डोईवाला शुगर मिल के पेराई सत्र 2018-19 का पूजा अर्चना और नारियल फोड़कर शुभारंभ किया। उन्होंने क्रेन कॅरियर में गन्ने की पुली डाली। मुख्यमंत्री ने गन्ना आपूर्ति के लिए सबसे पहले पहुंचे किसान अय्यूब अली और काबुल सिंह को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना और चीनी उद्योग की बेहतरी के लिए सरकार ठोस कदम उठा रही है।

डोईवाला शुगर मिल ने इस बार 32 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य निर्धारित किया है। शुगर मिल के अधिशासी निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि शुगर मिल के पास डोईवाला गन्ना समिति के पांच, देहरादून के 19, रुड़की के 18, ज्वालापुर के पांच और हिमाचल प्रदेश के पावंटा साहिब के चार गन्ना क्रय केंद्र हैं।

सरकार विभिन्न विभागों में कार्यरत अस्थाई कर्मचारियों को नियमित न करेः हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने 2013 की नियमितीकरण नियमावली के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुये निर्देश दिए है कि इस नियमावली के अनुसार विभागों, निगम, परिषद व अन्य सरकारी उपक्रमों में कार्यरत अस्थाई कर्मियों को नियमित न करें।

नैनीताल जिला मुख्यालय के समीपवर्ती सौड़ बगड़ गांव निवासी नरेंद्र सिंह बिष्टड्ढ व अन्य ने याचिका दायर कर कहा था कि वह इंजीनियरिंग से डिप्लोमा होल्डर हैं और सरकार के अधीन अवर अभियंता पद पर नियुक्ति पाने की पूर्ण अर्हता रखते हैं। याचिका में नरेंद्र ने 2013 की नियमितीकरण नियमावली को भी चुनौती दी है।

इसमें कहा गया है कि यह नियमावली सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी व एमएल केसरी से संबंधित मामले में दिए गए निर्णय के विपरीत है। सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को दरकिनार कर विभाग, निगम, परिषदों समेत अन्य सरकारी उपक्रमों में अस्थायी कार्मिकों को बिना चयन प्रक्रिया के नियमित कर रही है, जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता भगवत सिंह मेहरा ने कोर्ट को बताया कि हाल ही में उद्यान विभाग ने चाय विकास बोर्ड के अस्थायी कर्मियों को इस नियमावली के तहत नियमितीकरण की कार्रवाई आरंभ की है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद नियमितीकरण नियमावली-2013 के क्रियान्वयन पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी।

अल्प समय में एम्स ऋषिकेश ने किये नये कीर्तिमान हासिलः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एम्स में एनाटॉमिकल सोसाइटी आफ इंडिया की ओर से आयोजित 66वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्धाटन किया। इस दौरान उन्होंने एम्स द्वारा दी जा रही बेहतर स्वास्थ्य सेवा की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस अधिवेशन से यहां अध्ययनरत भावी चिकित्सकों को लाभ मिलेगा। इस दौरान नेटकॉम-66 की पुस्तिका का विमोचन भी किया।

सोमवार को आयोजित नॉटकाम के 66वें अधिवेशन में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि एम्स में आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों व विदेश से आए एनाटॉमी के विशेषज्ञ अपने अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। जो आने वाले समय में चिकित्सा सेवाओं की बेहतरी के लिए मजबूत आयाम बनेगा। जो छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, उनको इन विशेषज्ञों से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

उन्होंने आशा व्यक्त करते हुये कहा इस सम्मेलन से भावी चिकित्सकों को लाभ मिलेगा। एनॉटोमी विभाग एम्स ऋषिकेश में चिकित्सा से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिये जा रहे हैं। यह प्रसन्नता का विषय है कि इस सम्मेलन में चिकित्सा से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर 400 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि एम्स ऋषिकेश में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के साथ चिकित्सा से सम्बंधित अनेक कोर्स संचालित किये जा रहे हैं। एम्स ऋषिकेश तेजी से प्रगति कर रहा है। जिसके परिणामस्वरूप एम्स दिल्ली पर 30 प्रतिशत का दबाव कम हुआ है। वर्तमान में एम्स में मरीजों के लिए 900 बेड की उपलब्धता है। उन्होंने आशा व्यक्त कि एम्स से प्रशिक्षण लेकर यहां के छात्र देश भर में जाकर एम्स का नाम रोशन करेंगे। इस अवसर पर विधायक खजान दास, एम्स निदेशक प्रो. रविकान्त, प्रो. सुरेखा किशोर, प्रो. विजेन्द्र सिंह, प्रो. सुरजीत घटक, प्रो. जीएस लोंगिया आदि उपस्थित थे।

मनोरंजन से भरपूर रेडियो चैनल उत्तराखंड में हुआ लांच

रेड एफएम 93.5 रेडियो चैनल का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया। यह रेडियो चैनल राज्य का पहला रेडियो चैनल है। यह रेडियो चैनल राज्य में 24 घंटे लोगों को मनोरंजन प्रदान करेगा। साथ ही कई सामाजिक मुद्दों पर भी प्रकाश डालेगा।

देहरादून के कौलागढ़ रोड स्थित साउथ एशिया एफएम लिमिटेड के कार्यालय से रेड एफएम 93.5 रेडियो चैनल का बुधवार को शुभारंभ हो गया। मुख्यमंत्री ने राज्य के पहले इस निजी रेडियो चैनल का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने रेडियो चैनल की टीम को बधाई व शुभकामना देते हुए कहा कि रेड एफएम 93.5 का उत्तराखण्ड व देहरादून में पहला रेडियो स्टेशन है।

उन्होंने उम्मीद जतायी कि रेड एफएम 93.5 मनोरंजन के साथ-साथ, विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सामाजिक चेतना लाने में अहम भूमिका निभायेगा। साथ ही राज्य में जनकल्याणकारी योजनाओं व नीतियों को लोगों तक पहुंचाने में कारगार सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय स्तर पर एफएम रेडियो चैनल से उत्तराखण्ड की रमणीय, सौन्दर्य, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक विशेषताएं और अधिक उजागर होंगी। रेडियो चैनल की शुरूआत से राज्य के ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं, जो रोचक तरीके से रेडियो पर प्रस्तुतिकरण दे सकते हैं, के लिए नये अवसर मिलेंगे।

विदित हो कि इस रेडियो स्टेशनक की फ्रीक्वेंसी 48 किलोमीटर तक की रहेगी। शुरूआती दौर में देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, मंसूरी और विकासनगर के अलावा कई अन्य शहरों को इसका लाभ मिलेगा। यह रेडियों चैनल पांच आरजे की टीम वाला है। जिसे लीड आरजे काव्य करेंगे।

प्रशासन की कार्यवाही से बेरोजगार हुये राफ्टिंग व्यवसायी

कोर्ट के राफ्टिंग व अन्य जल क्रीडाओं पर रोक लगाने के बाद इससे जुड़े व्यवसायियों के सम्मुख बड़ा संकट आ खड़ा हुआ है। रोक लगने के बाद यह सभी बेरोजगार हो गये है। अब इन्हें शासन के अगले कदम का इंतजार है।

गंगा नदी राफ्टिंग प्रबंधन समिति टिहरी गढ़वाल की चुप्पी से राफ्टिंग व्यवसायियों में नाराजगी है। मुनिकीरेती कौड़ियाला इको टूरिज्म जोन में 281 राफ्टिंग कंपनियां गंगा नदी क्षेत्र में राफ्टिंग का संचालन करती आई हैं। कोर्ट के आदेश के बाद शासन के फैसले से इन सभी व्यवसायियों ने अपना सामान समेट लिया है।

शासन द्वारा राफ्टिंग के क्षेत्र में नियमों का पालन और पर्यटकों की सुविधाओं के लिए गंगा नदी राफ्टिंग पर्यटन समिति टिहरी गढ़वाल का गठन किया गया था। जिसमें जिलाधिकारी टिहरी अध्यक्ष, उप जिलाधिकारी नरेंद्रनगर उपाध्यक्ष और जिला पर्यटन अधिकारी को सचिव बनाया गया था। प्रति पर्यटक बीस रुपया शुल्क समिति वसूल रही थी। राफ्टिंग में रोक के बाद राोफ्टग व्यवसायियों को समिति से काफी उम्मीदें थी। मगर समिति की चुप्पी इनकी नाराजगी बढ़ा रही है।

उत्तराखंड फाइनेस्ट आउटडोर (यूएफओ) से जुड़े राफ्टिंग व्यवसायियों ने बैठक कर गंगा नदी राफ्टिंग प्रबंधन समिति से संबंधित मामले में न्यायालय में पैरवी करने की मांग की है। कैलाश गेट में यूएफओ के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में बेरोजगार हुए राोफ्टग व्यवसायियों ने कहा कि प्रबंधन समिति ने पर्यटकों से जो राजस्व वसूली की है वह करीब एक करोड़ रुपये है। समिति द्वारा राफ्टिंग में आए पर्यटकों की निगरानी और सुविधाओं पर जो खर्च करना था वो नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब राफ्टिंग व्यवसायी ही नहीं रहेगा तो प्रबंधन समिति का औचित्य क्या रह जाता है। बैठक में इन व्यवसायियों ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से अपनी बात रखने का निर्णय लिया। कहा कि राफ्टिंग के कारण जाम लगने की बात कही जा रही है, लेकिन दो दिन से राफ्टिंग बंद है तो अब कैसे जाम लग रहा है।

ऋषिकेश में खुला देश का पहला सैक्स सीमन केंद्र

ऋषिकेश में अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र का शिलान्यास शनिवार को हो गया। राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत देश का पहला सैक्स सोर्टेड सीमन उत्पादन प्रयोगशाला का शिलान्यास केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किया। इस प्रयोगशाला के द्वारा शर्तिया बछिया उत्पादन हो सकेगा। यानी कि बछिया पैदा करने की तकनीक विकसित हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन देशी नस्ल के गौ वंश का संरक्षण कर उनकी दुग्ध उत्पादकता को बढ़ाना है। ऋषिकेश में स्थापित की जा रही सीमन प्रयोगशाला की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय वृद्धि के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। राज्य सरकार का प्रयास है कि वर्ष 2021 तक ऐसी व्यवस्था कर ली जाए जिससे हमारे गौवंश सड़कों पर आवारा न घूमें बल्कि किसानों की आजीविका के साथी बनें। बद्री नस्ल की गायों की दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने में कुछ सफलता प्राप्त हुई है। इसे और अधिक बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर का कन्वेंशन सेंटर स्थापित किया जाएगा। उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में लाने के गम्भीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। पीएमजीएसवाई में राज्य में लक्ष्य से 200 किमी अधिक सड़क का निर्माण किया गया है। पर्वतीय गर्वमेंट ई-मार्केट व बेस्ट फिल्म फ्रेंडली राज्य के रूप में भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया है। दुर्गम क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता के लिए एयरोस्टेट बैलून का सफल परीक्षण किया गया है। उत्तराखण्ड पहला राज्य है जो इस तकनीक का उपयोग करने जा रहा है।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए पिछले चार सालों में पूर्ण समर्पण के साथ कार्य कर रही है। सरकार के प्रयासों से देश के 700 से अधिक कृषि वैज्ञानिक लैब से निकलकर जमीनी परीक्षण के लिए फील्ड लेवल तक पहुंचाए हैं। उन्होंने कहा कि पशुपालन, गाँव की आर्थिकी की रीढ़ है। हमारा देश पशुपालन में पहले पायदान में होने के बावजूद यहां उत्पादकता में कमी है। हमें वार्षिक वृद्धि दर के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने पर जोर देना है।

राज्य सरकार ने सृजित किये रोजगार के नये मौके

उत्तराखंड को पर्यटन राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण कदम उठाये है। उन्होंने सैकड़ो रोजगार देने के लिये वीर चंद्र सिंह गंढ़वाली योजना का दायरा बढ़ाकर क्याकिंग, टेरेनबाइकिंग, कैरावेन, एग्लिंग, स्टार गेसिंग, बर्ड वॉचिंग, आदि गतिविधियों को जोड़ा है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बुधवार को कोटी कॉलोनी क्षेत्र में टिहरी झील में तैरती बोट पर बैठक हुई। बैठक में 13 बिंदु रखे गए। लेकिन थराली उपचुनाव की आचार संहिता लागू होने के चलते जोशीमठ क्षेत्र से जुड़े एक बिंदु को स्थगित कर दिया गया। सरकार के प्रवक्ता व काबीना मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग) पॉलिसी में संशोधन कर पर्यटन से जुड़ी कई गतिविधियों को उद्योग का दर्जा दिया गया। अब कायाकल्प रिजॉर्ट, आयुर्वेद, योग, पंचकर्मा, बंजी जंपिंग, जॉय राइडिंग, सर्फिंग, कैंपिंग, राफ्टिंग जैसे उद्यम एमएसएमई नीति के तहत आएंगे। इस क्षेत्र में आने वाले उद्यमियों को उक्त नीति के तहत तमाम सुविधाएं मिलेंगी।

मेगा इन्वेस्टमेंट इंडस्टियल पॉलिसी के तहत आयुष और वेलनेस को लाया गया है। इससे होटल, रिजॉर्ट, क्याकिंग, सी प्लेन उद्योग, आयुर्वेद, योग जैसी 22 गतिविधियां को शामिल किया गया है। इन गतिविधियों के लिए आने वाले उद्यमों को सरकार की ओर से कई लाभ मिलेंगे।

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में 11 नई गतिविधियों के लिए उपकरणों की खरीद के लिए सहायता दी जाएगी। काबीना मंत्री कौशिक ने बताया कि चालू वर्ष को रोजगार वर्ष के रूप में घोषित किया गया है। सरकार का उद्देश्य पर्यटन और रोजगार को आपस में जोड़कर राज्य के युवाओं को रोजगार से जोड़ना है।