बेनामी संपत्तियों पर जल्द कानून लाने की तैयारी

राज्य सरकार जल्द ही बेनामी सम्पति का कानून लाएगी। बेनामी सम्पति को जब्त करने के लिए कठोर कानून बनाया जायेगा ताकि प्रदेश में कोई भी भ्रष्टाचारी पनप न सके। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को बालावाला स्थित एक स्थानीय फार्म में आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि राज्य में जल्दी ही बेनामी सम्पत्ति पर कानून लाकर सभी बेनामी सम्पत्तियों को जब्त किया जाएगा। जब्त बेनामी सम्पत्ति का उपयोग स्कूल, अस्पताल आदि जनहित कार्यों में किया जाएगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2006 में केंद्र सरकार ने बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन एक्ट बनाया था जिसके द्वारा बेनामी लेनदेन एक्ट, 1988 में संशोधन कर इसे और मजबूत बनाया गया। एक्ट के तहत बेनामी लेनदेन पर रोक है और बेनामी संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सबको मिलकर लङना होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्ट्राचार के विरूद्ध हम सब को धर्मयुद्ध की तरह लड़ना होगा। किसी भ्रष्टाचारी को बर्दाश्त नही किया जाएगा चाहे वह कोई भी हो। हमने हमेशा प्रयत्न किया है कि हमारी सरकार अपनी संस्कृति को बढ़ाने वाली, विकास के लिए काम करने वाली तथा भ्रष्ट्राचार मुक्त सरकार हो। आज इस दिशा में हम काफी मजबूती से कार्य कर रहे है, आज हम पूर्ण विश्वास से यह कह सकते हैं कि हमारी सरकार पूर्ण भ्रष्ट्राचार मुक्त है। हमने भ्रष्ट्राचार को मिटाने हेतु कई कदम उठाये हैं। भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कार्यवाही की गई है। हमने संकल्प लिया है कि हम हर क्षेत्र में भेदभाव रहित तथा भ्रष्ट्राचार मुक्त विकास करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने अनेक प्रोजेक्ट के रिवाईज एस्टीमेट बनवाकर करोङो रूपए बचाए।

’डेस्टिनेशन उत्तराखंड के केवल 10 माह में 16 हजार करोड़ का निवेश’
मुख्यमंत्री ने कहा कि डेस्टिनेशन उत्तराखंड के मात्र 10 माह में 16 हजार करोड़ रूपए का निवेश आ चुका है। इससे 40 हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। राज्य बनने के 17 साल मे 40 हजार करोड़ का निवेश हुआ।वह भी तब जबकि औद्योगिक पैकेज में टैक्स छूट सहित तमाम तरह की सहूलियत दी गई, जबकि हमारी सरकार ने पहली बार डेस्टिनेशन उत्तराखंड का आयोजन किया। नई नीतियां बनाई गई। इसका परिणाम यह हुआ कि केवल 10 माह में 16 हजार करोड़ का निवेश आ चुका है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि विगत दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए कई अहम फैसले लिये हैं जिनमें पलायन रोकने, रोजगार उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य एवं पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में विशेष प्रयास किये गये हैं। उन्होंने कहा कि डोईवाला विधान सभा क्षेत्र में हमने अल्प समय में ही सीपैट, कोस्ट गार्ड भर्ती सेण्टर, हर्रावाला में जच्चा-बच्चा, कैंसर मल्टीस्पेशिलिटी अस्पताल का शिलान्यास किया है जिसका आने वाले समय में इस क्षेत्र के साथ ही पूरे प्रदेश को लाभ मिलेगा।

सीएम बोले, पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकने को आर्थिक स्थिति मजबूत करने के हो रहे प्रयास

मुख्यमंत्री आवास स्थित सभागार में राज्य के विभिन्न विभागों, निगमों व संस्थानों के दायित्वधारियों की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास के लिये राज्य सरकार की ओर से की गई पहल को धरातल पर लाने में सभी को सहयोगी बनना होगा। सरकार की ओर से जनहित के लिये जो कार्यक्रम व लक्ष्य तय किये हैं उनका लाभ आम जनता तक पहुंचे इसके लिये हमें समेकित प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के साथ ही आर्थिक स्थिति की मजबूती के लिये कारगर प्रयास किये जा रहे हैं, इसके लिये पर्यटन के क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देकर इसे आर्थिकी का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। राज्य में सर्विस सेक्टर को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यटन, वेलनेस योगा व छोटे-छोटे कुटी उद्योगों से राज्य की आय में वृद्धि के प्रयास किये जा रहे हैं। आज हमारी प्रति व्यक्ति आय 1.90 लाख है, जो राष्ट्रीय औसत 1.30 लाख से अधिक है। पर्वतीय क्षेत्रों के पिछडेपन को दूर करने के लिये जिलों में भी प्रति व्यक्ति आये को बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि पूरे राज्य में विकास को गति मिल सके।

– छोटे किसानों को एक लाख तथा समूहों को 5 लाख तक ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वरोजगार के प्रति अधिक से अधिक लोग प्रेरित हों इसके लिए एग्रोबेस उद्योगों व आजीविका मिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

– राज्य की महिलायें विभिन्न स्वरोजगार की योजनाओं में भागीदारी निभा रही हैं। इस वर्ष महिलाओं ने केदारनाथ में 2 करोड़ का प्रसाद बिक्री किया। भोजन व्यवसाय में भी वे आगे आ रही हैं। ग्राम लाइट योजना भी महिला समूहों की आर्थिकी को मजबूत कर रही है।

– स्थानीय लोगों को विभिन्न कार्यों के ठेके के साथ ही छोटी ऊर्जा योजनायें आवंटित की गई हैं। कीड़ा जड़ी एवं नशामुक्त हेम्प की खेती के लाइसेंस दिये जा रहे हैं। इससे बंजर भूमि भी उपजाऊ होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच बद्री, पांच केदार, पांच प्रयाग यात्रा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्रों में 600 करोड़ के सोलर ऊर्जा प्रोजेक्ट स्थानीय लोगों को आवंटित किये गये हैं। पहाड़ों के अनुकूल उद्योगों की भी स्थापना की जा रही है। इससे उन क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ ही पलायन को रोकने में मदद मिलेगी।

विभागों में रिक्त चल रहे पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

प्रदेश में बेरोजगारों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभिन्न विभागों में रिक्त चल रहे पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ चयन सेवा आयोग और विभागों के बीच समन्वय बनाने और समयबद्ध भर्ती कराने के लिए भर्ती कैलेंडर बनाने के निर्देश दिए। कार्मिक विभाग नियमित रूप से इस कैलेंडर का परीक्षण करेगा। बैठक में यह बात सामने आई कि विभागों में डीपीसी न होने का एक बड़ा कारण कर्मचारियों की वार्षिक चरित्र पंजिका (एसीआर) का समय से पूरा न होना है। इस पर मुख्यमंत्री ने समय से कर्मचारियों की एसीआर न लिखने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में प्रदेश के सरकारी महकमों में रिक्त चल रहे पदों पर भर्ती प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया विवाद रहित और पारदर्शिता के साथ की जाए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कहा कि आयोग को भेजे जाने वाले अधियाचन व सेवा नियमावली स्पष्ट रखी जाएं ताकि मामले न्यायालय में न जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दस प्रतिशत आर्थिक आरक्षण को शामिल करने के लिए विभागों को जो अधियाचन वापस भेजे गए हैं, उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्यवाही की जाए। लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल (सेनि) आनंद सिंह रावत ने बताया कि आयोग स्तर पर 852 पदों पर भर्ती प्रक्रिया और 3080 पदों पर डीपीसी की प्रक्रिया चल रही है। 883 पदों पर आवश्यक संशोधन के लिए विभागों को वापस भेजा गया है।
उत्तराखंड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के अध्यक्ष एस राजू ने कहा कि आयोग ने 3177 पद अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के माध्यम से भरने के लिए चिह्नित किए हैं। इनमें 2564 पद तकनीकी अर्हता व 613 पद गैर तकनीकी अर्हता के हैं। अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने कहा कि अभी तक कुल 32 विभागों ने रिक्त पदों के संबंध में जानकारी दी है। इन विभागों में लगभग 18 हजार पद रिक्त हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने इन पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, सचिव शैलेश बगोली, नीतेश झा, डॉ. भूपिंदर कौर औलख, हरबंस सिंह चुघ, सुशील कुमार, लोक सेवा आयोग के सचिव राजेंद्र कुमार और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सचिव संतोष बडोनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

समाज में महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाना समय की जरूरतः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून की शहरी बस्ती चीड़ोवाली-कंडोली में उत्तराखण्ड महिला समेकित विकास योजना के अन्तर्गत कामन फेसिलिटी सेन्टर के अधीन संचालित द्विवर्षीय महिला कौशल प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारम्भ किया। इस प्रशिक्षण केन्द्र में 120 स्थानीय महिलाओं को जूट व सूती बैग बनाने आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाना समय की जरूरत है। यदि महिलायें मजबूत हुई तो परिवार, समाज व देश मजबूत होगा। उन्होंने महिला व पुरूषों को समाज के विकास की गाड़ी के दो पहिए बताते हुए कहा कि दोनों सशक्त होंगे तो निश्चित रूप में समाज में बदलाव आयेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती आदि के संसाधनों की सुविधा के साथ ही जीविका के साधनों का विकल्प रहता है, जिसका शहरी क्षेत्रों में अभाव रहता है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में जमीन आदि की कमी के कारण यह सुविधायें नहीं उपलब्ध हो पाती हैं। इसके लिये जरूरी है कि शहरों की गरीबों को दूर करने के लिये यहां की महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाय, कौशल विकास के जरिये हम वेस्ट को बेस्ट में बदल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिये राज्य सरकार द्वारा प्रभावी पहल की जा रही है। उद्यमिता के क्षेत्र में महिलायें 5 हजार तक ओवर ड्राफ्ट ले सकती हैं। महिला समूओं को एग्रोबेस उद्यम के लिये 5 लाख तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। हमारा उद्देश्य महिलाओं को दिये गये ऋण के सदुपयोग करने वाला बनाना है। ग्राम लाइट योजना व देव भूमि प्रसाद योजना महिलाओं को आर्थिक स्वावलम्बन की राह दिखा रही है। महिला समूह पहाड़ी भोजन भी तैयार कर रही है। पौड़ी में आयोजित कैबिनेट बैठक में उन्हीं के द्वारा तैयार किया गया भोजन परोसा गया। कम लागत में सबको खाना खिलाने का यह अच्छा प्रयास रहा। इससे एक प्रकार की उद्यमिता भी विकसित हुई है। यह सब हुनरमंद होने का ही परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष केदारनाथ में महिला समूहों ने 2 करोड़ का प्रसाद बिक्री किया। प्रदेश के 625 मन्दिरों में देवभूमि प्रसाद योजना का शुभारम्भ किया जा रहा है। मंशादेवी, बदरीनाथ, जागेश्वर, बागेश्वर से भी इसकी शुरूआत हो गयी है, इसका परिणाम है कि आज चैलाई 55 रू. किलो बिक रहा है। उन्होंने महिलाओं से उत्पादों की बेहतर पैकिंग पर ध्यान देने को कहा। इसमें लोगों का आकर्षण उत्पादों के प्रति बढ़ता है। यदि हम छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देंगे तो अपने उत्पादों की बिक्री में भी मदद मिलेगी। उन्होंने महिलाओं से पुष्प उत्पादन, धूप-अगरबत्ती बनाने की दिशा में भी आगे आने को कहा। पर्यावरण अनुकूल सामग्री के उत्पादन से उसकी मांग देश व दुनिया में बढ़ेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कामन फेसिलिटी सेन्टर व प्रशिक्षण केन्द्र का भी निरीक्षण किया तथा प्रशिक्षार्थी महिलाओं से भी संवाद किया। मुख्यमंत्री ने परियर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। क्षेत्रीय विद्यायक गणेश जोशी ने कहा कि इस प्रकार की पहल महिलाओं के आर्थिक उन्नयन में मददगार होती है, उन्होंने कहा कि महिलाओं की मजबूती समाज की मजबूती से जुड़ी है। महिलाओं को स्वालम्बी बनाने के लिये उन्हें प्रशिक्षित करने की भी उन्होंने जरूरत बतायी। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि महिला समेकित विकास योजना के तहत जानकी देवी एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा इस प्रशिक्षण केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। पालीथीन के स्थान पर जूट व सूती व फाइबर से बने विभिन्न उत्पादों व अन्य सामग्री का प्रशिक्षण एवं निर्माण यहां पर महिलाओं द्वारा किया जायेगा। इस अवसर पर निदेशक महिला एवं बाल विकास झरना कमठान, संस्था के चेयरमैन संजय जोशी, सचिव कविता चतुर्वदी और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलायें आदि उपस्थित थे।

पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना उत्तराखंड के लिए आत्महत्याः खंडूड़ी

देवप्रयाग के नजदीक और टिहरी में शराब के बॉटलिंग प्लांट को मंजूरी दिए जाने के फैसले के खिलाफ वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना उत्तराखंड के लिए आत्महत्या जैसी बात है। देवप्रयाग से करीब 36 किलोमीटर दूर शराब के बॉटलिंग प्लांट को मंजूरी दी गई और वहां बॉटलिंग शुरू भी हो गई है। इसके अलावा टिहरी में भी एक कंपनी को बॉटलिंग प्लांट की अनुमति दी गई है।
हालांकि, ये फैसले पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए थे, लेकिन धरातल पर अब उतर रहे हैं। शराब के बॉटलिंग प्लांट को लेकर इन दिनों राज्य में सियासत गर्माई हुई है। प्रदेश में सत्तासीन भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस मसले पर एक-दूसरे पर आरोप मढ़ने में लगे हैं।
वहीं, अब वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी भी शराब के बॉटलिंग प्लांट के विरोध में उतर आए हैं। दिल्ली में जारी वक्तव्य में पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी ने कहा कि शराब से पहाड़ के जनमानस का नुकसान हो और वहां के लोग जमीन जायदाद बेचकर शराब पिएं, इसके वे सख्त खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी की भी, उसे यह अधिकार कतई नहीं कि वह उत्तराखंड के मूलस्वरूप एवं देवभूमि के खिलाफ जाने का काम करे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब को सुविधा के रूप में रखा जाना चाहिए न कि आय कमाने के रूप में। उन्होंने कहा कि पैसा कमाने के लिए शराब बनाया जाना गलत है और उत्तराखंड के लिए तो यह आत्महत्या जैसी बात है।

हरदा के विरोध को समझ रही जनता
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सेवा का अधिकार आयोग के भवन के उद्घाटन के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में बॉटलिंग प्लांट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत को आड़े हाथ लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले तो ये लाइसेंस हमने नहीं दिए। देवप्रयाग को लेकर गलत ढंग से प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बॉटलिंग प्लांट देवप्रयाग से 40 किमी और राष्ट्रीय राजमार्ग से 10 किमी अंदर है। उन्होंने कहा कि इसका जो विरोध किया गया, वह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया और उनके कार्यकाल में ही ये लाइसेंस दिए गए थे। उन्होंने कहा कि हरीश रावत क्यों विरोध कर रहे हैं, जनता इसे समझ रही है।

टिहरी के नैनबाग में भी शराब की बॉटलिंग करने की तैयारी

देवप्रयाग के निकटवर्ती इलाके डडुवा भंडाली के बाद अब टिहरी जिले के ही नैनबाग में भी शराब की बॉटलिंग करने की तैयारी की जा रही है। हाइलैंड बॉटलस नाम के इस प्लांट को स्थापित करने की अनुमति मिल चुकी है। अब केवल बॉटलिंग की अनुमति मिलनी बाकी है। इसके वजूद में आने के बाद टिहरी जिले में यह दूसरा बॉटलिंग प्लांट होगा।
डडुआ भंडाली में बॉटलिंग प्लांट लगाने की अनुमति वर्ष 2016 में दी गई थी और इसी साल जून में प्लांट में बॉटलिंग का लाइसेंस जारी किया गया। यहां बॉटलिंग की गई शराब की पहली खेप बाजार में पहुंचने पर यह बात सार्वजनिक हुई। स्थानीय लोग बॉटलिंग प्लांट का विरोध कर रहे हैं। इस बीच, इसी जिले के जौनपुर ब्लाक के नैनबाग में एक और बॉटलिंग प्लांट स्थापित करने की तैयारी का पता चला है।
आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार हाइलैंड बाटलस के नाम इस प्लांट को स्थापित करने की प्रक्रिया भी वर्ष 2016 में शुरू की गई थी। अगस्त 2018 में यहां प्लांट स्थापित करने की अनुमति दे दी गई थी, लेकिन अभी बॉटलिंग का लाइसेंस नहीं दिया गया है। संपर्क करने पर जिला आबकारी अधिकारी रेखा जुयाल भट्ट ने पुष्टि की कि नैनबाग में बॉटलिंग प्लांट की स्थापना के लिए अनुमति दी गई है, लेकिन अभी बॉटलिंग की अनुमति नहीं दी गई है।

एसडीएम ने किया प्लांट का निरीक्षण
एसडीएम अनुराधा पाल ने बुधवार को डडुवा भंडाली पहुंचकर बॉटलिंग प्लांट का निरीक्षण किया। प्लांट के दस्तावेजों के का अवलोकन करने साथ ही प्लांट में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी जुटाई। प्लांट में काम कर रहे स्थानीय लोगों से सुविधाओं के बारे में जानकारी जुटाई। एसडीएम ने बताया कि प्लांट के दस्तावेज सही पाए गए हैं। यहां पर बॉटलिंग की गई शराब का एक बैच की पिछले महीने बाजार में आपूर्ति की गई।

बीयर और मिनरल वाटर प्लांट तैयार
डडुवा भंडाली में एक ही कैंपस में तीन फैक्ट्री खोलने की तैयारी है। बॉटलिंग प्लांट के अलावा यहां पर एक बीयर प्लांट और एक मिनरल वाटर प्लांट भी बनाया गया है। हालांकि, बीयर और मिनरल वाटर प्लांट अभी संचालित नहीं हो रहे हैं। बॉटलिंग प्लांट की अनुमति मिल गई है, लेकिन यहां बीयर बनाने के लिए लाइसेंस नहीं दिया गया है। बताया गया कि बॉटलिंग प्लांट संचालकों ने बीयर प्लांट और मिनरल वाटर प्लांट बनाने के लिए भी वर्ष 2016 में आवेदन कर दिया था, लेकिन अभी इनका लाइसेंस नहीं मिल पाया है।

इन्वसर्ट समिट का असर, 28686 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद

प्रदेश में आठ माह पूर्व हुए निवेश सम्मेलन का असर धरातल पर दिखने लगा है। सम्मेलन के दौरान किए गए समझौतों के बाद 98 योजनाओं पर काम होना शुरू हो गया है। इनमें तकरीबन 13261.83 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से लगभग 28686 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में बीते वर्ष अक्टूबर में दो दिवसीय निवेश सम्मेलन हुआ था। इस सम्मेलन में लगभग एक करोड़ बीस लाख करोड़ रुपये निवेश के प्रस्तावों पर हस्ताक्षर हुए। इससे सरकार खासी उत्साहित भी थी। आठ माह बाद जो तस्वीर सामने आई है उसके मुताबिक प्रदेश में अभी तक 98 प्रस्तावों पर काम शुरू हो गया है। इनमें सबसे अधिक कार्य उद्योग के क्षेत्र में हुआ है। इसमें 32 योजनाओं पर काम चल रहा है, जिसमें 3692 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद जताई गई है। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार कल्याण के क्षेत्र में 26 योजनाओं पर काम चल रहा है और इसमें 861 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। रोजगार के लिहाज से देखें तो सूचना प्रौद्योगिकी में सबसे अधिक उम्मीदें हैं। इसके तहत यहां पांच योजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें 3217 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है और इससे 11730 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। निवेश के लिहाज से सबसे ज्यादा उम्मीदें पशुपालन क्षेत्र में हैं। इसके तहत तीन योजनाओं पर काम हो रहा है, जिसके अंतर्गत 3850 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
मुख्य सचिव उद्योग मनीषा पंवार ने मंत्रिपरिषद के सामने ये आंकड़े प्रस्तुत किए। यह भी बताया गया कि निवेश सम्मेलन में हुए करार के अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के 211, सूचना प्रौद्योगिकी के दो बड़ी योजनाओं पर भी काम हो रहा है, जिनमें 2700 करोड़ का निवेश और 10832 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

बीएड के नए कॉलेजों की एनओसी पर लगी रोक

प्रदेश में बीएड डिग्रीधारक बेरोजगारों की संख्या में दिनोदिन बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के चार वर्षीय नए पाठ्यक्रमों की एनओसी पर सरकार ने रोक लगा दी है। इसके कारण यहां का कोई भी कॉलेज अब इन नए पाठ्यक्रमों की मान्यता नहीं ले पाएगा।

प्रदेश सरकार ने करीब छह साल पहले बीएड के नए कॉलेजों की एनओसी पर रोक लगाई थी। इसकी सूचना एनसीटीई को भी भेज दी थी। इसके बाद डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) के निजी या सरकारी कॉलेजों में संचालन पर भी सरकार ने रोक लगाते हुए केवल डायट में यह पाठ्यक्रम शुरू किए थे।

अब एनसीटीई के नए इंटीग्रेटिड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) के पाठ्यक्रमों की एनओसी पर भी रोक लगा दी है। इस रोक के पीछे प्रदेश में बीएड डिग्रीधारक बेरोजगार युवाओं की भारी संख्या को बताया गया है। सरकार का तर्क है कि प्रदेश में बेरोजगार बीएड डिग्रीधारकों की संख्या बढ़ने के बाद वह आंदोलन करते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था भी खराब होती है।

क्या है आईटीईपी

एनसीटीई ने हाल ही में चार वर्षीय इंटीग्रेटिड आईटीईपी लांच किए हैं। इनमें दाखिले के लिए 12वीं में कम से कम 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता रखी गई है। इनमें एक कोर्स प्राथमिक और दूसरा कोर्स माध्यमिक में शिक्षण के लिए होगा।

श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि के कुलपति डा. उदय सिंह रावत का कहना है कि एनसीटीई के इंटीग्रेटिड पाठ्यक्रमों की मान्यता के लिए शासनस्तर से एनओसी दी जाती है। शासन ने फिलहाल अग्रिम आदेशों तक इसकी एनओसी देने पर रोक लगाई हुई है। इसकी सूचना विवि को भी भेज दी गई है।

वहीं, उच्च शिक्षा सचिव अशोक कुमार ने बताया कि प्रदेश में बीएड डिग्रीधारक बेरोजगारों की बड़ी संख्या है। इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं अब काफी कम हैं। लिहाजा, इस बढ़ती छात्र संख्या पर लगाम लगाने के लिए एनओसी रोकी जानी जरूरी है।

खुशखबरीः रिक्त पदों पर 10 जुलाई तक विज्ञप्ति जारी करने के निर्देश

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा निदेशालय समेत प्रदेश के पांच सरकारी विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों व अन्य कार्मिकों के एक हजार पदों की भर्ती की जाएगी। सरकार ने सभी कुलपतियों को 10 जुलाई तक रिक्त पदों की विज्ञप्ति जारी करने के निर्देश दिए हैं।
इन नियुक्तियों में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। दून विश्वविद्यालय, श्रीदेव सुमन विवि, आवासीय विवि में बंपर नौकरियां खुलने वाली है। इन विश्वविद्यालयों में शत प्रतिशत फैकल्टी और स्टाफ नियुक्ति करने के लिए सरकार ने सभी कुलपतियों को रिक्त पदों की विज्ञप्ति 10 जुलाई तक जारी करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं उच्च शिक्षा निदेशालय में भी लेखाकार, क्लर्क समेत अन्य कार्मिकों के 186 पदों की भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से की जाएगी। नेट क्वालीफाई और पीएचडी धारकों को असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर प्राथमिकता मिलेगी।
वहीं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के पांच विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा निदेशालय में सैकड़ों पर पद खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए कुलपतियों को 10 जुलाई तक विज्ञप्ति निकालने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश सरकार इस साल को रोजगार वर्ष के रूप में मना रही है। विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों से उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को नौकरी का अवसर मिलेगा। साथ ही विश्वविद्यालयों में शत प्रतिशत फैकल्टी होगी।

कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर से युवाओं का संवरेगा भविष्य

उत्तराखड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर खोला जायेगा। यह भारत का पाँचवा कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर होगा। 28 जून को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत इस भर्ती सेंटर के लिए भूमि का शिलान्यास करेंगे। यह भर्ती सेंटर कुंआवाला (हर्रावाला) देहरादून में बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने मुलाकात कर इस सम्बन्ध में उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने के लिए भारत सरकार का अनुमति पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर खुलने से उत्तराखण्ड के युवाओं को कोस्टगार्ड में रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे। उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। कोस्टगार्ड एस.डी.आर.एफ को आपदा से राहत व बचाव के तरीकों के लिए प्रशिक्षण भी देगा। युवाओं को भी कोस्टगार्ड द्वारा आपदा से राहत व बचाव कार्य का प्रशिक्षण दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सैन्य प्रदेश है। सेना के विभिन्न अंगों मे उत्तराखण्ड के जवान है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड को पांचवे सैन्य धाम के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। यह उत्तराखण्ड का सौभाग्य है कि देश का पांचवा कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड में बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रैबार कार्यक्रम में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने का प्रस्ताव दिया था। उसी का परिणाम है कि भारत सरकार से इसे स्वीकृति भी मिल चुकी है। उन्होंने डीजी कोस्टगार्ड के इन प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार जताया।
डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने कहा कि देहरादून में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर के लिए भारत सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके लिए 17 करोड़ रूपये भूमि के लिए व 25 करोड़ रूपये भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिली है। इस भर्ती केन्द्र का पूरा खर्च भारत सरकार वहन करेगी। नोएडा, मुम्बई, चेन्नई व कोलकत्ता के बाद यह उत्तराखण्ड में 5वां कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उत्तराखण्ड को सैन्य धाम के रूप में 5वां सैन्य धाम विकसित करने की बात कही है। यह कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड के जवानों को समर्पित होगा। इस भर्ती केन्द्र का लाभ उत्तराखण्ड के साथ ही उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश व हरियाणा के युवाओं को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ साल में यह भर्ती केन्द्र बनकर तैयार हो जायेगा।