उच्च शिक्षा मंत्री की मौजूदगी में प्रादेशिक परिषद की विशेष बैठक में पारित हुये कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव

प्रदेश में स्काउट्स एंड गाइड्स का दायरा बढ़ाया जायेगा। जिसके लिये संस्कृत विद्यालयों से लेकर विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा व मदरसों में भी स्काउट्स एवं गाइड्स की इकाईयों की स्थापना की जायेगी ताकि वर्ष 2025 तक प्रदेश में स्काउट्स एंड गाइड्स तथा रोवर रेंजर्स के रूप में एक लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का पंजीकरण किया जा सके। स्काउट्स एंड गाइड्स अपने पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों के साथ-साथ राष्ट्रीय कार्यक्रमों भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभायेंगे। इसके लिये विभागीय अधिकारियों वार्षिक कार्ययोजना तैयार करेंगे।

भारत स्काउट्स एंड गाइड्स उत्तराखंड के प्रादेशिक अध्यक्ष एवं विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में आज देहरादून स्थित राज्य मुख्यालय में प्रादेशिक परिषद की विशेष बैठक आहूत की गई। जिसमें परिषद द्वारा स्काउट्स एंड गाइड्स को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किये गये। डॉ. रावत ने बताया कि प्रदेश में स्काउट्स एंड गाइड्स का दायरा बढ़ाया जायेगा, जिसके लिये विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा से लेकर संस्कृत विद्यालयों एवं मरदसों में स्काउट्स एंड गाइड्स की इकाईयां स्थापित की जायेंगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में जब उत्तराखंड अपनी स्थापना का रजत जयंती बना रहा होगा। तबतक प्रदेशभर में एक लाख से अधिक स्काउट्स एंड गाइड्स तथा रोवर रेंजर्स पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा स्काउट्स गाइड्स तथा रोवर रेंजर्स को समय-समय पर प्रदेशभर में चलाये जाने वाले नशा मुक्ति अभियान, रक्तदान एवं रक्तदाता पंजीकरण अभियान, सड़क सुरक्षा अभियान, नये मतदाता अभियान एवं साक्षरता आदि अभियानों से भी जोड़ा जायेगा ताकि सभी स्काउट्स गाइड्स अपने जीवन में पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों के साथ-साथ राष्ट्रीय दायित्वों का भी निर्वहन कर सकें।

डा. रावत ने बताया कि उत्तराखंड आपदा के दृष्टिगत एक संवेदनशील प्रदेश है जिसको देखते हुये 10 हजार स्काउट्स गाइड्स तथा रोवर्स रेंजर्स को आपदा प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण भी दिया जायेगा ताकि आपदा के दौरान इन स्वयं सेवकों से आपदाग्रस्त क्षेत्रों में सहयोग लिया जा सके। बैठक में निर्णय लिया गया कि अप्रैल 2024 में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय स्तर के 11वीं एशिया-पैसेफिक रिजनल स्काउट लीडर्स समिट के अयोजन हेतु लगने वाली बिड़ में प्रतिभाग किया जायेगा यदि इस आयोजन का मौका उत्तराखंड को मिलता है तो यह राज्य के लिये बड़ी उपलब्धि होगी। बैठक में स्काउट गाइड के प्रादेशिक भवन निर्माण, वाहन एवं अन्य ढ़ाचागत सुविधाओं का प्रस्ताव आगामी वित्तीय वर्ष हेतु शासन को भेजे जाने का भी निर्णय लिया गया। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि स्काउट्स गाइड्स की गतिविधियों के संचालन के लिये वर्षिक कार्ययोजना तैयार की जायेगी ताकि प्रदेशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में समयबद्धता व एकरूपता बनी रही।

बैठक में प्रादेशिक मुख्य आयुक्त भारत स्काउट एंड गाइड उत्तराखंड एवं निदेशक माध्यमिक शिक्षा सीमा जौनसारी, प्रादेशिक आयुक्त वंदना गर्ब्याल, रघुनाथ लाल आर्य, राज्य सचिव आर.एम. काला, मुख्य आयुक्त डी.आर.एन. भारती, उपाध्यक्ष प्रो. ए.एस. उनियाल, डॉ. अनीता चमोला, डॉ. सांई किरन तोमर सहित प्रदेश एवं जिला स्तर के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले यूनिट लीडर्स किये सम्मानित
भारत स्काउट्स एंड गाइड्स उत्तराखंड के प्रादेशिक अध्यक्ष एवं विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि जनवरी 2023 में राजस्थान में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय जम्बूरी में स्काउट्स एंड गाइड्स द्वारा सभी 16 प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया और नेशनल कमिशनर शील्ड प्राप्त की। इसी प्रकार उच्च शिक्षा के अंतर्गत महाविद्यालयों ने सामुहिक सामुदायिक कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति शील्ड प्रतियोगिता अपने नाम की। अंतराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले ओलिव अवार्ड में भी राज्य की टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर एशिया पैसिफिक क्षेत्र में देश व राज्य का नाम रोशन किया। इस अवसर पर डॉ. रावत ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्काउट्स एंड गाइड्स के विभिन्न जनपदों के यूनिट लीडर्स को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

आधुनिक आईटी लैब व छात्रावास से लैस होंगे मॉडल कॉलेज

उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिये राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत 20 राजकीय महाविद्यालयों का कायाकल्प कर उन्हें शोध आधारित मॉडल कॉलेज के रूप में विकसित किया जायेगा। इसी प्रकार 6 राजकीय महाविद्यालयों में कला व विज्ञान संकाय के लिये नये पीजी ब्लॉक बनाये जायेंगे। इसके लिये राज्य सरकार ने रूपये 159 करोड़ से अधिक की धनराशि स्वीकृत कर दी है।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत शोध आधारित मॉडल कॉलेज विकसित करने में जुटी है। इसके लिये प्रदेश के 20 राजकीय महाविद्यालयों का चयन कर उनमें आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिये रूपये 129 करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर दी है। इसी तरह राज्य के 6 राजकीय महाविद्यालयों में कला एवं विज्ञान संकाय के पृथक पीजी ब्लॉकों के निर्माण के लिये रूपये 30 करोड़ मंजूर कर कुल 159 करोड़ से अधिक की धनराशि स्वीकृत कर दी है। उन्होंने बताया कि स्वीकृत धनराशि से राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रूद्रपुर, काशीपुर, चम्पावत, बागेश्वर, पिथौरागढ़, हल्द्वानी, रानीखेत, कोटद्वार, नरेन्द्रनगर, नई टिहरी, उत्तरकाशी, थलीसैंण, गैरसैंण, लक्सर, गोपेश्वर, डाकपत्थर, रायपुर, अगस्त्यमुनि सहित कुमाऊं विश्वविद्यालय का डीबीएस परिसर तथा सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा परिसर में जरूरी संसाधन जुटाकर मॉडल कॉलेज बनाये जायेंगे। इन महाविद्यालयों में महिला एवं पुरूष छात्रावास सहित अति आधुनिक आई.टी. लैब तथा ई-लर्निंग कक्षों का निर्माण किया जायेगा।

डॉ. रावत ने बताया कि महिला व पुरूष छात्रावासों में तमाम सुविधाओं के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किये जायेंगे। इसके अलावा छात्र-छात्राओं के लिये पार्किंग, डाईनिंग हाल, किचन, दिव्यांग कक्ष एवं रैम्प तथा वार्डन ऑफिस भी बनाये जायेंगे। विभागीय मंत्री डॉ. रावत ने बताया कि प्रदेश के 6 राजकीय महाविद्यालयों राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय स्याल्दे, बेरीनाग एवं कपकोट में कला संकाय भवन तथा राजकीय महाविद्यालय टनकपुर, थत्युड एवं सोमेश्वर में विज्ञान संकाय के भवनों का निर्माण किया जायेगा। उन्होंने बताया कि मॉडल कॉलेजों एवं पीजी कॉलेजों में निर्माण कार्यों को शीघ्र शुरू करने के लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं ताकि तय समय निर्माण कार्यों को पूरा किया जा सके और छात्र-छात्राओं का इसका लाभ मिल सके।

राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा के लिये रूपये 159 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है। जिसके तहत प्रदेश के 20 मॉडल कॉलेजों में अति आधुनिक आईटी लैब एवं छात्रावास का निर्माण किया जायेगा जबकि 6 राजकीय महाविद्यालयों में कला एवं विज्ञान संकाय के लिये भवन बनाये जायेंगे। हमारा ध्येय प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता, रोजगार एवं शोधपरक शिक्षा उपलब्ध कराना है।
-डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार।

चयनित एलटी शिक्षकों को शीघ्र वितरित होंगे नियुक्ति पत्रः धन सिंह रावत

प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा के पाठ्यक्रम में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) द्वारा संचालित चन्द्रयान अभियानों को शामिल किया जायेगा। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। सभी राजकीय विद्यालयों में कार्यक्रमों का आयोजन कर शिक्षक दिवस को धूमधाम से मनाया जायेगा। इस अवसर पर राज्य से लेकर ब्लॉक स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित भी किया जायेगा। हाल ही में चयनित एलटी शिक्षकों को आगामी 6 सितम्बर को नियुक्ति पत्र सौंपकर प्रथम तैनाती दी जायेगी।

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज अपने शासकीय आवास पर विद्यालयी शिक्षा विभाग की बैठक ली। जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। मीडिया को जारी बयान में डॉ. रावत ने बताया कि चन्द्रयान-3 अभियान की सफलता ने देश एवं दुनिया में भारतीय मेधा का परचम लहराया है। बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से राज्य के विद्यालयी शिक्षा पाठ्यक्रम में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) द्वारा संचालित चन्द्रयान अभियानों को शामिल किया जायेगा। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को विज्ञान वर्ग के अंतर्गत कक्षा 6वीं से 12वीं तक के लिये चरणवद्ध पाठ्यक्रम तैयार करने को कहा गया है। आगामी 5 सितम्बर को सभी राजकीय विद्यालयों में शिक्षक दिवस को धूमधाम से मनाया जायेगा। इसी के साथ उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को राज्य से लेकर ब्लॉक स्तर पर सम्मानित किया जायेगा। इसके अलावा हाल ही में चयनित एलटी शिक्षकों को आगामी 6 सितम्बर को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों नियुक्ति पत्र सौंपे जायेंगे। जिसकी तैयारी के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि कतिपय विद्यालय ऐसे हैं जहां पर शिक्षक तैनात हैं लेकिन उनके विषय में छात्र-छात्राओं की संख्या शून्य है। ऐसे शिक्षकों को अन्यत्र विद्यालयों में जहां पर संबंधित विषय में छात्र पंजीकृत हों समायोजित किया जायेगा। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को सूची तैयार कर कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न राजकीय विद्यालयों में कार्यरत संविदा शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिये सितम्बर प्रथम सप्ताह में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर ठोस निर्णय लिया जायेगा ताकि उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान निकाला जा सके। इसके साथ ही उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आपदा से क्षतिग्रसत विद्यालयों के आपदा मद से शीघ्र मरम्मत एवं निर्माण कराने के भी निर्देश दिये।

बैठक में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा सीमा जौनसारी, निदेशक बेसिक शिक्षा आर.के. उनियाल सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

उच्च शिक्षा में नौकरी के लिए चयनित अभ्यर्थियों को सीएम ने दिए नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग के अन्तर्गत चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में उच्च शिक्षा विभाग में कनिष्ठ सहायक के पद पर 43 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। मुख्यमंत्री ने चयनित 17 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। शेष सभी अभ्यर्थियों को भी उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्ति पत्र भेजे जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी चयनित अभ्यर्थी अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने आप सभी को सेवा का अवसर प्रदान किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि बेहतर कार्यशैली से सभी राज्य के विकास में योगदान देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर कार्य करने के लिए समय प्रबंधन का विशेष ध्यान रखना होगा। टाइम टेबल के हिसाब से अपनी दिनचर्या बनानी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसके लागू होने के बाद सभी भर्ती परीक्षाएं पूर्ण पारदर्शिता के साथ सम्पन्न हुई है। इस कानून के लागू होने के बाद से राज्य में 05 लाख से अधिक लोग प्रतियोगी परिक्षाएं दे चुके हैं। योग्य अभ्यर्थियों का कई परीक्षाओं में चयन भी हो रहा है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सभी अभ्यर्थियों से पूरे मनोयोग से तैयारी करने को कहा है।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव उच्च शिक्षा शैलेश बगौली, अपर सचिव डॉ. आशीष श्रीवास्तव एवं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

उच्च शिक्षा मंत्री ने बैकलॉग खत्म कर लम्बित परीक्षाफल शीघ्र जारी करने के दिए निर्देश

उच्च शिक्षा में शैक्षिक कैलेंडर प्रभावी रूप से लागू करने के लिये सभी राजकीय विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दे दिये गये हैं। इससे उच्च शिक्षा की तमाम शैक्षिक गतिविधियां समय पर पूरी हो सकेंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन को समय पर परीक्षाओं का आयोजन कर तत्परता से परीक्षा परिणाम घोषित करने को कहा गया है। इसके अलावा बैकलॉग खत्म कर विभिन्न परीक्षाओं के लंबित परीक्षा परिणाम को भी शीघ्र जारी करने के निर्देश दिये गये हैं। भविष्य में शैक्षणिक सत्र में एकरूपता लाने के लिये विश्वविद्यालयों को एक सप्ताह के भीतर वार्षिक प्लान तैयार कर शासन को अवगत कराने को कहा गया है। साथ ही विश्वविद्यालयों में लम्बे समय से रिक्त चल रहे शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर पदों को आवश्यकतानुसार प्रतिनियुक्ति अथवा सेवा स्थानांतरण के आधार पर भरने के निर्देश शासन व विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों को दिये गये हैं।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज विधानसभा स्थित सभाकक्ष में राजकीय विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने शैक्षिक कैलेंडर को प्रभावी तरीके से लागू न कर पाने पर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। विभागीय मंत्री डॉ. रावत ने बताया कि विश्वविद्यालयों में एनईपी एवं यूजीसी की गाइडलाइन के अनुरूप शैक्षिक कैलेंडर सख्ती से लागू करने के लिये विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दे दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि शैक्षिक कैलेंडर प्रभावी रूप से लागू न होने से विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में तमाम शैक्षिक एवं अन्य गतिविधियां प्रभावित हो जाती है जिसका खामियाजा सीधे तौर पर छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ता है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षाओं का आयोजन तथा परीक्षा परिणाम समय पर जारी ने करने पर विभागीय मंत्री ने दो टूक कहा कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव एवं परीक्षा नियंत्रक को परीक्षाओं के आयोजन एवं परीक्षाफल नियत समय पर घोषित करने के लिये केन्द्रीय मूल्यांकन व्यवस्था लागू करने को कहा। साथ ही परीक्षा आयोजन एवं परीक्षा मूल्यांकन की मॉनिटिरिंग करने एवं बैकलाग को खत्म कर लंबित रिजल्ट को शीघ्र जारी करने के निर्देश दिये। डॉ. रावत ने बताया कि विश्वविद्यालयों में लम्बे समय से कई महत्पपूर्ण पद रिक्त चल रहे जिस कारण विश्वविद्यालयों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। उन्होंने शासन एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों को सीधी भर्ती होने तक रिक्त पदों को प्रतिनियुक्ति अथवा सेवा स्थानांतरण के आधार पर भरने के निर्देश दिये। इसके लिये उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक माह के भीतर कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालय अपने यहां संचालित पाठ्यक्रमों एवं छात्र संख्या को ध्यान में रखते हुये शैक्षणिक गतिविधियों को समय पर पूरा करने के लिये एक सप्ताह के भीतर वार्षिक प्लान तैयार कर शासन को भी अवगत करायें। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि विश्वविद्यालयों के अंतर्गत शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन व क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लेटलतीफी के लिये संबंधित कुलपति, कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक को जिम्मेदार माना जायेगा।

बैठक में सचिव उच्च शिक्षा शैलेश बगोली, अपर सचिव प्रशांत आर्य, कुलपति मुक्त विवि प्रो. ओ.पी.एस. नेगी, कुलपति श्रीदेव सुमन विवि प्रो. एन.के. जोशी, कुलपति कुमाऊं विवि प्रो. डी.एस. रावत, कुलपति दून विवि प्रो. सुरेखा डंगवाल, कुलपति एस.एस.जे. विवि अल्मोड़ा प्रो. जे.एस. बिष्ट, कुलपति संस्कृत विवि प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री, रूसा सलाहकार प्रो. एम.एस.एम. रावत, प्रो. के.डी. पुरोहित, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. ए.एस. उनियाल सहित विश्वविद्यालयों के कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

उच्च शिक्षण संस्थानों में 14 अगस्त तक ही होंगे प्रवेशः शैलेश बगोली
उच्च शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वर्तमान शैक्षिक सत्र के लिये उच्च शिक्षण संस्थानों में 14 अगस्त तक ही छात्र-छात्राओं से प्रवेश हेतु आवेदन लिये जायेंगे। इसे उपरांत प्रवेश हेतु कोई समय सीमा नही बढ़ाई जायेगी। उच्च शिक्षा सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि सभी एफिलिएटिंग यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों को अपने-अपने संबद्ध शिक्षण संस्थानों के प्राचार्यों एवं निदेशकों के साथ ऑनलाइन बैठक कर प्रवेश प्रक्रिया के लिये निर्धारित समय सीमा का सख्ताई से पालन कराने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में पहली बार स्नातक स्तर पर प्रवेश हेतु समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की गई। जिसके अंतर्गत अभी तक 84 हजार 513 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश हेतु अपना पंजीकरण कराया। इसके साथ ही ऑनलाइन पंजीकरण से छूटे छात्र-छात्राओं को 14 अगस्त तक ऑफलाइन पंजीकरण का मौका दिया गया ताकि प्रवेश से वंचित छात्र-छात्राएं अपने निकटतम महाविद्यालयों में सीधा अपना पंजीकरण करा सकेंगे, इससे उनका साल बर्बाद होने से बचाया जा सके।

पीएम श्री स्कूल योजना के द्वितीय चरण में अधिक से अधिक स्कूल हों शामिल

भारत सरकार द्वारा संचालित पीएम-श्री योजना के अंतर्गत द्वितीय चरण के लिये विद्यालयों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिसमें सूबे के अधिक से अधिक स्कूलों को शामिल करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों दे दिये गये हैं। इस संबंध में सभी जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों एवं खंड शिक्षा अधिकारियों को पीएम-श्री पोर्टल पर आवेदन कर विद्यालयों की सम्पूर्ण जानकारी अपलोड करने को कहा गया है साथ ही चिन्हित विद्यालयों के भौतिक निरीक्षण की रिपोर्ट निदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि भारत सरकार की महत्वकांक्षी पीएम-श्री योजना के अंतर्गत द्वितीय चरण में विद्यालयों के चयन की ऑनलाइन प्रक्रिया एक अगस्त से शुरू हो चुकी है। जिसके तहत 21 अगस्त तक विद्यालयों द्वारा चयन हेतु आवेदन किया जाना है। जिनका 31 अगस्त तक जनपद स्तर सत्यापन तथा 5 सितम्बर तक राज्य स्तर सत्यापन एवं चयन का कार्य पूरा किया जायेगा। इसके उपरांत 15 सितम्बर तक भारत सरकार द्वारा चयनित विद्यालयों की सूची जारी कर दी जायेगी। डॉ. रावत ने बताया कि इस योजना के प्रथम चरण के अंतर्गत राज्य से 232 स्कूलों का चिन्हिकरण कर भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था, जिनमें से भारत सरकार ने 142 विद्यालयों को अपनी स्वीकृत प्रदान की। उन्होंने बताया कि योजना के द्वितीय चरण में प्रदेश के अधिक से अधिक विद्यालयों को शामिल करने के लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। जिसके तहत अपने अपने जनपदों में चिन्हित विद्यालयों की सम्पूर्ण सूचनाएं विद्यालय स्तर से नियत समय में पीएम-श्री पोर्टल पर अपलोड कराना होगा। साथ ही विकासखंड एवं जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा चिन्हित विद्यालयों का भौतिक निरीक्षण कर प्रामणीकरण रिपोर्ट राज्य स्तरीय अधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिये गये हैं।

राज्य सरकार ने 10वीं और 12वीं के 94 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को आई.आर.डी.टी. सभागार, सर्वे चौक देहरादून में आयोजित 10वीं एवं 12वीं परीक्षा में उत्तीर्ण मेधावी छात्र-छात्राओं के ‘सम्मान समारोह’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से 94 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी मेधावियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें गर्व का अनुभव हो रहा है, आज वे प्रदेश के उन सर्वश्रेष्ठ बच्चों से मिल रहे हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर यह दिखाया है कि शिखर पर जाने के लिए एक स्पष्ट उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता है। शिक्षा से जीवन की सभी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। शिक्षा में भक्ति जैसी सारगर्भिता होनी चाहिए। उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों से कहा कि यह जीवन की प्रारंभिक सीढ़ी है। जीवन की प्रत्येक सीढ़ी पर आपको चुनौतियां मिलेंगी, जिन पर आपको विवेक और बुद्धि के बल पर पार पाना होगा। न तो मेहनत का कोई विकल्प होता है और न ही शॉर्ट कट कभी हमें स्थायी सफलता की ओर ले जाता है। इसलिए हमें विकल्प रहित संकल्प लेकर लगातार मेहनत करनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रश्न पत्र के माध्यम से ही जीवन में हमेशा परीक्षा नहीं आती। कई बार ऐसी चुनौतियां आती हैं, जिनका समाधान अपनी पूरी मेधा लगाकर ही पाया जा सकता है। कार्य करने का अवसर जिस भी क्षेत्र में मिले उस क्षेत्र में लीडर की भूमिका में कार्य करें, उस कार्य के प्रति अपना सर्वश्रेष्ठ दें। चुनौतियों का धैर्यपूर्वक सामना करते हुए अपने पुरुषार्थ के बल पर मंजिल प्राप्त करना ही वास्तविक सफलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी देश का सामाजिक एवं आर्थिक विकास उस देश में विद्यार्थियों को मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नए युग की नई चुनौतियों से निपटने के लिए नई शिक्षा नीति को हमारे सम्मुख रखा गया। नई शिक्षा नीति से जहां एक ओर स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा को नए आयाम प्राप्त होंगे वहीं इससे सभी वर्ग के लोगों को समानता के आधार पर शिक्षा प्राप्त करने के अवसर भी मिलेंगे। स्कूली स्तर पर कौशल विकास से युवा कार्य कुशल बनेंगे। नई शिक्षा नीति के माध्यम से बच्चों को रोजगार परक शिक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी। इससे शोध एवं अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित होगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का प्रथम राज्य है जिसने स्कूली शिक्षा में नई शिक्षा नीति को लागू किया है।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार के लिए राज्य में तेजी से प्रयास किये जा रहे हैं। देश की रैंकिंग में हमारे 5 विश्वविद्यालयों के नाम हैं। इस बार एनडीए एवं सीडीएस की परीक्षा में राज्य से सर्वाधिक बच्चे चयनित हुए। राज्य में पहली बार मेधावियों को सम्मान देने का कार्य मुख्यमंत्री द्वारा किया गया है। राज्य सरकार छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए समर्पित सरकार है। सरकार द्वारा मेधावी बच्चों के लिए चार छात्रवृत्ति योजनाएं चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि स्कूलों की प्रवक्ता व एलटी शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रधानाचार्यों को नामित किया गया है। प्रदेश में अंक सुधार परीक्षा आयोजित की जा रही है।

अमृत काल में देश को नई ऊंचाइयों पर ले जायेंगे हमारे युवा-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार की सांय मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में उत्तराखण्ड परिषदीय परीक्षा 2023 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके शिक्षित एवं सभ्य मानव संसाधन पर निर्भर करती हैं। आज के बच्चे भविष्य के नागरिक है इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आज बच्चे किस प्रकार की शिक्षा एवं संस्कार से जुड़े हैं। छात्रों को भविष्य में इस प्रदेश एवं देश का उत्तरदायित्व लेना है। आने वाले समय में प्रदेश एवं देश की दिशा एवं दशा हमारे मेधावियों द्वारा निर्धारित की जानी है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश में युवा पीढ़ी का बौद्धिक स्तर बहुत ऊंचा है तथा शैक्षिक एवं खेल कूद दोनों क्षेत्रों में नवीन प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं। हमारे प्रदेश की युवा पीढ़ी न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देश का प्रतिनिधित्व कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारे छात्र-छात्राओं की यह उपलब्धि सामान्य नहीं है तथा इसे बनाये रखना आसान भी नहीं है। छात्रों द्वारा स्वयं के लिए ऐसा बेंचमार्क बनाया गया है जो कठिन अवश्य है लेकिन असम्भव नहीं है। इस उपलब्धि के लिए छात्रों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने लिए बड़ा लक्ष्य निर्धारित करो तथा उसको प्राप्त करने के लिए छोटे-छोटे पड़ाव बनाओ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके शिक्षित एवं सभ्य मानव संसाधन पर निर्भर करती है। आज के बच्चे भविष्य के नागरिक है इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आज बच्चे किस प्रकार की शिक्षा एवं संस्कार से जुड़े है। अमृत काल के समय में प्रदेश एवं देश की दिशा एवं दशा आप जैसे होनहारों, मेधावियों द्वारा ही निर्धारित की जानी है। हमारे प्रदेश को युवा पीढ़ी न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देश का प्रतिनिधित्व कर रही है। आज हमारे प्रदेश के बच्चे प्रत्येक वर्ष सीबीएसई, आईसीएसई एवं अन्य बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षाओं में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों की सूची में तो सम्मिलित रहते ही हैं, साथ ही अखिल भारतीय स्तर की आईएएस एवं पीसीएस आदि परीक्षाओं की चयन सूची में भी शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले युवाओं में सम्मिलित रहते हैं। हमारे छात्र सुशांत ने हाईस्कूल परीक्षा में 99 प्रतिशत अंक तथा हमारी छात्रा तन्नू ने इण्टरमीडिएट में 97.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किये है। यह हमें बताता है कि आज हमारे बच्चों का बौद्धिक स्तर कितना ऊंचा हो गया है। हाईस्कूल में यदि द्वितीय स्थान की बात करें तो 12 बच्चों के 98 प्रतिशत अंक है तथा इसी प्रकार इण्टरमीडिएट स्तर पर 21 बच्चे ऐसे हैं जिनके 95 प्रतिशत या इससे अधिक अंक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सामान्य परिवार के बच्चों की प्रतिभा स्वयं के साथ समाज के लिए भी प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि हमारे महान लोगों ने साधारण परिवेश में रहकर साधारण से असाधारण की यात्रा तथा धरती से आसमान छूने का कार्य किया है
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का छात्रों से परीक्षा पर चर्चा उन्हें प्रेरणा देने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में अंक प्राप्त करने के साथ ज्ञान प्राप्त करना भी महत्वपूर्ण होता हैं। उन्होंने छात्रों से जीवन में सफलता के लिए विकल्प रहित संकल्प के साथ आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने कहा कि छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए प्रदेश में देश का सक्षम नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसके तहत अब तक 80 लोगों को जेल में पहुंचाया गया है। हाल ही में हुई 4-5 परीक्षाओं में 5-50 लाख युवाओं ने प्रतिभाग किया तथा साधारण परिवार के युवाओं ने उसमें सफलता पाई है। अब प्रतिभाओं का सम्मान हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान की परम्परा हमारी विरासत है। प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में देश ज्ञान विज्ञान के साथ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। विविधता वाले हमारे देश को कोरोना काल में सबको सुरक्षित रखने का प्रधानमंत्री के प्रयासों को आज दुनिया के देश अध्ययन कर रहे है। देश की अर्थव्यवस्था 5वें नंबर की हो गई है।
शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में पहली बार मेधावियों को सम्मान देने का कार्य मुख्यमंत्री द्वारा किया गया है। राज्य सरकार छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए समर्पित सरकार है। 70 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले कक्षा 6 से स्नातक तक के छात्रों को प्रतिमाह छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है। राज्य के 146 छात्रों ने एनडीए, सीडीएस की परीक्षा पास की है। उन्हें एक लाख का पारिश्रमिक दिया जा रहा हैं उन्होंने मेधावी छात्रों से अपने सुझाव लिखने को कहा जिसे पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्कूलों की प्रवक्ता व एलटी शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रधानाचार्यों को नामित किया गया है। प्रदेश में अंक सुधार परीक्षा आयोजित की जा रही है। इस वर्ष 78 बच्चे टॉपर आए है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के विकास में धन की कमी नही होने दी जाएगी।
महानिदेशक शिक्षा बंशीधर तिवारी ने कहा कि परीक्षा कोई भी हो उसके परिणाम हमें बेहतर मुकाम तक ले जाते है। छात्रों की सफलता का सम्मान उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने मेधावी छात्रों को उत्तराखण्ड का भावी कर्णधार बताते हुए कहा कि देश के सुनहरे भविष्य की महती जिम्मेदारी भी उन्हें निभानी हैं सकारात्मक ऊर्जा एवं प्रेरणा भी दूसरे छात्रों को उनके प्रयासों से मिलती हैं तथा समाज एवं राष्ट्र सेवा के लिए भी प्रेरित करने का कार्य करती है।
इस अवसर पर 100 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया तथा अनेक छात्रों ने अपने सुझाव भी रखे। विद्यालयी शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने आभार व्यक्त किया।

उत्तराखंडः पहली बार परीक्षाफल सुधार परीक्षा

राज्य सरकार ने 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा में अनुत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को परीक्षाफल सुधार कार्यक्रम के तहत उत्तीर्ण होने का एक मौका दिया है। यह योजना प्रदेश में पहली बार शुरू की गई है, जिसमें वर्ष 2022-23 में उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाओं में अनुत्तीर्ण छात्र-छात्राएं अपने परीक्षाफल को सुधार सकेंगे। परीक्षा का आयोजन प्रदेश के सभी विकासखंडों के 96 परीक्षा केन्द्रों पर किया जा रहा है, जिसमें हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के 23706 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे।
सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षा में परीक्षाफल सुधार के दृष्टिगत राज्य सरकार ने एक नई पहल शुरू की है।

जिसके तहत 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा में अनुत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को उत्तीर्ण होने का एक मौका दिया जा रहा है। इसके अलावा ऐसे परीक्षार्थी जो किसी विषय में कम अंक लाये हों वह भी परीक्षा में शामिल होकर लाभान्वित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि अक्सर कई छात्र-छात्राएं बोर्ड परीक्षाओं में अच्छा स्कोर तो कर देते थे लेकिन किसी एक या दो विषय में फेल हो जाते थे, जिससे उनका साल बर्बाद हो जाता था। छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुये परीक्षाफल सुधार परीक्षा में परीक्षार्थी हाईस्कूल में अधिकतम दो विषयों तथा इंटरमीडिएट में एक विषय में परीक्षा दे सकता है। परीक्षा के आयोजन के लिये प्रदेशभर के सभी विकासखंडों में एक-एक परीक्षा केन्द्र बनाये गये हैं जबकि जनपद ऊधमसिंह नगर के रूद्रपुर विकासखंड में अधिक परीक्षार्थी होने के कारण दो परीक्षा केन्द्र बनाये गये हैं। परीक्षा का आयोजन 7 अगस्त से 12 अगस्त 2023 तक किया जायेगा। सभी परीक्षाएं एकल पाली में प्रातः 10 से दोपहर 1 बजे तक संपादित की जायेंगी। उत्तर पुस्तिकाओं के संकलन के लिये प्रत्येक जनपद में एक-एक संकलन केन्द्र बनाया गया है। जबकि उत्तर पुस्तिकाओं के मुल्यांकन हेतु मंडल स्तर पर एक-एक मुल्यांकन केन्द्र बनाये गये हैं। परीक्षाफल सुधार परीक्षा में इस बार हाईस्कूल के 13587 छात्र-छात्राओं ने 8 अगल-अलग विषयों तथा इंटरमीडिएट के 10119 छात्र-छात्राओं ने 28 अलग-अलग विषयों में आवेदन किया है। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डा. रावत ने सभी छात्र-छात्राओं को परीक्षाफल सुधार परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिये अग्रिम शुभकामनाएं दी।

युवा महोत्सव में अधिक से अधिक युवाओं को प्रतिभाग कराना प्राथमिकता

मुख्य सचिव डॉ.एस.एस. संधु ने सचिवालय में राज्य में युवाओं के लिए विभिन्न क्षेत्रों में संचालित योजनाओं की जानकारी युवाओं तक पहुँचाने हेतु आयोजित किए जा रहे युवा महोत्सव-2023 की तैयारियों के सम्बन्ध में बैठक आयोजित की। कौशल विकास विभाग अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह में युवा महोत्सव आयोजित करने जा रहा है। इस महोत्सव के माध्यम से राज्य सरकार के सभी विभाग अपनी कौशल विकास और रोजगारपरक योजनाओं को युवाओं के समक्ष रखेंगे। इस महोत्सव के दौरान सभी विभाग युवाओं के लिए अपने स्टॉल लगाएंगे, युवाओं के लिए काउंसलिंग सेशन और प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेंगे। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को युवा महोत्सव गढ़वाल एवं कुमाऊँ दोनों मंडलों में आयोजित किए जाने के निर्देश दिये।
मुख्य सचिव ने राज्य के युवाओं हेतु संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक युवाओं तक पहुँचाने हेतु प्रत्येक जनपद में इसका लाइव टेलीकास्ट किए जाने के भी निर्देश दिये। इसके लिए शिक्षा विभाग की प्रदेशभर संचालित 500 वर्चुअल कक्षाओं को भी उपयोग में लाया जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं को उचित एवं पूर्ण जानकारी मिल सके इसके लिये विशेषज्ञों को भी इसमें शामिल किया जाए। उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगायी जाने वाली प्रदर्शनियों को भी अधिक से अधिक समय तक लगाए जाने के निर्देश भी दिये, ताकि अधिक से अधिक युवा लाभान्वित हो सकें। इसके साथ ही मुख्य सचिव द्वारा प्रदेश के विद्यालयों में संचालित 500 वर्चुअल कक्षाओं को विभिन्न प्रकार की काउंसलिंग, व्याख्यान और जानकारियों को छात्र छात्राओं तक पहुँचाने हेतु नियमित रूप से उपयोग में लाए जाने के भी निर्देश दिये गए।
मुख्य सचिव ने कहा कि युवाओं को आगे भी राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न लाभकारी योजनाओं की जानकारी मिलती रहे इसके लिए मोबाइल ऐप भी तैयार किया जाए। सभी विभागों द्वारा संचालित ऐसी योजनाओं की जानकारी इस ऐप में उपलब्ध हो, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को अपने विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की पूर्ण जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराए जाने के भी निर्देश दिये।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2019 में आयोजित युवा महोत्सव में क़रीब 10 हजार युवाओं ने प्रतिभाग किया। सेक्टोरियल पंडालों में सभी विभागों द्वारा अपने अपने क्षेत्र के अन्तर्गत संचालित कार्यक्रमों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा।
इस अवसर पर सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी पुरुषोत्तम, विनोद कुमार सुमन, विजय कुमार यादव, वी. षणमुगम, विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव अहमद इकबाल एवं योगेन्द्र यादव एवं संयुक्त निदेशक सूचना नितिन उपाध्याय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।